• Skip to main content
  • Skip to primary sidebar
Bihar Board Books

Bihar Board Books

Download Bihar Board Textbooks

Bihar Board 9th Urdu Book 2026 PDF Download

Last Updated on February 16, 2026 by bseb 3 Comments

Bihar Board 9th Urdu Book PDF Download (اردو)

Bihar Board 9th Urdu Book PDF Download – इस पेज पर बिहार बोर्ड 9th के छात्रों के लिए “ Urdu (اردو)” Book दिया गया है | जिसे आप अपने फ़ोन में Free Download कर सकते हैं |

🌐 सभी विषयों की बुक्स डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें -> https://biharboardbooks.com/

🌐 बिहार बोर्ड सलूशन डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें – Bihar Board Solutions

सभी बुक्स का डाउनलोड लिंक नीचे पेज पर दिया गया है |

Class IX: Urdu (اردو) PDF Free Download

☞ बुक्स डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए डाउनलोड लिंक पर क्लिक करें | line

❤️ Preface

यह अध्याय ‘पाश्चात्य निबंध’ उर्दू साहित्य में अनुवाद कार्य के महत्व और अंग्रेजी निबंध के ऐतिहासिक विकास यात्रा का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करता है। लेखक के अनुसार, ‘निबंध’ शब्द अंग्रेजी के फ्रांसीसी शब्द ‘एसे’ (Essai) से आया है, जिसका शाब्दिक अर्थ ‘प्रयास’ है। इस विधा की नींव सोलहवीं शताब्दी में फ्रांसीसी लेखक माइकल डी मोंटेन ने रखी। शुरुआत में निबंध नैतिक शिक्षाओं और यूनानी-रोमन व्यक्तित्वों तक सीमित थे, लेकिन मोंटेन ने इसे व्यक्तिगत अनुभवों, भावनाओं और स्वतंत्र विचारों की अभिव्यक्ति का सर्वोत्तम माध्यम बना दिया। अंग्रेजी साहित्य में फ्रांसिस बेकन ने इस विधा को पेश किया और अपनी बौद्धिक गहराई, संक्षिप्तता और बुद्धिमत्तापूर्ण शैली से इसे एक विशिष्ट स्थान दिया। अठारहवीं और उन्नीसवीं शताब्दी के दौरान स्टील, एडिसन, गोल्डस्मिथ और चार्ल्स लैम्ब जैसे प्रसिद्ध लेखकों ने निबंध लेखन को शिखर पर पहुंचाया। चार्ल्स लैम्ब को ‘अंग्रेजी निबंधों का राजकुमार’ माना जाता है, जिनकी रचनाओं में जीवन की कोमलता और मानवता का तत्व प्रमुख है। बीसवीं शताब्दी में टी.एस. इलियट जैसे आलोचकों ने इसे आधुनिक विचारों और साहित्यिक परंपरा से जोड़ा। यह अध्याय स्पष्ट करता है कि किस प्रकार पश्चिमी साहित्य के अनुवादों ने उर्दू के गद्य भंडार में वृद्धि की। निबंध लेखन केवल सतही लेखन नहीं है, बल्कि यह गंभीरता, गहन चिंतन और कलात्मक कौशल की मांग रखने वाली एक महत्वपूर्ण साहित्यिक विधा है।

 

📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें

🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯


❤️ سبق 1 : ہیرو

यह रचना ‘पाश्चात्य निबंध’ शीर्षक के अंतर्गत है, जिसका विषय ‘अंदर जीत लाल’ द्वारा लिखित है और ‘सलीम आगा क़ज़लबाश’ ने इसे उर्दू में अनुवादित किया है। इसमें उर्दू साहित्य में अनुवाद कार्य के महत्व और विशेष रूप से निबंध विधा के विकास पर प्रकाश डाला गया है। इसमें फोर्ट विलियम कॉलेज के ऐतिहासिक योगदान और उर्दू गद्य, विशेषकर कहानी, नाटक और कविता के विकास में गैर-मुस्लिम साहित्य के अनुवादों के योगदान का उल्लेख है। निबंध की परिभाषा और इसके शाब्दिक अर्थ ‘प्रयास’ को समझाया गया है। इस विधा की शुरुआत सोलहवीं शताब्दी में फ्रांसीसी लेखक माइकल डी मोंटेन से हुई, जिन्होंने पारंपरिक नैतिक शिक्षाओं के स्थान पर व्यक्तिगत अनुभवों और स्वतंत्र विचारों को प्राथमिकता दी। अंग्रेजी साहित्य में फ्रांसिस बेकन ने इसे एक संक्षिप्त और बुद्धिमत्तापूर्ण विधा के रूप में स्थापित किया। अठारहवीं और उन्नीसवीं शताब्दी में स्टील, एडिसन, चार्ल्स लैम्ब और टी.एस. इलियट जैसे लेखकों ने इसे समृद्ध किया, जिनमें चार्ल्स लैम्ब को ‘अंग्रेजी निबंधों का राजकुमार’ कहा जाता है। अंत में यह स्पष्ट किया गया है कि निबंध लेखन केवल कलम चलाना नहीं है, बल्कि यह गहन चिंतन, गंभीरता और कठिन परिश्रम की मांग करने वाली एक महत्वपूर्ण साहित्यिक विधा है, जो मानवीय भावनाओं, अनुभवों और ब्रह्मांड पर आलोचनात्मक दृष्टिकोण डालने का एक उत्कृष्ट माध्यम है।

 

📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें

🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯


❤️ سبق 2 : پورے چاند کی رات

यह रचना ‘दरख़्शां’ पुस्तक के पाठ ‘पाश्चात्य निबंध’ का सारांश प्रस्तुत करती है। इसकी शुरुआत अनुवाद कार्य के महत्व से होती है, जिसमें बताया गया है कि उर्दू साहित्य के विकास में अनुवादों की मुख्य भूमिका रही है। पाठ का मूल केंद्र ‘निबंध’ है, जो अंग्रेजी शब्द ‘Essay’ और फ्रांसीसी ‘Essai’ (प्रयास) से लिया गया है। इस विधा के संस्थापक माइकल डी मोंटेन हैं, जिन्होंने नैतिक शिक्षाओं के बजाय व्यक्तिगत अनुभवों और हृदय की भावनाओं को अपनी रचनाओं का विषय बनाया। बाद में फ्रांसिस बेकन ने इसे अंग्रेजी में पेश किया। अठारहवीं और उन्नीसवीं शताब्दी में स्टील, एडिसन और चार्ल्स लैम्ब ने इसे शिखर पर पहुंचाया, जिनमें लैम्ब को ‘निबंधों का राजकुमार’ कहा जाता है। बीसवीं शताब्दी में टी.एस. इलियट ने इसमें आलोचनात्मक गहराई पैदा की। यह पाठ स्पष्ट करता है कि निबंध लेखन केवल असंबद्ध विचारों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह एक गंभीर कला है जिसके लिए गहन बौद्धिक अभ्यास की आवश्यकता होती है। अंदर जीत लाल के इस लेख को सलीम आगा क़ज़लबाश ने उर्दू रूप दिया है, जो निबंध विधा की समझ के लिए एक उत्कृष्ट बौद्धिक संपदा है।

 

📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें

🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯


❤️ سبق 3 : شاید

यह रचना उर्दू साहित्य में अनुवाद कार्य के महत्व और पाश्चात्य निबंधों के विकास यात्रा का विवरण प्रस्तुत करती है। लेखक के अनुसार उर्दू गद्य, विशेष रूप से कहानी, नाटक और कविता के विकास में अनुवादों ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसमें फोर्ट विलियम कॉलेज की सेवाओं को नहीं भुलाया जा सकता। निबंध विधा की जड़ें फ्रांसीसी शब्द ‘एसे’ (प्रयास) से जुड़ी हैं, और इसकी शुरुआत सोलहवीं शताब्दी के लेखक माइकल डी मोंटेन से हुई। मोंटेन ने पारंपरिक शैली के बजाय अपने व्यक्तिगत प्रभावों और अनुभवों को साहित्यिक स्वरूप दिया और निबंध को एक नई पहचान प्रदान की। अंग्रेजी साहित्य में इस विधा को फ्रांसिस बेकन ने प्रसिद्धि दिलाई, जिनके निबंध अपनी संक्षिप्तता और बुद्धिमत्तापूर्ण शैली के लिए आज भी प्रसिद्ध हैं। चार्ल्स लैम्ब को ‘अंग्रेजी निबंधों का राजकुमार’ कहा जाता है क्योंकि उनकी रचनाओं में मानवीय संवेदना और कोमलता का तत्व प्रमुख है। रचना में अन्य महत्वपूर्ण लेखकों जैसे ओलिवर गोल्डस्मिथ, सैमुएल जॉनसन, एडिसन और स्टील की शैली पर भी प्रकाश डाला गया है। आधुनिक युग में टी.एस. इलियट ने निबंध लेखन के माध्यम से साहित्य को नई विस्तृतियाँ प्रदान कीं। सारांश यह है कि एक अच्छा निबंध केवल भावनाओं का उद्गार नहीं है, बल्कि यह गहन चिंतन, परिपक्व अवलोकन और कलात्मक गंभीरता का सुंदर मिश्रण है। यह विषय पाश्चात्य निबंधों के ऐतिहासिक और कलात्मक विकास को समझने के लिए एक उत्कृष्ट बौद्धिक साधन है।

 

📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें

🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯


❤️ سبق 4 : آخری سبق

यह रचना उर्दू साहित्य में अनुवाद कार्य के महत्व और पाश्चात्य निबंधों के ऐतिहासिक विकास पर व्यापक प्रकाश डालती है। शुरुआत में यह स्पष्ट किया गया है कि उर्दू गद्य, विशेष रूप से कहानी, नाटक और कविता के विकास में अनुवादों ने एक मूल प्रेरक के रूप में कार्य किया है। फोर्ट विलियम कॉलेज से शुरू हुई यह परंपरा बीसवीं शताब्दी तक विस्तृत होती गई, जिसमें अंग्रेजी, रूसी और तुर्की के अलावा क्षेत्रीय भाषाओं से भी अनुवाद किए गए। लेखक के अनुसार अनुवाद कार्य एक कला है जिसमें मूल रचना की आत्मा को दूसरी भाषा में स्थानांतरित करना एक कठिन प्रक्रिया है, और शब्दशः अनुवाद मुक्त अनुवाद की तुलना में अधिक विश्वसनीय माना जाता है। दूसरे भाग में ‘पाश्चात्य निबंध’ शीर्षक से इस विधा की परिभाषा और इतिहास बताया गया है। निबंध, जो अंग्रेजी शब्द ‘एसे’ (Essay) का समकक्ष है, अपने मूल में फ्रांसीसी शब्द ‘एसे’ से निकला है जिसका अर्थ ‘प्रयास’ है। इस विधा के संस्थापक माइकल डी मोंटेन ने व्यक्तिगत अवलोकनों और दार्शनिक विचारों को एक नया रूप दिया, जिसे बाद में फ्रांसिस बेकन ने अंग्रेजी साहित्य में स्थिरता प्रदान की। बेकन के निबंध लोकोक्ति की तरह व्यापक और बुद्धि व ज्ञान से भरपूर हैं। रचना में चार्ल्स लैम्ब को ‘निबंधों का राजकुमार’ बताया गया है जो मानव जीवन के कोमल पहलुओं को हास्य और भावनात्मक शैली में प्रस्तुत करते हैं। इसके अलावा स्टील, एडिसन, गोल्डस्मिथ और आधुनिक युग के टी.एस. इलियट के कार्यों का उल्लेख भी किया गया है। यह लेख अंदर जीत लाल के विचार का परिणाम है जिसे सलीम आगा क़ज़लबाश ने उर्दू में स्थानांतरित किया है।

 

📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें

🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯


❤️ سبق 5 : سائنس فکشن

‘पाश्चात्य निबंध’ नामक यह विषय उर्दू साहित्य में अनुवाद कार्य के महत्व और पाश्चात्य निबंधों के ऐतिहासिक विकास का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करता है। लेखक के अनुसार उर्दू गद्य, विशेष रूप से कहानी और नाटक के विकास में अनुवादों ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। निबंध, जो फ्रांसीसी शब्द ‘एसे’ से निकला है और जिसका शाब्दिक अर्थ ‘प्रयास’ है, अंग्रेजी साहित्य की एक महत्वपूर्ण विधा है। इसकी नींव सोलहवीं शताब्दी में फ्रांसीसी लेखक माइकल डी मोंटेन ने रखी, जिन्होंने अपने व्यक्तिगत और आसपास के अवलोकनों को स्वतंत्र रूप से साहित्यिक भाषा में व्यक्त किया। सत्रहवीं शताब्दी में फ्रांसिस बेकन ने इसे संक्षिप्तता और बुद्धिमत्तापूर्ण शैली प्रदान की, जिनके कई वाक्य आज भी लोकोक्ति के रूप में प्रसिद्ध हैं। अठारहवीं और उन्नीसवीं शताब्दी में स्टील, एडिसन और ओलिवर गोल्डस्मिथ ने इस विधा को आगे बढ़ाया, जबकि चार्ल्स लैम्ब को अपनी सरल अभिव्यक्ति और व्यक्तिगत स्पर्श के कारण ‘अंग्रेजी निबंधों का राजकुमार’ कहा जाता है। उन्नीसवीं शताब्दी के अंत और बीसवीं शताब्दी में जॉन रस्किन, मैथ्यू आर्नोल्ड और टी.एस. इलियट जैसे आलोचकों ने इसे नई विस्तृतियाँ दीं और इसे भावनाओं के बजाय व्यक्तित्व से मुक्त रखा। इस विषय के माध्यम से जहाँ विश्व साहित्य की उत्कृष्ट कृतियों का परिचय मिलता है, वहीं यह उर्दू पाठक वर्ग को एक नई आलोचनात्मक चेतना से भी अवगत कराता है। विषय के अंत में लेखक जोर देता है कि निबंध लेखन कोई सरल कार्य नहीं है, बल्कि यह गहन चिंतन, परिपक्वता और अत्यधिक परिश्रम की मांग करने वाली एक गंभीर साहित्यिक विधा है।

 

📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें

🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯


❤️ سبق 6 : عبرت اور نصیحت

यह लेख ‘पाश्चात्य निबंध’ निबंध विधा और उसके विकास पर प्रकाश डालता है। लेखक (अंदर जीत लाल) बताते हैं कि शब्द ‘Essay’ फ्रांसीसी शब्द ‘Essai’ से निकला है जिसका अर्थ ‘प्रयास’ है। इस विधा की शुरुआत सोलहवीं शताब्दी में फ्रांसीसी लेखक माइकल डी मोंटेन ने की थी। शुरुआत में यह नैतिक शिक्षाओं पर आधारित होते थे, लेकिन मोंटेन ने इसे व्यक्तिगत अनुभवों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का माध्यम बनाया। अंग्रेजी में इस विधा को बेकन ने पेश किया, जिनके निबंध संक्षिप्तता और लोकोक्ति वाक्यों के लिए प्रसिद्ध हैं। लेख में अध्ययन के महत्व पर बेकन के विचारों का भी उल्लेख है। बाद में, अठारहवीं और उन्नीसवीं शताब्दी में चार्ल्स लैम्ब, एडिसन, स्टील और ओलिवर गोल्डस्मिथ जैसे लेखकों ने इसे समृद्ध किया। चार्ल्स लैम्ब को ‘अंग्रेजी निबंधों का राजकुमार’ कहा जाता है। बीसवीं शताब्दी में टी.एस. इलियट ने इसे आलोचनात्मक और काव्यात्मक आयाम प्रदान किए। लेख में अनुवाद कार्य के महत्व पर भी जोर दिया गया है, विशेष रूप से उर्दू साहित्य में पश्चिमी साहित्य के अनुवादों ने उर्दू कहानी और निबंध को विस्तार दिया है। अनुवाद कार्य एक कठिन कला है क्योंकि रचना का अपनी भाषा से गहरा संबंध होता है। अंत में यह स्पष्ट किया गया है कि निबंध लेखन केवल कलम चलाने का नाम नहीं है, बल्कि यह गहन चिंतन और गंभीरता की मांग करता है।

 

📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें

🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯


❤️ سبق 7 : تعلیم قدیمو و جدید

नज़्म ‘आज का स्टूडेंट’ उर्दू के प्रसिद्ध व्यंग्यकार शायर दिलावर फ़िग़ार की एक उत्कृष्ट रचना है, जिसमें उन्होंने वर्तमान युग के विद्यार्थियों के जीवनशैली और शैक्षिक प्रणाली से उनकी बेरुखी को व्यंग्यात्मक अंदाज़ में पेश किया है। शायर के अनुसार, आज का विद्यार्थी किताबों से दूर भागता है और उसकी उत्सुकता का केंद्र केवल फिल्में और फ़ालतू मनोरंजन हैं। वह अपनी अज्ञानता पर शर्मिंदा होने के बजाय उसे अपनी किस्मत समझता है और परीक्षाओं में फेल होने को एक परंपरा के रूप में बनाए रखना चाहता है। नज़्म में बताया गया है कि उसे बुनियादी विषयों जैसे रसायन विज्ञान और गणित से कोई लगाव नहीं है, बल्कि वह राजनीति और चुनाव में उत्सुकता रखता है। वह स्वयं को भविष्य का नेता समझता है, हालांकि उसकी शैक्षिक स्थिति अत्यंत दयनीय है। दिलावर फ़िग़ार ने इस व्यंग्य के माध्यम से एक बड़ी सच्चाई व्यक्त की है कि किस प्रकार नई पीढ़ी वैज्ञानिक क्षमता से वंचित होती जा रही है। यह नज़्म हमें उस शैक्षिक समूह पर विचार करने की दावत देती है जिसका शिकार आज का समाज बन रहा है। कुल मिलाकर, यह नज़्म दिलावर फ़िग़ार के गहरे सामाजिक अवलोकन और प्रतिभा का एक प्रमुख उदाहरण है जो पाठक को हंसाने के साथ-साथ सोचने पर भी मजबूर करती है।

 

📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें

🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯


❤️ سبق 8 : مغربی انشائیے

इस पाठ का शीर्षक ‘पाश्चात्य निबंध’ है, जिसमें निबंध के इतिहास, इसकी परिभाषा और विश्व साहित्य विशेषकर अंग्रेजी साहित्य में इसके विकास यात्रा का विस्तृत अवलोकन प्रस्तुत किया गया है। निबंध शब्द फ्रांसीसी भाषा के शब्द ‘एसे’ (Essai) से लिया गया है, जिसका शाब्दिक अर्थ ‘प्रयास’ करना है। इस विधा की औपचारिक नींव सोलहवीं शताब्दी के फ्रांसीसी लेखक माइकल डी मोंटेन ने रखी थी, जिसने इसे व्यक्तिगत अनुभवों और अवलोकनों की अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया। अंग्रेजी साहित्य में फ्रांसिस बेकन ने इस विधा को एक नई दिशा प्रदान की और इसे एक ऐसी संक्षिप्त रचना बताया जिसमें बिना किसी विशेष खोज के सत्य की अभिव्यक्ति की जाए। बेकन के बाद स्टील, एडिसन, ओलिवर गोल्डस्मिथ और सैमुएल जॉनसन जैसे प्रसिद्ध निबंधकारों ने इस कला को और ऊंचाइयों तक पहुंचाया। चार्ल्स लैम्ब को उनकी लेखन शैली के आधार पर ‘निबंधों का राजकुमार’ स्वीकार किया जाता है। बीसवीं शताब्दी में टी.एस. इलियट जैसे आलोचकों ने इसे आधुनिक साहित्यिक व आलोचनात्मक उद्देश्यों के लिए प्रयुक्त किया। पाठ में यह बिंदु भी महत्वपूर्ण है कि उर्दू साहित्य में अनुवादों के माध्यम से पाश्चात्य निबंधों के प्रभाव पड़े, जिससे उर्दू गद्य के भंडार में काफी वृद्धि हुई। निबंध लेखन केवल कलम चलाने का नाम नहीं है बल्कि यह गहन अध्ययन, गंभीरता और संयम की मांग करने वाली विधा है।

 

📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें

🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯


❤️ سبق 9 : فلپائن کا سفر

यह अध्याय ‘पाश्चात्य निबंध’ के शीर्षक से है, जिसमें निबंध विधा और इसके पश्चिमी परिप्रेक्ष्य का विस्तृत जायजा लिया गया है। शुरुआत में अनुवाद कार्य के महत्व पर प्रकाश डाला गया है कि किस प्रकार उर्दू साहित्य के विकास में अनुवादों ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। निबंध के संबंध में बताया गया है कि यह शब्द फ्रांसीसी शब्द ‘एसे’ से निकला है जिसका अर्थ ‘प्रयास’ है। इस कला की नींव सोलहवीं शताब्दी में फ्रांसीसी लेखक माइकल डी मोंटेन ने रखी, जिन्होंने अपनी रचनाओं में व्यक्तिगत प्रभावों और अवलोकनों को स्वतंत्र रूप से प्रस्तुत किया। अंग्रेजी साहित्य में फ्रांसिस बेकन को निबंध लेखन में उच्च स्थान प्राप्त है, जिनके संक्षिप्त वाक्य लोकोक्ति बन चुके हैं, जैसे उनका प्रसिद्ध निबंध ‘ऑफ स्टडीज’। उनके बाद रिचर्ड स्टील और जोसेफ एडिसन ने ‘दी टैटलर’ जैसे पत्रिकाओं के माध्यम से इस विधा को लोकप्रिय बनाया। चार्ल्स लैम्ब को ‘अंग्रेजी निबंधों का राजकुमार’ कहा जाता है क्योंकि उनकी रचनाओं में कोमलता और मानवता का तत्व मिलता है। अध्याय में सैमुएल जॉनसन, ओलिवर गोल्डस्मिथ और जॉन रस्किन के ‘दी हिरो एज़ पोएट’ जैसी रचनाओं का भी उल्लेख है। आधुनिक युग में टी.एस. इलियट के आलोचनात्मक निबंधों का जिक्र मिलता है जिन्होंने परंपरा और व्यक्तिगत प्रतिभा पर जोर दिया। अंत में यह स्पष्ट किया गया है कि निबंध लेखन केवल कलम चलाने का नाम नहीं है बल्कि यह गहन चिंतन और कठिन परिश्रम की मांग करने वाली विधा है।

 

📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें

🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯


❤️ سبق 10 : قدوائی خاندان

📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें

🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯


❤️ سبق 11 : میرا ادبی سفر

यह पाठ उर्दू साहित्य के प्रतिभाशाली व्यंग्यकार और हास्य कवि दिलावर फ़िग़ार की प्रसिद्ध नज़्म ‘आज का स्टूडेंट’ पर आधारित है। पुस्तक के इस भाग में पहले व्यंग्य और हास्य की व्याख्या की गई है और दिलावर फ़िग़ार के जीवन परिचय को प्रस्तुत किया गया है, जिन्होंने अपनी ज़िंदगी का बड़ा हिस्सा पढ़ाने और कविता के लिए समर्पित किया। नज़्म ‘आज का स्टूडेंट’ में कवि ने समकालीन युग के विद्यार्थियों की गैर-गंभीरता और बदलती हुई प्राथमिकताओं पर तीखा व्यंग्य किया है। कवि एक ऐसे विद्यार्थी की तस्वीर पेश करता है जिसे किताबों से ज्यादा फिल्मों के नायकों और बाज़ार की चकाचौंध में दिलचस्पी है। उसकी नज़र में अंग्रेजी व्याकरण और गणित के सूत्रों से घृणा है और परीक्षा में ‘फेल’ होने को वह अपनी सफलता और एक परंपरा मानता है। वह राजनीति में भाग लेने और नेता बनने का सपना देखता है, जबकि शिक्षा अब केवल एक औपचारिक कार्य बनकर रह गई है। वह शिक्षक के सम्मान से वंचित है और फेल होने को अपनी परंपरा समझता है। दिलावर फ़िग़ार ने अपनी इस नज़्म के माध्यम से जहाँ पाठक को हंसाने पर मजबूर किया है, वहीं समाज और शैक्षिक प्रणाली की कमियों पर भी गहरी चोट की है। यह नज़्म विद्यार्थियों की मानसिकता और बदलते हुए रुख का एक आईना है जो आज के युग में भी उतनी ही सटीक है जितनी उस समय थी।

 

📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें

🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯


❤️ سبق 12 : مولانا ولایت الی خان

यह अध्याय दिलावर फ़िग़ार के जीवन और उनकी व्यंग्य नज़्म ‘आज का स्टूडेंट’ पर आधारित है। दिलावर फ़िग़ार उर्दू साहित्य के एक प्रसिद्ध व्यंग्य कवि थे जो 1928 में बदायूं में पैदा हुए। उनका असली नाम दिलावर हुसैन था, लेकिन वे अपने कलमी नाम दिलावर फ़िग़ार से प्रसिद्ध हुए। उनकी कविता में जीवन की विसंगतियों को बड़ी सहजता और परिपक्व दृष्टि से उजागर किया गया है। नज़्म ‘आज का स्टूडेंट’ में दिलावर फ़िग़ार ने समकालीन युग के विद्यार्थियों का बहुत खूबसूरती और व्यंग्य के साथ चित्रण किया है। वे बताते हैं कि आज का स्टूडेंट शिक्षा से ज्यादा फिल्मों, संगीत और फ़ैशन में दिलचस्पी रखता है। उनकी नज़र में परीक्षा में फेल होना एक गर्व और एक हास्यास्पद बात है। विद्यार्थी को न तो शिक्षक का सम्मान है और न ही अपने भविष्य की कोई चिंता। वह राजनीति को अपनी गली और चुनाव को अपना सहारा समझता है और शैक्षिक विषयों में फेल होने के बावजूद स्वयं को बहुत बड़ा नेता मानता है। इस नज़्म के माध्यम से कवि ने शैक्षिक प्रणाली के पतन और युवा पीढ़ी की गैर-गंभीरता पर गहरा व्यंग्य किया है। कवि ने शब्दों के उत्कृष्ट चयन और व्यंग्यपूर्ण शैली में इस कड़वी सच्चाई को व्यक्त किया है कि आज का विद्यार्थी यू और आई को अमेरिका का एक राज्य और रसायन विज्ञान के सूत्रों को एक बोझ समझता है। कुल मिलाकर, यह नज़्म उर्दू व्यंग्य कविता का एक शानदार नमूना है जो पाठक को हंसाने के साथ-साथ सोचने पर भी मजबूर करती है।

 

📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें

🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯


❤️ سبق 13 : قومی تعلیم

यह पाठ तमिल साहित्य के महान कवि और स्वतंत्रता सेनानी सुब्रह्मण्यम भारती के जीवन परिचय और उनकी अंग्रेज़ी कविता से संबंधित है। सुब्रह्मण्यम भारती 11 दिसंबर 1882 को तमिल नाडु के ईट्टायपुरम में पैदा हुए। बचपन में ही पिता का साया सिर से उठ गया, जिसके बाद उनके नाना ने उनकी परवरिश की। वे असाधारण प्रतिभा के स्वामी थे और महज दस साल की उम्र में ही तमिल भाषा में उच्च स्तर की कविता करने लगे थे। उनकी काव्य प्रतिभा से प्रभावित होकर ईट्टायपुरम के ज़मींदार ने उन्हें ‘भारती’ के सम्मानजनक संबोधन से नवाजा। भारती ने अपनी कविता की नींव देशभक्ति, सामाजिक अन्यायों के खात्मे और देश की आज़ादी पर रखी। उन्होंने अलाहाबाद विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की और पत्रकारिता के माध्यम से राष्ट्रीय आंदोलन में भाग लिया। अध्ययन के अंतर्गत इस पाठ में उनकी तमिल कविता का उर्दू अनुवाद ‘गीत आज़ादी’ शामिल है, जो हसरत सहरवर्दी ने किया है। इस कविता में कवि ने गुलामी की बेड़ियाँ तोड़ने पर आनंद व्यक्त किया है और एक ऐसे हिंदुस्तान की कल्पना की है जहाँ जात-पात, छुआछूत और वर्गीय भेद मिट चुके हों। वह किसानों, मजदूरों और श्रमिकों को देश की मूल पूंजी मानते हैं। उनका मानना था कि आज़ादी के बाद हर नागरिक को समान अधिकार मिलने चाहिए। सुब्रह्मण्यम भारती का 1921 में निधन हो गया, लेकिन उनका काम आज भी देशभक्ति के जज़्बे से सराबोर है।

 

📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें

🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯


❤️ سبق 14 : مسدس حالی

नज़्म ‘आज का स्टूडेंट’ उर्दू के प्रसिद्ध व्यंग्य कवि दिलावर फ़िग़ार की एक उत्कृष्ट रचना है, जिसमें उन्होंने आधुनिक युग के विद्यार्थियों की मानसिक स्थिति और शैक्षिक गलत राह पर तीखा व्यंग्य किया है। नज़्म का केंद्रीय पात्र एक ऐसा विद्यार्थी है जिसे अपनी पढ़ाई से कोई लगाव नहीं है और वह अपनी अज्ञानता पर गर्व करता है। वह स्वयं को सिनेमा का दीवाना कहता है और परीक्षा में फेल होने पर कोई शर्मिंदगी महसूस नहीं करता, बल्कि उसे अपनी सफलता मानता है। वह साइंस और गणित जैसे विषयों से घृणा करता है और उसकी दिलचस्पी फिल्मों में है। वह शिक्षक का आदर करने के बजाय राजनीति और आवारा घूमने को तरजीह देता है। दिलावर फ़िग़ार ने व्यंग्यपूर्ण शैली में यह संदेश दिया है कि किस प्रकार यह विद्यार्थी यू और आई को अमेरिका का एक राज्य समझता है और विज्ञान व गणित के सिद्धांतों से ज़्यादा फिल्मों में दिलचस्पी रखता है। यह व्यंग्य शैक्षिक पतन और युवा पीढ़ी की गैर-गंभीरता पर एक गहरी चोट है, जो हमें सोचने पर मजबूर करता है कि अगर विद्यार्थी का यही हाल रहा तो देश का भविष्य क्या होगा? यह नज़्म हंसी-हंसी में समाज सुधार का पाठ देती है और एक आईना दिखाती है जिसमें आज के बहुत से विद्यार्थी अपना चेहरा देख सकते हैं।

 

📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें

🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯


❤️ سبق 15 : پرچھایاں

दिलावर फ़िग़ार की प्रसिद्ध नज़्म ‘आज का स्टूडेंट’ वर्तमान शैक्षिक प्रणाली और विद्यार्थियों की बदलती हुई प्राथमिकताओं पर एक तीखा व्यंग्य है। इस नज़्म में कवि ने व्यंग्यपूर्ण शैली में एक ऐसे विद्यार्थी की तस्वीर पेश की है जो शिक्षा के मूल उद्देश्य से कोसों दूर है। दिलावर फ़िग़ार के अनुसार आज का स्टूडेंट कॉलेज केवल एक मनोरंजन स्थल है जहाँ वह पढ़ने नहीं बल्कि अपनी स्थिति और रोमांटिक फुरसत की नुमाइश करने जाता है। वह बड़े गर्व से कहता है कि परीक्षा में फेल होना उसकी एक पुरानी आदत और परंपरा है, और अगर वह पास हो जाए तो यह उसके लिए बदनामी की बात होगी। नज़्म में दिखाया गया है कि विद्यार्थी को विज्ञान के सूत्रों और गणित की किताब से कोई रुचि नहीं, बल्कि उसे फिल्मी नायकों और गानों के नाम याद हैं। वह राजनीतिक गतिविधियों में तो बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता है और नेता बनने के सपने देखता है, लेकिन किताबों से उसका रिश्ता बिल्कुल नहीं के बराबर है। उसका हर विषय ‘फेल’ है और वह अंग्रेज़ी समाचार पढ़ने से भी कतराता है। कवि ने इस नज़्म के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश दिया है कि अगर विद्यार्थी ने अपनी राह नहीं बदली तो देश का भविष्य अंधकारमय हो सकता है।

 

📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें

🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯


❤️ سبق 16 : یہ ہے میرا ہندوستان

यह अध्याय उर्दू के प्रतिष्ठित व्यंग्य कवि दिलावर फ़िग़ार के व्यक्तित्व और उनकी प्रसिद्ध नज़्म ‘आज का स्टूडेंट’ का विवरण प्रस्तुत करता है। शुरुआत में व्यंग्य और हास्य की परिभाषा बताई गई है, जहाँ हास्य को मनोरंजन की कला और व्यंग्य को समाज की कमियों पर निशाना लगाने से परिभाषित किया गया है। दिलावर फ़िग़ार के जीवन परिचय में उनकी पैदाइश (1928) और उनके काव्य संग्रह जैसे ‘हादिसे’ और ‘सितम ज़रीफ़ियाँ’ का उल्लेख मिलता है। मुख्य नज़्म ‘आज का स्टूडेंट’ में कवि ने समकालीन युग के विद्यार्थी की मानसिकता और शैक्षिक गलत राह पर गहरा व्यंग्य किया है। नज़्म का केंद्रीय पात्र एक ऐसा विद्यार्थी है जो पढ़ाई से ज्यादा फिल्मों, संगीत और फ़ैशन में दिलचस्पी रखता है। उसकी नज़र में यू और आई को अमेरिका का एक राज्य और विज्ञान व गणित के सिद्धांतों से ज़्यादा दिलचस्पी फिल्मों में है। वह परीक्षा में फेल होने पर गर्व महसूस करता है और इसे अपनी परंपरा मानता है। वह शिक्षक का सम्मान करने के बजाय राजनीति और चुनाव को अपना सहारा समझता है और शैक्षिक विषयों में फेल होने के बावजूद स्वयं को भविष्य का नेता मानता है। दिलावर फ़िग़ार का यह व्यंग्य केवल मनोरंजन नहीं है बल्कि शैक्षिक प्रणाली की कमियों और युवा पीढ़ी की गैर-गंभीरता पर एक गहरा प्रहार है, जो हमें सोचने पर मजबूर करता है कि अगर विद्यार्थी का यही हाल रहा तो देश का भविष्य क्या होगा? यह अध्याय न केवल मनोरंजन करता है बल्कि विद्यार्थियों को उनकी जिम्मेदारियों का एहसास भी दिलाता है।

 

📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें

🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯


❤️ سبق 17 : آج کا سٹوڈنٹ

यह नज़्म ‘आज का स्टूडेंट’ दिलावर फ़िग़ार की एक प्रसिद्ध व्यंग्य और हास्य रचना है, जिसमें उन्होंने वर्तमान युग के विद्यार्थियों की बुद्धिहीन जीवनशैली और शिक्षा के प्रति उनकी बेरुखी का चित्रण किया है। नज़्म का केंद्रीय पात्र एक ऐसा विद्यार्थी है जो अपनी पढ़ाई से पूरी तरह बेपरवाह है और उसे अपनी असफलताओं पर कोई शर्मिंदगी महसूस नहीं होती, बल्कि वह परीक्षाओं में फेल होने को अपनी ‘कामयाबी’ और एक परंपरा मानता है। वह अपनी अकादमिक कमजोरी का इकबाल करते हुए कहता है कि उसे किसी भी विषय की समझ नहीं है और उसके लिए ‘यू और आई’ अमेरिका का एक राज्य है। उसकी रुचि साहित्यिक किताबों के बजाय फिल्मों, फ़ैशन और राजनीतिक गतिविधियों पर केंद्रित है। वह स्वयं को भविष्य का नेता समझता है और सोचता है कि उसने लोगों को बेकार बनाना सीख लिया है। कवि ने व्यंग्यपूर्ण शैली में यह दिखाया है कि किस प्रकार आज का विद्यार्थी शिक्षक के सम्मान और माता-पिता की आशाओं से दूर होता जा रहा है। यह नज़्म समाज के शैक्षिक पतन और युवा पीढ़ी की गलत प्राथमिकताओं पर एक गहरी सामाजिक व्यंग्य है, जिसे दिलावर फ़िग़ार ने अपनी विशिष्ट हास्यप्रद और दिलचस्प शैली में व्यक्त किया है।

 

📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें

🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯


❤️ سبق 18 : نغمے آزادی

यह पाठ तमिल नाडु के महान क्रांतिकारी कवि सुब्रह्मण्यम भारती के जीवन परिचय और उनकी साहित्यिक सेवाओं पर प्रकाश डालता है। सुब्रह्मण्यम भारती 11 दिसंबर 1882 को पैदा हुए और बचपन में ही पिता की स्नेह से वंचित हो गए। उनकी शिक्षा और परवरिश में उनके नाना का बड़ा हाथ था। उन्होंने मात्र दस साल की उम्र में ही तमिल भाषा में उच्च स्तरीय कविता करना शुरू कर दिया था। उनकी काव्य प्रतिभा से प्रभावित होकर ईट्टायपुरम के ज़मींदार ने उन्हें ‘भारती’ के सम्मानजनक संबोधन से नवाजा। भारती का विवाह सफल जीवन के साथ शुरू हुआ, लेकिन कम उम्र में ही पिता की मृत्यु के बाद वे बनारस चले गए। भारती एक पत्रकार भी थे और राजनीतिक हालात में गहरी दिलचस्पी रखते थे। उनकी कविता की नींव देशभक्ति, सामाजिक सुधार और विदेशी गुलामी से मुक्ति पर टिकी थी। अध्ययन के अंतर्गत इस पाठ में उनकी तमिल कविता का उर्दू अनुवाद ‘गीत आज़ादी’ शामिल है, जिसका अनुवाद हसरत सहरवर्दी ने किया है। इस कविता में कवि ने देश की आज़ादी पर आनंद व्यक्त किया है और एक ऐसे हिंदुस्तान की कल्पना की है जहाँ जात-पात, छुआछूत और वर्गीय भेद समाप्त हो चुके हों। वह किसानों, मजदूरों और श्रमिकों को देश की असली पूंजी मानते थे और कायरता को लानत समझते थे। भारती का 1921 में निधन हो गया, लेकिन उनकी रचनाएँ आज भी मानवता और आज़ादी का सार्वभौमिक संदेश देती हैं। उनका जीवन उद्देश्य केवल कविता नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन और देश की प्रगति था।

 

📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें

🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯


❤️ سبق 19: قصیدہ : ابراہیم ذوق

यह अध्याय तमिल साहित्य के महान कवि और स्वतंत्रता सेनानी सुब्रह्मण्यम भारती के जीवन और उनकी क्रांतिकारी कविता पर आधारित है। सुब्रह्मण्यम भारती 11 दिसंबर 1882 को तमिल नाडु के ईट्टायपुरम के एक गाँव में पैदा हुए। बचपन में ही पिता का साया सिर से उठ गया, जिसके बाद उनके नाना ने उनकी परवरिश की। वे असाधारण प्रतिभा के स्वामी थे और मात्र दस साल की उम्र में ही तमिल भाषा में उच्च स्तरीय कविता करने लगे थे। उनकी काव्य प्रतिभा से प्रभावित होकर ईट्टायपुरम के ज़मींदार ने उन्हें ‘भारती’ के सम्मानजनक संबोधन से नवाजा, जिसके बाद वे सुब्रह्मण्यम भारती के नाम से प्रसिद्ध हुए। उन्होंने अपनी कविता के माध्यम से हिंदुस्तानियों में देशभक्ति की भावना जगाई। उनके काव्य संग्रह ‘स्वदेश गीत’ और ‘जन्म भूमि’ क्रांतिकारी विचारों के प्रतीक हैं। अध्ययन के अंतर्गत इस अध्याय में उनकी तमिल कविता का उर्दू अनुवाद ‘गीत आज़ादी’ शामिल है, जिसका अनुवाद हसरत सहरवर्दी ने किया है। इस कविता में कवि ने देश की आज़ादी पर खुशी का इज़हार किया है और जात-पात, छुआछूत और गैर-मुल्की गुलामी के खात्मे की घोषणा की है। वह एक ऐसे हिंदुस्तान का सपना देखते हैं जहाँ किसानों, कारीगरों और मेहनतकशों का सम्मान हो और सभी को समान अधिकार मिलें। सुब्रह्मण्यम भारती का 1921 में निधन हो गया, लेकिन उनका काम आज भी देशभक्ति के जज़्बे से सराबोर है। यह अध्याय छात्रों को भारती के व्यक्तित्व और उनके उदार विचारों से रू-ब-रू कराता है।

 

📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें

🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯


❤️ سبق 20: بیان شہادت حر

यह अध्याय तमिल नाडु के महान क्रांतिकारी कवि सुब्रह्मण्यम भारती के जीवन और साहित्यिक सेवाओं का विवरण प्रस्तुत करता है। सुब्रह्मण्यम भारती 11 दिसंबर 1882 को ईट्टायपुरम में पैदा हुए। उन्होंने कम उम्र में ही तमिल भाषा और साहित्य में महारत हासिल कर ली थी और मात्र दस साल की उम्र में ही कविता लिखना शुरू कर दिया था। उनकी अद्भुत प्रतिभा के लिए उन्हें ‘भारती’ के सम्मानजनक संबोधन से नवाजा गया। उनका जीवन का एक बड़ा हिस्सा बनारस में बीता, जहाँ उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी की और देश के राजनीतिक हालात का गहरा अवलोकन किया। भारती की कविता का मूल आधार देशभक्ति और सामाजिक सुधार था। उनके काव्य संग्रह ‘स्वदेश गीत’ और ‘जन्म भूमि’ क्रांतिकारी विचारों के वाहक हैं। इस अध्याय में उनकी प्रसिद्ध कविता ‘गीत आज़ादी’ प्रस्तुत की गई है, जिसका उर्दू अनुवाद हसरत सहरवर्दी ने किया है। इस कविता में कवि ने हिंदुस्तान की आज़ादी पर आनंद व्यक्त करते हुए जात-पात की विभाजन, छुआछूत और विदेशी शासन के अंत का जश्न मनाया है। वह एक ऐसे समाज की नींव रखना चाहते थे जहाँ किसान, कारीगर और मेहनतकश वर्ग सम्मानित हों और हर नागरिक को समान अधिकार मिलें। सुब्रह्मण्यम भारती ने अपनी रचनाओं के माध्यम से हिंदुस्तानियों में आज़ादी की ललक पैदा की और 1921 में अपनी मृत्यु तक देश और कौम की सेवा जारी रखी। यह अध्याय न केवल उनके जीवन परिचय को प्रस्तुत करता है बल्कि उस समय के सामाजिक और राजनीतिक चेतना को भी स्पष्ट करता है जो आज भी उर्दू और तमिल साहित्य में एक विशिष्ट स्थान रखता है।

 

📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें

🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯


❤️ سبق 21 : رخصت حضرت عبّاس

यह अध्याय उर्दू के प्रसिद्ध शायर फ़ाएज़ दहलवी के जीवन और उनकी ग़ज़ल गायकी पर आधारित है। फ़ाएज़ दहलवी, जिनका असली नाम सदरुद्दीन मुहम्मद ख़ाँ था, उत्तर भारत में उर्दू शायरी के शिखर पुरुषों में गिने जाते हैं। वे वली दकनी के समकालीन थे और जिस प्रकार वली ने दक्षिण में उर्दू ग़ज़ल को फैलाया, फ़ाएज़ ने उत्तर में इसकी शमा जलाई। वे एक ज्ञानी व्यक्ति थे जिन्हें धर्मशास्त्र, दर्शन और गणित जैसे विषयों में महारत हासिल थी। उनकी शायरी की विशेषता सरलता और प्रेमपूर्ण भावनाओं का स्पष्ट प्रकटीकरण है। उस दौर में ऐहाम (अन्योक्ति) ग़ज़ल का प्रचलन था लेकिन फ़ाएज़ ने इससे परहेज़ किया। अध्ययन के अंतर्गत इस अध्याय में उनकी दो ग़ज़लें शामिल हैं जो उस युग की विशेष शैली को प्रतिबिंबित करती हैं। पहली ग़ज़ल में गुज़रे हुए दिनों की यादें हैं, विशेष रूप से बाग़ की सैर और होली के त्योहार का ज़िक्र है, जहाँ प्रियतम के सौंदर्य की तस्वीर खींची गई है। दूसरी ग़ज़ल में हिज्र (विरह) और फ़िराक़ (वियोग) की मनोदशा का वर्णन है, जहाँ शायर अपने प्रियतम की आगमन की प्रतीक्षा करता है और उसके बिना जीवन को निर्जीव मानता है। यह अध्याय छात्रों को फ़ाएज़ के विशिष्ट शैली और उर्दू ग़ज़ल के प्रारंभिक विकास से परिचित कराता है।

 

📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें

🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯


❤️ سبق 22: غزل – فایز دہلوی

यह दर्सी बाब उर्दू की सर्वमान्य विधा ‘ग़ज़ल’ और उत्तर भारत के प्राचीन व प्रतिष्ठित शायर ‘फ़ाएज़ दहलवी’ के जीवन और उनके कलाम पर आधारित है। शुरुआत में ग़ज़ल की परिभाषा और उसके इतिहास से हुआ है, जिसमें बताया गया है कि ग़ज़ल की जड़ें अरबी शायरी में हैं जो फारसी से होती हुई उर्दू तक पहुँची। ग़ज़ल के फन्नी अज्जा जैसे मतला, हुस्न-ए-मतला, काफ़िया, रदीफ़ और मक़ता की विस्तृत जानकारी भी इसमें शामिल है। ग़ज़ल में विषयों की कोई पाबंदी नहीं होती और इसमें प्रेम व सौंदर्य के साथ-साथ सूफ़ीवाद, नीति और दर्शन भी व्यक्त किए जाते हैं। इसके बाद फ़ाएज़ दहलवी (सदरुद्दीन मुहम्मद ख़ाँ) का परिचय पेश किया गया है, जो वली दकनी के समकालीन थे और जिन्होंने दिल्ली में उर्दू शायरी को एक नई राह दी। वे एक ज्ञानप्रेमी व्यक्ति थे जिन्हें धर्मशास्त्र, दर्शन, चिकित्सा और गणित जैसे विषयों में दक्षता प्राप्त थी। उनका दीवान 1714 में संकलित हुआ, जिसमें उनकी 33 ग़ज़लें वली के रंग में नज़र आती हैं। बाब में उनकी दो ग़ज़लें शामिल हैं जो सरलता, रवानी और प्रेमपूर्ण भावनाओं से लबरेज़ हैं। पहली ग़ज़ल में पुरानी यादों, सैर-ओ-शिकार और होली के रंगों का स्मरण है, जबकि दूसरी ग़ज़ल में प्रियतम की विदाई का कष्ट और मिलन की तमन्ना व्यक्त की गई है। यह दर्सी न केवल फ़ाएज़ की शायरी बल्कि उस युग की उर्दू भाषा की प्रारंभिक शक्ल को समझने में भी सहायक सिद्ध होता है। कुल मिलाकर यह मौज़ू उर्दू अदब के तालिब इल्मों के लिए क्लासिकी शायरी का बेहतरीन नमूना पेश करता है जिसमें प्राचीन शैली और भावनाओं की सरलता नुमायाँ है।

 

📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें

🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯👯


❤️ سبق 23: غزل – خواجہ میر درد

यह अध्याय उर्दू के महान शायर, समाज सुधारक और विचारक अल्लामा इक़बाल के व्यक्तित्व और उनकी साहित्यिक उपलब्धियों पर प्रकाश डालता है। अल्लामा इक़बाल 9 नवंबर 1877 को सियालकोट में पैदा हुए। उनके पूर्वज कश्मीरी पंडित थे जिन्होंने इस्लाम स्वीकार कर लिया था। इक़बाल ने लाहौर से एम.ए. किया और फिर इंग्लैंड से बैरिस्टरी और जर्मनी से दर्शनशास्त्र में पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। उनकी शायरी का मूल उद्देश्य कौम को जगाना और उनमें आत्मविश्वास पैदा करना था। अध्ययन के अंतर्गत इस अध्याय में अल्लामा इक़बाल के जीवन परिचय के साथ उनकी दो प्रसिद्ध ग़ज़लें प्रस्तुत की गई हैं। उनकी शायरी में विचार और दर्शन की गहराई मिलती है और वे शायरी को केवल मनोरंजन के बजाय संदेश देने का साधन मानते थे। उनकी पहली ग़ज़ल में सजदों की मुक्ति और असली सत्य की तलाश का ज़िक्र है, जबकि दूसरी ग़ज़ल ‘सितारों से आगे जहाँ और भी हैं’ में निरंतर संघर्ष और उन्नति का पाठ मिलता है। इक़बाल ने युवाओं को ‘शाहीन’ का उदाहरण देकर यह समझाया कि उन्हें अपनी उड़ान को ऊँचा रखना चाहिए और संतोष के बजाय नई मंज़िलों की तलाश करनी चाहिए। उनके काव्य संग्रह ‘बाँग-ए-दरा’, ‘बाल-ए-जिबरील’ और ‘ज़र्ब-ए-कलीम’ उर्दू साहित्य की अमूल्य धरोहर हैं। इक़बाल 1938 में दुनिया से चले गए लेकिन उनका कलाम आज भी पूरी दुनिया में प्रकाशमान है।

 

📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें

🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯


❤️ سبق 24: غزل – علامہ اقبال

अल्लामा मुहम्मद इक़बाल उर्दू और फारसी के एक महान शायर, प्रतिष्ठित दार्शनिक और इस्लामी विचारक हैं। वे 9 नवंबर 1877 को सियालकोट में पैदा हुए। उनके पूर्वज कश्मीरी पंडित थे जिन्होंने इस्लाम स्वीकार कर लिया था। इक़बाल ने लाहौर से एम.ए. किया और फिर इंग्लैंड से बैरिस्टरी और जर्मनी से दर्शनशास्त्र में पीएच.डी. की डिग्री हासिल की। उनकी शायरी का मूल उद्देश्य कौम को जागृत करना और उनमें आत्मविश्वास जगाना था। अध्ययन के अंतर्गत पुस्तक ‘दरख़्शां’ के इस अध्याय में अल्लामा इक़बाल के जीवन परिचय के साथ उनकी दो प्रसिद्ध ग़ज़लें प्रस्तुत की गई हैं। उनकी शायरी में विचार और दर्शन की गहराई मिलती है और वे शायरी को केवल मनोरंजन के बजाय संदेश प्रसारण का माध्यम समझते थे। उनकी पहली ग़ज़ल में सजदों की मुक्ति और असली सत्य की खोज का उल्लेख है, जबकि दूसरी ग़ज़ल ‘सितारों से आगे जहाँ और भी हैं’ में निरंतर संघर्ष और प्रगति का सबक मिलता है। इक़बाल ने युवाओं को ‘शाहीन’ का उदाहरण देकर यह समझाया कि उन्हें अपनी उड़ान को ऊँचा रखना चाहिए और तुच्छ इच्छाओं के बजाय नई मंज़िलों की तलाश करनी चाहिए। उनके काव्य संग्रह ‘बाँग-ए-दरा’, ‘बाल-ए-जिबरील’ और ‘ज़र्ब-ए-कलीम’ उर्दू साहित्य की अनमोल धरोहर हैं। इक़बाल 1938 में दुनिया से रुखसत हो गए, लेकिन उनका कलाम आज भी पूरी दुनिया में प्रकाशमान है।

 

📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें

🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯


❤️ سبق 25: غزل – جمیل مظہری

यह अध्याय उर्दू के प्रतिष्ठित विद्वान और शायर जमील मज़हरी के जीवन और उनकी व्यक्तिगत ग़ज़ल गायकी के बारे में संपूर्ण जानकारी प्रस्तुत करता है। जमील मज़हरी का असली नाम मीर क़ाजिम अली था और वे सितंबर 1904 में पटना के मोहल्ला मगलपुर में पैदा हुए। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पटना से प्राप्त की और बाद में कलकत्ता विश्वविद्यालय से एम.ए. किया। वे 1942 की भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल रहे और इस सज़ा में उन्हें जेल भी जाना पड़ा। उनकी अग्रणी ज़िंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा पटना विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग में अध्यापन से जुड़ा रहा। जमील मज़हरी की शायरी पारंपरिक प्रेम विषयों से हटकर विचार और दार्शनिकता की गहराई लिए हुए है, जो उन्हें अल्लामा इक़बाल की शैली के निकट लाती है। उनकी ग़ज़लों में ब्रह्मांडीय सच्चाइयों, मानवीय मनोविज्ञान और जीवन के जटिल मुद्दों की अभिव्यक्ति मिलती है। उनके प्रसिद्ध काव्य संग्रहों में ‘फ़िक्र-ए-जमील’, ‘अक्स-ए-जमील’, ‘नक़्श-ए-जमील’ और ‘आसार-ए-जमील’ सूचीबद्ध हैं। उन्हें उर्दू साहित्य की उत्कृष्ट सेवाओं के लिए 1974 में सम्मानित ‘ग़ालिब अवार्ड’ से नवाजा गया। उनकी शायरी में आश्चर्य, बेचैनी और असहायता का एक अनोखा मिश्रण नज़र आता है। उनका निधन 23 जुलाई 1980 को हुआ। यह रचना उनकी विद्वत्तापूर्ण व्यक्तित्व और काव्य क्षमताओं का भरपूर स्वीकार है।

 

📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें

🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯


❤️ سبق 26: غزل – بسمل عظیم آبادی

यह पाठ प्रसिद्ध शायर, आलोचक और शिक्षाविद तलहा रज़वी बर्क़ के जीवन और उनकी साहित्यिक सेवाओं पर आधारित है। तलहा रज़वी बर्क का असली नाम सैयद शाह नासिर रज़वी है और वे 1938 में पलवल शरीफ में पैदा हुए। उन्हें शायरी विरासत में मिली क्योंकि उनके माता-पिता भी प्रतिभाशाली शायर थे। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से उर्दू में एम.ए. किया और वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय में उर्दू विभाग के अध्यक्ष के रूप में सेवाएँ दीं। उनकी शायरी का मूल विषय नैतिकता, सूफ़ीवाद और धर्म है, और वे विशेष रूप से नात (पैगंबर की प्रशंसा) गायकी के लिए प्रसिद्ध हैं। उनके काव्य संग्रह ‘शायगाँ’ और ‘सहाब-ए-सुख़न’ नुमायाँ हैं, जबकि ‘ग़ौर-ओ-फ़िक्र’ और ‘अर्ज़-ए-अदब’ जैसी आलोचनात्मक पुस्तकें महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं। इस पाठ में उनकी चार रुबाइयाँ भी शामिल हैं जिनमें नैतिक शिक्षाएँ दी गई हैं। पहली रुबाई में ईर्ष्या और द्वेष से बचने, दूसरी में दुनिया की अस्थिरता, तीसरी में आलोचना के तरीकों और चौथी में माता-पिता की सेवा के महत्व पर ज़ोर दिया गया है। बर्क़ का अंदाज़ सरल, सहज और अत्यधिक प्रभावशाली है, जो पाठक के दिल पर गहरा असर छोड़ता है।

 

📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें

🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯


❤️ سبق 27: گیت – فبیکل اتساہی

तलहा रज़वी बर्क़, जिनका असली नाम सैयद शाह नासिर रज़वी है, उर्दू साहित्य की एक अत्यंत महत्वपूर्ण शख्सियत हैं। वे 1938 में पलवल शरीफ में पैदा हुए। उन्हें शायरी विरासत में मिली क्योंकि उनके पिता सैयद शाह मुहम्मद क़ाएम रज़वी और माता महमूदा ख़ातून दोनों ही शायर थे। बर्क़ साहब ने पटना विश्वविद्यालय से उर्दू में एम.ए. किया और वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय में उर्दू विभाग के अध्यक्ष के रूप में लंबे समय तक सेवाएँ दीं। उनकी शायरी का मूल विषय नैतिकता, सूफ़ीवाद और धार्मिक विचार हैं, जिनकी झलक उनकी नात गायकी में स्पष्ट दिखाई देती है। उनके प्रसिद्ध काव्य संग्रहों में ‘शायगाँ’ और ‘सहाब-ए-सुख़न’ शामिल हैं, जबकि ‘ग़ौर-ओ-फ़िक्र’ और ‘नक़्द-ओ-नक़्श’ उनकी आलोचनात्मक रचनाओं में गिने जाते हैं। अध्ययन के अंतर्गत इस पाठ में उनके जीवन और सेवाओं के साथ-साथ उनकी चार रुबाइयाँ भी शामिल हैं। पहली रुबाई में ईर्ष्या और द्वेष जैसी नैतिक कमियों को प्रगति के मार्ग में बाधा बताया गया है। दूसरी रुबाई दुनिया की अस्थिरता और यहाँ से कुछ पाने की वास्तविकता व्यक्त करती है। तीसरी रुबाई में किसी भी चीज़ की आलोचना करने से पहले उसके सभी पहलुओं का जायज़ा लेने की ज़रूरत पर बल दिया गया है। चौथी रुबाई माता-पिता की सेवा के महत्व पर ज़ोर देती है और कुरआन व हदीस के प्रकाश में उन्हें ‘अफ’ तक न कहने की सलाह देती है। बर्क़ का शैली सरल, सहज और अत्यधिक प्रभावशाली है, जो पाठक के दिल पर गहरा असर डालता है।

 

📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें

🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯


❤️ سبق 28: رباعی – تلوک چند محروم

यह पुस्तक ‘दरख़्शां’ (नवीं कक्षा के लिए उर्दू पाठ्यक्रम) का एक व्यापक अध्याय है जिसमें काव्य विधा ‘क़त’आ’ और प्रतिष्ठित शायर ‘अख़्तर अंसारी’ की साहित्यिक सेवाओं का विस्तृत उल्लेख किया गया है। क़त’आ चार मिसरों की ऐसी नज़्म है जिसमें किसी एक विचार को एकता प्रभाव के साथ व्यक्त किया जाता है। अख़्तर अंसारी, जिनका असली नाम मुहम्मद अख़्तर था, 1909 में बदायूँ में पैदा हुए और उन्होंने अपनी कलात्मक योग्यता से क़त’आ नगारी को एक नई दिशा प्रदान की। उनकी शायरी में प्रकृति की सुंदर अभिव्यक्ति और मानवीय मनोविज्ञान के गहरे अवलोकन पाए जाते हैं। उनके संग्रह ‘नग़्म-ए-रूह’, ‘आबगीने’ और ‘टेढ़ी ज़मीन’ उर्दू साहित्य की बहुमूल्य धरोहर हैं। इस पुस्तक में शामिल उनके क़त’आत जीवन के दर्शन, दुख पर नियंत्रण, और सतर्कतापूर्ण दृष्टिकोण पर आधारित हैं। वह जीवन के दुखों को वास्तविकता और खुशी को केवल एक सपना मानते हैं। उनके क़त’आत पाठक को यह संदेश देते हैं कि जीवन का हर कदम सोच-समझकर रखना चाहिए और दूसरों की भावनाओं का सम्मान करना आवश्यक है। अख़्तर अंसारी की शायरी केवल शब्दों का संग्रह नहीं है बल्कि उनके अपने दिल के घावों और सच्ची अनुभूतियों की प्रतिनिधि है। यह अध्याय छात्रों को उर्दू की एक महत्वपूर्ण विधा से परिचित कराने के साथ-साथ जीवन के गहरे सत्यों पर विचार करने की दावत देता है।

 

📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें

🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯


❤️ سبق 29: رباعی – طلحہ رضوی برق

तलहा रज़वी बर्क़ (असली नाम: सैयद शाह नासिर रज़वी) उर्दू साहित्य के एक प्रतिष्ठित शायर, विद्वान और आलोचक हैं। आप 1938 में पलवल शरीफ में पैदा हुए और आपका संबंध एक धार्मिक और सूफ़ी परिवार से था। आपके पिता क़तिल दाना पूरी और माता महमूदा ख़ातून भी शायर थे। बर्क़ साहब ने पटना विश्वविद्यालय से उर्दू में एम.ए. किया और वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय में उर्दू विभाग के अध्यक्ष के पद से सेवाएँ दीं। उनकी शायरी का मूल विषय नैतिकता, सूफ़ीवाद और धर्म है, जिसकी झलक उनकी नात गायकी में स्पष्ट दिखाई देती है। उनके प्रसिद्ध काव्य संग्रहों में ‘शायगाँ’ और ‘सहाब-ए-सुख़न’ शामिल हैं, जबकि ‘ग़ौर-ओ-फ़िक्र’ और ‘नक़्द-ओ-नक़्श’ उनकी आलोचनात्मक रचनाओं में गिने जाते हैं। अध्ययन के अंतर्गत इस पाठ में उनके जीवन और सेवाओं के साथ-साथ उनकी चार रुबाइयाँ भी शामिल हैं। पहली रुबाई में ईर्ष्या और द्वेष जैसी नैतिक कमियों को प्रगति के मार्ग में रुकावट बताया गया है। दूसरी रुबाई दुनिया की अस्थिरता और यहाँ से कुछ लेने की वास्तविकता व्यक्त करती है। तीसरी रुबाई में शायर ने यह सबक दिया है कि किसी भी चीज़ की आलोचना करने से पहले उसके सभी पहलुओं का मूल्यांकन करना ज़रूरी है। चौथी रुबाई माता-पिता की सेवा के महत्व पर ज़ोर देती है और कुरआन व हदीस के प्रकाश में उन्हें ‘अफ’ तक न कहने की सलाह देती है। आपका शैली सरल, सहज और अत्यधिक प्रभावशाली है जो पाठक के दिल पर गहरा असर छोड़ता है।

 

📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें

🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯


❤️ سبق 30: رباعی – جاگت موہال لال رواں

दरख़्शां उर्दू दर्सी किताब के इस अध्याय में विधा ‘क़त’आ’ और प्रसिद्ध शायर ‘अख़्तर अंसारी’ के जीवन और कला पर प्रकाश डाला गया है। क़त’आ, रुबाई की तरह चार मिसरों पर मुश्तमिल होता है, ताएम इसमें दूसरे और चौथे मिसरे का हम काफ़िया होना ज़रूरी है। अख़्तर अंसारी, जिनका असली नाम मुहम्मद अख़्तर था, एक अक्टूबर 1909 को बदायूँ में पैदा हुए। उन्होंने शायरी की विभिन्न विधाओं में अपनी प्रतिभा आज़माई, लेकिन उनकी मूल पहचान एक क़त’आ नगार के रूप में बनी। उनके संग्रहों में ‘नग़्म-ए-रूह’, ‘आबगीने’ और ‘टेढ़ी ज़मीन’ शामिल हैं। अख़्तर अंसारी के क़त’आत में प्रकृति चित्रण और भावनाओं की अभिव्यक्ति के नमूने हैं। वह दुख और निराशा की भावनाओं को बड़ी कोमलता से व्यक्त करते हैं। इस पाठ में उनके पाँच चुनिंदा क़त’आत भी शामिल हैं जो आँसुओं के नियंत्रण, जीवन में सतर्कता, दुख की वास्तविकता, और इच्छा के महत्व जैसे विषयों पर आधारित हैं। कुल मिलाकर यह अध्याय छात्रों को उर्दू शायरी की एक महत्वपूर्ण विधा और एक माहिर क़त’आ नगार की शैली से परिचित कराता है।

 

📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें

🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯


❤️ سبق 31: قطع – اختر انصاری

यह अध्याय सर सैयद अहमद ख़ाँ के उस प्रसिद्ध भाषण पर आधारित है जो उन्होंने 27 जनवरी 1883 को पटना में दिया था। इसका शीर्षक ‘हिंदू और मुसलमान एक कौम हैं’ है। इस रचना में सर सैयद ने अत्यंत तर्कसंगत अंदाज़ में यह सिद्ध करने की कोशिश की है कि हिंदुस्तान की धरती पर रहने वाले हिंदू और मुसलमान धार्मिक मतभेदों के बावजूद एक कौम की हैसियत रखते हैं। सर सैयद के अनुसार धर्म एक आंतरिक विश्वास है, लेकिन बाहरी मामलों और सामाजिक व्यवहार में हम सब एक हैं। उन्होंने हिंदुस्तान को एक सुंदर दिल के रूप में बयान किया है जिसकी दो आँखें हिंदू और मुसलमान हैं। अगर उनके बीच मतभेद पैदा हुआ तो यह दिल ‘भेंगा’ या ‘काना’ हो जाएगा, यानी देश का सौंदर्य और गरिमा प्रभावित होगी। सर सैयद ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि जिस प्रकार हिंदू बाहर से आए, हम भी उसी प्रकार यहाँ बस गए और अब यही हमारा वतन है। हम एक ही वातावरण में साँस लेते हैं और एक ही धरती का अनाज खाते हैं। सदियों के मेल-जोल से हमारी रस्में और भाषाएँ (जैसे उर्दू) एक हो चुकी हैं। उन्होंने सलाह दी कि आपसी द्वेष और पाखंड देश के लिए विनाशकारी हैं, जबकि एकता और प्रेम ही प्रगति की गारंटी है। यह अध्याय सर सैयद के व्यापक दृष्टिकोण और हिंदू-मुस्लिम एकता के महत्व को उजागर करता है।

 

📗 बुक डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें

🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯


⚠️ अगर उपर दी गयी कोई भी बुक डाउनलोड करने में किसी प्रकार की समस्या हो रही हो तो कमेंट करके हमें बताएं | line

🌐 सभी विषयों की बुक्स डाउनलोड करने के लिए -> यहाँ क्लिक करें

🌐 बिहार बोर्ड सलूशन डाउनलोड करने के लिए -> यहाँ क्लिक करें

Thanks! 🙏🏽

⚠️ इस पेज पर दी गयी बुक्स “Bihar Education Project” द्वारा पब्लिश की गई हैं | ऑफिसियल साईट से इन बुक्स को डाउनलोड करने के लिए – यहाँ क्लिक करें

Share this:

  • Click to share on X (Opens in new window) X
  • Click to share on Facebook (Opens in new window) Facebook
  • More
  • Click to share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp
  • Click to share on Telegram (Opens in new window) Telegram
  • Click to print (Opens in new window) Print
  • Click to email a link to a friend (Opens in new window) Email

Related

Filed Under: Class 9th Books

Reader Interactions

Comments

  1. Iqubal says

    June 1, 2023 at 2:16 am

    9th Urdu ki book download nhi ho raha hai

    Reply
  2. Fareeda says

    August 26, 2023 at 2:52 am

    Bihar Urdu book download nhi ho rhi h

    Reply
    • bseb says

      September 9, 2023 at 10:44 am

      hey @Fareeda, check out the screenshot given below to understand the download procedure.

      Step 1

      step 1

      Step 2

      step 2

      thanks!

      Reply

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Primary Sidebar

Search

लेटेस्ट अपडेट पायें

Telegram Telegram Channel Join Now
Facebook FaceBook Page Follow Us
YouTube Youtube Channel Subscribe
WhatsApp WhatsApp Channel Join Now

Bihar Board Textbooks

  • 📗 Bihar Board NCERT Books
  • 📙 Bihar Board Books Class 12
  • 📙 Bihar Board Books Class 11
  • 📙 Bihar Board Books Class 10
  • 📙 Bihar Board Books Class 9
  • 📙 Bihar Board Books Class 8
  • 📙 Bihar Board Books Class 7
  • 📙 Bihar Board Books Class 6
  • 📙 Bihar Board Books Class 5
  • 📙 Bihar Board Books Class 4
  • 📙 Bihar Board Books Class 3
  • 📙 Bihar Board Books Class 2
  • 📙 Bihar Board Books Class 1

Bihar Board Solutions PDF

  • ✅ Bihar Board Solutions Class 12
  • ✅ Bihar Board Solutions Class 11
  • ✅ Bihar Board Solutions Class 10
  • ✅ Bihar Board Solutions Class 9
  • ✅ Bihar Board Solutions Class 8
  • ✅ Bihar Board Solutions Class 7
  • ✅ Bihar Board Solutions Class 6

Latest Updates

  • Bihar Board Class 12 Model Paper 2026 PDF with Answers
  • Bihar Board Class 10 Model Paper 2026 PDF with Answers
  • Bihar Board 12th Model Papers 2025 PDF
  • Bihar Board 10th Model Papers 2025 PDF
  • Bihar Board 11th Previous Year Question Papers PDF

Categories

  • Class 10th Books
  • Class 10th Objective
  • Class 10th Solutions
  • Class 11th Books
  • Class 12th Books
  • Class 1st Books
  • Class 2nd Books
  • Class 3rd Books
  • Class 4th Books
  • Class 5th Books
  • Class 6th Books
  • Class 7th Books
  • Class 8th Books
  • Class 9th Books
  • D.El.Ed
  • Question Papers
  • Uncategorized

Bihar Board Online Test (Quiz)

  • ✅ Bihar Board Online Quiz

Copyright © 2026 · BiharBoardBooks.Com . This is not a Government Site.