Bihar Board 8th Geography Book 2026 PDF Download
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BSEB Class 8 Geography (हमारी दुनिया) Book PDF Free Download
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❤️ 1. संसाधन
यह पुस्तक ‘संसाधन’ विषय पर केंद्रित है, जो पृथ्वी पर मौजूद उन सभी तत्वों की व्याख्या करती है जो मानवीय आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। अध्याय की शुरुआत में संसाधनों को तीन मुख्य श्रेणियों – प्राकृतिक, मानव-निर्मित और मानव संसाधन – में वर्गीकृत किया गया है।
इसमें भूमि उपयोग के विभिन्न प्रारूपों और मृदा निर्माण की जटिल प्रक्रिया को समझाया गया है, साथ ही मृदा अपरदन को रोकने के उपायों पर बल दिया गया है। जल संसाधन के अंतर्गत, पृथ्वी पर जल के वितरण और वर्तमान जल संकट के कारणों, जैसे प्रदूषण और अति-दोहन, का विश्लेषण किया गया है।
पुस्तक में वनों को ‘पृथ्वी का फेफड़ा’ बताते हुए उनके औषधीय और पारिस्थितिक महत्व की चर्चा की गई है और वन्य जीवों के संरक्षण हेतु राष्ट्रीय उद्यानों की भूमिका स्पष्ट की गई है। खनिजों के भाग में धात्विक और अधात्विक खनिजों के उत्पादन केंद्रों, विशेषकर भारत के संदर्भ में, विस्तृत जानकारी दी गई है।
ऊर्जा संसाधनों के खंड में कोयला और पेट्रोलियम जैसे पारंपरिक स्रोतों के साथ-साथ सौर और पवन ऊर्जा जैसे गैर-पारंपरिक स्रोतों के भविष्य के महत्व को बताया गया है। अंततः, यह पुस्तक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और संरक्षण की अनिवार्यता का संदेश देती है ताकि पर्यावरण का संतुलन बना रहे और भविष्य की पीढ़ी के लिए संसाधन सुरक्षित रहें।
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❤️ 2. भारतीय कृषि।
यह अध्याय ‘भारतीय कृषि’ कृषि कार्यों और भारत की अर्थव्यवस्था में इसके महत्व का विस्तृत वर्णन करता है। कृषि को एक प्राथमिक क्रिया के रूप में परिभाषित किया गया है, जो देश की लगभग 60 प्रतिशत आबादी की आजीविका का मुख्य आधार है। पाठ में कृषि के विभिन्न रूपों, जैसे स्थानान्तरित कृषि (झूम खेती), गहन जीविका कृषि और वाणिज्यिक कृषि के बीच अंतर स्पष्ट किया गया है।
फसलों के वर्गीकरण को मौसम (खरीफ, रबी, जायद) और उपयोगिता (खाद्यान्न, रेशेदार, पेय, और बागवानी) के आधार पर समझाया गया है। अध्याय में भारतीय कृषि के समक्ष मौजूद चुनौतियों, जैसे मानसून पर अत्यधिक निर्भरता, खेतों के छोटे आकार, ऋण की समस्या और पारंपरिक कृषि उपकरणों के उपयोग पर बल दिया गया है। विशेष रूप से बिहार की कृषि के संदर्भ में ‘छुपी हुई बेरोजगारी’ और सांस्कृतिक जुड़ाव का उल्लेख किया गया है।
आधुनिक कृषि तकनीकों, जैसे ‘श्री विधि’, हरित क्रांति के प्रभाव, जैविक खाद के उपयोग और मृदा परीक्षण के लाभों पर भी विस्तार से चर्चा की गई है। अंत में, पंजाब के गेहूँ उत्पादन और असम के चाय बागानों के उदाहरणों के माध्यम से कृषि की सफलताओं और उससे जुड़ी समस्याओं, जैसे मिट्टी का प्रदूषण और बढ़ती लागत, का विश्लेषण किया गया है। यह पाठ किसानों को मिलने वाली सरकारी सहायता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
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❤️ 3. उद्योग
यह पाठ्यपुस्तक ‘इकाई-3: उद्योग’ के माध्यम से औद्योगिक प्रक्रियाओं और उनके वैश्विक व राष्ट्रीय महत्व का विस्तृत विश्लेषण करती है। उद्योग से तात्पर्य ऐसी आर्थिक गतिविधियों से है जो वस्तुओं के उत्पादन, खनिजों के निष्कर्षण और सेवाओं की व्यवस्था से जुड़ी होती हैं। इसमें कच्चे माल के आधार पर कृषि, खनिज, वन और समुद्र आधारित उद्योगों का वर्गीकरण किया गया है।
इसके अतिरिक्त, पूँजी निवेश के आधार पर कुटीर, लघु और वृहत उद्योगों का वर्णन है। पुस्तक के मुख्य तीन भागों में विस्तार से चर्चा की गई है: 1. लौह-इस्पात उद्योग: इसे ‘उद्योगों की रीढ़’ कहा गया है क्योंकि सभी बुनियादी ढाँचे और मशीनें इसी पर निर्भर हैं।
भारत में जमशेदपुर, बोकारो और भिलाई जैसे प्रमुख केंद्रों की स्थापना और इस्पात निर्माण की तकनीकी प्रक्रिया को समझाया गया है। 2. वस्त्र उद्योग: यह भारत का प्राचीन और प्रमुख उद्योग है।
इसमें सूती, रेशमी और ऊनी वस्त्रों के उत्पादन केंद्रों जैसे अहमदाबाद (भारत का मैनचेस्टर) और भागलपुर सिल्क का उल्लेख है। उद्योगों की स्थापना हेतु जलवायु, श्रम, परिवहन और बाजार जैसे कारकों की अनिवार्यता बताई गई है। 3.
सूचना प्रौद्योगिकी: इंटरनेट और सॉफ्टवेयर आधारित इस आधुनिक उद्योग ने वैश्विक संचार में क्रांति ला दी है। बेंगलूरु को भारत की ‘सिलिकॉन वैली’ के रूप में प्रमुखता दी गई है। यह अध्याय उद्योगों के वर्गीकरण, भौगोलिक वितरण और आर्थिक योगदान का एक व्यापक ज्ञानकोश है।
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❤️ 4. परिवहन।
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❤️ 5. मानव संसाधन।
यह अध्याय ‘मानव संसाधन’ जनसंख्या के विभिन्न पहलुओं और राष्ट्र के विकास में मनुष्यों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालता है। पाठ की शुरुआत दादाजी और पूजा के बीच की रोचक बातचीत से होती है, जहाँ जनसंख्या को एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में रहने वाले लोगों की कुल संख्या के रूप में परिभाषित किया गया है। लेखक इस बात पर बल देता है कि मानव स्वयं में सबसे महत्वपूर्ण संसाधन है क्योंकि वह अपने विवेक, श्रमशक्ति और उन्नत प्रौद्योगिकी का उपयोग करके प्रकृति में उपलब्ध अन्य साधनों को उपयोगी और मूल्यवान बनाता है।
अध्याय में भारत की जनगणना के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। 2011 की जनगणना के अनुसार भारत विश्व का दूसरा सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश है, जिसमें उत्तर प्रदेश सबसे घनी आबादी वाला राज्य है। जनसंख्या के असमान वितरण के पीछे भौगोलिक विषमताएं, जैसे मैदानी इलाकों में बेहतर जीवन सुविधाएं और पहाड़ी क्षेत्रों में संसाधनों का अभाव, मुख्य कारण हैं।
इसके अतिरिक्त, जनसंख्या परिवर्तन के तीन प्रमुख कारकों—जन्म दर, मृत्यु दर और प्रवास—पर चर्चा की गई है। पाठ में लिंगानुपात के गिरते स्तर, विशेषकर ‘कन्या भ्रूण हत्या’ जैसी समस्याओं के प्रति सचेत किया गया है। साक्षरता और शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण मानव संसाधन विकसित करने के लिए अनिवार्य बताया गया है, जो एक समृद्ध और आत्मनिर्भर राष्ट्र के निर्माण का आधार है।
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❤️ 6. एशिया एक संक्षिप्त अध्ययन।
यह अध्याय एशिया महादेश की भौगोलिक, जलवायु और सांस्कृतिक विशेषताओं का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करता है। एशिया विश्व का सबसे बड़ा महादेश है, जो पृथ्वी के स्थल भाग का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा घेरे हुए है और जहाँ विश्व की 60 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है। इसकी सीमाओं में उत्तर में आर्कटिक महासागर, दक्षिण में हिंद महासागर और पूर्व में प्रशांत महासागर स्थित हैं।
पाठ में एशिया की प्रमुख भौगोलिक आकृतियों जैसे पामीर की गाँठ, विश्व की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट और तिब्बत के पठार जिसे ‘संसार की छत’ कहा जाता है, का वर्णन किया गया है। यहाँ की जलवायु में अत्यधिक विषमताएँ हैं; जहाँ रूस का बर्खोयांस्क सबसे ठंडा है, वहीं कुवैत का मित्रावा सबसे गर्म क्षेत्र है। एशिया को ‘सभ्यताओं का पालना’ कहा जाता है क्योंकि यहाँ सिंधु घाटी और मेसोपोटामिया जैसी प्राचीन सभ्यताओं का विकास हुआ।
जनसंख्या की अधिकता के कारण इसे ‘मानव का घर’ भी कहा जाता है, जिसमें भारत और चीन अग्रणी हैं। अध्याय सांस्कृतिक विविधता को पांच क्षेत्रों—पूर्वी, दक्षिणी, दक्षिण-पूर्वी, पश्चिमी और मध्य एशिया—में विभाजित करता है। इसमें सार्क जैसे संगठनों और विभिन्न धर्मों के उद्भव का भी उल्लेख है।
अंत में, एशिया के महत्वपूर्ण तथ्यों जैसे चीन की दीवार और बर्ज खलीफा का परिचय दिया गया है।
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