Bihar Board Class 3 Hindi Book 2026 PDF Download (कोंपल)
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BSEB Class 3 Hindi (कोंपल) Book PDF Free Download
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❤️ पाठ 1: प्रार्थना (कविता)
यह पुस्तक प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों के लिए तैयार की गई एक उत्कृष्ट हिंदी पाठ्यपुस्तक है। पुस्तक का आरंभ रवींद्रनाथ ठाकुर द्वारा रचित एक अत्यंत प्रेरणादायक प्रार्थना ‘देश की माटी’ से होता है।
इस कविता के माध्यम से कवि ईश्वर से देश की मिट्टी, जल, वायु, फल, घर, घाट और वनों को सरस, सरल और विमल बनाने की कामना करते हैं। कविता का मुख्य स्वर राष्ट्रीय एकता और प्रेम है, जहाँ सभी देशवासियों के तन, मन और भाषा को एक होने का आह्वान किया गया है।
पुस्तक में विद्यार्थियों के भाषाई कौशल को विकसित करने के लिए विविध अभ्यास प्रश्न दिए गए हैं, जिनमें शब्दार्थ, कविता की व्याख्या, और रचनात्मक लेखन शामिल हैं। यह पाठ्यपुस्तक न केवल बच्चों को हिंदी भाषा की बारीकियों से परिचित कराती है, बल्कि उनमें अपने देश के प्रति प्रेम, स्वच्छता और भाईचारे की भावना भी जागृत करती है।
सरल भाषा शैली और लयबद्ध कविताओं के माध्यम से यह छात्रों के मानसिक और चारित्रिक विकास में सहायक सिद्ध होती है।
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❤️ पाठ 2: प्रतीक्षा (प्रेरक-प्रसंग)
यह कहानी भगवान बुद्ध और उनके शिष्य आनंद के जीवन की एक प्रेरक घटना पर आधारित है। एक बार बुद्ध राजगीर की यात्रा के दौरान प्यासे हुए और उन्होंने आनंद को पास के एक झरने से पानी लाने को कहा। आनंद ने देखा कि बैलगाड़ियों के गुजरने के कारण झरने का पानी बहुत गंदा हो गया है, इसलिए वे बिना पानी लिए लौट आए।
बुद्ध ने उन्हें बार-बार उसी झरने पर भेजा। अंततः चौथी बार जाने पर आनंद ने पाया कि धैर्य और प्रतीक्षा के कारण मिट्टी और पत्ते नीचे बैठ गए थे और पानी आईने की तरह स्वच्छ हो गया था। इस प्रसंग के माध्यम से बुद्ध ने एक महान जीवन दर्शन सिखाया कि जैसे झरने का पानी स्वतः साफ हो गया, वैसे ही हमारे मन में आने वाले बुरे विचारों और अशांति को भी धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा करके शांत किया जा सकता है।
यदि हम अपने मन की झील के शांत होने का इंतजार करें, तो सब कुछ फिर से स्पष्ट और स्वच्छ हो जाता है। यह पाठ हमें कठिन परिस्थितियों में जल्दबाजी न करने और संयम बनाए रखने की महत्ता समझाता है। कहानी में प्रयुक्त ‘प्रतीक्षा’ शब्द केवल इंतजार को नहीं, बल्कि मानसिक स्पष्टता प्राप्त करने के लिए आवश्यक धैर्य को भी दर्शाता है।
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❤️ पाठ 3: मेरा गाँव (कविता)
यह कविता ‘मेरा गाँव’ ग्रामीण जीवन की सुंदरता और सरलता का वर्णन करती है। कवि पाठकों को अपने गाँव आने का निमंत्रण देता है जो नदी के किनारे स्थित है जहाँ लोग नाव से पहुँच सकते हैं। यद्यपि अब गाँव में गाड़ी-मोटर भी तेज़ रफ़्तार से चलती हैं, फिर भी वहाँ की प्राकृतिक सुंदरता बरकरार है।
बच्चे आम के बगीचों (अमराई) की छाँव में खेलते हैं। गाँव की सबसे बड़ी विशेषता वहाँ के लोगों का आपसी प्रेम और मिलजुलकर रहना है; वहाँ किसी प्रकार का अलगाव नहीं है। यहाँ शहर की तरह सिनेमा हॉल या भीड़-भाड़ वाला शोर-शराबा नहीं है, बल्कि चारों ओर खेत और बागान हैं जहाँ घूमने पर पैरों में मिट्टी लगती है।
मेले के समय गाँव में बहुत उत्साह और धमाचौकड़ी होती है और सभी लोग पंचायत भवन के पास एकत्र होते हैं। यह कविता शांतिपूर्ण और खुशहाल ग्रामीण परिवेश का सजीव चित्रण करती है और पाठकों को उस शांति का अनुभव करने के लिए आमंत्रित करती है। इसके अतिरिक्त, पाठ में अभ्यास कार्य भी दिए गए हैं जो बच्चों को संज्ञा और ग्रामीण परिवेश की समझ विकसित करने में मदद करते हैं।
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❤️ पाठ 4: बब्बन बंदर
यह कहानी ‘बब्बन बंदर’ के बारे में है, जिसे स्कूल जाना पसंद नहीं था। जंगल के राजा गब्बर शेर ने आदेश दिया था कि सभी बच्चे स्कूल जाएँ और नियमित आने वालों को इनाम मिलेगा। लल्ली लोमड़ी बच्चों को नाचते-गाते हुए बहुत अच्छे से पढ़ाती थी और सभी बच्चे खुश थे।
लेकिन बब्बन बंदर एक दिन चुपके से स्कूल से भागकर जंगल में घूमने लगा। वह एक बेल के पेड़ पर चढ़ गया, जहाँ शेर ने उसे देख लिया। बब्बन ने बहाना बनाया कि वह लोमड़ी के लिए बेल लेने आया है, पर शेर ने उसका झूठ पकड़ लिया।
शेर ने उसे समझाया कि पढ़ाई-लिखाई से ही वह समझदार बनेगा। शेर की बात मानकर बब्बन वापस स्कूल गया और मन लगाकर पढ़ने लगा। वह कक्षा में सबसे अच्छा छात्र बन गया।
उसकी मेहनत और नियमितता देख कर गब्बर शेर ने उसे एक डफली इनाम में दी। यह कहानी शिक्षा के महत्त्व और अनुशासन को दर्शाती है।
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❤️ पाठ 5: खूब मजे हैं मौसम के (कविता)
यह पाठ ‘खूब मजे हैं मौसम के’ विभिन्न ऋतुओं और उनकी विशेषताओं पर आधारित एक कविता है। कविता के माध्यम से बताया गया है कि मौसम अपनी मर्जी से कुछ भी कर सकता है।
वह सर्दी लाकर कुल्फी जमा सकता है, वसंत में फूल खिलाकर धरती को सजा सकता है, और पतझड़ के माध्यम से पेड़ों के पत्तों को झड़ाकर ‘खड़-खड़’ का राग सुना सकता है। वर्षा ऋतु में मौसम फसलें उगाता है और चारों ओर हरियाली बिखेरता है, जबकि गर्मी के मौसम में बच्चों को लंबी छुट्टियाँ मनाने का अवसर मिलता है।
पाठ के अंत में अभ्यास कार्य दिए गए हैं, जिनमें विद्यार्थियों से मौसम के प्रभावों, उनकी पसंद-नापसंद और विभिन्न ऋतुओं में होने वाले बदलावों के बारे में प्रश्न पूछे गए हैं। इसमें शब्दार्थ और पर्यायवाची शब्दों (जैसे धरती-जमीन, फूल-पुष्प) का भी अभ्यास शामिल है।
यह पाठ बच्चों को प्रकृति के बदलते स्वरूप और प्रत्येक मौसम के आनंद से परिचित कराता है।
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❤️ पाठ 6: जंगल मे सभा (खुली कहानी)
यह पाठ ‘जंगल में सभा’ स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर आधारित है। जंगल के सभी जानवर बरगद के पेड़ के नीचे एक सभा आयोजित करते हैं, जिसकी अध्यक्षता हाथी करता है।
सभा के दौरान, खरगोश अपनी पीड़ा व्यक्त करता है कि भालू कचरा उसके बिल के पास फेंकता है, बंदर केले के छिलके रास्ते में डालता है और तालाब का पानी दूषित हो रहा है। वह गंदगी से परेशान होकर जंगल छोड़ने की बात करता है।
हाथी स्वीकार करता है कि यह सबकी गलती है। कहानी के माध्यम से बच्चों को साफ-सफाई, कूड़ेदान का उपयोग और सामूहिक जिम्मेदारी की सीख दी गई है।
इसमें संज्ञा के प्रकार जैसे जातिवाचक और समूहवाचक संज्ञा का भी परिचय दिया गया है। अंत में, छात्रों को परिवेश को स्वच्छ रखने और बीमारियों से बचने के लिए प्रेरित किया गया है।
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❤️ पाठ 7: फुलवारी (कविता)
‘फुलवारी’ एक अत्यंत सुंदर और शिक्षाप्रद कविता है जो फूलों के माध्यम से बच्चों को जीवन के महत्वपूर्ण गुण सिखाती है। इस कविता में बताया गया है कि फुलवारी रंग-बिरंगे फूलों से सजी हुई है और मंद हवा के झोंकों के साथ झूल रही है। यहाँ जूही, चंपा, बेला, सफेद गुलाब और लाल कमल जैसे फूल अपनी शोभा बिखेर रहे हैं।
तितलियाँ इन फूलों पर मंडराती हैं और मीठा रस पीती हैं, जबकि भँवरे गुनगुनाकर अपना मधुर गान सुनाते हैं। कविता की सबसे प्रमुख विशेषता यह है कि इतने आकर्षक रंग-रूप और खुशबू होने के बावजूद फूलों को अपनी सुंदरता पर तनिक भी अभिमान नहीं है। वे सभी के मन को प्रसन्न करने में ही अपना मान समझते हैं।
कविता के अंत में बच्चों को फूलों जैसा बनने की प्रेरणा दी गई है, ताकि वे भी फूलों की तरह सदा मुस्कुराएँ और अपनी अच्छाई की सुगंध से पूरे संसार को महकाएँ। यह रचना न केवल प्रकृति के सौंदर्य का वर्णन करती है, बल्कि बच्चों में विनम्रता, परोपकार और सद्भावना जैसे नैतिक मूल्यों का संचार भी करती है। पुस्तक में पाठ से संबंधित शब्दार्थ, प्रश्न-उत्तर और रचनात्मक गतिविधियाँ भी शामिल हैं जो बच्चों की समझ को गहरा करती हैं।
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❤️ पाठ 8: रक्षाबंधन (कहानी)
यह पाठ रक्षाबंधन के पावन त्योहार पर आधारित है, जो भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक है। कहानी में उषा नाम की एक लड़की है जो सावन की पूर्णिमा के अवसर पर अपने भाई प्रभात की प्रतीक्षा कर रही है। बाजार में चारों ओर रौनक है और सुंदर राखियां सजी हैं।
जब प्रभात घर आता है, तो उषा प्रसन्न होकर उसे तिलक लगाती है और कलाई पर राखी बांधती है। भाई उसे उपहार स्वरूप कुछ रुपये देता है और सदैव उसकी रक्षा करने का वचन देता है। यह अध्याय रक्षाबंधन के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर भी प्रकाश डालता है।
इसमें प्राचीन काल के सैनिकों और चित्तौड़ की महारानी कर्णावती द्वारा बादशाह हुमायूँ को राखी भेजने का प्रसंग भी दिया गया है, जो इस बंधन की गहराई को दर्शाता है। राखी का यह धागा मात्र एक रेशमी डोर नहीं, बल्कि एक सुरक्षा कवच माना जाता है। बहनें अपने भाई की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की मंगल कामना करती हैं, जबकि भाई अपनी बहनों को संकटों से बचाने का प्रण लेते हैं।
अंत में पाठ में कुछ अभ्यास और व्याकरण संबंधी गतिविधियाँ भी शामिल की गई हैं।
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❤️ पाठ 9: तिरंगा (कविता)
यह पुस्तक का अंश ‘तिरंगा’ शीर्षक वाली एक देशभक्ति कविता है जो भारत के राष्ट्रीय ध्वज के महत्व और उसके तीन रंगों के प्रतीकवाद पर केंद्रित है। कविता बताती है कि केसरिया रंग वीरता और उत्साह का प्रतीक है, सफेद रंग शांति और सच्चाई का मार्ग दिखाता है, और हरा रंग देश की खुशहाली और मेहनत को दर्शाता है।
झंडे के बीच में स्थित चक्र निरंतर प्रगति और गति का संदेश देता है। यह पाठ प्राथमिक विद्यालय के छात्रों के लिए तैयार किया गया है, जिसमें कविता के माध्यम से राष्ट्रीय गौरव और स्वाभिमान की भावना जगाने का प्रयास किया गया है।
पुस्तक में शब्दार्थ और अभ्यास कार्य भी शामिल हैं, जो बच्चों को झंडे के रंगों, उसके इतिहास और महत्व को गहराई से समझने में मदद करते हैं। इसमें छात्रों को झंडा फहराने के नियमों, राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान और देश की आजादी के प्रति जागरूक करने पर बल दिया गया है।
अंत में, यह पाठ विशेषण जैसे व्याकरणिक तत्वों और देशभक्ति गीतों के माध्यम से भाषा और संस्कृति का ज्ञान भी प्रदान करता है।
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❤️ पाठ 10: कौवा और साँप (कहानी)
यह कहानी विष्णु शर्मा द्वारा रचित ‘पंचतंत्र’ से ली गई है। एक बरगद के पेड़ पर एक कौवा और कौवी अपने बच्चों के साथ रहते थे। उसी पेड़ के नीचे एक दुष्ट काला साँप भी रहता था, जो मौका पाकर कौवे के बच्चों को खा जाता था।
अपने बच्चों की मृत्यु से दुखी होकर कौवा और कौवी ने एक चतुर लोमड़ी से मदद माँगी। लोमड़ी ने उन्हें एक युक्ति सुझाई। योजना के अनुसार, जब राजकुमारियाँ नदी में स्नान करने आईं, तब कौवी ने उनका कीमती मोतियों का हार उठा लिया और उसे साँप के बिल में डाल दिया।
राजमहल के नौकर हार का पीछा करते हुए वहाँ पहुँचे और हार निकालने के प्रयास में उन्होंने बिल से निकले साँप को मार डाला। इस प्रकार कौवा और कौवी को अपने शत्रु से मुक्ति मिली और वे सुखपूर्वक रहने लगे। यह कहानी हमें सिखाती है कि बुद्धि और चतुरता से बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान किया जा सकता है।
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❤️ पाठ 11: उल्टा-पुल्टा (कविता)
‘उल्टा-पुल्टा’ भगवती प्रसाद द्विवेदी द्वारा रचित एक प्रेरणादायक कविता है। इस कविता में कवि ने विभिन्न जीव-जंतुओं जैसे छिपकली, तिलचट्टे, चींटे, बंदर, चींटी, मकड़े और गिरगिट के उदाहरणों के माध्यम से जीवन का एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। कवि बताते हैं कि जब ये जीव चलते-चलते अचानक गिर जाते हैं या पलट जाते हैं, तो वे हिम्मत नहीं हारते।
वे तुरंत खुद को सँभालते हैं और पुन: अपने मार्ग पर चल देते हैं। छिपकली छत से गिरकर तुरंत संभल जाती है, बंदर नीचे गिरने पर दूसरी डाली पकड़कर हँसने लगता है, और चींटियाँ व मकड़े गिरने के बाद साहस खोकर आँखें नहीं मलते बल्कि दोबारा उठ खड़े होते हैं। इस कविता का मुख्य उद्देश्य यह समझाना है कि मनुष्य को भी अपने जीवन में आने वाली विफलताओं या गिरने से घबराना नहीं चाहिए।
जो लोग गिरने के बाद साहस खो देते हैं, वे केवल पछताते रह जाते हैं। इसके विपरीत, जो लोग अपनी गलतियों या असफलताओं से सीख लेकर, धूल झाड़कर तुरंत संभल जाते हैं और निरंतर प्रयास करते रहते हैं, वही जीवन में सच्चा सुख और सफलता प्राप्त करते हैं। यह कविता दृढ़ता और सकारात्मकता की शक्ति पर बल देती है।
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❤️ पाठ 12: गाँधीजी की कहानी-चित्रों की जुबानी (चित्र-श्र्ंखला)
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❤️ पाठ 13: राजगीर (पत्र)
यह पाठ एक पत्र के रूप में है, जिसमें ज्योति अपनी सहेली शालिनी को बिहार के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल ‘राजगीर’ की यात्रा का वर्णन करती है। राजगीर प्राचीन मगध साम्राज्य की राजधानी थी और पाँच पहाड़ियों से घिरा एक अत्यंत मनोरम स्थान है।
यहाँ महाराजा बिम्बिसार द्वारा निर्मित ‘शिलाघटित महाप्राकार’ की दीवारें और उनका सुंदर बगीचा ‘वेणुवन’ स्थित है। पाठ में ‘जरासंध का अखाड़ा’ का उल्लेख है, जहाँ भीम और जरासंध के बीच प्रसिद्ध मल्लयुद्ध हुआ था।
पहाड़ी पर स्थित ‘विश्व शांति-स्तूप’ और वहाँ तक जाने वाला रोमांचकारी ‘रज्जु मार्ग’ यहाँ के मुख्य आकर्षण हैं। राजगीर अपने गर्म पानी के कुंडों जैसे ब्रह्म-कुंड और सप्तधारा के लिए भी प्रसिद्ध है, जिनमें स्नान करना स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है।
यहाँ गौतम बुद्ध की प्रिय ‘गिद्ध कूट गुफा’ और जैन धर्म के पवित्र मंदिर तथा ‘वीरायतन’ भी दर्शनीय हैं। अंत में, ज्योति मलमास मेले की चर्चा करते हुए शालिनी को राजगीर के चित्र भेजती है ताकि वह भी यहाँ की सुंदरता का आनंद ले सके।
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❤️ पाठ 14: दीप जले (कविता)
यह पाठ ‘दीप जले’ दीपावली के पावन पर्व पर आधारित एक सुंदर कविता है। कविता में बताया गया है कि दिवाली के अवसर पर गाँव-गाँव और द्वार-द्वार पर दीये जलाए जाते हैं, जिससे हर जगह रोशनी और खुशियाँ फैल जाती हैं।
इन नन्हे दीपकों को ‘नेह के उजारे’ और ‘अमावस के चंदा’ कहा गया है, जो रात के अंधकार में राह दिखाने वाले सहारे के समान हैं। यह त्योहार दानव पर मानव की जीत और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।
कविता के माध्यम से आपसी भेदभाव भुलाकर प्रेम और भाईचारे के साथ गले मिलने का संदेश दिया गया है। पाठ में शब्दार्थ के साथ-साथ अभ्यास प्रश्न भी दिए गए हैं, जिनमें दीपावली की पूजा, मिठाइयों, पटाखों और अन्य रीति-रिवाजों के बारे में चर्चा की गई है।
यह बच्चों को संज्ञा और विशेषण जैसे व्याकरणिक तत्वों को समझने में भी मदद करता है। अंत में, त्योहारों के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों और सांस्कृतिक गतिविधियों जैसे अल्पना बनाने पर भी जोर दिया गया है।
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❤️ पाठ 15: साहसी इंदिरा (बाल्य जीवन-चित्र)
यह पाठ इंदिरा गाँधी के बचपन की एक साहसी घटना पर आधारित है। जब देश में राष्ट्रीय आन्दोलन चल रहा था, तब स्वतंत्रता सेनानी गुप्त रूप से पं. नेहरू के घर ‘आनंद भवन’ में बैठकें करते थे।
एक बार महत्वपूर्ण योजना तैयार की गई थी, तभी पुलिस ने घर को घेर लिया। इंदिरा ने सूझबूझ और साहस का परिचय देते हुए उन गोपनीय कागजों को अपने स्कूल बैग में छिपा लिया। जब पुलिस ने उनकी कार रोकी, तो उन्होंने बड़ी चतुराई से सिपाही को जवाब दिया कि कोई भी पिता अपनी नन्हीं बेटी को जोखिम में नहीं डालेगा।
सिपाही उनकी बातों में आ गया और उन्होंने सुरक्षित रूप से वे दस्तावेज बाहर पहुँचा दिए। इंदिरा ने बचपन में ही ‘वानर सेना’ का गठन किया था, जो संदेश पहुँचाने और खबरें लाने का काम करती थी। यह कहानी उनके अटूट साहस, देशभक्ति और संकट के समय शांत रहकर निर्णय लेने की क्षमता को दर्शाती है।
उनके इन गुणों ने न केवल राष्ट्रीय नेताओं की सहायता की, बल्कि उनके भविष्य के नेतृत्व की नींव भी रखी।
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❤️ पाठ 16: गंगा नदी (कविता)
यह कविता ‘गंगा नदी’ भारत की सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण नदी गंगा के उद्गम, महत्व और वर्तमान चुनौतियों का वर्णन करती है। कविता के अनुसार, गंगा हिमालय की उजली बर्फ के पिघलने से जल की धारा के रूप में निकलती है और दुर्गम रास्तों से होती हुई पूरे भारत में बहती है।
इसे देश का ‘हृदयहार’ और ‘आधार’ माना गया है। कवि विद्यापति के माध्यम से इसे ‘पतित-पावनी देवनदी’ कहा गया है जो सभी के पापों को धोती है।
कविता में इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है कि मानवीय गतिविधियों और प्रदूषण के कारण गंगा मैया ‘क्रुद्ध’ हो रही हैं और उनकी तीव्र धारा अवरुद्ध हो रही है। अंत में, यह पाठ पाठकों को संदेश देता है कि गंगा की निर्मलता बनाए रखना हमारा परम कर्तव्य है, ताकि इसकी ‘कंचन छवि’ और श्रद्धा की पहचान सुरक्षित रहे।
अभ्यास खंड में छात्रों से नदी प्रदूषण को रोकने और जल संरक्षण के उपायों पर विचार करने के लिए प्रेरित किया गया है।
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❤️ पाठ 17: बैलगाड़ी का दाम (कहानी)
यह कहानी ‘बैलगाड़ी का दाम’ एक सरल हृदय किसान भोलाराम और एक चालाक व्यापारी धनीराम की है। भोलाराम सात रुपये में भूसा बेचने के लिए मंडी जा रहा था, लेकिन धनीराम ने उसकी बातों का गलत मतलब निकालकर न केवल भूसा बल्कि उसकी बैलगाड़ी और बैल भी धोखे से हड़प लिए। जब भोलाराम ने यह बात अपने बुद्धिमान बेटे चतुरसेन को बताई, तो उसने धनीराम को सबक सिखाने की योजना बनाई।
चतुरसेन पड़ोसी की गाड़ी में भूसा लेकर धनीराम के पास पहुँचा और सौदे के रूप में धनीराम के बच्चे की ‘मुट्ठी भर सिक्के’ माँगे। जब सिक्के देने का समय आया, तो चतुरसेन ने बच्चे का हाथ पकड़ लिया और तर्क दिया कि सौदे के अनुसार अब बच्चे की मुट्ठी भी उसकी है। धनीराम समझ गया कि वह अपने ही जाल में फँस गया है।
घबराकर उसने चतुरसेन से माफी माँगी और एक हजार रुपये देकर अपने बेटे को छुड़ाया। इस प्रकार चतुरसेन ने अपनी चतुराई से न केवल अपने पिता के बैल और गाड़ी वापस पा ली, बल्कि व्यापारी को भी सुधार दिया। यह कहानी सिखाती है कि चालाकी का अंत बुरा होता है और सूझबूझ से किसी भी समस्या का समाधान निकाला जा सकता है।
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❤️ पाठ 18: हम सब (कविता)
‘हम सब’ नामक यह कविता भारतीय एकता और अखंडता का एक सुंदर संदेश प्रस्तुत करती है। कवयित्री आशा दूबे ने इस कविता के माध्यम से समाज में व्याप्त भेदभाव को मिटाने का आह्वान किया है। कविता की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं: यह कविता हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई धर्मों के लोगों को एक साथ मिलकर रहने की प्रेरणा देती है।
इसमें कहा गया है कि हमें जात-पात और धार्मिक भेदभाव को छोड़कर ‘मानव दिवस’ मनाना चाहिए, जो मानवता के प्रति सम्मान का प्रतीक है। भारत देश को एक माँ के रूप में दर्शाया गया है जिसके ये चारों धर्म उसके बेटों के समान हैं। भारत की धरती पर ही हम सब खेल-कूद कर बड़े हुए हैं और हम सबके बीच गहरा प्रेम है।
कविता में चेतावनी दी गई है कि जो लोग इस आपसी प्रेम और भाईचारे को तोड़ने की कोशिश करते हैं, उनकी हर चाल को हमें नाकाम करना होगा। हमें यह सदैव याद रखना चाहिए कि भारत के अस्तित्व से ही हमारा अस्तित्व जुड़ा है। अंत में, कविता देश के प्रति समर्पण का भाव जगाती है, जहाँ बच्चे देश की प्रगति के लिए मिलकर मेहनत करने और किसी भी चुनौती से न डरने का संकल्प लेते हैं।
यह रचना राष्ट्रीय एकता और सद्भावना का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
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❤️ पाठ 19: कुत्ते की कहानी (कहानी)
प्रेमचंद द्वारा लिखित यह कहानी एक कुत्ते के जीवन और उसकी स्वामिभक्ति का चित्रण करती है। कहानी का आरंभ कुत्ते के जन्म से होता है, जहाँ वह गरीबी और कठिनाइयों के बीच बड़ा होता है। उसे एक पंडितजी का लड़का अपने घर ले आता है, जहाँ वह सुरक्षा और स्नेह पाता है।
कहानी का मुख्य मोड़ तब आता है जब पंडितजी के घर में चोर घुस जाते हैं। कुत्ता अपनी सतर्कता से चोरों की आहट पहचान लेता है और पंडितजी को जगाने की कोशिश करता है। शुरुआत में पंडितजी उसे डांटते और मारते हैं, लेकिन वह हार नहीं मानता।
अंततः अपनी सूझबूझ और वफादारी से, वह न केवल पंडितजी को चोरी के बारे में सचेत करता है, बल्कि तालाब में कूदकर चोरी का सामान ढूंढ निकालने में भी मदद करता है। उसकी इस बहादुरी और वफादारी को देखकर पंडितजी और गाँव वाले अत्यधिक प्रभावित होते हैं। यह कहानी जानवरों की संवेदनाओं और उनकी निस्वार्थ वफादारी को खूबसूरती से दर्शाती है।
प्रेमचंद ने सरल भाषा में संदेश दिया है कि जानवर भी प्रेम और कर्तव्य की भाषा समझते हैं और अवसर आने पर मनुष्य से भी अधिक वफादार सिद्ध होते हैं।
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❤️ पाठ 20: खेल-खेल में (वार्त्ता)
‘खेल-खेल में’ पाठ बच्चों और उनके खेलों के इर्द-गिर्द घूमता है। कहानी की शुरुआत राधा और उसकी बहन रानी के ‘कित-कित’ (स्टापू) खेलने से होती है। राधा रानी को खेल के नियम समझाती है, तभी उनकी चाची वहाँ आती हैं।
बच्चों को खेलते देख चाची को अपना बचपन याद आ जाता है और वे बताती हैं कि कैसे वे बचपन में कबड्डी, पिट्टू और छुपा-छुपी जैसे अनेक खेल खेलती थीं। वे बच्चों को बताती हैं कि आजकल के बच्चे टीवी और मोबाइल में व्यस्त रहने के कारण बाहर खेलने का समय नहीं निकाल पाते। तभी अचानक बारिश शुरू हो जाती है और सभी बच्चे चाची के घर के अंदर चले जाते हैं।
घर के भीतर वे देखते हैं कि चाचा और बुआ शतरंज खेल रहे हैं। चाची बच्चों के साथ मिलकर पुराने कपड़ों से गुड़िया बनाती हैं और बच्चे लूडो व कैरम जैसे खेलों का आनंद लेते हैं। यह पाठ हमें विभिन्न प्रकार के खेलों, उनके नियमों और सामाजिक जुड़ाव के महत्व के बारे में जानकारी देता है।
अंत में अभ्यास के माध्यम से बच्चों को खेलों के नाम, उनके खिलाड़ियों की संख्या और आवश्यक सामग्री के बारे में सोचने के लिए प्रेरित किया गया है।
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