Bihar Board Class 2 Hindi 2026 PDF Download (अंकुर)
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BSEB Class 2 Hindi (अंकुर) Textbook PDF Free Download
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❤️ पाठ 1: हँसते-खेलते
यह पुस्तक ‘हँसते-खेलते’ प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों के लिए एक अभ्यास पुस्तिका है, जो भाषा कौशल और संज्ञानात्मक विकास पर केंद्रित है। इसमें चित्रों के माध्यम से शब्द ज्ञान, वाक्यों का निर्माण, और व्याकरण के आधारभूत तत्वों जैसे अनुस्वार, चंद्रबिन्दु, संयुक्ताक्षर (क्ष, त्र, ज्ञ, श्र) तथा ‘र’ के विभिन्न रूपों (रेफ और पदेन) का अभ्यास कराया गया है।
पुस्तक में फलों, पशु-पक्षियों और प्रकृति (जैसे वर्षा और बादल) से संबंधित कविताएँ और गतिविधियाँ शामिल हैं, जो बच्चों को रोचक ढंग से सीखने में मदद करती हैं। इसके अतिरिक्त, इसमें रंग भरने, मिलान करने और पहेलियों को हल करने जैसे कार्य दिए गए हैं जो विद्यार्थियों की रचनात्मकता को बढ़ावा देते हैं।
प्रत्येक पृष्ठ पर ‘शिक्षण-निर्देश’ दिए गए हैं, जो शिक्षकों को गतिविधियों के संचालन और विद्यार्थियों के समूहों में अभ्यास कराने हेतु मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। कुल मिलाकर, यह पुस्तक बच्चों के भाषाई आधार को मजबूत करने और उनमें लेखन व पहचान की कला विकसित करने का एक प्रभावी माध्यम है।
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❤️ पाठ 2: चित्रपठन
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❤️ पाठ 3: कौआ और लोमड़ी (चित्रपठन)
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❤️ पाठ 4: नानी तेरी मोरनी (कविता)
यह पुस्तक प्रसिद्ध बाल कविता ‘नानी तेरी मोरनी’ पर आधारित एक शैक्षिक कार्यपुस्तिका है। इसमें कविता के माध्यम से बच्चों को भाषा, व्याकरण और सामाजिक रिश्तों की समझ विकसित करने के लिए विभिन्न गतिविधियाँ दी गई हैं। पुस्तक की शुरुआत ‘नानी तेरी मोरनी’ कविता के गायन से होती है, जिसमें चोरों द्वारा मोरनी ले जाने और फिर पकड़े जाने की रोचक कहानी है।
अभ्यास कार्यों के अंतर्गत बच्चों को नाना-नानी, दादा-दादी और चाचा-चाची जैसे पारिवारिक रिश्तों की पहचान करना सिखाया गया है। इसमें शब्द-बोध बढ़ाने के लिए ‘समान लय वाले शब्द’, ‘विलोम शब्द’ और ‘पुल्लिंग-स्त्रीलिंग’ शब्दों के मिलान जैसी अभ्यास गतिविधियाँ शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, बच्चों की रचनात्मकता बढ़ाने के लिए मोर और रेलगाड़ी के चित्र बनाने तथा उनमें रंग भरने के निर्देश दिए गए हैं।
पुस्तक में सामान्य ज्ञान के तौर पर जंगल, मोर के आवास और रेलगाड़ी के लाभों पर भी चर्चा की गई है। यह सामग्री प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी है, जो मनोरंजन के साथ-साथ उनके संज्ञानात्मक विकास में सहायक सिद्ध होती है। पूरी पुस्तक हिंदी भाषा में रचित है और इसे दिवस-वार शिक्षण योजना के रूप में व्यवस्थित किया गया है।
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❤️ पाठ 5: प्रभु मेरा जीवन हो सुंदर (प्रार्थना)
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❤️ पाठ 6: प्यासा कौवा (चित्रकथा)
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❤️ पाठ 7: दो बकरियाँ (कहानी)
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❤️ पाठ 8: बहुत हुआ (कविता)
‘बहुत हुआ’ एक बाल कविता है जो अत्यधिक वर्षा के कारण होने वाली परेशानियों को बहुत ही सरल और रोचक तरीके से व्यक्त करती है। कविता में बच्चे अपनी बोरियत और लाचारी व्यक्त करते हुए कहते हैं कि चारों ओर कीचड़ और पानी होने के कारण उन्हें घर के अंदर ही रहना पड़ रहा है।
वे अपनी स्थिति की तुलना पिंजरे में बंद तोते से करते हैं और सूरज दादा से धूप खिलाने की दुआ मांगते हैं। पुस्तक में इस कविता के माध्यम से विद्यार्थियों के लिए विविध शिक्षण गतिविधियाँ दी गई हैं, जैसे समान लय वाले शब्द (जैसे पानी-नानी, रात-सात), बारिश से होने वाले लाभ और हानियों पर चर्चा, तथा मौसम के अनुसार उपयोग की जाने वाली वस्तुओं की पहचान करना।
इसमें बच्चों की रचनात्मकता बढ़ाने के लिए चित्र बनाने और अक्षर जाल से जानवरों के नाम ढूँढने जैसी पहेलियाँ भी शामिल हैं। यह पाठ न केवल भाषा कौशल विकसित करता है, बल्कि बच्चों को प्राकृतिक परिवेश और मौसम के बदलावों के प्रति संवेदनशील भी बनाता है।
पूरी सामग्री हिंदी भाषा में है और प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी और मनोरंजक ढंग से तैयार की गई है।
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❤️ पाठ 9: भालू ने खेली फुटबॉल (कहानी)
‘भालू ने खेली फुटबॉल’ एक मनोरंजक कहानी है जो जाड़े के मौसम की एक सुबह से शुरू होती है। कोहरे के कारण भालू साहब को जामुन के पेड़ के नीचे सोया हुआ शेर का बच्चा एक फुटबॉल जैसा दिखाई देता है। खुद को गर्म रखने के लिए भालू उसे जोर से उछाल देता है।
घबराकर शेर का बच्चा दहाड़ता है और पेड़ की डाल पकड़ लेता है, लेकिन डाल टूट जाती है। भालू जल्दी ही अपनी गलती समझ जाता है और उसे गिरने से बचा लेता है। दिलचस्प बात यह है कि शेर के बच्चे को उछलने में मजा आने लगता है और वह बार-बार उछालने की जिद करता है।
भालू उसे कई बार उछालता है, लेकिन अंत में थककर अपने घर की ओर भाग जाता है। तभी वहाँ बगीचे का माली आ जाता है और पेड़ की डाल तोड़ने के लिए शेर के बच्चे से हर्जाना माँगने लगता है। माली के नजर हटते ही शेर का बच्चा भी वहाँ से नौ-दो ग्यारह हो जाता है और अपनी जान बचाकर खुश होता है।
यह कहानी बच्चों को हास्य के साथ-साथ चालाकी और सूझबूझ का पाठ पढ़ाती है।
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❤️ पाठ 10: किसान, आलू और भालू (कहानी)
यह पुस्तक ‘किसान, भालू और आलू’ की एक रोचक कहानी पर आधारित है जो बुद्धि और सूझबूझ के महत्व को दर्शाती है। कहानी एक चालाक किसान के इर्द-गिर्द घूमती है जो जंगल के पास अपने खेत में आलू की खेती करता है। एक भालू उसे डराकर फसल में हिस्सा माँगता है।
किसान बुद्धिमानी से भालू को जमीन के ऊपर का हिस्सा देने का वादा करता है। जब फसल तैयार होती है, तो किसान को जमीन के नीचे से आलू मिलते हैं, जबकि भालू को केवल बेकार पत्ते हाथ लगते हैं। अपनी हार से गुस्सा होकर भालू अगली बार जमीन के नीचे का हिस्सा माँगता है।
इस बार किसान चतुराई दिखाते हुए आलू के बजाय गेहूँ बो देता है, जिससे भालू को फिर से केवल जड़ें मिलती हैं और किसान को अनाज। कहानी के अलावा, पुस्तक में बच्चों के लिए विभिन्न शैक्षिक गतिविधियाँ शामिल हैं, जैसे कि जंगली और पालतू जानवरों के नाम लिखना, सब्जियों और फलों की पहचान करना, समान ध्वनि वाले शब्द ढूँढना और चित्रकारी करना। यह सामग्री विद्यार्थियों के भाषा कौशल, तार्किक सोच और कृषि व प्रकृति के प्रति समझ को विकसित करने के उद्देश्य से तैयार की गई है।
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❤️ पाठ 11: अगर पेड़ भी चलते होते (कविता)
यह पुस्तक ‘अगर पेड़ भी चलते होते’ नामक एक काल्पनिक और शिक्षाप्रद कविता पर आधारित है। कविता में इस कल्पना का आनंद लिया गया है कि यदि पेड़ इंसानों की तरह चल सकते, तो जीवन कितना मज़ेदार होता। बच्चे पेड़ों के तने में रस्सी बाँधकर उन्हें कहीं भी साथ ले जा सकते थे।
धूप लगने पर उनकी शीतल छाया में सुस्ताते और बारिश होने पर उनके नीचे छिपकर स्वयं को भीगने से बचाते। अचानक भूख लगने पर पेड़ों से मीठे फल तोड़कर खा सकते थे और बाढ़ या कीचड़ आने की स्थिति में पेड़ के ऊपर चढ़कर अपनी रक्षा कर सकते थे। पुस्तक के विभिन्न अध्यायों (दिवस 79 से 84) में बच्चों के लिए कई रचनात्मक गतिविधियाँ और अभ्यास दिए गए हैं।
इसमें शब्द-निर्माण, समान लय वाले शब्द, विलोम शब्द, और वाक्यों के प्रयोग की समझ विकसित करने पर ज़ोर दिया गया है। साथ ही, बच्चों को प्रकृति, फूलों, फलों और जानवरों के आवास के बारे में जानकारी देने के लिए चित्र बनाने और मिलान करने जैसी रोचक गतिविधियाँ शामिल की गई हैं। यह पुस्तक प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों में कल्पनाशीलता और पर्यावरण के प्रति लगाव पैदा करने का एक प्रभावी माध्यम है।
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❤️ पाठ 12: हाँ जी हाँ, ना जी ना (कविता)
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❤️ पाठ :13: कितने कौए (कहानी)
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❤️ पाठ 14: चूँ-चूँ की टोपी (एकांकी)
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❤️ पाठ 15: मेला (कविता)
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❤️ पाठ 16: निशा की चिट्ठी (पत्र)
यह पुस्तक ‘निशा की चिट्ठी’ नामक एक संवादात्मक पाठ पर आधारित है, जो पत्र लेखन और चिड़ियाघर के अनुभवों के इर्द-गिर्द घूमती है। मुख्य कहानी में निशा अपनी नानी को एक पत्र लिखती है, जिसमें वह अपने माता-पिता के साथ पटना के चिड़ियाघर की यात्रा का विस्तार से वर्णन करती है।
वह शेर, भालू, बंदर और हाथी जैसे जानवरों के साथ-साथ रंग-बिरंगी चिड़ियों और मछलीघर को देखने के अपने रोमांच और डर को साझा करती है। यात्रा के बाद वह लिट्टी और आइसक्रीम खाने के आनंद के बारे में भी बताती है।
शैक्षिक रूप से, यह पुस्तक छात्रों को पत्र लेखन के प्रारूप, उद्देश्य और विभिन्न प्रकार के पत्रों से परिचित कराती है। इसमें विविध अभ्यास शामिल हैं, जैसे रिक्त स्थान भरना, प्रश्नों के उत्तर देना, पशुओं की बोलियों को पहचानना और अपनी यात्रा के बारे में पत्र लिखना।
इसके अतिरिक्त, इसमें ‘नानी तेरी मोरनी’, ‘कौआ और लोमड़ी’ और ‘मेला’ जैसी प्रसिद्ध कविताओं और कहानियों के माध्यम से पुनरावृत्ति की गई है। यह पुस्तक न केवल बच्चों के भाषाई कौशल और शब्द-ज्ञान को बढ़ाती है, बल्कि उन्हें अपने अनुभवों को रचनात्मक रूप से व्यक्त करने और सामाजिक शिष्टाचार सीखने के लिए भी प्रेरित करती है।
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❤️ पाठ 17: होली (कविता)
यह पुस्तक ‘होली’ नामक कविता और उससे संबंधित विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों पर आधारित है। इसमें होली के त्योहार के उल्लास, रंगों, पकवानों और सामाजिक मेल-मिलाप का सुंदर वर्णन किया गया है।
पुस्तक में विद्यार्थियों के लिए कविता गायन, त्योहारों की पहचान, रिक्त स्थान पूर्ति, और पर्यायवाची एवं विलोम शब्दों का अभ्यास दिया गया है। इसके माध्यम से बच्चों को होली के महत्व, इसे मनाने के तरीकों और इस अवसर पर बनाए जाने वाले विशेष पकवानों जैसे पुआ और पकवान की जानकारी दी गई है।
साथ ही, अन्य प्रमुख भारतीय त्योहारों जैसे दीपावली, ईद और दशहरा के बारे में भी संक्षिप्त चर्चा की गई है, जिससे छात्रों का सांस्कृतिक ज्ञान बढ़ता है।
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❤️ पाठ 18: बंदर और टोपी (कहानी)
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❤️ पाठ 19: पहेलियाँ (कविता)
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❤️ पाठ 20: इच्छा (कविता)
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