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	<title>Class 6th Books Archives - Bihar Board Books</title>
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	<title>Class 6th Books Archives - Bihar Board Books</title>
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		<title>Bihar Board Class 6th Hindi Book 2026 PDF Download (किसलय)</title>
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		<dc:creator><![CDATA[bseb]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 Jul 2022 08:41:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Class 6th Books]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>Bihar Board 6th Hindi Book 2026 PDF Download Bihar Board Class 6th Hindi Book 2026 PDF Download &#8211; इस पेज पर बिहार बोर्ड 6th के छात्रों के लिए &#8220;Hindi (किसलय)&#8221; Book दिया गया है &#124; जिसे आप अपने फ़ोन में Free Download कर सकते हैं &#124; 🌐 सभी विषयों की बुक्स डाउनलोड करने के लिए [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<h2 style="text-align: center;"><span style="text-decoration: underline; color: #ff0000;"><strong>Bihar Board 6th Hindi Book 2026 PDF Download</strong></span></h2>
<p><img data-recalc-dims="1" decoding="async" class="aligncenter" src="https://i0.wp.com/biharboardbooks.com/wp-content/uploads/2022/07/bihar_board_books-min.png?ssl=1" /> <span style="text-decoration: underline;">Bihar Board Class 6th Hindi Book 2026 PDF Download</span> &#8211; इस पेज पर बिहार बोर्ड 6th के छात्रों के लिए &#8220;<span style="text-decoration: underline;"><strong>Hindi (किसलय)</strong></span>&#8221; Book दिया गया है | जिसे आप अपने फ़ोन में Free Download कर सकते हैं |</p>
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<h2 style="text-align: center;"><span style="text-decoration: underline; color: #3366ff;"><strong>BSEB Class 6 Hindi (किसलय) Textbook PDF Free Download</strong></span></h2>
<p><span style="font-size: 18pt;"><strong>☞</strong></span> बुक्स डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए डाउनलोड लिंक पर क्लिक करें | <img decoding="async" class="aligncenter" src="https://i0.wp.com/biharboard-ac.in/wp-content/uploads/2022/07/kindpng_6137677-min.png?resize=601%2C111&amp;ssl=1" alt="line" /></p>
<h3>❤️ 1. अरमान</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1PCHG5cIr5YmjJNoaL4mZEeR5OaF2Gq6s" /></p>
<p>&#8216;अरमान&#8217; रामनरेश त्रिपाठी द्वारा रचित एक प्रेरणादायक कविता है। यह कविता बच्चों के मन में देशभक्ति, समाज सेवा और अदम्य साहस की भावना जगाती है। कवि कहते हैं कि हमें इस नश्वर दुनिया में नेक काम करके अपना नाम अमर करना चाहिए।</p>
<p>कविता उन लोगों की सहायता करने पर जोर देती है जो गरीब, बेसहारा और निराश हैं। कवि का मानना है कि जो लोग हार मानकर बैठ गए हैं, उनके भीतर फिर से उत्साह और उमंग का संचार करना हमारा कर्तव्य है। हम उन वीर पूर्वजों की संतान हैं जो अपनी धुन के पक्के और सच्चे थे, इसलिए हमें उनके मान-सम्मान को बढ़ाना चाहिए।</p>
<p>बच्चों को मातृभूमि के सच्चे सिपाही बताते हुए कवि कहते हैं कि उन्हें आगे बढ़ने से नहीं रोकना चाहिए, क्योंकि वे देश की सेवा में अपना सर्वस्व न्योछावर करने को तैयार हैं। यह कविता स्वाभिमान, परोपकार और राष्ट्र के प्रति समर्पण की सीख देती है। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को जागरूक करना और उन्हें समाज के उत्थान के लिए प्रेरित करना है।</p>
<p>&#8216;अरमान&#8217; शीर्षक कविता मानवता और वीरता का एक सुंदर मिश्रण प्रस्तुत करती है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ 2. असली चित्र</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1yOvGZXZoi-6r6GiwDUgyOSuaValykc2m" /></p>
<p>यह कहानी राजा कृष्णदेव राय के राज्य के एक अत्यधिक कंजूस सेठ और एक चतुर चित्रकार की है। सेठ ने एक चित्रकार से अपना चित्र बनवाया, लेकिन पैसे देने के डर से वह हर बार अपना चेहरा बदल लेता और कहता कि चित्र उससे नहीं मिलता।</p>
<p>कई बार असफल होने के बाद, चित्रकार तेनालीराम के पास गया। तेनालीराम की सलाह पर, चित्रकार अगले दिन सेठ के पास एक आईना लेकर पहुँचा और कहा कि यह उसका सबसे सटीक चित्र है।</p>
<p>जब सेठ ने विरोध किया, तो चित्रकार ने तर्क दिया कि आईने के अलावा उसकी असली और बदलती सूरत कोई और नहीं दिखा सकता। अपनी हार स्वीकार करते हुए और तेनालीराम की बुद्धिमानी को पहचानते हुए, सेठ ने चित्रकार को एक हजार स्वर्ण मुद्राएँ पुरस्कार स्वरूप दीं।</p>
<p>यह कहानी तेनालीराम की चतुराई और &#8216;जैसे को तैसा&#8217; की नीति को दर्शाती है। अंत में, राजा कृष्णदेव राय भी इस घटना को सुनकर बहुत प्रसन्न हुए।</p>
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<h3>❤️ 3. चिड़िया</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1xOp9sQnJF1uPmQUpSuUOA7rC7ErZDn-b" /></p>
<p>&#8216;चिड़िया&#8217; शीर्षक की यह कविता प्रसिद्ध कवि आरसी प्रसाद सिंह द्वारा रचित है। इस कविता के माध्यम से कवि ने पक्षियों के जीवन की सरलता, एकता और निस्वार्थ भावना का सुंदर चित्रण किया है। चिड़िया पीपल की ऊँची डाली पर बैठकर मानव को प्रेम और भाईचारे की सीख देती है।</p>
<p>कवि बताते हैं कि विभिन्न प्रकार के पक्षी जैसे कोयल, तोता, कौआ और हंस आपस में मिल-जुलकर रहते हैं और साथ में भोजन करते हैं। उनके मन में लोभ, पाप या किसी का माल हड़पने की इच्छा नहीं होती। वे केवल उतना ही ग्रहण करते हैं जितना उनके श्रम से प्राप्त होता है और शेष दूसरों के हित के लिए छोड़ देते हैं।</p>
<p>वे खुले आसमान में निर्भय होकर विचरण करते हैं। चिड़िया मानव से प्रश्न करती है कि जब वे इतने स्वतंत्र हैं, तो मनुष्य ने खुद को बंधनों और स्वार्थ की बेड़ियों में क्यों जकड़ रखा है। यह कविता हमें प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर जीने और संतोष का मार्ग अपनाने की प्रेरणा देती है।</p>
<p>पक्षियों का यह आचरण मानव समाज के लिए एक आदर्श संदेश है जो हमें ईर्ष्या और द्वेष से मुक्त होकर जीना सिखाता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ 4. हॉकी का जादूगर</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1ULG9z7hBsYO3Cw0XqsmEkAVjg6KKL4ss" /></p>
<p>यह अध्याय भारतीय हॉकी के महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद के जीवन और खेल के प्रति उनके समर्पण पर आधारित है। इसमें उनके जीवन की एक प्रेरक घटना का वर्णन है, जब 1933 के एक मैच के दौरान प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी ने गुस्से में उनके सिर पर हॉकी स्टिक मार दी थी। चोटिल होने के बावजूद ध्यानचंद ने मैदान पर वापसी की और उस खिलाड़ी से बदला लेने के बजाय एक के बाद एक छह गोल करके अपनी टीम को जीत दिलाई।</p>
<p>खेल के बाद उन्होंने उस खिलाड़ी को समझाया कि खेल में गुस्सा अच्छा नहीं होता। ध्यानचंद ने अपनी सफलता के मूल मंत्र लगन, साधना और खेल भावना को बताया है। उनका जन्म 1904 में प्रयाग में हुआ था और 16 वर्ष की आयु में वे सेना में भर्ती हुए।</p>
<p>1936 के बर्लिन ओलंपिक में उनकी कप्तानी में भारत ने स्वर्ण पदक जीता। उनके खेलने के अनोखे ढंग और निपुणता के कारण ही उन्हें &#8216;हॉकी का जादूगर&#8217; कहा जाने लगा। वे हमेशा व्यक्तिगत श्रेय के बजाय टीम की जीत और देश के सम्मान को सर्वोपरि रखते थे।</p>
<p>यह पाठ हमें सिखाता है कि सच्ची खेल भावना और अनुशासन ही किसी भी खिलाड़ी को महान बनाते हैं।</p>
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<h3>❤️ 5. हार की जीत</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1_tRV7qLDoFPyNOwt_7dplbAGwVL5lFVT" /></p>
<p>यह कहानी &#8216;हार की जीत&#8217; बाबा भारती और उनके प्रिय घोड़े &#8216;सुलतान&#8217; के इर्द-गिर्द घूमती है। बाबा भारती अपने घोड़े से अपार प्रेम करते थे, जिसकी चर्चा सुनकर इलाके का कुख्यात डाकू खड्गसिंह उसे देखने पहुँचा। सुलतान की सुंदरता और चाल देखकर खड्गसिंह के मन में उसे पाने की लालसा जाग उठी और वह बाबा को धमकी देकर चला गया।</p>
<p>एक शाम, खड्गसिंह ने एक असहाय अपाहिज का भेष बनाकर बाबा भारती को धोखा दिया और उनका घोड़ा छीनकर भागने लगा। तभी बाबा भारती ने उससे केवल एक विनती की कि वह इस घटना का जिक्र किसी से न करे, अन्यथा लोग गरीबों और लाचारों पर विश्वास करना छोड़ देंगे। बाबा के इन उच्च विचारों ने डाकू के हृदय को झकझोर दिया।</p>
<p>आत्मग्लानि और पश्चाताप से भरकर खड्गसिंह ने रात के अंधेरे में चुपचाप घोड़ा वापस बाबा के अस्तबल में बाँध दिया। सुबह जब बाबा ने अपने घोड़े को वापस पाया, तो उनकी खुशी का ठिकाना न रहा। इस प्रकार, एक साधु की मानवता ने एक क्रूर डाकू को बदल दिया, जहाँ बाबा भारती हार कर भी जीत गए और खड्गसिंह जीतकर भी हार गया।</p>
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<h3>❤️ 6. तुम कल्पना करो</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1GuDLGyM8LHZqKSWBRCYKr85eZ_I4nTJN" /></p>
<p>&#8216;तुम कल्पना करो&#8217; गोपाल सिंह &#8216;नेपाली&#8217; द्वारा रचित एक ओजपूर्ण कविता है, जो युवाओं को नव-निर्माण और बौद्धिक जागृति के लिए प्रेरित करती है। कवि का मानना है कि समाज की पुरानी और जर्जर नीतियां अब अप्रासंगिक हो चुकी हैं, इसलिए राष्ट्र के उत्थान के लिए नवीन कल्पनाओं की आवश्यकता है।</p>
<p>कविता इस बात पर जोर देती है कि दासता या गुलामी केवल आंसू बहाने या गुहार लगाने से समाप्त नहीं होती, बल्कि इसके लिए अडिग संकल्प और शक्ति की साधना जरूरी है। लेखक चित्तौड़ के महाराणा प्रताप जैसे वीरों का स्मरण कराते हुए कहते हैं कि यदि देश का युवा वर्ग निष्क्रिय हो गया, तो देश का गौरवशाली इतिहास और वीरता की कहानियाँ भी समाप्त हो जाएंगी।</p>
<p>प्रकृति के प्रतीकों जैसे स्वतंत्र आकाश, निर्बाध झरने और अडिग पर्वतों के माध्यम से कवि संदेश देते हैं कि स्वतंत्रता ही स्वाभाविक स्थिति है। यह कविता किशोरों और युवाओं को दरिद्रता और कुरीतियों को त्यागकर राष्ट्र की समृद्धि, ऋद्धि और सिद्धि के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य करने का आह्वान करती है।</p>
<p>संक्षेप में, यह रचना आत्मविश्वास, स्वाभिमान और देशप्रेम की भावना को जागृत कर एक नए समाज के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करती है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ 7. पिता का पत्र पुत्र के नाम</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1u1-syfbwkAgj8nh-HlcBHLW2UgwxRd67" /></p>
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<h3>❤️ 8. मंत्र</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1nHnHAJbs8iKUkGe94wTo9nWYgbyqC-ry" /></p>
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<h3>❤️ 9. बाल लीला</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1it7i4NSiLzVPeGHaZ-nj_VGonG00XeDE" /></p>
<p>प्रस्तुत पाठ &#8216;बाल-लीला&#8217; सूरदास द्वारा रचित है, जिसमें भगवान श्री कृष्ण की बाल सुलभ चेष्टाओं और उनकी मासूमियत का मनोहारी चित्रण किया गया है। पद में बालक कृष्ण अपनी माता यशोदा से शिकायत करते हुए कहते हैं कि &#8216;मैया मोरी, मैं नहीं माखन खायो&#8217;। वे तर्क देते हैं कि वे तो सुबह से गायों के पीछे मधुवन चले गए थे और शाम को घर लौटे हैं।</p>
<p>वे अपनी छोटी बाँहों का हवाला देते हुए कहते हैं कि वे ऊँचे टंगे छींके तक कैसे पहुँच सकते हैं। वे ग्वाल-बालों पर आरोप लगाते हैं कि उन्होंने ही जबरदस्ती उनके मुख पर माखन लगा दिया है। कृष्ण अपनी माता को भोली कहते हुए कहते हैं कि शायद वे उन्हें पराया समझकर दूसरों की बातों पर विश्वास कर रही हैं।</p>
<p>अंत में, कृष्ण के इस भोलेपन और चतुराई भरे तर्कों को सुनकर माता यशोदा भाव-विभोर हो जाती हैं और उन्हें हँसकर अपने गले से लगा लेती हैं। यह पद वात्सल्य रस का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो पाठक के मन में बाल कृष्ण के प्रति प्रेम और स्नेह जाग्रत करता है। इसमें सूरदास ने बाल मनोविज्ञान का बहुत ही सुंदर प्रयोग किया है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ 10. भीष्म की प्रतिज्ञा</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=12DCEcKeGhQE4lE2CUJxCZoc8AVdCNy0M" /></p>
<p>यह एकांकी हस्तिनापुर के सम्राट शान्तनु और निषादराज दाशराज की पुत्री सत्यवती के विवाह के प्रसंग पर आधारित है। राजा शान्तनु सत्यवती से विवाह करना चाहते थे, परंतु दाशराज ने एक कठिन शर्त रखी कि उनके बाद सत्यवती का पुत्र ही हस्तिनापुर की राजगद्दी पर बैठेगा। शान्तनु अपने योग्य पुत्र देवव्रत के प्रति अन्याय नहीं करना चाहते थे, इसलिए वे उदास रहने लगे।</p>
<p>जब देवव्रत को पिता की उदासी का कारण पता चला, तो वे स्वयं निषादराज के पास गए। पितृभक्ति का परिचय देते हुए देवव्रत ने न केवल राज्य का त्याग किया, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए कि भविष्य में उनकी संतान राज्य का दावा न करे, उन्होंने आजीवन ब्रह्मचारी रहने की भीषण प्रतिज्ञा की। उनकी इसी कठोर प्रतिज्ञा के कारण देवताओं ने आकाश से पुष्प वर्षा की और उनका नाम &#8216;भीष्म&#8217; पड़ा।</p>
<p>अंततः दाशराज ने प्रसन्न होकर सत्यवती को भीष्म के साथ हस्तिनापुर विदा किया। यह कहानी भीष्म के त्याग, दृढ़ संकल्प और पिता के प्रति उनके अगाध प्रेम को दर्शाती है। भीष्म का यह बलिदान भारतीय इतिहास और पौराणिक कथाओं में अद्वितीय माना जाता है।</p>
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<h3>❤️ 11. सरजू भैया</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1JSTCN69Qy0IKdi786ddi-7PnY94aaVoF" /></p>
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<h3>❤️ 12. रहीम के दोहे</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1LdCociZOhdITLT6LMYg267KYeJzAFEfO" /></p>
<p>यह पाठ &#8216;रहीम के दोहे&#8217; प्रसिद्ध कवि रहीम द्वारा रचित नीतिपरक दोहों का एक संग्रह है। इन दोहों के माध्यम से रहीम ने जीवन के अत्यंत महत्वपूर्ण और व्यावहारिक मूल्यों की शिक्षा दी है।</p>
<p>कवि के अनुसार, उत्तम स्वभाव वाले व्यक्तियों पर बुरी संगति का कोई प्रभाव नहीं पड़ता, ठीक वैसे ही जैसे चंदन के वृक्ष पर सांपों के लिपटे रहने के बाद भी उसमें जहर नहीं फैलता। वे प्रेम के संबंधों को धागे के समान नाजुक बताते हुए कहते हैं कि इसे कभी झटके से नहीं तोड़ना चाहिए, क्योंकि टूटने के बाद जुड़ने पर इसमें गाँठ पड़ जाती है।</p>
<p>रहीम परोपकार की महिमा गाते हुए कहते हैं कि जिस प्रकार वृक्ष अपने फल स्वयं नहीं खाते और सरोवर अपना पानी स्वयं नहीं पीते, उसी प्रकार सज्जन व्यक्ति अपनी संपत्ति का संचय दूसरों की भलाई के लिए करते हैं। वे समाज में छोटे और बड़े दोनों के महत्व को स्वीकारते हुए कहते हैं कि जहाँ सुई का काम हो, वहाँ तलवार काम नहीं आती।</p>
<p>इसके अतिरिक्त, वे धैर्य रखने और अपनी व्यथा को मन में ही रखने की सलाह देते हैं ताकि लोग उसका उपहास न उड़ाएँ। यह पाठ मनुष्य को एक बेहतर और समझदार इंसान बनने की प्रेरणा देता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ 13. दादा-दादी के साथ</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1qkmCWehynYwqZ52y7tdomwWJuQWf0K2y" /></p>
<p>यह कहानी पिंकी और विकी के परिवार की है, जिनके चचेरे भाई-बहन राहुल और पद्मिनी इंग्लैंड से भारत आते हैं। राहुल और पद्मिनी को अपने भारतीय रिश्तेदारों से मिलकर बहुत खुशी होती है, लेकिन वे यह देखकर हैरान रह जाते हैं कि पिंकी और विकी भारतीय होने के बावजूद हमेशा अंग्रेजी में बात करते हैं।</p>
<p>शाम को बिजली कटने पर सभी आँगन में बैठते हैं, जहाँ दादी उन्हें रामायण और महाभारत की कहानियाँ सुनाती हैं। राहुल और पद्मिनी इन कहानियों और भारतीय जीवनशैली का आनंद लेते हैं, जबकि पिंकी इन्हें पुराना और विज्ञान के युग में बेकार मानती है।</p>
<p>भोजन के समय भी विदेशी बच्चे पारंपरिक &#8216;सत्तू की लिट्टी&#8217; मजे से खाते हैं, जबकि स्थानीय बच्चे विदेशी खाना पसंद करते हैं। अगले दिन वे पास के पुराने खंडहरों को देखने की योजना बनाते हैं, जिसमें पद्मिनी और राहुल की गहरी रुचि है।</p>
<p>यह कहानी आधुनिकता और परंपरा के बीच के अंतर को दर्शाती है और बताती है कि कैसे विदेशी परिवेश में रहने वाले बच्चे अपनी जड़ों के प्रति अधिक उत्सुक हो सकते हैं। कहानी पारिवारिक प्रेम, सांस्कृतिक मूल्यों और अपनी भाषा के महत्व पर जोर देती है।</p>
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<h3>❤️ 14. डा0 भीमराव अंबेडकर</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1sL5j7OLlYUqShahdb9j6T-RzEMkDQHcf" /></p>
<p>यह पुस्तक डॉ. भीमराव अम्बेडकर के प्रेरणादायक जीवन और भारतीय समाज में उनके अमूल्य योगदान पर आधारित है। 14 अप्रैल 1891 को महार जाति में जन्मे भीमराव को बचपन से ही छुआछूत जैसी कुरीतियों का सामना करना पड़ा, जिससे उन्होंने इस सामाजिक बुराई को मिटाने का दृढ़ संकल्प लिया।</p>
<p>उच्च शिक्षा के लिए वे अमेरिका और लंदन गए, जहाँ उन्होंने डॉक्टरेट और डी.एससी. की उपाधियाँ प्राप्त कीं। स्वदेश लौटकर उन्होंने दलितों के उत्थान के लिए &#8216;मूकनायक&#8217; और &#8216;बहिष्कृत भारत&#8217; जैसे समाचार पत्रों का संपादन किया।</p>
<p>भारत के स्वतंत्र होने पर वे संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष बने और एक समावेशी संविधान का निर्माण किया, जिसने सभी नागरिकों को समानता का अधिकार दिया। स्वतंत्र भारत के प्रथम कानून मंत्री के रूप में उन्होंने कई कानूनी सुधार किए। जीवन के अंतिम वर्षों में उन्होंने समानता के सिद्धांत को सर्वोपरि मानते हुए बौद्ध धर्म अपना लिया।</p>
<p>6 दिसंबर 1956 को उनके देहांत के बाद भी सारा देश उन्हें &#8216;बाबा साहब&#8217; के रूप में सादर स्मरण करता है। यह कृति उनके संघर्ष, विद्वता और समाज सुधार के प्रति अटूट समर्पण को विस्तार से दर्शाती है।</p>
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<h3>❤️ 15. भूल गया है क्यूँ इंसान</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1psbijWWEbcp065TiShaPeC_mh-aiIlKF" /></p>
<p>हरिवंशराय बच्चन द्वारा रचित कविता &#8216;भूल गया है क्यों इंसान&#8217; मानवता और वैश्विक एकता का एक सशक्त संदेश देती है। कवि इस बात पर आश्चर्य प्रकट करते हैं कि मनुष्य अपनी मूल सच्चाई को क्यों भूल गया है। वे याद दिलाते हैं कि हम सभी का शरीर एक ही मिट्टी से बना है और हम सभी पर एक ही स्वच्छ आकाश की छाया है।</p>
<p>कोई भी व्यक्ति इस संसार में किसी विशेष वरदान या विशिष्टता के साथ जन्म नहीं लेता है। यद्यपि धरती पर मनुष्यों ने अलग-अलग देशों और सीमाओं का निर्माण किया है, लेकिन ये सभी देश एक ही पृथ्वी की संतान हैं। कवि स्पष्ट करते हैं कि चाहे हमारे देश अलग हों और हमारी वेशभूषा या पहनावा अलग हो, लेकिन हम सभी के भीतर का प्राण और हृदय एक ही है।</p>
<p>मानवीय संवेदनाएं और आत्मा की एकता भौगोलिक सीमाओं से परे है। यह कविता हमें जाति, धर्म और राष्ट्र के भेदभाव को भुलाकर मानवता के धर्म को अपनाने की प्रेरणा देती है। अंततः, यह संदेश दिया गया है कि बाहरी भिन्नताओं के बावजूद, आंतरिक रूप से सभी मनुष्य समान हैं और हमें एक-दूसरे के प्रति प्रेम और सहानुभूति रखनी चाहिए।</p>
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<h3>❤️ 16. स्वार्थी दानव</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1et81hJeYDJmawIeeMJZGS0_TD0yuv7Ya" /></p>
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<h3>❤️ 17. फसलों का त्योहार</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1dPgr9cNCx2EFkAYKv9pvbP4zusXSVHNq" /></p>
<p>यह पाठ &#8216;फसलों के त्योहार&#8217; भारत के विभिन्न राज्यों में कटाई के समय मनाए जाने वाले विविध उत्सवों का एक सुंदर वर्णन है। लेखक ने इसकी शुरुआत अपने व्यक्तिगत अनुभवों से की है, जहाँ खिचड़ी (मकर संक्रांति) के समय ठंड और घर की चहल-पहल का जिक्र है। जनवरी के मध्य में देश भर में फसलों से जुड़े कई त्यौहार मनाए जाते हैं जैसे उत्तर प्रदेश और बिहार में मकर संक्रांति, असम में बीहू, केरल में ओणम, तमिलनाडु में पोंगल और पंजाब में लोहड़ी।</p>
<p>झारखंड में &#8216;सरहुल&#8217; बड़े उत्साह से मनाया जाता है जहाँ प्रकृति और साल के पेड़ों की पूजा होती है। तमिलनाडु में पोंगल के दिन नए धान, दूध और गुड़ को मटके में पकाकर &#8216;पोंगल-पोंगल&#8217; के नारे लगाए जाते हैं। गुजरात में यह दिन आसमान को रंग-बिरंगी पतंगों से भर देता है।</p>
<p>कुमाऊँ में इसे &#8216;घुघुतिया&#8217; कहते हैं, जहाँ विशेष पकवान बनाकर पक्षियों को खिलाए जाते हैं। यह पाठ हमें बताता है कि भले ही इन त्योहारों के नाम और ढंग अलग हों, लेकिन सबका उद्देश्य प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करना और खुशियाँ बाँटना है। अंत में, तिल के विभिन्न उपयोगों और क्षेत्रीय विविधता के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक एकता को दर्शाया गया है।</p>
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<h3>❤️ 18. शेरशाह का मकबरा</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1hYVb5KIUT100OVtMuJF6o0BZk9lUiXJ6" /></p>
<p>यह अध्याय शेरशाह सूरी के जीवन और उनके द्वारा बनवाए गए प्रसिद्ध मकबरे के बारे में एक शैक्षिक विवरण प्रस्तुत करता है। कहानी स्कूल के बच्चों की एक यात्रा से शुरू होती है, जहाँ उनके शिक्षक पूर्णनाथ सर शेरशाह के इतिहास पर प्रकाश डालते हैं। शेरशाह भारत के एक महान शासक थे जिनका बचपन का नाम फरीद खाँ था।</p>
<p>उन्होंने 1540 ई. में हुमायूँ को पराजित कर सूरी वंश की स्थापना की। हालांकि उन्होंने केवल पाँच वर्ष शासन किया, लेकिन जनहित में ग्रैण्ड ट्रंक रोड जैसी विशाल सड़कें, सराय और कुएँ बनवाकर प्रशासनिक सुधारों की मिसाल पेश की।</p>
<p>सासाराम स्थित उनका मकबरा वास्तुकला का एक अद्भुत नमूना है। यह अष्टकोणीय मकबरा एक बड़े तालाब के बीच 45 मीटर ऊँचे चबूतरे पर बना है और अफगान शैली का प्रतिनिधित्व करता है। इसका गुम्बद ताजमहल से भी बड़ा है।</p>
<p>पाठ में ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया गया है और अंत में विद्यार्थियों के लिए अभ्यास प्रश्न एवं व्याकरण संबंधी गतिविधियाँ दी गई हैं, जो शेरशाह के शासनकाल और उनके स्थापत्य कला के योगदान को समझने में सहायक हैं।</p>
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<h3>❤️ 19. बसंती हवा</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1w6tPJRiiO-940ZKHrqFBdFALpxIJlg9N" /></p>
<p>यह कविता &#8216;वसंती हवा&#8217; प्रसिद्ध कवि केदारनाथ अग्रवाल द्वारा रचित है। इसमें वसंत ऋतु की हवा का मानवीकरण किया गया है। हवा स्वयं को मस्तमौला, निडर और बेफिक्र बताती है, जिसका न कोई घर है और न ही कोई दुश्मन।</p>
<p>वह अपनी मर्जी से शहर, गाँव, बस्ती, नदी और हरे खेतों में घूमती है। कविता में हवा के शरारती स्वभाव का वर्णन है, जहाँ वह महुआ और आम के पेड़ों पर चढ़ती है, गेहूँ के खेतों में लहरें पैदा करती है और अलसी के पौधों के साथ ठिठोली करती है। जब वह अलसी की कलसी गिराने में असफल रहती है, तो अपनी हार मानकर सरसों से छेड़छाड़ नहीं करती।</p>
<p>हवा के इस आनंदमयी भ्रमण से पूरी सृष्टि—खेत, धूप और दिशाएँ—खिलखिलाकर हँसने लगती हैं। अंत में, कवि ने हवा के माध्यम से प्रकृति के उल्लास और वसंत के जीवंत स्वरूप को बेहद खूबसूरती से चित्रित किया है। यह कविता पाठकों को प्रकृति की स्वतंत्रता और खुशी का अनुभव कराती है।</p>
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<h3>❤️ 20. पहेलियाँ</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1lPPoBqvCH2Ne9eO8-55YV9crdXQDtaJe" /></p>
<p>यह संकलन &#8217;20 पहेलियाँ&#8217; शीर्षक से है, जिसमें विभिन्न रोचक और ज्ञानवर्धक पहेलियाँ प्रस्तुत की गई हैं। इन पहेलियों के माध्यम से बच्चों की तार्किक क्षमता और सोचने की शक्ति को विकसित करने का प्रयास किया गया है। उदाहरण के तौर पर, इसमें ऑक्सीजन को लेकर पहेली है जो आग जलाने में सहायक होती है और जिसे पौधे दिन में बनाते हैं।</p>
<p>इसी तरह, &#8216;छाता&#8217; के लिए एक पहेली है जो धूप में खिलता है और छाया में मुरझा जाता है। &#8216;पतंग&#8217; का वर्णन एक ऐसी वस्तु के रूप में किया गया है जो बिना पंखों के उड़ती है और जिसके गले में सूत बंधा होता है। &#8216;मानचित्र&#8217; को एक ऐसी नदी और सड़क बताया गया है जहाँ पानी और गाड़ी नहीं होती।</p>
<p>इसके अतिरिक्त, &#8216;चक्की&#8217; और &#8216;गुलाबजामुन&#8217; जैसे शब्दों पर आधारित मजेदार पहेलियाँ भी शामिल हैं। अंत में, अभ्यास के लिए बच्चों को पहेलियाँ संकलित करने और कक्षा में बुझाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। यह सामग्री मनोरंजक होने के साथ-साथ शिक्षाप्रद भी है, जो हिंदी भाषा के माध्यम से पाठकों का मनोरंजन करती है।</p>
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		<title>Bihar Board Class 6th English Book 2026 PDF Download (Radiance)</title>
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		<dc:creator><![CDATA[bseb]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 Jul 2022 08:40:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Class 6th Books]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>Bihar Board 6th English (Radiance) Book 2026 PDF Download Bihar Board Class 6th English (Radiance) Book 2026 PDF Download &#8211; इस पेज पर बिहार बोर्ड 6th के छात्रों के लिए &#8220;English (Radiance)&#8221; Book दिया गया है &#124; जिसे आप अपने फ़ोन में Free Download कर सकते हैं &#124; 🌐 सभी विषयों की बुक्स डाउनलोड करने [&#8230;]</p>
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<h2 style="text-align: center;"><span style="text-decoration: underline; color: #3366ff;"><strong>BSEB Class 6 English (Radiance) Textbook PDF Free Download</strong></span></h2>
<p><span style="font-size: 18pt;"><strong>☞</strong></span> बुक्स डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए डाउनलोड लिंक पर क्लिक करें | <img decoding="async" class="aligncenter" src="https://i0.wp.com/biharboard-ac.in/wp-content/uploads/2022/07/kindpng_6137677-min.png?resize=601%2C111&amp;ssl=1" alt="line" /></p>
<h3>❤️ 1. My Mother</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=137c9o85xM7NIYzNJD3-r2BI-gTjq2w_H" /></p>
<p>The document contains the first lesson of an English textbook titled &#8216;MY MOTHER&#8217;, which is a poem written by Ann Taylor. The poem beautifully describes the selfless love and care a mother provides to her child from infancy through illness and early life.</p>
<p>It highlights how she watches over the child in the cradle, sheds tears of affection, and runs to help whenever the child falls. The poet expresses deep gratitude, questioning how one could ever be unkind to someone who has been so devoted.</p>
<p>The poem concludes with a promise that as the mother grows old and feeble, the child will be her support and soothe her pains, reciprocating the care received. The text includes a &#8216;Warmer&#8217; section to engage students, a glossary for difficult words with Hindi meanings, and various comprehension exercises such as &#8216;Think and Tell&#8217; and &#8216;Think and Write&#8217; to test understanding and encourage personal reflection.</p>
<p>The material is copyright-protected by BSTBPC, Government of Bihar, and Abdiel Solutions, indicating its use in the Bihar state school curriculum for empowering students with language skills.</p>
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<h3>❤️ 2. The Boy who lost his Appetite</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1V5FVkzCsZNoli6GSfJCAYfzOvQoCwwJ8" /></p>
<p>The story follows Sham, a wealthy young man who inherits his father&#8217;s estate and begins living a life of luxury and laziness. Spending his days eating rich food and staying in bed, he soon finds that all food has become tasteless to him.</p>
<p>One day, he joins a hunt but, being unaccustomed to the activity, gets separated from his group and wanders lost in the woods for hours. Exhausted and genuinely hungry for the first time in months, he finds a peasant&#8217;s hut.</p>
<p>The peasant offers him simple roti and dal, which Sham finds incredibly delicious?better than any of his expensive meals. He returns home but soon finds his rich food tasteless again, leading him to realize that the simple meal was only tasty because he was truly hungry and active.</p>
<p>The story teaches the lesson that the enjoyment of food and life comes from hard work and physical activity rather than idle luxury. Hunger is indeed the best sauce, as the simple peasant food outshone the finest delicacies when earned through effort and physical exhaustion.</p>
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<h3>❤️ 3. Lata Mangeskar</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1RuVh9aWLqs6Qm4PWNnB-T5rXxYS2HRwc" /></p>
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<h3>❤️ 4. Do Animals Share Ideas</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=11vYcT_McCvi5LNsxq7zjFOBJLK_Dk74s" /></p>
<p>The book chapter titled &#8216;DO ANIMALS SHARE IDEAS?&#8217; explores the fascinating ways in which animals communicate and express their feelings despite lacking a structured language like humans. It highlights that while animals do not use complex sentences, they successfully share information through various biological and behavioral mechanisms.</p>
<p>One primary method mentioned is the sense of smell; many animals leave scents to frighten enemies or attract partners from great distances. Additionally, sound plays a crucial role in conveying emotions such as fear or providing warnings to others.</p>
<p>Body posture is another vital communication tool, where actions like raising hair or baring teeth serve to intimidate threats, while coming close together signifies friendship. The text concludes by contrasting these animal behaviors with human language, emphasizing that human communication is uniquely complex due to its ability to produce infinite sentences and construct entirely new ideas.</p>
<p>The chapter includes a glossary, comprehension exercises, and grammar lessons focused on prepositions to reinforce the learning of these concepts.</p>
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<h3>❤️ 5. Bangle Sellers</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1WTwpJqDLxXC_em_O_UBZa4kVFRm9EX-b" /></p>
<p>The poem &#8216;Bangle-Sellers&#8217;, composed by Sarojini Naidu, portrays the life and trade of those who sell bangles at temple fairs. Describing bangles as &#8216;delicate, bright, rainbow-tinted circles of light,&#8217; the poet emphasizes their role as &#8216;lustrous tokens of radiant lives&#8217; for happy daughters and wives.</p>
<p>The poem vividly details various bangles suited for different stages of a woman&#8217;s life. Some are silver and blue, reminiscent of mountain mist, and are meant for maidens.</p>
<p>Others are flushed like dream-filled buds or aglow like new-born leaves, symbolizing the beauty and freshness of youth. The text serves as an educational lesson, including a glossary that translates key terms like &#8216;lustrous&#8217; and &#8216;tranquil&#8217; into Hindi, along with comprehension exercises and language games.</p>
<p>Through these descriptions, Naidu captures the cultural significance of bangles in Indian society, linking their colors and shine to the emotions and milestones of the women who wear them. The lesson further explores word power through color comparisons and identifies various types of sellers, such as those of vegetables or sweets, to broaden students&#8217; vocabulary and understanding of their surroundings.</p>
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<h3>❤️ 6. Saina Nehwal</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=14wQ99SBbtD60dyTgjZ23RHayLmdaDCH_" /></p>
<p>This book chapter highlights the inspiring journey of Saina Nehwal, a legendary Indian badminton player who brought international prestige to the nation. Born on March 17, 1990, in Hisar, Haryana, her talent was recognized at the age of eight by coach Nani Prasad.</p>
<p>The text details her immense dedication, including traveling 50 km daily for training. Saina achieved numerous milestones, such as becoming the first Indian woman to win a 4-star tournament at the Philippines Open in 2006 and reaching the quarterfinals of the Olympic Games.</p>
<p>Her excellence earned her prestigious honors like the Arjuna Award and the Padma Shri in 2010. Beyond her personal achievements, the book places her in the historical context of Indian badminton alongside greats like Prakash Padukone and Syed Modi.</p>
<p>It also serves as an educational resource, featuring a glossary of terms, comprehension questions, and grammar exercises. Through her feats, Saina Nehwal has become a symbol of national pride, inspiring young athletes to pursue excellence in sports while maintaining physical activity and discipline.</p>
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<h3>❤️ 7. A Mother&#8217;s Love</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1WivLOVSW-rb1DeENo4fE4AZ9518_UEA7" /></p>
<p>The story &#8216;A Mother&#8217;s Love&#8217; is set in a small village called Mahua on the banks of the Punpun River. It focuses on Sita, a poor widow who dedicated her life to her son, Ratan. To fund his education, she worked as a housemaid and grew vegetables.</p>
<p>Despite her efforts, Ratan lost interest in school. Sita then sold her silver bangles to help him open a shop. Ratan became successful in business and married Bela.</p>
<p>However, after his marriage and the birth of his son, he began to neglect his mother, even as her health declined. During a heavy flood, Ratan&#8217;s house was surrounded by water. One night, seeing his wife protect their child from the rain and cold, Ratan was deeply moved and reminded of his own mother&#8217;s lifelong sacrifices.</p>
<p>Realizing his cruelty, he sought Sita&#8217;s forgiveness. Sita, embodying unconditional maternal love, immediately forgave him, stating a mother could never be truly angry with her child. The story ends with a heartfelt family reunion, emphasizing that a mother&#8217;s love and blessings are selfless and enduring.</p>
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<h3>❤️ 8. Madhubani Painting</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1_mLoMx2YL3xeroTW5DXFtAQ2-qZxb3mw" /></p>
<p>This text, titled &#8216;MADHUBANI ART&#8217;, provides an insightful overview of the traditional Madhubani painting style originating from Bihar, India. Historically, this art form was primarily used to decorate village house walls, but over the last 50-60 years, it has transitioned onto various bases like paper, cloth, wood, and pottery.</p>
<p>The paintings are known for using natural colors derived from flowers and other organic materials, though fabric colors are now common for modern applications. The themes typically revolve around natural village scenes, flora, fauna, and religious motifs.</p>
<p>Madhubani art has become a significant source of livelihood for many local people, with many talented women gaining national and international recognition. The text highlights that the tradition remains vibrant, with children as young as five learning the craft from their mothers.</p>
<p>Additionally, the document includes educational exercises such as comprehension questions, vocabulary building, and grammar lessons focused on active and passive voice. It concludes by emphasizing the talent and dedication of the people of Bihar and the importance of preserving their rich cultural heritage through this unique and enduring art form.</p>
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<h3>❤️ 9. Discrimination</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1rql9ic9ixroHmiZUs5VLsaWyhujWJMJA" /></p>
<p>The book titled &#8216;Discrimination&#8217; is a poetic and educational exploration of the pain caused by social biases. The central poem, written by Janet S. Watford, captures the raw emotions of a person facing prejudice while walking through a hall.</p>
<p>The speaker describes being surrounded by &#8216;snickers, sneers, and laughter&#8217; simply for being different, highlighting the isolating nature of being shunned and taunted. This work emphasizes the fundamental equality of all people and questions the logic of discrimination based on religion, caste, gender, or nationality. It poignantly asks why, if we are all part of one nation, some people continue to treat others as inferior.</p>
<p>Following the poem, the text includes a comprehensive glossary to help students understand terms like &#8216;taunt&#8217; and &#8216;shun,&#8217; along with comprehension questions that encourage critical thinking about the impact of untouchability and bias. By framing untouchability as a &#8216;crime against humanity,&#8217; the book advocates for a world where everyone lives in harmony, free from the hurt of unfair treatment. Ultimately, the book serves as a powerful call to empathy, urging readers to recognize the shared humanity that unites us all regardless of our outward differences.</p>
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<h3>❤️ 10. Bamboo Curry</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1NCQORWmU7D2qsVaVzKRCFLHYHy_1s1dK" /></p>
<p>The story &#8216;Bamboo Curry&#8217; is a humorous Santhal folk tale that explores themes of literal-mindedness and cultural misunderstanding. It begins with a Santhal bridegroom visiting his mother-in-law, who serves him a delicious curry. When he asks about the dish, she points to a bamboo door.</p>
<p>Taking this literally, the bridegroom removes the door and carries it home to his village, intending to have his wife recreate the meal. Despite his wife&#8217;s efforts to chop and boil the hard wood of the door repeatedly, the dish remains inedible. The situation reaches a comical climax when his in-laws visit and reveal his foolish mistake: the curry was actually made from tender bamboo shoots, not the wood of a door.</p>
<p>The lesson is structured for educational purposes, including a glossary with Hindi meanings for words like &#8216;bridegroom&#8217; (??????) and &#8216;delicious&#8217; (?????????), followed by comprehension questions and grammar exercises on direct and indirect speech. It concludes by encouraging students to share recipes and translate sentences related to food, such as &#8216;???????? ?????</p>
<p>???? ???? ???&#8217; (What is your favorite food?), making it an engaging piece of literature for language learning.</p>
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<h3>❤️ 11. Akbar and Birbal</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1mXKwe_t3Ngx2sUojwFuR4GWaCPDiKDcU" /></p>
<p>The book or lesson titled &#8216;AKBAR AND BIRBAL&#8217; tells a fascinating story centered on the legendary Mughal Emperor Akbar and his exceptionally wise minister, Birbal. Akbar, although illiterate, surrounded himself with intellectual brilliance in his court, most notably the &#8216;Nav Ratna&#8217; or nine jewels, of which Birbal was a prominent member. The narrative follows a challenge posed by a learned Pandit who visits the court, claiming mastery over numerous languages.</p>
<p>He boasts that no one can identify his true mother tongue and challenges the courtiers to do so. While everyone else fails, Birbal takes up the task. That night, Birbal quietly enters the Pandit&#8217;s room and tickles his ear with dry grass while he is asleep.</p>
<p>In his startled state, the Pandit cries out in his mother tongue, Telugu. The following day, Birbal correctly identifies the language, explaining to the court that a person in distress or caught off-guard will instinctively speak their native tongue. Impressed by Birbal&#8217;s cleverness and timely wisdom, Akbar praises him, and the Pandit concedes defeat.</p>
<p>This story highlights the quick thinking and deep understanding of human nature that made Birbal a beloved figure in Indian folklore.</p>
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<h3>❤️ 12. The Talking Potato</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1hKSyGv8oV5AhYQEq8pnCbd4qbCD5VWhc" /></p>
<p>The story &#8216;The Talking Potato&#8217; is a humorous folk tale about a lazy farmer who discovers that inanimate objects in his world can speak. It begins when the farmer goes to dig up potatoes he had neglected.</p>
<p>To his shock, a potato complains about his lack of care, and his dog agrees. Terrified, the farmer tries to tie the dog with a vine, but the vine and even a rock start talking to him.</p>
<p>As he flees to the village, he encounters a fisherman and a tailor. Despite their initial skepticism, their own possessions?a fishing net and a shirt?join the conversation, causing everyone to run in fear to the village headman, the Mukhiya.</p>
<p>The Mukhiya dismisses their claims as nonsense and threatens punishment for their &#8216;fools&#8217; talk.&#8217; However, the irony peaks in the final moment when, after the men leave, the Mukhiya&#8217;s own chair speaks up in disbelief about a talking potato. The story uses these absurd interactions to highlight themes of responsibility and the unexpected, while providing an entertaining narrative that questions what we consider &#8216;impossible.&#8217;</p>
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<h3>❤️ 13. Laughing Song</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1i5dAYfwLKWFbjuNGhol9LjesSslFVpze" /></p>
<p>&#8216;Laughing Song&#8217; is a cheerful poem by William Blake that celebrates the beauty and joy of nature. The poem uses personification to describe how various elements of the natural world?such as the green woods, dimpling streams, air, green hills, meadows, and even grasshoppers?participate in a collective sense of happiness and laughter.</p>
<p>The poet depicts a vibrant scene where the environment itself seems to be alive with &#8216;merry wit&#8217; and &#8216;the voice of joy.&#8217; Amidst this lively backdrop, three girls?Mary, Susan, and Emily?are shown singing a sweet chorus of &#8216;ha, ha, he&#8217; with their &#8216;sweet round mouths.&#8217; The imagery extends to painted birds laughing in the shade near a table spread with cherries and nuts. The poem concludes with an invitation from the speaker for others to live, be merry, and join in the harmonious singing.</p>
<p>It highlights the theme of innocence and the deep connection between human happiness and the exuberant spirit of the natural world, suggesting that joy is a universal language shared by all creation.</p>
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<h3>❤️ 14. Rikki Tikki Tawi</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1_ZpDjLwCYRHcz1WTIn9vVeBZIy20ncW6" /></p>
<p>This story, written by Rudyard Kipling, follows the journey of a young mongoose named Rikki Tikki Tawi. After being rescued from a flood by a boy named Teddy and his family, Rikki Tikki becomes a loyal pet and a guardian of their home. The narrative centers on the inherent rivalry between mongooses and cobras, as Rikki Tikki discovers two dangerous cobras, Nag and Nagin, living in the garden.</p>
<p>The snakes plot to kill the humans to reclaim the garden for themselves, but Rikki Tikki remains vigilant. In a climactic encounter, the brave mongoose confronts Nag in the family&#8217;s bathroom. Despite being small and inexperienced, Rikki Tikki fights fiercely, holding onto the snake until Teddy&#8217;s father arrives to end the threat with a gun.</p>
<p>Through his courage and instinctual drive to protect his masters, Rikki Tikki saves the family from certain death. The story highlights themes of loyalty, bravery, and the natural bond between humans and animals. It concludes with the family expressing deep gratitude toward their small hero, who continues to live with them as a beloved friend and protector.</p>
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<h3>❤️ 15. Excuses, Execuses?</h3>
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<p>This text presents a humorous poem titled &#8216;EXCUSES, EXCUSES!&#8217; by Gareth Owen, which depicts a dialogue between a teacher and a student named Blenkinsopp. The student is notorious for arriving late and being absent, offering a series of increasingly improbable excuses to avoid his responsibilities.</p>
<p>Blenkinsopp claims his grandmother&#8217;s death is the reason for his lateness, despite the teacher noting that this would be the fourth grandmother he has lost in a single term, curiously always on Physical Education (P.E.) days. When questioned about his absence during a math test, he blames a toothache, and he later refuses to participate in P.E.</p>
<p>because his kit is at home. He claims his grandmother usually handles his kit, but since she is &#8216;dead&#8217;, he could not bring it.</p>
<p>The book includes comprehension questions, vocabulary exercises, and grammar lessons on punctuation, such as commas and inverted commas. It serves as an educational tool to engage students through a relatable scenario of school excuses while teaching language skills like translation and formal letter writing.</p>
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		<title>Bihar Board Class 6th Civics Book 2026 PDF Download</title>
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		<pubDate>Sun, 24 Jul 2022 08:39:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Class 6th Books]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>Bihar Board 6th Civics Book 2026 PDF Download (सामाजिक,आर्थिक एवं राजनीतिक जीवन) Bihar Board Class 6th Civics Book 2026 PDF Download &#8211; इस पेज पर बिहार बोर्ड 6th के छात्रों के लिए &#8220;Civics (सामाजिक,आर्थिक एवं राजनीतिक जीवन)&#8221; Book दिया गया है &#124; जिसे आप अपने फ़ोन में Free Download कर सकते हैं &#124; 🌐 सभी [&#8230;]</p>
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<h3>❤️ 1. विविधता की समझ</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1YecQOzMZ8DjDQpSOiGYPIPDBZGXIX4ru" /></p>
<p>यह पुस्तक अध्याय विविधता, भेदभाव और समानता के महत्वपूर्ण विषयों पर प्रकाश डालता है। इसमें बताया गया है कि हमारे समाज में रंग-रूप, खान-पान, भाषा और त्योहारों के आधार पर जो भिन्नताएँ दिखती हैं, वही विविधता कहलाती है। लेखक ने &#8216;निशान&#8217; और &#8216;निशान अहमद&#8217; की मित्रता के माध्यम से यह समझाया है कि अलग-अलग पृष्ठभूमि के होने के बावजूद मानवीय संवेदनाएँ और मित्रता सबको एक सूत्र में पिरोती हैं।</p>
<p>पुस्तक में भारत के विभिन्न राज्यों जैसे बिहार, पंजाब और बंगाल के व्यंजनों और त्योहारों का वर्णन है, जो देश की सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाते हैं। इसके अतिरिक्त, अध्याय भेदभाव और असमानता की चुनौतियों पर भी चर्चा करता है। रामजीवन की कहानी के जरिए लैंगिक भेदभाव (बेटा-बेटी में अंतर) को दर्शाया गया है।</p>
<p>साथ ही, डॉ. भीमराव अंबेडकर के जीवन संघर्षों के माध्यम से जातिगत भेदभाव के विरुद्ध न्याय और समानता की आवश्यकता पर बल दिया गया है। अंत में, भारतीय संविधान की प्रस्तावना और कविता के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि सभी मनुष्यों का रक्त एक है और हमें एक लोकतांत्रिक व समतावादी समाज की स्थापना के लिए मिल-जुल कर रहना चाहिए।</p>
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<h3>❤️ 2. ग्रामीण जीवन-यापन के स्वरूप</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1yQBQh--t-VWV1uQUIKiDiGDNw5q2GbOg" /></p>
<p>यह पुस्तक का अंश ग्रामीण बिहार के जीवन-यापन के विभिन्न स्वरूपों का विश्लेषण करता है। मुख्य रूप से बक्सर जिले के राजपुर और शुकुलपुरा गाँवों के उदाहरणों के माध्यम से समाज के विभिन्न किसान वर्गों—मध्यम, सीमांत, और बड़े किसान—तथा भूमिहीन कृषक मजदूरों की आर्थिक स्थितियों को दर्शाया गया है।</p>
<p>&#8216;ललन&#8217; जैसे मध्यम किसान के पास कुछ जमीन है और वह बैंक ऋण (KCC) पर निर्भर है, जबकि &#8216;कृपाशंकर&#8217; जैसे सीमांत किसान को साहूकारों से ऊँची ब्याज दर पर कर्ज लेना पड़ता है और मजबूरी में फसल जल्दी बेचनी पड़ती है। &#8216;प्रमोद&#8217; एक बड़े किसान का प्रतिनिधित्व करता है जिसके पास आधुनिक मशीनें हैं और वह बाजार भाव बढ़ने का इंतजार कर सकता है।</p>
<p>दूसरी ओर, &#8216;संतोष&#8217; जैसे भूमिहीन मजदूर आजीविका के लिए पूरी तरह दूसरों के खेतों या गैर-कृषि कार्यों जैसे ईंट-भट्ठों और शहरों में मजदूरी पर निर्भर हैं। पाठ में गैर-कृषि गतिविधियों जैसे हस्तशिल्प, पशुपालन, मछली पालन और छोटी दुकानों के महत्व को भी रेखांकित किया गया है।</p>
<p>यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था में ऋण चक्र, सिंचाई के साधन और आय की अनिश्चितता जैसी चुनौतियों पर प्रकाश डालता है।</p>
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<h3>❤️ 3. शहरी जीवन-यापन के स्वरूप</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1CFQJ4AdlGCl4lLzszkk2TrSACDf1gVYm" /></p>
<p>यह पुस्तक &#8216;शहरी जीवन-यापन के स्वरूप&#8217; मुख्य रूप से शहरों में रहने वाले लोगों की आजीविका और उनके कार्य करने के विभिन्न तरीकों पर आधारित है। इसमें बिहार की राजधानी पटना का उदाहरण देते हुए शहरी अर्थव्यवस्था के विभिन्न पहलुओं को समझाया गया है।</p>
<p>पुस्तक में फुटपाथ और पटरी पर सामान बेचने वाले स्वरोजगारियों, जैसे सब्जी विक्रेता, अखबार विक्रेता और मोची के दैनिक संघर्षों का वर्णन है। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों से शहर आकर रिक्शा चलाने वाले मजदूरों, जैसे श्यामनारायण की चुनौतियों पर प्रकाश डाला गया है, जिन्हें न काम की सुरक्षा मिलती है और न ही रहने की अच्छी सुविधा।</p>
<p>दूसरी ओर, यह पुस्तक बाजार की बड़ी दुकानों और शोरूम चलाने वाले स्थायी व्यापारियों की जीवनशैली को भी दर्शाती है, जो दूसरों को रोजगार प्रदान करते हैं। इसके अतिरिक्त, फैक्ट्री में काम करने वाले अनियमित मजदूरों और दफ्तरों या बैंकों में काम करने वाले स्थायी कर्मचारियों के बीच के अंतर को स्पष्ट किया गया है।</p>
<p>जहाँ स्थायी कर्मचारियों को भविष्य निधि, चिकित्सा सुविधा और पेंशन जैसे लाभ मिलते हैं, वहीं अनियमित मजदूरों के पास नौकरी की कोई गारंटी नहीं होती। अंत में, यह पुस्तक घरेलू कामगारों की भूमिका और शहरी जीवन के अंतर्संबंधों को खूबसूरती से उजागर करती है।</p>
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<h3>❤️ 4. लेन देन का बदलता स्वरूप</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1K_ktxCx8YrKVWMPvdWej_aZxo9HLMxni" /></p>
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<h3>❤️ 5. हमारी सरकार</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1I9Hen8svRy_wY9exmqizzvNeAOl3zdRC" /></p>
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<h3>❤️ 6. स्थानीय सरकार</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1b1jxqXA1c29l6vOKsLe8EDAe3z9IgQUh" /></p>
<p>यह पुस्तक बिहार की &#8216;समग्र शिक्षा&#8217; पहल के तहत स्थानीय स्वशासन की विस्तृत व्याख्या करती है। इसमें ग्रामीण और शहरी दोनों स्तरों पर प्रशासनिक व्यवस्थाओं को समझाया गया है।</p>
<p>ग्रामीण खंड में, यह ग्राम पंचायत, ग्राम सभा और मुखिया की भूमिका पर प्रकाश डालती है, साथ ही सार्वजनिक संपत्तियों के प्रबंधन और विकास कार्यों जैसे सड़क और पेयजल की चर्चा करती है। पुस्तक गाँव के प्रशासन में पुलिस थाने के कार्यों और &#8216;हलका कर्मचारी&#8217; (पटवारी) द्वारा भूमि अभिलेखों के रखरखाव के महत्व को भी स्पष्ट करती है।</p>
<p>एक महत्वपूर्ण हिस्सा 2005 के हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के माध्यम से महिलाओं के संपत्ति अधिकारों में आए बदलावों को रेखांकित करता है। शहरी प्रशासन के अंतर्गत, यह नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत की संरचना और उनके आय के स्रोतों का विवरण देती है, जिसमें पटना नगर निगम और सूरत के सफाई मॉडल का उदाहरण दिया गया है।</p>
<p>अंत में, यह विभिन्न सार्वजनिक सेवाओं और नागरिक कर्तव्यों जैसे रेलवे सुरक्षा के प्रति जागरूक करती है। यह पाठ्यपुस्तक छात्रों को लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण और नागरिक अधिकारों की व्यवहारिक समझ प्रदान करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।</p>
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<h3>❤️ 7. सड़क सुरक्षा उपाय</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1ljZk8W5bx5O6VRWTMNg1UMP7kBNCQ7oL" /></p>
<p>यह पुस्तक सड़क सुरक्षा के महत्वपूर्ण नियमों और उपायों पर केंद्रित है। इसमें यातायात संकेतों जैसे लाल, हरी और पीली बत्ती के अर्थों को विस्तार से समझाया गया है।</p>
<p>पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथ और जेब्रा क्रॉसिंग के सही उपयोग के निर्देश दिए गए हैं। पुस्तक में बच्चों को सड़क पर चलते समय सतर्क रहने, हमेशा फुटपाथ का उपयोग करने और सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है।</p>
<p>इसके अलावा, बस यात्रा के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों, जैसे कतार में चढ़ना, शरीर के अंग बाहर न निकालना और बस के रुकने पर ही उतरना, का उल्लेख है। रेलवे क्रॉसिंग के दो प्रकारों (मानव रहित और रक्षित) के बारे में जानकारी देते हुए सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।</p>
<p>अंत में, विभिन्न यातायात चिह्नों जैसे &#8216;प्रवेश निषेध&#8217;, &#8216;हार्न बजाना अनिवार्य&#8217; और &#8216;आगे स्कूल है&#8217; के माध्यम से सड़क अनुशासन सिखाया गया है। यह सामग्री छात्रों में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए अत्यंत उपयोगी है।</p>
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		<title>Bihar Board Class 6th History Book 2026 PDF Download (अतीत से वर्त्तमान)</title>
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		<dc:creator><![CDATA[bseb]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 Jul 2022 08:38:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Class 6th Books]]></category>
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<h2 style="text-align: center;"><span style="text-decoration: underline; color: #3366ff;"><strong>BSEB Class 6 History Textbook PDF Free Download</strong></span></h2>
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<h3>❤️ 1. हमारा अतीत</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1C_B1ro1LYdz5jnraXYi_u_X0F7EYxpKr" /></p>
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<h3>❤️ 2. क्या, कब कहाँ और कैसे</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1Waz__antk7avDRLrebe_dSosbJVzr_WI" /></p>
<p>यह पुस्तक का अंश भारतीय इतिहास के अध्ययन की शुरुआत और उसके महत्व पर प्रकाश डालता है। इसमें बताया गया है कि हम हजारों साल पहले की घटनाओं के बारे में पांडुलिपियों, अभिलेखों, सिक्कों और पुरातात्विक अवशेषों के माध्यम से जानकारी प्राप्त करते हैं।</p>
<p>लेखक ने काल निर्धारण की &#8216;रेडियो कार्बन (C-14)&#8217; पद्धति और तिथियों के अंतर (ई.पू. और ई.) को स्पष्ट किया है।</p>
<p>भारत की भौगोलिक संरचना का वर्णन करते हुए इसे चार मुख्य भागों में बांटा गया है, और बताया गया है कि कैसे हिमालय, नदियाँ और दर्रे मानव सभ्यता के विकास और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में सहायक रहे। उत्तर भारत में मगध जैसे शक्तिशाली साम्राज्यों का उदय और प्राचीन काल में खेती (गेहूं, जौ, चावल) व पशुपालन की शुरुआत का विवरण भी दिया गया है।</p>
<p>अंत में, &#8216;इंडिया&#8217;, &#8216;हिंदुस्तान&#8217; और &#8216;भारत&#8217; जैसे नामों की उत्पत्ति के पीछे के ऐतिहासिक और भाषाई कारणों को समझाया गया है। यह अध्याय अतीत को समझने के वैज्ञानिक और तर्कसंगत दृष्टिकोण को प्रस्तुत करता है।</p>
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<h3>❤️ 3. प्रारंभिक समाज</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=17Uswo_5NRqlF57ADjZs8kKM8xOZ50xlh" /></p>
<p>यह पुस्तक अध्याय &#8216;प्रारंभिक समाज&#8217; के माध्यम से मानव सभ्यता के शुरुआती इतिहास और विकास पर प्रकाश डालती है। इसमें बताया गया है कि लाखों वर्षों के क्रमिक विकास के बाद मनुष्य वर्तमान रूप में आया है। आरंभिक मानव शिकारी और खाद्य संग्राहक थे, जो 20-30 लोगों के समूहों में रहकर जंगली जानवरों का शिकार करते और कंद-मूल इकट्ठा करते थे।</p>
<p>उनका जीवन मुख्य रूप से पत्थरों पर निर्भर था, इसलिए इसे &#8216;पाषाण काल&#8217; कहा जाता है। वे गुफाओं में रहते थे, पत्थर के नुकीले औजारों का उपयोग करते थे और गुफा की दीवारों पर चित्र बनाकर व नाचकर अपना मनोरंजन करते थे। बिहार का &#8216;पैसरा&#8217; और मध्य प्रदेश का &#8216;भीमबेटका&#8217; इसके महत्वपूर्ण उदाहरण हैं।</p>
<p>पुस्तक में पाषाण काल को तीन चरणों—पुरापाषाण, मध्यपाषाण और नवपाषाण काल में विभाजित किया गया है। मध्यपाषाण काल में जलवायु परिवर्तन के कारण घास के मैदानों और अनाजों का विकास हुआ। अंततः, यह अध्याय छात्रों को यह समझने में मदद करता है कि कैसे हमारे पूर्वजों ने आग का आविष्कार किया और विपरीत परिस्थितियों में जीवित रहने के लिए सामूहिक जीवन की शुरुआत की।</p>
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<h3>❤️ 4. प्रथम कृषक एवं पशुपलान</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1XS5MUmGwUsQlLg3qhttkbM2A4qMrcisE" /></p>
<p>यह पाठ मानव इतिहास के उस महत्वपूर्ण काल का वर्णन करता है जब मनुष्य शिकारी और खाद्य संग्राहक से बदलकर कृषक और पशुपालक बन गया। लगभग 8000 से 10000 साल पहले ईरान और इराक की पहाड़ियों से खेती की शुरुआत हुई, जबकि भारत में यह 5-6 हजार साल पहले शुरू हुई। महिलाओं को पौधों का गहरा ज्ञान था, जिससे उन्होंने अनाज उगाना सीखा।</p>
<p>खेती के कारण मानव का जीवन स्थायी हो गया क्योंकि फसलों की देखभाल के लिए उन्हें एक स्थान पर रहना आवश्यक था, जिससे आरंभिक गाँवों का निर्माण हुआ। इसी समय मनुष्यों ने जानवरों को पालना भी शुरू किया। सबसे पहले कुत्ते, फिर भेड़, बकरी और गाय-बैल पाले गए, जिनसे उन्हें मांस, दूध और कृषि कार्यों में सहायता मिली।</p>
<p>नवपाषाण युग में पत्थर के औजार अधिक धारदार और चमकदार हो गए। पाठ में मेहरगढ़ (पाकिस्तान) और चिराँद (बिहार) जैसे प्रमुख पुरास्थलों का उल्लेख है, जहाँ से प्राचीन अनाज और हड्डियों के साक्ष्य मिले हैं। अंततः, इस युग ने मनुष्य को मिट्टी के बर्तन बनाने, बुनाई करने और एक सभ्य, स्थायी जीवन जीने की दिशा में अग्रसर किया।</p>
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<h3>❤️ 5. प्रारंभिक शहर : प्रथम नगरीकरण</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1Ya_V9IsT5Y7Uxq3gRp1FGJPcZkv8ZS2k" /></p>
<p>यह अध्याय &#8216;प्रांरभिक शहर: प्रथम नगरीकरण&#8217; हड़प्पा सभ्यता (सिंधु घाटी सभ्यता) के उद्भव, विकास और उसकी अद्वितीय विशेषताओं का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करता है। पुस्तक के अनुसार, हड़प्पा सभ्यता भारत की प्राचीनतम नगरीय सभ्यता है, जिसकी खोज 1921 में दयाराम साहनी ने की थी। यह सभ्यता अपनी उत्कृष्ट नगर नियोजन प्रणाली के लिए जानी जाती है, जहाँ सड़कें एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं और जल निकासी की सुव्यवस्थित व्यवस्था थी।</p>
<p>नगर दो भागों में विभाजित थे: ऊँचा &#8216;नगर दुर्ग&#8217; और &#8216;निचला नगर&#8217; । यहाँ के लोग कृषि, पशुपालन और व्यापार में निपुण थे। वे गेहूँ, जौ और मटर जैसी फसलें उगाते थे और दूर-दराज के क्षेत्रों जैसे मेसोपोटामिया से व्यापारिक संबंध रखते थे ।</p>
<p>मोहनजोदड़ो का &#8216;महास्नानागार&#8217; और लोथल का बंदरगाह इस सभ्यता की इंजीनियरिंग कुशलता के प्रमाण हैं। धार्मिक रूप से वे मातृदेवी और पशुपति महादेव की पूजा करते थे। लगभग 1700 ई.पू.</p>
<p>के आसपास बाढ़, जलवायु परिवर्तन या बाहरी आक्रमणों जैसे कारणों से इस महान सभ्यता का पतन शुरू हो गया, परंतु इसके कई सांस्कृतिक तत्व आज भी भारतीय समाज में विद्यमान हैं ।</p>
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<h3>❤️ 6. जीवान के विभिन्न आयाम</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1a6sW0G8tfxyPlJEibXg0Hqrc7xwtXqJ3" /></p>
<p>यह पुस्तक अध्याय प्राचीन भारत के &#8216;वैदिक काल&#8217; और &#8216;ताम्रपाषाण संस्कृति&#8217; का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करता है। इसमें वेदों (ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद) के महत्व और वैदिक समाज के दो प्रमुख कालखंडों—ऋग्वैदिक काल (1500-1000 ई.पू.) और उत्तरवैदिक काल (1000-600 ई.पू.) का वर्णन है। ऋग्वैदिक काल में आर्यों का जीवन कबीलाई था, जिनका मुख्य पेशा पशुपालन था और &#8216;गायों&#8217; को संपत्ति का प्रतीक माना जाता था।</p>
<p>समाज में &#8216;जन&#8217; और &#8216;राजन&#8217; की अवधारणा थी। उत्तरवैदिक काल में लोहे के प्रयोग से कृषि मुख्य पेशा बनी और छोटे कबीले &#8216;जनपदों&#8217; में बदल गए। इसी समय वर्ण व्यवस्था (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र) और जटिल यज्ञों का उदय हुआ।</p>
<p>पुस्तक में &#8216;गुरु-शिष्य परंपरा&#8217; और आरूणि की कहानी के माध्यम से प्राचीन शिक्षा पद्धति पर प्रकाश डाला गया है। साथ ही, महाराष्ट्र की ताम्रपाषाण कालीन बस्ती &#8216;इनामगाँव&#8217; का केस स्टडी दिया गया है, जो उस समय के आवास, कृषि और अंतिम संस्कार की विधियों को दर्शाता है। यह अध्याय साहित्यिक और पुरातात्विक स्रोतों के संगम से आर्यों के प्रसार और उनकी बदलती सामाजिक-आर्थिक स्थिति का विश्लेषण करता है।</p>
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<h3>❤️ 7. प्रारम्भिक राज्य</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1hR5C0fGL4pabyvMbViQcGTE5ipBo4cS9" /></p>
<p>यह पुस्तक &#8216;प्रारंभिक राज्य&#8217; के विकास और प्राचीन भारत के &#8216;महाजनपदों&#8217; के इतिहास पर प्रकाश डालती है। लगभग 3000 वर्ष पहले गंगा घाटी में लोहे के उपयोग से कृषि में वृद्धि हुई, जिससे लोगों का जीवन स्थायी हुआ और &#8216;जन&#8217; से &#8216;जनपद&#8217; बने।</p>
<p>करीब 2500 वर्ष पहले, 16 महाजनपद उभरे, जिनमें मगध, अंग, और वज्जि प्रमुख थे। मगध के उत्थान में लोहे की खानों, उपजाऊ भूमि और बिम्बिसार व अजातशत्रु जैसे योग्य शासकों का बड़ा हाथ था।</p>
<p>यहाँ राजतंत्र के साथ-साथ &#8216;वज्जि&#8217; जैसे गणराज्य भी थे, जहाँ निर्णय सभाओं द्वारा लिए जाते थे। राजा अब नियमित रूप से कर वसूलने लगे और नगरों की सुरक्षा हेतु किलाबंदी की गई।</p>
<p>इसी काल में द्वितीय नगरीकरण की शुरुआत हुई, जिसमें पाटलिपुत्र, वैशाली और वाराणसी जैसे व्यापारिक व प्रशासनिक केंद्र विकसित हुए। पुस्तक में सामाजिक संरचना, कर व्यवस्था, और बुद्ध के उपदेशों के संदर्भ में गणराज्यों के नियमों का भी विस्तार से वर्णन किया गया है।</p>
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<h3>❤️ 8. नए प्रश्न : नवीन विचार</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1zf_28z7NO-FhZEjjR-HgdNZ7GZGhG4CY" /></p>
<p>यह पुस्तक का अध्याय छठी शताब्दी ईसा पूर्व के भारत में उभरे नए धार्मिक और दार्शनिक विचारों का विश्लेषण करता है। उत्तर वैदिक काल में जटिल होती वर्ण व्यवस्था, खर्चीले कर्मकांड और पशु बलि के कारण समाज में असंतोष बढ़ रहा था। ऐसी स्थिति में उपनिषदों का उदय हुआ, जिनमें आत्मा, परमात्मा और ब्रह्म जैसे गहरे विषयों पर चर्चा की गई।</p>
<p>नचिकेता और यमराज के संवाद के माध्यम से मृत्यु के रहस्यों को समझाने का प्रयास किया गया है।इसी काल में गौतम बुद्ध ने बौद्ध धर्म की स्थापना की। उन्होंने दुखों का कारण तृष्णा (इच्छा) को बताया और इससे मुक्ति के लिए &#8216;आष्टांगिक मार्ग&#8217; या मध्यम मार्ग का सुझाव दिया। बुद्ध ने जाति-पाति के भेदभाव को नकारा और दया, अहिंसा तथा सदाचार पर बल दिया।</p>
<p>उनके उपदेशों ने न केवल भारत बल्कि विदेशों में भी लोगों को प्रभावित किया।दूसरी ओर, वर्द्धमान महावीर ने जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर के रूप में अहिंसा, सत्य और अपरिग्रह की शिक्षा दी। उन्होंने &#8216;त्रि-रत्न&#8217; (सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र) के मार्ग पर चलकर मोक्ष प्राप्ति की बात कही। जैन धर्म में जीवों के प्रति करुणा और त्याग को विशेष महत्व दिया गया है।</p>
<p>कुल मिलाकर, यह अध्याय बुद्ध और महावीर की शिक्षाओं के माध्यम से एक ऐसे सरल और समावेशी समाज की कल्पना प्रस्तुत करता है जहाँ कर्मकांडों के स्थान पर नैतिकता और मानवता सर्वोपरि है।</p>
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<h3>❤️ 9. प्रथम साम्राज्य</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1lQoFqaQgX1s_YK4PCVvOAlIkh_lfKlXo" /></p>
<p>यह अध्याय मगध साम्राज्य के महान सम्राट अशोक के जीवन और शासन पर केंद्रित है। अशोक ने 273 ई.पू. में सत्ता संभाली और उनकी राजधानी पाटलिपुत्र थी।</p>
<p>उनके दादा चंद्रगुप्त मौर्य ने इस विशाल साम्राज्य की नींव रखी थी। अध्याय में मौर्यकालीन प्रशासन का विस्तृत वर्णन है, जिसमें अमात्य, पुरोहित और राजस्व संग्रहकर्ताओं (समाहर्ता) की भूमिका प्रमुख थी। साम्राज्य को प्रांतों और जिलों में विभाजित किया गया था, जहाँ ग्रामिक और स्थानिक प्रशासनिक व्यवस्था देखते थे।</p>
<p>अशोक के जीवन का सबसे निर्णायक मोड़ कलिंग युद्ध था। युद्ध की विभीषिका और भारी जनहानि देखकर उनका हृदय परिवर्तन हुआ और उन्होंने युद्ध का परित्याग कर &#8216;धम्म&#8217; का मार्ग अपनाया। उनके धम्म में किसी देवी-देवता की पूजा या यज्ञ के स्थान पर बड़ों का आदर, अहिंसा, जीवों पर दया और सभी धर्मों का सम्मान करने जैसे मानवीय मूल्य शामिल थे।</p>
<p>उन्होंने प्रजा के कल्याण के लिए चिकित्सालय खुलवाए, सड़कें बनवाईं और कुएँ खुदवाए। उनके संदेश ब्राह्मी लिपि में शिलाओं और स्तंभों पर अंकित हैं। सारनाथ का सिंह स्तंभ, जिसे भारत ने राष्ट्रीय चिह्न के रूप में अपनाया है, उनकी महान विरासत का प्रतीक है।</p>
<p>अंततः, यह पाठ अशोक को एक विजेता से कहीं अधिक एक लोक-कल्याणकारी और शांतिप्रिय शासक के रूप में प्रस्तुत करता है।</p>
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<h3>❤️ 10. शहरी एवं ग्राम्य जीवन</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1xsMUOZz6iKETJ2CRSyqEKy9TjTNgoR6Q" /></p>
<p>यह पुस्तक अध्याय मौर्योत्तर कालीन भारत (लगभग 200 ई.पू. से 300 ई.) में कृषि, व्यापार और शहरी जीवन के विकास पर केंद्रित है। इसमें बताया गया है कि लोहे के औजारों के बढ़ते प्रयोग ने खेती में क्रांतिकारी बदलाव लाए, जिससे उत्पादन बढ़ा और साम्राज्यों में समृद्धि आई।</p>
<p>सिंचाई के लिए सुदर्शन झील जैसे महत्वपूर्ण निर्माणों का उल्लेख मिलता है, जिसे चंद्रगुप्त मौर्य ने बनवाया और बाद में रुद्रदामन ने मरम्मत कराई। व्यापार के क्षेत्र में &#8216;रेशम मार्ग&#8217; और रोमन साम्राज्य के साथ होने वाले विनिमय का विशेष महत्व था। दक्षिण भारत के संगम काल के दौरान चोल, पांड्य और चेर राजाओं के संरक्षण में पुहार जैसे बंदरगाह प्रमुख व्यापारिक केंद्र बने।</p>
<p>समाज में &#8216;ग्रामभोजक&#8217; (मुखिया) और &#8216;गृहपति&#8217; (स्वतंत्र किसान) जैसे वर्गों का अस्तित्व था, जबकि शिल्पकारों ने अपने संगठन या &#8216;श्रेणी&#8217; बना रखे थे, जो बैंक की तरह भी कार्य करते थे। पाटलिपुत्र जैसे शहर प्रशासनिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के केंद्र थे। जातक कथाओं के माध्यम से यह भी दर्शाया गया है कि उस समय बुद्धिमत्ता और व्यापारिक कुशलता से निर्धन व्यक्ति भी धनी बन सकता था।</p>
<p>कुल मिलाकर, यह पाठ प्राचीन भारतीय आर्थिक और सामाजिक संरचना का विस्तृत विवरण प्रदान करता है।</p>
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<h3>❤️ 11. सुदूर प्रदेशों से संपर्क</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=16mDVWuA_lfVTRobapl6-fG15YoI9PjvW" /></p>
<p>यह अध्याय मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद भारत के विदेशी संबंधों और विभिन्न शासक वंशों के उदय का विस्तृत विश्लेषण करता है। मौर्यों के बाद मगध में शुंग वंश की स्थापना पुष्यमित्र शुंग द्वारा की गई। इसके उपरांत, भारत में इंडो-ग्रीक, शक और कुषाण जैसे विदेशी आक्रमणकारियों का आगमन हुआ।</p>
<p>यूनानी शासक मिनान्डर (मिलिन्द) ने बौद्ध धर्म अपनाया, जिससे भारत में विज्ञान और कला के नए आयाम खुले। कुषाण वंश के महान राजा कनिष्क ने एक विशाल साम्राज्य स्थापित किया और बौद्ध धर्म की महायान शाखा को राजकीय संरक्षण दिया। कनिष्क के काल में &#8216;रेशम मार्ग&#8217; पर नियंत्रण के कारण भारत का व्यापार यूरोप और पश्चिम एशिया तक फैल गया।</p>
<p>इस काल में कला के क्षेत्र में गांधार, मथुरा और अमरावती शैलियों का विकास हुआ, जिनमें भगवान बुद्ध की भव्य मूर्तियाँ बनाई गईं। व्यापार और भिक्षुओं के माध्यम से बौद्ध धर्म का प्रसार श्रीलंका, म्यांमार, मध्य एशिया और चीन जैसे सुदूर क्षेत्रों में हुआ। अंततः, यह पाठ दर्शाता है कि कैसे विदेशी शासक भारतीय संस्कृति में घुल-मिल गए और भारतीय सभ्यता का प्रभाव विश्व स्तर पर विस्तृत हुआ।</p>
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<h3>❤️ 12. नए साम्राज्य एवं राज्य</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=15Qui5nnSxXKKa7jW6lR-Qf846lhIJd8L" /></p>
<p>यह पुस्तक अध्याय चौथी शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर सातवीं शताब्दी ईस्वी तक के भारतीय इतिहास के प्रमुख साम्राज्यों और राज्यों का विस्तृत वर्णन प्रस्तुत करता है। मुख्य रूप से इसमें गुप्त वंश के उदय और विस्तार पर प्रकाश डाला गया है, जिसमें चंद्रगुप्त प्रथम, समुद्रगुप्त और चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) जैसे प्रतापी राजाओं की उपलब्धियों, सैन्य अभियानों और प्रशासनिक नीतियों की चर्चा है।</p>
<p>समुद्रगुप्त की &#8216;प्रयाग प्रशस्ति&#8217; और चंद्रगुप्त द्वितीय के समय के सांस्कृतिक स्वर्ण युग का विशेष उल्लेख है। इसके अतिरिक्त, पुस्तक में पुष्यभूति वंश के शासक हर्षवर्धन के शासनकाल और उनके समय के सामाजिक-धार्मिक जीवन, विशेषकर चीनी यात्री ह्वेनसांग के वृत्तांतों का वर्णन है।</p>
<p>दक्षिण भारत के प्रमुख राजवंशों, जैसे वातापी के चालुक्य (पुलकेशिन द्वितीय) और काँची के पल्लवों की राजनीतिक और सांस्कृतिक उपलब्धियों, विशेषकर उनकी अद्वितीय मंदिर वास्तुकला (द्रविड़ शैली) को भी रेखांकित किया गया है। अंत में, प्राचीन भारत के प्रसिद्ध शिक्षा केंद्र नालंदा महाविहार की स्थापना, इसकी कार्यप्रणाली और इसके गौरवशाली इतिहास का वर्णन किया गया है, जो तत्कालीन भारत की शैक्षणिक समृद्धि को दर्शाता है।</p>
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<h3>❤️ 13. संस्कृति और विज्ञान</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1_lmhjwVHFSHA5Apwf_OQYbC7d9fLRlV3" /></p>
<p>यह पुस्तक &#8216;संस्कृति और विज्ञान&#8217; (अध्याय-13) चौथी से सातवीं सदी के बीच भारत की सांस्कृतिक और वैज्ञानिक प्रगति का विस्तृत वर्णन करती है। इस काल को &#8216;महाकाव्य काल&#8217; भी कहा जाता है क्योंकि इसी दौरान रामायण, महाभारत और पुराणों को अंतिम रूप दिया गया। साहित्य के क्षेत्र में कालिदास की रचनाएँ जैसे &#8216;अभिज्ञान शाकुन्तलम्&#8217; और &#8216;मेघदूतम्&#8217; प्रमुख हैं।</p>
<p>इसके अतिरिक्त, शूद्रक की &#8216;मृच्छकटिकम्&#8217; और विशाखादत्त के नाटकों ने तत्कालीन समाज का सजीव चित्रण किया है। दक्षिण भारत में संगम साहित्य, विशेषकर &#8216;सिलप्पदिकारम्&#8217; की रचना हुई। स्थापत्य कला में देवगढ़ का दशावतार मंदिर और अजंता-बाघ की गुफाएँ इस युग की कलात्मक श्रेष्ठता को दर्शाती हैं।</p>
<p>विज्ञान के क्षेत्र में आर्यभट्ट ने शून्य का उपयोग और पृथ्वी के गोल होने की पुष्टि की। चिकित्सा में धनवन्तरी और रसायन विज्ञान में नागार्जुन का योगदान अतुलनीय रहा। मेहरौली का लौह स्तंभ उस समय की उन्नत धातु विज्ञान तकनीक का साक्ष्य है, जिस पर आज तक जंग नहीं लगा है।</p>
<p>यह पुस्तक प्राचीन भारत के स्वर्ण युग की कला, साहित्य और विज्ञान के सामंजस्यपूर्ण विकास को रेखांकित करती है।</p>
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<h3>❤️ 14. हमारे इतिहासकार</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1Owew3UbLiOLVoGBW6ffezVADuuIkmV-o" /></p>
<p>यह अध्याय बिहार के दो महान इतिहासकारों, काशी प्रसाद जयसवाल और डॉ. अनंत सदाशिव अल्तेकर के जीवन और भारतीय इतिहास में उनके योगदान पर प्रकाश डालता है। के.</p>
<p>पी. जयसवाल, जो पेशे से वकील थे, ने अपनी पुस्तक &#8216;हिन्दू पॉलिटी&#8217; के माध्यम से यह सिद्ध किया कि प्राचीन भारत में निरंकुश शासन नहीं बल्कि संवैधानिक राजतंत्र और प्रजातांत्रिक व्यवस्था मौजूद थी। उन्होंने खारवेल के अभिलेखों जैसे विवादों को सुलझाया और पटना संग्रहालय की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।</p>
<p>दूसरी ओर, डॉ. ए. एस.</p>
<p>अल्तेकर एक प्रख्यात पुरातत्वविद् और मुद्राशास्त्री थे। उन्होंने वैशाली में खुदाई कर भगवान बुद्ध के शरीरावशेष स्तूप को खोज निकाला और पटना विश्वविद्यालय में प्राचीन भारतीय इतिहास विभाग के संस्थापक अध्यक्ष रहे। अल्तेकर ने &#8216;प्राचीन भारतीय शासन पद्धति&#8217; जैसी महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखीं और वे महिलाओं एवं शूद्रों के वेदाध्ययन के अधिकार के प्रबल समर्थक थे।</p>
<p>दोनों ही विद्वान देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत थे, जहाँ जयसवाल के कार्यों में राष्ट्रीय स्वाभिमान झलकता है, वहीं अल्तेकर ने स्वदेशी के संकल्प के कारण अपनी रचनाएँ भारत में ही प्रकाशित करवाईं। इन दोनों विद्वानों ने साक्ष्यों और वैज्ञानिक दृष्टि के आधार पर भारतीय इतिहास लेखन को एक नई दिशा प्रदान की।</p>
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		<title>Bihar Board Class 6th Geography Book 2026 PDF Download</title>
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		<pubDate>Sun, 24 Jul 2022 08:37:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Class 6th Books]]></category>
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<h3>❤️ 1. हमारा सौरमंडल</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1xr3-aRkrZhjj4zk_ByRX5UnT1b8e_eSk" /></p>
<p>यह पुस्तक सौरमंडल की संरचना और उसके विभिन्न घटकों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करती है। इसमें सूर्य को सौर परिवार का मुखिया बताया गया है, जो आकार में पृथ्वी से बहुत बड़ा है और सौर परिवार के सभी सदस्य इसके प्रकाश से प्रकाशित होते हैं। पुस्तक में आठ मुख्य ग्रहों—बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण और वरुण—का परिचय दिया गया है।</p>
<p>पृथ्वी को एक अनूठा ग्रह बताया गया है जहाँ जल और जीवन मौजूद है, और अधिक जल की उपस्थिति के कारण इसे &#8216;नीला ग्रह&#8217; भी कहा जाता है। चंद्रमा को पृथ्वी का एकमात्र उपग्रह बताया गया है। इसके अतिरिक्त, पुस्तक में उपग्रहों, क्षुद्रग्रहों, उल्कापिंडों, आकाशगंगा और नक्षत्रों के बारे में भी महत्वपूर्ण वैज्ञानिक जानकारी दी गई है।</p>
<p>ग्रहों की गति, उनके घूमने की दिशा और उपग्रहों की संख्या जैसे तथ्यों को तालिकाओं के माध्यम से समझाया गया है। अंत में, यह संदेश दिया गया है कि खगोलीय घटनाओं को अंधविश्वास के बजाय वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझना चाहिए। यह पुस्तक विद्यार्थियों के लिए खगोल विज्ञान की बुनियादी समझ विकसित करने हेतु एक सरल और प्रभावी माध्यम है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ 2. पृथ्वी एवं उसकी गतियाँ</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1RrZU-UuRfcJopGwAIR58ib1_8LMeM8XT" /></p>
<p>यह अध्याय पृथ्वी की विभिन्न गतियों और उनके प्रभावों का विस्तृत वर्णन करता है। पृथ्वी दो प्रकार की गतियाँ करती है: घूर्णन (दैनिक गति) और परिभ्रमण (वार्षिक गति)।</p>
<p>पृथ्वी अपने काल्पनिक अक्ष पर 23½° झुकी हुई है और पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है। घूर्णन गति के कारण दिन और रात होते हैं, जबकि सूर्य के चारों ओर परिभ्रमण करने और अक्षीय झुकाव के कारण ऋतुओं में परिवर्तन होता है।</p>
<p>अध्याय में महत्वपूर्ण तिथियों जैसे 21 जून (सबसे बड़ा दिन), 22 दिसंबर, 21 मार्च और 23 सितंबर (समदिवारात्रि) की व्याख्या की गई है। पृथ्वी की गोलाकार सतह और सूर्य की किरणों के झुकाव के आधार पर इसे तीन प्रमुख ताप कटिबंधों में विभाजित किया गया है: उष्ण कटिबंध (जहाँ सीधी किरणें पड़ती हैं और अत्यधिक गर्मी होती है), शीतोष्ण कटिबंध (जहाँ मध्यम तापमान रहता है), और शीत कटिबंध (ध्रुवीय क्षेत्र जहाँ अत्यधिक तिरछी किरणों के कारण वर्षभर बर्फ जमी रहती है)।</p>
<p>ध्रुवों पर छह महीने का दिन और छह महीने की रात होने का वैज्ञानिक कारण भी स्पष्ट किया गया है। यह पाठ ग्लोब और चित्रों के माध्यम से भौगोलिक अवधारणाओं को सरल तरीके से समझाता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ 3. पृथ्वी के परिमंडल</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1kierKWRuZPbGYRb1aLzs9MnhVuuB9xsm" /></p>
<p>यह पुस्तक का अंश &#8216;पृथ्वी के परिमंडल&#8217; विषय पर केंद्रित है, जो पृथ्वी को जीवन के लिए एकमात्र ज्ञात और अद्वितीय ग्रह के रूप में प्रस्तुत करता है। इसमें पृथ्वी के तीन मुख्य मंडलों—जलमंडल, स्थलमंडल और वायुमंडल—का विस्तृत वर्णन किया गया है।</p>
<p>जलमंडल पृथ्वी के लगभग 71 प्रतिशत भाग को कवर करता है, जिसमें महासागर, नदियाँ और झीलें शामिल हैं; अंतरिक्ष से इसके नीले दिखाई देने के कारण पृथ्वी को &#8216;नीला ग्रह&#8217; भी कहा जाता है। स्थलमंडल पृथ्वी की वह ऊपरी ठोस परत है जहाँ मिट्टी, पहाड़ और मैदान पाए जाते हैं और जहाँ मनुष्य निवास व कृषि करता है।</p>
<p>वायुमंडल पृथ्वी के चारों ओर हवा का घेरा है, जिसमें ऑक्सीजन और नाइट्रोजन जैसी महत्वपूर्ण गैसें और विभिन्न परतें जैसे क्षोभमंडल और समतापमंडल शामिल हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जहाँ ये तीनों मंडल आपस में मिलते हैं, उसे &#8216;जैवमंडल&#8217; कहा जाता है, जो जीवन के पनपने के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ प्रदान करता है।</p>
<p>पाठ में जल संधि और स्थल संधि जैसे भौगोलिक शब्दों को भी समझाया गया है और यह निष्कर्ष निकाला गया है कि जीवन के लिए हवा, पानी और भोजन की उपलब्धता अनिवार्य है।</p>
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<h3>❤️ 4. पृथ्वी के प्रमुख स्थल रूप</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1ESXQL1BMywn4MIoPoOTSKuLIh7B078ZN" /></p>
<p>यह पुस्तक अध्याय &#8216;पृथ्वी के प्रमुख स्थल रूप&#8217; में विभिन्न भौगोलिक संरचनाओं जैसे पर्वत, पठार और मैदान का विस्तार से वर्णन करती है। कहानी की शुरुआत बच्चों की एक रेल यात्रा से होती है, जहाँ वे बिहार के मैदानी इलाकों से होकर गुजरते हैं और अपने-अपने क्षेत्रों की भौगोलिक विविधताओं पर चर्चा करते हैं।</p>
<p>पुस्तक मैदानों को कृषि के लिए आदर्श और घनी आबादी वाला क्षेत्र बताती है, जहाँ धान और गेहूं जैसी फसलें उगाई जाती हैं। पठारों को ऊँची और सपाट भूमि के रूप में परिभाषित किया गया है, जो खनिजों के भंडार होते हैं, जैसे छोटा नागपुर का पठार।</p>
<p>पर्वतों के खंड में हिमालय और अरावली जैसे उदाहरणों के साथ वलित, भ्रंशोत्थ और ज्वालामुखी पर्वतों के प्रकार समझाए गए हैं। अंत में, लेखिका बढ़ती जनसंख्या और औद्योगिकीकरण के कारण इन प्राकृतिक स्थलों पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों, जैसे वनों की कटाई, प्रदूषण और गिरते भूजल स्तर पर चिंता व्यक्त करती हैं।</p>
<p>यह अध्याय विद्यार्थियों को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और पर्यावरण के प्रति सचेत रहने का संदेश देता है।</p>
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<h3>❤️ 5. दिशाएँ</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1K3HtfVZzZm5flDnkTtvZrhKbwgfVF6Hn" /></p>
<p>यह पुस्तक का अंश &#8216;दिशाएँ&#8217; नामक अध्याय से संबंधित है, जो बच्चों को भौगोलिक दिशाओं का ज्ञान सरल और रोचक तरीके से कराता है। कहानी की शुरुआत रोहित के पिता द्वारा अपने मित्र को घर का रास्ता समझाने से होती है, जिसमें वे उत्तर, दक्षिण, पूरब और पश्चिम जैसे शब्दों का उपयोग करते हैं।</p>
<p>रोहित की जिज्ञासा को शांत करने के लिए उसके पिता एक रेखाचित्र बनाते हैं। अगले दिन, शिक्षक विद्यालय में प्रायोगिक गतिविधि के माध्यम से बच्चों को सूर्य की स्थिति और अपने शरीर के अंगों (दायां-बायां हाथ) के सापेक्ष दिशाओं को पहचानना सिखाते हैं।</p>
<p>पाठ में मुख्य चार दिशाओं के साथ-साथ चार उप-दिशाओं (जैसे उत्तर-पूर्व, दक्षिण-पश्चिम आदि) और आकाश-पाताल सहित कुल दस दिशाओं का वर्णन है। अंत में, मानचित्र के ऊपरी हिस्से को उत्तर और निचले हिस्से को दक्षिण मानने की विधि समझाई गई है।</p>
<p>इसमें भारत की भौगोलिक स्थिति—उत्तर में हिमालय और दक्षिण में हिन्द महासागर—का भी उल्लेख है। यह अध्याय व्यावहारिक गतिविधियों और अभ्यासों के माध्यम से विद्यार्थियों में स्थानिक समझ विकसित करने पर केंद्रित है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ 6. पृथ्वी और ग्लोब</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1j-RVLq75SgyaWoAjYzWZckyzWACV0tY3" /></p>
<p>यह पुस्तक का अंश &#8216;पृथ्वी और ग्लोब&#8217; विषय पर आधारित है, जो पृथ्वी की संरचना, मानचित्र और समय निर्धारण की प्रणालियों को सरल भाषा में समझाता है। इसमें बताया गया है कि पृथ्वी गोल है और क्षितिज वह स्थान है जहाँ धरती और आकाश मिलते हुए प्रतीत होते हैं।</p>
<p>ग्लोब को पृथ्वी के एक छोटे मानव-निर्मित मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो इसके विशाल आकार को समझने में मदद करता है। पाठ में विश्व के सात महाद्वीपों और चार महासागरों का परिचय दिया गया है।</p>
<p>मुख्य रूप से, यह अक्षांश और देशांतर रेखाओं के महत्व को रेखांकित करता है। अक्षांश रेखाएँ तापमान और कटिबंधों (उष्ण, समशीतोष्ण और शीत) को निर्धारित करती हैं, जबकि देशांतर रेखाएँ समय और तिथि निर्धारण में सहायक होती हैं।</p>
<p>सूर्य को एक देशांतर से दूसरे तक पहुँचने में 4 मिनट का समय लगता है, जिससे स्थानीय समय में अंतर आता है। इसके अतिरिक्त, पाठ में कर्क रेखा, मकर रेखा, विषुवत रेखा और अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा जैसी महत्वपूर्ण काल्पनिक रेखाओं की व्याख्या की गई है, जो भौगोलिक स्थिति और वैश्विक समय प्रणाली को समझने के लिए अनिवार्य हैं।</p>
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<h3>❤️ 7. मानचित्र अध्ययन</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1WE-2vmdCPC1S0od75F-79zy8vGtFlK-O" /></p>
<p>यह अध्याय मानचित्र और चित्र के बीच के अंतर को स्पष्ट करता है। इसमें बताया गया है कि चित्र किसी स्थान का वैसा दृश्य है जैसा वह किनारे से दिखता है, जबकि मानचित्र उसे ऊपर से देखने जैसा होता है जिसमें मापक (स्केल) का उपयोग किया जाता है।</p>
<p>मानचित्र निर्माण के लिए तीन महत्वपूर्ण तत्व हैं: संकेतों का उपयोग, मापक का उपयोग और दिशाओं का निर्धारण। मापक के माध्यम से जमीन की वास्तविक दूरी को कागज पर अनुपात में छोटा करके दिखाया जाता है।</p>
<p>दिशाओं के लिए उत्तर दिशा हमेशा ऊपर की ओर होती है। मानचित्र के मुख्य रूप से तीन प्रकार बताए गए हैं: भौतिक (पर्वत, मैदान), राजनीतिक (सीमाएं, शहर) और थिमैटिक (जलवायु, जनसंख्या)।</p>
<p>इसके अतिरिक्त, मानचित्र में विभिन्न रंगों और रूढ़ चिह्नों का उपयोग किया जाता है, जैसे जलाशयों के लिए नीला, पर्वतों के लिए भूरा और मैदानों के लिए हरा रंग। अध्याय छात्रों को स्कूल या गाँव का नजरी नक्शा बनाने के लिए प्रोत्साहित करता है और मापक के महत्व को विस्तार से समझाता है ताकि बड़े भौगोलिक क्षेत्रों को कागज पर दर्शाया जा सके।</p>
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<h3>❤️ 8. हमारा राज्य बिहार</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=10N_NGTKUpSxpGyJkYqn9dTUdjp72OAwU" /></p>
<p>यह पाठ बिहार राज्य की भौगोलिक, प्रशासनिक और सांस्कृतिक विशेषताओं का विस्तृत वर्णन करता है। बिहार भारत के पूर्वी भाग में स्थित एक महत्वपूर्ण राज्य है, जिसकी सीमाएँ नेपाल, पश्चिम बंगाल, झारखंड और उत्तर प्रदेश से मिलती हैं। प्रशासनिक सुविधा के लिए इसे 9 प्रमंडलों और 38 जिलों में विभाजित किया गया है।</p>
<p>यहाँ की जलवायु मानसूनी है, जिसमें ग्रीष्म, वर्षा और शीत ऋतुएँ मुख्य हैं। बिहार की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है, जहाँ धान प्रमुख खाद्यान्न फसल है। उत्तर बिहार में बाढ़ एक गंभीर समस्या है, विशेषकर कोसी और गंडक जैसी नदियों के कारण, जिससे लोगों को &#8216;दोहरी जिंदगी&#8217; जीनी पड़ती है।</p>
<p>इसके विपरीत, दक्षिण बिहार का टाल क्षेत्र रबी फसलों, जैसे दलहन और गेहूँ के लिए प्रसिद्ध है। पाठ में वैशाली और समस्तीपुर के &#8216;सरैसा क्षेत्र&#8217; में तंबाकू उत्पादन तथा गोपालगंज और चंपारण में गन्ना खेती व चीनी मिलों के महत्व को भी रेखांकित किया गया है। यहाँ वाल्मीकिनगर और भीम बाँध जैसे प्रसिद्ध वन्यजीव अभ्यारण्य हैं।</p>
<p>2011 की जनगणना के अनुसार, बिहार की जनसंख्या 10 करोड़ से अधिक है, जिसके कारण वनों की कटाई और मिट्टी की उर्वरता में कमी जैसी चुनौतियाँ उत्पन्न हो रही हैं।</p>
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<h3>❤️ 9. बिहार दर्शन &#8211; 1</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1GM1qBDbvn6U_ZUnM84QxqbEhvySDvdZZ" /></p>
<p>यह अध्याय कक्षा 6 के छात्रों की एक शैक्षिक यात्रा का वर्णन करता है, जिसमें वे बिहार के प्रमुख ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों का भ्रमण करते हैं। यात्रा की शुरुआत बोधगया से होती है, जहाँ छात्र विश्व धरोहर महाबोधि मंदिर और उस बोधिवृक्ष को देखते हैं जिसके नीचे गौतम बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था। इसके बाद, वे गया के विष्णुपद मंदिर जाते हैं, जिसे रानी अहिल्याबाई ने बनवाया था और जो पितृपक्ष मेले के लिए प्रसिद्ध है।</p>
<p>यात्रा का अगला पड़ाव राजगीर है, जो पहाड़ियों से घिरा है और अपने गर्म जलकुंडों, मनियारमठ और शांति स्तूप के लिए जाना जाता है। यहाँ छात्र रज्जू मार्ग का आनंद लेते हैं। तत्पश्चात, वे नालंदा विश्वविद्यालय के खंडहरों को देखते हैं, जो प्राचीन काल में ज्ञान-विज्ञान का एक अंतरराष्ट्रीय केंद्र था।</p>
<p>अंत में, छात्र पावापुरी स्थित जलमंदिर पहुँचते हैं, जहाँ भगवान महावीर ने निर्वाण प्राप्त किया था। यह अध्याय छात्रों को बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, स्थापत्य कला और गौरवशाली इतिहास से परिचित कराता है। समय की कमी के कारण वे नवादा के प्रसिद्ध ककोलत जलप्रपात नहीं जा पाते, परंतु पूरी यात्रा ज्ञानवर्धक और उत्साहपूर्ण रहती है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ 10. बिहार दर्शन 2</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1UKwa1MHSt4bHVzfRq2hQykvtYMkGmZnr" /></p>
<p>यह अध्याय कक्षा 6 के विद्यार्थियों के लिए बिहार के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और दर्शनीय स्थलों की एक शैक्षिक यात्रा का विवरण प्रस्तुत करता है। कहानी की शुरुआत शिक्षक द्वारा छात्रों को अगले रविवार सासाराम और पटना के भ्रमण पर ले जाने की घोषणा से होती है। यात्रा का पहला पड़ाव सासाराम है, जहाँ बच्चे अफगान शासक शेरशाह सूरी का मकबरा देखते हैं।</p>
<p>यह अष्टकोणीय मकबरा लाल पत्थरों से बना है और एक विशाल तालाब के बीचों-बीच स्थित है। इसके बाद छात्र पटना पहुँचते हैं और प्रसिद्ध &#8216;गोलघर&#8217; का भ्रमण करते हैं। इसका निर्माण 1786 में अनाज भंडारण के लिए कैप्टन जान गॉलस्टीन द्वारा कराया गया था।</p>
<p>समूह पटना संग्रहालय भी जाता है, जहाँ वे 5000 वर्ष पुराने पत्थरनुमा वृक्ष के जीवाश्म, मौर्यकालीन यक्षिणी की मूर्ति और राजेंद्र कक्ष देखते हैं। यात्रा का अंतिम पड़ाव पटना सिटी स्थित &#8216;तख्त श्री हरमंदिर साहिब&#8217; है, जो सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह जी का भव्य जन्मस्थान है। यहाँ बच्चे लंगर और गुरुवाणी का अनुभव करते हैं।</p>
<p>यह पाठ न केवल बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचय कराता है, बल्कि विद्यार्थियों में इतिहास और पुरातत्व के प्रति रुचि भी जागृत करता है।</p>
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		<title>Bihar Board Class 6th Maths Book 2026 PDF Download</title>
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		<dc:creator><![CDATA[bseb]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 Jul 2022 08:36:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Class 6th Books]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>The Bihar Board Class 6th Maths Book 2026 PDF Download page is created for students who want to download the latest Bihar Board Class 6 Mathematics textbook PDF in an easy and reliable manner. This page provides the officially prescribed Class 6 Maths book prepared according to the latest Bihar Board (BSEB) syllabus for the [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>The <strong>Bihar Board Class 6th Maths Book 2026 PDF Download</strong> page is created for students who want to download the latest <strong>Bihar Board Class 6 Mathematics textbook PDF</strong> in an easy and reliable manner. This page provides the officially prescribed <strong>Class 6 Maths book</strong> prepared according to the latest Bihar Board (BSEB) syllabus for the 2026 academic session. The textbook helps students build a strong base in mathematics by clearly explaining fundamental concepts.</p>
<table>
<thead>
<tr>
<th>Details</th>
<th>Information</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td>Board</td>
<td>Bihar School Examination Board (BSEB)</td>
</tr>
<tr>
<td>Class</td>
<td>6th</td>
</tr>
<tr>
<td>Subject</td>
<td>Mathematics</td>
</tr>
<tr>
<td>Book Name</td>
<td>Bihar Board Class 6 Mathematics Book</td>
</tr>
<tr>
<td>Medium</td>
<td>Hindi</td>
</tr>
<tr>
<td>Academic Year</td>
<td>2026</td>
</tr>
<tr>
<td>Syllabus</td>
<td>Latest BSEB Syllabus</td>
</tr>
<tr>
<td>Format</td>
<td>PDF</td>
</tr>
<tr>
<td>Content Type</td>
<td>Textbook Only</td>
</tr>
<tr>
<td>Download Type</td>
<td>Free PDF Download</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p>Here, students can access the <strong>Bihar Board Class 6 Maths Book PDF</strong> in Hindi medium for daily study and revision. This page offers <strong>only the official mathematics textbook</strong>, not chapter-wise solutions or guidebooks. The <strong>Bihar Board Class 6th Mathematics Book PDF</strong> is ideal for students who prefer syllabus-based learning and want authentic digital study material for school exams and concept clarity.</p>
<h2 style="text-align: center;"><span style="text-decoration: underline; color: #ff0000;"><strong>Bihar Board 6th Maths Book 2026 PDF Download </strong></span><span style="text-decoration: underline; color: #ff0000;"><strong>(गणित)</strong></span></h2>
<p><img data-recalc-dims="1" decoding="async" class="aligncenter" src="https://i0.wp.com/biharboardbooks.com/wp-content/uploads/2022/07/bihar_board_books-min.png?ssl=1" /> <strong>Bihar Board Class 6th Maths Book 2026 PDF Download</strong> &#8211; इस पेज पर बिहार बोर्ड 6th के छात्रों के लिए &#8220;<span style="text-decoration: underline;"><strong>Maths (गणित)</strong></span>&#8221; Book दिया गया है | जिसे आप अपने फ़ोन में Free Download कर सकते हैं |</p>
<blockquote><p>🌐 सभी विषयों की बुक्स डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें -&gt; <a href="https://biharboardbooks.com/"><strong>https://biharboardbooks.com/</strong></a></p>
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<p>सभी बुक्स का डाउनलोड लिंक नीचे पेज पर दिया गया है |</p>
<h2 style="text-align: center;"><span style="text-decoration: underline; color: #3366ff;"><strong>BSEB Class 6 Mathematics Textbook PDF Free Download</strong></span></h2>
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<h3>❤️ 1. संख्याओं का समझ</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=16kb5j2PML5xTNSJW9htaUJ2B27Ke3hT9" /></p>
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<h3>❤️ 2. पूर्ण संख्याए</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1cNaERfVC94lNuPR5_EN18C8OUDKJOvts" /></p>
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<h3>❤️ 3. संख्याओं का खेल</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1AEq-ECyuLjmhre3Se4SUKk65WaZwtgpA" /></p>
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<h3>❤️ 4. पूर्णांक</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1i7rEAKJnrBzjw1UdDEKHVNpWTo68KSKj" /></p>
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<h3>❤️ 5. आधारभूत ज्यामितीय जानकारियाँ</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1LGb3hMLKPbqWrdVTvXDPfAQdgKpGYknv" /></p>
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<h3>❤️ 6. सरल आकृतियों की समझ</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1YdgJ5C3RxXFJp3g4uwBk341iL73pWaKH" /></p>
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<h3>❤️ 7. भिन्न</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1Krbj7EIPhlucqLWDpXSG7Ztuxnmvr0sU" /></p>
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<h3>❤️ 8. दशमलव</h3>
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<h3>❤️ 9. आंकड़ों का प्रयोग</h3>
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<h3>❤️ 10. अनुपात और समानुपात</h3>
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<h3>❤️ 11. एकिक नियम</h3>
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<h3>❤️ 12. बीजगणित</h3>
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<h3>❤️ 13. क्षेत्रमिति परिमित एवं क्षेत्रफल</h3>
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<h3>❤️ 14. सममिति</h3>
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<h3>❤️ 15. प्रयोगिक ज्यामिति</h3>
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		<title>Bihar Board Class 6th Science Book 2026 PDF Download</title>
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		<dc:creator><![CDATA[bseb]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 Jul 2022 07:39:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Class 6th Books]]></category>
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<h3>❤️ 1. भोजन कहाँ से आता है?</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1bxHhpuG5s-3YR2KgESHhQLlNpBYsH7f-" /></p>
<p>यह अध्याय &#8216;भोजन कहाँ से आता है?&#8217; मनुष्य और विभिन्न जीव-जंतुओं के आहार और उनके विभिन्न स्रोतों पर विस्तार से प्रकाश डालता है। इसमें बताया गया है कि हम प्रतिदिन जो भोजन करते हैं, वह मुख्य रूप से दो प्रमुख स्रोतों से आता है: पौधे और जंतु। पौधों से हमें अनाज, दालें, फल और विभिन्न प्रकार की सब्जियाँ प्राप्त होती हैं।</p>
<p>हम पौधों के विभिन्न अंगों जैसे जड़ (गाजर, मूली), तना, पत्ती (साग), फूल और बीजों (सरसों, गेहूँ) का उपयोग भोजन के रूप में करते हैं। दूसरी ओर, दूध, अंडा, मांस, मछली और शहद जैसे पौष्टिक उत्पाद हमें जंतुओं से प्राप्त होते हैं। अध्याय में जानवरों को उनके विशिष्ट खान-पान के आधार पर तीन मुख्य श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है: शाकाहारी (जो केवल पौधे या उनके उत्पाद खाते हैं), माँसाहारी (जो केवल अन्य जंतुओं का मांस खाते हैं), और सर्वाहारी (जो पौधे और मांस दोनों का सेवन करते हैं)।</p>
<p>इसके अलावा, इसमें चने और मूँग के बीजों को अंकुरित करने की विधि और मधुमक्खियों द्वारा फूलों के मकरंद से शहद बनाने की रोचक प्रक्रिया का भी वर्णन है। अंत में, यह स्पष्ट किया गया है कि पौधे प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से सूर्य की रोशनी में अपना भोजन स्वयं तैयार करते हैं। यह पाठ हमें भोजन की विविधता, उसके स्रोतों, अपव्यय रोकने के उपायों और प्रकृति के पारिस्थितिक तंत्र में संतुलन बनाए रखने के महत्व को गहराई से समझने में मदद करता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ 2. भोजन में क्या क्या आता है?</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1xv5mK1iyoXIV4HyrKHklPOLT9aQQmNEK" /></p>
<p>यह अध्याय &#8216;भोजन में क्या-क्या आता है?&#8217; हमारे दैनिक आहार के विभिन्न घटकों और उनके शारीरिक महत्व का एक विस्तृत और ज्ञानवर्धक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। लेखक स्पष्ट रूप से बताते हैं कि हम प्रतिदिन जो भोजन करते हैं, उसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन और खनिज-लवण जैसे अनिवार्य पोषक तत्व पाए जाते हैं। कार्बोहाइड्रेट और वसा हमारे शरीर को दैनिक कार्यों के लिए ऊर्जा प्रदान करने के मुख्य स्रोत हैं।</p>
<p>प्रोटीन शरीर की वृद्धि, पुरानी कोशिकाओं की मरम्मत और नई मांसपेशियों के निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक होता है। विटामिन और खनिज-लवण न केवल हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं, बल्कि आँखों, हड्डियों और मसूड़ों को भी स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस पाठ में विभिन्न पोषक तत्वों की उपस्थिति को समझने के लिए मंड परीक्षण जैसे सरल वैज्ञानिक क्रियाकलापों का मार्गदर्शिका के साथ वर्णन किया गया है।</p>
<p>संतुलित आहार की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया गया है कि इसमें रुक्षांश और जल सहित सभी पोषक तत्व उचित मात्रा में होने चाहिए। पोषक तत्वों की लंबे समय तक कमी से कुपोषण और रतौंधी, स्कर्वी या रिकेट्स जैसे गंभीर अभावजन्य रोग हो सकते हैं। अध्याय यह भी सुझाव देता है कि भोजन को अत्यधिक धोने या पकाने से उसके पोषक तत्व नष्ट हो सकते हैं।</p>
<p>निष्कर्षतः, यह पाठ संतुलित पोषण के प्रति हमें सचेत करता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ 3. तन्तु से वस्त्र तक</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1ucQXUEBBR51MGFdcIphDAf9UppAt29I_" /></p>
<p>यह अध्याय &#8216;तन्तु से वस्त्र तक&#8217; हमें कपड़ों की विविधता और उनके निर्माण की रोचक यात्रा से परिचित कराता है । हमारे पहनावे में सूती, रेशमी, ऊनी और कृत्रिम जैसे कई प्रकार के वस्त्र शामिल होते हैं, जिनका चयन हम मौसम और आवश्यकता के अनुसार करते हैं । ये सभी वस्त्र धागों के मेल से बनते हैं, और धागे स्वयं &#8216;तन्तुओं&#8217; (fibres) की सूक्ष्म लड़ियों से निर्मित होते हैं ।</p>
<p>तन्तु मुख्य रूप से दो श्रेणियों में विभाजित हैं: प्राकृतिक और मानव-निर्मित । प्राकृतिक तन्तु पौधों, जैसे कपास (रूई) और जूट (पटसन), या जन्तुओं, जैसे भेड़ की ऊन और रेशम के कीटों से प्राप्त होते हैं । वहीं, पॉलिस्टर और नायलॉन जैसे तन्तु रासायनिक पदार्थों से तैयार किए जाते हैं ।</p>
<p>अध्याय में विस्तार से बताया गया है कि कपास की खेती काली मिट्टी और गर्म जलवायु में की जाती है, जहाँ पौधों से कपास चुनकर &#8216;ओटना&#8217; प्रक्रिया द्वारा बीज अलग किए जाते हैं । तन्तुओं को ऐंठकर धागा बनाने की कला &#8216;कताई&#8217; कहलाती है, जिसे महात्मा गाँधी ने चरखे के माध्यम से लोकप्रिय बनाया था । धागे से कपड़ा तैयार करने के लिए &#8216;बुनाई&#8217; और &#8216;बँधाई&#8217; (जैसे स्वेटर बुनना) की विधियों का उपयोग होता है ।</p>
<p>प्राचीन काल में लोग बिना सिले कपड़े जैसे वृक्षों की छाल या पत्तियाँ लपेटते थे, लेकिन सुई के आविष्कार ने सिलाई और फैशन के आधुनिक युग की नींव रखी । यह पाठ वस्त्र विज्ञान की बुनियादी समझ प्रदान करता है ।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ 4. विभिन्न प्रकार के पदार्थ</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1Y-XgvBOEWSRRsmRCqOlrKRwyAR19KrbH" /></p>
<p>यह अध्याय &#8216;विभिन्न प्रकार के पदार्थ&#8217; हमारे दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली वस्तुओं और उनके निर्माण में प्रयुक्त विभिन्न सामग्रियों की विस्तृत विवेचना करता है। लेखक इस बात पर जोर देता है कि हमारे आसपास की प्रत्येक वस्तु किसी न किसी विशिष्ट पदार्थ जैसे लकड़ी, कांच, धातु, मिट्टी या प्लास्टिक से बनी होती है। अध्याय का मुख्य उद्देश्य छात्रों को पदार्थों के भौतिक गुणों के आधार पर उनका वर्गीकरण करना सिखाना है।</p>
<p>इसमें कई महत्वपूर्ण गुणों की चर्चा की गई है: सर्वप्रथम &#8216;कठोरता&#8217;, जिसके आधार पर पदार्थों को कोमल (जैसे रूई) और कठोर (जैसे लकड़ी) में बांटा गया है। दूसरा गुण &#8216;चमक&#8217; है, जो प्रायः धातुओं (लोहा, तांबा, सोना) की पहचान होती है। तीसरा महत्वपूर्ण गुण &#8216;घुलनशीलता&#8217; है; प्रयोगों द्वारा दिखाया गया है कि चीनी और नमक जैसे पदार्थ जल में विलेय हैं, जबकि रेत और चॉक पाउडर अविलेय।</p>
<p>यहीं &#8216;संतृप्त घोल&#8217; की अवधारणा भी स्पष्ट की गई है, जहाँ तापमान बढ़ने पर घुलनशीलता बढ़ जाती है। अध्याय &#8216;पारदर्शिता&#8217; के आधार पर वस्तुओं को पारदर्शी (कांच), अपारदर्शी (गत्ता) और पारभासी (धुंधला दिखने वाले) के रूप में वर्गीकृत करता है। साथ ही, &#8216;उत्प्लावकता&#8217; के सिद्धांत को समझाते हुए बताया गया है कि हल्की वस्तुएं पानी पर तैरती हैं और भारी वस्तुएं डूब जाती हैं।</p>
<p>अंत में, यह निष्कर्ष निकाला गया है कि पदार्थों का यह समूहन न केवल हमारी सुविधा के लिए है, बल्कि उनके गुणों के व्यवस्थित और वैज्ञानिक अध्ययन के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ 5. पृथककरण</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1IzHgDjHkKe2gJcR-sCk7J5o8_YdhqJPf" /></p>
<p>यह अध्याय पदार्थों के पृथक्करण की विभिन्न विधियों और उनके वैज्ञानिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालता है। हमारे दैनिक जीवन में किसी भी पदार्थ का उपयोग करने से पहले उसमें मौजूद हानिकारक, अनुपयोगी या कभी-कभी दो उपयोगी पदार्थों को अलग करना आवश्यक होता है।</p>
<p>पाठ में ठोस पदार्थों के मिश्रण को अलग करने की पारंपरिक विधियों जैसे &#8216;दौनी&#8217; (थ्रेसिंग), &#8216;ओसाई&#8217; (हवा की सहायता से हल्के भूसे को भारी अनाज से अलग करना), &#8216;चालना&#8217; और &#8216;हाथ से चुनना&#8217; का विस्तृत वर्णन किया गया है। तरल पदार्थों में मिले अघुलनशील ठोस कणों को अलग करने के लिए &#8216;थिराना&#8217; (तलछटीकरण), &#8216;निथारना&#8217; और &#8216;फिल्टर पेपर&#8217; द्वारा छानने की सटीक तकनीकें समझाई गई हैं।</p>
<p>समुद्र के खारे जल से नमक प्राप्त करने की प्रक्रिया के रूप में &#8216;वाष्पन&#8217; (Evaporation) के महत्व को रेखांकित किया गया है और बताया गया है कि शोधन के बाद ही हमें साधारण नमक प्राप्त होता है। एक विशेष आकर्षण &#8216;क्रोमेटोग्राफी&#8217; है, जो स्याही के रंगों या औषधीय पौधों के अर्क जैसे सूक्ष्म मिश्रणों को अलग करने की एक अत्यंत उपयोगी वैज्ञानिक विधि है।</p>
<p>यह तकनीक न केवल पदार्थों की पहचान करने में मदद करती है, बल्कि मिलावट की जाँच और फूलों के रंगों के विश्लेषण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अंततः, यह पाठ सिखाता है कि पदार्थों के विशिष्ट गुणधर्मों के आधार पर पृथक्करण की विधि चुनी जाती है, जो विज्ञान और रोजमर्रा के कार्यों के लिए अनिवार्य है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ 6. पदार्थ में परिवर्तन</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1yOov-HhwjKOYtzWOko-O5nn2aWjGc-q6" /></p>
<p>यह अध्याय &#8216;पदार्थ में परिवर्तन&#8217; हमारे दैनिक जीवन में होने वाले विभिन्न बदलावों का विस्तार से वर्णन करता है। इसमें मुख्य रूप से दो प्रकार के परिवर्तनों &#8211; परिवर्तनीय (Reversible) और अपरिवर्तनीय (Irreversible) &#8211; पर ध्यान केंद्रित किया गया है। पाठ में कई सरल क्रियाकलापों के माध्यम से यह समझाया गया है कि कैसे कुछ वस्तुओं जैसे मुड़े हुए कागज, फुलाए हुए गुब्बारे या आटे की लोई को उनकी मूल स्थिति में वापस लाया जा सकता है, जबकि कागज काटने, रोटी पकाने या अंडे उबालने के बाद उन्हें पहले जैसा नहीं किया जा सकता।</p>
<p>अध्याय पदार्थ की तीन भौतिक अवस्थाओं: ठोस, द्रव और गैस की व्याख्या करता है। जल के उदाहरण से स्पष्ट किया गया है कि कैसे ऊष्मा देने या ठंडा करने पर पदार्थ एक अवस्था से दूसरी अवस्था में बदलते हैं। इसके साथ ही, कपूर जैसे पदार्थों के ठोस से सीधे गैस में बदलने की प्रक्रिया (उर्ध्वपातन) और मोमबत्ती के जलने जैसे रासायनिक परिवर्तनों का भी उल्लेख है।</p>
<p>पाठ में यह भी बताया गया है कि लोहे की रिम को गर्म करके बैलगाड़ी के पहिए पर चढ़ाना प्रसार के सिद्धांत पर आधारित है। अंततः, यह पाठ विद्यार्थियों को अपने परिवेश का सूक्ष्म अवलोकन करने, प्रयोगों को करने और परिवर्तनों की प्रकृति को गहराई से समझने के लिए प्रेरित करता है। यह विज्ञान की मूल अवधारणाओं को सरल भाषा में स्पष्ट करता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ 7. पेड़-पौधों की दुनियाँ</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1GY1C2VHMyeyrdquIRsddwk3COjmlLAV3" /></p>
<p>यह अध्याय &#8216;पेड़-पौधों की दुनिया&#8217; हमें हमारे चारों ओर मौजूद वनस्पतियों की अद्भुत विविधता और उनकी संरचना से विस्तृत रूप में परिचित कराता है। पाठ की शुरुआत पौधों के वर्गीकरण से होती है, जहाँ उन्हें उनकी ऊँचाई और तने की कोमलता के आधार पर तीन श्रेणियों—शाक, झाड़ी और वृक्ष—में बाँटा गया है।</p>
<p>लेख में पत्तियों के महत्व पर विशेष जोर दिया गया है, जिसमें उनकी जमावट और शिरा-विन्यास को वैज्ञानिक ढंग से समझाया गया है। अध्याय जड़ों के दो प्रमुख प्रकारों, &#8216;मूसला जड़&#8217; और &#8216;रेशेदार जड़&#8217;, के बीच के अंतर और उनके कार्यों जैसे जल अवशोषण और पौधों को मजबूती प्रदान करने पर प्रकाश डालता है।</p>
<p>क्रियाकलापों के माध्यम से यह प्रदर्शित किया गया है कि तना किस प्रकार जल और खनिज लवणों के संवहन का कार्य करता है। बीजों के खंड में मक्का और चने के उदाहरणों से एकबीजपत्री और द्विबीजपत्री बीजों की संरचना और उनके अंकुरण की प्रक्रिया को स्पष्ट किया गया है।</p>
<p>अंत में, यह एक रोचक वैज्ञानिक संबंध स्थापित करता है कि कैसे पत्तियों के बाहरी विन्यास को देखकर उसकी जड़ों के प्रकार और बीज की प्रकृति का सटीक अनुमान लगाया जा सकता है। यह पाठ छात्रों को प्रकृति का सूक्ष्म अवलोकन करने और प्रयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ 8. फूलों से जान-पहचान</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1SrO7W3JvvSZUtupYt-8mHJ8Z9W2mm7Z5" /></p>
<p>यह अध्याय &#8216;फूलों से जान-पहचान&#8217; पौधों के जनन अंगों यानी फूलों की विस्तृत संरचना और उनके महत्व पर केंद्रित है। अध्याय की शुरुआत में यह बताया गया है कि प्रकृति में फूलों की विविधता बहुत अधिक है और सभी फूल एक समान आकर्षक या सुगंधित नहीं होते। मुख्य रूप से फूल के चार प्रमुख अंगों &#8211; अंखुड़ी (बाह्य दल), पंखुड़ी (दल), पुंकेसर और स्त्रीकेसर का विस्तार से वर्णन किया गया है।</p>
<p>पुंकेसर को फूल का नर भाग माना जाता है, जिसमें परागकोश और परागकण होते हैं, जबकि स्त्रीकेसर मादा भाग है, जिसके अंतर्गत अंडाशय, वर्तिका और वर्तिकाग्र जैसे अंग आते हैं। अध्याय में फूलों को उनके अंगों की उपस्थिति के आधार पर विभिन्न श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। &#8216;पूर्ण फूल&#8217; वे कहलाते हैं जिनमें चारों अंग मौजूद होते हैं, जबकि &#8216;अपूर्ण फूल&#8217; में इनमें से कोई भी एक अंग अनुपस्थित हो सकता है।</p>
<p>इसी प्रकार, पुंकेसर और स्त्रीकेसर की मौजूदगी के आधार पर फूलों को एकलिंगी, द्विलिंगी और अलिंगी श्रेणियों में बांटा गया है। नर फूल में केवल पुंकेसर और मादा फूल में केवल स्त्रीकेसर होता है। पाठ में विद्यार्थियों के लिए प्रयोगात्मक गतिविधियाँ भी दी गई हैं, जैसे अंडाशय की आड़ी और लम्ब काट का अध्ययन करना तथा विभिन्न फूलों का संग्रह कर एक सुंदर एलबम तैयार करना।</p>
<p>अंत में, यह स्पष्ट किया गया है कि फूल न केवल प्रकृति की शोभा बढ़ाते हैं, बल्कि ये पौधों के जीवन चक्र के लिए अनिवार्य जनन अंग हैं जो भविष्य में बीजों और फलों का निर्माण करते हैं।</p>
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<h3>❤️ 9. जंतुओं में गति</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1kl-wpeMPSNCOeYe7WfMYvjB7GJ90JOBO" /></p>
<p>अध्याय-9 &#8216;जन्तुओं में गति&#8217; मानव और विभिन्न जन्तुओं के शरीर में होने वाली हलचल और गमन की प्रक्रियाओं का विस्तृत वर्णन करता है। इसमें बताया गया है कि मानव शरीर में गति अस्थियों और संधियों के कारण संभव होती है । अध्याय विभिन्न प्रकार की संधियों जैसे कंदुक-खल्लिका संधि (कंधे), कब्जा संधि (कोहनी और घुटने), धुराग्र संधि (गर्दन) और अचल संधियों (खोपड़ी) की व्याख्या करता है ।</p>
<p>यह स्पष्ट करता है कि कंकाल तंत्र शरीर को एक निश्चित ढाँचा और सुरक्षा प्रदान करता है, जबकि पेशियों के संकुचन और शिथिलन से अस्थियाँ गति करती हैं । इसके अतिरिक्त, पाठ में विभिन्न जन्तुओं के गमन की विशिष्टताओं पर प्रकाश डाला गया है। केंचुआ अपनी पेशियों और &#8216;शूक&#8217; की सहायता से मिट्टी पर चलता है, जबकि घोंघा अपने मांसल &#8216;पाद&#8217; का उपयोग करता है ।</p>
<p>तिलचट्टे में बाह्य-कंकाल और उड़ने व चलने के लिए विशिष्ट पेशियाँ होती हैं । पक्षियों की खोखली हड्डियाँ और शक्तिशाली पंख उन्हें उड़ने के लिए अनुकूल बनाते हैं । मछलियों का धारारेखीय शरीर और उनके पक्ष उन्हें जल में तैरने में मदद करते हैं, वहीं सर्प अपने शरीर के वलयों और मांसपेशियों की सहायता से वलयाकार गति करते हैं ।</p>
<p>अंततः, यह अध्याय यह समझने में मदद करता है कि अलग-अलग शारीरिक संरचनाएं विभिन्न जीवों को उनके वातावरण में गति करने में कैसे सक्षम बनाती हैं ।</p>
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<h3>❤️ 10. सजीव और निर्जीव</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1AdcuxRbkv39x7vF2mj-hu6ZB_J-ZuFcN" /></p>
<p>यह अध्याय सजीव और निर्जीव वस्तुओं के मूलभूत अंतरों पर प्रकाश डालता है। हमारे आसपास की वस्तुओं को उनके लक्षणों के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है। मनुष्य, पशु-पक्षी और पेड़-पौधे सजीव हैं, जबकि कुर्सी, मेज और पत्थर निर्जीव हैं।</p>
<p>सजीवों की सबसे बड़ी पहचान उनकी &#8216;वृद्धि&#8217; है, जहाँ वे समय के साथ विकसित होते हैं। सभी सजीवों को जीवित रहने और ऊर्जा प्राप्त करने के लिए &#8216;भोजन&#8217; की आवश्यकता होती है। &#8216;श्वसन&#8217; प्रक्रिया द्वारा वे ऑक्सीजन लेते हैं, जो शरीर में ऊर्जा उत्पादन के लिए &#8216;ईंधन&#8217; का काम करती है।</p>
<p>सजीवों में बाहरी वातावरण के बदलावों या &#8216;उद्दीपन&#8217; के प्रति अनुक्रिया करने की क्षमता होती है, जैसे किसी काँटे के चुभने पर प्रतिक्रिया देना। &#8216;उत्सर्जन&#8217; के माध्यम से वे शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालते हैं। अपनी प्रजाति को निरंतर बनाए रखने के लिए वे &#8216;प्रजनन&#8217; करते हैं और अपने समान संतान उत्पन्न करते हैं।</p>
<p>अंततः, प्रत्येक सजीव की &#8216;मृत्यु&#8217; होती है। हालांकि कुछ निर्जीव वस्तुएं जैसे कार या बादल गति या आकार में वृद्धि दिखाते हैं, लेकिन उनमें ये सभी जैविक लक्षण एक साथ नहीं पाए जाते। अध्याय यह भी समझाता है कि बीज जैसी वस्तुएं सुषुप्तावस्था में हो सकती हैं, जो अनुकूल वातावरण मिलने पर जीवन के लक्षण प्रकट करती हैं।</p>
<p>संक्षेप में, जीवन एक सुंदर और जटिल प्रक्रिया है जो प्रकृति की विविधता को दर्शाती है।</p>
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<h3>❤️ 11. सजीवों में अनुकूलन</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1fs5ENwSG0J2fzrisp2DhgP9y9JvT53c9" /></p>
<p>यह अध्याय &#8216;सजीवों में अनुकूलन&#8217; विस्तार से समझाता है कि कैसे विभिन्न सजीव अपने विशिष्ट प्राकृतिक परिवेश में जीवित रहने के लिए आवश्यक शारीरिक और व्यवहारिक परिवर्तन विकसित करते हैं। पाठ की शुरुआत ऊँट और घोड़े के बीच एक रोचक संवाद से होती है, जहाँ ऊँट की शारीरिक विशेषताएँ जैसे चौड़े पैर, लम्बी पलकें और भोजन संचय के लिए कूबड़ उसे रेगिस्तान की कठिन परिस्थितियों के अनुकूल बनाती हैं।</p>
<p>इसके विपरीत, घोड़ा उन रेतीले टीलों पर संघर्ष करता है। लेखक स्पष्ट करते हैं कि अनुकूलन वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से जीव अपने वासस्थान में सफलतापूर्वक जीवित रहता है।</p>
<p>अध्याय में मरुस्थल, पर्वत, घास स्थल और जलीय क्षेत्रों जैसे विभिन्न आवासों का वर्णन किया गया है। उदाहरण के तौर पर, मछलियों का धारारेखीय शरीर और गलफड़े उन्हें जल में रहने योग्य बनाते हैं, जबकि पहाड़ों पर पाए जाने वाले याक के लंबे बाल और शंक्वाकार वृक्ष उन्हें अत्यधिक ठंड और बर्फबारी से बचाते हैं।</p>
<p>इसी तरह, शेर का मटमैला रंग उसे घास के मैदानों में छिपने में मदद करता है, जबकि हिरण की तेज गति और सुनने की क्षमता उसे शिकारियों से बचाती है। पाठ &#8216;पर्यानुकूलन&#8217; (अल्पकालिक) और &#8216;अनुकूलन&#8217; (दीर्घकालिक) के अंतर को भी स्पष्ट करता है, और यह बताता है कि प्रकाश, ताप और जल जैसे अजैव घटक सजीवों के अस्तित्व के लिए कितने अनिवार्य हैं।</p>
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<h3>❤️ 12. दूरी मापन एवं गति</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1nX9FhdwYe0qdPYUoGtHvPwqnjO8DQcDr" /></p>
<p>यह अध्याय &#8216;दूरी मापन एवं गति&#8217; विज्ञान के मूलभूत विषयों मापन और गति पर आधारित है। इसमें बताया गया है कि प्राचीन समय में लोग शरीर के अंगों जैसे बित्ता, हाथ और कदमों का उपयोग लंबाई मापने के लिए करते थे, लेकिन सटीकता की कमी के कारण वैश्विक स्तर पर मानक इकाइयों की आवश्यकता हुई। इसके परिणामस्वरूप &#8216;मीटर&#8217; को मानक अंतर्राष्ट्रीय इकाई (SI) माना गया।</p>
<p>पाठ में सेंटीमीटर, मिलीमीटर और किलोमीटर के बीच संबंधों के साथ-साथ पैमाने से लंबाई मापने के सही तरीके और संभावित त्रुटियों को समझाया गया है। वक्र रेखाओं को धागे की सहायता से मापने की विधि भी रोचक ढंग से दी गई है। अध्याय गति के विभिन्न प्रकारों को भी विस्तार से परिभाषित करता है।</p>
<p>सरलरेखीय गति, वर्तुल या घूर्णन गति और आवर्त गति के माध्यम से वस्तुओं के व्यवहार को समझाया गया है। पाठ यह भी स्पष्ट करता है कि फर्श पर लुढ़कती गेंद जैसी वस्तुएं एक साथ सरलरेखीय और घूर्णन गति का प्रदर्शन कर सकती हैं। अंततः, चाल की अवधारणा पेश की गई है, जो यह निर्धारित करती है कि कोई वस्तु कितनी तीव्र या मंद गति कर रही है।</p>
<p>यह अध्याय छात्रों को मापन की परिशुद्धता और गति की विविधता समझने में मदद करता है।</p>
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<h3>❤️ 13. प्रकाश</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1FW237h6udMMxYUjzKEoMASXOGCMnFVLA" /></p>
<p>यह अध्याय &#8216;प्रकाश&#8217; के मौलिक सिद्धांतों और उसके दैनिक जीवन में महत्व की विस्तृत व्याख्या करता है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि किसी भी वस्तु को देखने के लिए प्रकाश अनिवार्य है; जब प्रकाश किरणें किसी वस्तु से टकराकर हमारी आँखों तक पहुँचती हैं, तभी हम उसे देख पाते हैं। वस्तुओं को प्रकाश के प्रति उनकी प्रतिक्रिया के आधार पर पारदर्शी, अपारदर्शी और पारभासी श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है।</p>
<p>एक प्रमुख तथ्य यह है कि &#8216;प्रकाश हमेशा एक सीधी रेखा में गमन करता है&#8217;। इसे प्रमाणित करने के लिए पाइप और पिनहोल कैमरा के प्रयोग दिए गए हैं। पिनहोल कैमरा में बनने वाला प्रतिबिंब हमेशा उल्टा होता है, जो प्रकाश की सरल रेखीय गति की पुष्टि करता है।</p>
<p>इसके अलावा, पाठ में &#8216;परावर्तन&#8217; को समझाया गया है, जिसमें दर्पण जैसी सतह से टकराकर प्रकाश अपना मार्ग बदल लेता है। इसमें आपतित और परावर्तित किरणों की विस्तृत चर्चा की गई है। अंत में, &#8216;छाया&#8217; के बनने की प्रक्रिया बताई गई है।</p>
<p>जब कोई अपारदर्शी वस्तु प्रकाश के मार्ग में बाधा डालती है, तो पर्दे पर उसकी छाया बनती है। छाया का आकार प्रकाश स्रोत की दिशा एवं दूरी पर निर्भर करता है। यह अध्याय छात्रों को प्रकाश के सरल व्यवहार और उसके पीछे के विज्ञान को समझने में मदद करता है।</p>
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<h3>❤️ 14. बल्ब जलाओ जगमग-जगमग</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1F_Zer_zkNaQVahVM_5huaWbh5i9seGtz" /></p>
<p>यह अध्याय &#8216;बल्ब जलाओ जगमग-जगमग&#8217; विद्युत और उसके परिपथ की बुनियादी समझ पर आधारित है। इसमें अत्यंत सरल और रोचक ढंग से समझाया गया है कि एक टॉर्च या बल्ब किस प्रकार कार्य करता है। अध्याय की शुरुआत एक व्यावहारिक उदाहरण से होती है जहाँ सबीहा अपनी टॉर्च की मरम्मत करती है, जिससे पाठकों को विद्युत सेल के धन (+) और ऋण (-) सिरों के सही संयोजन का महत्व समझ आता है।</p>
<p>विभिन्न क्रियाकलापों के माध्यम से छात्रों को विद्युत परिपथ (सर्किट) बनाना, बल्ब की आंतरिक बनावट (फिलामेंट) और होल्डर के उपयोग के बारे में जानकारी दी गई है। अध्याय में &#8216;विद्युत चालक&#8217; और &#8216;कुचालक&#8217; पदार्थों के बीच अंतर को प्रयोगात्मक रूप से स्पष्ट किया गया है। लोहा, ताँबा और एल्युमिनियम जैसे धातु चालक हैं, जबकि लकड़ी, रबर, प्लास्टिक और यहाँ तक कि हवा भी विद्युत की कुचालक है।</p>
<p>पाठ का एक प्रमुख आकर्षण थॉमस अल्वा एडीसन द्वारा बल्ब के आविष्कार की संघर्षपूर्ण कहानी है। उन्होंने हजारों असफल प्रयासों के बाद अंततः एक ऐसा फिलामेंट खोजा जो लंबे समय तक प्रकाश दे सके। आज के समय में हम टंगस्टन के फिलामेंट वाले बल्बों का उपयोग करते हैं।</p>
<p>यह अध्याय न केवल वैज्ञानिक सिद्धांतों को समझाता है, बल्कि विद्यार्थियों में खोजी प्रवृत्ति और प्रयोग करने की ललक भी पैदा करता है।</p>
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<h3>❤️ 15. चुंबक</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1Ocjb6rma5i3gap33Rgg5Otko5d8pcnnN" /></p>
<p>यह अध्याय &#8216;चुंबक&#8217; के विभिन्न गुणों और उसके व्यावहारिक उपयोगों का विस्तार से वर्णन करता है। पाठ की शुरुआत चुंबक की खोज की रोचक लोककथा से होती है, जिसमें यूनान के क्रीट द्वीप के एक चरवाहे मैगनस द्वारा &#8216;लोडस्टोन&#8217; की खोज का विवरण है। यह प्राकृतिक चुंबक लोहे के टुकड़ों को अपनी ओर आकर्षित करने की शक्ति रखता था।</p>
<p>अध्याय में विभिन्न क्रियाकलापों के माध्यम से स्पष्ट किया गया है कि पदार्थ दो प्रकार के होते हैं: चुंबकीय (जैसे लोहा, निकेल, कोबाल्ट) और अचुंबकीय (जैसे लकड़ी, प्लास्टिक, कागज़)। चुंबक के मुख्य गुणों में इसके दो ध्रुव—उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव—अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। लोहे का बुरादा चुंबक के इन ध्रुवों पर सबसे अधिक चिपकता है, जो वहाँ चुंबकीय बल की प्रबलता को दर्शाता है।</p>
<p>एक अन्य महत्वपूर्ण गुण दिशा निर्धारण है; स्वतंत्र रूप से लटका हुआ चुंबक हमेशा उत्तर-दक्षिण दिशा में ही ठहरता है। इसी सिद्धांत पर &#8216;दिक्सूचक&#8217; (कम्पास) यंत्र कार्य करता है, जिसका उपयोग सदियों से नाविकों द्वारा समुद्र में दिशा खोजने के लिए किया जाता रहा है। पाठ में चुंबकों के बीच आकर्षण और विकर्षण के नियमों को भी समझाया गया है, जिसके अनुसार समान ध्रुव एक-दूसरे को विकर्षित करते हैं, जबकि असमान ध्रुव आकर्षित करते हैं।</p>
<p>अंत में, लोहे की पट्टी या साइकिल के स्पोक को रगड़कर कृत्रिम चुंबक बनाने की विधि और चुंबकीय प्रभाव क्षेत्र के बारे में जानकारी दी गई है। यह अध्याय चुंबकत्व के मूलभूत सिद्धांतों को सरल प्रयोगात्मक ढंग से समझाने में सहायक है।</p>
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<h3>❤️ 16. जल</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1QniB2W6bkz7VHSVla7ZnMY6tRcmt98sF" /></p>
<p>यह अध्याय &#8216;जल&#8217; हमारे जीवन में पानी के अपरिहार्य महत्व और इसकी दैनिक उपयोगिता पर केंद्रित है। हम अपनी दिनचर्या के हर कार्य, जैसे स्वच्छता, भोजन पकाना और कृषि, में जल पर पूर्णतः निर्भर हैं। पाठ में छात्रों को अपनी दैनिक जल खपत का आकलन करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।</p>
<p>जल के मुख्य स्रोतों में नदियाँ, तालाब, कुएँ और चापानल शामिल हैं। यद्यपि पृथ्वी का दो-तिहाई भाग जल से आच्छादित है, परंतु इसका 97.5 प्रतिशत हिस्सा समुद्रों में खारा है। मानव उपयोग के लिए उपलब्ध मीठा जल बहुत ही कम मात्रा (लगभग 0.003%) में है।</p>
<p>अध्याय में जल चक्र की वैज्ञानिक प्रक्रिया—वाष्पन, वाष्पोत्सर्जन और संघनन—को विस्तार से समझाया गया है। सूर्य की गर्मी से जल वाष्प बनकर ऊपर उठता है और ऊँचाई पर संघनित होकर बादलों का रूप लेता है, जो पुनः वर्षा के रूप में धरती पर गिरते हैं। पाठ में प्राकृतिक आपदाओं के प्रभावों का भी वर्णन है; जैसे अत्यधिक वर्षा से आने वाली &#8216;बाढ़&#8217; जो जान-माल की हानि करती है, और लंबे समय तक वर्षा न होने से उत्पन्न &#8216;सूखा&#8217; जो अकाल का कारण बनता है।</p>
<p>अंत में, भविष्य के जल संकट से बचने के लिए &#8216;वर्षा जल संग्रहण&#8217; की ग्रामीण और शहरी तकनीकों और जल के विवेकपूर्ण व सीमित उपयोग पर विशेष बल दिया गया है। यह अध्याय संदेश देता है कि जल ही जीवन का आधार है और इसका संरक्षण हमारी साझा जिम्मेदारी है।</p>
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<h3>❤️ 17. वायु</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1ACIEyJAgQQimZWwqjrLbIA5cJKXzlCvW" /></p>
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<h3>❤️ 18. ठोस कचरा प्रबंधन</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1BMrYvEHIRfMJUBGXJQtR7RK10NIcnUDv" /></p>
<p>अध्याय 18, &#8216;ठोस कचरा प्रबंधन&#8217;, हमें हमारे दैनिक जीवन से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थों के वैज्ञानिक और सही निपटान के साथ-साथ पर्यावरण की सुरक्षा के बारे में जानकारी प्रदान करता है । अध्याय की शुरुआत अंजलि और उत्कर्ष नामक बच्चों के एक पार्क भ्रमण की कहानी से होती है, जहाँ वे गीले और सूखे कचरे के लिए क्रमशः हरे और नीले कूड़ेदानों का महत्व सीखते हैं ।</p>
<p>कचरे को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है: जैव विघटनीय पदार्थ, जो प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा गल जाते हैं (जैसे फलों-सब्जियों के छिलके, कागज और गत्ता), और जैव अविघटनीय पदार्थ, जिनका प्राकृतिक अपघटन नहीं होता (जैसे प्लास्टिक, धातु और काँच) । पाठ में पर्यावरण प्रदूषण और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले कचरे के गंभीर दुष्प्रभावों की चर्चा की गई है ।</p>
<p>कचरा प्रबंधन के लिए &#8216;4R&#8217; सिद्धांत—Refuse (मना करना), Reduce (कम उपयोग), Reuse (पुनः उपयोग) और Recycle (पुनःचक्रण)—को अपनाने की सलाह दी गई है । विशेष रूप से प्लास्टिक और पॉलिथीन के हानिकारक प्रभावों पर प्रकाश डाला गया है, जैसे कि नालियों का अवरुद्ध होना, पशुओं द्वारा निगलने पर उनकी मृत्यु और मिट्टी की उर्वरक शक्ति का ह्रास ।</p>
<p>गीले कचरे से खाद बनाने के लिए &#8216;कम्पोस्टिंग&#8217; और केंचुओं के माध्यम से &#8216;वर्मी-कम्पोस्ट&#8217; तैयार करने की विधि समझाई गई है । अंततः, यह अध्याय संदेश देता है कि सचेत प्रयासों और जागरूकता से हम न केवल कचरे की समस्या को नियंत्रित कर सकते हैं, बल्कि संसाधनों का रचनात्मक पुनः उपयोग कर &#8216;कबाड़ से जुगाड़&#8217; भी कर सकते हैं ।</p>
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		<title>Bihar Board Class 6th Urdu Book 2026 PDF Download</title>
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		<pubDate>Sun, 24 Jul 2022 07:36:11 +0000</pubDate>
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										<content:encoded><![CDATA[<h2 style="text-align: center;"><span style="text-decoration: underline; color: #ff0000;"><strong>Bihar Board 6th Urdu Book 2026 PDF Download</strong></span></h2>
<p><img data-recalc-dims="1" decoding="async" class="aligncenter" src="https://i0.wp.com/biharboardbooks.com/wp-content/uploads/2022/07/bihar_board_books-min.png?ssl=1" /> <span style="text-decoration: underline;">Bihar Board Class 6th Urdu Book 2026 PDF Download</span> &#8211; इस पेज पर बिहार बोर्ड 6th के छात्रों के लिए &#8220;<span style="text-decoration: underline;"><strong>Urdu (اردو)</strong></span>&#8221; Book दिया गया है | जिसे आप अपने फ़ोन में Free Download कर सकते हैं |</p>
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<h2 style="text-align: center;"><span style="text-decoration: underline; color: #3366ff;"><strong>BSEB Class 6 Urdu (اردو) Textbook PDF Free Download</strong></span></h2>
<p><span style="font-size: 18pt;"><strong>☞</strong></span> बुक्स डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए डाउनलोड लिंक पर क्लिक करें | <img decoding="async" class="aligncenter" src="https://i0.wp.com/biharboard-ac.in/wp-content/uploads/2022/07/kindpng_6137677-min.png?resize=601%2C111&amp;ssl=1" alt="line" /></p>
<h3>❤️ Preface</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1CIJhhLhXm5Iw4hs1DilpE4co_jeO9m6q" /><br />
यह पुस्तक &#8216;फ़ुरोज़ें भाग &#8211; 1&#8217; कक्षा छह के लिए उर्दू भाषा की एक पाठ्यपुस्तक है, जिसे राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (SCERT), बिहार, पटना द्वारा तैयार किया गया है। इस पुस्तक का मूल उद्देश्य बच्चों में उर्दू भाषा जानने का शौक पैदा करना और उनकी शब्दावली को समृद्ध करना है। पुस्तक में विभिन्न प्रकार की काव्य और गद्य रचनाओं को सावधानीपूर्वक शामिल किया गया है, जिनमें हम्द, नज़्में, कहानियाँ, निबंध और ग़ज़लें शामिल हैं। पुस्तक के महत्वपूर्ण पाठों में अल्ताफ़ हुसैन हाली की हम्द, मुंशी प्रेमचंद की कहानी &#8216;दो बैल&#8217;, अल्लामा इक़बाल की नज़्म &#8216;जुगनू&#8217;, और रवींद्र नाथ टैगोर का मशहूर अफ़साना &#8216;काबुली वाला&#8217; शामिल हैं। इसके अलावा ऐतिहासिक और जानकारीपरक निबंध जैसे &#8216;हज़रत उमर बिन अब्दुलअज़ीज़&#8217;, &#8216;गंगा नदी&#8217;, &#8216;दिल्ली की जामा मस्जिद&#8217; और नए ज़माने की ज़रूरत &#8216;कंप्यूटर&#8217; पर भी पाठ मौजूद हैं। हर पाठ के अंत में विस्तृत अभ्यास दिए गए हैं जो छात्रों की विचारशीलता, भाषाई और लेखन कौशल को उभारने में कुंजी का काम करते हैं। शिक्षकों के लिए भी पुस्तक में विशेष निर्देश दर्ज हैं ताकि वे बच्चों को सही उच्चारण, स्वर और विराम चिह्नों के साथ उर्दू पढ़ना सिखा सकें। पुस्तक की तैयारी में बच्चों की मानसिक क्षमता और उनकी रुचियों का पूरा ध्यान रखा गया है ताकि वे बोझ महसूस किए बिना ज्ञान अर्जित कर सकें। यह पुस्तक केवल शैक्षिक मानकों को पूरा करने की एक संक्षिप्त कोशिश नहीं है बल्कि बच्चों को बेहतरीन नैतिक और सामाजिक मूल्यों से भी रोशनास कराती है, जो उनकी हर जीत के लिए ज़रूरी हैं।</p>
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<h3>❤️ سبق 1 : حمد (نظم)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1plhsuVAN699o7w_o_tpBKxWhTXh7RX4M" /><br />
यह पुस्तक का पहला पाठ है जिसका शीर्षक &#8216;हम्द&#8217; है। यह हम्द उर्दू के प्रसिद्ध और मान्य शायर मौलाना अल्ताफ़ हुसैन हाली द्वारा लिखी गई है। हम्द उस नज़्म को कहते हैं जिसमें अल्लाह तआला की प्रशंसा और गुणगान व्यक्त किया जाए। इस नज़्म में शायर ने अल्लाह तआला की महानता और सामर्थ्य का बहुत ही खूबसूरती से वर्णन किया है। हाली कहते हैं कि अल्लाह तआला ही इस पूरी कायनात, धरती, आसमान और सभी जीवों का असली मालिक है। वही हर इंसान का सहारा है और मुसीबत के समय काम आने वाला है। अल्लाह तआला की मौजूदगी का एहसास कायनात की हर चीज़ में होता है, चाहे वह फूलों की खुशबू हो या फलों का स्वाद। वही अंधेरे दिलों की रोशनी है और नाउम्मीदों की आखिरी उम्मीद है। पत्ते उसके हुक्म से हिलते हैं और कलियाँ उसके हुक्म से खिलती हैं। शायर के मुताबिक इंसान की ज़िंदगी की नाव को पार लगाने वाली ज़ात सिर्फ़ अल्लाह की है। यह नज़्म हमें याद दिलाती है कि ख़ुदा हर वक़्त हमारे पास होता है और हमें हर हाल में उसी की तारीफ़ करनी चाहिए। नज़्म के अंत में मुश्किल शब्दों के मायने, अभ्यास और सवाल भी दिए गए हैं ताकि छात्र इसे बेहतर तरीक़े से समझ सकें।</p>
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<h3>❤️ سبق 2 : دو بیل (کہانی)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1xFTAgiaLBGq04wylI5cQLu6p-qbDN6wJ" /><br />
यह पाठ मशहूर कहानीकार मुंशी प्रेमचंद की कहानी &#8216;दो बैल&#8217; पर आधारित है जो उर्दू साहित्य की एक शानदार और शिक्षाप्रद कहानी है। कहानी दो बैलों, हीरा और मोती, की दोस्ती और उनके साहसिक अनुभवों के इर्द-गिर्द घूमती है। इन दो बैलों का मालिक एक कंजूस किसान है जो उनसे ज़्यादा से ज़्यादा काम लेना चाहता है लेकिन उन्हें भरपेट खाना नहीं देता। दोनों बैल इस बुरे बर्ताव से तंग आकर खेत से भाग जाते हैं और जंगल की ओर निकल पड़ते हैं। रास्ते में उन्हें कई मुसीबतों और मज़ेदार अनुभवों का सामना करना पड़ता है। वे एक सर्कस में फँस जाते हैं, एक टाइगर से भिड़ते हैं और अंत में अपने गाँव वापस लौट आते हैं। यह कहानी सिखाती है कि आज़ादी सबसे बड़ी नेमत है और मेहनत करने वाले जानवरों या इंसानों के साथ भी इंसाफ़ और दया से पेश आना चाहिए। प्रेमचंद ने इसमें साधारण जीवन की गहरी समझ और हास्य का बेहतरीन मिश्रण पेश किया है। बच्चों को यह कहानी मज़ेदार लगने के साथ-साथ जानवरों के प्रति दया और एकता का पाठ भी सिखाती है।</p>
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<h3>❤️ سبق 3 : جگنو (نظم)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1-NAzPAhCwO6YkRPJ7idgh5Q5HFuE5Gha" /><br />
अल्लामा इक़बाल की यह खूबसूरत नज़्म &#8216;जुगनू&#8217; प्रकृति की एक छोटी सी लेकिन हैरतअंगेज़ मखलूक की तस्वीर पेश करती है। नज़्म की शुरुआत शायराना ख़्याल से होती है जहाँ जुगनू को बाग़ की महफ़िल में एक जलती हुई मोमबत्ती या आसमान से गिरा हुआ तारा कहा गया है। इक़बाल के नज़दीक जुगनू महज़ एक कीड़ा नहीं बल्कि खुलूत-ए-कदीम (प्राचीन चमक) की एक झलक है जिसे प्रकृति ने मेहफ़िल में ज़ाहिर किया है। नज़्म में परवाने और जुगनू का मुक़ाबला बहुत सबक़ आमोज़ है; परवाना रोशनी की तलाश में भटकता है जबकि जुगनू ख़ुद रोशनी का सरापा है। यह फ़र्क़ इस बात की तरफ़ इशारा करता है कि असल कमाल दूसरों से रोशनी माँगना नहीं बल्कि ख़ुद रोशनी का स्रोत बनना है। शायर ने इसे &#8216;शब की सल्तनत में दिन का सफ़ीर&#8217; कहकर इसकी अहमियत को अजागर किया है कि किस तरह वह ख़ामोशी और गुमनामी में भी चमकता रहता है। नज़्म का केंद्रीय ख़्याल यह है कि अल्लाह की पैदाइश हर चीज़ में कोई न कोई हिकमत और खूबसूरती पोशीदा है। यह नज़्म हमें पैग़ाम देती है कि चाहे हम कितने ही छोटे क्यों न हों, हम अपनी मेहनत और औसाफ़ से समाज की तारीकी को ख़त्म कर सकते हैं और ख़ैर व फ़लाह की रोशनी फैला सकते हैं। यह नज़्म फ़न्नी लहाज़ से भी सादा मगर परासर है जो बच्चों में तख़लीक़ी सोच पैदा करती है।</p>
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<h3>❤️ سبق 4 : حضرت عمربن عبدلعزیز (مضمون)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=13NF1q3qcJlC3IPRn6Qp7ZsxkKHnMbloS" /><br />
यह पाठ मुसलमानों के मशहूर खलीफ़ा हज़रत उमर बिन अब्दुलअज़ीज़ रहमतुल्लाह अलैह की सादगी और पाकीज़ा ज़िंदगी के बारे में है। खिलाफ़त मिलने से पहले वे बड़ी शान और शौकत की ज़िंदगी गुज़ारते थे, लेकिन खिलाफ़त की ज़िम्मेदारी संभालते ही उनकी ज़िंदगी बिल्कुल बदल गई। उन्होंने शाहाना ठाठ-बाट छोड़ दिए, अपनी सारी कीमती विरासत और अपनी बीवी के ज़ेवर बैतुलमाल में जमा करा दिए और बेहद सादा तरीक़ा ज़िंदगी अपनाया। वे बैतुलमाल की अमानत के इतने हिफ़ाज़त करते थे कि सरकारी काम के दौरान जब निजी मुलाक़ातें आतीं तो सरकारी चिराग बुझाकर अपना निजी चिराग रोशन कर लेते। उन्होंने अपने बच्चों के लिए ईद पर नए कपड़े बनवाने से भी इनकार कर दिया क्योंकि उनके पास इतने रक़म नहीं थी और वे बैतुलमाल से पैसे लेना ग़लत समझते थे। उन्होंने अपने दौर में उलमा की रहनुमाई में बहुत सी सुधारें कीं, जिनमें शराब पर पाबंदी, बेजा रस्मों का ख़ात्मा और ग़ुलामों की आज़ादी शामिल है। उनकी खिलाफ़त का अर्सा महज़ दो साल पाँच महीने पर था, लेकिन इस संक्षिप्त वक़्त में उन्होंने इंसाफ़ और न्याय की ऐसी मिसाल क़ायम की कि लोग ज़कात देने के लिए हाजतमंद तलाश करते थे मगर कोई मुहताज नहीं मिलता था। उनका नाम तारीख़ में हमेशा एक आदिल और परहेज़गार हाकिम के तौर पर रोशन रहेगा।</p>
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<h3>❤️ سبق 5 : احسان کا بدلہ احسان (کہانی)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1dRGMQP0yx6V1I_6ZE0P0vcvxdvtW0Cfo" /><br />
यह पाठ एक शिक्षाप्रद कहानी है जो एक अहसान के बदले अहसान करने के महत्व को दर्शाती है। कहानी एक नेक और मददगार आदमी के इर्द-गिर्द घूमती है जो हमेशा दूसरों की मदद करता है। एक दिन वह रास्ते में एक बूढ़े आदमी से मिलता है जो बहुत थका हुआ और मुसीबत में है। वह उसकी मदद करता है, उसे खाना खिलाता है और उसके घर तक छोड़ने जाता है। बूढ़ा आदमी असल में एक धनी व्यक्ति निकलता है जो उसकी नेकी से बहुत प्रभावित होता है। कुछ साल बाद, जब वह नेक आदमी आर्थिक मुश्किलों से गुज़र रहा होता है, तो वही बूढ़ा आदमी उसकी मदद के लिए आगे आता है और उसकी सारी परेशानियाँ दूर कर देता है। कहानी का सार यह है कि अच्छे कर्म कभी बेकार नहीं जाते और दूसरों की मदद करने वाले की मदद ज़रूर होती है। यह बच्चों को दयालुता, ईमानदारी और परोपकार की भावना सिखाने का एक बेहतरीन माध्यम है। कहानी सरल भाषा में लिखी गई है और बच्चों को नैतिक मूल्यों का पाठ पढ़ाने में मददगार साबित होती है।</p>
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<h3>❤️ سبق 6 : وطن کا راگ (نظم)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=157tUyOfuwT4UGzXA47KZicXTVmEWgYIu" /><br />
नज़्म &#8216;वतन का राग&#8217; जिसके शायर अफ़सर मेरठी हैं, भारत की हुब्बे-वतनी और क़ौमी एकजुटता का एक बेहतरीन नमूना है। इस नज़्म में शायर ने बड़े दिलकश अंदाज़ में अपने वतन की तारीफ़ की है और इसे दुनिया का सबसे प्यारा और न्यारा देश क़रार दिया है। वह कहता है कि भारत का हर मौसम और हर ऋतु अपनी मिसाल आप है और यह मुल्क दुख और सुख दोनों हालतों में हमारा सबसे बड़ा सहारा है। नज़्म में भारत की अज़ीम रूहानी शख्सियतों जैसे श्री कृष्ण, महात्मा गौतम बुद्ध, हज़रत ख़्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती और गुरु नानक देव जी का ज़िक्र किया गया है, जिनकी तालीमात और पैग़ाम आज भी इस मुल्क की फ़ज़ाओं में गूँज रहे हैं। इन अज़ीम हस्तियों ने हमें इंसानियत और मोहब्बत का दर्स दिया। शायर वाज़ेह करता है कि यहाँ रहने वालों का मज़हब चाहे कुछ भी हो—ख़्वाह वह हिंदू हों, मुसलमान हों, सिख हों या ईसाई—वह सब पहले &#8216;हिंदी&#8217; हैं और आपस में भाई-भाई की तरह रहते हैं। प्रेम और मोहब्बत ने इन सबको एक कर दिया है और वह सब अपने वतन भारत के सच्चे आशिक़ और दीवाने हैं। यह नज़्म हमें सबक़ देती है कि भारत की बुनियाद अमन, रवादारी और कस्रत में वहदत पर क़ायम है और हमें इस अज़ीम वर्से की हिफ़ाज़त करनी चाहिए।</p>
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<h3>❤️ سبق 7 : گنگا ندی (مضمون)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1u4yptEMWEHdX4GjAu0OGUyqSRPLWLGoW" /><br />
गंगा नदी भारत की अज़मत, वक़ार और प्राचीन सभ्यता व संस्कृति की एक अहम निशानी है। यह हिमालय के बर्फ़ानी आबशार गंगोत्री से निकलती है और हरिद्वार के मुक़ाम पर पहाड़ों से उतरकर मैदानी इलाक़ों में शामिल हो जाती है। हरिद्वार एक मुक़द्दस मुक़ाम है जहाँ हर साल बाद कुंभ का अज़ीम-उल-शान मेला लगता है। इसके बाद यह नदी कानपुर जैसे औद्योगिक शहर से गुज़रती है जहाँ यह कारख़ानों के लिए पानी का अहम ज़रिया बनती है। प्रयाग (इलाहाबाद) में इसका संगम यमुना नदी से होता है जो कि एक ऐतिहासिक और मज़हबी अहमियत की जगह है। बनारस या काशी में गंगा के किनारे बेशुमार मंदिर और घाट मौजूद हैं जहाँ मुल्क भर से ज़ायरीन आश्नाई और इबादत के लिए आते हैं। बिहार के इलाक़े में कोसी, गंडक और सोन जैसी नदियाँ इसमें शामिल होकर इसकी वुसअत में इज़ाफ़ा करती हैं। पटना और भागलपुर से होती हुई यह बंगाल में दाख़िल होती है और सुंदरबन का अज़ीम वीराना बनाती है। गंगा ने उत्तरी भारत के मैदानों को अंतहाई ज़रखेज़ बनाया है और मुल्क की आधी आबादी अपनी मआशत के लिए इस पर मुन्हसिर है। अफ़सोसनाक पहलू यह है कि बढ़ती हुई शहरी आलूदगी और औद्योगिक फ़ज़लह इस नदी को गंदा कर रही है, जिससे बचाव निहायत ज़रूरी है।</p>
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<h3>❤️ سبق 8 : کابلی والا (کہانی)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1OUXjvmfgnvRkM8ULJCkDpnPfjvswmiVF" /><br />
यह कहानी रवींद्र नाथ टैगोर की तहरीर कर्दह है, जिसका उनवान &#8216;काबुली वाला&#8217; है। यह पाँच सालह मुन्नी और काबुल के मेवा फ़रोश रहमत के गिर्द घूमती है। मुन्नी शुरू में रहमत से डरती थी, लेकिन जल्द ही उनके दरमियान गहरी दोस्ती हो गई। रहमत मुन्नी को मेवे में तोहफ़े देता और वह दोनों एक दूसरे से मज़ाहिया बातें करते। रहमत अक्सर मुन्नी से &#8216;ससुराल&#8217; जाने का मज़ाक़ करता। बदकिस्मती से, एक झगड़े में रहमत के हाथों एक शख्स ज़ख़्मी हो गया और उसे सात साल क़ैद की सज़ा सुनाई गई। बरसों बाद जब वह रिहा होकर आया, तो वह मुन्नी की शादी का दिन था। मुन्नी अब बड़ी हो चुकी थी और उसे भूल चुकी थी। जब रहमत ने अपनी बेटी के हाथ का निशान दिखाया, तो मुन्नी के वालिद को एहसास हुआ कि वह महज़ एक सौदागर नहीं बल्कि एक मजबूर बाप है। यह कहानी बाप की अपनी औलाद के लिए बे-लुत्फ़ मोहब्बत की एक बेहतरीन मिसाल है जो सरहदों से आज़ाद है। यह हमें सिखाती है कि एक बाप का दिल हर जगह एक जैसा होता है। रहमत की ग़ुरबत और उसकी अपनी बेटी के लिए तड़प इस कहानी का सब से जज़्बाती पहलू है जो हर क़ारी को मुतास्सिर करता है।</p>
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<h3>❤️ سبق 9 : گاندھی جی (مضمون)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1X_LvGndWFE2KS6Vy7pIPAalTyjRR-ewT" /><br />
यह पाठ महात्मा गांधी की मिसाली ज़िंदगी और हिंदोस्तान की आज़ादी में उनके अज़ीम करदार पर रोशनी डालता है। मोहन दास करमचंद गांधी 2 अक्तूबर 1869 को पोरबंदर में पैदा हुए। लंदन से वकालत की तालीम हासिल करने के बाद वह बैरिस्टर बने। दक्षिण अफ़्रीक़ा में उन्होंने हिंदोस्तानियों के साथ होने वाली ना-इंसाफ़ियों के ख़िलाफ़ &#8216;सत्याग्रह&#8217; की तहरीक चलाई। हिंदोस्तान वापसी पर वह तहरीके-आज़ादी के सब से बड़े लीडर बन गए। उन्होंने ब्रिटिश राज के ख़िलाफ़ अदम-तआवुन, नमक सत्याग्रह और &#8216;हिंदोस्तान छोड़ो&#8217; जैसी अहम तहरीकों की क़यादत की। गांधी जी का फ़लसफ़ा सच्चाई, अदम-तशद्दुद और इंसानी हमदर्दी पर मुबनी था। उन्होंने समाज से छुआछूत ख़त्म करने के लिए &#8216;हरिजनों&#8217; की फ़लाह व बेहबूद के लिए काम किया। उनकी अंतहा कोशिशों से 15 अगस्त 1947 को मुल्क आज़ाद हुआ। अफ़सोस कि 30 जनवरी 1948 को दिल्ली में उन्हें शहीद कर दिया गया। उनकी अज़ीम ख़िदमात की बदौलत उन्हें &#8216;बापू&#8217; और &#8216;बाबाए-क़ौम&#8217; कहा जाता है। उनकी ज़िंदगी सादगी और अलौक इंसानी अक़ीदे का मजमूआ है। वह आज भी दुनिया भर में अमन के पैग़म्बर के तौर पर पहचाने जाते हैं और उनकी तालीमात हमें नफ़रत के ख़िलाफ़ मोहब्बत और सच्चाई का रास्ता दिखाती हैं।</p>
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<h3>❤️ سبق 10 : کمپیوٹر (مضمون)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1Vnv2ZWaUAgHqHw6o7KTg0o9g385YNmso" /><br />
यह पाठ &#8216;कंप्यूटर&#8217; के बारे में है जो एक जदीद और हैरतअंगेज़ मशीन है। पाठ की शुरुआत एक सादे कैलकुलेटर की मिसाल से होती है जो हिसाब किताब में आसानी पैदा करता है, लेकिन कंप्यूटर उस से कहीं ज़्यादा पेचीदा और ताक़तवर आला है। कंप्यूटर इंसानी दिमाग़ की तरह काम करता है, मालूमात को माहफ़ूज़ करता है (फ़ीडिंग) और उन्हें ख़ास मक़ासद के लिए इस्तेमाल के क़ाबिल बनाता है (प्रोग्रामिंग)। यह ग़लती नहीं करता और मालूमात का एक वसीअ ख़ज़ाना अपने अन्दर समोए रखता है। कंप्यूटर की अफ़ादित का ज़िक्र करते हुए बताया गया है कि यह हर शोबा ज़िंदगी में इस्तेमाल हो रहा है, चाहे वह बैंक हो, लाइब्रेरी, अस्पताल या कारख़ाना। ख़ास तौर पर ख़तरनाक जगहों पर इंसान की जगह कंप्यूटर यानी &#8216;रोबोट&#8217; काम करते हैं। मौसमियात, ख़लाई तहक़ीक़, और पाइलेट्स की रहनुमाई में भी इसका अहम करदार है। वक़्त के साथ इसकी जिस्मात छोटी होती गई लेकिन काम की रफ़्तार और सलाहियत बढ़ती गई। मुसन्निफ़ का ख़्याल है कि मुस्तक़बिल में कंप्यूटर घर के काम-काज, खाना पकाने और सफ़ाई सतहराई में भी मददगार साबित होगा, जिस से इंसानी ज़िंदगी मज़ीद आसान हो जाएगी। आख़िर में अल्लामा इक़बाल के शेर के ज़रिए इस साइंसी तरक़्क़ी की हैरतअंगेज़ी को बयान किया गया है, जो दुनिया को बदल कर रख देगी।</p>
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<h3>❤️ سبق 11 : کہنا بڑوں کا مانو (نظم)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1NwEBhRIXPTWViLgjMFlqMThyOJA2ni1m" /><br />
यह नज़्म बच्चों को यह सबक़ देती है कि बड़ों की बात माननी चाहिए और उनका आदर करना चाहिए। नज़्म में कहा गया है कि बड़ों के पास ज़िंदगी का अनुभव होता है और वे हमारी भलाई के लिए सलाह देते हैं। उनकी बात मानने से हम ग़लतियों से बच सकते हैं और सही रास्ते पर चल सकते हैं। नज़्म में उदाहरण के तौर पर बताया गया है कि जब माँ कहती है कि बारिश में भीगो मत, तो उसकी बात माननी चाहिए नहीं तो बीमार पड़ सकते हैं। पिता कहते हैं कि पढ़ाई पर ध्यान दो, तो उनकी बात मानकर हम ज़िंदगी में तरक़्क़ी कर सकते हैं। नज़्म इस बात पर ज़ोर देती है कि बड़ों की नसीहतें हमारे लिए एक तोहफ़ा हैं और उन्हें क़द्र की नज़र से देखना चाहिए। यह नज़्म बच्चों में आज्ञाकारिता और सम्मान की भावना विकसित करने में मदद करती है।</p>
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<h3>❤️ سبق 12 : نینی تال (مضمون)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1RiYaFKWS9713yyiZJAk4lvsApnUK_MON" /><br />
यह पाठ &#8216;नैनीताल&#8217; के बारे में है जो राज्य उत्तराखंड का एक अंतहाई मआरूफ़ और दिलकश पहाड़ी मुक़ाम है। अपनी फ़रहत बख़्श आब-ओ-हवा और बेमिसाल क़ुदरती खूबसूरती की बिना पर इसे &#8216;पहाड़ों की मलिका&#8217; का ख़िताब दिया गया है। नैनीताल की दरयाफ़्त का सरा 1841 में पी बैरन नामी एक ताजिर के सर जाता है। यह सैयाहती मुक़ाम काठगोदाम रेलवे स्टेशन से तक़रीबन 22 मील के फ़ासले पर वाक़े है और वहाँ तक पहुँचने वाली बलखाती सड़कें अपनी बनावट में एक साँप की तरह मआरूफ़ होती हैं। नैनीताल के मर्कज़ में एक वसीअ और खूबसूरत झील मौजूद है जिसके गिर्द एक मील लंबी &#8216;माल रोड&#8217; तअमीर की गई है। यहाँ &#8216;आयर पाटा&#8217; और &#8216;चीना&#8217; नामी दो बुलंद पहाड़ हैं, जहाँ से मुतलअ साफ़ होने पर हिमालय की बर्फ़ से ढकी चोटियाँ साफ़ दीखती हैं। नैनीताल के नवाह में भवाली का मुक़ाम है जो अपने सीने टूरिज्म और ज़ाइक़ेदार फूलों के लिए शहरत रखता है। इसके अलावा भीमताल, सातताल, नौकुचियाताल, नल-दमयन्ती ताल और लक्ष्मी ताल जैसी झीलें भी क़ुदरत का शाहकार हैं। सैयाहों के लिए यहाँ कश्ती रानी, घुड़सवारी और कोई पैमाइशी तफ़रीहात मयस्सर हैं। झील के किनारे वाक़े म्युनिसिपल लाइब्रेरी और &#8216;फ्लैट&#8217; का मैदान भी ख़ास अहमियत रखते हैं जहाँ रोज़ाना फुटबॉल और हॉकी के मुक़ाबले होते हैं। नैनीताल में मल्लीताल और तल्लीताल के दो बाज़ार हैं, जिनमें से मल्लीताल अंग्रेज़ी तर्ज़ का है जबकि तल्लीताल में ज़रूरतात-ए-ज़िंदगी की अश्या मिलती हैं। यह मुक़ाम जून, सितंबर और अक्तूबर में सैयाहों से भर जाता है और अपनी दिलकशी की वजह से पूरी दुनिया में मुनफ़रद है।</p>
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<h3>❤️ سبق 13 : کنجوس کی کہانی (راجستھانی کہانی)</h3>
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यह कहानी राजस्थान के एक अंतहाई कंजूस शख्स के गिर्द घूमती है जिसकी ज़िंदगी का वाहिद मक़सद सिर्फ़ और सिर्फ़ दौलत जमा करना था। एक दिन उसकी बीवी ने आम खाने की फ़रमाइश की, लेकिन वह उस पर एक पैसा भी ख़र्च करना नहीं चाहता था। वह सस्ते से सस्ता आम हासिल करने की धुन में एक दुकान से दूसरी दुकान, फिर मुन्शी, आढ़ती और आख़िरकार एक दूर दराज़ बाग़ में पहुँच गया। वहाँ बाग़बान ने उसे यह लालच दिया कि अगर वह ख़ुद दरख्त पर चढ़कर सो आम तोड़ दे तो उसे एक बेहतरीन आम मुफ़्त में मिल जाएगा। कंजूस मुफ़्त के चक्कर में दरख्त की ऊँची और कमज़ोर शाख पर चढ़ गया, जहाँ से उसका तौआज़न बिगड़ गया और वह नीचे मौजूद एक गहरी दलदल के ऊपर लटक गया। उसे बचाने के लिए बारी-बारी से एक हाथी वाला, ऊँट वाला और घोड़े वाला आगे आया। कंजूस ने अपनी जान बचाने की ख़ातिर इन तीनों को सौ-सौ रुपए देने का वअदा किया। आख़िर में जब एक गधे वाले ने उससे पूछा कि इन चारों को उतारने के बदले कुल कितने रुपए मिलेंगे, तो कंजूस ने यह बताने के लिए कहा कि उसे बहुत सा रुपया मिलेगा, जोश में आकर दोनों हाथ फैला दिए। हाथ छूटते ही वह सब के सब नीचे दलदल में जा गिरे। यह दिलचस्प कहानी हमें यह क़ीमती सबक़ सिखाती है कि बख़ीलत, कंजूसी और बेजा लालच इंसान को न सिर्फ़ दूसरों की नज़रों में ज़लील करता है बल्कि उसे बड़ी मुसीबत और ख़तरे में भी डाल देता है।</p>
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<h3>❤️ سبق 14 : غزل (مرزا غالب)</h3>
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यह दस्तावेज़ी मतन मिर्ज़ा असदुल्लाह ख़ाँ ग़ालिब की एक निहायत मक़बूल और शाहकार ग़ज़ल पर मुश्तमिल है, जो तालीमी निसाब की चौदहवीं बाब के तौर पर पेश की गई है। ग़ज़ल का मत्लअ &#8216;अबने मरीम हो कर कोई, मिरे देखे की दुआ करे कोई&#8217; इंसानी बेबसी और ऐसे मसीहा की तलाश की अकासी करता है जो वाक़ई देखे का इलाज कर सके। ग़ालिब ने इस ग़ज़ल में ज़िंदगी की हक़ीक़तों, इंसानी रवैयों और अख़लाक़ी अक़ीदे को बहुत ही सादा और सहल ज़बान में बयान किया है ताकि तलबा इसे आसानी से समझ सकें। ग़ज़ल के अशआर में यह पैग़ाम दिया गया है कि अगर कोई शख्स ग़लत रास्ते पर गामज़न हो तो उसे टोकना और रोकना ज़रूरी है, और अगर किसी से नादानी में ख़ता हो जाए तो दरगुज़र और माफ़ी का जज़्बा अपनाना चाहिए। मक़्तअ में ग़ालिब ने अपनी रवायती इन्फ़रादियत के साथ बयान किया है कि जब ज़िंदगी में किसी से कोई तोक़अ या उम्मीद ही बाक़ी न रहे, तो फिर किसी से गिला या शिकायत करना फ़ज़ूल है। इस सबक़ में ग़ज़ल के अलावा मुश्किल अलफ़ाज़ के मआनी, तफ़हीमी सवालात और जुमलों में इस्तेमाल जैसी मशक़्क़ात भी दी गई हैं, जो तलबा की उर्दू ज़बान पर गिरफ़्त मज़बूत करने में मददगार साबित होती हैं। यह मवाद न सिर्फ़ शेरी ज़ौक़ की तस्कीन करता है बल्कि समाजी इस्लाह और हमदर्दी का दर्स भी देता है।</p>
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<h3>❤️ سبق 15 : دلھ کی جامع مسجد (مضمون)</h3>
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यह पाठ दिल्ली की मशहूर जामा मस्जिद के बारे में है, जो न सिर्फ़ हिंदोस्तान बल्कि पूरी दुनिया में अपनी खूबसूरती और फ़न्न-ए-तामीर के लिए जानी जाती है। इस अज़ीम-उल-शान मस्जिद को मुग़ल बादशाह शाहजहाँ ने तक़रीबन तीन सौ साल पहले तामीर करवाया था। इसकी तामीर की निगरानी बादशाह के वज़ीर सअदुल्लाह ख़ाँ और ख़ानसामाँ फ़ज़ल ख़ाँ ने की। मस्जिद एक छोटी पहाड़ी पर वाक़े है जिसे &#8216;भोजला पहाड़ी&#8217; कहा जाता था। इसकी तामीर में छ हज़ार कारीगरों और मज़दूरों ने छ साल तक काम किया और लाखों रुपए ख़र्च हुए। मस्जिद में ज़्यादातर लाल पत्थर इस्तेमाल किया गया है, जबकि सफ़े में सफ़ेद और काले पत्थर का फ़र्श बचाया गया है जो मुसल्लियों का मन्ज़र पेश करता है। मस्जिद के तीन बड़े गुंबद और दो बुलंद मीनार हैं जिन पर चढ़कर पूरी दिल्ली का नज़ारा किया जा सकता है। मस्जिद की कर्सी बहुत ऊँची है, और इसके तीन बड़े दरवाज़े हैं जिन तक पहुँचने के लिए बहुत सी सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं। ख़ास तौर पर जुमअतुल-विदा और ईदैन के मुक़ाम पर यहाँ हज़ारों लोग नमाज़ के लिए जमा होते हैं, जिस से एक रूह-परोर मन्ज़र पैदा होता है। यह मस्जिद मुग़ल दौर की बेहतरीन फ़न्न-ए-तामीर का शाहकार है।</p>
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<h3>❤️ سبق 16 : غریب بچہ اور جادوگر (تبّت کی کہانی)</h3>
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यह कहानी एक ग़रीब बच्चे और एक जादूगर के गिर्द घूमती है। एक तिब्बती गाँव में कुछ ग़रीब बच्चे सड़क के किनारे मिट्टी के घरौंदों से खेल रहे थे। इन के वालिदीन इतने ग़रीब थे कि वह इन्हें खिलौने या अच्छा खाना फ़राहम नहीं कर सकते थे। इन बच्चों में एक बच्चा सब से ज़्यादा मुफ़लिस था, जिस के पास अक्सर खाने को कुछ नहीं होता था और वह भूखा ही रह जाता था। एक दिन एक अंधा फ़क़ीर, जो हक़ीक़त में एक जादूगर था, वहाँ से गुज़रा। दूसरे बच्चों ने अपने हिस्से की रोटी में से कुछ लक़मे उसे दिए, लेकिन ग़रीब बच्चा अपनी ख़ाली झोली की वजह से कुछ न दे सका और बहुत अदब से हुआ। जादूगर ने उस की क़ीफ़ियत भाँप ली और उस से कहा कि जो तुम्हारी झोली में हाथ में है वही दे दो। बच्चे के हाथ में मिट्टी की एक गेंद थी जिसे उसने जादूगर को थमा दी। जादूगर के छूते ही वह मिट्टी सोने की गेंद में बदल गई। इस मोअजिज़ाती तोहफ़े ने उस बच्चे और उस की माँ की ज़िंदगी बदल दी। वह गेंद जो चीज़ छूती वह सोना बन जाती। इस तरह वह बच्चा न सिर्फ़ ख़ुद ख़ुशहाल हुआ बल्कि अपने दोस्तों के लिए भी बेहतरीन खाने और खिलौनों का सबब बना। यह कहानी हमें सिखाती है कि ख़ुलूस-ए-नीयत और दूसरों की मदद करने की तड़प कभी राईगाँ नहीं जाती और अल्लाह इस का अजर ज़रूर देता है।</p>
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<h3>❤️ سبق 17 : برسات (نظم)</h3>
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यह नज़्म &#8216;बरसात&#8217; उर्दू के नामवर शायर इस्माइल मेरठी की एक खूबसूरत तख़लीक़ है, जिस में उन्होंने बारिश के मौसम की दिलकशी और फ़ितरत पर उस के गहरे असरात को निहायत अमदगी से बयान किया है। नज़्म का आग़ाज़ आसमान पर छाए वाले काले बादलों के ज़िक्र से होता है, जिन की सनसनाहट और आहट बारिश की आमद की नुबैर सुनाती है। जैसे ही मेह बरसता है, गर्मी से ज्हलसी हुई बेजान मिट्टी में नई जान पड़ जाती है और हर तरफ़ ज़िंदगी के आसार नुमायदार होने लगते हैं। किसानों की ख़ुशी देखने लायक़ होती है क्योंकि उन की सख़्त मेहनत थकाने लगती है और ख़ेत लहलहाने लगते हैं। शायर कहता है कि बरसात के बाइस ज़मीन से जड़ी बूटियाँ और हरे-भरे पौधे निकल आते हैं जिन पर अजब बेल बूटे और रंग-बिरंगे फूल खिलते हैं। क़ुदरत का यह करिश्मा है कि सिर्फ़ दो दिन के अंदर वह मैदान जो कल तक चटीला और बंजर नज़र आता था, आज वहाँ घास का एक वसीअ बन खड़ा है और जंगल का जंगल हरा हो गया है। जानवर भी इस ख़ुशगवार तबदीली से मसरूर होकर अधर-अधर फुदकने लगते हैं, ऐसा मअलूम होता है जैसे ज़मीन के पर निकल आए हों। यह नज़्म बच्चों को क़ुदरत के मनाज़िर से रोशनास कराने और बरसात की बरकतों को समझने का एक बेहतरीन ज़रिया है, जो ज़मीन की शादाबी और हरियाली का खूबसूरत मुरक़अ पेश करती है। इस के अलावा, नज़्म में बारिश के बाद की ताज़गी और ख़ुशबू का एहसास भी नमाया है जो रूह को बालिदगी बख़्शता है। इस्माइल मेरठी ने सादा मगर परासर अलफ़ाज़ के ज़रिए यह पैग़ाम दिया है कि बरसात सिर्फ़ एक मौसम नहीं बल्कि ज़मीन के लिए रहमत और नई ज़िंदगी की अलामत है। यह नज़्म न सिर्फ़ बच्चों की दिलचस्पी का बाइस है बल्कि बड़ों को भी क़ुदरत के उन हसीन मनाज़िर की याद दिलाती है जो अक्सर हमारी मसरूफ़ ज़िंदगियों में नज़र-अंदाज़ हो जाते हैं।</p>
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<h3>❤️ سبق 18 : شکّر کا چکّر (انشایہ)</h3>
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यह एक मज़ाहिया इनशाइयह है जिस में मुसन्निफ़ ने राशन की दुकान से शक्कर हासिल करने की जद्दोजहद को तंज़ीही और मज़ाहिया अंदाज़ में बयान किया है। कहानी का आग़ाज़ तब होता है जब वालिद साहिब मुसन्निफ़ को शक्कर लाने की ज़िम्मेदारी देते हैं, जिस पर घर के तमाम अफ़राद उसे ऐसे विदा करते हैं जैसे वह किसी ख़तरनाक मैदान-ए-जंग में जा रहा हो। दुकान पर पहुँचकर मुसन्निफ़ को एक ऐसी तवील क़तार का सामना करना पड़ता है जहाँ लोग चींटियों की तरह जमा हैं और पुलिस वाले बंदरों से अनतज़ाम संभाल रहे हैं। लाइन में धक्का-पेल, लड़ाई-झगड़ा, जेब तराशी और सियासी बहसें आम हैं। मुसन्निफ़ बड़ी मुश्किल से क़तार में जगह बनाता है लेकिन एक रेल के बाइस लाइन से बाहर निकल जाता है। वहाँ एक सियासी लीडर भी मिलता है जो &#8216;सोशलिज़्म&#8217; और &#8216;इंक़लाब&#8217; के दावे तो करता है लेकिन क़तार में घुसने के लिए हर क़िस्म के हथियार इस्तेमाल करता है। यह पाठ दरअसल सरकारी तक़्सीम के निज़ाम की ख़राबियों और आम आदमी की बेबसी को मज़ाहिया रंग में पेश करता है। आख़िर में जब मुसन्निफ़ दोबारा क़तार में शामिल होने में कामयाब होता है, तो अचानक दुकानदार शक्कर ख़त्म होने का एलान करके दुकान बंद कर देता है, जो एक तंज़ीही इख़्तिताम है। यह तहरीर मआशरे के सलगते हुए मसाइल को हल्के-फुल्के अंदाज़ में बयान करने की एक बेहतरीन मिसाल है और उर्दू अदब में इनशाइयह निगारी का एक बेहतरीन नमूना है।</p>
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<h3>❤️ سبق 19 : غزل (شاد عظیم آبادی)</h3>
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शाद अज़ीमाबादी की इस शाहकार ग़ज़ल में इंसानी ज़िंदगी की गहराई, उस की बे-सबाती और दुनियावी तअल्लुक़ात की आरज़ी हक़ीक़त को निहायत परासर और फलसफ़ियाना पैराए में बयान किया गया है। शायर इस बुनियादी हक़ीक़त का इज़हार करता है कि इंसान इस दुनिया में अपनी मरज़ी या ख़्वाहिश से नहीं रखता बल्कि उसे अल्लाह तआला के हुक्म और मशीयत से यहाँ लाया गया है। यहाँ आकर वह अपनी ही उन गिनत तमन्नाओं और लाहासिल दुनियावी ख़्वाहिशात के एक ऐसे पेचीदा जाल में उलझ जाता है कि अपनी असल पहचान और मक़सद-ए-हयात को मुकम्मल तौर पर फ़रामोश कर बैठता है। शायर ने इस दुनिया की परकश्श और फ़ानी चीज़ों को रंगीन खिलौनों से तशबीह दी है, जिस तरह एक मअसूम बच्चा नए खिलौनों में मगन होकर अपनी हर फ़िक्र भूल जाता है, वैसे ही इंसान भी दुनियावी आसाइशों और वक़ती लज़्ज़तों में खोकर अपनी अबदी मंज़िल से ग़ाफ़िल हो गया है। इस ग़ज़ल के अशआर में दुनिया को एक ऐसी आरज़ी महफ़िल क़रार दिया गया है जहाँ से एक न एक दिन हर ज़े-रूह को लाज़िमी उठाना है। शायर कहता है कि वह इस ज़िंदगी के हर नसीब व फ़राज़ और हर ज़र्रे की हक़ीक़त से बखूबी वाक़िफ़ हो चुका है और उसे मालूम है कि यहाँ की हर रौनक़ फ़ानी है। वह अपनी क़ब्र यानी लहद में जाने को इस दुनिया की भरी महफ़िल से उठ जाने पर फ़ौक़ियत देता है, जो उस की दुनियावी बेज़ारी और आख़िरत की तलब की अलामत है। ग़ज़ल का बुनियादी पैग़ाम यह है कि इंसान को इस फ़ानी दुनिया की ज़ाहिरी चमक-दमक और धूएँ में अलजह न होकर हमेशा अपने ख़ालिक़ को याद रखना चाहिए और अपनी अबदी ज़िंदगी की तैयारी करनी चाहिए। यह कलाम इंसान को मादा परस्ती के अंधेरों से निकालकर रूहानियत, बेदारी और हक़ीक़त पसंदी की रोशन राहों की तरफ़ राग़िब करता है और उसे ज़िंदगी की असल क़दर व क़ीमत समझाता है।</p>
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<h3>❤️ سبق 20 : شہید پیر علی (سوانح)</h3>
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शहीद पीर अली हिंदोस्तान की जद्दोजहद-ए-आज़ादी के एक अज़ीम और नूर मजाहिद थे। वह पटना के रहने वाले थे और पटना सिटी में उन की एक किताबों की दुकान थी जो इंक़लाबियों और आज़ादी के मुतावल्लों का मर्कज़ थी। पीर अली ने हर तबक़े के लोगों के साथ मिलकर अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ ख़ुफ़िया सरगर्मियाँ चलाईं और वतन को ग़ुलामी से नजात दिलाने के मनसूबे बनाए। जब 30 जुलाई 1857 को अंग्रेज़ अफ़सर विलियम टेलर ने धोखे से मआज़िज़ बुज़ुर्गों को गिरफ़्तार किया, तो आवामी ग़म व ग़ुस्सा भड़क उठा और पीर अली की क़यादत में इहतिजाजी जलूस निकाला गया। अंग्रेज़ों की वहशियाना काररवाइयों के जवाब में पीर अली ने एक अंग्रेज़ अफ़सर वॉकटर लेन को हलाक कर दिया। इस वाक़े के बाद उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया। जज ने उन्हें फाँसी की सज़ा सुनाई, लेकिन वह ज़रा भी न घबराए और निहायत सकून के साथ शहादत के लिए तैयार हो गए। 8 जुलाई 1857 को उन्हें पटना के गांधी मैदान में फाँसी दे दी गई। अपनी शहादत से पहले उन्होंने अंग्रेज़ों को ललकारते हुए कहा कि आज तुम हमें फाँसी तो दे सकते हो लेकिन हमारे ख़ून से ऐसे मजाहिद पैदा होंगे जो तुम्हारी हुकूमत को निस्त-ओ-नाबूद कर देंगे।</p>
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<h3>❤️ سبق 21 : غزل (کلیم عاجز)</h3>
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यह ग़ज़ल कलीम आजिज़ की एक निहायत परासर और खूबसूरत तख़लीक़ है जिस में उन्होंने दौरे-हाज़िर के समाजी बग़ावत, अख़लाक़ी गिरावट और इंसानी रिश्तों में बढ़ती हुई सर्द मेहरी पर गहरी चोट की है। शायर के बकौल, अगरचे इस मादी दुनिया के हुजूम में हर उम्र के लोग कस्रत से मिल जाते हैं, लेकिन वह बा-अख़लाक़ लोग मफ़क़ूद हैं जो सच्ची मोहब्बत और ख़ुलूस-ए-दिल के साथ पेश आएँ। आज के परफ़ेक्शन दौर में दोस्ती का लिबास अक्सर लोग दुश्मन ही जाँ साबित होते हैं, जो कि समाज की ज़बूँ हाली और मुनाफ़क़त का मुँह बोलता सबूत है। शायर ज़िंदगी की कड़वी हक़ीक़त बयान करते हुए कहता है कि यहाँ आराम व आसाइश बग़ैर किसी मशक़्क़त और कड़ी जद्दोजहद के हासिल नहीं हो सकती, जिस तरह हसीन फूल हमेशा नुकीले काँटों के दरमियान छपे होते हैं, वैसे ही सच्ची ख़ुशी और क़लबी राहत भी सख़्त मेहनत के बाद ही नसीब होती है। ग़ज़ल के आख़िरी अशआर में शायर ने वतन से दूरी के करब और दियार-ए-ग़ैर में अपनों की याद का तज़किरा निहायत दर्दमंद और सोज़-ओ-गुदाज़ के साथ किया है। यह कलाम हमें यह अज़ीम सबक़ देता है कि दुनिया के हुजूम में सच्चे और खरे इंसान की पहचान वक़्त की अहम ज़रूरत है और वतन की मिट्टी से वाबस्तगी इंसान की रूह का नागज़ीर हिस्सा होती है। कलीम आजिज़ ने मोहब्बत, मेहनत, ख़ुलूस और हुब्ब-ए-वतनी जैसे आफ़ाक़ी मौज़ूआत को निहायत सादगी और सलासत के साथ अशआर में परोया है, जो हर क़ारी को इस बात पर ग़ौर व फ़िक्र की दावत देते हैं कि मादा तरक़्क़ी के इस दौर में इंसानियत, अख़लाक़ी अक़ीदे और बाहमी हमदर्दी के जज़बात को ज़िंदा रखना कितना नागज़ीर है।</p>
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<h3>❤️ سبق 22 : بہادر شاہ کا ہاتھی (مضمون)</h3>
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यह पाठ &#8216;बहादुर शाह का हाथी&#8217; मुग़ल बादशाह बहादुर शाह ज़फ़र के दौर के एक ग़ैर मआमूली और क़द आवर हाथी &#8216;मुल्ला बख़्श&#8217; की दास्तान है। यह हाथी इतना बुलंद क़ामत था कि दिल्ली के किसी भी दरवाज़े से गुज़रते वक़्त उसे घुटने टेकने पड़ते थे, यहाँ तक कि बादशाह ने उस के लिए लाहौरी दरवाज़े को ख़ुसूसी तौर पर तआला कर उँचा करवाया। मुल्ला बख़्श का फ़ील बान बख़ारा का एक मआज़िज़ सैय्यद था, जिसे बादशाह ने &#8216;मोहब्बत ख़ाँ&#8217; का ख़िताब और जागीर अता की थी। एक हादिसे में मुल्ला बख़्श ने मसीहा के आलिम में सैय्यद साहिब को हलाक कर दिया, लेकिन जब उन की बीवी ने अपने नन्हे बच्चे को बदले में हाथी के सामने वाला, तो हाथी की ममता या वफ़ादारी जाग उठी और उस ने बच्चे को नुक़सान पहुँचाने के बजाए अपनी सूँड़ से उठाकर गर्दन पर बिठा लिया। उस दिन से हाथी और उस बच्चे, रहमत अली, के दरमियान एक गहरा याराना क़ायम हो गया। मुल्ला बख़्श मुहल्ले के बच्चों के साथ खेलता, उन्हें अपनी सूँड़ से सवारी करवाता और अपनी ख़ुराक यानी गन्ने और मोटी रोटियाँ उन में बाँटकर खाता। जब हुकूमती हुक्म पर बच्चों का फ़ील ख़ाना आना बंद हुआ तो हाथी ने तीन दिन तक कुछ नहीं खाया, जिस पर बादशाह ने पहले ही हुक्म दिया। मीर बाक़र अली दिल्लोवी ने इस कहानी में जानवरों की नफ़सियात और उन की इंसान दोस्ती को निहायत दिलचस्प पैराए में बयान किया है।</p>
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