Bihar Board 4th Hindi Book 2026 PDF Download (कोंपल)
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BSEB Class 4 Hindi (कोंपल) Textbook PDF Free Download
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❤️ पाठ 1: याद तुम्हारी आती है (कविता)
यह कविता ‘याद तुम्हारी आती है’ प्रसिद्ध कवि रामनरेश त्रिपाठी द्वारा रचित है। इस कविता में कवि ने प्रकृति के सुंदर रूपों का वर्णन करते हुए ईश्वर की महिमा का गुणगान किया है।
कवि कहता है कि जब सुबह-सुबह चिड़ियाँ चहचहाने लगती हैं, कलियाँ खिलने लगती हैं और फूलों की खुशबू चारों ओर फैल जाती है, तब सृष्टि के रचयिता की याद आती है। इसके साथ ही, जब वर्षा ऋतु में बूँदें गिरती हैं, बिजली चमकती है और चारों तरफ हरियाली छा जाती है, तब भी ईश्वर का स्मरण हो उठता है।
ठंडी हवाएँ जब मस्ती और ताजगी लेकर आती हैं, तो वे उस परम सत्ता का संदेश देती प्रतीत होती हैं जिसने इस अद्भुत संसार को बनाया है। सरल और सुरीले शब्दों में रचित यह कविता पाठकों को प्रकृति के कण-कण में ईश्वर की उपस्थिति का अनुभव कराती है।
कवि ने ‘सिरजनहार’ शब्द का प्रयोग सृष्टि के निर्माता के लिए किया है और प्राकृतिक सौंदर्य के माध्यम से उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की है। यह रचना न केवल प्रकृति चित्रण करती है, बल्कि मनुष्य को अपने चारों ओर बिखरे ईश्वरीय चमत्कार को देखने की प्रेरणा भी देती है।
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❤️ पाठ 2: चार मित्र (कहानी)
यह कहानी चार मित्रों—एक चूहे, कौवे, कछुए और हिरण की अटूट मित्रता पर आधारित है। एक शाम जब हिरण घर नहीं लौटा, तो कौवे ने उड़कर उसे एक शिकारी के जाल में फँसा पाया। कौवा चूहे को अपनी पीठ पर बैठाकर वहाँ ले गया और चूहे ने जाल काटकर हिरण को मुक्त कर दिया।
तभी शिकारी के आने पर हिरण, कौवा और चूहा तो सुरक्षित स्थानों पर छिप गए, लेकिन धीमी चाल के कारण कछुआ पकड़ा गया। शिकारी ने कछुए को धनुष पर लटका लिया। अपने मित्र को बचाने के लिए बाकी तीनों ने एक चतुर योजना बनाई।
हिरण रास्ते में मरने का नाटक करते हुए लेट गया और कौवा उसकी आँखों पर चोंच मारने का अभिनय करने लगा। शिकारी कछुए को छोड़कर हिरण के पीछे भागा, जिसका लाभ उठाकर चूहे ने कछुए के फंदे काट दिए और वह पानी में छिप गया। हिरण भी तेजी से भाग निकला।
इस प्रकार अपनी बुद्धिमानी और एकता से चारों मित्रों ने एक-दूसरे की जान बचाई। यह कहानी ‘पंचतंत्र’ से ली गई है जो संकट के समय आपसी सहयोग और मित्रता का महत्व सिखाती है।
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❤️ पाठ 3: घर प्यारा (कविता)
‘घर प्यारा’ कविता दिविक रमेश द्वारा रचित है, जिसमें एक बच्चा अपनी माँ के इस दावे पर सवाल उठाता है कि घर केवल उनका है। बच्चा तर्क देता है कि घर में चूहे, मच्छर, मकड़ियाँ, छिपकलियाँ, चींटियाँ और तिलचट्टे जैसे कई जीव-जंतु भी रहते हैं, जो इसे अपना घर समझते हैं।
कविता के माध्यम से लेखक यह संदेश देना चाहते हैं कि घर केवल मनुष्यों का नहीं, बल्कि उन सभी प्राणियों का है जो इसमें निवास करते हैं। बच्चा देखता है कि कैसे चूहे पकड़म-पकड़ी खेल रहे हैं और चींटियाँ कतार में दौड़ रही हैं।
अंत में, वह कहता है कि जो भी जीव यहाँ सदा से रहता है, यह घर उन सबका ही प्यारा घर है। यह कविता बच्चों को जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशीलता सिखाती है और सह-अस्तित्व की भावना को बढ़ावा देती है।
इसमें घर के विभिन्न कोनों में रहने वाले जीवों की गतिविधियों का सरल और रोचक वर्णन किया गया है।
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❤️ पाठ 4: बिल्ली का पंजा (कहानी)
यह कहानी चार मित्रों—गंगाधर, लीलाधर, मुकेश और संजय—की है जो कंचनपुर गाँव में रूई का व्यापार करते थे। उनके गोदाम में चूहों के आतंक से बचने के लिए उन्होंने मिलकर एक बिल्ली पाली और तय किया कि प्रत्येक मित्र बिल्ली के एक-एक पंजे का मालिक होगा। एक बार गंगाधर के पंजे (दायाँ अगला पंजा) में खाज हो गई, जिसके उपचार के लिए उसने तेल से भीगी रूई की पट्टी बाँध दी।
दुर्घटनावश, एक रात वह पट्टी जलते हुए दीपक की लौ के संपर्क में आ गई और बिल्ली के पंजे में आग लग गई। घबराई हुई बिल्ली गोदाम में इधर-उधर भागने लगी, जिससे पूरी रूई जलकर राख हो गई। अन्य तीन मित्रों ने नुकसान के लिए गंगाधर को दोषी ठहराया क्योंकि आग उसके पंजे से लगी थी।
मामला पंचायत में पहुँचा, जहाँ पंचों ने बहुत ही चतुर फैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि यद्यपि आग गंगाधर के पंजे में लगी थी, लेकिन वह पंजा अकेला नहीं भाग सकता था; उसे बाकी के तीन स्वस्थ पंजे (लीलाधर, मुकेश और संजय के) गोदाम में लेकर भागे थे। इसलिए, नुकसान की भरपाई उन तीनों को ही करनी होगी।
इस प्रकार पंचायत के न्यायपूर्ण फैसले से गंगाधर दोषमुक्त हुआ।
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❤️ पाठ 5: घाघ भड्डरी (कविता)
यह पुस्तक प्रसिद्ध लोक कवि और कृषि पंडित घाघ और भड्डरी की कहावतों और उनके अनुभवों पर आधारित है। घाघ भड्डरी की कहावतें मुख्य रूप से मौसम, कृषि, वर्षा और ग्रामीण जीवन के व्यावहारिक ज्ञान को दर्शाती हैं।
प्रस्तुत अंश में मौसम के पूर्वानुमान से संबंधित विभिन्न संकेतों की व्याख्या की गई है। जैसे, यदि उत्तर दिशा में बिजली चमके और पूर्व से हवा चले, तो यह वर्षा होने का स्पष्ट संकेत है।
इसी प्रकार, गिरगिट का उल्टा होकर ऊपर चढ़ना भी भारी वर्षा की चेतावनी देता है। पुस्तक में विभिन्न महीनों जैसे अगहन, पूस, माघ और फागुन में होने वाली वर्षा का फसलों पर पड़ने वाले प्रभाव का भी सटीक वर्णन है।
जहाँ अगहन और पूस की वर्षा फसलों के लिए अत्यंत लाभकारी और पैदावार बढ़ाने वाली मानी गई है, वहीं फागुन की वर्षा को हानिकारक बताया गया है जिससे बीज भी प्राप्त होना कठिन हो जाता है। यह रचना ग्रामीण भारत की पारंपरिक बुद्धिमत्ता और प्रकृति के साथ उनके गहरे जुड़ाव को खूबसूरती से प्रस्तुत करती है, जो आज भी किसानों के लिए प्रासंगिक है।
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❤️ पाठ 6: सेर को सवा सेर (कहानी)
यह कहानी तीन गपोड़ी भाइयों और एक चतुर राजकुमार के बीच हुई गप्पों की प्रतियोगिता पर आधारित है। एक गाँव के रहने वाले ये तीन भाई, जो खुद को गप्प मारने में उस्ताद समझते थे, एक सराय में एक अमीर राजकुमार को लूटने की योजना बनाते हैं। वे राजकुमार के सामने शर्त रखते हैं कि जो भी दूसरे की गप्प पर अविश्वास करेगा, वह उसका गुलाम बन जाएगा।
तीनों भाई बारी-बारी से अविश्वसनीय और काल्पनिक कहानियाँ सुनाते हैं—जैसे सौ मील ऊँचे ताड़ के पेड़ पर चढ़ना, चूहे के बिल में हाथियों का मिलना और व्हेल की पूँछ पकड़कर हवा में उड़ना। हालाँकि, राजकुमार हर बात पर शांति से सहमति जताता है, जिससे उनकी योजना विफल हो जाती है। अंत में, राजकुमार अपनी ‘गप्प’ सुनाता है कि ये तीनों भाई उसके भागे हुए गुलाम हैं।
शर्त के अनुसार, तीनों भाइयों को अपनी हार माननी पड़ती है और वे राजकुमार के जाल में फँस जाते हैं। राजकुमार उन्हें भविष्य में लोगों को न ठगने का वचन लेकर मुक्त कर देता है। यह कहानी सिखाती है कि चालाकी का जवाब अक्सर अधिक समझदारी और बुद्धिमानी से दिया जा सकता है।
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❤️ पाठ 7: सीखो (कविता)
‘सीखो’ श्रीधर पाठक द्वारा रचित एक प्रेरणादायक कविता है, जो हमें प्रकृति के विभिन्न तत्वों से जीवन की महत्वपूर्ण शिक्षाएँ लेने के लिए प्रेरित करती है। कवि के अनुसार, हमें फूलों से मुस्कुराना, भौंरों से मधुर गान करना और पेड़ों की झुकी हुई डालियों से विनम्रता के साथ शीश झुकाना सीखना चाहिए। जिस प्रकार दीपक अंधकार को दूर करता है, वैसे ही हमें भी अपने ज्ञान से अज्ञानता को मिटाना चाहिए।
पृथ्वी हमें प्राणियों की सच्ची निस्वार्थ सेवा करना सिखाती है। सूरज की किरणें हमें स्वयं जागने और दूसरों को जगाने का संदेश देती हैं, जबकि लताएँ और पेड़ सबको प्रेम से गले लगाने की सीख देते हैं। जलधारा हमें जीवन-पथ पर निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है, और धुआँ हमें सदैव उन्नति की ओर, यानी ऊँचे स्तर पर चढ़ने की प्रेरणा देता है।
शिक्षक संकेत के अनुसार, यह कविता बच्चों को प्रकृति के गुणों को आत्मसात करने और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करती है। पाठ में शब्दार्थ और अभ्यास कार्य भी शामिल हैं, जो बच्चों की समझ और भाषा कौशल को बढ़ाने में सहायक हैं। सारांशतः, यह कविता प्रकृति को एक महान शिक्षक के रूप में प्रस्तुत करती है।
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❤️ पाठ 8: सुनीता की पहियाकुर्सी (कहानी)
यह कहानी ‘सुनीता की पहिया कुर्सी’ एक साहसी लड़की सुनीता के बारे में है, जो चलने-फिरने के लिए पहिया कुर्सी का सहारा लेती है। वह अपने रोज़ाना के काम स्वतंत्र रूप से करना चाहती है और पहली बार अकेले बाज़ार जाने का निर्णय लेती है। रास्ते में वह बच्चों को खेलते देखती है और थोड़ी उदास हो जाती है क्योंकि वह भी उनके साथ खेलना चाहती है।
उसे लोग अलग नज़रों से देखते हैं, जो उसे अच्छा नहीं लगता। बाज़ार में उसकी मुलाकात अमित नाम के एक लड़के से होती है, जिसका कद छोटा है। अमित उसकी मदद करता है और दोनों के बीच एक अनूठा रिश्ता बनता है।
सुनीता दुकानदार के उस व्यवहार का विरोध करती है जहाँ वह उसे अक्षम समझकर उसकी गोद में चीनी की थैली रख देता है। अंत में, सुनीता और अमित एक-दूसरे का साथ पाकर खुश होते हैं। यह कहानी हमें सिखाती है कि दिव्यांग बच्चे भी अन्य बच्चों की तरह सक्षम होते हैं और वे केवल सम्मान और सामान्य व्यवहार चाहते हैं।
सुनीता की आत्मनिर्भरता और उसका आत्मविश्वास पाठकों को प्रेरित करता है कि वे अपनी शारीरिक सीमाओं से आगे बढ़कर जीवन जिएं।
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❤️ पाठ 9: हमारा आहार (कविता)
‘हमारा आहार’ एक ज्ञानवर्धक कविता है जो स्वस्थ जीवन के लिए संतुलित भोजन के महत्व को रेखांकित करती है। कविता के माध्यम से लेखक बच्चों को विभिन्न प्रकार की सब्जियों जैसे भिंडी, परवल, नेनुआ और स्वास्थ्यवर्धक फलों जैसे आम, पपीता और केला खाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
इसमें दूध, दही और पर्याप्त पानी पीने की आवश्यकता पर बल दिया गया है। कविता यह संदेश देती है कि केवल आलू पर निर्भर न रहकर हरी सब्जियों और ताजे भोजन का सेवन करना चाहिए, क्योंकि सही खान-पान ही शरीर में चुस्ती-फुर्ती लाता है और रोगों (व्याधि) को दूर रखता है।
अधिक खाने से बचने और नियमित आहार लेने की सलाह दी गई है ताकि कभी बीमार न पड़ें। पुस्तक के अभ्यास खंड में संज्ञा, क्रिया, और भाषाई कौशल विकसित करने के लिए रोचक गतिविधियाँ और प्रश्न भी दिए गए हैं, जो छात्रों को पोषण के प्रति जागरूक बनाते हैं।
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❤️ पाठ 10: तीन बुद्धिमान (एकांकी)
‘तीन बुद्धिमान’ एक शिक्षाप्रद एकांकी है जो गोपी, हरि और देव नामक तीन मित्रों की सूझबूझ और बुद्धिमत्ता पर आधारित है। ये तीनों मित्र काम की तलाश में जयपुर जा रहे होते हैं। रास्ते में वे जमीन पर ऊँट के पैरों के निशान देखते हैं और अपनी सूक्ष्म अवलोकन क्षमता से उसकी विशेषताओं का अनुमान लगाते हैं।
जब उनकी मुलाकात एक परेशान व्यापारी से होती है जिसका ऊँट खो गया है, तो वे उसे बताते हैं कि उसका ऊँट एक पैर से लँगड़ा, दाईं आँख से अंधा और छोटी पूँछ वाला है। व्यापारी को संदेह होता है कि उन्होंने ही उसका ऊँट चुराया है और वह उन्हें राजा के पास ले जाता है। राजा के सामने तीनों मित्र तार्किक रूप से समझाते हैं कि उन्होंने केवल तीन पैरों के निशान देखकर उसके लँगड़े होने, केवल बाईं ओर के पत्ते खाने से उसके अंधे होने और मक्खियों के कारण घाव न भर पाने से उसकी पूँछ छोटी होने का निष्कर्ष निकाला।
राजा उनकी इस अद्भुत तर्कशक्ति और बुद्धिमानी से अत्यंत प्रभावित होते हैं। वे उन्हें निर्दोष मानकर सम्मान देते हैं और अपने दरबार में मंत्री के पद पर नियुक्त करते हैं। यह कहानी सिखाती है कि ध्यानपूर्वक अवलोकन और विवेक से किसी भी समस्या का समाधान निकाला जा सकता है।
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❤️ पाठ 11: टेसू राजा (कविता)
यह कविता प्रसिद्ध कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ द्वारा रचित है। इसमें टेसू राजा नामक एक पात्र की बाल-सुलभ ज़िद का मनोरंजक वर्णन किया गया है। टेसू राजा एक जगह अड़कर खड़े हो गए हैं और खाने के लिए ‘दही-बड़े’ की माँग कर रहे हैं।
कवि उन्हें दही-बड़े खिलाने की पूरी प्रक्रिया को क्रमबद्ध तरीके से समझाता है। दही-बड़े बनाने के लिए सबसे पहले खेत खोदकर उड़द उगाने, फसल काटने, उसे साफ करने और फिर उसे पीसकर पिट्ठी बनाने की आवश्यकता होती है। इसके बाद गोल टिकिए बनाकर, उन्हें बेलकर और चूल्हे पर तलकर तैयार किया जाता है।
फिर उन्हें पानी में उबालकर फुलाया जाता है और अंत में दही में डालकर नमक-मिर्च और चाँदी का वर्क लगाकर सजाया जाता है। कवि कहता है कि जब एक चम्मच आ जाएगा, तभी टेसू राजा को ये स्वादिष्ट दही-बड़े खिलाए जा सकेंगे। यह कविता बच्चों को भोजन बनाने की मेहनत और प्रक्रिया से अवगत कराने के साथ-साथ लोक-परंपराओं से भी जोड़ती है।
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❤️ पाठ 12: ऐसे थे बापू (प्रेरक-प्रसंग)
यह पाठ महात्मा गाँधी के जीवन की दो प्रेरणादायक घटनाओं पर आधारित है। पहली घटना में, बापू बंबई में एक कांग्रेस महासभा के दौरान अपनी एक छोटी सी पेंसिल खो जाने पर बहुत परेशान हो जाते हैं। काका साहब कालेलकर उन्हें अपनी पेंसिल देने का प्रस्ताव रखते हैं, लेकिन बापू जिद करते हैं कि उन्हें वही पुरानी छोटी पेंसिल चाहिए।
अंततः पेंसिल मिल जाती है, और बापू बताते हैं कि वह पेंसिल मद्रास के एक छोटे बालक ने उन्हें बड़े प्यार से दी थी, जो उनके लिए किसी भी कीमती वस्तु से बढ़कर थी। दूसरी घटना में, एक बालक बापू को बिना कुर्ते के देखकर दुखी हो जाता है और उनसे पूछता है कि वे कुर्ता क्यों नहीं पहनते। बापू सरलता से उत्तर देते हैं कि वे बहुत गरीब हैं।
बालक अपनी माँ से कुर्ता सिलवा देने का आग्रह करता है, तब बापू कहते हैं कि उनके चालीस करोड़ भाई-बहन हैं और जब तक उन सबके तन पर कुर्ता नहीं होगा, वे अकेले कैसे पहन सकते हैं। यह सुनकर बालक को समझ आता है कि बापू के लिए पूरा देश ही उनका परिवार है। यह पाठ बापू के सादगीपूर्ण जीवन, बच्चों के प्रति उनके प्रेम और समस्त देशवासियों के प्रति उनकी संवेदनशीलता को दर्शाता है।
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❤️ पाठ 13: चाचा का पत्र (पत्र)
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❤️ पाठ 14: बिजूका (कविता)
यह कविता ‘बिजूका’ कवि भगवती प्रसाद द्विवेदी द्वारा रचित है। इसमें खेत की रखवाली करने वाले बिजूका का सजीव चित्रण किया गया है। बिजूका लकड़ी का बना होता है, जिसके सिर पर काली हांडी और शरीर पर फटे-पुराने कपड़े होते हैं।
वह खेत में मजबूती से खड़ा रहकर नीलगाय, भैंसा और अन्य पशु-पक्षियों को डराकर फसलों की रक्षा करता है। मौसम की मार, चाहे वह कड़ी धूप हो, कड़ाके की ठंड हो या तेज बारिश, बिजूका अडिग रहकर एक वफादार सैनिक की तरह अपनी ड्यूटी करता है। कविता में उसे किसान का सच्चा हमजोली और दोस्त बताया गया है।
वह मौन रहकर सब कुछ देखता है और उपेक्षित होने के बावजूद फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। यह पाठ बिजूका के महत्व को दर्शाते हुए मानवीय गुणों जैसे धैर्य और वफादारी की प्रेरणा देता है। अभ्यास कार्य के माध्यम से बच्चों को भाषा, पर्यायवाची और कल्पनाशीलता के विकास का अवसर भी प्रदान किया गया है।
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❤️ पाठ 15: शूलपाणि (कहानी)
यह कहानी भगवान महावीर और शूलपाणि नामक एक क्रूर राक्षस के बारे में है। जब भगवान महावीर आस्थिक ग्राम पहुँचे, तो ग्रामीणों ने उन्हें शूलपाणि के आतंक से सावधान किया, जो अपने नुकीले हथियार और विषैले ‘कौशिक’ साँप से लोगों को मार डालता था। महावीर जी निडर होकर एक पीपल के पेड़ के नीचे ध्यानमग्न हो गए।
जब शूलपाणि ने उन्हें मारने की कोशिश की और साँप को डसने का आदेश दिया, तो महावीर के शांत वचनों ने साँप को रोक दिया। क्रोधित शूलपाणि ने स्वयं आक्रमण करना चाहा, पर साँप ने उसे ही डस लिया। मरणासन्न शूलपाणि को देख महावीर विचलित नहीं हुए, बल्कि करुणावश जंगल से जड़ी-बूटी लाकर उसका उपचार किया और उसकी जान बचाई।
भगवान की इस दया और निस्वार्थ सेवा से शूलपाणि का हृदय परिवर्तन हो गया। वह महावीर का शिष्य बन गया और हिंसा त्याग कर लोगों की सहायता करने लगा। यह कहानी संदेश देती है कि प्रेम और क्षमा से बड़े से बड़े शत्रु को भी बदला जा सकता है।
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❤️ पाठ 16: साहसी ऋचा (कहानी)
यह कहानी एक बहादुर लड़की ऋचा की है, जो बिहार के वैशाली जिले की रहने वाली है। बरसात के मौसम में जब ऋचा और उसकी छोटी बहन शिखा स्कूल जा रही थीं, तब शिखा सड़क किनारे एक गहरे गड्ढे में फिसल गई। गड्ढे में बहुत पानी भरा था और शिखा डूबने लगी।
अपनी बहन को संकट में देख ऋचा ने घबराने के बजाय सूझबूझ दिखाई। उसने अपना दुपट्टा शिखा की ओर फेंका और उसे मजबूती से पकड़कर बाहर खींच लिया। इस प्रकार ऋचा ने अपनी बहन की जान बचाई।
स्कूल पहुँचने पर जब अध्यापिका को इस घटना का पता चला, तो उन्होंने ऋचा की बहादुरी की बहुत प्रशंसा की। यह एक सच्ची घटना है जो हमें मुसीबत के समय साहस और धैर्य से काम लेने की प्रेरणा देती है। ऋचा जैसी बेटियाँ समाज के लिए गर्व का विषय हैं।
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❤️ पाठ 17: बल्ब (कविता)
यह पुस्तक थॉमस अल्वा एडीसन द्वारा बिजली के बल्ब के आविष्कार की कहानी को एक कविता के माध्यम से प्रस्तुत करती है। कविता के अनुसार, एक समय था जब लोग सूरज ढलते ही सो जाते थे क्योंकि चारों ओर अंधेरा छा जाता था।
मानव विकास के क्रम में सबसे पहले आग की खोज हुई, जिसने अंधकार से थोड़ी राहत दिलाई। इसके बाद दीपक, लालटेन और लैंप का युग आया, लेकिन ये पूरी दुनिया को पर्याप्त रोशनी देने में असमर्थ थे।
अंततः अमरीकी वैज्ञानिक थॉमस एडीसन ने बिजली के बल्ब का आविष्कार किया, जिसने रात को भी दिन के समान उजाले से भर दिया। अब मजबूरी में जल्दी सोने की आवश्यकता नहीं रही।
पुस्तक में अभ्यास कार्य भी दिए गए हैं, जिनमें सही-गलत का चयन, रोशनी के साधनों का विकास क्रम और भाषा ज्ञान से संबंधित गतिविधियाँ शामिल हैं। यह बच्चों को विज्ञान और आविष्कार के महत्व को सरल भाषा में समझाने का एक सराहनीय प्रयास है, जिसमें संज्ञा के उदाहरणों और समानार्थक शब्दों के माध्यम से भाषाई कौशल को भी बढ़ावा दिया गया है।
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❤️ पाठ 18: बौना हुआ पहाड़ (जीवनी)
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❤️ पाठ 19: सुबह (कविता)
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❤️ पाठ 20: पत्तियों का चिड़ियाघर (कविता)
‘पत्तियों का चिड़ियाघर’ अरविंद गुप्ता द्वारा रचित एक अत्यंत रोचक और शिक्षाप्रद कविता है, जो बच्चों को प्रकृति और विशेष रूप से पेड़ों के पत्तों से जोड़ने का अनूठा प्रयास करती है। कवि पत्तों को पेड़ों के ‘कपड़े’ बताते हैं और कहते हैं कि ये पेड़ के बस्ते में रखे सस्ते और सुंदर खिलौनों की तरह हैं।
इस कविता में पत्तों के विभिन्न प्रकारों, जैसे केला, बरगद, अनार, पीपल, कनेर, इमली, बबूल और ढाक का वर्णन किया गया है। कवि बच्चों को प्रोत्साहित करते हैं कि वे पत्तों को छूकर देखें, उन्हें अपना मित्र बनाएं और उनकी विविध आकृतियों को पहचानें।
कविता में एक रचनात्मक गतिविधि का सुझाव भी दिया गया है, जहाँ बच्चे सूखे पत्तों को अखबारों की तह के बीच सुखाकर, उन्हें कागज पर चिपकाकर एक सुंदर ‘चिड़ियाघर’ बना सकते हैं। किसी पत्ते से चेहरा, किसी से पूँछ, तो किसी से लंबी मूँछें बनाई जा सकती हैं।
यह रचना न केवल बच्चों की कल्पनाशीलता को बढ़ाती है, बल्कि उन्हें पर्यावरण के प्रति संवेदनशील भी बनाती है। कविता के अंत में रेलवे सुरक्षा से संबंधित एक महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश भी शामिल किया गया है, जो मानव रहित रेलवे क्रॉसिंग पर सावधानी बरतने की सलाह देता है।
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❤️ पाठ 21: बरगद का पेड़ (कहानी)
यह कहानी एक विशाल बरगद के पेड़ और शंकर नामक एक गड़रिये बालक के बीच हुए संवाद पर आधारित है। एक दिन थककर शंकर बरगद की घनी छाया में सो रहा था। उसने पेड़ के बड़े आकार की तुलना में उसके छोटे फलों को देखा और पेड़ का मज़ाक उड़ाया।
तभी एक छोटा फल उसके माथे पर गिरा, जिससे उसकी नींद खुल गई। पेड़ ने हँसते हुए उसे समझाया कि यदि फल नारियल जितना बड़ा होता, तो आज उसका सिर फूट जाता। बरगद दादा ने शंकर को प्रकृति के संतुलन और आपसी निर्भरता का पाठ पढ़ाया।
उन्होंने बताया कि कैसे चिड़ियाँ उनके पत्तों को खाने वाली इल्लियों को खाकर पेड़ की मदद करती हैं, और केंचुए मिट्टी को उपजाऊ बनाकर उसकी जड़ों को मज़बूत करते हैं। पेड़ ने यह भी समझाया कि चिड़ियाँ कीड़ों पर नियंत्रण रखकर घास और भेड़ों के चारे को सुरक्षित रखती हैं। अंत में, शंकर को अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने पेड़ से माफी माँगी।
वह समझ गया कि इस संसार में मनुष्य, पशु-पक्षी और पेड़-पौधे सभी एक-दूसरे पर निर्भर हैं और कोई भी अकेला जीवित नहीं रह सकता। यह कहानी हमें पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश देती है।
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बुक भए हुआ नही है।
Sorry @Guriya, मैं आपकी बात समझ नही पाया | आपको क्या प्रॉब्लम हो रही है?