Bihar Board 7th Hindi Book 2026 PDF Download (किसलय)
Bihar Board Class 7th Hindi Book 2026 PDF Download -इस पेज पर बिहार बोर्ड 7th के छात्रों के लिए “Hindi (किसलय)” Book दिया गया है | जिसे आप अपने फ़ोन में Free Download कर सकते हैं |
🌐 सभी विषयों की बुक्स डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें -> https://biharboardbooks.com/
🌐 बिहार बोर्ड सलूशन डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें – Bihar Board Solutions
सभी बुक्स का डाउनलोड लिंक नीचे पेज पर दिया गया है |
BSEB Class 7 Hindi (किसलय) Textbook PDF Free Download
☞ बुक्स डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए डाउनलोड लिंक पर क्लिक करें | 
❤️ 1. मानव बनो
‘मानव बनो’ सुप्रसिद्ध कवि शिव मंगल सिंह ‘सुमन’ द्वारा रचित एक अत्यंत प्रेरणादायक कविता है, जो मनुष्य को स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती है। इस कविता के माध्यम से कवि ने मानव जीवन के वास्तविक मूल्यों और कर्तव्यों को रेखांकित किया है। कवि का स्पष्ट संदेश है कि प्रेम करना या किसी की विनती करना मानवीय भूलें हो सकती हैं, किंतु किसी अन्य व्यक्ति का आसरा ताकना और उस पर निर्भर रहना जीवन की सबसे बड़ी अक्षम्य भूल है।
कवि मनुष्य को सचेत करते हुए कहते हैं कि उसे संकट की स्थिति में न तो कायरों की तरह आँसू बहाने चाहिए और न ही किसी के सम्मुख सहायता के लिए हाथ फैलाने चाहिए। एक सच्चे मानव को अपनी हुंकार और आत्मविश्वास से पूरी पृथ्वी को आंदोलित करने की क्षमता रखनी चाहिए। कवि के अनुसार, व्यर्थ का विलाप करना या दुख में ‘हाय’ करना मनुष्य के गौरव के विरुद्ध है।
मनुष्य को अपने कष्टों और संघर्ष की आग में तपकर अपने हृदय की भस्म से इस संसार के कण-कण को हरा-भरा और धरती को उपजाऊ बनाना चाहिए। यह कविता हमें यह सिखाती है कि हम हाथ मलकर पछताने के बजाय कर्मठ बनें और अपने पुरुषार्थ से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाएं। अंततः, कवि ने मनुष्य को एक दृढ़निश्चयी, स्वाभिमानी और परोपकारी व्यक्तित्व विकसित करने का आह्वान किया है ताकि वह मानवता की सच्ची सेवा कर सके।
📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें
🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯
❤️ 2. नचिकेता
यह अध्याय ‘नचिकेता’ एक अत्यंत प्रेरणादायक पौराणिक कथा है, जो बालक नचिकेता की पितृभक्ति, साहस और ज्ञान की जिज्ञासा को प्रदर्शित करती है। महर्षि बाजश्रवा ने ‘सर्वमेघ यज्ञ’ का आयोजन किया था, जिसका नियम अपना सर्वस्व दान करना था। परंतु दान के समय महर्षि का मन लोभ से भर गया और वे केवल अनुपयोगी, बूढ़ी और दूध न देने वाली गायें दान करने लगे।
अपने पिता को धर्मच्युत होते देख नचिकेता ने उन्हें टोकते हुए पूछा कि वे उसे किसे दान में देंगे। आवेश में आकर पिता ने कह दिया, ‘मैं तुम्हें यमराज को दान दूँगा।’ पिता की आज्ञा का पालन करने हेतु नचिकेता यमपुरी पहुँचा और यमराज की अनुपस्थिति में तीन दिनों तक भूखा-प्यासा द्वार पर बैठा रहा। उसकी इस कठोर प्रतीक्षा और निष्ठा से प्रसन्न होकर यमराज ने उसे तीन वरदान माँगने को कहा।
नचिकेता ने पहले वर में पिता की मानसिक शांति, दूसरे में स्वर्ग प्रदान करने वाली अग्नि विद्या और तीसरे वर के रूप में ‘आत्मा का रहस्य’ माँगा। यमराज ने उसे धन-संपत्ति और भोगों के अनेक लालच दिए, किंतु नचिकेता अपने लक्ष्य पर अडिग रहा। विवश होकर यमराज ने उसे गूढ़ आत्मज्ञान की शिक्षा दी।
अंततः नचिकेता पृथ्वी पर वापस लौटा और एक महान आत्मज्ञानी के रूप में विख्यात हुआ।
📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें
🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯
❤️ 3. पुष्प की अभिलाषा
‘पुष्प की अभिलाषा’ महान कवि माखनलाल चतुर्वेदी द्वारा रचित एक कालजयी कविता है, जो देशभक्ति और आत्म-बलिदान की पराकाष्ठा को दर्शाती है। इस कविता में पुष्प के माध्यम से निस्वार्थ सेवा और राष्ट्रप्रेम का संदेश दिया गया है। कविता में फूल कहता है कि उसकी यह इच्छा बिल्कुल नहीं है कि वह किसी सुंदर स्त्री के आभूषणों का हिस्सा बने या प्रेमियों की माला में पिरोया जाए।
वह सम्राटों के शवों पर सम्मान के रूप में चढ़ाए जाने की भी अभिलाषा नहीं रखता। यहाँ तक कि वह देवताओं के सिर पर सजकर स्वयं को भाग्यशाली मानने के गौरव को भी ठुकरा देता है। पुष्प की सबसे बड़ी और एकमात्र अभिलाषा यह है कि माली उसे उस रास्ते पर बिखेर दे जहाँ से देश के वीर सपूत अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना शीश चढ़ाने जाते हैं।
वह उन वीरों के चरणों की धूल बनकर खुद को गौरवान्वित महसूस करना चाहता है जो राष्ट्र की गरिमा के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर देते हैं। यह कविता हमें यह सिखाती है कि व्यक्तिगत सुख, विलासिता और यहाँ तक कि ईश्वरीय आराधना से भी ऊपर देश की सेवा और उसके रक्षकों का सम्मान है। यह कविता आज भी प्रत्येक भारतीय के हृदय में राष्ट्र के प्रति अटूट प्रेम और सर्वोच्च बलिदान की प्रेरणा जागृत करती है।
📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें
🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯
❤️ 4. दानी पेड़
‘दानी पेड़’ शेल स्लिवरस्टाइन द्वारा रचित एक अत्यंत मर्मस्पर्शी और प्रेरणादायक कहानी है। यह कथा एक विशाल पेड़ और एक छोटे लड़के के बीच के अटूट और निस्वार्थ प्रेम के इर्द-गिर्द घूमती है। कहानी के प्रारंभ में, लड़का पेड़ के साथ खेलता है, उसकी शाखाओं से झूलता है और उसके मीठे फल खाता है।
पेड़ उस लड़के से बहुत प्यार करता है और उसे खुश देखकर स्वयं भी प्रसन्न होता है। जैसे-जैसे समय बीतता है, लड़का बड़ा हो जाता है और उसकी भौतिक इच्छाएँ बढ़ने लगती हैं। वह अब केवल अपनी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पेड़ के पास आता है।
पेड़ अपनी ममता और उदारता का परिचय देते हुए लड़के को पैसे कमाने के लिए अपने सारे फल दे देता है। बाद में, घर बनाने के लिए वह अपनी शाखाएँ काटने की अनुमति देता है और नाव बनाने के लिए अपना विशाल तना भी दे देता है। अंततः, पेड़ एक सूखे ठूंठ में बदल जाता है।
वर्षों बाद, जब वह लड़का एक थके हुए वृद्ध के रूप में वापस आता है, तो उसे केवल आराम की तलाश होती है। पेड़ उसे अपने ठूंठ पर बैठकर सुस्ताने का निमंत्रण देता है। यह कहानी हमें प्रकृति के परोपकारी स्वभाव और मनुष्य की स्वार्थी प्रवृत्ति के बारे में गहरी सीख देती है।
📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें
🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯
❤️ 5. वीर कुँवर सिंह
यह अध्याय १८५७ के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानी बाबू वीर कुँवर सिंह की शौर्य गाथा प्रस्तुत करता है। इनका जन्म सन् १७८२ में बिहार के भोजपुर जिले के जगदीशपुर गाँव में हुआ था। वे अपनी वीरता और रण-कौशल के लिए विख्यात थे।
एक प्रसिद्ध घटना के अनुसार, जब गंगा नदी पार करते समय अंग्रेजों की गोली उनके हाथ में लगी, तो उन्होंने बिना देर किए अपनी तलवार से हाथ काटकर गंगा मैया को अर्पित कर दिया। सन् १८५७ में जब सैनिकों ने दानापुर में विद्रोह किया, तब ८० वर्ष की आयु में भी कुँवर सिंह ने नेतृत्व संभाला और २७ जुलाई को आरा पर विजय प्राप्त की। यद्यपि अंग्रेजों ने उनके पैतृक स्थान जगदीशपुर पर कब्जा कर लिया था, परंतु उनका मनोबल नहीं टूटा।
उन्होंने उत्तर भारत के विभिन्न हिस्सों का भ्रमण कर क्रांति की ज्वाला जगाई और रीवा, काल्पी एवं कानपुर जैसे क्षेत्रों में संघर्ष किया। अंततः २३ अप्रैल १८५८ को उन्होंने पुनः जगदीशपुर को स्वतंत्र कराया और अपना झंडा फहराया। इस महान योद्धा का २६ अप्रैल १८५८ को निधन हो गया।
वे छापामार युद्ध में निपुण थे और आज भी उनकी वीरता बिहार के लोकगीतों और इतिहास में अमर है।
📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें
🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯
❤️ 6. गंगा स्तुति
प्रस्तुत पाठ ‘गंगा स्तुति’ मैथिल कोकिल महाकवि विद्यापति द्वारा रचित एक अत्यंत भावपूर्ण रचना है। इस कविता में कवि ने माँ गंगा के प्रति अपनी अनन्य भक्ति, अपार श्रद्धा और अटूट प्रेम को अभिव्यक्त किया है। कवि गंगा के किनारे बिताए गए समय को जीवन का सबसे बड़ा सुख (सार) मानते हैं।
वे कहते हैं कि जब वे गंगा के तट को छोड़कर जाने लगते हैं, तो वियोग की पीड़ा के कारण उनकी आँखों से निरंतर अश्रुधारा प्रवाहित होने लगती है। कवि विमल तरंगों वाली गंगा से करबद्ध होकर विनती करते हैं कि उन्हें बार-बार गंगा के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हो। वे गंगा माँ से अपने एक अपराध के लिए क्षमा माँगते हैं, जो उन्होंने अनजाने में उनके पवित्र जल को अपने पैरों से स्पर्श करके किया है।
विद्यापति के अनुसार, गंगा के पावन जल में केवल एक बार स्नान कर लेने से मनुष्य का जन्म सफल और कृतार्थ हो जाता है। इसके बाद किसी भी प्रकार के कठिन जप, तप, योग या ध्यान की आवश्यकता शेष नहीं रह जाती। कविता की अंतिम पंक्तियों में कवि प्रार्थना करते हैं कि अंत समय में, अर्थात् मृत्यु की घड़ी में, गंगा माँ उन्हें विस्मृत न करें और अपनी कृपा दृष्टि उन पर बनाए रखें।
यह पाठ न केवल गंगा की धार्मिक महत्ता को दर्शाता है, बल्कि प्रकृति और मनुष्य के बीच के भावनात्मक संबंध को भी रेखांकित करता है।
📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें
🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯
❤️ 7. साइकल की सवारी
यह कहानी ‘साइकिल की सवारी’ सुदर्शन द्वारा रचित एक हास्य व्यंग्य है, जो लेखक के साइकिल सीखने के असफल और मनोरंजक प्रयासों को दर्शाती है। लेखक को लगता था कि वे दुनिया में अकेले पिछड़ गए हैं जिन्हें साइकिल चलाना और हारमोनियम बजाना नहीं आता। इसी हीन भावना से उबरने के लिए वे 1932 में साइकिल सीखने का निश्चय करते हैं।
इसके लिए वे फटे-पुराने कपड़े ठीक करवाते हैं, चोट लगने पर लगाने के लिए ‘जंबक’ खरीदते हैं और बीस रुपये की भारी फीस देकर एक उस्ताद भी रखते हैं। सीखने के दौरान उनके साथ कई हास्यास्पद घटनाएँ होती हैं—कभी वे पाजामा उल्टा पहन लेते हैं, तो कभी साइकिल के नीचे दब जाते हैं। अंत में, जब वे थोडा-बहुत चलाना सीख जाते हैं, तो एक दिन आत्मविश्वास में सड़क पर निकलते समय एक ताँगे से टकरा जाते हैं।
अस्पताल में होश आने पर उन्हें पता चलता है कि उस ताँगे में उनकी पत्नी और बच्चे ही बैठे थे, जो उनका कौशल देखने आए थे। इस घटना के बाद लेखक का सारा उत्साह ठंडा पड़ जाता है और वे सदा के लिए साइकिल से तौबा कर लेते हैं। यह पाठ मनुष्य के व्यर्थ के अहंकार और बिना तैयारी के किए गए उत्साहपूर्ण कार्यों के परिणामों पर कटाक्ष करता है।
📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें
🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯
❤️ 8. बचपन के दिन
‘बचपन के दिन’ भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की आत्मकथा ‘विंग्स ऑफ फायर’ का एक अत्यंत प्रेरणादायक अंश है।
इसमें उन्होंने रामेश्वरम् में बिताए अपने शुरुआती जीवन और उन व्यक्तित्वों का वर्णन किया है जिन्होंने उनकी सोच को आकार दिया। एक मध्यमवर्गीय तमिल परिवार में जन्मे कलाम को अपने पिता जैनुलाबदीन से ईमानदारी और माता आशियम्मा से करुणा विरासत में मिली। उनके बचपन के तीन अभिन्न मित्र थे, जिनके साथ उन्होंने सांप्रदायिक सौहार्द का जीवंत अनुभव किया।
पाठ में एक हृदयस्पर्शी प्रसंग है जहाँ उनके स्कूल के एक शिक्षक ने धार्मिक आधार पर भेदभाव करने की कोशिश की, जिसे रामानंद के पिता लक्ष्मण शास्त्री ने कड़ाई से रोककर समाज को समानता का संदेश दिया। उनके विज्ञान शिक्षक शिव सुब्रह्मण्यम् अय्यर ने भी कलाम को सामाजिक बाधाओं को पार करना सिखाया। कलाम ने रामनाथपुरम् में आयादुरै सोलोमन के मार्गदर्शन में यह समझा कि सफलता के लिए तीव्र इच्छा, गहरी आस्था और सकारात्मक उम्मीदें अनिवार्य हैं।
यह अध्याय हमें सिखाता है कि प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद, दृढ़ संकल्प और सही मार्गदर्शन से कोई भी अपनी नियति बदल सकता है और सफलता के शिखर तक पहुँच सकता है।
📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें
🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯
❤️ 9. वर्षा बहार
‘वर्षा बहार’ कविता मुकुटधर पाण्डेय द्वारा रचित है, जिसमें वर्षा ऋतु के आगमन और उससे प्रकृति में होने वाले सुखद परिवर्तनों का मनोहारी वर्णन किया गया है। कवि बताते हैं कि वर्षा की फुहारें सबके मन को लुभा रही हैं और आकाश में छाई घनघोर घटाएं एक अनूठी छटा बिखेर रही हैं। बिजली की चमक और बादलों की गर्जना के बीच गिरता पानी और बहते झरने प्रकृति की जीवंतता को दर्शाते हैं।
ठंडी हवा के झोंकों से पेड़ों की डालियाँ झूम रही हैं और बागों में मालिनें मधुर गीत गा रही हैं। ग्रीष्म ऋतु के ताप से व्याकुल पपीहे और जलाशयों के जलचर अब अत्यंत प्रसन्न हैं। वनों में मोर नृत्य कर रहे हैं और मेंढक सुरीले गीत गा रहे हैं।
चारों ओर खिले गुलाब अपनी सुगंध फैला रहे हैं और बागों में खुशी का माहौल है। आसमान में हंसों की कतारें और खेतों में किसानों के मधुर गीत वातावरण को और भी सुंदर बना देते हैं। अंत में कवि कहते हैं कि पृथ्वी पर वर्षा की यह बहार अत्यंत निराली है और पूरे जगत की सुंदरता इसी पर निर्भर करती है।
यह कविता प्रकृति के प्रति प्रेम और उल्लास को जगाती है।
📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें
🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯
❤️ 10. कुंभा का आत्म बलिदान
यह कहानी वीर हाड़ा राजपूत कुंभा के अटूट मातृभूमि प्रेम और बलिदान की है। चित्तौड़ के महाराणा बूँदी रियासत को जीतना चाहते थे, परंतु युद्ध में असफल होने पर उन्होंने प्रतिज्ञा की कि जब तक वे बूँदी को जीत नहीं लेते, अन्न-जल ग्रहण नहीं करेंगे। उनकी प्रतिज्ञा पूरी करने हेतु एक नकली किला बनाया गया।
कुंभा, जो चित्तौड़ की सेना में सैनिक थे, अपनी मातृभूमि बूँदी का अपमान सहन नहीं कर सके। उन्होंने अपने कुछ साथियों के साथ उस नकली किले की रक्षा का प्रण लिया। जब राणा की सेना उस नकली किले को जीतने आई, तो कुंभा और उनके साथियों ने डटकर मुकाबला किया।
एक असमान युद्ध में, जहाँ हजारों सैनिकों के सामने मुट्ठी भर वीर थे, कुंभा ने अंत तक लड़ते हुए अपना बलिदान दे दिया। उन्होंने सिद्ध किया कि मातृभूमि चाहे असली हो या नकली, उसका सम्मान सर्वोपरि है। यह पाठ हमें सिखाता है कि कुछ हार, जीत से भी अधिक गौरवशाली और शानदार होती हैं।
कुंभा का यह आत्मबलिदान वीरता और देशभक्ति की एक अनुपम मिसाल है।
📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें
🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯
❤️ 11. कबीर के दोहे
संत कबीरदास जी के दोहे जीवन के लिए अत्यंत प्रेरणादायी हैं। इस अध्याय में उनके प्रसिद्ध दोहों के माध्यम से समय, भक्ति, संगति और आत्म-चिंतन की शिक्षा दी गई है। प्रथम दोहे में कबीर कल के काम को आज ही करने की सीख देते हैं।
वे ईश्वर से उतना ही माँगते हैं जिससे उनके कुटुंब का पालन हो सके और कोई अतिथि भूखा न जाए। वे निंदक को पास रखने की सलाह देते हैं क्योंकि वे हमारे दोष बताकर हमें सुधारने में मदद करते हैं। ज्ञान के महत्व को बताते हुए वे कहते हैं कि व्यक्ति की पहचान उसके ज्ञान से होनी चाहिए, न कि उसकी जाति से।
वे प्रेम को पांडित्य का आधार मानते हैं और कहते हैं कि जिसने प्रेम को समझ लिया, वही सच्चा ज्ञानी है। सज्जन की तुलना सोने से करते हुए वे कहते हैं कि सज्जन टूटने पर भी जुड़ जाते हैं, जबकि दुर्जन मिट्टी के घड़े जैसे होते हैं। अंत में, वे संदेश देते हैं कि दूसरों की बुराई देखने से पहले मनुष्य को अपने स्वयं के मन को टटोलना चाहिए।
यह पाठ हमें सिखाता है कि निस्वार्थ सेवा, विनम्रता और सादगी ही जीवन के असली गुण हैं। कबीर के दोहे न केवल साहित्यिक दृष्टि से समृद्ध हैं, बल्कि वे समाज को सही दिशा दिखाने वाले पथ-प्रदर्शक भी हैं।
📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें
🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯
❤️ 12. जन्म बाधा
‘जन्म-बाधा’ सुधा द्वारा रचित एक मार्मिक कहानी है जो समाज में लड़कियों की स्थिति और उनके संघर्ष को दर्शाती है। कहानी की मुख्य पात्र गुड्डी है, जिसे उसकी इच्छा के विरुद्ध पढ़ाई छोड़कर घर के कामों और छोटे भाई-बहनों की देखभाल में झोंक दिया गया है।
उसे लगता है कि वह अपने ही घर में एक ‘बंधुआ मजदूर’ की तरह जीवन जी रही है, जहाँ उसे सुस्ताने तक का समय नहीं मिलता। गुड्डी अपने माता-पिता की मर्जी के बिना छिपकर प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखती है, जिसमें वह अपनी व्यथा बताते हुए खुद को इस घरेलू गुलामी से मुक्त कराने की गुहार लगाती है।
वह पत्र में स्पष्ट करती है कि उसके छोटे भाई स्कूल जाते हैं, जबकि उसे सिर्फ इसलिए घर बिठा लिया गया क्योंकि वह एक लड़की है। कहानी गुड्डी की दृढ़ इच्छाशक्ति और शिक्षा के प्रति उसकी ललक को उजागर करती है।
पत्र लिखने के बाद वह एक नई उम्मीद और फुर्ती से भर जाती है, यह सोचकर कि जल्द ही उसे इस ‘जन्म-बाधा’ से मुक्ति मिल जाएगी। यह पाठ बाल श्रम, लैंगिक भेदभाव और शिक्षा के अधिकार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चोट करता है।
📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें
🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯
❤️ 13. शक्ति और क्षमा
यह कविता ‘शक्ति और क्षमा’ रामधारी सिंह ‘दिनकर’ द्वारा रचित है, जो मनुष्य को शक्ति और विनम्रता के बीच के संतुलन को समझाती है। कवि महाभारत के प्रसंग और भगवान राम के उदाहरण के माध्यम से कहते हैं कि क्षमा, दया और सहनशीलता जैसे गुण केवल उसी व्यक्ति को शोभा देते हैं जिसके पास शक्ति होती है।
पांडवों ने कौरवों के सामने बहुत विनम्रता दिखाई, लेकिन सुयोधन ने उनकी सहनशीलता को उनकी कायरता समझा। इसी प्रकार, भगवान राम ने तीन दिनों तक समुद्र से रास्ता माँगा, लेकिन जब समुद्र ने उनकी प्रार्थना अनसुनी कर दी, तब राम के क्रोध और उनके बाणों की शक्ति देखकर वह उनके चरणों में गिर पड़ा।
कवि का मुख्य संदेश यह है कि समाज केवल शक्तिशाली व्यक्ति की विनम्रता का ही सम्मान करता है। जिसके पास विजय की शक्ति होती है, उसी के शांति प्रस्ताव और क्षमा को जगत पूजता है।
बिना शक्ति के क्षमा और विनय का कोई मूल्य नहीं होता, क्योंकि निर्बल की सहनशीलता को अक्सर उसकी मजबूरी मान लिया जाता है। अतः, व्यक्ति के भीतर पौरुष और शक्ति का होना अनिवार्य है ताकि उसकी विनम्रता का सम्मान हो सके।
📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें
🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯
❤️ 16. बूढ़ी पृथ्वी के दुख
निर्मला पुतुल द्वारा रचित कविता ‘बूढ़ी पृथ्वी का दुख’ पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति मानवीय संवेदनहीनता पर एक गहरा प्रहार है। कवयित्री ने प्रकृति के विभिन्न अंगों जैसे पेड़ों, नदियों, पहाड़ों और हवा के माध्यम से पृथ्वी की पीड़ा को व्यक्त किया है।
कविता में पेड़ों के कटने पर उनके ‘चीत्कार’ और ‘बचाव के लिए पुकारते हजारों हाथों’ का वर्णन किया गया है, जो मानव के निर्दयी व्यवहार को दर्शाता है। नदियों के प्रदूषण पर चिंता व्यक्त करते हुए कवयित्री कहती हैं कि जिस घाट पर लोग गंदगी फैलाते हैं, वहीं दूसरी ओर कोई प्यासा पानी पी रहा होता है।
पहाड़ों के सीने में होने वाले विस्फोट और हवा की दूषित अवस्था का चित्रण करते हुए वह मानवता को आइना दिखाती हैं। अंत में, कवयित्री चेतावनी देती हैं कि यदि हम पृथ्वी के इस शांत दुख को नहीं समझ सकते, तो हमारी मानवता पर संदेह करना उचित है।
यह कविता हमें प्रकृति के साथ भावनात्मक जुड़ाव बनाने और उसे प्रदूषण से बचाने के लिए प्रेरित करती है।
📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें
🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯
❤️ 17. सोना
यह पाठ महादेवी वर्मा द्वारा रचित एक संस्मरण है, जिसमें उन्होंने ‘सोना’ नामक एक हिरनी के साथ अपने अनुभवों को साझा किया है। सोना एक अनाथ हिरन शावक थी, जिसे लेखिका के पास लाया गया था। वह सुनहरे रंग की, कोमल और अत्यंत सुंदर थी।
धीरे-धीरे वह लेखिका के घर के परिवेश में ढल गई और वहां के अन्य पालतू जानवरों जैसे कुत्ते (हेमंत, वसंत) और बिल्ली (गोधूली) के साथ उसकी गहरी मित्रता हो गई। सोना को लेखिका और बच्चों से बहुत लगाव था; वह अक्सर उनके चारों ओर छलांग लगाती और स्नेह प्रदर्शित करती थी। कहानी में मोड़ तब आता है जब लेखिका को बद्रीनाथ की यात्रा पर जाना पड़ता है।
लेखिका की अनुपस्थिति में सोना अत्यंत व्याकुल और अस्थिर हो गई। उसकी सुरक्षा के लिए उसे एक लंबी रस्सी से बांध दिया गया था। एक दिन बंधन की सीमा भूलकर ऊँची छलांग लगाने के प्रयास में वह रस्सी के खिंचाव के कारण गिर गई और उसकी मृत्यु हो गई।
सोना की यह करुण अंत कथा मनुष्य की क्रूरता और पशुओं के प्रति संवेदना के अंतर्संबंधों को उजागर करती है। लेखिका ने पशुओं के निश्छल प्रेम और उनकी मासूमियत का बहुत ही मार्मिक चित्रण किया है।
📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें
🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯
❤️ 18. हुएन्त्संग की भारत यात्रा
यह पाठ प्रसिद्ध चीनी यात्री हुएनत्सांग की भारत यात्रा और उनके अनुभवों का वर्णन करता है। यात्रा की शुरुआत हुएनत्सांग के एक शुभ स्वप्न से हुई, जिसमें उन्होंने सुमेरु पर्वत को देखा, जिसे उन्होंने बुद्ध की जन्मभूमि भारत जाने का संकेत माना। तत्कालीन चीनी कानून के अनुसार देश छोड़ना वर्जित था, फिर भी अपने दृढ़ संकल्प के कारण उन्होंने इस कठिन मार्ग को चुना।
रास्ते में उन्होंने भीषण रेगिस्तान, रेत के तूफान और सुरक्षा चौकियों की बाधाओं को पार किया, लेकिन बुद्ध के देश पहुँचने की अपनी शपथ से पीछे नहीं हटे। भारत पहुँचकर उन्होंने बोधगया के दर्शन किए और फिर नालंदा विश्वविद्यालय गए। वहाँ उनकी भेंट प्रसिद्ध विद्वान शीलभद्र से हुई, जिन्होंने हुएनत्सांग को अपना शिष्य स्वीकार किया।
पाठ में नालंदा की वास्तुकला, कलात्मक बुर्जों, स्वच्छ तालाबों और ऊँचे कक्षों का अत्यंत सुंदर वर्णन है। हुएनत्सांग ने यहाँ कई वर्ष बिताकर बौद्ध और ब्राह्मण ग्रंथों का गहन अध्ययन किया। उन्होंने नालंदा के कठोर नियमों और वहाँ के भिक्षुओं की विद्वत्ता की भी सराहना की।
यह अध्याय उनके अटूट विश्वास, ज्ञान की पिपासा और प्राचीन भारतीय शिक्षा केंद्र की भव्यता को उजागर करता है।
📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें
🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯
❤️ 19. आर्यभट्ट
यह पाठ भारत के महान प्राचीन गणितज्ञ और खगोलशास्त्री आर्यभट के जीवन और उनकी महान उपलब्धियों पर आधारित है। आर्यभट का जन्म 476 ईस्वी में अश्मक प्रदेश में हुआ था। उन्होंने मात्र 23 वर्ष की आयु में ‘आर्यभटीयम्’ नामक ग्रंथ की रचना की, जो गणित और ज्योतिष का अनूठा संगम है।
आर्यभट ने तत्कालीन समाज में व्याप्त अंधविश्वासों को चुनौती दी और वैज्ञानिक तथ्यों को सामने रखा। उन्होंने सबसे पहले यह सिद्ध किया कि पृथ्वी गोल है और अपनी धुरी पर पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है। उन्होंने सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण के वास्तविक कारणों को स्पष्ट करते हुए बताया कि ये पृथ्वी और चंद्रमा की छाया के कारण होते हैं।
आर्यभट की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में ‘शून्य’ की उपयोगिता को प्रमाणित करना और वृत्त की परिधि मापने का सूत्र देना शामिल है। उन्होंने अंकगणित, बीजगणित और रेखागणित के क्षेत्र में कई नवीन सिद्धांत स्थापित किए। उनके क्रांतिकारी विचारों ने भारत में वैज्ञानिक अनुसंधान की एक स्वस्थ परंपरा की नींव रखी।
उनके इसी सम्मान में भारत के पहले कृत्रिम उपग्रह का नाम ‘आर्यभट’ रखा गया। यह पाठ हमें सिखाता है कि विज्ञान की खोज का मार्ग धार्मिक अंधविश्वासों से अलग होता है।
📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें
🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯
❤️ 20. यशस्विनी
यह पाठ ‘यशस्विनी’ नारी शक्ति, सम्मान और स्वावलंबन पर केंद्रित एक प्रेरणादायक रचना है। कविता के माध्यम से कवयित्री बेबी रानी ने समाज को यह संदेश दिया है कि नारी केवल दया या दान की वस्तु नहीं है, बल्कि वह एक स्वतंत्र अस्तित्व रखने वाली जीवंत शक्ति है।
समाज को उसके सपनों और आकाश को छीनने का प्रयास नहीं करना चाहिए। पाठ में नारी को पारंपरिक बंधनों और गहनों जैसे पायल या कंगन के स्थान पर ‘विद्या’ को अपना वास्तविक श्रृंगार बनाने के लिए प्रेरित किया गया है।
उसे मदर टेरेसा जैसी सेवाभावी, इंदिरा गांधी जैसी सशक्त राजनेता, कल्पना चावला जैसी साहसी अंतरिक्ष यात्री और लता मंगेशकर जैसी महान गायिका बनने का अवसर मिलना चाहिए। कविता पुरानी कुरीतियों और नफरत की बेड़ियों को तोड़कर नारी को अपनी पहचान स्वयं बनाने और अपने नारीत्व को गर्व से स्वीकार करने का आह्वान करती है।
इसके अतिरिक्त, पाठ में वैज्ञानिक तथ्यों और ओलंपिक आंकड़ों के माध्यम से इस भ्रम को भी तोड़ा गया है कि स्त्रियाँ शारीरिक रूप से पुरुषों से बहुत कमजोर होती हैं। यह पाठ स्त्री-पुरुष भेदभाव को मिटाने और महिलाओं को समान अवसर प्रदान करने की पुरजोर वकालत करता है, ताकि वे भी समाज के विकास में अपनी पूर्ण क्षमता के साथ योगदान दे सकें।
📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें
🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯
❤️ 21. गुरु की सीख
यह कहानी ‘गुरु की सीख’ शीर्षक वाले एक अध्याय से है, जो समय के महत्व और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने की सीख देती है। एक बार गुरु जी अपने शिष्यों को जड़ी-बूटियों की जानकारी देने के लिए जंगल ले जा रहे थे। रास्ते में कुछ आवारा कुत्ते भौंकने लगे और बाद में एक बंदर भी आ गया।
अधिकांश शिष्य अपना समय उन जानवरों को पत्थर मारने और उनसे उलझने में व्यर्थ करने लगे। इसके विपरीत, एक शिष्य बिना विचलित हुए गुरु के साथ चलता रहा। जब अन्य शिष्य जंगल पहुँचे, तब तक बहुत देर हो चुकी थी और शाम होने वाली थी।
गुरु जी ने उन्हें जड़ी-बूटियों की शिक्षा देने से मना कर दिया क्योंकि उन्होंने अपना कीमती समय व्यर्थ की बातों में गँवा दिया था। जो शिष्य गुरु के साथ रहा था, उसने न केवल ज्ञान प्राप्त किया बल्कि उपयोगी जड़ी-बूटियाँ भी एकत्रित कीं। अंत में, अन्य शिष्यों को अपनी गलती का पछतावा हुआ।
यह पाठ हमें सिखाता है कि सफलता पाने के लिए हमें मार्ग की बाधाओं और व्यर्थ के आकर्षणों में उलझने के बजाय अपने मुख्य लक्ष्य की ओर अग्रसर रहना चाहिए। समय का सदुपयोग ही शिष्य की असली योग्यता है।
📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें
🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯
❤️ 22. समय का महत्व
यह कविता ‘समय का महत्व’ समय की अमूल्य प्रकृति पर प्रकाश डालती है। कवि के अनुसार समय दुनिया की सबसे कीमती वस्तु है जिसे एक बार खो देने पर दोबारा प्राप्त नहीं किया जा सकता।
जो व्यक्ति समय की कद्र नहीं करता, समय उसे ठुकरा देता है और उसे जीवन भर पछताना पड़ता है। कविता में तुलना की गई है कि खोया हुआ धन मेहनत से वापस मिल सकता है, बिगड़ा हुआ स्वास्थ्य उपचार से सुधर सकता है और भूली हुई विद्या पुनः अभ्यास से प्राप्त की जा सकती है, किंतु बीता हुआ समय किसी भी मूल्य पर वापस नहीं आता।
विश्व के सभी महापुरुषों ने समय का सम्मान किया और उसके हर पल का सदुपयोग किया, जिसके कारण वे अमर हो सके और यश के भागी बने। कविता का मुख्य संदेश यही है कि जीवन में सफलता प्राप्त करने और अपने मनोरथ सिद्ध करने के लिए समय का उचित प्रयोग अनिवार्य है।
हमें अपने जीवन के किसी भी क्षण को व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए क्योंकि समय की थाती खो जाने के बाद पूरी दुनिया छानने पर भी नहीं मिलती। इसलिए हमें समय का आदर करना चाहिए ताकि हम अपने जीवन को सार्थक बना सकें।
📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें
🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯
⚠️ अगर उपर दी गयी कोई भी बुक डाउनलोड करने में किसी प्रकार की समस्या हो रही हो तो कमेंट करके हमें बताएं | 
🌐 सभी विषयों की बुक्स डाउनलोड करने के लिए -> यहाँ क्लिक करें
🌐 बिहार बोर्ड सलूशन डाउनलोड करने के लिए -> यहाँ क्लिक करें
Thanks! 🙏🏽
⚠️ इस पेज पर दी गयी बुक्स “Bihar Education Project” द्वारा पब्लिश की गई हैं | ऑफिसियल साईट से इन बुक्स को डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें

Leave a Reply