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Bihar Board Books

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Bihar Board Class 3 EVS Book 2026 PDF Download

Last Updated on January 26, 2026 by bseb Leave a Comment

Bihar Board Class 3 EVS Book 2026 PDF Download (पर्यावरण और हम)

Bihar Board Class 3 EVS Book 2026 PDF Download – इस पेज पर बिहार बोर्ड 3rd के छात्रों के लिए “Environmental Studies (पर्यावरण और हम)” Book दिया गया है | जिसे आप अपने फ़ोन में Free Download कर सकते हैं |

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BSEB Class 3 Environmental Studies Textbook PDF Free Download

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❤️ पाठ 1: चाचा की शादी

यह पुस्तक ‘चाचा की शादी’ कविता और कहानी के माध्यम से बच्चों को परिवार और विभिन्न सामाजिक रिश्तों की समझ प्रदान करती है। इसमें चाचा की शादी के अवसर पर घर में आने वाले विभिन्न रिश्तेदारों जैसे नाना-नानी, मामा-मामी, मौसा-मौसी और फूफा-फूफी का वर्णन है।

पुस्तक यह सिखाती है कि परिवार केवल माता-पिता और बच्चों का समूह नहीं है, बल्कि दादा-दादी, चाचा-चाची और अन्य सदस्यों का एक साथ रहना ही एक पूर्ण परिवार बनाता है। कहानी के पात्र आस्था और आकाश के माध्यम से शादी की तैयारियों, निमंत्रण पत्र बांटने और बारात के उत्साह को दिखाया गया है।

अंत में, दादीजी परिवार का महत्व समझाते हुए बताती हैं कि साथ रहने से सभी एक-दूसरे के सुख-दुःख में भागीदार बनते हैं। इसमें बच्चों के लिए रिश्तों को पहचानने, पहेलियाँ सुलझाने और अपने परिवार के बारे में लिखने हेतु अभ्यास कार्य भी दिए गए हैं, जो उनके भाषाई और सामाजिक कौशल को विकसित करते हैं।

 

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❤️ पाठ 2: हमारा परिवार

यह पाठ सुनीता और दिलीप के परिवारों के माध्यम से परिवार की अवधारणा को समझाता है। सुनीता का परिवार छोटा है, जिसमें उसके माता-पिता और भाई राकेश हैं।

इसके विपरीत, दिलीप का परिवार एक बड़ा संयुक्त परिवार है, जिसमें दादा-दादी, माता-पिता, चाचा-चाची और उनके बच्चे एक साथ रहते हैं। पाठ में दिखाया गया है कि परिवार के सदस्य विभिन्न व्यवसायों जैसे खेती, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और व्यापार से जुड़े होते हैं।

इसमें घर के कार्यों के बँटवारे, निर्णय लेने की प्रक्रिया और एक साथ भोजन करने के महत्त्व पर ज़ोर दिया गया है। विद्यार्थियों को अपने परिवार के सदस्यों, उनके कार्यों और वंशावली के बारे में सोचने के लिए प्रेरित किया गया है।

साथ ही, यह पाठ परिवार के सदस्यों के बीच शारीरिक और व्यवहारिक समानताओं, जैसे आवाज़, आँखों का रंग या बालों की लंबाई, की पहचान करना सिखाता है। अंततः, यह दर्शाता है कि कैसे पीढ़ी-दर-पीढ़ी सदस्यों के जुड़ने से परिवार बढ़ता है और एक मज़बूत सामाजिक इकाई बनता है।

 

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❤️ पाठ 3: जीव-जन्तुओं की दुनिया

यह पुस्तक ‘जीव-जन्तुओं की दुनिया’ शीर्षक के अंतर्गत बच्चों को उनके आस-पास के वातावरण में रहने वाले विभिन्न प्राणियों से परिचित कराती है। इसमें पहेलियों और रोचक गतिविधियों के माध्यम से गाय, सांप, तोता और मकड़ी जैसे जीवों की विशेषताओं को समझाया गया है।

पुस्तक में बच्चों को पशु-पक्षियों, कीड़े-मकोड़ों और जलचरों की सूची बनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। इसमें मकड़ी के जाले, तितलियों के रंग और जानवरों की शारीरिक बनावट जैसे पूँछ या पैरों की संख्या पर चर्चा की गई है।

मुख्य रूप से, यह जीवों के वर्गीकरण पर ध्यान केंद्रित करती है, जैसे कि उनके चलने के तरीके (उड़ना, तैरना, रेंगना) और उनके खान-पान की आदतें (शाकाहारी और मांसाहारी)। जुगाली करने वाले पशुओं और जीभ से भोजन पकड़ने वाले जीवों के बारे में भी जानकारी दी गई है।

अंत में, एक वर्ग पहेली और चित्रों के माध्यम से बच्चों के ज्ञान का परीक्षण किया गया है, जिससे वे खेल-खेल में प्रकृति और जीव-जगत की विविधता को समझ सकें। यह पाठ शिक्षकों के लिए भी निर्देश प्रदान करता है ताकि वे बच्चों को व्यावहारिक अनुभव दे सकें।

 

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❤️ पाठ 4: रंग-बिरंगे पंख

यह पाठ ‘रंग-बिरंगे पंख’ पक्षियों के प्रति बच्चों की जिज्ञासा और उनके व्यवहार पर आधारित है। कहानी की शुरुआत गौतम से होती है, जो अपने दोस्तों के साथ नदी के किनारे टहलते हुए एक नीलकंठ को देखता है।

वहाँ उसे और उसके साथियों को विभिन्न पक्षियों के पंख गिरे हुए मिलते हैं, जिन्हें वे अपनी कक्षा सजाने के लिए इकट्ठा कर लेते हैं। इस प्रक्रिया में श्याम के मन में पक्षियों के खान-पान और उनके आवास को लेकर कई सवाल उठते हैं।

पाठ में बच्चों के माध्यम से गौरैया, कबूतर और कोयल जैसे पक्षियों की गतिविधियों का वर्णन किया गया है। राकेश बताता है कि कैसे उसके घर में गौरैया ने घोंसला बनाया है, जबकि उषा अपने दादाजी द्वारा छत पर पक्षियों के लिए दाना-पानी रखने का अनुभव साझा करती है।

पाठ का उद्देश्य बच्चों को अपने आसपास के पक्षियों को पहचानने, उनकी बोलियों को समझने और उनके प्रति संवेदनशीलता विकसित करने के लिए प्रेरित करना है। इसमें विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से पक्षियों के घोंसले बनाने की सामग्री, उनकी चोंच की बनावट और विलुप्त होते पक्षियों के बारे में जानकारी एकत्र करने पर जोर दिया गया है।

 

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❤️ पाठ 5: पेड़-पौधों से दोस्ती

यह पाठ ‘पेड़-पौधों से दोस्ती’ बच्चों को प्रकृति और पर्यावरण के महत्व से परिचित कराने के उद्देश्य से लिखा गया है। मुन्नी नामक एक छोटी लड़की की कहानी के माध्यम से, जो बरगद के पेड़ को अपना सबसे अच्छा दोस्त मानती है, यह अध्याय हमें बताता है कि पेड़ केवल ऑक्सीजन और फल देने वाले स्रोत नहीं हैं, बल्कि वे हमारे संवेदनशील साथी भी हो सकते हैं।

मुन्नी बरगद की ठंडी छाया में आराम करती है, उसकी डालियों पर झूला झूलती है और उससे बातें भी करती है। पाठ में विद्यार्थियों के लिए कई रोचक गतिविधियाँ दी गई हैं, जैसे विभिन्न प्रकार के पेड़ों की पहचान करना, उनके तने की मजबूती के आधार पर उन्हें वर्गीकृत करना और अपनी ऊँचाई से उनकी तुलना करना।

इसके अतिरिक्त, छात्रों को फल देने वाले और फल न देने वाले पौधों के बीच अंतर समझने और पेड़ों से मिलने वाले लाभों पर चर्चा करने के लिए प्रेरित किया गया है। अंत में, यह पाठ एक महत्वपूर्ण प्रश्न छोड़ता है कि यदि पृथ्वी पर पेड़ न हों तो क्या होगा, जो बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक बनाता है।

यह अध्याय प्रकृति के प्रति प्रेम, सहानुभूति और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का एक सराहनीय प्रयास है।

 

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❤️ पाठ 6: पत्ता हूँ मैं हरा-हरा

यह पाठ ‘पत्ता हूँ मैं हरा-हरा’ शीर्षक वाली एक शिक्षाप्रद कविता है जो बच्चों को प्रकृति और विशेष रूप से विभिन्न प्रकार के पत्तों से परिचित कराती है। कविता के माध्यम से पत्तों के विविध रूपों जैसे गोल, लंबे, छोटे, चिकने और कटे-फटे होने का वर्णन किया गया है।

यह कविता पत्तों की उपयोगिता पर भी प्रकाश डालती है, जिसमें पीपल, आम, तुलसी और पुदीने जैसे विशिष्ट पौधों का उल्लेख है। तुलसी को घर का खास और पुदीने को प्यास बुझाने वाला बताया गया है।

पाठ में कई रचनात्मक गतिविधियाँ भी शामिल हैं, जो बच्चों को पत्तों को उनके आकार और किनारों के आधार पर पहचानने के लिए प्रोत्साहित करती हैं। इसमें पत्तों की छाप बनाने, उनकी नसों को समझने और विभिन्न पत्तों (जैसे गेंदा, नीम, केला और सहजन) के घरेलू व औषधीय उपयोगों को जानने पर बल दिया गया है।

अंत में, सूखी पत्तियों का उपयोग करके जानवरों की आकृतियाँ बनाने जैसी कलात्मक गतिविधि भी सुझाई गई है, जो बच्चों की कल्पनाशीलता और प्रकृति के प्रति उनके जुड़ाव को बढ़ाती है।

 

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❤️ पाठ 7: तरह-तरह के भोजन

यह पाठ ‘तरह-तरह के भोजन’ विभिन्न खाद्य पदार्थों और क्षेत्रीय खान-पान की विविधता पर केंद्रित है। कहानी मकर संक्रांति के उत्सव से शुरू होती है, जहाँ बच्चे दही-चूड़ा और तिलकुट का आनंद लेते हैं।

पाठ में विभिन्न त्योहारों जैसे ईद (सेवइयाँ) और क्रिसमस (केक) के विशेष व्यंजनों का उल्लेख है। इसमें यह भी बताया गया है कि भारत के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग भोजन प्रसिद्ध हैं, जैसे सिलाव का खाजा, बाढ़ की लाई, भोजपुर का लिट्टी-चोखा और मिथिला का दही-चूड़ा।

दक्षिण भारत में इडली-डोसा लोकप्रिय है। अध्याय हमें यह समझने में मदद करता है कि हमारा भोजन पेड़-पौधों (फल, फूल, जड़, तना, पत्तियाँ) और जीव-जन्तुओं (दूध, अंडा, मांस) से प्राप्त होता है।

इसके अलावा, पाठ में मुख्य अनाजों जैसे चावल, गेहूँ और मक्का के महत्व पर चर्चा की गई है और एक अनाज से बनने वाले विभिन्न व्यंजनों के बारे में बताया गया है। अंत में, शाहजहाँ की एक रोचक कहानी के माध्यम से बच्चों को सोचने के लिए प्रेरित किया गया है कि कौन सा अनाज सबसे बहुमुखी हो सकता है।

 

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❤️ पाठ 8: कुछ कच्चा कुछ पका हुआ

यह पाठ ‘कुछ कच्चा कुछ पका हुआ’ बच्चों के बीच भोजन और खान-पान की आदतों पर आधारित एक संवादात्मक कहानी है। कहानी की शुरुआत इला द्वारा सुझाए गए एक खेल से होती है, जिसमें बच्चे खाने की चीजों के नाम पर प्रतिक्रिया देते हैं।

खेल के दौरान, वे चर्चा करते हैं कि विभिन्न आयु वर्ग के लोग, जैसे कि छोटे बच्चे, जवान और बुजुर्ग, क्या खाते हैं और क्या नहीं खा सकते। उदाहरण के लिए, छह महीने से छोटा बच्चा केवल दूध पीता है, जबकि बड़े लोग और जवान लगभग सब कुछ खा सकते हैं।

पाठ में इस बात पर भी प्रकाश डाला गया है कि कुछ चीजें कच्ची खाई जाती हैं, कुछ पकाकर और कुछ दोनों तरह से। इसके अलावा, पाठ भोजन बनाने की प्रक्रिया, उसमें लगने वाली मेहनत और परिवार के सदस्यों की भूमिकाओं पर सवाल उठाता है।

यह सामाजिक संदेश भी देता है कि खाना बनाने और घर के अन्य कामों में स्त्री और पुरुष, दोनों को मिलजुलकर हाथ बंटाना चाहिए। अंत में, छात्रों को अपनी पसंदीदा डिश बनाने की विधि लिखने और लैंगिक समानता पर चर्चा करने के लिए प्रेरित किया जाता है।

 

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❤️ पाठ 9: पकायेंगे-खायेंगे

यह पाठ ‘पकायेंगे-खायेंगे’ भोजन पकाने की विभिन्न विधियों और इसमें उपयोग होने वाले संसाधनों पर केंद्रित है। इसमें बताया गया है कि हम अपना भोजन अलग-अलग तरीकों से तैयार करते हैं, जैसे भूनकर, तलकर, उबालकर और सेककर।

पाठ में विद्यार्थियों से विभिन्न खाद्य पदार्थों को उनके पकाने के तरीकों के अनुसार वर्गीकृत करने के लिए कहा गया है। इसके अलावा, भोजन पकाने और खाने के लिए उपयोग किए जाने वाले विभिन्न बर्तनों, जैसे कड़ाही, झंझरा, और कलछी की पहचान करने पर जोर दिया गया है।

पाठ का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ईंधन (जलावन) के स्रोतों पर चर्चा करता है, जिसमें मिट्टी का तेल, कोयला, बिजली, गैस, धूप, लकड़ी और उपले शामिल हैं। यह सौर ऊर्जा के उपयोग की संभावनाओं को भी टटोलता है।

अंत में, यह पाठ ईंधन के संरक्षण का संदेश देता है, यह समझाते हुए कि दुनिया में ईंधन के स्रोत सीमित हैं और हमें इन्हें बर्बाद करने से बचना चाहिए। यह छात्रों को भविष्य में ईंधन खत्म होने की स्थिति और उसके परिणामों पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित करता है।

 

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❤️ पाठ 10: घर को जानें

यह पाठ ‘घर को जानें’ विभिन्न प्रकार के घरों और उनके निर्माण में उपयोग होने वाली सामग्रियों के बारे में जानकारी प्रदान करता है। पाठ में बताया गया है कि गाँव और शहरों में छोटे, बड़े, कच्चे और पक्के घर पाए जाते हैं।

इन घरों के निर्माण में लकड़ी, भूसा, घास, मिट्टी, ईंट, सीमेंट और बालू जैसी विभिन्न सामग्रियों का उपयोग किया जाता है। पाठ के माध्यम से बच्चों को अपने घर की संरचना जैसे कि कमरे, दीवारें, छत और दरवाजों को समझने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।

इसमें घर बनाने वाली सामग्रियों की सूची बनाने, चित्रों में रंग भरने और वर्ग पहेली हल करने जैसी गतिविधियाँ शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, यह पाठ घरों के अनिवार्य अंगों जैसे खिड़की, दरवाजे और छत के महत्व पर प्रकाश डालता है और छात्रों को यह सोचने पर मजबूर करता है कि घर के बिना जीवन में क्या समस्याएँ आ सकती हैं।

अंत में, छात्रों को पुराने समय के घरों के बारे में जानने और माचिस की डिब्बियों एवं गत्ते का उपयोग करके घर का मॉडल बनाने के लिए प्रेरित किया गया है।

 

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❤️ पाठ 11: दीपावली की तैयारी

यह अध्याय ‘दीपावली की तैयारी’ सुखदा और संजय नामक दो बच्चों के माध्यम से दीपावली के त्योहार से पहले होने वाली गतिविधियों का वर्णन करता है। कहानी की शुरुआत घर की साफ-सफाई से होती है, जहाँ बच्चे अपनी पढ़ाई की मेज और किताबों की आलमारी व्यवस्थित करते हैं। परिवार के सभी सदस्य मिलकर पुराने सामानों को हटाते हैं, रसोई के डिब्बों और गर्म कपड़ों को धूप दिखाते हैं, और बगीचे की देखभाल करते हैं।

पाठ में कचरा प्रबंधन और स्वच्छता के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया है, जैसे कि सड़क किनारे कचरे के ढेर से होने वाली परेशानी। दीपावली के अवसर पर बाजार की रौनक, मिठाइयों की खरीदारी और करीम चाचा के रिक्शे की सवारी का जीवंत चित्रण किया गया है। घर लौटने पर बच्चे माँ के साथ रंगोली बनाने और दादी के साथ दीए की बाती तैयार करने में हाथ बँटाते हैं।

ग्रामीण परिवेश की झलक देते हुए गुल्लू के घर में गाय और बछड़े को सजाने का भी जिक्र है। अंत में, गोधूलि बेला में दीप जलाने, गणेश-लक्ष्मी की पूजा करने और बड़ों की देखरेख में पटाखे चलाने के साथ त्योहार के आनंद को दर्शाया गया है। यह पाठ बच्चों को सहयोग, स्वच्छता और पारंपरिक उल्लास का संदेश देता है।

 

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❤️ पाठ 12: किस और क्या

यह पाठ प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों को दिशा-निर्देशों (आगे-पीछे, दाएँ-बाएँ) का ज्ञान कराने के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें विभिन्न क्रियाकलापों के माध्यम से बच्चों को अपने परिवेश को समझने के लिए प्रेरित किया गया है।

पाठ की शुरुआत स्कूल परिसर में खड़े होकर चारों ओर की वस्तुओं को पहचानने से होती है। इसके बाद ‘मंजू’ नामक एक पात्र के उदाहरण द्वारा समझाया गया है कि शरीर की स्थिति बदलने पर वस्तुओं की सापेक्ष दिशाएँ (जैसे दाएँ या बाएँ) कैसे बदल जाती हैं।

पाठ में बसंती के स्कूल और उसके रास्ते का एक चित्र भी दिया गया है, जिसे देखकर बच्चों को वस्तुओं की स्थिति पहचानने का अभ्यास कराया जाता है। यह अध्याय व्यावहारिक उदाहरणों और चित्रों की सहायता से बच्चों में स्थानिक समझ विकसित करता है।

अंत में कुछ प्रश्न दिए गए हैं जो विद्यार्थियों को उनके घर और कक्षा के वातावरण के बारे में सोचने के लिए प्रेरित करते हैं ताकि वे दिशाओं की अवधारणा को अपने दैनिक जीवन से जोड़ सकें।

 

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❤️ पाठ 13: स्कूल के आस-पास

यह पाठ ‘स्कूल के आस-पास’ प्राथमिक कक्षा के विद्यार्थियों को मानचित्र अध्ययन और दिशाओं के ज्ञान से परिचित कराने के उद्देश्य से लिखा गया है। पाठ की शुरुआत सीमा नाम की एक बच्ची के घर से स्कूल तक के रास्ते के चित्र से होती है।

इस चित्र के माध्यम से बच्चों को रास्ते में आने वाले विभिन्न लैंडमार्क जैसे अस्पताल, बस स्टॉप, डाकघर, दुकान, कुआँ और पेड़ों की पहचान करना सिखाया गया है। अभ्यास प्रश्नों के जरिए विद्यार्थियों को दाईं और बाईं ओर की समझ विकसित करने के लिए प्रेरित किया गया है।

पाठ के दूसरे मुख्य भाग में ‘कौन दिशा किधर’ नामक एक कविता दी गई है, जो बच्चों को चार मुख्य दिशाओं—पूरब, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण—को सूरज की स्थिति के आधार पर पहचानने में मदद करती है। कविता के अनुसार, उगते सूरज की ओर मुँह करके खड़े होने पर सामने पूरब, पीछे पश्चिम, बाएँ हाथ की ओर उत्तर और दाएँ हाथ की ओर दक्षिण दिशा होती है।

अंत में, विभिन्न गतिविधियों और टोली-आधारित खेलों के माध्यम से दिशाओं के व्यावहारिक ज्ञान को पुख्ता किया गया है और बच्चों को अपने स्वयं के स्कूल के आस-पास का मानचित्र बनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।

 

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❤️ पाठ 14: पानी

यह पुस्तक का अंश जल के महत्व, इसके स्रोतों और संरक्षण पर आधारित है। पाठ की शुरुआत रोहिताश्व अस्थान द्वारा लिखित एक कविता ‘पानी’ से होती है, जिसमें बारिश के दृश्य, जैसे मेढकों का टर्राना, मोरों का नाचना और बच्चों द्वारा कागज़ की नाव चलाने का सुंदर वर्णन है।

इसके बाद, अभ्यास के माध्यम से बच्चों को विभिन्न जल-स्रोतों जैसे झील, कुआँ, तालाब, नदी और चापाकल के बारे में सिखाया गया है। पुस्तक में जल के दैनिक उपयोगों, जैसे नहाने, पीने, कपड़े धोने और खेती, की सूची बनाने को कहा गया है।

इसमें जल के भंडारण और साफ-सफाई के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया है। एक विशेष खंड ‘जल संरक्षण’ में ऋचा और राधा की कहानी के माध्यम से राजस्थान में वर्षा जल संचयन (टैंक निर्माण) की तकनीक को समझाया गया है।

अंत में, चित्रों के माध्यम से पानी के सदुपयोग और पुन: उपयोग के तरीकों पर चर्चा की गई है, ताकि बच्चों में जल बचाने की आदत विकसित हो सके। यह अध्याय मुख्य रूप से जल की उपयोगिता और उसकी बचत के प्रति जागरूकता पैदा करता है।

 

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❤️ पाठ 15: दानापुर से गौरा तक

यह पाठ ‘दानापुर से गौरा तक’ यश और आयुष नामक दो बच्चों की कहानी के माध्यम से विभिन्न यातायात के साधनों और उनके महत्व का वर्णन करता है। गर्मी की छुट्टियों में, वे अपने माता-पिता के साथ दानापुर से लक्खीसराय जिले के अपने गाँव गौरा जाने की यात्रा करते हैं। इस यात्रा के दौरान, वे ऑटो-रिक्शा, रेलगाड़ी (तूफान एक्सप्रेस), बस और अंत में टमटम जैसे विभिन्न वाहनों का उपयोग करते हैं।

पाठ बच्चों को इन वाहनों के अनुभवों, उनकी आवाजों और यात्रा के आनंद से परिचित कराता है। गाँव पहुँचने पर, उनके दादाजी उन्हें यातायात के विकास और आधुनिक सुविधाओं के बारे में बताते हैं। पाठ में विभिन्न प्रकार के वाहनों का वर्गीकरण किया गया है—जमीन, पानी और हवा में चलने वाले वाहन।

साथ ही, यह भी समझाया गया है कि कुछ वाहन पशुओं की शक्ति से, कुछ मानवीय शक्ति से और कुछ डीजल या पेट्रोल जैसे ईंधन से चलते हैं। पहियों की बनावट, सामग्री (रबड़, लकड़ी, लोहा) और उनकी संख्या के आधार पर भी वाहनों में अंतर स्पष्ट किया गया है। अंत में, एक सरल प्रयोग के माध्यम से पहियों के घूमने के सिद्धांत को समझाया गया है।

यह अध्याय छात्रों को परिवहन के साधनों, उनके उपयोग और दैनिक जीवन में उनकी उपयोगिता के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करता है।

 

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❤️ पाठ 16: चिट्ठी का सफर

यह पाठ ‘चिट्ठी का सफर’ एक पत्र की यात्रा का वर्णन करता है जिसे शबनम ने अपनी सखी सपना को लिखा है। कहानी की शुरुआत एक कविता से होती है जो डाकिए के आगमन और खुशी के संदेश (जैसे शादी का निमंत्रण) लाने का वर्णन करती है।

मुख्य रूप से, यह पाठ विस्तार से समझाता है कि एक पत्र शबनम द्वारा पत्र-पेटी में डाले जाने से लेकर सपना के हाथों तक पहुँचने के लिए किन चरणों से गुजरता है। इसमें डाकघर, ठप्पा लगाने की प्रक्रिया (आरा से पटना तक), लाल डाक गाड़ी और रेलगाड़ी की भूमिका को दर्शाया गया है।

अंत में, डाकिया पते के अनुसार छँटाई के बाद पत्र को सपना के घर पहुँचा देता है। पाठ में बच्चों को स्वयं पत्र लिखने और कक्षा में अपनी पत्र-पेटी बनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।

इसके अलावा, यह विभिन्न प्रकार के डाक टिकटों, ठप्पों और आधुनिक संचार के साधनों जैसे मोबाइल, ई-मेल और फोन की भी चर्चा करता है, जो संदेशों को अधिक तेज़ी से पहुँचाते हैं। यह अध्याय संचार के पारंपरिक तरीकों के महत्व और उनकी कार्यप्रणाली को सरल भाषा में बच्चों को समझाता है।

 

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❤️ पाठ 17: कपड़े तरह-तरह के

यह पुस्तक का अंश ‘कपड़े तरह-तरह के’ नामक अध्याय से है जो मुख्य रूप से बच्चों को विभिन्न प्रकार के वस्त्रों और उनके उपयोग के बारे में शिक्षित करता है। कहानी दानिश और सिया के दर्जी की दुकान पर जाने से शुरू होती है, जहाँ वे कुरता-पायजामा और सलवार-कमीज सिलवाने का ऑर्डर देते हैं।

इसके माध्यम से पाठकों को अलग-अलग मौसमों में पहने जाने वाले कपड़ों, जैसे गर्मियों में सूती और सर्दियों में ऊनी वस्त्रों के महत्व को समझाया गया है। पुस्तक में इस बात पर जोर दिया गया है कि कपड़े हमें गर्मी, सर्दी, बरसात और धूल-मिट्टी से बचाते हैं।

इसमें ‘कच्चे और पक्के रंग’ की अवधारणा को भी एक सरल प्रयोग द्वारा स्पष्ट किया गया है, जहाँ नम्रता की माँ उसे बताती है कि धोने पर निकलने वाले रंग कच्चे होते हैं। पाठ में बच्चों के लिए कई रोचक गतिविधियाँ भी दी गई हैं, जैसे सिले और बिना सिले वस्त्रों की सूची बनाना, फूलों से प्राकृतिक रंग बनाना और भिंडी या आलू के ठप्पों से कपड़ों पर डिजाइन तैयार करना।

यह सामग्री प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक और संवादात्मक है।

 

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❤️ पाठ 18: तेरी-मेरी उछलकूद

यह पुस्तक का अंश ‘तेरी मेरी उछल-कूद’ मुख्य रूप से बच्चों के खेलों, विशेषकर कबड्डी पर केंद्रित है। पाठ की शुरुआत कबड्डी के खेल के जीवंत वर्णन से होती है, जिसमें खेल के दौरान होने वाली गहमागहमी, शोर-शराबे और उत्साह को दर्शाया गया है। इसमें खिलाड़ियों द्वारा ‘कबड्डी-कबड्डी’ बोलना, एक-दूसरे को छूने की कोशिश करना और आउट होने पर होने वाली प्रतिक्रियाओं का सुंदर चित्रण है।

लेखक ने खेल के आनंद को मिट्टी में घिसटने, साँस रोककर बोलने और टीम भावना के रूप में परिभाषित किया है। इसके साथ ही, यह पाठ छात्रों के लिए विभिन्न गतिविधियों और प्रश्नों को भी शामिल करता है। उदाहरण के लिए, बच्चों से पूछा गया है कि वे अपने दोस्तों के साथ कौन से खेल खेलते हैं और उन खेलों को घर के अंदर (Indoor) और घर के बाहर (Outdoor) की श्रेणियों में बाँटने के लिए कहा गया है।

पुस्तक में एक तालिका भी दी गई है जहाँ विभिन्न खेलों और उनमें आवश्यक खिलाड़ियों की संख्या तथा खेल सामग्री के बारे में जानकारी भरने का अभ्यास है। अंत में, यह बच्चों को अपने माता-पिता के बचपन के खेलों के बारे में जानने और अपने पसंदीदा खेल के नियम लिखने के लिए प्रोत्साहित करता है। कुल मिलाकर, यह पाठ बच्चों को शारीरिक गतिविधियों और पारंपरिक खेलों के प्रति जागरूक करता है।

 

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❤️ पाठ 19: कोशिश करके देख लें

यह पाठ विशेष रूप से दिव्यांग व्यक्तियों के जीवन और उनकी क्षमताओं पर आधारित है। पाठ की शुरुआत ‘आँख मिचौली’ के खेल से होती है, जिसके माध्यम से यह समझाने का प्रयास किया गया है कि बिना देखे कार्यों को करना कितना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

इसमें बताया गया है कि जो लोग देख नहीं सकते, वे अपनी अन्य इंद्रियों जैसे स्पर्श, गंध और आवाज़ का उपयोग करके दुनिया को समझते हैं। उनके पढ़ने-लिखने के लिए ‘ब्रेल लिपि’ के महत्व को रेखांकित किया गया है, जिसकी खोज लुई ब्रेल ने की थी।

पाठ में शैलेन्द्र नामक एक बच्चे की कहानी है जो पहियों वाली कुर्सी (व्हीलचेयर) का उपयोग करता है और खेल के माध्यम से अन्य बच्चों के साथ घुल-मिल जाता है। इसके अतिरिक्त, पाठ ‘संकेतों की भाषा’ (साइन लैंग्वेज) के बारे में भी जानकारी देता है, जिसका उपयोग वे लोग करते हैं जो बोल या सुन नहीं सकते।

यह अध्याय हमें सिखाता है कि शारीरिक अक्षमताओं के बावजूद अभ्यास और सही उपकरणों की मदद से व्यक्ति आत्मनिर्भर बन सकता है और समाज की मुख्यधारा में शामिल हो सकता है। हमें ऐसे व्यक्तियों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए और उनकी क्षमताओं का सम्मान करना चाहिए।

 

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❤️ पाठ 20: आओ खेलें मिट्टी से

यह पुस्तक का अंश ‘आओ खेलें मिट्टी से’ नामक अध्याय पर केंद्रित है, जो बच्चों को पर्यावरण और पारंपरिक व्यवसायों से परिचित कराता है। कहानी की शुरुआत कमला और सलमा द्वारा मिट्टी से घरौंदा बनाने से होती है, जिसके माध्यम से बच्चों को मिट्टी की प्रकृति और उसके उपयोग के बारे में सिखाया जाता है।

पाठ में कुम्हार की भूमिका और मिट्टी के बर्तन बनाने की प्रक्रिया पर विशेष जोर दिया गया है, जिसमें मिट्टी खोदने से लेकर चाक पर बर्तन बनाने और उन्हें पकाने तक के चरण शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, छात्रों को विभिन्न पेशों जैसे किसान, डॉक्टर, शिक्षक और दर्जी के महत्व को समझने के लिए गतिविधियाँ दी गई हैं।

पुस्तक बच्चों को विभिन्न स्थानों जैसे खेत, बगीचे और नदी की मिट्टी के नमूनों का अवलोकन करने और उनके गुणों की पहचान करने के लिए प्रोत्साहित करती है। अंत में, यह हमारे पर्यावरण (मिट्टी, जल, जीव-जंतु) के महत्व को रेखांकित करती है और भारत के संविधान में वर्णित मूल कर्तव्यों का उल्लेख करती है, जिसमें प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सामाजिक समरसता बनाए रखने का संदेश दिया गया है।

 

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