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| Details | Information |
|---|---|
| Board | Bihar Board (BSEB) |
| Class | 12th |
| Subject | Hindi |
| Stream | Arts |
| Book Name | दिगंत भाग 2 |
| Academic Year | 2025–26 |
| Format |
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Bihar Board 12th Hindi Book 2026 PDF Download (दिगंत भाग 2)
Bihar Board 12th Hindi Book 2026 PDF Download – इस पेज पर बिहार बोर्ड 12th के छात्रों के लिए “Hindi (दिगंत भाग 2)” Book दिया गया है | जिसे आप अपने फ़ोन में Free Download कर सकते हैं |
BSEB 12th Hindi Book (गद्यखंड) Section
❤️ प्रस्तावना (गद्यखंड)
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❤️ अध्याय 1: बातचीत (बालकृष्ण भट्ट)
यह निबंध वाक्शक्ति (बोलने की शक्ति) के महत्व को दर्शाता है, जिसके बिना यह सृष्टि गूँगी होती। निबंध में औपचारिक वक्तृता (स्पीच) और अनौपचारिक बातचीत के बीच अंतर स्पष्ट किया गया है, जहाँ बातचीत मन को हल्का और स्वच्छ करने का सर्वोत्तम माध्यम है।
निबंधकार, एडिसन के मत का उल्लेख करते हुए, बताते हैं कि असल बातचीत सिर्फ दो व्यक्तियों में संभव है। भट्ट जी के अनुसार, बातचीत का सबसे उत्तम तरीका है कि मनुष्य अपने में स्वयं से बात करने (आत्मसंलाप) की शक्ति पैदा करे, क्योंकि यह मन को नियंत्रित करने और परमार्थ के मार्ग पर आगे बढ़ने का मूल साधन है।
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❤️ अध्याय 2: उसने कहा था (चंद्रधर शर्मा गुलेरी)
यह कहानी चंद्रधर शर्मा गुलेरी की अमर रचना ‘उसने कहा था‘ पर आधारित है, जिसे हिंदी कहानी के विकास में ‘मील का पत्थर’ माना जाता है।
कहानी का केंद्रीय भाव शुद्ध प्रेम और आत्म-बलिदान है। कहानी अमृतसर के बाजार में लहना सिंह और एक आठ वर्षीय लड़की की बचपन की मुलाकात से शुरू होती है। पच्चीस साल बाद, प्रथम विश्वयुद्ध के मोर्चे पर, लहना सिंह की भेंट सूबेदार हजारा सिंह और उनके बेटे बोधा सिंह से होती है। लहना सिंह को पता चलता है कि सूबेदारनी वही लड़की है।
सूबेदारनी लहना सिंह को एकांत में बुलाकर अपने पति और बेटे की रक्षा के लिए उससे भीख माँगती है, जैसे उसने बचपन में उसकी जान बचाई थी। लहना सिंह इस वचन को निभाने के लिए युद्ध में जर्मन जासूस को मारता है, हजारा सिंह और बोधा सिंह को बचाता है, और इस दौरान खुद गंभीर रूप से घायल हो जाता है।
अंत में, लहना सिंह अपने प्राणों की बलि देकर, सूबेदारनी को यह संदेश भिजवाता है कि “मुझसे जो उन्होंने कहा था, वह मैंने कर दिया”।
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❤️ अध्याय 3: संपूर्ण क्रांति (जयप्रकाश नारायण)
इस अध्याय में जयप्रकाश नारायण (जेपी), जो ‘लोकनायक’ और प्रमुख समाजवादी विचारक, क्रांतिकारी नेता तथा स्वतंत्रता सेनानी थे, का संक्षिप्त परिचय दिया गया है। इसमें उनकी शिक्षा, सत्ता-केंद्रित राजनीति से लोक-केंद्रित राजनीति की ओर बदलाव, और भूदान तथा छात्र आंदोलनों में उनकी भूमिका का वर्णन है।
अध्याय का मुख्य अंश 1974 में पटना के गांधी मैदान में दिए गए उनके ‘संपूर्ण क्रांति’ भाषण का एक भाग है। भाषण में, वह स्वतंत्रता के बाद भूख, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी से ग्रस्त शासन की आलोचना करते हैं। जेपी स्पष्ट करते हैं कि आंदोलन का लक्ष्य विधानसभा भंग करने के बजाय एक ‘संपूर्ण क्रांति’ लाना है, और वह चुनाव सुधार के लिए ‘संघर्ष समितियों’ (Struggle Committees) को उम्मीदवार चुनने और प्रतिनिधियों को जवाबदेह बनाने का अधिकार देने का सुझाव देते हैं।
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❤️ अध्याय 4: अर्धनारीश्वर (रामधारी सिंह दिनकर)
रामधारी सिंह ‘दिनकर’ का निबंध ‘अर्धनारीश्वर‘ शंकर और पार्वती के उस कल्पित रूप पर केंद्रित है, जो नर और नारी की पूर्ण समानता तथा उनके गुणों के समन्वय का प्रतीक है। लेखक का मानना है कि पुरुष ने अपनी मनमर्ज़ी से गुणों का बँटवारा करके नारी को अधीन कर दिया। यह पराधीनता कृषि के आविष्कार के साथ आरंभ हुई, जिसने स्त्री को घर तक सीमित कर दिया।
वे रवींद्रनाथ, प्रसाद और प्रेमचंद जैसे विचारकों की आलोचना करते हैं, जिनके विचारों में भी नारी का अर्धनरेश्वरी रूप प्रकट नहीं हुआ है। दिनकर का विचार है कि मानव जीवन की पूर्णता के लिए प्रत्येक नर में एक हद तक नारीत्व और प्रत्येक नारी में एक हद तक पौरुष का विकास आवश्यक है।
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❤️ अध्याय 5: रोज (सच्चिदानंद हीरानंद वात्सयायन अज्ञेय )
सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ की कहानी ‘रोज’ (मूल नाम ‘गैंग्रीन’) एक मध्यवर्गीय गृहिणी मालती के नीरस और यांत्रिक जीवन का मनोवैज्ञानिक चित्रण है। लेखक (मालती का दूर का भाई) उससे चार साल बाद मिलने आता है और उसे बचपन की चंचल मालती से एकदम बदला हुआ, उदास और शांत पाता है।
उसका जीवन डॉक्टर पति महेश्वर और बीमार बच्चे (टिटी) की देखभाल और घर के कामों तक सिमट गया है। घंटे की आवाजें (तीन, चार, ग्यारह बजे) उसके एकाकी जीवन की एकरसता और थकावट को दर्शाती हैं। कहानी उनके जीवन में घर कर गई गहरी, भयंकर छाया को व्यक्त करती है।
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❤️ अध्याय 6: एक लेख और एक पत्र (भगत सिंह)
यह अध्याय अमर शहीद भगत सिंह के जीवन, विचारों और क्रांति के प्रति उनके समर्पण को प्रस्तुत करता है। इसमें उनका संक्षिप्त परिचय दिया गया है। साथ ही, उनका लेख ‘विद्यार्थी और राजनीति‘ शामिल है, जिसमें वह छात्रों के राजनीति में भाग न लेने की राय का खंडन करते हुए उन्हें देश की आजादी और क्रांति के लिए व्यावहारिक ज्ञान हासिल करने का आह्वान करते हैं।
अंतिम भाग उनके घनिष्ठ मित्र सुखदेव के नाम पत्र का है, जहाँ वह व्यक्तिगत प्रेम, आत्महत्या (जिसे वह कायरता कहते हैं) और क्रांति के लिए कष्ट सहने की अनिवार्यता पर अपने गहन विचारों को व्यक्त करते हैं। वह बताते हैं कि उनके जैसे क्रांतिकारियों के लिए कष्ट सहना और आदर्श के लिए जीवन देना ही एक ‘सुंदर‘ मृत्यु है, जो जनता को प्रेरित करती है।
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❤️ अध्याय 7: ओ सदानीरा (जगदीशचंद्र माथुर)
यह पाठ जगदीशचंद्र माथुर द्वारा लिखित निबंध ‘ओ सदानीरा’ है, जो उनकी पुस्तक ‘बोलते क्षण’ से लिया गया है। इसमें गंडक नदी (सदानीरा) और चंपारन क्षेत्र के इतिहास, संस्कृति, और जीवन-प्रवाह का वर्णन है। लेखक ने वनों की कटाई के कारण आई बाढ़ और थारू एवं धाँगड़ जैसी विभिन्न जातियों के आगमन का उल्लेख किया है।
पाठ में नीलहे साहबों के अत्याचार और सन् 1917 में गाँधीजी के चंपारन अभियान का विस्तृत विवरण है। गाँधीजी ने ग्रामीण शिक्षा के लिए विद्यालय स्थापित किए और पुंडलीक जी जैसे कार्यकर्ताओं द्वारा लोगों को निर्भीकता की सीख दी गई। अंत में, लेखक ने गंडक घाटी योजना को दीन-हीन जनता का संकटमोचन करने वाले ‘नारायण के विराट रूपक’ के रूप में प्रस्तुत किया है।
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❤️ अध्याय 8: सिपाही की माँ (मोहन राकेश)
यह दस्तावेज़ मोहन राकेश के प्रसिद्ध एकांकी ‘सिपाही की माँ’ का पूर्ण पाठ प्रस्तुत करता है। यह एकांकी बिशनी नामक एक निम्न-मध्यवर्गीय माँ और उसकी बेटी मुन्नी की कहानी है, जो द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान बर्मा में लड़ने गए बिशनी के बेटे मानक की चिट्ठी का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं। बिशनी ने अपनी बेटी मुन्नी की शादी के लिए पैसे कमाने हेतु मानक को लड़ाई पर भेजा था।
एकांकी में मानक के घायल होकर घर लौटने का एक भयानक सपना दिखाया गया है, जहाँ एक दुश्मन सिपाही उसका पीछा कर रहा है। यह नाटक युद्ध की क्रूर वास्तविकता और माँ की गहरी चिंता को दर्शाता है।
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❤️ अध्याय 9: प्रगीत और समाज (नामवर सिंह)
यह अध्याय नामवर सिंह का आलोचनात्मक निबंध ‘प्रगीत और समाज’ है। इसमें आलोचक ने वैयक्तिक और आत्मपरक ‘प्रगीत’ (lyric) कविताओं की सामाजिक सार्थकता की पड़ताल की है।
आचार्य रामचंद्र शुक्ल प्रबंधकाव्यों को काव्य का आदर्श मानते थे, जो ‘मानव जीवन का एक पूर्ण दृश्य’ प्रस्तुत करते हैं। सिंह जी ने मुक्तिबोध, त्रिलोचन और नागार्जुन जैसे कवियों की आत्मपरक कविताओं में निहित सामाजिक अर्थवत्ता पर पुनर्विचार किया है।
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❤️ अध्याय 10: जूठन (ओमप्रकाश वाल्मीकि)
इसमें लेखक बताते हैं कि कैसे विद्यालय में हेडमास्टर कलीराम ने उन्हें तीन दिन तक झाड़ू लगाने पर मजबूर किया, जिसका उनके पिताजी ने साहस से विरोध किया. परिवार की मेहनत-मजदूरी का मूल्य केवल जूठन थी, जिसे वे त्यागियों के घरों से उठाते थे
एक अन्य हृदयविदारक घटना नौवीं कक्षा में हुई, जब उन्हें अपने चाचा के साथ तपती धूप में एक मरे हुए बैल की खाल उतारनी पड़ी. यह आत्मकथांश श्रम के शोषण और सामंती व्यवस्था की क्रूरता को बेनकाब करता है.
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❤️ अध्याय 11: हँसते हुए मेरा अकेलापन (मलयज)
यह पाठ प्रसिद्ध हिंदी कवि-आलोचक मलयज (मूल नाम: भरतजी श्रीवास्तव, 1935-1982) के जीवन और साहित्यिक योगदान का परिचय देता है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एम.ए. करने वाले मलयज ने दुर्बल स्वास्थ्य के बावजूद कविता और आलोचना में महत्वपूर्ण काम किया। उनकी प्रमुख कृतियों में ‘जख्म पर धूल‘ और ‘हँसते हुए मेरा अकेलापन‘ (डायरी) शामिल हैं। डायरी अंशों में वे लेखन को एक ‘दहकता हुआ जंगल’ बताते हैं।
उन्होंने ‘भोगे हुए यथार्थ‘ और ‘रचे हुए यथार्थ‘ के नैतिक संबंध पर विचार किया है। मलयज डायरी को ‘पलायन‘ मानते हैं और असली सुरक्षा को ‘चुनौती को झेलने‘ में पाते हैं। वे अपने जीवन में बुरी बीमारियों और अपनों के देर से लौटने के ‘डर‘ को केंद्रीय अनुभव बताते हैं।
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❤️ अध्याय 12: तिरिछ (उदय प्रकाश)
उदय प्रकाश की कहानी ‘तिरिछ‘ एक उत्तर आधुनिक त्रासदी और जादुई यथार्थवाद की कृति है। कहानी नई पीढ़ी के बेटे के दृष्टिकोण से लिखी गई है, जिसके गाँव में रहने वाले ‘बाबूजी‘ को एक विषैले जंतु ‘तिरिछ‘ (जो क्रूर, बदले हुए यथार्थ का प्रतीक है) काट लेता है। एक अदालती पेशी के लिए शहर जाने पर, धतूरे के काढ़े और जहर के प्रभाव में उनका व्यवहार असामान्य हो जाता है।
शहर के बैंक, पुलिस स्टेशन और भीड़ द्वारा उन्हें पागल समझकर दुर्व्यवहार और मार-पीट का शिकार होना पड़ता है। अंततः, उन्हें काटने के ठीक चौबीस घंटे बाद, अत्यधिक सदमे और रक्तस्राव के कारण उनकी मृत्यु हो जाती है। यह भयावह यथार्थ बेटे के सपने में भी ‘तिरिछ‘ के रूप में प्रकट होता है।
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❤️ अध्याय 13: शिक्षा (जे० कृष्णमूर्ति)
जे० कृष्णमूर्ति के अनुसार, शिक्षा का अर्थ केवल परीक्षाएँ उत्तीर्ण करना या जीविका कमाना नहीं है। जीवन असीम, अद्भुत और गूढ़ है, और शिक्षा का कार्य हमें जीवन की संपूर्ण प्रक्रिया को समझने में मदद करना है। सच्ची शिक्षा का लक्ष्य पेशेवर दक्षता नहीं, बल्कि मनुष्य का संपूर्ण उन्नयन और आत्म-प्रज्ञानिर्भरता है।
शिक्षा को उस मेधा का उद्घाटन करना चाहिए जो भय और सिद्धांतों की अनुपस्थिति में स्वतंत्रता के साथ सत्य की खोज कर सके। जहाँ भय होता है, वहाँ मेधा नहीं हो सकती। शिक्षा का कार्य इस आंतरिक और बाह्य भय का उच्छेदन कर, एक स्वतंत्रतापूर्ण वातावरण बनाना है। यह हमें वर्तमान ‘सड़े हुए समाज’ के अनुकूल बनाने के बजाय, एक नूतन विश्व के निर्माण के लिए पूर्ण स्वतंत्रता देती है। नूतन समाज के लिए मानसिक और आध्यात्मिक क्रांति आवश्यक है।
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BSEB 12th Hindi Book (काव्यखंड) Section
❤️ प्रस्तावना (काव्यखंड)
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❤️ अध्याय 1: कड़बक (मलिक मुहम्मद जायसी)
यह अध्याय मलिक मुहम्मद जायसी के जीवन परिचय, व्यक्तित्व और कृतियों पर केंद्रित है। जायसी ‘प्रेम की पीर’ के कवि हैं, जिन्हें चेचक के कारण बाईं आँख और कान से वंचित होना पड़ा था। उनकी प्रमुख कृति ‘पद्मावत’ है, जो चित्तौड़ के राजा रतनसेन और सिंहल द्वीप की राजकुमारी पद्मावती की प्रेम कहानी है। अध्याय में ‘पद्मावत’ से संकलित दो ‘कड़बक’ दिए गए हैं।
पहले कड़बक में कवि अपनी रूपहीनता को दृष्टांतों द्वारा महिमामंडित करते हुए गुणों पर बल देते हैं। दूसरे कड़बक में, वे अपने काव्य को रक्त की लेई से जोड़कर रचित बताते हैं और विश्वास व्यक्त करते हैं कि राजा और रानी के न रहने पर भी उनकी कहानी यश के रूप में अमर रहेगी, जैसे फूल के झड़ जाने पर उसकी खुशबू रह जाती है।
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❤️ अध्याय 2: पद (सूरदास)
यह अध्याय मध्यकालीन सगुण भक्तिधारा की कृष्णभक्ति शाखा के अन्यतम कवि सूरदास पर केंद्रित है। वे वल्लभाचार्य के पुष्टिमार्ग के ‘अष्टछाप’ कवियों में श्रेष्ठ माने जाते हैं। ब्रजभाषा के महान कवि सूरदास की प्रमुख कृति ‘सूरसागर’ है।
उनके काव्य के तीन प्रधान विषय हैं: विनय-भक्ति, वात्सल्य, और प्रेम-श्रृंगार। वात्सल्य वर्णन में वे विश्व में अद्वितीय कवि हैं। प्रस्तुत दोनों पद ‘सूरसागर’ से संकलित हैं और वात्सल्य भाव को दर्शाते हैं।
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❤️ अध्याय 3: पद (तुलसीदास)
यह पाठ हिंदी के महान कवि गोस्वामी तुलसीदास के जीवन, व्यक्तित्व, और प्रमुख कृतियों का परिचय देता है, जिनमें ‘रामचरितमानस‘ और ‘विनय पत्रिका‘ शामिल हैं। इस अध्याय का मुख्य भाग ‘विनय पत्रिका‘ से लिए गए दो पद हैं, जिनमें कवि दीनता और दरिद्रता का भाव व्यक्त करते हैं।
पहले पद में, वे सीता माता (अंब) से उनकी बिगड़ी बनाने के लिए राम से सिफ़ारिश करने की प्रार्थना करते हैं। दूसरे पद में, वे कलियुग के दारुण दुख और अपनी “कोढ़ में खाज” जैसी स्थिति से मुक्ति पाने के लिए, राम से भक्ति रूपी सुधा (अमृत) का भोजन खिलाने की याचना करते हैं। इन पदों के बाद उनसे संबंधित अभ्यास प्रश्न दिए गए हैं।
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❤️ अध्याय 4: छप्पय (नाभादास)
यह पाठ भक्त कवि नाभादास और उनकी प्रसिद्ध कृति ‘भक्तमाल‘ के विषय में है। नाभादास का जन्म अनुमानित 1570 में हुआ था और वे स्वामी अग्रदास के शिष्य तथा राम के सगुणोपासक भक्त कवि थे। उनकी मुख्य कृतियाँ ‘भक्तमाल’ (1585-1596) और ‘अष्टयाम’ हैं।
‘भक्तमाल’ छप्पय छंद में रचित है, जिसमें 200 भक्तों के चरित्र 316 छप्पयों में वर्णित हैं। यह रचना धर्म, संप्रदाय या जाति का भेद किए बिना केवल वैष्णवता पर केंद्रित है और मध्ययुगीन वैष्णव आंदोलन को समझने के लिए सबसे प्रामाणिक सामग्री प्रस्तुत करती है। पाठ में कबीर और सूरदास पर लिखे गए छप्पय भी संकलित हैं, जिनमें कबीर की निष्पक्ष वाणी और सूरदास के काव्य की अद्भुतता की प्रशंसा की गई है।
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❤️ अध्याय 5: कवित्त (भूषण)
यह अध्याय रीतिकाल के कवि भूषण पर केंद्रित है, जो श्रृंगार की प्रधानता वाले युग में वीर रस के प्रमुख कवि के रूप में प्रतिष्ठित हुए। उन्होंने जातीय स्वाभिमान और शौर्य को अपनी कविता का आधार बनाया। उनकी मुख्य कृतियाँ शिवराज भूषण, शिवा बावनी, और छत्रसाल दशक हैं।
अध्याय में छत्रपति शिवाजी और महाराज छत्रसाल की वीरता का ओजस्वी बखान करने वाले दो कवित्त (छंद) दिए गए हैं जिसमें शिवाजी की तुलना शक्तिशाली देवताओं और नायकों से की गई है और छत्रसाल की तलवार की भयंकर शक्ति का वर्णन है।
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❤️ अध्याय 6: तुमुल कोलाहल कलह में (जयशंकर प्रसाद)
यह पाठ्यांश छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद की कालजयी कृति ‘कामायनी’ से संकलित है। इस अंश का शीर्षक ‘तुमुल कोलाहल कलह में’ है, जिसमें महाकाव्य की नायिका श्रद्धा अपना आत्मगान प्रस्तुत करती हैं। श्रद्धा को विश्वासपूर्ण आस्तिक बुद्धि का प्रतीक बताया गया है, और यह गीत नारीमात्र का परिचय तथा महिमागान करता है।
वह स्वयं को भीषण अशांति के बीच ‘हृदय की बात’, दुःख के अंधकार में ‘ऊषा सी ज्योति रेखा’, प्यासी घाटियों के लिए ‘सरस बरसात’, और झुलसते संसार के लिए ‘कुसुम ऋतु रात’ के रूप में व्यक्त करती हैं। वह निराशा के आँसू भरे सरोवर में ‘सजल जलजात’ (कमल) के समान है, जो मनुष्य को जीवन में शांति, आशा और प्रेम प्रदान करती है।
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❤️ अध्याय 7: पुत्र वियोग (सुभद्रा कुमारी चौहान)
कविता ‘पुत्र वियोग’ सुभद्रा कुमारी चौहान द्वारा अपने पुत्र के असामयिक निधन के बाद लिखी गई एक मार्मिक शोकगीति है। कवयित्री-माँ अपने खिलौने (पुत्र) के छिन जाने पर स्वयं को असहाय और विवश पाती है। वह अपने बच्चे की हर पल की देखभाल को याद करती है, जैसे कि उसे शीत से बचाने के लिए गोद से न उतारना और उसके लिए लोरियाँ गाना।
पुत्र के लिए अपनापन भूलकर पत्थर के देवों की पूजा करने के बावजूद, वह उसे खो देती है, जिससे उसका जीवन सूना और नीरस लगता है। माँ का मन रोता ही रहता है, और वह कहती है कि भाई-बहन या पिता भले ही भूल जाएं, पर रात-दिन की साथिन माँ के लिए अपना मन समझाना बहुत कठिन है।
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❤️ अध्याय 8: उषा (शमशेर बहादुर सिंह)
यह फ़ाइल कवि शमशेर बहादुर सिंह की प्रसिद्ध कविता ‘ऊषा’ पर केंद्रित है। कविता में ऊषा (भोर) का गतिशील चित्रण बिंबों के माध्यम से एक प्रभाववादी चित्रकार की तरह प्रस्तुत किया गया है, जिसमें ऊषा का जादू उसके साथ-साथ बढ़ती कविदृष्टि और सजग ऐंद्रियबोध में जज्ब होता जाता है।
इस चित्रण में ‘बहुत नीला शंख जैसे’ नभ, ‘राख से लीपा हुआ चौका’, ‘लाल केसर से धुल गई’ काली सिल, और ‘नील जल में हिलती गौर झिलमिल देह’ जैसे बिंबों का प्रयोग किया गया है। कविता का समापन इस जादू के टूटने और सूर्योदय होने के साथ होता है।
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❤️ अध्याय 9: जन-जन का चेहरा एक (गजानन माधव मुक्तिबोध)
यह दस्तावेज़ मुख्य रूप से गजानन माधव मुक्तिबोध की प्रसिद्ध कविता ‘जन-जन का चेहरा एक’ पर केंद्रित है। कविता में कवि एशिया, यूरोप और अमरीका सहित दुनिया भर के संघर्षशील लोगों की मूलभूत एकता को दर्शाते हैं। कवि का मानना है कि कष्ट, दुख और संताप की अनुभूति तथा बेहतर भविष्य के लिए क्रांति और विजय का संकल्प हर देश, प्रांत और पुर के मनुष्यों में समान है।
कविता जनता के साझा लक्ष्य, संघर्ष, और न्याय, शांति, बंधुत्व की दिशा में प्रयास को चित्रित करती है, जिसमें शोषक शत्रु और लोगों की आत्मा एक समान होती है। यह रचना शोषक वर्ग से लड़ने वाले जन-जन के संकल्प में प्रेरणा का संचार करती है।
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❤️ अध्याय 10: अधिनायक (रघुवीर सहाय)
रघुवीर सहाय के संग्रह ‘आत्महत्या के विरुद्ध’ से ली गई कविता ‘अधिनायक’ आज़ादी के बाद के सत्ताधारी वर्ग पर एक रोषपूर्ण व्यंग्यात्मक कटाक्ष है। यह लोकतांत्रिक व्यवस्था में भी राष्ट्रगान के ‘अधिनायक’ शब्द का प्रयोग कर राजसी ठाठ-बाट के साथ अपना गुणगान करवाने वाले वर्ग को दर्शाती है।
कविता में ‘हरचरना’ नामक बदहाल, गरीब स्कूली लड़का आम आदमी का प्रतिनिधित्व करता है। ‘हरचरना’ फटा सुथन्ना पहने बेमन से राष्ट्रगान दुहराता है, जो इस बात को उजागर करता है कि इतने वर्षों बाद भी आम आदमी की आर्थिक-सामाजिक हालत में कोई बदलाव नहीं आया है। कवि का उद्देश्य निहितार्थ परपीड़न का सुख नहीं बल्कि सच्ची रचनात्मकता और अर्थपूर्ण नई सामाजिकता है।
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❤️ अध्याय 11: प्यारे नन्हें बेटे को (विनोद कुमार शुक्ल)
यह पाठ विनोद कुमार शुक्ल की कविता ‘प्यारे नन्हें बेटे को’ प्रस्तुत करता है। कविता में नायक (जो भिलाई, छत्तीसगढ़ का रहनेवाला है) अपनी नन्हीं बेटी से पूछते हैं कि ‘बतलाओ आसपास कहाँ-कहाँ लोहा है’। इस पर बेटी, पिता और माँ मिलकर घर और आसपास मौजूद लोहे की वस्तुओं (जैसे चिमटा, साइकिल, कुदाली, बाल्टी) को पहचानते हैं।
कविता के अंत में, यह लोहा एक दुर्भेद्य प्रतीकार्थ ग्रहण करता है, जहाँ हर मेहनतकश आदमी और दबी-सतायी बोझ उठाने वाली औरत भी लोहा है, जो हमारी जिंदगी और संबंधों का आधार है।
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❤️ अध्याय 12: हार-जीत (अशोक वाजपेयी)
यह पाठ्य सामग्री समसामयिक हिंदी के प्रमुख कवि, आलोचक और संस्कृतिकर्मी अशोक वाजपेयी के जीवन परिचय और उनकी कृतियों पर केंद्रित है। इसमें उनके कविता संग्रह ‘कहीं नहीं वहीं‘ से ली गई गद्य कविता ‘हार-जीत’ शामिल है। कविता विजय का उत्सव मना रहे शहर के नागरिकों के भ्रम को उजागर करती है, जिन्हें यह भी पता नहीं है कि युद्ध किस विषय पर था या शत्रु कौन था।
नागरिकों को सिर्फ इतना पता है कि उनकी विजय हुई है। इस माहौल में, एक बूढ़ा मशकवाला कहता है कि जीत नहीं, हार लौट रही है, जिस पर कोई ध्यान नहीं देता है। यह कविता शासक वर्ग और आम आदमी की वास्तविकता के बीच के अंतर को दर्शाते हुए अनेक प्रश्न उठाती है।
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❤️ अध्याय 13: गाँव का घर (ज्ञानेंद्रपति)
यह फ़ाइल कवि ज्ञानेंद्रपति के परिचय और उनकी कविता ‘गाँव का घर’ पर केंद्रित है। यह कविता गाँव के घर से जुड़ी मार्मिक स्मृतियों को व्यक्त करती है, जैसे चौखट के पास बुजुर्गों का खाँसकर आना और गेरू-लिपी भीत पर दूध-डूबे अँगूठे के छापे। कवि पारंपरिक मूल्यों और संस्थाओं, जैसे ‘पंच परमेश्वर’, और लोकगीतों (होरी-चैती, बिरहा-आल्हा) के खो जाने पर अपनी चिंता प्रकट करते हैं।
वे बताते हैं कि गाँव बिजली और टी.वी. जैसी आधुनिकता के बावजूद अँधेरे से घिरा है। गाँव का घर अब शहरीकरण के अप्रिय विस्तार (अदालत और अस्पताल) के कारण अपनी पहचान खो रहा है, जिसकी वजह से उसकी रीढ़ झुरझुराती है।
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BSEB 12th Hindi Book प्रतिपूर्ति Section
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❤️ अध्याय 1: रस्सी का टुकड़ा (गाई-डि मोपासाँ)
गोदरविल के साप्ताहिक हाट के दिन मैत्र होशेकम को सड़क पर रस्सी का एक टुकड़ा उठाते हुए उनके दुश्मन मैत्र मलांदे देख लेते हैं। कुछ देर बाद, 500 फ्रैंक वाला एक बटुआ खोने की मुनादी होती है। मलांदे, मेयर के सामने होशेकम पर बटुआ चुराने का आरोप लगाते हैं। होशेकम, रस्सी के टुकड़े की बात कहकर अपनी बेगुनाही साबित करने की लाख कोशिश करते हैं, लेकिन कोई उन पर यकीन नहीं करता।
बटुआ दूसरे आदमी द्वारा लौटा दिए जाने के बाद भी, लोगों को यकीन नहीं होता और वे होशेकम को चालबाज समझते हैं जिसने अपने साथी से बटुआ लौटवाया। इस अन्यायपूर्ण संदेह से होशेकम भीतर ही भीतर घुटने लगते हैं और अंततः मरते दम तक अपनी बेगुनाही दोहराते रहते हैं।
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❤️ अध्याय 2: क्लर्क की मौत (अंतोन चेखव)
‘क्लर्क की मौत’ कहानी एक क्लर्क, इवान द्द्मीत्रिच चेरव्यकोव की है, जो थिएटर में गलती से सिविल जनरल ब्रिजालोव पर छींक देता है। हालांकि जनरल कहते हैं कि यह कोई बड़ी बात नहीं है, पर चेरव्यकोव इस अभद्रता के लिए इतना बेचैन हो जाता है कि बार-बार माफ़ी माँगता है। उसकी निरंतर माफ़ी ने जनरल को नाराज़ कर दिया।
अगले दिन, जनरल ने गुस्से में उसे ‘निकल जाओ’ कह कर भगा दिया। इस अपमान और भय से चेरव्यकोव को गहरा आघात लगा, जिसके कारण वह घर लौटकर सोफ़े पर लेटा और मर गया।
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❤️ अध्याय 3: पेशगी (हेनरी लोपेज)
‘पेशगी’ कहानी अफ्रीकी देश कांगो के लेखक हेनरी लोपेज द्वारा रचित एक मार्मिक कथा है। यह कारमेन नामक एक गरीब नौकरानी के जीवन के संघर्ष को दर्शाती है, जो अपनी मालकिन की बेटी फ्रैंक्वा की देखभाल करती है और जिसे वह अपनी संतान मानती है। उसका अपना बेटा हेक्टर गंभीर रूप से बीमार है।
उसके लिए दवा खरीदने हेतु वह अपनी मालकिन से पेशगी (एडवांस) माँगने की कोशिश करती है, लेकिन मालकिन उसे डाँटती है और पैसे देने से मना कर देती है। माकेलेकेले तक लंबी पैदल यात्रा करके घर पहुँचने पर उसे पता चलता है कि उसका बेटा हेक्टर गुजर गया है। यह रचना अफ्रीका और विकसित दुनिया के बीच की दूरी तथा गरीबों के जीवन की पीड़ा का रचनात्मक साक्ष्य है।
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Hindi
Mujhe padh ka bahut accha laga
thanks @Shivam
Please please help me 😭🙏 for download book
hey @Satyam, आपको किस पेज पर प्रॉब्लम हो रही है? डाउनलोड लिंक काम तो कर रहा है |
margub
hey @Margub, how can I help you?
सभी चैप्टर को एक ही बुक में डाउनलोड नहीं हो पा रहा है अलग अलग चैप्टर करके डाउनलोड करना पड़ रहा है
hey @Shibu, सभी चैप्टर अलग-अलग फाइल में दिए गये हैं | इससे कोई प्रॉब्लम नही होनी चाहिए |
bhaiya pura book download nahi ho raha hai ek chapter download ho raha hai
hey @Sankjeev, सभी चैप्टर्स अलग-अलग फाइल में दिए गये हैं, इसलिए आपको सभी चैप्टर्स को अलग अलग ही डाउनलोड करना होगा |
Thank you your site is very usefull for bihar board students
thank u for this pdf book. but there is no any pdf for class 11th hindi or english book. We all need this book in degetal formate cause here books are not avalable. plz uplode it soon.
very good afternoon sir
sir hm block se htadigiye na piliz sir
hey @Aditya, I don’t understand what you’re saying?
haa
hi sir ji
aap bahut achcha padhaate Hain
thanks!
download kaise hoga sirf picture dikh raha hai
hey @Govind, फोटो के नीचे सभी चैप्टर्स का डाउनलोड लिंक दिया गया है, आप उसपर क्लिक करिए |
my name is Raushan Kumar i lev in Sadopur
hello @Raushan, how can I help you?