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Bihar Board Class 6th Hindi Book 2026 PDF Download (किसलय)

Last Updated on January 26, 2026 by bseb 2 Comments

Bihar Board 6th Hindi Book 2026 PDF Download

Bihar Board Class 6th Hindi Book 2026 PDF Download – इस पेज पर बिहार बोर्ड 6th के छात्रों के लिए “Hindi (किसलय)” Book दिया गया है | जिसे आप अपने फ़ोन में Free Download कर सकते हैं |

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BSEB Class 6 Hindi (किसलय) Textbook PDF Free Download

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❤️ 1. अरमान

‘अरमान’ रामनरेश त्रिपाठी द्वारा रचित एक प्रेरणादायक कविता है। यह कविता बच्चों के मन में देशभक्ति, समाज सेवा और अदम्य साहस की भावना जगाती है। कवि कहते हैं कि हमें इस नश्वर दुनिया में नेक काम करके अपना नाम अमर करना चाहिए।

कविता उन लोगों की सहायता करने पर जोर देती है जो गरीब, बेसहारा और निराश हैं। कवि का मानना है कि जो लोग हार मानकर बैठ गए हैं, उनके भीतर फिर से उत्साह और उमंग का संचार करना हमारा कर्तव्य है। हम उन वीर पूर्वजों की संतान हैं जो अपनी धुन के पक्के और सच्चे थे, इसलिए हमें उनके मान-सम्मान को बढ़ाना चाहिए।

बच्चों को मातृभूमि के सच्चे सिपाही बताते हुए कवि कहते हैं कि उन्हें आगे बढ़ने से नहीं रोकना चाहिए, क्योंकि वे देश की सेवा में अपना सर्वस्व न्योछावर करने को तैयार हैं। यह कविता स्वाभिमान, परोपकार और राष्ट्र के प्रति समर्पण की सीख देती है। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को जागरूक करना और उन्हें समाज के उत्थान के लिए प्रेरित करना है।

‘अरमान’ शीर्षक कविता मानवता और वीरता का एक सुंदर मिश्रण प्रस्तुत करती है।

 

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❤️ 2. असली चित्र

यह कहानी राजा कृष्णदेव राय के राज्य के एक अत्यधिक कंजूस सेठ और एक चतुर चित्रकार की है। सेठ ने एक चित्रकार से अपना चित्र बनवाया, लेकिन पैसे देने के डर से वह हर बार अपना चेहरा बदल लेता और कहता कि चित्र उससे नहीं मिलता।

कई बार असफल होने के बाद, चित्रकार तेनालीराम के पास गया। तेनालीराम की सलाह पर, चित्रकार अगले दिन सेठ के पास एक आईना लेकर पहुँचा और कहा कि यह उसका सबसे सटीक चित्र है।

जब सेठ ने विरोध किया, तो चित्रकार ने तर्क दिया कि आईने के अलावा उसकी असली और बदलती सूरत कोई और नहीं दिखा सकता। अपनी हार स्वीकार करते हुए और तेनालीराम की बुद्धिमानी को पहचानते हुए, सेठ ने चित्रकार को एक हजार स्वर्ण मुद्राएँ पुरस्कार स्वरूप दीं।

यह कहानी तेनालीराम की चतुराई और ‘जैसे को तैसा’ की नीति को दर्शाती है। अंत में, राजा कृष्णदेव राय भी इस घटना को सुनकर बहुत प्रसन्न हुए।

 

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❤️ 3. चिड़िया

‘चिड़िया’ शीर्षक की यह कविता प्रसिद्ध कवि आरसी प्रसाद सिंह द्वारा रचित है। इस कविता के माध्यम से कवि ने पक्षियों के जीवन की सरलता, एकता और निस्वार्थ भावना का सुंदर चित्रण किया है। चिड़िया पीपल की ऊँची डाली पर बैठकर मानव को प्रेम और भाईचारे की सीख देती है।

कवि बताते हैं कि विभिन्न प्रकार के पक्षी जैसे कोयल, तोता, कौआ और हंस आपस में मिल-जुलकर रहते हैं और साथ में भोजन करते हैं। उनके मन में लोभ, पाप या किसी का माल हड़पने की इच्छा नहीं होती। वे केवल उतना ही ग्रहण करते हैं जितना उनके श्रम से प्राप्त होता है और शेष दूसरों के हित के लिए छोड़ देते हैं।

वे खुले आसमान में निर्भय होकर विचरण करते हैं। चिड़िया मानव से प्रश्न करती है कि जब वे इतने स्वतंत्र हैं, तो मनुष्य ने खुद को बंधनों और स्वार्थ की बेड़ियों में क्यों जकड़ रखा है। यह कविता हमें प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर जीने और संतोष का मार्ग अपनाने की प्रेरणा देती है।

पक्षियों का यह आचरण मानव समाज के लिए एक आदर्श संदेश है जो हमें ईर्ष्या और द्वेष से मुक्त होकर जीना सिखाता है।

 

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❤️ 4. हॉकी का जादूगर

यह अध्याय भारतीय हॉकी के महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद के जीवन और खेल के प्रति उनके समर्पण पर आधारित है। इसमें उनके जीवन की एक प्रेरक घटना का वर्णन है, जब 1933 के एक मैच के दौरान प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी ने गुस्से में उनके सिर पर हॉकी स्टिक मार दी थी। चोटिल होने के बावजूद ध्यानचंद ने मैदान पर वापसी की और उस खिलाड़ी से बदला लेने के बजाय एक के बाद एक छह गोल करके अपनी टीम को जीत दिलाई।

खेल के बाद उन्होंने उस खिलाड़ी को समझाया कि खेल में गुस्सा अच्छा नहीं होता। ध्यानचंद ने अपनी सफलता के मूल मंत्र लगन, साधना और खेल भावना को बताया है। उनका जन्म 1904 में प्रयाग में हुआ था और 16 वर्ष की आयु में वे सेना में भर्ती हुए।

1936 के बर्लिन ओलंपिक में उनकी कप्तानी में भारत ने स्वर्ण पदक जीता। उनके खेलने के अनोखे ढंग और निपुणता के कारण ही उन्हें ‘हॉकी का जादूगर’ कहा जाने लगा। वे हमेशा व्यक्तिगत श्रेय के बजाय टीम की जीत और देश के सम्मान को सर्वोपरि रखते थे।

यह पाठ हमें सिखाता है कि सच्ची खेल भावना और अनुशासन ही किसी भी खिलाड़ी को महान बनाते हैं।

 

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❤️ 5. हार की जीत

यह कहानी ‘हार की जीत’ बाबा भारती और उनके प्रिय घोड़े ‘सुलतान’ के इर्द-गिर्द घूमती है। बाबा भारती अपने घोड़े से अपार प्रेम करते थे, जिसकी चर्चा सुनकर इलाके का कुख्यात डाकू खड्गसिंह उसे देखने पहुँचा। सुलतान की सुंदरता और चाल देखकर खड्गसिंह के मन में उसे पाने की लालसा जाग उठी और वह बाबा को धमकी देकर चला गया।

एक शाम, खड्गसिंह ने एक असहाय अपाहिज का भेष बनाकर बाबा भारती को धोखा दिया और उनका घोड़ा छीनकर भागने लगा। तभी बाबा भारती ने उससे केवल एक विनती की कि वह इस घटना का जिक्र किसी से न करे, अन्यथा लोग गरीबों और लाचारों पर विश्वास करना छोड़ देंगे। बाबा के इन उच्च विचारों ने डाकू के हृदय को झकझोर दिया।

आत्मग्लानि और पश्चाताप से भरकर खड्गसिंह ने रात के अंधेरे में चुपचाप घोड़ा वापस बाबा के अस्तबल में बाँध दिया। सुबह जब बाबा ने अपने घोड़े को वापस पाया, तो उनकी खुशी का ठिकाना न रहा। इस प्रकार, एक साधु की मानवता ने एक क्रूर डाकू को बदल दिया, जहाँ बाबा भारती हार कर भी जीत गए और खड्गसिंह जीतकर भी हार गया।

 

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❤️ 6. तुम कल्पना करो

‘तुम कल्पना करो’ गोपाल सिंह ‘नेपाली’ द्वारा रचित एक ओजपूर्ण कविता है, जो युवाओं को नव-निर्माण और बौद्धिक जागृति के लिए प्रेरित करती है। कवि का मानना है कि समाज की पुरानी और जर्जर नीतियां अब अप्रासंगिक हो चुकी हैं, इसलिए राष्ट्र के उत्थान के लिए नवीन कल्पनाओं की आवश्यकता है।

कविता इस बात पर जोर देती है कि दासता या गुलामी केवल आंसू बहाने या गुहार लगाने से समाप्त नहीं होती, बल्कि इसके लिए अडिग संकल्प और शक्ति की साधना जरूरी है। लेखक चित्तौड़ के महाराणा प्रताप जैसे वीरों का स्मरण कराते हुए कहते हैं कि यदि देश का युवा वर्ग निष्क्रिय हो गया, तो देश का गौरवशाली इतिहास और वीरता की कहानियाँ भी समाप्त हो जाएंगी।

प्रकृति के प्रतीकों जैसे स्वतंत्र आकाश, निर्बाध झरने और अडिग पर्वतों के माध्यम से कवि संदेश देते हैं कि स्वतंत्रता ही स्वाभाविक स्थिति है। यह कविता किशोरों और युवाओं को दरिद्रता और कुरीतियों को त्यागकर राष्ट्र की समृद्धि, ऋद्धि और सिद्धि के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य करने का आह्वान करती है।

संक्षेप में, यह रचना आत्मविश्वास, स्वाभिमान और देशप्रेम की भावना को जागृत कर एक नए समाज के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करती है।

 

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❤️ 7. पिता का पत्र पुत्र के नाम

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❤️ 8. मंत्र

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❤️ 9. बाल लीला

प्रस्तुत पाठ ‘बाल-लीला’ सूरदास द्वारा रचित है, जिसमें भगवान श्री कृष्ण की बाल सुलभ चेष्टाओं और उनकी मासूमियत का मनोहारी चित्रण किया गया है। पद में बालक कृष्ण अपनी माता यशोदा से शिकायत करते हुए कहते हैं कि ‘मैया मोरी, मैं नहीं माखन खायो’। वे तर्क देते हैं कि वे तो सुबह से गायों के पीछे मधुवन चले गए थे और शाम को घर लौटे हैं।

वे अपनी छोटी बाँहों का हवाला देते हुए कहते हैं कि वे ऊँचे टंगे छींके तक कैसे पहुँच सकते हैं। वे ग्वाल-बालों पर आरोप लगाते हैं कि उन्होंने ही जबरदस्ती उनके मुख पर माखन लगा दिया है। कृष्ण अपनी माता को भोली कहते हुए कहते हैं कि शायद वे उन्हें पराया समझकर दूसरों की बातों पर विश्वास कर रही हैं।

अंत में, कृष्ण के इस भोलेपन और चतुराई भरे तर्कों को सुनकर माता यशोदा भाव-विभोर हो जाती हैं और उन्हें हँसकर अपने गले से लगा लेती हैं। यह पद वात्सल्य रस का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो पाठक के मन में बाल कृष्ण के प्रति प्रेम और स्नेह जाग्रत करता है। इसमें सूरदास ने बाल मनोविज्ञान का बहुत ही सुंदर प्रयोग किया है।

 

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❤️ 10. भीष्म की प्रतिज्ञा

यह एकांकी हस्तिनापुर के सम्राट शान्तनु और निषादराज दाशराज की पुत्री सत्यवती के विवाह के प्रसंग पर आधारित है। राजा शान्तनु सत्यवती से विवाह करना चाहते थे, परंतु दाशराज ने एक कठिन शर्त रखी कि उनके बाद सत्यवती का पुत्र ही हस्तिनापुर की राजगद्दी पर बैठेगा। शान्तनु अपने योग्य पुत्र देवव्रत के प्रति अन्याय नहीं करना चाहते थे, इसलिए वे उदास रहने लगे।

जब देवव्रत को पिता की उदासी का कारण पता चला, तो वे स्वयं निषादराज के पास गए। पितृभक्ति का परिचय देते हुए देवव्रत ने न केवल राज्य का त्याग किया, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए कि भविष्य में उनकी संतान राज्य का दावा न करे, उन्होंने आजीवन ब्रह्मचारी रहने की भीषण प्रतिज्ञा की। उनकी इसी कठोर प्रतिज्ञा के कारण देवताओं ने आकाश से पुष्प वर्षा की और उनका नाम ‘भीष्म’ पड़ा।

अंततः दाशराज ने प्रसन्न होकर सत्यवती को भीष्म के साथ हस्तिनापुर विदा किया। यह कहानी भीष्म के त्याग, दृढ़ संकल्प और पिता के प्रति उनके अगाध प्रेम को दर्शाती है। भीष्म का यह बलिदान भारतीय इतिहास और पौराणिक कथाओं में अद्वितीय माना जाता है।

 

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❤️ 11. सरजू भैया

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❤️ 12. रहीम के दोहे

यह पाठ ‘रहीम के दोहे’ प्रसिद्ध कवि रहीम द्वारा रचित नीतिपरक दोहों का एक संग्रह है। इन दोहों के माध्यम से रहीम ने जीवन के अत्यंत महत्वपूर्ण और व्यावहारिक मूल्यों की शिक्षा दी है।

कवि के अनुसार, उत्तम स्वभाव वाले व्यक्तियों पर बुरी संगति का कोई प्रभाव नहीं पड़ता, ठीक वैसे ही जैसे चंदन के वृक्ष पर सांपों के लिपटे रहने के बाद भी उसमें जहर नहीं फैलता। वे प्रेम के संबंधों को धागे के समान नाजुक बताते हुए कहते हैं कि इसे कभी झटके से नहीं तोड़ना चाहिए, क्योंकि टूटने के बाद जुड़ने पर इसमें गाँठ पड़ जाती है।

रहीम परोपकार की महिमा गाते हुए कहते हैं कि जिस प्रकार वृक्ष अपने फल स्वयं नहीं खाते और सरोवर अपना पानी स्वयं नहीं पीते, उसी प्रकार सज्जन व्यक्ति अपनी संपत्ति का संचय दूसरों की भलाई के लिए करते हैं। वे समाज में छोटे और बड़े दोनों के महत्व को स्वीकारते हुए कहते हैं कि जहाँ सुई का काम हो, वहाँ तलवार काम नहीं आती।

इसके अतिरिक्त, वे धैर्य रखने और अपनी व्यथा को मन में ही रखने की सलाह देते हैं ताकि लोग उसका उपहास न उड़ाएँ। यह पाठ मनुष्य को एक बेहतर और समझदार इंसान बनने की प्रेरणा देता है।

 

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❤️ 13. दादा-दादी के साथ

यह कहानी पिंकी और विकी के परिवार की है, जिनके चचेरे भाई-बहन राहुल और पद्मिनी इंग्लैंड से भारत आते हैं। राहुल और पद्मिनी को अपने भारतीय रिश्तेदारों से मिलकर बहुत खुशी होती है, लेकिन वे यह देखकर हैरान रह जाते हैं कि पिंकी और विकी भारतीय होने के बावजूद हमेशा अंग्रेजी में बात करते हैं।

शाम को बिजली कटने पर सभी आँगन में बैठते हैं, जहाँ दादी उन्हें रामायण और महाभारत की कहानियाँ सुनाती हैं। राहुल और पद्मिनी इन कहानियों और भारतीय जीवनशैली का आनंद लेते हैं, जबकि पिंकी इन्हें पुराना और विज्ञान के युग में बेकार मानती है।

भोजन के समय भी विदेशी बच्चे पारंपरिक ‘सत्तू की लिट्टी’ मजे से खाते हैं, जबकि स्थानीय बच्चे विदेशी खाना पसंद करते हैं। अगले दिन वे पास के पुराने खंडहरों को देखने की योजना बनाते हैं, जिसमें पद्मिनी और राहुल की गहरी रुचि है।

यह कहानी आधुनिकता और परंपरा के बीच के अंतर को दर्शाती है और बताती है कि कैसे विदेशी परिवेश में रहने वाले बच्चे अपनी जड़ों के प्रति अधिक उत्सुक हो सकते हैं। कहानी पारिवारिक प्रेम, सांस्कृतिक मूल्यों और अपनी भाषा के महत्व पर जोर देती है।

 

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❤️ 14. डा0 भीमराव अंबेडकर

यह पुस्तक डॉ. भीमराव अम्बेडकर के प्रेरणादायक जीवन और भारतीय समाज में उनके अमूल्य योगदान पर आधारित है। 14 अप्रैल 1891 को महार जाति में जन्मे भीमराव को बचपन से ही छुआछूत जैसी कुरीतियों का सामना करना पड़ा, जिससे उन्होंने इस सामाजिक बुराई को मिटाने का दृढ़ संकल्प लिया।

उच्च शिक्षा के लिए वे अमेरिका और लंदन गए, जहाँ उन्होंने डॉक्टरेट और डी.एससी. की उपाधियाँ प्राप्त कीं। स्वदेश लौटकर उन्होंने दलितों के उत्थान के लिए ‘मूकनायक’ और ‘बहिष्कृत भारत’ जैसे समाचार पत्रों का संपादन किया।

भारत के स्वतंत्र होने पर वे संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष बने और एक समावेशी संविधान का निर्माण किया, जिसने सभी नागरिकों को समानता का अधिकार दिया। स्वतंत्र भारत के प्रथम कानून मंत्री के रूप में उन्होंने कई कानूनी सुधार किए। जीवन के अंतिम वर्षों में उन्होंने समानता के सिद्धांत को सर्वोपरि मानते हुए बौद्ध धर्म अपना लिया।

6 दिसंबर 1956 को उनके देहांत के बाद भी सारा देश उन्हें ‘बाबा साहब’ के रूप में सादर स्मरण करता है। यह कृति उनके संघर्ष, विद्वता और समाज सुधार के प्रति अटूट समर्पण को विस्तार से दर्शाती है।

 

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❤️ 15. भूल गया है क्यूँ इंसान

हरिवंशराय बच्चन द्वारा रचित कविता ‘भूल गया है क्यों इंसान’ मानवता और वैश्विक एकता का एक सशक्त संदेश देती है। कवि इस बात पर आश्चर्य प्रकट करते हैं कि मनुष्य अपनी मूल सच्चाई को क्यों भूल गया है। वे याद दिलाते हैं कि हम सभी का शरीर एक ही मिट्टी से बना है और हम सभी पर एक ही स्वच्छ आकाश की छाया है।

कोई भी व्यक्ति इस संसार में किसी विशेष वरदान या विशिष्टता के साथ जन्म नहीं लेता है। यद्यपि धरती पर मनुष्यों ने अलग-अलग देशों और सीमाओं का निर्माण किया है, लेकिन ये सभी देश एक ही पृथ्वी की संतान हैं। कवि स्पष्ट करते हैं कि चाहे हमारे देश अलग हों और हमारी वेशभूषा या पहनावा अलग हो, लेकिन हम सभी के भीतर का प्राण और हृदय एक ही है।

मानवीय संवेदनाएं और आत्मा की एकता भौगोलिक सीमाओं से परे है। यह कविता हमें जाति, धर्म और राष्ट्र के भेदभाव को भुलाकर मानवता के धर्म को अपनाने की प्रेरणा देती है। अंततः, यह संदेश दिया गया है कि बाहरी भिन्नताओं के बावजूद, आंतरिक रूप से सभी मनुष्य समान हैं और हमें एक-दूसरे के प्रति प्रेम और सहानुभूति रखनी चाहिए।

 

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❤️ 16. स्वार्थी दानव

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❤️ 17. फसलों का त्योहार

यह पाठ ‘फसलों के त्योहार’ भारत के विभिन्न राज्यों में कटाई के समय मनाए जाने वाले विविध उत्सवों का एक सुंदर वर्णन है। लेखक ने इसकी शुरुआत अपने व्यक्तिगत अनुभवों से की है, जहाँ खिचड़ी (मकर संक्रांति) के समय ठंड और घर की चहल-पहल का जिक्र है। जनवरी के मध्य में देश भर में फसलों से जुड़े कई त्यौहार मनाए जाते हैं जैसे उत्तर प्रदेश और बिहार में मकर संक्रांति, असम में बीहू, केरल में ओणम, तमिलनाडु में पोंगल और पंजाब में लोहड़ी।

झारखंड में ‘सरहुल’ बड़े उत्साह से मनाया जाता है जहाँ प्रकृति और साल के पेड़ों की पूजा होती है। तमिलनाडु में पोंगल के दिन नए धान, दूध और गुड़ को मटके में पकाकर ‘पोंगल-पोंगल’ के नारे लगाए जाते हैं। गुजरात में यह दिन आसमान को रंग-बिरंगी पतंगों से भर देता है।

कुमाऊँ में इसे ‘घुघुतिया’ कहते हैं, जहाँ विशेष पकवान बनाकर पक्षियों को खिलाए जाते हैं। यह पाठ हमें बताता है कि भले ही इन त्योहारों के नाम और ढंग अलग हों, लेकिन सबका उद्देश्य प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करना और खुशियाँ बाँटना है। अंत में, तिल के विभिन्न उपयोगों और क्षेत्रीय विविधता के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक एकता को दर्शाया गया है।

 

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❤️ 18. शेरशाह का मकबरा

यह अध्याय शेरशाह सूरी के जीवन और उनके द्वारा बनवाए गए प्रसिद्ध मकबरे के बारे में एक शैक्षिक विवरण प्रस्तुत करता है। कहानी स्कूल के बच्चों की एक यात्रा से शुरू होती है, जहाँ उनके शिक्षक पूर्णनाथ सर शेरशाह के इतिहास पर प्रकाश डालते हैं। शेरशाह भारत के एक महान शासक थे जिनका बचपन का नाम फरीद खाँ था।

उन्होंने 1540 ई. में हुमायूँ को पराजित कर सूरी वंश की स्थापना की। हालांकि उन्होंने केवल पाँच वर्ष शासन किया, लेकिन जनहित में ग्रैण्ड ट्रंक रोड जैसी विशाल सड़कें, सराय और कुएँ बनवाकर प्रशासनिक सुधारों की मिसाल पेश की।

सासाराम स्थित उनका मकबरा वास्तुकला का एक अद्भुत नमूना है। यह अष्टकोणीय मकबरा एक बड़े तालाब के बीच 45 मीटर ऊँचे चबूतरे पर बना है और अफगान शैली का प्रतिनिधित्व करता है। इसका गुम्बद ताजमहल से भी बड़ा है।

पाठ में ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया गया है और अंत में विद्यार्थियों के लिए अभ्यास प्रश्न एवं व्याकरण संबंधी गतिविधियाँ दी गई हैं, जो शेरशाह के शासनकाल और उनके स्थापत्य कला के योगदान को समझने में सहायक हैं।

 

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❤️ 19. बसंती हवा

यह कविता ‘वसंती हवा’ प्रसिद्ध कवि केदारनाथ अग्रवाल द्वारा रचित है। इसमें वसंत ऋतु की हवा का मानवीकरण किया गया है। हवा स्वयं को मस्तमौला, निडर और बेफिक्र बताती है, जिसका न कोई घर है और न ही कोई दुश्मन।

वह अपनी मर्जी से शहर, गाँव, बस्ती, नदी और हरे खेतों में घूमती है। कविता में हवा के शरारती स्वभाव का वर्णन है, जहाँ वह महुआ और आम के पेड़ों पर चढ़ती है, गेहूँ के खेतों में लहरें पैदा करती है और अलसी के पौधों के साथ ठिठोली करती है। जब वह अलसी की कलसी गिराने में असफल रहती है, तो अपनी हार मानकर सरसों से छेड़छाड़ नहीं करती।

हवा के इस आनंदमयी भ्रमण से पूरी सृष्टि—खेत, धूप और दिशाएँ—खिलखिलाकर हँसने लगती हैं। अंत में, कवि ने हवा के माध्यम से प्रकृति के उल्लास और वसंत के जीवंत स्वरूप को बेहद खूबसूरती से चित्रित किया है। यह कविता पाठकों को प्रकृति की स्वतंत्रता और खुशी का अनुभव कराती है।

 

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❤️ 20. पहेलियाँ

यह संकलन ’20 पहेलियाँ’ शीर्षक से है, जिसमें विभिन्न रोचक और ज्ञानवर्धक पहेलियाँ प्रस्तुत की गई हैं। इन पहेलियों के माध्यम से बच्चों की तार्किक क्षमता और सोचने की शक्ति को विकसित करने का प्रयास किया गया है। उदाहरण के तौर पर, इसमें ऑक्सीजन को लेकर पहेली है जो आग जलाने में सहायक होती है और जिसे पौधे दिन में बनाते हैं।

इसी तरह, ‘छाता’ के लिए एक पहेली है जो धूप में खिलता है और छाया में मुरझा जाता है। ‘पतंग’ का वर्णन एक ऐसी वस्तु के रूप में किया गया है जो बिना पंखों के उड़ती है और जिसके गले में सूत बंधा होता है। ‘मानचित्र’ को एक ऐसी नदी और सड़क बताया गया है जहाँ पानी और गाड़ी नहीं होती।

इसके अतिरिक्त, ‘चक्की’ और ‘गुलाबजामुन’ जैसे शब्दों पर आधारित मजेदार पहेलियाँ भी शामिल हैं। अंत में, अभ्यास के लिए बच्चों को पहेलियाँ संकलित करने और कक्षा में बुझाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। यह सामग्री मनोरंजक होने के साथ-साथ शिक्षाप्रद भी है, जो हिंदी भाषा के माध्यम से पाठकों का मनोरंजन करती है।

 

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Comments

  1. Akumar says

    September 15, 2022 at 2:23 pm

    ❤️ 19. बसंती हवा ye download nhi ho rha h

    Reply
    • bseb says

      October 4, 2022 at 1:37 pm

      hey @Aashutosh, लेट रिप्लाई के लिए क्षमा करें, लिंक अपडेट कर दिया गया है, अब आप बुक्स डाउनलोड कर सकते हैं |

      Reply

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