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Bihar Board Class 7th Science book 2026 PDF Download

Last Updated on January 26, 2026 by bseb 3 Comments

Bihar Board 7th Science book 2026 PDF Download

Bihar Board Class 7th Science book 2026 PDF Download – इस पेज पर बिहार बोर्ड 7th के छात्रों के लिए “Science (विज्ञान)” Book दिया गया है | जिसे आप अपने फ़ोन में Free Download कर सकते हैं |

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BSEB Class 7 Science (विज्ञान) Textbook PDF Free Download

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❤️ 1. जल और जंगल

यह अध्याय ‘जल और जंगल’ मानव जीवन और पर्यावरण के संतुलन के लिए जल तथा वनों की अपरिहार्यता पर प्रकाश डालता है। पाठ की शुरुआत जल संरक्षण की आवश्यकता से होती है, जिसमें 22 मार्च को मनाए जाने वाले विश्व जल दिवस के महत्व को रेखांकित किया गया है। यद्यपि पृथ्वी का एक बड़ा हिस्सा जल से ढका है, लेकिन वास्तविक उपयोग योग्य मृदु जल की मात्रा मात्र 0.006% ही है।

जल चक्र निरंतर कार्य करता है, परंतु बढ़ती जनसंख्या और औद्योगिकीकरण के कारण भौमजल स्तर में निरंतर गिरावट आ रही है। इसके समाधान हेतु ड्रिप सिंचाई और वर्षा जल संचयन जैसी जल प्रबंधन तकनीकों को अपनाने पर बल दिया गया है। अध्याय के दूसरे चरण में बिहार के वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान जैसे क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए जैव विविधता के महत्व को समझाया गया है।

वन न केवल ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का संतुलन बनाए रखते हैं, बल्कि खाद्य श्रृंखला के माध्यम से पारिस्थितिकी तंत्र को स्थिरता भी प्रदान करते हैं। सूक्ष्मजीव मृत पादपों को ह्यूमस में बदलकर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाते हैं, जो नए पौधों के विकास में सहायक होते हैं। अंततः, यह पाठ चेतावनी देता है कि वनों का विनाश मानव सभ्यता के अस्तित्व के लिए खतरा है, अतः इनका संरक्षण हमारा नैतिक कर्तव्य है।

इस प्रकार, यह अध्याय हमें जल की हर बूंद बचाने और वनों की रक्षा करने का प्रेरणादायी संदेश देता है।

 

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❤️ 2. जंतुओं में पोषण

यह अध्याय ‘जन्तुओं में पोषण’ मनुष्यों, घास खाने वाले जीवों और सूक्ष्मजीवों में पोषण तथा पाचन की प्रक्रियाओं का विस्तार से वर्णन करता है। सभी जीवित प्राणियों को अपने स्वास्थ्य, वृद्धि और गतिशीलता के लिए पोषण की आवश्यकता होती है। पोषण में पोषक तत्वों की जरूरत, भोजन ग्रहण करने का तरीका और शरीर में उनका उपयोग शामिल है।

भोजन के जटिल अवयवों को सरल पदार्थों में बदलने की प्रक्रिया पाचन कहलाती है। मनुष्य में, पाचन तंत्र मुख गुहिका से शुरू होकर गुदा तक जाता है। मुख में लार पाचन शुरू करती है।

आमाशय में अम्ल और पाचक रस भोजन पर क्रिया करते हैं। छोटी आँत में पाचन प्रक्रिया पूरी होती है और यहाँ रसांगुल पोषक तत्वों को अवशोषित करते हैं। बड़ी आँत जल और लवणों का अवशोषण करती है।

गाय जैसे घास खाने वाले जन्तुओं में ‘रूमेन’ नामक विशेष आमाशय होता है, जहाँ सेलुलोज का पाचन जीवाणुओं की सहायता से होता है। वे भोजन को जल्दी निगल लेते हैं और बाद में जुगाली करते हैं। अमीबा जैसे सूक्ष्मजीव अपने ‘पादाभ’ का उपयोग करके भोजन पकड़ते हैं और खाद्यधानी में उसे पचाते हैं।

अंततः, सभी जीवों में पाचन की आधारभूत प्रक्रिया समान है जिससे ऊर्जा प्राप्त होती है।

 

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❤️ 3. ऊष्मा

यह अध्याय ‘ऊष्मा’ के विभिन्न वैज्ञानिक पहलुओं को विस्तार से समझाता है। प्रारंभ में, यह चर्चा करता है कि हम दैनिक जीवन में वस्तुओं के गर्म या ठंडे होने का अनुभव कैसे करते हैं और यह स्पष्ट करता है कि केवल छूकर तापमान का सही अनुमान लगाना विश्वसनीय नहीं है। किसी वस्तु की उष्णता की विश्वसनीय माप के लिए ‘ताप’ और ‘तापमापी’ (थर्मामीटर) का उपयोग किया जाता है।

अध्याय में डॉक्टरी थर्मामीटर, जो मानव शरीर का तापमान (35°C से 42°C) मापने के लिए है, और प्रयोगशाला थर्मामीटर (परिसर -10°C से 110°C) की कार्यप्रणाली और सावधानियों का वर्णन है। ऊष्मा स्थानांतरण की तीन विधियों—चालन, संवहन और विकिरण—को विभिन्न प्रयोगों के माध्यम से समझाया गया है। ठोस पदार्थों में ऊष्मा का संचरण प्रायः ‘चालन’ द्वारा होता है, जबकि द्रवों और गैसों में ‘संवहन’ की प्रक्रिया प्रमुख है।

सूर्य से पृथ्वी तक पहुँचने वाली ऊर्जा ‘विकिरण’ का उदाहरण है, जिसे किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती। अध्याय समुद्री समीर और थल समीर जैसी प्राकृतिक घटनाओं के पीछे के कारणों को भी स्पष्ट करता है। अंत में, यह बताता है कि सर्दियों में गहरे रंग के ऊनी कपड़े और गर्मियों में हल्के रंग के सूती कपड़े क्यों पहनने चाहिए, जो ऊष्मा के अवशोषण और परावर्तन के सिद्धांतों पर आधारित है।

 

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❤️ 4. गति एवं समय

यह अध्याय ‘गति एवं समय’ भौतिक विज्ञान की बुनियादी अवधारणाओं जैसे गति के प्रकार, समय मापन और चाल की व्याख्या करता है। पाठ की शुरुआत मंद और तीव्र गति के अंतर से होती है, जहाँ यह समझाया गया है कि किसी निश्चित समय में तय की गई दूरी से हम गति की तुलना कर सकते हैं। समय मापन के खंड में, प्राचीन पद्धतियों से लेकर आधुनिक घड़ियों (जैसे क्वार्ट्ज घड़ी) की कार्यप्रणाली पर चर्चा की गई है।

इसमें ‘आवर्ती गति’ और ‘सरल लोलक’ के सिद्धांत को विस्तार से समझाया गया है, जिसमें ‘आवर्तकाल’ की गणना करना सिखाया गया है। अध्याय में ‘चाल’ को इकाई समय में तय की गई कुल दूरी के रूप में परिभाषित किया गया है (औसत चाल = कुल दूरी / कुल समय)। चाल के विभिन्न मात्रकों जैसे मीटर/सेकंड और किलोमीटर/घंटा के बारे में बताया गया है।

वाहनों में लगने वाले ‘स्पीडोमीटर’ और ‘ओडोमीटर’ के कार्यों को भी स्पष्ट किया गया है। अंत में, गति को चित्रात्मक रूप में दर्शाने के लिए ‘दूरी-समय ग्राफ’ का महत्व बताया गया है। एक समान गति (Uniform Motion) के लिए ग्राफ एक सरल रेखा होती है, जो समय के साथ दूरी के निरंतर परिवर्तन को दर्शाती है।

यह अध्याय छात्रों को दैनिक जीवन में गति और समय के महत्व को समझने में मदद करता है।

 

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❤️ 5. पदार्थ में रसायनिक परिवर्तन

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❤️ 6. पौधों में पोषण

पौधों में पोषण अध्याय सजीवों के लिए पोषक तत्वों की आवश्यकता और पौधों द्वारा भोजन निर्माण की प्रक्रिया का विस्तृत वर्णन करता है। इसमें विस्तार से बताया गया है कि किस प्रकार हरे पौधे सूर्य के प्रकाश, कार्बन डाइऑक्साइड, जल और क्लोरोफिल की सहायता से अपना भोजन स्वयं संश्लेषित करते हैं, जिसे वैज्ञानिक भाषा में ‘प्रकाश संश्लेषण’ कहा जाता है।

यह प्रक्रिया न केवल पौधों के विकास के लिए ऊर्जा प्रदान करती है बल्कि हमारे वातावरण में ऑक्सीजन का संतुलन बनाए रखने में भी सहायक है जो सभी जीवों के श्वसन के लिए अनिवार्य है। अध्याय में हेलमॉन्ट और प्रिस्टले जैसे वैज्ञानिकों के ऐतिहासिक प्रयोगों के माध्यम से प्रकाश संश्लेषण की खोज की पूरी यात्रा को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

इसके अतिरिक्त, पोषण की विभिन्न अन्य विधियों जैसे विषमपोषी पोषण, परजीवी (जैसे अमरबेल), कीटभक्षी (जैसे घटपर्णी), और मृतोपजीवी (जैसे कवक) के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है। पाठ में लाइकेन और राइजोबियम जैसे सहजीवी संबंधों की भूमिका को भी स्पष्ट किया गया है जो पर्यावरण में पोषक तत्वों के चक्रण में मदद करते हैं।

मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए किसान खाद और उर्वरकों का उपयोग करते हैं ताकि पौधों को पर्याप्त नाइट्रोजन मिल सके। अंत में, महान भारतीय वैज्ञानिक सर जगदीश चन्द्र बसु के जीवन और उनकी ऐतिहासिक खोजों पर प्रकाश डाला गया है, जिन्होंने दुनिया को बताया कि पौधों में भी संवेदनाएं होती हैं।

 

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❤️ 7. हवा, आँधी, तूफान

यह अध्याय ‘हवा, आँधी, तूफान’ वायु के भौतिक गुणों, व्यवहार और प्राकृतिक आपदाओं जैसे चक्रवातों के वैज्ञानिक आधार का विस्तृत वर्णन करता है। लेखक के अनुसार, हमारे चारों ओर स्थित वायु जब गतिशील होती है, तो उसे पवन कहते हैं। विभिन्न क्रियाकलापों के माध्यम से यह प्रमाणित किया गया है कि वायु दबाव डालती है।

अध्याय का एक मुख्य सिद्धांत यह है कि जब हवा का वेग बढ़ता है, तो उस क्षेत्र का वायुदाब कम हो जाता है। यही कारण है कि तेज आँधी में घरों के छप्पर उड़ जाते हैं और हवाई जहाज के डैने उसे ऊपर उठाने में मदद करते हैं। हवा के गर्म होने पर उसके विस्तार और विरलता के बारे में बताया गया है; गर्म हवा हल्की होकर ऊपर उठती है, जिससे निम्न दाब का क्षेत्र बनता है।

पृथ्वी के धरातल, जैसे भूमध्य रेखा और ध्रुवों के बीच तापमान की असमानता, वैश्विक वायु प्रवाह और मानसूनी हवाओं का मुख्य कारण है। अध्याय में चक्रवात को एक ऐसी स्थिति के रूप में परिभाषित किया गया है जहाँ निम्न दाब के केंद्र के चारों ओर अत्यंत तीव्र वेग की हवाएँ एक चक्र बनाती हैं। यह पुस्तक चक्रवातों से होने वाले नुकसान और उनसे बचाव के प्रभावी उपायों, जैसे पूर्वानुमान की सूचनाओं पर अमल करना और आपसी सहयोग, पर भी प्रकाश डालती है।

अंत में, पवन की दिशा मापने हेतु ‘पवन दिशा-सूचक’ और गति मापने हेतु ‘पवन वेग-मापी’ जैसे उपकरणों का परिचय दिया गया है।

 

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❤️ 8. जलवायु और अनुकूलन

यह अध्याय मौसम, जलवायु और विभिन्न वातावरणों में जंतुओं के अनुकूलन की विस्तृत व्याख्या करता है। मौसम किसी स्थान के तापमान, आर्द्रता, वर्षा और पवन वेग की दैनिक वायुमंडलीय स्थिति को दर्शाता है, जबकि जलवायु किसी स्थान पर लंबी अवधि के दौरान लिए गए मौसम के औसत प्रतिरूप को कहते हैं। भारत जैसे उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में जलवायु मुख्य रूप से मानसून पर निर्भर करती है और यहाँ शीत, ग्रीष्म तथा वर्षा ऋतुएँ पाई जाती हैं।

पाठ में ध्रुवीय क्षेत्रों और उष्णकटिबंधीय वर्षावनों में रहने वाले जंतुओं के विशिष्ट अनुकूलन लक्षणों को विस्तार से समझाया गया है। ध्रुवीय भालू अपने सफेद फर, त्वचा के नीचे वसा की मोटी परत और तीव्र घ्राण शक्ति के कारण अत्यधिक ठंड में जीवित रहने के लिए अनुकूलित होते हैं। इसी तरह, साइबेरियाई क्रेन जैसे प्रवासी पक्षी भीषण सर्दी से बचने के लिए हजारों किलोमीटर की यात्रा कर गर्म स्थानों की ओर प्रवास करते हैं।

उष्णकटिबंधीय वर्षावनों, विशेषकर भारतीय उपमहाद्वीप में, जैव विविधता प्रचुर मात्रा में पाई जाती है। यहाँ के जंतुओं जैसे हनुमान लंगूर में लंबी पूंछ और मजबूत अंग होते हैं जो उन्हें पेड़ों की शाखाओं पर रहने में मदद करते हैं। एशियाई हाथियों में लंबी सूंड ऊंचे पेड़ों से भोजन प्राप्त करने के लिए और बड़े कान शरीर के तापमान को नियंत्रित करने के लिए विकसित हुए हैं।

अंततः, यह पाठ सिखाता है कि जंतु अपनी उत्तरजीविता के लिए पर्यावरण के अनुसार विशिष्ट शारीरिक और व्यवहारिक परिवर्तन करते हैं।

 

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❤️ 9. गंदे जल का निपटान

यह अध्याय ‘गंदे जल का निपटान’ स्वच्छता, स्वास्थ्य और जल प्रबंधन के अनिवार्य पहलुओं पर प्रकाश डालता है । इसकी शुरुआत गोलू नामक छात्र की कहानी से होती है, जो लापरवाही के कारण नाली में गिर जाता है । घरों, स्कूलों और उद्योगों से निकलने वाला दूषित जल ‘अपशिष्ट जल’ कहलाता है ।

इसमें मौजूद हानिकारक अशुद्धियाँ और सूक्ष्मजीव हैजा, पीलिया, पेचिश और मस्तिष्क ज्वर जैसी घातक बीमारियों को जन्म देते हैं । अध्याय में ‘वाहित मल’ के सुरक्षित निपटान हेतु ‘सोख्ता गड्ढा’ और शहरी स्तर पर आधुनिक ‘अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र’ (WWTP) का वर्णन है । इन संयंत्रों में भौतिक, रासायनिक और जैविक प्रक्रियाओं द्वारा जल को प्रदूषकों से मुक्त किया जाता है ।

साथ ही, कम लागत वाले विकल्पों जैसे सेप्टिक टैंक और बायोगैस संयंत्रों के महत्व को समझाया गया है, जिससे ऊर्जा का उत्पादन संभव है । इसमें पटना के उपचार संयंत्रों और ऐतिहासिक सिंधु घाटी सभ्यता की उन्नत स्वच्छता व्यवस्था का विशेष उल्लेख है । अंततः, यह पाठ प्रत्येक व्यक्ति को एक जागरूक नागरिक बनने और पर्यावरण स्वच्छ रखने की सामूहिक जिम्मेदारी निभाने का संदेश देता है ।

 

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❤️ 10. विद्युत धारा और इसके प्रभाव

यह अध्याय ‘विद्युत धारा और इसके प्रभाव’ विद्युत के विभिन्न घटकों और उनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर केंद्रित है। इसमें सबसे पहले विद्युत सेल, बल्ब, स्विच और बैटरी जैसे अवयवों को उनके प्रतीकों द्वारा दर्शाना सिखाया गया है। दो या दो से अधिक सेलों के संयोजन को बैटरी कहा जाता है।

अध्याय मुख्य रूप से विद्युत धारा के दो प्रमुख प्रभावों—ऊष्मीय और चुंबकीय प्रभाव—पर चर्चा करता है। ऊष्मीय प्रभाव के तहत यह समझाया गया है कि कैसे विद्युत धारा प्रवाहित होने पर तार गर्म हो जाते हैं, जिसका उपयोग हीटर, इस्त्री और गीजर जैसे उपकरणों में होता है। सुरक्षा के लिए विद्युत फ्यूज और एम.सी.बी.

(MCB) के महत्व को भी रेखांकित किया गया है, जो अधिक धारा प्रवाहित होने पर परिपथ को तोड़कर उपकरणों की रक्षा करते हैं। चुंबकीय प्रभाव के अंतर्गत बताया गया है कि विद्युत धारा प्रवाहित होने पर कोई तार चुंबक की तरह व्यवहार करता है। इस सिद्धांत का उपयोग विद्युत चुंबक और विद्युत घंटी बनाने में किया जाता है।

अंत में, अध्याय में भारतीय वैज्ञानिक डॉ. कर्यमाणिक्यम् श्रीनिवास कृष्णन के जीवन और विज्ञान के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान, विशेष रूप से ‘रमण प्रभाव’ और ठोस अवस्था भौतिकी, का वर्णन किया गया है।

 

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❤️ 11. रेशों से वस्त्र तक

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❤️ 12. अमल, क्षार और लवण

यह अध्याय ‘अम्ल, क्षार और लवण’ के विभिन्न गुणों, उनकी रासायनिक प्रतिक्रियाओं और हमारे दैनिक जीवन में उनके व्यापक महत्व पर प्रकाश डालता है । पाठ की शुरुआत कुछ रोचक क्रियाकलापों और प्राकृतिक सूचकों जैसे हल्दी, गुड़हल और करमी के फूलों के प्रयोग से होती है, जो बिना चखे किसी पदार्थ की अम्लीय या क्षारीय प्रकृति की पहचान करने में अत्यंत सहायक होते हैं ।

वैज्ञानिक रूप से, अम्ल स्वाद में खट्टे होते हैं और नीले लिटमस पत्र को लाल रंग में बदल देते हैं, जबकि क्षार स्वाद में कड़वे, स्पर्श में साबुन की तरह चिकने होते हैं और लाल लिटमस को नीला कर देते हैं । अध्याय का मुख्य आकर्षण उदासीनीकरण की प्रक्रिया है, जिसमें एक अम्ल और एक क्षार को निश्चित मात्रा में मिलाने पर वे एक-दूसरे के गुणों को समाप्त कर उदासीन विलयन, लवण और जल का निर्माण करते हैं ।

इस रासायनिक परिवर्तन के दौरान सदैव ऊष्मा विमुक्त होती है । हमारे दैनिक जीवन में उदासीनीकरण के कई महत्वपूर्ण अनुप्रयोग हैं, जैसे पेट की अम्लता (अपच) को दूर करने के लिए मिल्क ऑफ मैग्नीशिया लेना, चींटी या मधुमक्खी के डंक के प्रभाव को बेकिंग सोडा से कम करना, और कारखानों के हानिकारक अम्लीय कचरे को जल निकायों में छोड़ने से पहले उपचारित करना ।

इसके अलावा, यह मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और दांतों के क्षय को रोकने में भी अनिवार्य है । अंत में, प्रदूषण से उत्पन्न अम्लीय वर्षा और ऐतिहासिक स्मारकों पर इसके दुष्प्रभावों के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है ।

 

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❤️ 13.मिट्टी

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❤️ 14. पौधों में संवहन

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❤️ 15. जीवों में स्वसन

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❤️ 16. प्रकाश

यह अध्याय ‘प्रकाश’ (Light) विज्ञान के उन महत्वपूर्ण सिद्धांतों को समझाता है जो हमारी दृष्टि और दैनिक अनुभवों को प्रभावित करते हैं। अध्याय की मुख्य स्थापना यह है कि प्रकाश सदैव एक सीधी रेखा में गमन करता है, जिसे टॉर्च की किरण पुंज और मोमबत्ती के सरल क्रियाकलापों द्वारा पुष्ट किया गया है। अध्याय में ‘प्रकाश के परावर्तन’ पर विशेष जोर दिया गया है।

यहाँ समतल दर्पण द्वारा बनने वाले प्रतिबिंब की विशेषताओं का वर्णन है, जैसे कि प्रतिबिंब का सीधा होना, वस्तु के समान आकार का होना और दर्पण से उतनी ही दूरी पर होना जितनी दूरी पर वस्तु रखी है। इसके अतिरिक्त, पार्श्व परिवर्तन (दायाँ-बायाँ उलटा दिखना) के रोचक तथ्य को भी साझा किया गया है। गोलीय दर्पणों के अंतर्गत अवतल और उत्तल दर्पणों की कार्यप्रणाली और उनके उपयोगों की व्याख्या की गई है।

अवतल दर्पण का प्रयोग दंत चिकित्सकों द्वारा वस्तुओं को बड़ा देखने के लिए किया जाता है, जबकि उत्तल दर्पण का उपयोग वाहनों में पीछे के व्यापक दृश्य को देखने के लिए होता है। लेंस खंड में उत्तल (अभिसारी) और अवतल (अपसारी) लेंसों के गुणों और उनके आवर्धक के रूप में प्रयोग को समझाया गया है। अंत में, इंद्रधनुष के माध्यम से यह बताया गया है कि सूर्य का श्वेत प्रकाश सात वर्णों का मिश्रण है।

यह अध्याय प्रकाश के व्यवहार को समझने हेतु एक व्यापक मार्गदर्शिका है।

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❤️ 17. पौधों में जनन

यह अध्याय ‘पौधों में जनन’ की प्रक्रियाओं का विस्तृत वर्णन करता है। जनन वह मौलिक लक्षण है जिसके द्वारा जीव अपने वंश को बनाए रखने के लिए अपने जैसी संतान उत्पन्न करते हैं। पौधों में जनन मुख्य रूप से दो विधियों द्वारा होता है: अलैंगिक और लैंगिक जनन।

अलैंगिक जनन में पौधे बिना बीजों के ही नए पौधे उत्पन्न करते हैं। इसकी प्रमुख विधि ‘कायिक प्रवर्धन’ है, जिसमें जड़, तना या पत्तियों जैसे अंगों से नए पौधे उगते हैं (जैसे गुलाब की कलम, आलू की आँखें या ब्रायोफाइलम की पत्तियां)। इसके अतिरिक्त मुकुलन (यीस्ट), खंडन (शैवाल) और बीजाणु निर्माण (कवक) भी अलैंगिक जनन के तरीके हैं।

लैंगिक जनन में फूलों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, जहाँ पुंकेसर नर जनन अंग और स्त्रीकेसर मादा जनन अंग का कार्य करते हैं। परागकणों का वर्तिकाग्र तक स्थानांतरण ‘परागण’ कहलाता है, जो स्व-परागण या पर-परागण हो सकता है। नर और मादा युग्मकों के मिलन को ‘निषेचन’ कहते हैं, जिसके परिणामस्वरूप युग्मनज और बाद में भ्रूण का निर्माण होता है।

निषेचन के उपरांत बीजाण्ड बीज में और अंडाशय फल में विकसित हो जाते हैं। अंततः, बीजों का प्रकीर्णन वायु, जल और जंतुओं द्वारा होता है ताकि पौधे नए स्थानों पर फल-फूल सकें। यह अध्याय पौधों की विविधता और जीवन चक्र को समझने में सहायक है।

 

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❤️ 18. जंतुओं में रक्त परिसंचरण एवं उत्सर्जन

यह अध्याय जन्तुओं में रक्त परिसंचरण और उत्सर्जन की जटिल और महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं की विस्तृत व्याख्या करता है। रक्त परिसंचरण तंत्र मुख्य रूप से हृदय, धमनियों और शिराओं से बना होता है। हृदय एक पेशीय पंप है जो जीवन भर बिना रुके रक्त को पूरे शरीर में प्रवाहित करता है।

धमनियां हृदय से ऑक्सीजन युक्त रक्त को शरीर के विभिन्न अंगों तक ले जाती हैं, जबकि शिराएं अंगों से कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य अपशिष्टों को वापस हृदय तक पहुँचाती हैं। रक्त में मौजूद लाल रक्त कोशिकाएं (RBC) हीमोग्लोबिन के कारण लाल रंग की होती हैं, जबकि श्वेत रक्त कोशिकाएं (WBC) रोगों से लड़ती हैं और प्लेटलेट्स रक्त का थक्का जमने में सहायता करते हैं। प्रति मिनट नाड़ी स्पंदन दर को सामान्यतः 72-80 बार मापा जाता है।

उत्सर्जन प्रक्रिया सजीवों की कोशिकाओं में बनने वाले विषाक्त अपशिष्ट पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने का कार्य करती है। मानव उत्सर्जन तंत्र में गुर्दे (किडनी), मूत्रवाहिनियाँ और मूत्राशय प्रमुख अंग हैं। गुर्दे रक्त को छानकर नाइट्रोजन युक्त विषैले पदार्थ ‘यूरिया’ को मूत्र के रूप में शरीर से अलग करते हैं।

इसके अतिरिक्त, त्वचा पसीने के माध्यम से जल और लवणों का उत्सर्जन कर शरीर का तापमान नियंत्रित करती है। यदि किसी का गुर्दा काम करना बंद कर दे, तो ‘अपोहन’ या ‘डायलासिस’ की विधि अपनाई जाती है। महान वैज्ञानिक विलियम हार्वे ने रक्त परिसंचरण तंत्र की खोज की थी।

अध्याय यह भी बताता है कि स्पंज और हाइड्रा जैसे जीवों में विकसित परिसंचरण तंत्र नहीं होता, वे जल के माध्यम से ही अपनी जैविक क्रियाएं संपन्न करते हैं।

 

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Reader Interactions

Comments

  1. Mukesh kumar says

    June 22, 2023 at 6:03 am

    Books does not download

    Reply
    • bseb says

      September 10, 2023 at 10:05 am

      hey @Mukesh, sorry for the inconvenience.

      Check out these step by step guides to understand how to download these books.

      Step 1

      step 1

      Step 2

      step 2

      thanks!

      Reply
  2. Rishi says

    May 8, 2025 at 2:28 pm

    book and me love

    Reply

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