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	<title>Class 5th Books Archives - Bihar Board Books</title>
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		<title>Bihar Board Class 5 EVS Book 2026 PDF Download (पर्यावरण और हम)</title>
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		<pubDate>Sun, 24 Jul 2022 08:45:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Class 5th Books]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>Bihar Board 5th EVS Book 2026 PDF Download (पर्यावरण और हम) Bihar Board Class 5 EVS Book 2026 PDF Download &#8211; इस पेज पर बिहार बोर्ड 5th के छात्रों के लिए &#8220;Environmental Studies (पर्यावरण और हम)&#8221; Book दिया गया है &#124; जिसे आप अपने फ़ोन में Free Download कर सकते हैं &#124; 🌐 सभी विषयों [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<h2 style="text-align: center;"><span style="text-decoration: underline; color: #ff0000;"><strong>Bihar Board 5th EVS Book 2026 PDF Download </strong></span><span style="text-decoration: underline; color: #ff0000;"><strong>(पर्यावरण और हम)</strong></span></h2>
<p><img data-recalc-dims="1" decoding="async" class="aligncenter" src="https://i0.wp.com/biharboardbooks.com/wp-content/uploads/2022/07/bihar_board_books-min.png?ssl=1" /> <strong>Bihar Board Class 5 EVS Book 2026 PDF Download</strong> &#8211; इस पेज पर बिहार बोर्ड 5th के छात्रों के लिए &#8220;<span style="text-decoration: underline;"><strong>Environmental Studies (पर्यावरण और हम)</strong></span>&#8221; Book दिया गया है | जिसे आप अपने फ़ोन में Free Download कर सकते हैं |</p>
<blockquote><p>🌐 सभी विषयों की बुक्स डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें -&gt; <a href="https://biharboardbooks.com/"><strong>https://biharboardbooks.com/</strong></a></p>
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<p>सभी बुक्स का डाउनलोड लिंक नीचे पेज पर दिया गया है |</p>
<h2 style="text-align: center;"><span style="text-decoration: underline; color: #3366ff;"><strong>BSEB Class 5 Environmental Studies Book PDF Free Download</strong></span></h2>
<p><span style="font-size: 18pt;"><strong>☞</strong></span> बुक्स डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए डाउनलोड लिंक पर क्लिक करें | <img decoding="async" class="aligncenter" src="https://i0.wp.com/biharboard-ac.in/wp-content/uploads/2022/07/kindpng_6137677-min.png?resize=601%2C111&amp;ssl=1" alt="line" /></p>
<h3>❤️ 1. पटना से नथुला तक</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1qkl7kuKaknk0j-g2guRD-W1iuOLXuMQh" /></p>
<p>यह पाठ पटना से सिक्किम की राजधानी गंगटोक और भारत-चीन सीमा पर स्थित नाथुला दर्रे तक की एक रोमांचक यात्रा का वर्णन करता है। यात्रा की शुरुआत पटना जंक्शन से होती है, जिसके बाद यात्री न्यू जलपाईगुड़ी पहुँचते हैं और फिर दार्जिलिंग की पहाड़ियों की ओर बढ़ते हैं। दार्जिलिंग में लेखक ने &#8216;टाइगर हिल&#8217; से कंचनजंगा की सतरंगी चोटी का अद्भुत दृश्य देखा और हिमालय पर्वतारोहण संस्थान में महान पर्वतारोही तेनजिंग नोरगे के बारे में जाना।</p>
<p>यहाँ पर्वतारोहण के कठिन प्रशिक्षण और आवश्यक उपकरणों जैसे ऑक्सीजन सिलेंडर और स्लीपिंग बैग के महत्व को बताया गया है। इसके बाद यात्रा गंगटोक की ओर बढ़ती है, जो अपनी स्वच्छता और व्यवस्थित यातायात के लिए प्रसिद्ध है। लेखक ने यहाँ के महात्मा गांधी मार्ग की सुंदरता और लेप्चा, नेपाली एवं भूटिया समुदायों की संस्कृति का अनुभव किया।</p>
<p>यात्रा का अंतिम पड़ाव 14,500 फीट की ऊँचाई पर स्थित नाथुला था, जहाँ बर्फ की चादरों के बीच गर्व से लहराता तिरंगा और सीमा पर तैनात वीर सैनिकों के दर्शन हुए। यह मार्ग प्राचीन &#8216;सिल्क मार्ग&#8217; का हिस्सा रहा है। यह अध्याय प्राकृतिक सौंदर्य, पर्यावरण संरक्षण और साहस की प्रेरणा देता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ 2. खेल</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1LFlwBTwcZ9zSNeH-cUU_bK0523aB3wI1" /></p>
<p>यह पुस्तक का अध्याय &#8216;खेल&#8217; बच्चों को विभिन्न खेलों और उनके महत्व से परिचित कराता है। कहानी की शुरुआत कक्षा 5 के बच्चों से होती है, जो अपनी शिक्षिका के साथ मैदान में खो-खो खेलते हैं। खेल के माध्यम से वे टीम बनाने, टॉस करने और नियमों का पालन करने जैसी प्रक्रियाएँ सीखते हैं।</p>
<p>इसके बाद, सुखदा और सलमा अखाड़े में कुश्ती देखने जाती हैं, जहाँ उन्हें पता चलता है कि कुश्ती लड़ाई नहीं बल्कि एक अनुशासित खेल और व्यायाम है। अध्याय में &#8216;मार्शल आर्ट&#8217; की अवधारणा को भी समझाया गया है, जिसे आत्मरक्षा और शरीर को हृष्ट-पुष्ट रखने के लिए सीखा जाता है। इसमें भारत की पारंपरिक कुश्ती, सिख समुदाय का &#8216;गतका&#8217; और जापान के &#8216;सूमो&#8217; जैसे खेलों का उल्लेख है।</p>
<p>पुस्तक बच्चों को घर के अंदर और बाहर खेले जाने वाले खेलों की सूची बनाने और उनके नियमों को समझने के लिए प्रेरित करती है। अंत में, स्वस्थ रहने के लिए व्यायाम और योग के महत्व पर जोर दिया गया है और क्रिकेट जैसे प्रसिद्ध खेलों की चर्चा की गई है। यह पाठ खेल भावना, निरंतर अभ्यास और शारीरिक विकास के संदेश को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ 3. बीजों का बिखरना</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1irvzn3cAPyxHjS-ILBB1Gi9pHU1gN6rK" /></p>
<p>यह अध्याय &#8216;बीजों का बिखरना&#8217; प्रकृति में पौधों के विस्तार और उनकी उत्तरजीविता की प्रक्रिया को विस्तार से समझाता है। कहानी की शुरुआत जमुई के लछुआड़ गाँव में जैन मंदिर के भ्रमण से होती है, जहाँ बच्चे दीवार पर उगे पीपल के पौधे को देखकर आश्चर्यचकित होते हैं।</p>
<p>शिक्षिका बच्चों को बताती हैं कि बीज अनुकूल परिस्थितियाँ (मिट्टी, पानी, हवा और ताप) मिलने पर कहीं भी अंकुरित हो सकते हैं। बीजों के एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने को &#8216;बीजों का बिखरना&#8217; कहा जाता है, जो प्रजातियों की सुरक्षा और विस्तार के लिए आवश्यक है।</p>
<p>बिखरने के मुख्य माध्यमों में हवा (कपास के हल्के बीज), पानी (कमल और कुमुदनी), पक्षी (जो फल खाकर बीज मल के साथ निकालते हैं), और जानवर (जैसे गोखरू जो शरीर से चिपक जाते हैं) शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, कुछ बीज जैसे गुलमेंहदी सूखकर चटकने से बिखरते हैं।</p>
<p>यह प्रक्रिया न केवल पौधों की प्रजातियों को बचाती है, बल्कि मनुष्यों को भी विभिन्न स्थानों पर उपयोगी वनस्पतियाँ उपलब्ध कराती है।</p>
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<h3>❤️ 4. मेरा बगीचा</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1xXZZmbpnbCcuCxzDbcYN7WcKELZSpfX0" /></p>
<p>यह पाठ &#8216;मेरा बगीचा&#8217; एक बच्चे के अनुभव पर आधारित है जिसका परिवार राजस्थान के लक्ष्मणगढ़ में स्थानांतरित हो गया है। वहां के कॉलेज परिसर में रहते हुए, वह बच्चा अपने आसपास की प्राकृतिक विविधता को देखकर आश्चर्यचकित होता है। उसे पता चलता है कि परिसर में तितलियों की 17 और पक्षियों की 87 प्रजातियां मौजूद हैं।</p>
<p>जिज्ञासावश, वह विभिन्न पौधों, फूलों और पत्तियों को इकट्ठा करना शुरू करता है। उसकी माँ उसे &#8216;हरबेरियम&#8217; बनाने की विधि सिखाती है, जिसमें पौधों को अखबार के बीच दबाकर सुखाया जाता है ताकि वे सिकुड़ें नहीं। बच्चा बगीचे के पौधों, पानी के पौधों और मरुस्थलीय पौधों जैसे बबूल और कैक्टस के बीच के अंतर को समझता है।</p>
<p>वह यह भी सीखता है कि दो एक समान दिखने वाले दूब के पौधों में भी सूक्ष्म भिन्नताएं होती हैं। अंततः, वह 40 विभिन्न पौधों की एक प्रदर्शनी लगाता है और यह निष्कर्ष निकालता है कि पेड़-पौधों की विविधता ही विभिन्न जीव-जंतुओं के अस्तित्व का आधार है। पाठ पर्यावरण संरक्षण और अवलोकन कौशल विकसित करने पर जोर देता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ 5. ऐतिहासिक स्मारक</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1Uq9_x4C-E-DTiTni8Z2Lqn5Uwny8gNs5" /></p>
<p>यह अध्याय बिहार के ऐतिहासिक स्मारकों, मुख्य रूप से प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय पर केंद्रित है। जरताज, सना और जैनब की यात्रा के माध्यम से, यह दुनिया के पहले आवासीय विश्वविद्यालय के रूप में नालंदा के महत्व को रेखांकित करता है। इसकी स्थापना 5वीं शताब्दी में गुप्त सम्राट कुमारगुप्त द्वारा की गई थी और यह 8वीं से 12वीं शताब्दी के बीच अपने चरमोत्कर्ष पर था।</p>
<p>यहाँ 10,000 छात्र और 2,000 शिक्षक थे, जो चीन, जापान और कोरिया जैसे देशों से आते थे। चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी यहाँ शिक्षा ग्रहण की थी। विश्वविद्यालय का पुस्तकालय &#8216;धर्मगंज&#8217; नौ मंजिला था और तीन भागों—रत्न दधि, रत्न रंजक और रत्न सागर में विभाजित था।</p>
<p>पाठ में बिहार के अन्य महत्वपूर्ण स्थलों जैसे बोधगया, वैशाली, केसरिया स्तूप, पटना का गोलघर, औरंगाबाद का देव सूर्य मंदिर और पावापुरी के जल मंदिर का भी उल्लेख है। यह सम्राट अशोक के स्तंभों और बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के बारे में जानकारी देता है। अंत में, यह ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल देता है और नालंदा विश्वविद्यालय को पुनर्जीवित करने के आधुनिक प्रयासों, जिसमें डॉ.</p>
<p>ए.पी.जे. अब्दुल कलाम और डॉ. अमर्त्य सेन की भूमिका है, का वर्णन करता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ 6. सिंचाई के साधन</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=19r5vYopCdN7TGkeSX0dVFhgpj87Jpyp0" /></p>
<p>यह पुस्तक अध्याय सिंचाई के साधनों और कृषि में उनके महत्व पर केंद्रित है। कहानी दानिश और शारा के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने नानाजी के गाँव जाते हैं और खेतों में पानी की उपलब्धता में अंतर देखते हैं।</p>
<p>नानाजी उन्हें समझाते हैं कि पौधों के विकास के लिए पानी आवश्यक है और जब वर्षा पर्याप्त नहीं होती, तो सिंचाई के विभिन्न साधनों का उपयोग किया जाता है। पाठ में बताया गया है कि धान जैसी फसलों को अधिक पानी की आवश्यकता होती है, जो मुख्य रूप से वर्षा से प्राप्त होता है, लेकिन कमी होने पर कुओं और मोटर पंपों का उपयोग किया जाता है।</p>
<p>अध्याय में पारंपरिक साधनों जैसे रहट, पईन, नदियों और तालाबों के साथ-साथ आधुनिक साधनों जैसे नलकूप और नहरों का भी उल्लेख किया गया है। यह छात्रों को विभिन्न मौसमों में बोई जाने वाली फसलों और उनकी जल आवश्यकताओं के बारे में सोचने के लिए प्रेरित करता है, जिससे उन्हें ग्रामीण कृषि व्यवस्था और सिंचाई की बदलती तकनीकों की समझ मिलती है।</p>
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<h3>❤️ 7. जितना खाओ उतना पकाओ</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=143sIgEzdNpL_QvnUXP9yBYtctu5Z_jqn" /></p>
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<h3>❤️ 8. रॉस की जंग मलेरिया के संग</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1lNlPDvldW1lphv2W7-SPJwQedXgINRTq" /></p>
<p>यह पुस्तक महान चिकित्सक रोनाल्ड रॉस के जीवन और मलेरिया की खोज में उनके संघर्ष पर आधारित है। रॉस का जन्म भारत के अल्मोड़ा में हुआ था। चिकित्सा की पढ़ाई के बाद वे भारत लौटे, जहाँ उस समय मलेरिया का भारी प्रकोप था।</p>
<p>उस समय तक लोग नहीं जानते थे कि यह बीमारी कैसे फैलती है। रॉस ने इस चुनौती को स्वीकार किया और वर्षों तक कड़ा परिश्रम किया। उन्होंने सूक्ष्मदर्शी की सहायता से मच्छरों के पेट और मनुष्यों के रक्त के नमूनों की गहन जाँच की।</p>
<p>इस प्रक्रिया में उनके कर्मचारी अब्दुल और मरीज हुसैन खान ने भी सहयोग दिया। अंततः 16 वर्षों के अथक प्रयास के बाद, उन्हें मादा एनॉफिल मच्छर के पेट में मलेरिया के कीटाणु मिले। इस खोज ने यह प्रमाणित कर दिया कि मलेरिया का प्रसार मच्छरों के माध्यम से होता है।</p>
<p>रॉस की यह खोज चिकित्सा विज्ञान में एक क्रांतिकारी मोड़ थी, जिसने मलेरिया की रोकथाम और उपचार के नए मार्ग प्रशस्त किए। पाठ में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और स्वच्छता के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ 9. मैंने नक्शा बनाया</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1Qkd7jmhq_5KrCup9vU0yqDbW2VyA6-O-" /></p>
<p>यह पाठ मुख्य रूप से मानचित्र (नक्शा) समझने और बनाने के कौशल पर केंद्रित है। कहानी सुखदा नाम की एक छात्रा से शुरू होती है, जिसे अपनी शिक्षिका से स्कूल से घर तक का नक्शा बनाने का कार्य मिला है।</p>
<p>पाठ के माध्यम से बच्चों को मानचित्र में दिशाओं के महत्व, प्रतीकों (Symbols) के उपयोग और संकेत सूची (Index) की आवश्यकता के बारे में सिखाया गया है। इसमें यह भी बताया गया है कि कैसे विभिन्न वस्तुओं जैसे दुकान, मंदिर, नदी और रेल की पटरी को संकेतों के माध्यम से दर्शाया जाता है।</p>
<p>पाठ का दूसरा भाग बिहार राज्य के राजनीतिक मानचित्र पर आधारित है। इसके माध्यम से छात्रों को बिहार के विभिन्न जिलों, अंतरराष्ट्रीय सीमाओं (नेपाल) और पड़ोसी राज्यों (उत्तर प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल) की पहचान करना सिखाया गया है।</p>
<p>छात्रों को नक्शा देखकर जिलों की गिनती करने, अपने जिले को खोजने और पड़ोसी जिलों की दिशाएँ समझने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। यह पाठ भौगोलिक समझ विकसित करने के लिए व्यावहारिक अभ्यास प्रदान करता है, जिससे बच्चे सीमाओं की रेखाओं और नक्शे के संकेतों को पढ़ना और समझना सीख सकें।</p>
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<h3>❤️ 10. हमारी फसलें हमारा खान-पान</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1odks1PGh8XkMOy95_j1cvCJ_nxRp809p" /></p>
<p>यह अध्याय &#8216;हमारी फसलें : हमारा खान-पान&#8217; ग्रामीण जीवन, कृषि और खान-पान के अंतर्संबंधों को दर्शाता है। कहानी इरा और इशु के इर्द-गिर्द घूमती है, जो पटना से अपने गाँव जाते हैं और वहाँ कृषि की विविध प्रक्रियाओं को समझते हैं। उनके दादाजी उन्हें बताते हैं कि गाँव ही शहरी जीवन का मुख्य आधार हैं, क्योंकि शहर की अधिकांश खाद्य सामग्री गाँवों से ही आती है।</p>
<p>अध्याय में धान की खेती का विस्तार से वर्णन किया गया है, जिसमें जुताई, बिचड़ा लगाना, मोरी तैयार करना और फसल की कटाई जैसी प्रक्रियाएँ शामिल हैं। इसके साथ ही, मौसम के आधार पर फसलों का वर्गीकरण—खरीफ (वर्षा), रबी (सर्दी) और जायद (गर्मी)—समझाया गया है। बिहार के विभिन्न जिलों में उगाई जाने वाली प्रमुख फसलों जैसे मक्का, गेहूँ, केला और मखाना का भी उल्लेख है।</p>
<p>पाठ में खान-पान की विविधता और उस पर क्षेत्रीय प्रभाव की चर्चा की गई है, जैसे कि चेन्नई में इडली-डोसा और बिहार में लिट्टी-चोखा की लोकप्रियता। अंत में, आधुनिक फास्ट फूड (पिज्जा, बर्गर) के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों के प्रति सचेत करते हुए पारंपरिक पौष्टिक आहार के महत्व पर जोर दिया गया है। अध्याय में लिट्टी-चोखा बनाने की विधि भी साझा की गई है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ 11. जन्तु जगत सुरक्षा संरक्षण</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1d71y7A4_eorIi7EZwqFfa-DwrdR3nMy3" /></p>
<p>यह पुस्तक का अध्याय &#8216;जन्तु-जगत : सुरक्षा और संरक्षण&#8217; जीव-जन्तुओं के प्रति दया, उनके संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन में उनकी भूमिका पर केंद्रित है। कहानी की शुरुआत सिद्धार्थ और देवदत्त के प्रसंग से होती है, जहाँ घायल हंस की रक्षा करने वाले सिद्धार्थ को राजा द्वारा न्यायपूर्ण तरीके से उसका संरक्षक माना जाता है, क्योंकि &#8216;जान बचाने वाला जान लेने वाले से बड़ा होता है&#8217;।</p>
<p>पाठ में विभिन्न जीव-जन्तुओं पर आधारित आजीविका, जैसे सपेरे और मछुआरों के कार्यों पर विचार किया गया है। बबली और उसके पालतू तोते &#8216;सुगनी&#8217; के माध्यम से जानवरों की स्वतंत्रता के महत्व को दर्शाया गया है।</p>
<p>पुस्तक यह भी समझाती है कि कैसे वनों की कटाई से तेंदुआ और गुलाबी सिर वाली बत्तख जैसे जीव विलुप्त हो रहे हैं। सरकार द्वारा बनाए गए &#8216;अभयारण्यों&#8217; (जैसे बिहार के चम्पारण और बेगूसराय में) की चर्चा की गई है।</p>
<p>अंत में, राजस्थान के &#8216;विश्नोई समुदाय&#8217; का उदाहरण दिया गया है, जो अपने गुरु जम्भाजी के 29 नियमों का पालन करते हुए प्रकृति और वन्यजीवों की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति तक दे देते हैं। यह अध्याय हमें संदेश देता है कि जीव-जन्तुओं की सुरक्षा करना मानव जाति और प्रकृति के अस्तित्व के लिए अनिवार्य है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ 12. मान गए लोहा</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1goVJfhuf-sZgMCX3B8-TQGCizjbTuJWW" /></p>
<p>यह पुस्तक &#8216;मान गए लोहा&#8217; नामक अध्याय के माध्यम से शारीरिक चुनौतियों का सामना करने वाले व्यक्तियों के प्रति संवेदनशीलता और उनके अदम्य साहस की कहानी बयां करती है। कहानी सुखदा और संजय के इर्द-गिर्द घूमती है, जो विश्व विकलांगता दिवस के पोस्टर को देखकर इसके बारे में जानने के लिए उत्सुक होते हैं।</p>
<p>शिक्षक उन्हें बताते हैं कि शारीरिक भिन्नता के बावजूद ऐसे व्यक्ति न केवल अपने दैनिक कार्य बखूबी करते हैं, बल्कि कई बार सामान्य लोगों से भी बेहतर प्रदर्शन करते हैं। दादाजी बच्चों को एक राजकीय नेत्रहीन आवासीय विद्यालय ले जाते हैं, जहाँ वे देखते हैं कि छात्र आत्मनिर्भरता के साथ कपड़े धोने, संगीत सीखने और &#8216;ब्रेल लिपि&#8217; के माध्यम से पढ़ाई करने जैसे कार्य कर रहे हैं।</p>
<p>पुस्तक में 3 दिसंबर को आयोजित खेल प्रतियोगिताओं का भी वर्णन है, जहाँ पोलियोग्रस्त इकबाल अहमद अपनी प्रतिभा से सबको चकित कर देता है। इसके अतिरिक्त, पुस्तक के दूसरे भाग &#8216;पक्षियों से दोस्ती&#8217; में पक्षी अवलोकन (बर्ड वाचिंग) के तरीके बताए गए हैं।</p>
<p>इसमें खंजन पक्षी का उदाहरण देकर समझाया गया है कि कैसे आकार, रंग, चोंच और आवाज के आधार पर पक्षियों की पहचान की जा सकती है। यह पुस्तक बच्चों को समाज के हर वर्ग के प्रति सम्मान और प्रकृति के प्रति जिज्ञासा रखने की प्रेरणा देती है।</p>
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<h3>❤️ 13. पानी और हम</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=19CojDxk1LWgdKBNBhl51qmhcM9lBD6MJ" /></p>
<p>यह पुस्तक का अध्याय &#8216;पानी और हम&#8217; मुख्य रूप से हमारे दैनिक जीवन में जल की महत्ता और इसके विभिन्न स्रोतों पर प्रकाश डालता है। पाठ की शुरुआत शिक्षक और बच्चों के बीच पानी की उपलब्धता को लेकर होने वाली चर्चा से होती है, जिसमें बच्चे बताते हैं कि उनके घरों में पानी नल, कुएं, हैंडपंप और नहरों जैसे अलग-अलग माध्यमों से आता है।</p>
<p>इस संवाद के जरिए जल संकट और सार्वजनिक नलों पर होने वाली भीड़ जैसी समस्याओं को भी दर्शाया गया है। पुस्तक में पानी के अभाव और उसकी अधिकता (बाढ़) दोनों स्थितियों का वर्णन किया गया है।</p>
<p>राहुल और टीना के अनुभवों के माध्यम से बताया गया है कि जहाँ पानी के बिना जीवन और खेती संभव नहीं है, वहीं अत्यधिक वर्षा और नदियों के जलस्तर बढ़ने से आने वाली बाढ़ भारी तबाही लाती है। वर्ष 2008 में उत्तर बिहार में आई भीषण बाढ़ का उदाहरण देते हुए जान-माल के नुकसान और विस्थापन की विभीषिका को समझाया गया है।</p>
<p>अंत में, यह अध्याय छात्रों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करता है और बाढ़ जैसी आपदाओं से निपटने के उपायों पर सोचने के लिए प्रेरित करता है। यह स्पष्ट करता है कि पृथ्वी पर जल की विशाल मात्रा होने के बावजूद, हमारे उपयोग योग्य मीठा पानी अत्यंत सीमित है।</p>
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<h3>❤️ 14. सूरज एक काम अनेक</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1Lu3SL_KBj6TT4PcNkkNOJvIvpXek_ihY" /></p>
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<h3>❤️ 15. हमारा जंगल</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1LarP3glUeyQCS409L64MMJ3-beZZ0OVb" /></p>
<p>यह अध्याय &#8216;हमारा जंगल&#8217; वाल्मीकि अभयारण्य की एक शैक्षिक यात्रा का वर्णन करता है। इसमें बच्चों के एक समूह द्वारा गुरुजी के साथ किए गए भ्रमण के माध्यम से वन्यजीवों, उनके प्राकृतिक आवास और संरक्षण के महत्व को समझाया गया है।</p>
<p>यात्रा के दौरान बच्चे साल, शीशम और जामुन जैसे पेड़ों के साथ-साथ बाघ, हिरण और बंदर जैसे जानवरों को देखते हैं। पाठ में अभयारण्य को एक सुरक्षित क्षेत्र के रूप में परिभाषित किया गया है जहाँ जानवर बिना किसी मानवीय खतरे के रह सकते हैं।</p>
<p>इसके अतिरिक्त, यह अध्याय भागलपुर के धरहरा गाँव की एक अनूठी परंपरा पर प्रकाश डालता है, जहाँ बेटी के जन्म पर दस पौधे लगाए जाते हैं। यह परंपरा न केवल बालिकाओं के सामाजिक महत्व को बढ़ाती है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और वनीकरण के प्रति एक अद्भुत संवेदनशीलता भी दर्शाती है।</p>
<p>अंत में, पाठ पाठकों को जंगलों के विनाश के परिणामों के प्रति सचेत करता है और अधिक से अधिक वृक्ष लगाने का संकल्प लेने के लिए प्रोत्साहित करता है ताकि पर्यावरण और समाज दोनों को सशक्त बनाया जा सके।</p>
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<h3>❤️ 16. चलो सर्वे करें</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=16_lSgTmMPfx4vMtOiSr17Vv38zfH89Yj" /></p>
<p>यह पुस्तक का अंश &#8216;चलो सर्वे करें&#8217; विषय पर आधारित है, जो छात्रों को उनके गाँव या मोहल्ले में ईंधन के उपयोग और संरक्षण के बारे में शिक्षित करता है। इसमें बताया गया है कि भोजन और यातायात के लिए लकड़ी, केरोसिन, गैस, डीजल और पेट्रोल जैसे संसाधनों की आवश्यकता होती है।</p>
<p>पुस्तक छात्रों को टोलियाँ बनाकर घरों का सर्वे करने के लिए प्रोत्साहित करती है, जिसमें वे ईंधन के स्रोतों, खपत की मात्रा और उनके विकल्पों के बारे में जानकारी एकत्र करते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता पैदा करना और भविष्य की पीढ़ियों के लिए संसाधनों को बचाने के महत्व को समझाना है।</p>
<p>इसमें ईंधन की बचत के उपायों पर चर्चा की गई है और अंत में एक ज्ञानवर्धक शब्द पहेली भी दी गई है, जो विज्ञान, भूगोल और सामान्य ज्ञान से संबंधित है। यह अध्याय व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारियों का बोध कराता है, जिससे वे संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को समझ सकें और संरक्षण की दिशा में कदम उठा सकें।</p>
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<h3>❤️ 17. रामू काका की दुकान</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1Ftg60kDZErQ7OkxuXvbTziQtW-3NSzHc" /></p>
<p>यह कहानी &#8216;रामू काका की दुकान&#8217; सुखदा नामक एक स्कूली छात्रा के इर्द-गिर्द घूमती है, जो बढ़ईगिरी की दुकान में होने वाली गतिविधियों का उत्सुकतापूर्वक अवलोकन करती है। दुकान में अकरम, नवीन, आलम और अली दादा जैसे लोग लकड़ी के पटियों को छीलने, काटने और कुर्सियां बनाने का काम करते हैं। यहाँ सुखदा को वार्निश जैसी चीजों के उपयोग और तस्वीरों के फ्रेम बनाने में कांच की भूमिका के बारे में पता चलता है।</p>
<p>कहानी में विभिन्न औजारों जैसे रंदा, आरी, हथौड़ा और कुल्हाड़ी का भी उल्लेख है। रामू काका बताते हैं कि वे अपनी दुकान का कच्चा माल शहर से लाते हैं या कभी-कभी गाँव के लुहार और जोसेफ की दुकान से प्राप्त करते हैं। वे यह भी स्पष्ट करते हैं कि लकड़ी काटने का काम व्यापारी करते हैं और वे केवल लकड़ी खरीदते हैं।</p>
<p>रामू काका के लिए यह उनका पुश्तैनी व्यवसाय है, जिसे उन्होंने अपने पूर्वजों से सीखा है और इसी से उनके घर का खर्च चलता है। वे अपने उत्पादों को बेहतर दाम और अधिक बिक्री के लिए शहर की बड़ी दुकानों में भी भेजते हैं। अंत में, यह कहानी छात्रों को अपने आस-पास के व्यवसायों और उनके औजारों के बारे में जानकारी एकत्र करने के लिए प्रोत्साहित करती है।</p>
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<h3>❤️ 18. आवास</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=10xxMkJipj8gVH0GDUOJ6DKrJBaNdZ4me" /></p>
<p>यह अध्याय &#8216;आवास&#8217; के महत्व और बदलते स्वरूप पर प्रकाश डालता है। सुखदा के गाँव के माध्यम से यह बताया गया है कि कैसे शहरीकरण के कारण गाँवों के पास नई कॉलोनियाँ विकसित हो रही हैं। घर हमें धूप, वर्षा, ठंड, जंगली जानवरों और चोरों से सुरक्षा प्रदान करते हैं।</p>
<p>साथ ही, यह हमें निजता और आराम का अनुभव कराते हैं। अध्याय में ग्रामीण और शहरी आवासों के बीच के अंतर को स्पष्ट किया गया है। जहाँ गाँव के पुराने घर मिट्टी और फूस के होते थे, वहीं नई कॉलोनियों में सीमेंट, कंक्रीट और ईंटों से बनी बहुमंजिला इमारतें होती हैं।</p>
<p>शहरों में जमीन की कमी और बढ़ती जनसंख्या के कारण लोग सामूहिक जीवन की ओर बढ़ रहे हैं, जहाँ विभिन्न धर्मों और क्षेत्रों के लोग एक साथ मिलकर त्योहार मनाते हैं। इसमें कृषि विश्वविद्यालय जैसी परियोजनाओं के लिए गाँव की जमीन के चयन और उससे होने वाले सामाजिक बदलावों पर भी चर्चा की गई है। अंत में, यह पाठ छात्रों को सामुदायिक जीवन और आधुनिक आवास व्यवस्था की सुविधाओं जैसे पानी, बिजली और पार्कों के बारे में शिक्षित करता है।</p>
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<h3>❤️ 19. तरह तरह के व्यवसाय</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1CT_8ntym1fv9T4wNdUyKYw5K6qYrGt8G" /></p>
<p>यह अध्याय &#8216;तरह-तरह के व्यवसाय&#8217; समाज में विभिन्न पेशों और उनके महत्व पर प्रकाश डालता है। इसमें मुख्य रूप से किसान, बुनकर, लुहार, मोची, कुम्हार, डाकिया और शिक्षक जैसे व्यवसायों का वर्णन किया गया है। किसान हमारे लिए अनाज उगाता है, जबकि राजमिस्त्री घर बनाता है।</p>
<p>कुम्हार मिट्टी से बर्तन बनाने के लिए कड़ी मेहनत करता है, जिसमें मिट्टी चुनना, उसे साफ करना और आग में पकाना शामिल है। डाकिया संदेश पहुँचाने का कार्य करता है और शिक्षक समाज को शिक्षित कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। पुस्तक यह समझाने का प्रयास करती है कि समाज का हर व्यक्ति एक-दूसरे पर निर्भर है।</p>
<p>उदाहरण के लिए, शिक्षक और किसान को डॉक्टर की आवश्यकता होती है, और डॉक्टर को भोजन के लिए किसान की। यदि लोग एक-दूसरे की मदद करना बंद कर दें, तो सामाजिक संतुलन बिगड़ जाएगा। यह पाठ विद्यार्थियों को विभिन्न कार्यों के प्रति सम्मान रखने और उनके श्रम के महत्व को समझने के लिए प्रेरित करता है।</p>
<p>इसमें बच्चों से यह भी पूछा गया है कि यदि ये पेशेवर न होते तो जीवन कैसा होता, ताकि वे हर व्यवसाय की उपयोगिता समझ सकें।</p>
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<h3>❤️ 20. रायपुर वाले चाचा की शादी</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1mKd0CzwcoSBYl0sV0B2tg1XWk9VZ2k37" /></p>
<p>यह अध्याय सुखदा के परिवार की रायपुर यात्रा और उसके चाचा रवि की शादी के अनुभवों पर आधारित है। कहानी की शुरुआत दादाजी द्वारा रायपुर जाने की घोषणा से होती है, जहाँ पूरा परिवार बड़े दादाजी के घर शादी में शामिल होने की तैयारी करता है।</p>
<p>यात्रा के दौरान, दादाजी बच्चों को परिवार के इतिहास के बारे में बताते हैं कि कैसे उनके भाई नौकरी के सिलसिले में रायपुर जाकर बस गए, जबकि वे स्वयं गाँव में रहकर खेती-बाड़ी सँभालने लगे। रायपुर पहुँचने पर सुखदा विभिन्न सांस्कृतिक भिन्नताओं को देखती है, जैसे कि बंगाली रीति-रिवाजों में शंख ध्वनि और &#8216;उलू-उलू&#8217; की आवाज़, तथा शादी के मंडप की सजावट में अंतर।</p>
<p>वह यह भी गौर करती है कि शहरों में महिलाएँ भी बारात में शामिल होती हैं। रवि चाचा और उनकी पत्नी सुरोचिता (जो एक बंगाली परिवार से हैं) के साथ बिताए गए पल और अंत में पूरे परिवार का एक साथ फोटो खिंचवाना, पारिवारिक एकता और खुशी को दर्शाता है।</p>
<p>यह पाठ न केवल एक उत्सव का वर्णन करता है, बल्कि बच्चों को पारिवारिक रिश्तों, जिम्मेदारियों और सांस्कृतिक विविधता की समझ भी देता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ 21. लकी जब बीमार पड़ा</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1GlG-c887N939oiCbtNfLA0Wf9W1rvyXT" /></p>
<p>यह अध्याय &#8216;लकी जब बीमार पड़ा&#8217; शीर्षक के अंतर्गत संक्रामक रोगों, विशेषकर मलेरिया के बारे में जानकारी प्रदान करता है। कहानी लकी नाम के एक छात्र के इर्द-गिर्द घूमती है, जो कई दिनों की बीमारी के बाद स्कूल लौटता है।</p>
<p>वह अपने सहपाठियों और शिक्षक को बताता है कि उसे मलेरिया हुआ था, जिसके लक्षणों में ठंड लगना, कँपकँपी, सिरदर्द और पसीने के साथ तेज बुखार शामिल थे। शिक्षक छात्रों को समझाते हैं कि संक्रामक रोग क्या होते हैं और वे दूषित भोजन, जल, वायु या कीटों के माध्यम से कैसे फैलते हैं।</p>
<p>पाठ में मच्छरों के प्रजनन को रोकने के महत्व पर जोर दिया गया है, जैसे कि गड्ढों में पानी जमा न होने देना और मच्छरदानी का उपयोग करना। इसके अलावा, डेंगू, चिकनगुनिया और फाइलेरिया जैसी बीमारियों का भी उल्लेख किया गया है।</p>
<p>अंत में, छात्रों को व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखने, ताजा भोजन करने और उबला हुआ पानी पीने की सलाह दी गई है ताकि डायरिया और हैजा जैसी बीमारियों से बचा जा सके। यह पाठ बच्चों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने का एक सरल माध्यम है।</p>
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		<title>Bihar Board Class 5th Mathematics Book 2026 PDF Download</title>
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		<dc:creator><![CDATA[bseb]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 Jul 2022 08:44:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Class 5th Books]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>The Bihar Board Class 5th Mathematics Book 2026 PDF Download page is prepared for students who want to get the latest Bihar Board Class 5 Mathematics textbook PDF in a simple and convenient way. This page provides the officially prescribed Class 5 Maths book based on the latest Bihar Board (BSEB) syllabus for the 2026 [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>The <strong>Bihar Board Class 5th Mathematics Book 2026 PDF Download</strong> page is prepared for students who want to get the latest <strong>Bihar Board Class 5 Mathematics textbook PDF</strong> in a simple and convenient way. This page provides the officially prescribed <strong>Class 5 Maths book</strong> based on the latest Bihar Board (BSEB) syllabus for the 2026 academic session. The textbook is designed to strengthen basic mathematical skills and improve problem-solving ability at the primary level.</p>
<table>
<thead>
<tr>
<th>Details</th>
<th>Information</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td>Board</td>
<td>Bihar School Examination Board (BSEB)</td>
</tr>
<tr>
<td>Class</td>
<td>5th</td>
</tr>
<tr>
<td>Subject</td>
<td>Mathematics</td>
</tr>
<tr>
<td>Book Name</td>
<td>Bihar Board Class 5 Mathematics Book</td>
</tr>
<tr>
<td>Medium</td>
<td>Hindi</td>
</tr>
<tr>
<td>Academic Year</td>
<td>2026</td>
</tr>
<tr>
<td>Syllabus</td>
<td>Latest BSEB Syllabus</td>
</tr>
<tr>
<td>Format</td>
<td>PDF</td>
</tr>
<tr>
<td>Content Type</td>
<td>Textbook Only</td>
</tr>
<tr>
<td>Download Type</td>
<td>Free PDF Download</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p>On this page, students can download the <strong>Bihar Board Class 5 Mathematics Book PDF</strong> in Hindi medium for regular study and revision. This page offers <strong>only the official mathematics textbook</strong>, not solutions or guidebooks. The <strong>Bihar Board Class 5th Maths Book PDF</strong> is useful for students who want reliable, syllabus-based study material in digital format for school exams and concept clarity.</p>
<h2 style="text-align: center;"><span style="text-decoration: underline; color: #ff0000;"><strong>Bihar Board 5th Mathematics Book 2026 (गणित) PDF Download</strong></span></h2>
<p><img data-recalc-dims="1" decoding="async" class="aligncenter" src="https://i0.wp.com/biharboardbooks.com/wp-content/uploads/2022/07/bihar_board_books-min.png?ssl=1" /> <strong>Bihar Board Class 5th Mathematics Book 2026</strong> &#8211; इस पेज पर बिहार बोर्ड 5th के छात्रों के लिए &#8220;<span style="text-decoration: underline;"><strong>Mathematics (गणित)</strong></span>&#8221; Book दिया गया है | जिसे आप अपने फ़ोन में Free Download कर सकते हैं |</p>
<blockquote><p>🌐 सभी विषयों की बुक्स डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें -&gt; <a href="https://biharboardbooks.com/"><strong>https://biharboardbooks.com/</strong></a></p>
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<p>सभी बुक्स का डाउनलोड लिंक नीचे पेज पर दिया गया है |</p>
<h2 style="text-align: center;"><span style="text-decoration: underline; color: #3366ff;"><strong>BSEB Class 5 Mathematics (गणित) Book PDF Free Download</strong></span></h2>
<p><span style="font-size: 18pt;"><strong>☞</strong></span> बुक्स डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए डाउनलोड लिंक पर क्लिक करें | <img decoding="async" class="aligncenter" src="https://i0.wp.com/biharboard-ac.in/wp-content/uploads/2022/07/kindpng_6137677-min.png?resize=601%2C111&amp;ssl=1" alt="line" /></p>
<h3>❤️ 1. संख्याओं का मेला</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1rJHDJPQAFFtzDicEJrjD5Iyh7G-f_EzB" /></p>
<p>📗 बुक डाउनलोड करने के लिए &#8211; <a href="https://biharboardbooks.com/download/#1k5H99AowObNrEkdP3BWvCvzy_omZ2jjT">यहाँ क्लिक करें</a></p>
<p>🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯</p>
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<h3>❤️ 2. जोड़-घटाव</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1-LNn9BLJE-I6uF-uO9ZgOLLrERAl82AK" /></p>
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<h3>❤️ 3. गुणा-भाग</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=19kB0WqOl2EiTO8EPQiOQIe4wUp2Zp6kP" /></p>
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<h3>❤️ 4. गुणज तथा गुणनखंड</h3>
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<h3>❤️ 5. भिन्न एवं दशमलव भिन्न</h3>
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<h3>❤️ 6. मुद्रा एवं बैंकिंग</h3>
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<h3>❤️ 7. कोण</h3>
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<h3>❤️ 8. सममिति</h3>
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<h3>❤️ 9. आकृतियां</h3>
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<h3>❤️ 10. मापन की इकाई</h3>
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<h3>❤️ 11. परिमाप एवं क्षेत्रफल</h3>
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<h3>❤️ 14. आंकड़ों का खेल</h3>
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<h3>❤️ 15. पैटर्न</h3>
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		<title>Bihar Board Class 5th Hindi Book 2026 PDF Download (कोंपल)</title>
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		<dc:creator><![CDATA[bseb]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 Jul 2022 08:43:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Class 5th Books]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>Bihar Board 5th Hindi Book 2026 PDF Download (कोंपल) Bihar Board Class 5th Hindi Book 2026 PDF Download &#8211; इस पेज पर बिहार बोर्ड 5th के छात्रों के लिए &#8220; Hindi (कोंपल)&#8220;Book दिया गया है &#124; जिसे आप अपने फ़ोन में Free Download कर सकते हैं &#124; 🌐 सभी विषयों की बुक्स डाउनलोड करने के लिए [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<h2 style="text-align: center;"><span style="text-decoration: underline; color: #ff0000;"><strong>Bihar Board 5th Hindi Book 2026 PDF Download </strong></span><span style="text-decoration: underline; color: #ff0000;"><strong>(कोंपल)</strong></span></h2>
<p><img data-recalc-dims="1" decoding="async" class="aligncenter" src="https://i0.wp.com/biharboardbooks.com/wp-content/uploads/2022/07/bihar_board_books-min.png?ssl=1" /> <span style="text-decoration: underline;">Bihar Board Class 5th Hindi Book 2026 PDF Download</span> &#8211; इस पेज पर बिहार बोर्ड 5th के छात्रों के लिए &#8220;<span style="text-decoration: underline;"><strong> Hindi (कोंपल)</strong></span>&#8220;Book दिया गया है | जिसे आप अपने फ़ोन में Free Download कर सकते हैं |</p>
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<p>सभी बुक्स का डाउनलोड लिंक नीचे पेज पर दिया गया है |</p>
<h2 style="text-align: center;"><span style="text-decoration: underline; color: #3366ff;"><strong>BSEB Class 5 Hindi (कोंपल) Textbook PDF Free Download</strong></span></h2>
<p><span style="font-size: 18pt;"><strong>☞</strong></span> बुक्स डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए डाउनलोड लिंक पर क्लिक करें | <img decoding="async" class="aligncenter" src="https://i0.wp.com/biharboard-ac.in/wp-content/uploads/2022/07/kindpng_6137677-min.png?resize=601%2C111&amp;ssl=1" alt="line" /></p>
<h3>❤️ 1. हिन्द देश के निवासी</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1ItNgFhmLzEcCPEnosCAIfzDSLITbwLd4" /></p>
<p>यह पुस्तक &#8216;सर्व शिक्षा : 2013-14&#8217; अभियान के अंतर्गत तैयार की गई एक शिक्षण सामग्री है। इसमें मुख्य रूप से &#8216;हिंद देश के निवासी&#8217; नामक कविता के माध्यम से भारत की विविधता में एकता के संदेश को प्रस्तुत किया गया है।</p>
<p>पुस्तक में बताया गया है कि भारत के लोग अलग-अलग रंग, रूप, वेशभूषा और भाषा के होने के बावजूद एक ही माला के फूलों की तरह पिरोए हुए हैं। इसमें प्रकृति के विभिन्न तत्वों जैसे कोयल, पपीहे और बुलबुल के उदाहरण देकर सांस्कृतिक एकता को समझाया गया है।</p>
<p>साथ ही, गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र जैसी विभिन्न नदियों का सागर में मिलकर एक हो जाने का उदाहरण राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। पुस्तक में विद्यार्थियों के लिए शब्दार्थ और विभिन्न गतिविधियाँ भी शामिल की गई हैं, जैसे भारत के नक्शे में राज्यों को पहचानना, उनके प्रसिद्ध पकवानों, वेशभूषा और भाषाओं के बारे में जानकारी एकत्र करना।</p>
<p>इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों में देशभक्ति, सद्भावना और देश की सांस्कृतिक धरोहर के प्रति जागरूकता विकसित करना है। यह पुस्तक सरल हिंदी भाषा में लिखी गई है और बच्चों के मानसिक स्तर के अनुकूल है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ 2. टिपटिपवा</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=10zr7hqYrj3_w3XLZEimz5vCUcU-NFReY" /></p>
<p>यह कहानी &#8216;टिपटिपवा&#8217; एक मज़ेदार लोककथा है। एक बार मूसलाधार बारिश के दौरान, एक दादी अपने पोते को बता रही थीं कि उन्हें शेर या बाघ से उतना डर नहीं लगता जितना कि छत से टपकते पानी यानी &#8216;टिपटिपवा&#8217; से लगता है। झोंपड़ी के पीछे छिपा एक बाघ यह सुनकर डर गया और उसने सोचा कि टिपटिपवा कोई बहुत बड़ा भयानक जानवर है।</p>
<p>इसी बीच, भोला नाम का एक व्यक्ति बारिश में अपने खोए हुए गदहे को ढूँढ़ रहा था। अंधेरे में उसने घास में छिपे बाघ को ही अपना गदहा समझ लिया और उसे डंडे से मारते हुए कान पकड़कर अपने घर ले आया। बाघ भी टिपटिपवा के डर से बिना कुछ कहे उसके पीछे चल दिया।</p>
<p>भोला ने उसे खूँटे से बाँध दिया। सुबह जब गाँव वालों ने भोला के घर के बाहर एक बाघ को बँधा देखा, तो वे दंग रह गए। यह कहानी डर और गलतफहमी के कारण पैदा हुई हास्यास्पद स्थिति को बहुत ही रोचक ढंग से दर्शाती है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ 3. हुआ यूं कि</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1le2uNeWWrvFspTcsH6mzoYhabqPtKuK-" /></p>
<p>यह पाठ भीष्म साहनी द्वारा लिखित एक संस्मरण है, जिसमें उन्होंने अपने बचपन के पहले नाटक &#8216;श्रवण कुमार&#8217; के मंचन के अनुभवों को हास्यप्रद ढंग से साझा किया है। लेखक ने चौथी कक्षा में श्रवण कुमार की भूमिका निभाई थी।</p>
<p>नाटक के दौरान कई मजेदार घटनाएँ घटीं, जैसे कि अंधों की भूमिका निभा रहे लड़के बार-बार आँखें खोल देते थे, जिससे दर्शक हँसने लगते थे। जब राजा दशरथ ने तीर मारा, तो लेखक ने एक लंबा गीत गाना शुरू किया जो खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा था, जिससे मंच पर मौजूद अन्य कलाकार असहज हो गए।</p>
<p>सबसे हास्यास्पद क्षण तब आया जब लेखक, मरने के अभिनय के बाद नाटक का अगला हिस्सा भूल गए और अचानक उठकर बैठ गए। जब दर्शकों ने शोर मचाया, तो वे घबराकर दोबारा लेट गए, जिसे देखकर पूरा हॉल ठहाकों और तालियों से गूँज उठा।</p>
<p>यह लेख नाटक की दुनिया के शुरुआती अनुभवों, मंच के पीछे की तैयारी और बच्चों की मासूमियत को जीवंत करता है। अंत में पाठ के माध्यम से शब्दार्थ और भाषा के विभिन्न रूपों जैसे &#8216;गहरा&#8217; शब्द के प्रयोग और अंग्रेजी शब्दों के शुद्ध उच्चारण का अभ्यास कराया गया है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ 4. चांद का कुर्ता</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1Yh92HyXmb7BlrrKnBZBi78armIlrWkZf" /></p>
<p>यह कविता &#8216;चाँद का कुर्ता&#8217; प्रसिद्ध कवि रामधारी सिंह &#8216;दिनकर&#8217; द्वारा लिखी गई है। इसमें चाँद और उसकी माता के बीच के एक अत्यंत सरल और मनमोहक संवाद का वर्णन है। चाँद अपनी माँ से ज़िद करता है कि उसे ऊन का एक मोटा &#8216;झिंगोला&#8217; (ढीला-ढाला कुर्ता) सिलवा दिया जाए क्योंकि उसे रात भर चलने वाली ठंडी हवा के कारण बहुत जाड़ा लगता है।</p>
<p>वह कहता है कि ठिठुर-ठिठुर कर वह अपनी आकाश की यात्रा पूरी करता है और यदि नया कुर्ता नहीं मिल सकता, तो माँ उसे किराए पर ही कोई कुर्ता दिला दे। चाँद की माँ उसकी बात सुनकर चिंतित हो जाती है। वह अपनी परेशानी बताते हुए कहती है कि चाँद का आकार कभी एक समान नहीं रहता।</p>
<p>वह कभी एक उँगली भर चौड़ा हो जाता है, कभी एक फुट मोटा, तो कभी इतना छोटा हो जाता है कि दिखाई भी नहीं देता। माँ को समझ नहीं आता कि वह किस दिन उसका नाप ले, क्योंकि वह रोज़ घटता-बढ़ता रहता है। अंततः, माँ की यह दुविधा चाँद के निरंतर बदलते आकार (चाँद की कलाओं) के कारण उत्पन्न होती है, जिससे उसके लिए एक स्थायी नाप का कुर्ता सिलवाना असंभव प्रतीत होता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ 5. म्यान का रंग</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1qn2XOkG2dYBzj0sFR1t4IiS6dSAo79-R" /></p>
<p>यह कहानी दो राजाओं, खड़ग सिंह और कड़क सिंह की है, जिनके बीच पुरानी पुश्तैनी दुश्मनी थी। एक दिन उनके महामंत्रियों ने उनकी लड़ाई खत्म करने के लिए एक योजना बनाई। उन्होंने दोनों राज्यों की सीमा पर स्थित एक पीपल के पेड़ पर एक म्यान लटका दी।</p>
<p>खड़ग सिंह ने म्यान को एक तरफ से देखा और उसे लाल रंग का बताया, जबकि कड़क सिंह ने दूसरी तरफ से देखने पर उसे सफेद बताया। इस बात पर दोनों में विवाद बढ़ गया और वे युद्ध के लिए तैयार हो गए। तभी मंत्रियों ने हस्तक्षेप किया और बताया कि म्यान वास्तव में एक तरफ से लाल और दूसरी तरफ से सफेद है।</p>
<p>राजाओं को अपनी गलती का एहसास हुआ कि बिना पूरी सच्चाई जाने और दूसरे का दृष्टिकोण समझे लड़ना गलत है। इस सूझबूझ से उनकी वर्षों पुरानी दुश्मनी समाप्त हो गई और उन्होंने भविष्य में शांति से रहने का निर्णय लिया। यह कहानी हमें सिखाती है कि किसी भी निर्णय पर पहुँचने से पहले स्थिति के सभी पहलुओं की जाँच करना आवश्यक है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ 6. उपकार का बदला</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1kVo0t9P5AnZP7RjO76YMWkS1zolMVNtl" /></p>
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<h3>❤️ 7. चतुर चित्रकार</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1rEl2a6V4ZoDAt5mZRh6TBHpw3SjYcHqK" /></p>
<p>यह कविता &#8216;चतुर चित्रकार&#8217; रामनरेश त्रिपाठी द्वारा रचित है, जिसमें एक चित्रकार की सूझ-बूझ और चतुराई का वर्णन किया गया है। कहानी तब शुरू होती है जब एक चित्रकार सुनसान जगह पर चित्र बना रहा होता है और अचानक वहाँ एक यमराज का मित्र अर्थात् भयानक शेर आ जाता है।</p>
<p>शेर को देख चित्रकार पहले तो घबरा गया, पर उसने हिम्मत जुटाई और शेर को शांत बैठने के लिए कहा ताकि वह उसका सुंदर चित्र बना सके। चित्रकार ने चालाकी से शेर को पीठ घुमाकर बैठने को कहा।</p>
<p>जैसे ही शेर ने अपनी पीठ चित्रकार की तरफ की, चित्रकार चुपके से वहाँ रखी नाव लेकर झील के पार भाग निकला। जब शेर को पता चला कि उसे धोखा दिया गया है, तो वह झुंझला उठा और चित्रकार से अपना सामान ले जाने को कहा।</p>
<p>चित्रकार ने दूर से ही जवाब दिया कि वह अपनी चित्रकला का अभ्यास जंगल में ही करे। यह कविता सिखाती है कि कठिन और डरावनी परिस्थितियों में घबराने के बजाय यदि हम बुद्धि और धैर्य से काम लें, तो अपनी जान बचा सकते हैं और किसी भी समस्या का समाधान निकाल सकते हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ 8. ननकू</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1RP49jTA3WitYTxs8HCdtIgpQgMR5IVGD" /></p>
<p>यह कहानी ननकू नाम के एक साहसी बालक के इर्द-गिर्द घूमती है। ननकू को बारिश का मौसम और गुल्ली-डंडा खेलना बहुत पसंद है। एक बार भारी बारिश के कारण उसके गाँव में भीषण बाढ़ आ गई, जिससे चारों ओर अफरा-तफरी मच गई।</p>
<p>जब पानी गाँव के निचले हिस्सों और ननकू के घर तक पहुँच गया, तो उसने अपनी सूझबूझ का परिचय दिया। उसके दादाजी, जो देख नहीं सकते थे, घर में फँसे हुए थे। ननकू ने अपनी जान की परवाह न करते हुए दादाजी को घर के छप्पर पर चढ़ाया।</p>
<p>पानी का वेग इतना तेज़ था कि छप्पर बहकर नदी की मुख्य धारा में चला गया। शहर के पास पहुँचने पर, ननकू ने छप्पर पर रखी एक रस्सी को पुल पर खड़े लोगों की ओर फेंका, जिसकी मदद से उन दोनों को सुरक्षित बचा लिया गया। ननकू की इस बहादुरी और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता ने न केवल उसके दादाजी की जान बचाई, बल्कि उसे पूरे गाँव का नायक बना दिया।</p>
<p>उसकी इस वीरता की कहानी दिल्ली तक पहुँची और उसे राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कृत करने की घोषणा की गई। यह कहानी संकट के समय धैर्य और साहस के महत्व को दर्शाती है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ 9. ममता की मूर्ति</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1g-5qIMIsh0T0lxLhRkCLJFHCP39XbDsj" /></p>
<p>यह पाठ मदर टेरेसा के सेवाभावी जीवन पर आधारित है, जिनका जन्म 1910 में युगोस्लाविया में हुआ था। बचपन का नाम एग्नेस था और उन्होंने गरीबों की सेवा के लिए नन बनने का निर्णय लिया। 1929 में वे भारत आईं और कोलकाता के सेंट मेरी स्कूल में शिक्षिका बनीं, लेकिन दुखी और बीमार लोगों की सेवा की पुकार उन्हें सड़क पर ले आई।</p>
<p>उन्होंने 1948 में अध्यापन छोड़कर अपना जीवन कुष्ठ रोगियों और निराश्रितों की सेवा में समर्पित कर दिया। मदर टेरेसा ने कोलकाता में &#8216;निर्मल हृदय&#8217; नामक घर बनाया, जहाँ वे लावारिस बीमारों को आश्रय और ममता देती थीं। उनके कार्यों के कारण &#8216;मिशनरीज ऑफ चैरिटीज़&#8217; को वैश्विक मान्यता मिली।</p>
<p>वे स्वयं रोगियों के घाव साफ करती थीं, जिससे प्रभावित होकर अमेरिकी अधिकारी कैनेडी ने उनके हाथों को पवित्र बताया। उनके अद्वितीय योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें &#8216;भारत रत्न&#8217; और विश्व ने &#8216;नोबेल शांति पुरस्कार&#8217; से सम्मानित किया। 5 सितंबर 1997 को उनका निधन हुआ, लेकिन उनका संदेश आज भी जीवंत है कि विश्व में हर दुखी व्यक्ति प्यार और मदद का हकदार है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ 9. ममता की मूर्ति</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1g-5qIMIsh0T0lxLhRkCLJFHCP39XbDsj" /></p>
<p>यह पाठ मदर टेरेसा के सेवाभावी जीवन पर आधारित है, जिनका जन्म 1910 में युगोस्लाविया में हुआ था। बचपन का नाम एग्नेस था और उन्होंने गरीबों की सेवा के लिए नन बनने का निर्णय लिया। 1929 में वे भारत आईं और कोलकाता के सेंट मेरी स्कूल में शिक्षिका बनीं, लेकिन दुखी और बीमार लोगों की सेवा की पुकार उन्हें सड़क पर ले आई।</p>
<p>उन्होंने 1948 में अध्यापन छोड़कर अपना जीवन कुष्ठ रोगियों और निराश्रितों की सेवा में समर्पित कर दिया। मदर टेरेसा ने कोलकाता में &#8216;निर्मल हृदय&#8217; नामक घर बनाया, जहाँ वे लावारिस बीमारों को आश्रय और ममता देती थीं। उनके कार्यों के कारण &#8216;मिशनरीज ऑफ चैरिटीज़&#8217; को वैश्विक मान्यता मिली।</p>
<p>वे स्वयं रोगियों के घाव साफ करती थीं, जिससे प्रभावित होकर अमेरिकी अधिकारी कैनेडी ने उनके हाथों को पवित्र बताया। उनके अद्वितीय योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें &#8216;भारत रत्न&#8217; और विश्व ने &#8216;नोबेल शांति पुरस्कार&#8217; से सम्मानित किया। 5 सितंबर 1997 को उनका निधन हुआ, लेकिन उनका संदेश आज भी जीवंत है कि विश्व में हर दुखी व्यक्ति प्यार और मदद का हकदार है।</p>
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<h3>❤️ 11. एक पत्र की आत्मकथा</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1alOv58cOnexbK2A91PZvQ7jWrVZ39L_s" /></p>
<p>यह अध्याय &#8216;एक पत्र की आत्मकथा&#8217; शीर्षक से है, जिसमें एक पत्र स्वयं अपनी यात्रा का वर्णन करता है। पत्र का जन्म 3 अगस्त 2011 को बिहार के गया जिले के धरमपुर गाँव में हुआ, जहाँ शांति नाम की एक छात्रा ने अपने भाई रमेश के लिए राखी और पत्र एक पीले लिफाफे में बंद किया। शांति की माँ ने इस पत्र को बिशनपुर की पत्र-पेटी में डाला।</p>
<p>वहाँ से डाकिया इसे निकालकर डाकघर ले गया, जहाँ इस पर सील लगाई गई। इसके बाद इसे गया के आर.एम.एस. (रेलवे मेल सर्विस) कार्यालय भेजा गया, जहाँ पते के आधार पर इसकी छँटाई हुई और इसे दिल्ली जाने वाली रेलगाड़ी में डाल दिया गया।</p>
<p>लगभग 18 घंटे की यात्रा के बाद पत्र दिल्ली पहुँचा। दिल्ली के मुख्य डाकघर से एक डाकिया इसे रमेश के घर ले गया। रमेश अपनी बहन का पत्र और राखी पाकर अत्यंत प्रसन्न हुआ।</p>
<p>अंत में, पत्र बताता है कि अब वह अन्य पत्रों के साथ आलमारी में सुरक्षित है और एक शांत जीवन व्यतीत कर रहा है। यह पाठ बच्चों को डाक व्यवस्था, छँटाई की प्रक्रिया और संचार के पारंपरिक माध्यमों की जानकारी अत्यंत सरल और रोचक ढंग से प्रदान करता है।</p>
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<h3>❤️ 12. कविता का कमाल</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=11jHrkrFTHh7FiIePHIDGgtnBkOWGBReu" /></p>
<p>यह कहानी मदन नाम के एक गरीब लड़के की है, जो अपनी विधवा माँ के साथ रहता था। एक दिन उसकी माँ ने उसे पैसे कमाने के लिए घर से बाहर भेजा। रास्ते में उसे राजदरबार में होने वाले कवि सम्मेलन के बारे में पता चला, जहाँ सबसे अच्छी कविता सुनाने वाले को सौ अशर्फियाँ इनाम में मिलनी थीं।</p>
<p>मदन ने कभी कविता नहीं लिखी थी, लेकिन रास्ते में उसने जो कुछ देखा, उसे पंक्तियों में पिरो लिया। उसने जमीन खोदते कुत्ते को देखकर &#8216;खुदुर-खुदुर का खोदत है?&#8217;, पानी पीती भैंस को देखकर &#8216;सुरुर-सुरुर का पीबत है?&#8217;, झाँकती चिड़िया को देखकर &#8216;ताक-झाँक का खोजत है?&#8217; और रेंगते साँप को देखकर &#8216;सरक-सरक कहाँ भागत है?&#8217; जैसी पंक्तियाँ बनाईं। संयोग से, जिस रात राजा यह कविता गुनगुना रहे थे, उसी समय धन्नूशाह नाम का चोर अपने साथियों के साथ खजाने में सेंध लगा रहा था।</p>
<p>राजा के शब्दों को सुनकर चोरों को लगा कि वे पकड़े गए हैं। डर के मारे धन्नूशाह ने राजा के पैर पकड़ लिए और अपना अपराध स्वीकार कर लिया। इस प्रकार, मदन की विचित्र कविता ने राजा का खजाना लुटने से बचा लिया।</p>
<p>खुश होकर राजा ने मदन को सोने-चाँदी से मालामाल कर दिया।</p>
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<h3>❤️ 13. कदंब का पेड़</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1xTV6jGWaC4HYVJZdYqPTv3LY8iYVhTBu" /></p>
<p>&#8216;कदम्ब का पेड़&#8217; सुभद्रा कुमारी चौहान द्वारा रचित एक अत्यंत भावुक और मनोरम कविता है। इस कविता में एक बालक की कल्पना का वर्णन है जो यमुना के किनारे कदम्ब के पेड़ पर बैठकर कन्हैया (कृष्ण) बनना चाहता है।</p>
<p>वह कल्पना करता है कि यदि उसकी माँ उसे एक सस्ती सी बाँसुरी दिला दे, तो वह उस पेड़ की नीची डाली पर बैठकर बाँसुरी बजाएगा। बालक अपनी माँ के साथ लुका-छिपी का खेल खेलना चाहता है; वह पत्तों में छिप जाएगा और जब उसकी माँ उसे ढूँढते हुए व्याकुल हो जाएँगी, तो वह चुपके से उनके आँचल के नीचे आ जाएगा।</p>
<p>माँ उसे नीचे उतारने के लिए मिठाई, खिलौने, माखन, मिश्री और मलाई का लालच देती हैं। यह कविता माँ और बच्चे के निश्छल प्रेम और शरारतों को बहुत ही सुंदरता से दर्शाती है।</p>
<p>अंत में, बालक की माँ जब ईश्वर से प्रार्थना करने बैठती हैं, तो वह उनकी गोदी में छिपकर उन्हें सुखद आश्चर्य देता है। पूरी कविता वात्सल्य रस से ओत-प्रोत है और पाठक को बचपन की यादों में ले जाती है।</p>
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<h3>❤️ 14. दोहे</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1HiLkL2vVnxYJynM2LaYUpaznAPFj4qS_" /></p>
<p>प्रस्तुत पाठ &#8216;दोहावली&#8217; में हिंदी साहित्य के महान कवियों—तुलसीदास, रहीम और कबीरदास के नीतिपरक दोहों का संकलन किया गया है। ये दोहे मनुष्य को जीवन के व्यावहारिक सत्यों, नैतिक मूल्यों और उत्तम व्यवहार की शिक्षा देते हैं। तुलसीदास जी ने प्रेम और मिल-जुलकर रहने की महत्ता पर बल दिया है, वहीं रहीम जी ने धैर्य, स्वाभिमान और संकट के समय सच्चे मित्र की पहचान जैसे विषयों पर प्रकाश डाला है।</p>
<p>कबीरदास जी के माध्यम से निरंतर अभ्यास की शक्ति और अहंकार के त्याग का संदेश दिया गया है। पाठ में बताया गया है कि परोपकार से बढ़कर कोई धर्म नहीं है और दूसरों को पीड़ा पहुँचाना सबसे बड़ा पाप है। समय के महत्व को रेखांकित करते हुए कवि कहते हैं कि अवसर निकल जाने पर पछताने से कोई लाभ नहीं होता।</p>
<p>इसी प्रकार, अति के बोलने या अति के चुप रहने को भी अनुचित बताया गया है। सरल भाषा और उदाहरणों के माध्यम से ये दोहे जड़मति (मूर्ख) को भी सुजान (बुद्धिमान) बनाने और जीवन पथ पर सही दिशा में चलने की प्रेरणा देते हैं। यह पाठ समग्र शिक्षा के अंतर्गत विद्यार्थियों में सदाचार और समझ विकसित करने का एक सराहनीय प्रयास है।</p>
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<h3>❤️ 15 . चिठ्ठी आई है_</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1Ftz4KzcqssomEHPHg2s3eOg-P3EpyClR" /></p>
<p>यह पाठ बिहार के प्रसिद्ध लोक पर्व &#8216;छठ&#8217; के महत्व और उसकी परंपराओं पर आधारित है। कहानी एक पत्र के माध्यम से आगे बढ़ती है, जिसे सलोनी अपनी सहेली बेबी को लिखती है। इसमें बताया गया है कि छठ पूजा कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को बड़े धूमधाम से मनाई जाती है।</p>
<p>यह त्योहार चार दिनों तक चलता है, जिसकी शुरुआत &#8216;नहाय-खाय&#8217; से होती है, जिसके बाद &#8216;खरना&#8217; आता है। तीसरे दिन डूबते सूर्य को और चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इस व्रत में स्वच्छता, पवित्रता और जात-पात के भेदभाव को भूलकर सभी की भागीदारी का विशेष महत्व है।</p>
<p>छठ के दौरान गाए जाने वाले पारंपरिक गीत और घाटों की सजावट पूरे वातावरण को भक्तिमय बना देती है। पाठ में न केवल पर्व की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता को रेखांकित किया गया है, बल्कि संचार के माध्यम के रूप में &#8216;चिट्ठी&#8217; और &#8216;पिनकोड&#8217; जैसी जानकारियों पर भी प्रकाश डाला गया है। अंततः सलोनी अपनी सहेली को अगले साल छठ में गाँव आने का निमंत्रण देती है।</p>
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<h3>❤️ 16. मरता क्या न करता</h3>
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<p>यह कहानी &#8216;मरता क्या न करता&#8217; केरल की एक रोचक लोककथा है। इसका मुख्य पात्र विष्णु पोट्टि एक गरीब व्यक्ति है, जिसे दानी कहलाने का बहुत शौक है। वह अपनी आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना हर रोज अनजान मेहमानों को घर पर भोजन के लिए आमंत्रित करता था।</p>
<p>उसकी पत्नी लक्ष्मी इस आदत से परेशान थी क्योंकि मेहमानों को खिलाने के कारण उसे अक्सर भूखा रहना पड़ता था। एक दिन जब विष्णु दो अजनबियों को घर लाया, तो लक्ष्मी ने उन्हें भगाने के लिए एक चतुराई भरी योजना बनाई। उसने मेहमानों के सामने एक मूसल की पूजा शुरू कर दी और उन्हें डरा दिया कि विष्णु भोजन के बाद मेहमानों को इसी मूसल से पीटता है।</p>
<p>डर के मारे अतिथि वहां से भाग निकले। जब विष्णु ने पूछा तो लक्ष्मी ने कह दिया कि वे मूसल मांग रहे थे। विष्णु मूसल लेकर उनके पीछे दौड़ा, जिसे देखकर मेहमानों को यकीन हो गया कि वह उन्हें मारने आ रहा है।</p>
<p>यह बात पूरे गाँव में फैल गई और विष्णु की मेहमानों को बुलाने की आदत छूट गई। इस प्रकार लक्ष्मी की सूझबूझ से उसकी समस्या का समाधान हो गया।</p>
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<h3>❤️ 17. बिना जड़ का पेड़</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1mH5MmEI25mJR2rl5_1cNRtBy_j88lKyD" /></p>
<p>यह कहानी चतुर गोनू झा की बुद्धिमानी पर आधारित है। एक बार राजा के दरबार में एक अहंकारी व्यापारी एक संदूक लेकर आया और उसने चुनौती दी कि कोई बताए कि उसमें क्या है। उसने दावा किया कि वह बिना बीज और पानी के पेड़ उगाता है।</p>
<p>दरबार के सभी विद्वान चुप रहे, लेकिन गोनू झा ने चुनौती स्वीकार की। उन्होंने व्यापारी को एक रात अपने घर ठहराया और बातों-बातों में यह जान लिया कि व्यापारी के &#8216;पेड़&#8217; केवल रात में खिलते हैं और रंग-बिरंगे होते हैं। अगले दिन दरबार में गोनू झा ने आतिशबाजी (पटाखे) छोड़ी, जिससे राजा और दरबारी हैरान रह गए।</p>
<p>गोनू झा ने समझाया कि यही व्यापारी का रहस्य है—आतिशबाजी, जो बिना जड़, बीज या पानी के आकाश में रंग-बिरंगे फूलों की तरह खिलती है। व्यापारी ने अपनी हार मान ली और गोनू झा की चतुराई की प्रशंसा हुई। राजा ने गोनू झा को पुरस्कृत किया।</p>
<p>पुस्तक के अगले भाग में कागज से गुलाब के फूल बनाने की विधि भी विस्तार से समझाई गई है, जो बच्चों के लिए एक रचनात्मक गतिविधि है। यह पाठ न केवल मनोरंजन करता है बल्कि तार्किक सोच को भी बढ़ावा देता है।</p>
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<h3>❤️ 18. आजादी में जीवन</h3>
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<p>यह पुस्तक &#8216;मैना-सुग्गा&#8217; प्राथमिक स्तर के बच्चों के लिए स्वतंत्रता के महत्व को दर्शाने वाली एक शिक्षाप्रद रचना है। इसमें भगवती प्रसाद द्विवेदी द्वारा रचित कविता &#8216;आजादी में जीवन&#8217; के माध्यम से यह समझाया गया है कि किसी भी जीव के लिए स्वतंत्रता से बढ़कर कुछ नहीं है। पिंजरे में बंद पक्षी को चाहे सभी सुख-सुविधाएँ और मनचाहा भोजन मिले, फिर भी वह अपनी स्वाभाविक खुशी और चहक खो देता है।</p>
<p>चिड़ियाघर में कैद शेर भी गुलामी के जीवन से परेशान रहता है और निरंतर दहाड़कर अपनी मुक्ति की इच्छा व्यक्त करता है। जल के बिना मछली का और डाली से टूटने के बाद कलियों का मुरझाना भी उनकी अपनी प्रकृति और परिवेश के प्रति लगाव को दर्शाता है। पुस्तक में अभ्यास के माध्यम से बच्चों को पशु-पक्षियों के प्रति संवेदनशील बनाने और आजादी के वास्तविक अर्थ को समझने के लिए प्रेरित किया गया है।</p>
<p>यह स्पष्ट किया गया है कि सच्ची खुशी केवल स्वतंत्र रहकर ही प्राप्त की जा सकती है। पाठ के अंत में शब्दार्थ, भाषा के नियम और रचनात्मक गतिविधियों के जरिए विद्यार्थियों के भाषाई कौशल को विकसित करने का प्रयास किया गया है। कुल मिलाकर यह पाठ स्वतंत्रता, सहानुभूति और प्राकृतिक जीवन के प्रति प्रेम का संदेश देता है।</p>
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<h3>❤️ 19. अंधेर नगरी</h3>
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<p>यह प्रसिद्ध एकांकी &#8216;अँधेर नगरी&#8217; भारतेंदु हरिश्चंद्र द्वारा रचित है। कहानी एक ऐसे राज्य की है जहाँ न्याय और व्यवस्था पूरी तरह से ठप है। यहाँ का राजा &#8216;चौपट राजा&#8217; विवेकहीन है और नगर में हर वस्तु, चाहे वह कीमती मिठाई हो या साधारण सब्जी, &#8216;टके सेर&#8217; (समान दाम) पर बिकती है।</p>
<p>एक महंत अपने शिष्यों के साथ यहाँ आते हैं और अव्यवस्था देखकर तुरंत लौटने का निर्णय लेते हैं, परंतु उनका एक शिष्य गोवर्धनदास लालचवश वहीं रुक जाता है। एक दिन एक बकरी की मौत के न्याय के नाम पर राजा कोतवाल को फाँसी की सजा सुनाता है, लेकिन कोतवाल के दुबले होने के कारण फंदा ढीला पड़ता है। तब राजा किसी &#8216;मोटे&#8217; आदमी को फाँसी देने का आदेश देता है और सिपाही मिठाई खाकर मोटे हुए गोवर्धनदास को पकड़ लेते हैं।</p>
<p>अंत में, महंत जी अपनी चतुराई से गोवर्धनदास को बचाते हैं। वे राजा को विश्वास दिलाते हैं कि इस शुभ मुहूर्त में जो मरेगा वह सीधा स्वर्ग जाएगा। राजा स्वयं स्वर्ग जाने के लालच में फाँसी पर चढ़ जाता है।</p>
<p>यह नाटक मूर्ख सत्ता और विवेकहीन न्याय प्रणाली पर तीखा व्यंग्य करता है।</p>
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<h3>❤️ 20 क्यों</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1r9KP3x6LkWHYImUZ8MPB9NMKQ919slsB" /></p>
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<h3>❤️ 21 ईद</h3>
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<p>यह कहानी एक दस वर्षीय बालक असलम की है, जो रमज़ान के महीने में रोज़े रखने की ज़िद करता है। असलम की अम्मी चिकन के कपड़ों पर कढ़ाई का काम करके बड़ी मुश्किल से घर चलाती हैं। असलम ईद पर नए कपड़े, विशेषकर रहीम चाचा की दुकान का रँगा कुर्ता-पायजामा और ज़री की सदरी पहनना चाहता है।</p>
<p>उसकी अम्मी दिन-रात मेहनत करके दो सौ रुपये जुटाती हैं ताकि असलम की इच्छा पूरी हो सके। जब असलम कपड़े खरीदने जा रहा होता है, तो उसे अपने मित्र मोहन की याद आती है। मोहन के पिता बहुत बीमार थे और उनके पास इलाज के लिए पैसे नहीं थे।</p>
<p>असलम एक साहसी निर्णय लेता है और अपने नए कपड़ों के पैसे मोहन को उसके पिता के इलाज के लिए दे देता है। खाली हाथ लौटने पर जब वह अपनी अम्मी को यह बात बताता है, तो वे भावुक होकर उसे गले लगा लेती हैं। रात में असलम सपने में अल्लाह की आवाज़ सुनता है कि उसने ही &#8216;सच्ची ईद&#8217; मनाई है।</p>
<p>यह कहानी त्याग, मित्रता और परोपकार की भावना को खूबसूरती से दर्शाती है, जहाँ दूसरों की मदद करना व्यक्तिगत खुशी से कहीं बढ़कर है।</p>
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<h3>❤️ 22 परीक्षा</h3>
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<p>यह अध्याय आयुर्वेद के महान विद्वान आचार्य चरक और उनके शिष्यों की एक प्रेरणादायक कहानी है। आचार्य चरक अपने शिष्यों को वनस्पतियों और जड़ी-बूटियों का गहन ज्ञान देते थे। वे अक्सर चाँदनी रातों में शिष्यों को जंगल ले जाते थे ताकि वे उन विशिष्ट बूटियों को पहचान सकें जो केवल रात में ही दिखती हैं।</p>
<p>एक बार उन्होंने अपने शिष्यों की कड़ी परीक्षा ली और उन्हें तीस दिनों के भीतर जंगल से ऐसी जड़ी-बूटी लाने को कहा जिसका चिकित्सा में कोई उपयोग न हो। निर्धारित समय के बाद, लगभग सभी शिष्य कुछ न कुछ लेकर आए—जैसे कँटीली झाड़ियाँ, छालें या ज़हरीले फल, जिन्हें वे व्यर्थ समझते थे। लेकिन एक शिष्य तीसवें दिन खाली हाथ लौटा और विनम्रतापूर्वक कहा कि उसे पूरे जंगल में ऐसी कोई वनस्पति नहीं मिली जिसका आयुर्वेद में कोई महत्व न हो।</p>
<p>आचार्य चरक ने केवल उसी शिष्य को उत्तीर्ण घोषित किया। उन्होंने समझाया कि प्रकृति में कोई भी चीज़ बेकार नहीं है; यदि हमें उसका उपयोग नहीं पता, तो इसका अर्थ है कि हमारा ज्ञान अधूरा है। यह कहानी हमें सिखाती है कि प्रकृति की हर रचना अमूल्य है और ज्ञान की पूर्णता उसे सही ढंग से समझने में निहित है।</p>
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<h3>❤️ 23 मिथिला चित्रकला</h3>
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<p>यह पुस्तक मिथिला या मधुबनी चित्रकला के समृद्ध इतिहास और विशेषताओं पर प्रकाश डालती है। बिहार के दरभंगा, मधुबनी और नेपाल के क्षेत्रों में प्रचलित यह कला मूल रूप से महिलाओं द्वारा दीवारों और आंगन में बनाई जाती थी। माना जाता है कि इसकी शुरुआत राजा जनक ने राम-सीता के विवाह के अवसर पर की थी।</p>
<p>मधुबनी चित्रकला के दो मुख्य रूप हैं: भित्ति चित्र और अरिपन (अल्पना)। इसमें देवी-देवताओं जैसे दुर्गा, राधा-कृष्ण, शिव-पार्वती और प्राकृतिक दृश्यों का चित्रण किया जाता है। कलाकार पारंपरिक रूप से हल्दी, केले के पत्ते और दूध जैसी घरेलू वस्तुओं से बने प्राकृतिक रंगों का उपयोग करते थे, हालांकि अब एक्रिलिक रंगों का प्रयोग भी होने लगा है।</p>
<p>ब्रिटिश अधिकारी डब्लू. जी. आर्चर ने 1930 के दशक में इसे वैश्विक पहचान दिलाई।</p>
<p>गंगा देवी और सीता देवी जैसे कलाकारों ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध किया। वर्तमान में मिथिला कला संस्थान जैसी संस्थाएं इस पारंपरिक कला को संरक्षित करने और नई प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने का कार्य कर रही हैं। यह कला आज भी मिथिलांचल की सांस्कृतिक पहचान और मिट्टी की खुशबू को जीवंत रखे हुए है।</p>
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		<title>Bihar Board Class 5th English (Blossom) Book 2026 PDF Download</title>
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		<dc:creator><![CDATA[bseb]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 Jul 2022 08:42:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Class 5th Books]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>Bihar Board 5th English (Blossom) Book 2026 PDF Download Bihar Board Class 5th English (Blossom) Book 2026 PDF Download &#8211; इस पेज पर बिहार बोर्ड 5th के छात्रों के लिए &#8220;English (Blossom)&#8220;Book दिया गया है &#124; जिसे आप अपने फ़ोन में Free Download कर सकते हैं &#124; 🌐 सभी विषयों की बुक्स डाउनलोड करने के [&#8230;]</p>
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<h2 style="text-align: center;"><span style="text-decoration: underline; color: #3366ff;"><strong>BSEB Class 5 English (Blossom) Book PDF Free Download</strong></span></h2>
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<h3>❤️ 1. NOBODY&#8217;S FRIEND</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1a33euXZgqhGwSqUD8U1xhY8-VDUyZSel" /><br />
&#8216;ब्लॉसम पार्ट वी&#8217; किताब में &#8216;नोबडीज़ फ्रेंड&#8217; नाम का एक पाठ है, जो एनिड ब्लाइटन की एक कविता पर आधारित है। यह कविता दोस्ती और बांटने के महत्व की बात करती है। यह तीन अलग-अलग तरह के बच्चों के बीच का अंतर दिखाती है।</p>
<p>पहले दो बच्चे, एक लड़की और एक लड़का, अपनी चीजें जैसे मिठाइयाँ, किताबें, गुड़िया, टॉफी, तिपहिया साइकिल और खिलौना ट्रेनें किसी के साथ बांटने से इनकार कर देते हैं। अपने स्वार्थी व्यवहार और दूसरों को अपने साथ खेलने न देने की वजह से वे अकेले रह जाते हैं और &#8216;किसी के भी दोस्त नहीं&#8217; बन पाते। इसके विपरीत, तीसरा बच्चा &#8211; जो कविता में बोल रहा है &#8211; उत्साह से हर चीज़, अपनी मिठाइयाँ, गेंद, किताबें, खेल, और यहाँ तक कि अपने सेब और केक का आधा हिस्सा भी बांटने को तैयार है।</p>
<p>यह उदार रवैया उसे एक सच्चा दोस्त बनाता है। यह पाठ छोटे बच्चों को सिखाने का एक जरिया है, जिसमें शब्दावली के अभ्यास (जैसे &#8216;शेयर&#8217;, &#8216;लेंड&#8217;, &#8216;ट्राइसाइकिल&#8217;), पढ़कर समझने के सवाल और व्याकरण के सबक (जैसे &#8216;a&#8217;, &#8216;an&#8217;, &#8216;the&#8217; और &#8216;some&#8217; का इस्तेमाल) शामिल हैं। यह बच्चों को अपने सामाजिक व्यवहार पर सोचने और कक्षा के माहौल में बांटने की खुशी को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करता है।</p>
<p>📗 बुक डाउनलोड करने के लिए &#8211; <a href="https://biharboardbooks.com/download/#1fgTaE1p76I8_C6myzXFVis_vj_deZH1e">यहाँ क्लिक करें</a></p>
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<h3>❤️ 2. THE SMELL OF THE BREAD AND THE SOUND OF MONEY</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1QUww3wuEZ0teeLHwT50VDUDros9AgK9_" /><br />
&#8216;ब्लॉसम पार्ट वी&#8217; की इस कहानी का नाम है &#8216;द स्मेल ऑफ द ब्रेड एंड द साउंड ऑफ मनी&#8217;। यह कहानी एक कंजूस बेकर और एक गरीब आदमी की चतुराई भरी मुलाकात के जरिए लालच और न्याय के विषय को उजागर करती है। बेकर, जो अपनी स्वादिष्ट ब्रेड के लिए तो मशहूर है लेकिन उदार नहीं है, गुस्से में आ जाता है जब वह देखता है कि एक गरीब आदमी रोज उसकी बेकरी के बाहर खड़ा होकर ताज़ी ब्रेड की खुशबू लेता रहता है।</p>
<p>यह सोचकर कि उस आदमी को इस खुशबू के आनंद के लिए पैसे देने चाहिए, बेकर उसे अदालत ले जाता है। जज, बेकर की बेतुकी मांग को पहचानते हुए, गरीब आदमी से पूछता है कि क्या उसके पास कोई पैसा है।</p>
<p>आदमी दो छोटे सिक्के निकालता है। न्याय की एक शानदार मिसाल पेश करते हुए, जज सिक्के लेकर उन्हें खनखनाता है और फिर वे सिक्के गरीब आदमी को वापस कर देता है।</p>
<p>वह फैसला सुनाता है कि जुर्म की सजा मुअतबिक है: ब्रेड की खुशबू की कीमत सिक्कों की आवाज़ है। यह पाठ छात्रों को निष्पक्षता और अति कंजूसी की मूर्खता के बारे में सिखाता है, साथ ही कहानी पर आधारित शब्दावली और व्याकरण के अभ्यास भी देता है।</p>
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<h3>❤️ 3. THE HOUSE SPARROW</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=11Qy0CW33MHPeDrgP35gkRLQC3LiMLU7N" /><br />
&#8216;द हाउस स्पैरो&#8217; नाम का यह पाठ &#8216;ब्लॉसम पार्ट वी&#8217; में सर्व शिक्षा अभियान के तहत एक शैक्षिक सबक है। यह घरेलू गौरैया, एक आम चिड़िया जो इंसानों के पास रहना पसंद करती है, का विस्तृत वर्णन करता है। पाठ बताता है कि ये चिड़ियाँ घर के अलग-अलग हिस्सों जैसे खिड़की की चौखट, अलमारी, और यहाँ तक कि पर्दों की सिलवटों में भी घोंसला बनाती हैं।</p>
<p>शारीरिक रूप से, गौरैयों का रंग भूरा बताया गया है जिसमें सफेद और काले निशान होते हैं, जबकि नर गौरैयों की गर्दन पर एक काले रंग का धब्बा होता है। उनका भोजन अनाज, कीड़े, पौधों की कोमल शाखाएं और पका हुआ खाना है। पाठ उनके सामाजिक स्वभाव पर जोर देता है, यह बताते हुए कि वे आमतौर पर जोड़े में रहती हैं और साल में कई परिवार पाल सकती हैं। मादा चिड़िया हल्की हरे-सफेद रंग की तीन से चार अंडे देती है।</p>
<p>हालांकि उनकी चहचहाहट सुहावनी होती है, लेकिन कभी-कभी उन्हें परेशानी भी मान लिया जाता है। जीवविज्ञान के तथ्यों से परे, इस किताब में शब्दावली के अभ्यास, समझने के सवाल और &#8216;प्रिपोजिशन&#8217; (संबंधसूचक शब्द) पर केंद्रित व्याकरण के पाठ शामिल हैं। यह भारत की समृद्ध पक्षी दुनिया और भरतपुर जैसे पक्षी अभयारण्यों के महत्व को बताते हुए समाप्त होता है, जिसका उद्देश्य छात्रों में प्रकृति के प्रति प्रशंसा की भावना जगाना है।</p>
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<h3>❤️ 4. DAY BY DAY I FLOAT MY PAPER BOATS</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1nLQY0diufOWVXdkwFWgJwx8vtxifvUnF" /><br />
रबीन्द्रनाथ टैगोर की कविता &#8216;डे बाई डे आई फ्लोट माय पेपर बोट्स&#8217; इस अंग्रेजी पाठ्यपुस्तक के अध्याय, ब्लॉसम पार्ट वी में शामिल है। कविता में एक बच्चे द्वारा नदी में कागज की नावें बहाने की मासूम गतिविधि को दर्शाया गया है।</p>
<p>बच्चा नावों पर अपना नाम और गाँव &#8216;बड़े-बड़े काले अक्षरों&#8217; में लिखता है, इस उम्मीद से कि कोई &#8216;अजनबी जगह&#8217; में उन्हें खोज लेगा। उम्मीद और दुनिया से जुड़ाव का प्रतीक होने के लिए, बच्चा नावों पर अपने बगीचे की शिउली (शेवंती) के फूल भी लाद देता है।</p>
<p>छात्रों को कविता के विषय और भाषा को समझने में मदद करने के लिए, इस अध्याय में शब्दावली, समझ के सवाल और व्याकरण अभ्यास शामिल हैं। यह कागज की नावें बनाने और स्थानीय फूलों के बारे में लिखने जैसी रचनात्मक गतिविधियों को भी प्रोत्साहित करता है।</p>
<p>पाठ बच्चे की पहचान की चाहत और बचपन की साधारण खुशियों पर जोर देता है। कुल मिलाकर, यह अध्याय इस क्लासिक कविता का इस्तेमाल छात्रों की कल्पना को आकर्षक तस्वीरों और इंटरैक्टिव कार्यों के जरिए जोड़ते हुए अंग्रेजी साक्षरता बढ़ाने के लिए करता है।</p>
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<h3>❤️ 5. AN ACT OF BRAVERY</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1SE-Q7kGjb5_Ekn42ZZknMzAQpYBEIJ4G" /><br />
ब्लॉसम पार्ट वी के इस अंग्रेजी पाठ्यपुस्तक अध्याय का नाम &#8216;एन एक्ट ऑफ ब्रेवरी&#8217; है, जो शंकर नाम के एक बहादुर लड़के की कहानी कहता है। साइकिल पर घूमते हुए, शंकर की नजर दो शक़ की निगाह से देखने लायक आदमियों पर पड़ती है, जो एक दुकान के सामने खड़ी जीप में भारी बोरे लाद रहे हैं। उन्हें &#8216;मोती&#8217; और पैसे बांटने की बात करते सुनकर उसे समझ में आ जाता है कि वे चोर हैं।</p>
<p>डर महसूस करने के बावजूद, शंकर तुरंत कार्रवाई करता है। चोरों को भागने से रोकने के लिए वह चतुराई से उनकी जीप के चारों टायरों की हवा निकाल देता है और फिर अपराध की रिपोर्ट करने के लिए नजदीकी पुलिस स्टेशन भागता है। उसकी त्वरित सोच की वजह से पुलिस तुरंत मौके पर पहुंच जाती है और अपराधियों को पकड़ लेती है।</p>
<p>इंस्पेक्टर शंकर की बहादुरी और बुद्धिमत्ता की तारीफ करता है। कहानी से परे, इस पाठ में शब्दावली बढ़ाने, कंजंक्शन (संयोजक) पर केंद्रित व्याकरण अभ्यास और लेखन कार्य जैसी शैक्षिक गतिविधियाँ शामिल हैं। यह छात्रों को घर में आग लगने या गणतंत्र दिवस पर बच्चों को दिए जाने वाले राष्ट्रीय बहादुरी पुरस्कारों जैसे वास्तविक जीवन के परिदृश्यों पर चर्चा करके बहादुरी पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित करता है। इसका उद्देश्य युवा शिक्षार्थियों में साहस और नागरिक जिम्मेदारी के मूल्यों को बिठाना है।</p>
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<h3>❤️ 6. THE OLD MAN AND THE GRANSON</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1vynl1uwbgpclslgEo2L1MyoHQEN0tkbM" /><br />
यह कहानी बुजुर्गों के प्रति सम्मान और सहानुभूति के महत्व को उजागर करती है। एक बूढ़ा आदमी, जो धुंधली नज़र और कांपते हाथ जैसी उम्र की कमजोरियों से जूझ रहा है, उसके बेटे और बहू द्वारा बुरी तरह बर्ताव किया जाता है।</p>
<p>क्योंकि वह अक्सर खाना गिरा देता है या बर्तन तोड़ देता है, वे उसे एक सस्ते लकड़ी के कटोरे से अकेले एक कोने में खाने के लिए मजबूर करते हैं, जिससे वह बहुत दुखी रहता है। स्थिति तब बदलती है जब दंपति अपने चार साल के बेटे को लकड़ी के टुकड़े तराशते हुए पाते हैं।</p>
<p>जब पूछा गया कि वह क्या कर रहा है, तो बच्चा भोलेपन से समझाता है कि वह अपने माता-पिता के लिए एक लकड़ी का कटोरा बना रहा है ताकि वे बूढ़े होने पर उसमें खा सकें। यह बात सुनकर माता-पिता को गहरा शर्म और एहसास होता है कि वे कितना बुरा उदाहरण पेश कर रहे हैं।</p>
<p>आंसुओं से भरकर, वे तुरंत दादाजी को वापस डाइनिंग टेबल पर ले आते हैं और उनके साथ वह देखभाल और सम्मान का बर्ताव करते हैं जिसके वे हकदार हैं, अब उनकी शारीरिक परेशानियों पर ध्यान नहीं देते। यह पाठ एक शक्तिशाली अनुस्मारक के रूप में काम करता है कि बच्चे अपने माता-पिता के कार्यों को देखकर सीखते हैं, और बुजुर्गों के साथ दया का व्यवहार करना एक मौलिक नैतिक कर्तव्य है।</p>
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<h3>❤️ 7. LOVELY MOON</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1ThDCnEY3yySxrqujbkaGem1RQlpEhV3I" /><br />
&#8216;ब्लॉसम पार्ट वी&#8217; नाम की इस किताब में &#8216;लवली मून&#8217; नाम का एक काव्य पाठ है। यह अंग्रेजी भाषा की कविता चंद्रमा से एक दिल से की गई अपील है, जिसमें उससे कहा जा रहा है कि वह सूरज के पश्चिम में डूबने के बाद जल्दी से उदय हो जाए।</p>
<p>कविता चंद्रमा की भूमिका को अंधेरी रात के दौरान लाखों लोगों के लिए रोशनी के मुख्य स्रोत के रूप में उजागर करती है, खासकर तब जब सूरज की अनुपस्थिति में बाहर खेलना मुश्किल हो जाता है। यह उस खुशी का वर्णन करती है जो बच्चों को चाँद देखकर होती है और बताती है कि माँएं उसकी रोशनी में लोरी कैसे गाती हैं।</p>
<p>चंद्रमा को सभी मानव जाति के प्रति दयालु बताया गया है, जो अमीर और गरीब दोनों पर समान रूप से अपनी मनभावन रोशनी बिखेरता है, और &#8216;O&#8217; के आकार में दिखाई देता है। पाठ इस बात पर जोर देता है कि चाँद आनंद, मन की शांति और सुरक्षा की भावना देता है, जिससे लोग उसकी &#8216;गोद&#8217; में शांति से सो सकते हैं।</p>
<p>इसके अतिरिक्त, इस पाठ में शब्दावली अभ्यास, समझ के सवाल और पर्यायवाची, विलोम और तुकांत शब्दों पर केंद्रित गतिविधियाँ शामिल हैं ताकि छात्रों के भाषा कौशल को बढ़ाया जा सके।</p>
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<h3>❤️ 8. THE ARAB AND HIS CAMEL</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1qqN65ATxj3eoVMdvfsdYomwXgMwa-iEW" /><br />
&#8216;द अरब एंड हिज़ कैमल&#8217; की कहानी एक अरब यात्री और उसके ऊंट की रेगिस्तान की एक ठंडी सर्द रात की एक क्लासिक नीति कथा है। सूर्यास्त के बाद एक छोटा सा तंबू लगाने के बाद, अरब ऊंट को बाहर रहने देता है जबकि वह खुद अंदर सो जाता है।</p>
<p>हालाँकि, ऊंट बार-बार अपने शरीर के हिस्सों को अंदर लाने की इजाज़त माँगता है &#8211; पहले अपना सिर और गर्दन, फिर अपने अगले पैर &#8211; कड़ाके की ठंड की शिकायत करते हुए। हर बार, मालिक अपने पालतू जानवर को जगह देने के लिए दयापूर्वक एक कोने में सरक जाता है।</p>
<p>आखिरकार, ऊंट सुझाव देता है कि चूंकि आधे शरीर के बाहर रहने पर दरवाजा बंद नहीं हो सकता, इसलिए उसे दोनों को गर्म रखने के लिए पूरी तरह अंदर आ जाना चाहिए। अरब के इनकार के बावजूद कि तंबू बहुत छोटा है, ऊंट फिर भी शांति से अंदर घुस आता है, अपने मालिक को ठंडी रात में बाहर धकेल देता है।</p>
<p>कहानी इस बात पर खत्म होती है कि अरब अपने ही तंबू के बाहर खड़ा बिना कुछ बोले है जबकि ऊंट उसकी दया के लिए धन्यवाद देता है और उससे दरवाजा बंद करने को कहता है। यह पाठ यह याद दिलाता है कि कैसे छोटी-छोटी रियायतें अगर सीमाएं न बनाई जाएं तो इंसान को पूरी तरह विस्थापित कर सकती हैं।</p>
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<h3>❤️ 9. BIRBAL&#8217;S WIT</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1iqwyqiFHy9lShjNkQI_313FtmtSBfZGB" /><br />
&#8216;बीरबल की चतुराई&#8217; नाम की यह कहानी सम्राट अकबर के महल के बगीचे में सेट है, जहां सम्राट अपने दरबारियों को राजधानी में कौवों की सही संख्या गिनने की चुनौती देते हैं। जहां ज्यादातर नवाब इस काम को नामुमकिन बताते हैं, वहीं बीरबल चुनौती स्वीकार कर लेते हैं।</p>
<p>निर्धारित तारीख के दिन, बीरबल आते हैं और पूरे विश्वास के साथ दावा करते हैं कि वहाँ ठीक 21,412 कौवे हैं। जब अकबर शक की निगाह से पूछते हैं कि वह इतने यकीन के साथ कैसे कह सकते हैं, तो बीरबल चतुराई और हंसी-मजाक के साथ समझाते हैं कि अगर ज्यादा हैं तो वे दूसरे शहरों से रिश्तेदारी करने आए होंगे, और अगर कम हैं तो कुछ स्थानीय कौवे अपने रिश्तेदारों से मिलने कहीं और गए होंगे।</p>
<p>बीरबल की चतुर और हास्यपूर्ण तर्क से प्रभावित होकर, अकबर उन्हें दरबार की जान घोषित करते हैं और उन्हें 3000 स्वर्ण मुद्राएं और कीमती जवाहरात का पुरस्कार देते हैं। यह पाठ बीरबल की बुद्धिमत्ता और त्वरित सोच व हास्य के जरिए मुश्किल लगने वाली समस्याओं को हल करने की क्षमता पर जोर देता है।</p>
<p>इसमें शब्दावली अभ्यास, समझ के सवाल और व्याकरण पाठ (विराम चिह्न और &#8216;-ly&#8217; प्रत्यय जैसे) भी शामिल हैं। यह नाटक अकबर और बीरबल के बीच पौराणिक सौहार्द और बौद्धिक चंचलता का एक क्लासिक उदाहरण है।</p>
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<h3>❤️ 10. THE ANT AND THE GRASSHOPPER</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1XNtiSSgSg0ixhK9HGnE8T_GCm7rVIvKs" /><br />
&#8216;द ऐंट एंड द ग्रासहॉपर&#8217; की कहानी एक उत्तरी इलाके में सेट एक क्लासिक नीति कथा है जहां जीव गर्मी का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं। जब सूरज चमक रहा होता है, टिड्डा अपना वक्त आराम करने और संगीत बजाने में बिताता है, गर्मी का आनंद लेने में मगन रहता है। इसके विपरीत, चींटी अथक परिश्रम करती है, आने वाली सर्दी के लिए गेहूं के दाने इकट्ठा करने और जमा करने के लिए तेजी से इधर-उधर भागती रहती है।</p>
<p>जब चींटी टिड्डे को भी ऐसा ही करने की सलाह देती है, तो वह उसे नजरअंदाज कर देता है, वर्तमान पल का आनंद लेना पसंद करता है। जैसे ही सर्दी अपनी ठंडी हवाओं और पाले के साथ आती है, चींटी अपने भंडार घर में सुरक्षित और अच्छी तरह से भोजन करते हुए रहती है। हालाँकि, टिड्डा अपने आप को भूखा और ठंडा पाता है क्योंकि उसके पास खाने के लिए कुछ भी नहीं है।</p>
<p>वह मदद माँगने के लिए चींटी के पास जाता है, लेकिन वह मना कर देती है, उसे उसकी आलस्य और तैयारी न करने की याद दिलाते हुए। यह कहानी कड़ी मेहनत और भविष्य की योजना बनाने के महत्व पर एक नैतिक सबक के रूप में काम करती है। यह इस बात पर जोर देती है कि जो लोग खुशहाल समय में अपने कर्तव्यों को नजरअंदाज करते हैं और आलस्य में लिप्त रहते हैं, उन्हें परिस्थितियों के बदलने पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।</p>
<p>अंततः, यह नीति कथा सिखाती है कि हर किसी को अपने भविष्य की जिम्मेदारी लेनी चाहिए और मेहनत का फल मिलता है जबकि आलस्य दुख की ओर ले जाता है।</p>
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<h3>❤️ 11. THE MIRACLE MOTHER</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1Vk_NWCpEPipKmnw22ycl5Bar3Dx4CUVy" /><br />
ब्लॉसम पार्ट वी नाम की इस किताब में &#8216;माई मिरेकल मदर&#8217; नाम का एक पाठ है, जो एक माँ के प्यार की निस्वार्थ और स्थायी प्रकृति के प्रति एक काव्य श्रद्धांजलि है। जोआना फच्स द्वारा लिखित यह कविता एक माँ को &#8216;चलता-फिरता चमत्कार&#8217; बताती है जिसका प्यार किसी सीमा को नहीं जानता।</p>
<p>यह उसकी भूमिका को एक शिक्षक, सांत्वना देने वाले और प्रोत्साहक के रूप में उजागर करती है जो अपने बच्चे को आंतरिक शक्ति और धैर्य प्रदान करती है। पाठ उसकी निस्वार्थ निष्ठा के लिए गहरी कृतज्ञता व्यक्त करता है, यह बताते हुए कि वह किसी भी चोट को सहलाने के लिए दिन-रात हर पल उपलब्ध रहती है।</p>
<p>यह कभी-कभी उसे हल्के में लेने के लिए अफसोस की भावना को भी छूता है, यह स्वीकार करते हुए कि व्यक्ति का विकास और चरित्र मौलिक रूप से उसकी देखभाल में निहित है। कविता से परे, इस पाठ में &#8216;अनफेलिंग&#8217;, &#8216;ग्रेटफुल&#8217; और &#8216;पेशेंस&#8217; जैसे शब्दों पर केंद्रित शब्दावली अभ्यास, साथ ही &#8216;un-&#8216; जैसे उपसर्गों से जुड़े व्याकरणिक कार्य शामिल हैं।</p>
<p>यह छात्रों को अपनी माताओं के गुणों पर विचार करने और बुजुर्ग माता-पिता के साथ व्यवहार जैसे सामाजिक मुद्दों पर चर्चा करने के लिए प्रोत्साहित करता है। सामग्री मातृ दिवस के लिए कार्ड बनाने और तुकबंदी लिखने जैसी रचनात्मक गतिविधियों के साथ समाप्त होती है, जो माताओं के लिए प्रशंसा और सम्मान की गहरी भावना को बढ़ावा देती है।</p>
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<h3>❤️ 12. JESUS TO SUPPER</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1d2_6Dx9l8hAsKIkKjGrVnzB0SpYGA_CP" /><br />
&#8216;जीसस टू सपर&#8217; नाम की यह कहानी एक गरीब, दयालु बूढ़े दंपति की है जो ईसा मसीह को अपने घर भोजन के लिए आमंत्रित करते हैं। अपनी गरीबी के बावजूद, वे सबसे अच्छा भोजन बनाते हैं और धैर्य से इंतज़ार करते हैं। जब जीसस देर से आते हैं, तो एक बूढ़ा भिखारी भोजन मांगते हुए आता है।</p>
<p>औरत उसे अपना हिस्सा दे देती है। बाद में, एक ठंडा और भूखा छोटा लड़का आता है, और बूढ़ा आदमी लड़के को अपना हिस्सा दे देता है। आखिरकार, जीसस उनके दरवाजे पर पहुंचते हैं।</p>
<p>जब दंपति का कहना है कि वे इंतज़ार कर रहे थे, तो जीसस खुलासा करते हैं कि वह पहले ही दो बार उनसे मिल चुके हैं &#8211; पहले वह भिखारी बनकर और फिर वह छोटा लड़का बनकर। यह कहानी &#8216;अतिथि देवो भव&#8217; के विषय को दर्शाती है, यह दिखाते हुए कि जरूरतमंदों की सेवा करना ईश्वर की सेवा करने के बराबर है। यह इस बात पर जोर देती है कि गरीबों और पीड़ितों के प्रति दयालुता और आत्म-बलिदान के कार्य ही दैवीय को अपने जीवन में स्वागत करने के सच्चे तरीके हैं।</p>
<p>पाठ शब्दावली अभ्यास, &#8216;some&#8217; और &#8216;any&#8217; पर व्याकरण बिंदुओं, और मेहमानों का सम्मान दिखाने पर केंद्रित गतिविधियों के साथ समाप्त होता है।</p>
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<h3>❤️ 13. DAY DREAM</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1BU8yblcJKv1sqZWW4mJzE7tm33pdeK1k" /><br />
&#8216;ब्लॉसम पार्ट वी&#8217; की इस किताब में &#8216;डे ड्रीम&#8217; नाम का एक पाठ है, जो गोपाल भांड के घर के पास रहने वाले एक गरीब जोड़े पर केंद्रित एक बंगाली लोक कथा है। पति और पत्नी खुद को पैसे बचाने पर एक गाय खरीदने के बारे में एक विस्तृत दिन के सपने में फंसा हुआ पाते हैं। उनकी कल्पना बेतहाशा भागती है क्योंकि पत्नी दूध, मक्खन और घी के लिए कई बर्तनों का इस्तेमाल करने की योजना बनाती है, यहाँ तक कि अपनी बहन के लिए अतिरिक्त दूध भेजने का इरादा रखती है।</p>
<p>यह एक गर्म बहस को जन्म देता है, जिससे पति गुस्से में काल्पनिक बर्तन तोड़ देता है। उनकी मूर्खता देखकर, गोपाल भांड उन्हें सबक सिखाने का फैसला करता है। वह दिखावा करता है कि उनकी अस्तित्वहीन गाय उसके अस्तित्वहीन सेम और ककड़ी के बगीचे को बर्बाद कर रही है।</p>
<p>वह लाठी से हवा में मारने लगता है, जिससे दंपति को उन चीजों पर लड़ने की बेतुकी बात का एहसास होता है जो मौजूद ही नहीं हैं। यह कहानी वास्तविक लक्ष्यों की ओर काम करने के बजाय अवास्तविक कल्पनाओं पर समय बर्बाद करने की एक हास्यपूर्ण आलोचना के रूप में कार्य करती है। इस अध्याय में शब्दावली अभ्यास, विराम चिह्न पर व्याकरण पाठ, और छात्रों को बीरबल और तेनाली राम जैसे चतुर ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को समझने में मदद करने के लिए गतिविधियाँ भी शामिल हैं।</p>
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<h3>❤️ 14. THREE LITTLE PIGS</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=15IUOoAckx2R6bnOfHO0CY4Z_o2or6-6a" /><br />
&#8216;थ्री लिटिल पिग्स&#8217; नाम की यह किताब तीन छोटे सूअरों की एक क्लासिक नीति कथा कहती है जो अपना भाग्य ढूंढने निकलते हैं। अपनी माँ की सलाह का पालन करते हुए कि हमेशा अपना सर्वश्रेष्ठ करें, प्रत्येक सूअर अपना घर बनाने के लिए एक अलग सामग्री चुनता है। पहला सूअर पुआल का घर बनाता है, जो सबसे आसान और तेज विकल्प है, जबकि दूसरा थोड़ा मजबूत ढांचा बनाने के लिए लकड़ियों का इस्तेमाल करता है।</p>
<p>इसके विपरीत, तीसरा सूअर मेहनत से ईंटों का एक मजबूत घर बनाता है। सूअरों को खाने के लिए उत्सुक एक बड़ा बुरा भेड़िया आसानी से पुआल और लकड़ियों के घरों को उड़ा देता है, पहले दो सूअरों को खा जाता है। हालाँकि, वह ईंट के घर को उड़ा नहीं पाता।</p>
<p>चतुर तीसरा सूअर भेड़िये को मात देता है जब वह चिमनी के रास्ते अंदर आने की कोशिश करता है, जिसके परिणामस्वरूप भेड़िये की मृत्यु हो जाती है। कहानी इस बात पर जोर देते हुए समाप्त होती है कि तीसरा सूअर खुशी से रहता है, उसे यह सीख मिली है कि कड़ी मेहनत और चीजों को अच्छी तरह से करना जीवन में सफलता की कुंजी है। पाठ में कहानी पर आधारित शब्दावली, व्याकरण (विशेष रूप से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष भाषण) और पढ़कर समझने के शैक्षिक अभ्यास भी शामिल हैं।</p>
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<h3>❤️ 15. THE BLIND BEGGAR</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1u2vQkK_nuUTBXTG7UE-Dj7jpCoQHyldo" /><br />
&#8216;द ब्लाइंड बेगर&#8217; मैरी डॉबसन की एक मार्मिक कविता है जो एक नेत्रहीन भिखारी के दैनिक जीवन और संघर्षों को उजागर करती है। कविता का वक्ता, एक स्कूल जाने वाला बच्चा, उस भिखारी को नियमित रूप से मंदिर के द्वार के पास उसी जगह पर बैठे देखता है। भिखारी अपने खनकते कटोरे की आवाज और जोर-जोर से की जाने वाली फटी आवाज में की गई पुकार पर निर्भर करता है ताकि राहगीरों से भीख मिल सके।</p>
<p>उसकी बेतरतीब उपस्थिति और उसकी देखभाल करने वाले दोस्तों के अभाव के बावजूद, कविता मजाक उड़ाने के बजाय सहानुभूति और सम्मान की आवश्यकता पर जोर देती है। यह ध्यान देती है कि हालाँकि भिखारी शहर के खूबसूरत गुंबदों या नीले आसमान को नहीं देख सकता, फिर भी वह ईश्वर की ही एक रचना है। कविता का केंद्रीय विषय रचनाकार की नज़र में सभी इंसानों की समानता है।</p>
<p>यह सुझाव देता है कि गरीब और विकलांग लोगों के लिए ईश्वर का प्यार किसी और के लिए उसके प्यार जितना ही गहरा है। पाठ में शब्दावली बढ़ाने, समझ के सवाल और विशेषण तथा उनकी तुलना के स्तर पर केंद्रित व्याकरण पाठ जैसे विभिन्न शैक्षिक अभ्यास भी शामिल हैं। अंततः, यह करुणा का एक सबक के रूप में कार्य करता है, जो पाठकों को उनकी सामाजिक या शारीरिक स्थिति की परवाह किए बिना सभी के साथ गरिमापूर्ण व्यवहार करने की याद दिलाता है।</p>
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<h3>❤️ 16. THE CROW</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=16PuTEEUFwzglDzNHaIymTGsBlGp3Uz1B" /><br />
ब्लॉसम पार्ट वी से &#8216;द क्रो&#8217; नाम की यह कहानी माता-पिता के धैर्य बनाम बच्चों की असहिष्णुता के बारे में एक गहरा नैतिक सबक देती है। कथा में अस्सी साल का बूढ़ा बाप और उसका उच्च शिक्षित पैंतालीस साल का बेटा एक साथ बैठे हैं। जब एक कौवा उनकी खिड़की पर बैठता है, तो बाप अपने बेटे से चार बार पूछता है, &#8216;यह क्या है?&#8217; बेटा, जो लगातार चिड़चिड़ा होता जा रहा है, आखिरकार एक ही सवाल दोहराने के लिए अपने पिता पर चिल्लाने लगता है।</p>
<p>जवाब में, बाप अपने बेटे के बचपन के एक पुराने डायरी लाता है। वह एक पन्ना दिखाता है जिसमें दर्ज है कि जब बेटा छोटा था, तो उसने एक कौवे के बारे में तेईस बार &#8216;यह क्या है?&#8217; पूछा था। बाप ने बिना किसी चिड़चिड़ाहट के प्यार और धैर्य से सभी तेईस बार जवाब दिया था।</p>
<p>यह तुलना माता-पिता के अपने बच्चों के लिए निस्वार्थ प्यार और असीम धैर्य को उजागर करती है, जिसे बेटे द्वारा अपने बूढ़े पिता के प्रति सहानुभूति की कमी के विपरीत दिखाया गया है। यह कहानी एक मार्मिक अनुस्मारक के रूप में काम करती है कि हमें अपने बुजुर्ग माता-पिता के साथ वही दया, प्यार और धैर्य दिखाना चाहिए जो उन्होंने हमारे बचपन के दौरान हमें दिया था, न कि उन्हें बोझ समझना चाहिए। यह पाठ सम्मान, कृतज्ञता और माता-पिता और बच्चे के बीच स्थायी बंधन पर जोर देता है।</p>
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<h3>❤️ 17. THE CROCODILE&#8217;S ADVICE</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1mi6Ur4JDvSwos4xHGFpBfgEKj84pfQzk" /><br />
ब्लॉसम पार्ट वी से &#8216;द क्रोकोडाइल्स एडवाइस&#8217; नाम की यह किताब एक लोमड़ी और एक मगरमच्छ की एक शैक्षिक कहानी कहती है। बहुत भूखा महसूस कर रही लोमड़ी को उसके दोस्त मगरमच्छ द्वारा नदी पार करने के लिए आमंत्रित किया जाता है जहां भोजन अधिक उपलब्ध है। जबकि लोमड़ी जमीन पर शिकार करने में कुशल है, उसे पानी का ज्ञान नहीं है।</p>
<p>मगरमच्छ लोमड़ी को विशेष रूप से चेतावनी देता है कि वह नदी में शिकार करने की कोशिश न करे और मछलियों से बचे। हालाँकि, लोमड़ी लालच से अभिभूत हो जाती है और इस चेतावनी को नजरअंदाज कर देती है, मछली पकड़ने के लिए पानी में कूद जाती है। वह डूबने लगती है और तभी बच पाती है जब मगरमच्छ उसे बचाता है और किनारे पर ले आता है।</p>
<p>कहानी इस बात पर जोर देती है कि लालच एक बुराई है और बुद्धिमान सलाह को नजरअंदाज करने से खतरा होता है। मगरमच्छ निष्कर्ष निकालता है कि उन लोगों को सलाह देने का कोई मतलब नहीं है जो मूर्खतापूर्ण कार्य करते हैं। कहानी से परे, पाठ में शब्दावली अभ्यास, समझ के सवाल और प्रेजेंट परफेक्ट और पास्ट परफेक्ट टेंस, साथ ही &#8216;शुड हेव&#8217; और &#8216;शुड नॉट हेव&#8217; के उपयोग पर केंद्रित व्याकरण पाठ शामिल हैं।</p>
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		<title>Bihar Board Class 5 Urdu Book 2026 PDF Download</title>
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		<dc:creator><![CDATA[bseb]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 Jul 2022 07:33:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Class 5th Books]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>Bihar Board 5th Urdu Book 2026 PDF Download (اردو) Bihar Board Class 5 Urdu Book 2026 PDF Download &#8211; इस पेज पर बिहार बोर्ड 5th के छात्रों के लिए &#8220;Urdu (اردو)&#8221; Book दिया गया है &#124; जिसे आप अपने फ़ोन में Free Download कर सकते हैं &#124; 🌐 सभी विषयों की बुक्स डाउनलोड करने के [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<h2 style="text-align: center;"><span style="text-decoration: underline; color: #ff0000;"><strong>Bihar Board 5th Urdu Book 2026 PDF Download</strong></span><span style="text-decoration: underline; color: #ff0000;"><strong> (اردو)</strong></span></h2>
<p><img data-recalc-dims="1" decoding="async" class="aligncenter" src="https://i0.wp.com/biharboardbooks.com/wp-content/uploads/2022/07/bihar_board_books-min.png?ssl=1" /> <strong>Bihar Board Class 5 Urdu Book 2026 PDF Download</strong> &#8211; इस पेज पर बिहार बोर्ड 5th के छात्रों के लिए &#8220;<span style="text-decoration: underline;"><strong>Urdu (اردو)</strong></span>&#8221; Book दिया गया है | जिसे आप अपने फ़ोन में Free Download कर सकते हैं |</p>
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<h2 style="text-align: center;"><span style="text-decoration: underline; color: #3366ff;"><strong>BSEB Class 5 Urdu (اردو) Textbook PDF Free Download</strong></span></h2>
<p><span style="font-size: 18pt;"><strong>☞</strong></span> बुक्स डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए डाउनलोड लिंक पर क्लिक करें | <img decoding="async" class="aligncenter" src="https://i0.wp.com/biharboard-ac.in/wp-content/uploads/2022/07/kindpng_6137677-min.png?resize=601%2C111&amp;ssl=1" alt="line" /></p>
<h3>❤️ اپنی بات</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1Ko0EEQtrEDddEitxBiAuHdcLz86vNKZb" /><br />
यह पुस्तक &#8216;गुलशन-ए-उर्दू&#8217; कक्षा पाँचवीं के लिए बिहार राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), पटना द्वारा तैयार की गई है। इस पुस्तक का मूल उद्देश्य राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2005 और राज्य पाठ्यचर्या रूपरेखा 2008 की सिफारिशों के अनुरूप बच्चों में उर्दू भाषा की समझ और रचनात्मक क्षमताओं को विकसित करना है। पुस्तक में शामिल पाठ बच्चों को रटने की आदत से दूर रखने और उन्हें व्यावहारिक जीवन से जोड़ने के लिए तैयार किए गए हैं। विषयसूची के अनुसार इसमें नात, नज़्में (जैसे &#8216;हिंद के बाग़बानो उठो&#8217; और &#8216;चाँद पे जा पहुँचा इंसान&#8217;), और विभिन्न गद्य पाठ जैसे &#8216;किफायतशारी&#8217;, &#8216;बीबी फातिमा&#8217;, &#8216;नालंदा की सैर&#8217;, और &#8216;गुरु गोबिंद सिंह&#8217; शामिल हैं। इसमें वैज्ञानिक विषय जैसे &#8216;हमें प्यास क्यों लगती है&#8217; और ऐतिहासिक व प्रसिद्ध व्यक्तित्व जैसे &#8216;कल्पना चावला&#8217; और &#8216;रामानुजम&#8217; पर भी प्रकाश डाला गया है। यह पुस्तक भाषा की बुनियादी कौशल के साथ-साथ बच्चों के मानसिक स्तर और स्वाभाविक रुचि को ध्यान में रखकर तैयार की गई है ताकि उनमें पढ़ने का शौक पैदा हो सके।</p>
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<h3>❤️ سبق 1 : حمد (نظم)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=13FAVj266EL5gQ0g3UvuCCtKa4Z_XIvvX" /><br />
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<h3>❤️ سبق 1 (الف) : نعت (براے مطالعہ)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1HX-276uJ-_nxA5Y7TA987er7P_TuASIP" /><br />
यह पाठ एक सुंदर नात (प्रशस्ति) पर आधारित है, जिसमें पैगंबर मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के प्रति श्रद्धा और प्रेम व्यक्त किया गया है। नात के शब्दों में आपको &#8216;अहमद मुस्तफा&#8217;, &#8216;हबीबे खुदा&#8217;, और &#8216;सरवरे अंबिया&#8217; जैसे पवित्र उपाधियों से संबोधित किया गया है। कवि आपको अपना मार्गदर्शक और समस्या-समाधानकर्ता मानते हुए सिफारिश की गुहार लगाता है। इसमें आपके विभिन्न गुणों का वर्णन किया गया है, जैसे कि आप &#8216;शहरे इल्म ओ अदब&#8217;, &#8216;शहंशाहे अरब&#8217;, और &#8216;खातिमुल मुरसलीन&#8217; हैं। नात में हज़रत फातिमा के पिता होने का भी उल्लेख है और आपको &#8216;रहमतुल्लिल आलमीन&#8217; कहकर पुकारा गया है। यह प्रार्थना की गई है कि आपकी सिफारिश क़ुबूल हो और आपके जीवन की रोशनी से लोगों का जीवन रोशन हो। यह कविता बच्चों के लिए खास तौर पर तैयार की गई है, ताकि वे पैगंबर के प्रति प्रेम को महसूस कर सकें, जिसमें हर पंक्ति के बाद &#8216;अस्सलाम ऐ नबी&#8217; का दोहराव दिल को छू जाता है। कुल मिलाकर यह नात पैगंबर करीम की पवित्रता से जुड़ाव और उनकी शिक्षाओं व दया से प्रभावित होने का एक अनूठा प्रयास है।</p>
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<h3>❤️ سبق 2 : سچ کی تاثیر</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1Zoyi_mqtd5C3il2XqQgVyUVJyW17VO6a" /><br />
यह पाठ हज़रत शेख अब्दुल क़ादिर जीलानी रहमतुल्लाह अलैहि के बचपन का एक ईमान बढ़ाने वाला वाकया है, जिसमें सच्चाई की ताकत और प्रभाव को बताया गया है। जब आप पढ़ने के लिए बगदाद के काफिले के साथ चले तो आपके माता-पिता ने आपको चालीस दीनार दिए और सलाह दी कि हमेशा सच बोलना। रास्ते में डाकुओं ने काफिले पर हमला कर दिया और सबको लूटना शुरू किया। एक डाकू ने जब आपसे पूछा कि तुम्हारे पास क्या है, तो आपने बिना डरे अपने माता-पिता की सलाह पर अमल करते हुए सच बता दिया कि आपके पास चालीस दीनार हैं जो कमीज़ में सिले हुए हैं। डाकुओं के सरदार को जब यह पता चला कि इस लड़के ने अपने माल की रक्षा के लिए भी सच्चाई का पालन नहीं छोड़ा, तो उसका दिल पसीज गया। उसने सोचा कि एक बच्चा अपनी माँ की बात का इतना पाबंद है और वह खुद अल्लाह के हुक्मों की नाफरमानी कर रहा है। इस सच्चाई के प्रभाव से प्रभावित होकर सरदार और उसके सभी साथियों ने तोबा की, लूटा हुआ माल वापस किया और नेकी का रास्ता अपनाया। यह वाकया सिखाता है कि सच्चाई इंसान को बड़ी आज़माइशों से बचाती है और दूसरों की ज़िंदगी बदलने का ज़रिया बनती है।</p>
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<h3>❤️ سبق 3 : کفایت شعاری (نثر)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1rdsy9-32Adb0ZDQ8_OVaIDU9X7nVwY44" /><br />
यह पाठ एक कविता के रूप में है जिसका शीर्षक &#8216;हम हरगिज़ झूठ नहीं बोलेंगे&#8217; है। इस कविता में सच्चाई के महत्व और झूठ की बुराइयों पर रोशनी डाली गई है। कवि संकल्प करता है कि वह कभी झूठ नहीं बोलेगा क्योंकि झूठ बोलने से अल्लाह तआला, माता-पिता और गुरुजन नाराज़ हो जाते हैं। झूठ बोलने वाले व्यक्ति पर कोई यकीन नहीं करता और समाज में उसे अपमान और शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है। कविता में बताया गया है कि सच्चाई में ताकत है और &#8216;साँच को आँच नहीं&#8217; के मुहावरे के मुताबिक सच्चा इंसान हमेशा सिर ऊँचा रखता है। इसके अलावा, इस पाठ में छात्रों की नैतिक शिक्षा के लिए कविता, प्रश्न-उत्तर और विलोम शब्द भी शामिल किए गए हैं ताकि वे भाषा के साथ-साथ नैतिक मूल्य भी सीख सकें। कविता का अंत इस दुआ पर होता है कि हे रब, हमें झूठ से दूर रख और हमेशा सच बोलने की तौफीक अता फरमा। यह पाठ बच्चों को ईमानदारी और सच्चाई का रास्ता अपनाने की प्रेरणा देता है।</p>
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<h3>❤️ سبق 4 : ہم ہرگز جھوٹ نہ بولینگے</h3>
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यह किताब &#8216;हम हरगिज़ झूठ नहीं बोलेंगे&#8217; के शीर्षक से एक पाठ-अध्ययन कविता पर आधारित है जो बच्चों को सच्चाई का महत्व सिखाती है। कविता के जरिए यह संदेश दिया गया है कि सच्चाई अल्लाह की खुशनूदी और लोगों की नज़र में इज्जत का कारण बनती है, जबकि झूठ से अल्लाह, माता-पिता और गुरुजन नाराज़ होते हैं। कवि कहता है कि हमें कुछ भी बोलने से पहले अपने शब्दों को तौलना चाहिए ताकि हम हमेशा सच्चे रास्ते पर रहें। झूठ बोलने वाला व्यक्ति समाज में अपनी कदर खो देता है और अपमान का सामना करता है, जबकि सच्चे इंसान पर अल्लाह की रहमत बरसती है। किताब के दूसरे हिस्सों में छात्रों की समझ के लिए कविता, शब्दों के अर्थ, प्रश्न-उत्तर, खाली जगहें भरना और विलोम शब्द शामिल हैं। इसके अलावा &#8216;साँच को आँच नहीं&#8217; जैसे मुहावरे की व्याख्या और भाषाई खेलों के जरिए भाषा दक्षता को बेहतर बनाने की कोशिश की गई है। कुल मिलाकर यह सामग्री बच्चों की नैतिक शिक्षा और उर्दू भाषा की पढ़ाई के लिए एक बेहतरीन नमूना है, जो उन्हें झूठ की बुराई से बचाती है और सच्चाई को अपनाने की तरफ प्रेरित करती है।</p>
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<h3>❤️ سبق 5 : بی بی فاطمه (نثر)</h3>
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यह पाठ हज़रत बीबी फातिमा की सीरत और उनके उच्च नैतिक गुणों पर प्रकाश डालता है। हज़रत बीबी फातिमा, इस्लाम के पैगंबर हज़रत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बेटी और मुसलमानों के चौथे खलीफा हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हु की पत्नी थीं। आपकी ज़िंदगी मेहनत, सादगी और किफायतशारी का एक जीवंत नमूना थी। एक वाकये के जरिए बताया गया है कि कैसे आप घर के कामकाज, जैसे चक्की पीसना, अपनी बेटी फिज़ा के साथ बारी-बारी से करती थीं और उनके साथ नौकरों जैसा नहीं बल्कि बहन जैसा व्यवहार करती थीं। आप अपनी दयालुता और मेहरबानी की वजह से अरब में मशहूर थीं और औरतों को जीने और अल्लाह के शुक्र की नसीहत करती थीं। सख्त गरीबी और कमी के बावजूद आप माँगने वाले को खाली हाथ नहीं लौटाती थीं और अपना खाना दूसरों को दे देती थीं। आपके दोनों बेटे, इमाम हसन और इमाम हुसैन, आपकी बेहतरीन परवरिश का नतीजा थे जो मुसलमानों के इमाम कहलाए। आपका व्यक्तित्व रिसालत, खिलाफत और इमामत के रिश्तों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी है।</p>
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<h3>❤️ سبق 6 : ہمیں پیاس کیوں لگتی ہے (نثر)</h3>
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यह अध्याय मानव शरीर में पानी के महत्व और प्यास लगने के कारणों पर रोशनी डालता है। लेखक बताते हैं कि प्राचीन काल में बक़रात ने गले की सूखन को प्यास का लक्षण माना था, लेकिन नए शोध के अनुसार मस्तिष्क में मौजूद &#8216;थायी पॉल्स&#8217; नामक ग्रंथि प्यास का असली कारण है। यह ग्रंथि शरीर में पानी के संतुलन को बनाए रखने के लिए विशेष हार्मोन जारी करती है। मानव शरीर का लगभग 66 प्रतिशत हिस्सा पानी से बना है, जो पाचन और शारीरिक तापमान को स्थिर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हम रोज़ाना पसीना, पेशाब और सांस के जरिए पानी खर्च करते हैं, जिसकी कमी को पूरा करना जीवन के लिए ज़रूरी है क्योंकि इंसान पानी के बिना सात दिन से ज़्यादा नहीं रह सकता। एक स्वस्थ व्यक्ति को रोज़ाना पाँच से छह लीटर पानी की ज़रूरत होती है, और यह ज़रूरत गर्मी या ज़्यादा शारीरिक मेहनत की स्थिति में बढ़ जाती है। लेख में इस बात पर भी ज़ोर दिया गया है कि धरती पर उपलब्ध पानी का सिर्फ दो प्रतिशत हिस्सा पीने लायक है, इसलिए हमें पानी की बचत करनी चाहिए और प्रदूषण से बचने के लिए हमेशा साफ पानी पीना चाहिए।</p>
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<h3>❤️ سبق 6 (الف) : بندر کی شرارت (نظم)</h3>
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यह पाठ &#8216;बतख मियां&#8217; नाम के एक गुमनाम आज़ादी के सेनानी की बहादुरी और वफादारी की दास्तान है। बतख मियां का ताल्लुक बिहार के ज़िला मोतिहारी से था और वे अंग्रेजों की नील की कोठी में खानसामा थे। 1917 में जब महात्मा गांधी चंपारण के दौरे पर आए, तो अंग्रेज मैनेजर मिस्टर अरविन ने गांधी जी को खत्म करने के लिए बतख मियां को उनके दूध में जहर मिलाने का हुक्म दिया। अंग्रेजों ने उन्हें दौलत का लालच दिया और न मानने पर सख्त नतीजों की धमकी भी दी, लेकिन बतख मियां ने अपनी अंतरात्मा और वतनपरस्ती का सौदा नहीं किया। उन्होंने जहरीला दूध पेश करने की बजाय गिलास गिरा दिया और गांधी जी की जान बचा ली। इस पाबंदी में अंग्रेजों ने उन पर बेपनाह मुकदमे चलाए, उन्हें नौकरी से निकाल दिया और उनकी जायदाद जब्त कर ली। बरसों तक यह वाकया दबा रहा यहाँ तक कि 1950 में भारत के पहले सदर वाक़िल राजेंद्र प्रसाद ने एक जनसभा में उनकी कुर्बानी का खुलासा किया। बतख मियां की यह कहानी हमें सिखाती है कि वतनपरस्ती और इंसानियत किसी भी लालच या डर से बढ़कर होनी चाहिए। अगर उस वक्त वह यह जुर्रत न दिखाते तो शायद हिंदुस्तान की तारीख कुछ और होती।</p>
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<h3>❤️ سبق 7 : لوری</h3>
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यह पाठ एक सुंदर और भावनात्मक कविता &#8216;लोरी&#8217; पर आधारित है, जिसमें एक माँ अपने बच्चे को प्यार से सुला रही है। माँ अपनी बच्ची को विभिन्न सुंदर उपमाओं से नवाज़ती है, जैसे उसे &#8216;सीप का मोती&#8217;, &#8216;राज दुलारी&#8217;, और &#8216;नरमल चाँदी व सोना&#8217; कहकर पुकारती है। वह अपनी बिटिया के उज्ज्वल भविष्य की कामना करती है कि वह बड़ी होकर देश का नाम रोशन करे, ईमानदारी और पाकीज़गी की मिसाल बने और भारत की मलिका कहलाए। कविता में रात की शांति और प्राकृतिक दृश्यों की भी झलक मिलती है, जहाँ चाँद की रोशनी फैली हुई है, आसमान पर तारे टिमटिमा रहे हैं और पंछी व जीव सो चुके हैं। माँ अपनी रोती हुई बच्ची को चुप कराने के लिए उसे अच्छे रिश्तों और खुशियों के सपने दिखाती है। यह कविता सिर्फ माँ की ममता और प्यार का इज़हार नहीं है बल्कि इसमें बिटिया की परवरिश और उसके लिए अच्छी आकांक्षाओं का संदेश भी छुपा हुआ है। अंत में समझ बढ़ाने के लिए सवाल-जवाब और भाषाई गतिविधियाँ दी गई हैं ताकि छात्र कविता के मूल भाव को बेहतर समझ सकें और उर्दू भाषा की बारीकियों से वाकिफ हो सकें।</p>
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<h3>❤️ سبق 8 : بطخ میں (نثر)</h3>
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यह पाठ एक गुमनाम आज़ादी के सेनानी &#8216;बतख मियां अंसारी&#8217; की बहादुरी और वतनपरस्ती की कहानी बयान करता है, जिन्होंने 1917 में चंपारण के दौरान महात्मा गांधी की जान बचाई थी। अंग्रेज मैनेजर मिस्टर अरविन ने बतख मियां को, जो वहाँ खानसामा के तौर पर काम करते थे, गांधी जी के दूध में जहर मिलाने का हुक्म दिया और मना करने पर सख्त नतीजों की धमकी दी। लेकिन बतख मियां ने अपनी अंतरात्मा और देश के प्रति वफादारी निभाते हुए अपनी नौकरी और जायदाद की कुर्बानी दे दी लेकिन गांधी जी को नुकसान नहीं पहुँचने दिया। उन्होंने जहरीला दूध गिराकर एक बड़ी त्रासदी को टाल दिया। इस बड़ी कुर्बानी के बावजूद वह बरसों गुमनामी में रहे, यहाँ तक कि 1950 में भारत के पहले सदर वाक़िल राजेंद्र प्रसाद ने एक जनसभा में उनका परिचय कराया और उनके कारनामे को दुनिया के सामने लाए। वाक़िल राजेंद्र प्रसाद इस वाकये के चश्मदीद गवाह थे। यह कहानी हमें सिखाती है कि वतनपरस्ती और इंसानियत किसी भी लालच या खौफ से ऊपर होती है। अगर बतख मियां यह बहादुरी न दिखाते तो हिंदुस्तान की तारीख शायद कुछ और होती।</p>
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<h3>❤️ سبق 9 : خط (نالندہ کی سیر)</h3>
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यह कविता &#8216;हिंद के बाग़बानो उठो&#8217; अली सरदार जाफरी की एक जोशीली अंग्रेज़ी रचना है जो हिंदुस्तानी आम लोगों खासकर नौजवानों, किसानों और मज़दूरों को जगाने के लिए लिखी गई है। कवि वतन के रखवालों को &#8216;बाग़बान&#8217; कहकर पुकारता है और उन्हें इंकलाब की दावत देता है। कविता में हिंदुस्तान के विभिन्न भौगोलिक हिस्सों जैसे कश्मीर, बंगाल, सिंध, पंजाब, महाराष्ट्र और गुजरात का ज़िक्र किया गया है, जिसका मकसद पूरे मुल्क में एकता और जागरूकता की लहर पैदा करना है। कवि चाहता है कि लोग गुलामी की ज़ंजीरें तोड़कर एक नई ज़िंदगी की शुरुआत करें। वह नौजवानों को अंधेरी की फौज और दरिया की लहरों की तरह उठने की तरगीब देता है ताकि वे वक्त की मुसीबतों का बहादुरी से मुकाबला कर सकें। यह कविता वतनपरस्ती, हिम्मत और सामाजिक बदलाव का एक ताकतवर संदेश देती है, जिसमें हर तबके के व्यक्ति को मुल्क की तामीर व तरक्की और आज़ादी की हिफाज़त के लिए मिलकर खड़े होने पर ज़ोर दिया गया है।</p>
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<h3>❤️ سبق 10 : ہند کے باغبانو اٹھو (نظم)</h3>
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यह पाठ मशहूर शायर अली सरदार जाफरी की नज़्म &#8216;हिंद के बाग़बानो उठो&#8217; पर आधारित है। इस नज़्म में शायर ने हिंदुस्तान के नौजवानों, किसानों और मज़दूरों को जगाने और मुल्क की तामीर व तरक्की में हिस्सा लेने की पुकार लगाई है। शायर मुल्क के विभिन्न हिस्सों जैसे कश्मीर, बंगाल, सिंध, पंजाब, महाराष्ट्र और गुजरात के लोगों को संबोधित करते हुए उन्हें एकजुट होकर इंकलाब लाने पर ज़ोर देता है। नज़्म का बुनियादी मकसद गुलामी की ज़ंजीरों को तोड़ना और वक्त के धारे को बदलना है ताकि मुल्क एक नई ज़िंदगी की तरफ क़दम बढ़ा सके। शायर नौजवानों को अंधेरी की फौज और दरिया की लहरों की तरह उठने की तरगीब देता है ताकि वे हर किस्म की मुसीबत का बहादुरी से सामना कर सकें। यह नज़्म वतनपरस्ती के जज़्बे से भरपूर है और समाज के हर तबके को एक रोशन मुस्तकबिल के लिए जद्दोजहद करने का संदेश देती है। पाठ के अंत में छात्रों की समझ के लिए शब्दों के अर्थ, सवाल-जवाब और व्याकरण की कविताएँ भी दी गई हैं जो नज़्म के संदेश को समझने में मददगार साबित होती हैं।</p>
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<h3>❤️ سبق 11 : زراف (نثر)</h3>
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यह पाठ एक खरगोश और एक जिराफ के बीच दिलचस्प बातचीत पर आधारित है, जिसमें जिराफ की खासियतों को इंटरव्यू के अंदाज़ में बताया गया है। जिराफ तंज़ानिया का राष्ट्रीय जानवर है और दुनिया का सबसे ऊँचा चौपाया है, जिसकी औसत लंबाई आम तौर पर अठारह फुट होती है, जबकि कुछ अफ्रीकी नस्लें बाईस फुट तक पहुँचती हैं। जिराफ झुंड बनाकर रहते हैं और शाकाहारी होते हैं, लेकिन अपने बचाव में शेर जैसे शिकारी को भी अपनी ताकतवर लातों से दबोच सकते हैं। उनकी अगली टाँगें घूमने में इतनी लंबी होती हैं कि जमीन पर मौजूद घास खाने में उन्हें मुश्किल होती है, इसलिए वे पेड़ों की पत्तियाँ खाते हैं। जिराफ ऊँट की तरह बिना पानी पिए कई दिन रह सकते हैं लेकिन पेट में पानी जमा नहीं कर सकते। उनका दिल सभी चौपायों में सबसे बड़ा और ताकतवर होता है ताकि खून इतनी ऊँचाई तक पहुँच सके। वे भारी जिस्म की वजह से लेटने की बजाय खड़े-खड़े ही सोते हैं। एक दिलचस्प हकीकत यह भी है कि सफेद धारियों वाले जिराफ बहुत कम बोलते हैं, जिसकी वजह से ज़्यादातर लोग उन्हें गूँगा समझते हैं, हालाँकि वे सिर्फ चुप रहना पसंद करते हैं।</p>
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<h3>❤️ سبق 12 : چوہے ہی چوہے (نثر)</h3>
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यह पाठ जिराफ की खासियतों और आदतों पर आधारित एक दिलचस्प बातचीत है जो एक खरगोश और जिराफ के बीच होती है। जिराफ तंज़ानिया का राष्ट्रीय जानवर है और उसे दुनिया का सबसे ऊँचा चौपाया माना जाता है, जिसकी ऊँचाई आम तौर पर 18 फुट और कुछ की 29 फुट तक होती है। जिराफ अपनी लंबी टाँगों और गर्दन के लिए मशहूर हैं, जिसकी वजह से वे ऊँचे पेड़ों की पत्तियाँ आसानी से खा लेते हैं, लेकिन जमीन पर मौजूद घास खाने के लिए उन्हें अपनी अगली टाँगें फैलानी पड़ती हैं। जिराफ एक अमनपसंद जानवर है जो झुंड में रहना पसंद करता है। इसका वजन लगभग दो टन होता है जो गैंडे के बराबर है। यहाँ तक कि शेर भी इसकी लंबी टाँगों की जोरदार लात (दुलती) से डरकर रहता है। जिराफ की नज़र बहुत तेज होती है और वह ऊँट की तरह कई दिन बिना पानी पिए रह सकता है, लेकिन पेट में पानी जमा नहीं कर सकता। एक हैरतअंगेज बात यह भी है कि जिराफ का दिल बहुत बड़ा और ताकतवर होता है ताकि खून बारह फुट ऊँची गर्दन तक पहुँचा सके। यह जानवर खड़े-खड़े ही सोता है क्योंकि भारी जिस्म की वजह से उसका उठना मुश्किल होता है।</p>
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<h3>❤️ سبق 12 (الف) : محنت (براے مطالعہ)</h3>
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यह कविता &#8216;मेहनत&#8217; के शीर्षक से है, जिसमें शायर ने मेहनत के महत्व और उसके फायदों पर रोशनी डाली है। शायर कहता है कि अगर इंसान मेहनत करेगा तो दुनिया में उसका नाम रोशन होगा और उसका कोई भी काम अधूरा नहीं रहेगा। वह कौमें तरक्की के मंज़िलें तय करती हैं और उनके खज़ाने दौलत से भर जाते हैं जिनके बच्चे मेहनत से गाफिल नहीं होते। जो लोग मेहनत को अपना शिआर बनाते हैं, वह हमेशा आगे बढ़ते हैं और दुनिया में एक ऊँचा मुकाम हासिल करते हैं। इसके उलट, सुस्त और आलसी लोग अपनी ज़िंदगी से बेज़ार और लाचार होकर रह जाते हैं। शायर नसीहत करता है कि यह दौर बहुत तेज है, इसमें सुस्ती की कोई गुंजाइश नहीं है। सिर्फ वही मुसाफिर अपने मंज़िल पा सकता है जो तेज क़दम हो और लगातार जद्दोजहद करे। अगर तुम भी हौसले के साथ मेहनत करोगे और सुस्ती को छोड़ दोगे, तो तुम्हें राहत, दौलत और इज्जत नसीब होगी। मेहनत ही वह एकमात्र रास्ता है जो इंसान को कामयाबी और सम्मान की बुलंदियों तक ले जाता है।</p>
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<h3>❤️ سبق 13 : پہیلی (نظم)</h3>
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यह कहानी फरहान नाम के एक बहादुर लड़के के इर्द-गिर्द घूमती है जो एक हादसे में अपने पैरों से महरूम हो गया था और अब व्हीलचेयर पर चलता है। इस मजबूरी ने उसे अकेला और तनहा कर दिया था, यहाँ तक कि उसने स्कूल छोड़ने का भी सोच लिया था, लेकिन अपने माता-पिता की नसीहत पर उसने पढ़ाई जारी रखी। एक दिन फरहान अपनी सालगिरह पर स्कूल में रंग-बिरंगी गुब्बारे लाया ताकि दोस्तों में बाँट सके, लेकिन एक शरारती लड़के अमजद ने शरारत में उन्हें उड़ा दिया। फरहान ने गुस्सा करने की बजाय अमजद को भी एक गुब्बारा दिया जिस पर वह बहुत शर्मिंदा हुआ। इस वाकये के बाद प्रिंसिपल मुहतरमा अज़मत ने गुब्बारों का एक अनोखा मुकाबला करवाया जिसमें फरहान का गुब्बारा सबसे दूर तक गया और वह फतेहमंद ठहरा। इस छोटी सी कामयाबी ने फरहान का खोया हुआ एतमाद बहाल कर दिया और उसे एहसास दिलाया कि वह ज़िंदगी की दौड़ में किसी से पीछे नहीं है। इसने उसने अज़म किया कि वह अब पढ़ाई और खेलकूद में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेगा। यह पाठ हमें यह संदेश देता है कि शारीरिक मजबूरी इंसान की हिम्मत और सलाहियतों की राह में रुकावट नहीं बन सकती अगर इंसान के अंदर सच्चा जज़्बा और खुद-एतमादी मौजूद हो।</p>
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<h3>❤️ سبق 14 : کلپنا چاولہ (نثر)</h3>
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यह पाठ एक बहादुर लड़के फरहान की कहानी है जो एक हादसे के नतीजे में मजबूर हो गया था। फरहान पहले एक बहुत ज़हीन बच्चा था, लेकिन दो साल पहले छत से गिरने की वजह से उसे व्हीलचेयर का सहारा लेना पड़ा, जिससे उसकी ज़िंदगी बदल गई और वह एहसास-ए-कमतरी का शिकार होकर पढ़ाई में पीछे रहने लगा। उसने स्कूल छोड़ने का भी सोच लिया था, लेकिन उसके माता-पिता ने उसे समझाया कि तालीम ही उसे एक कामयाब इंसान बना सकती है। स्कूल में अमजद नाम का एक लड़का उस पर ज़्यादा तंग करता था। एक दिन फरहान अपनी सालगिरह पर दोस्तों के लिए रंग-बिरंगे गुब्बारे लाया। अमजद ने शरारत में उनकी वायरिंग काट दीं, लेकिन फरहान ने बदले में उसे भी एक गुब्बारा दिया जिस पर अमजद शर्मिंदा हुआ। स्कूल की मेहरबान प्रिंसिपल मुहतरमा अज़मत ने हौसला अफजाई के लिए गुब्बारों का एक मुकाबला करवाया जिसमें हर गुब्बारे के साथ बच्चे का नाम और पता दर्ज था। फरहान ने प्रिंसिपल साहिबा के इसरार पर इसमें हिस्सा लिया। जब नतीजे आए तो हैरानी की बात यह थी कि फरहान का गुब्बारा सबसे दूर गया और वही फतेहमंद ठहरा। इस शानदार कामयाबी ने फरहान के अंदर एक नई रूह फूँक दी और उसका खोया हुआ एतमाद बहाल कर दिया। उसे एहसास हुआ कि मजबूरी कामयाबी की राह में रुकावट नहीं बन सकती। इस वाकये के बाद उसने और मेहनत करने का अज़म किया।</p>
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<h3>❤️ سبق 15 : گرو گوبند سنگھ (نثر)</h3>
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फरहान एक नहायत ज़हीन, हसास और बहादुर लड़का है जो बदकिस्मती से दो साल पहले पतंग उड़ाने के दौरान एक हादसे का शिकार हुआ था और अब उसे चलने के लिए व्हीलचेयर का सहारा लेना पड़ता है। इस हादसे ने फरहान के जीवन पर गहरे असर डाले, वह अपनी खुद-एतमादी खो बैठा था और स्कूल में ज़्यादातर अदास, खामोश और खोया-खोया नज़र आता था। अमजद नाम का एक शरारती लड़का उस पर ज़्यादा तंग करता और उसकी मजबूरी का मज़ाक उड़ाता था, जिससे फरहान और दिलबर्दाश्त हो जाता। एक रोज़ स्कूल की मेहरबान प्रिंसिपल, मुहतरमा अज़मत, ने बच्चों की हौसला अफजाई के लिए गुब्बारों का एक दिलचस्प मुकाबला करवाया। इसमें हर बच्चे के गुब्बारे के साथ एक पोस्टकार्ड बंधा हुआ था जिस पर बच्चे का नाम और पता था। सब यह देखना चाहते थे कि किसका गुब्बारा हवा में दोष पर सबसे ज़्यादा दूर जाएगा। फरहान ने भी इसमें हिस्सा लिया और हैरतअंगेज तरीके से उसका गुब्बारा सबसे दूर दराज़ मुकाम तक पहुँचा। इस शानदार कामयाबी ने फरहान के अंदर एक नई रूह फूँक दी और उसका खोया हुआ एतमाद बहाल कर दिया। उसे यह अहम सबक मिला कि शारीरिक मजबूरी कामयाबी की राह में रुकावट नहीं बन सकती अगर इंसान के इरादे बुलंद हों। इस वाकये के बाद फरहान ने दोबारा अपनी तालीम पर तवज्जो मर्कूज़ की और एक कामयाब ज़िंदगी गुज़ारने का अज़म किया। यह कहानी हमें हिम्मत, हौसले और सबत-क़दमी का दर्श देती है।</p>
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<h3>❤️ سبق 16 : چند پہ جا پہنچا انسان (نظم)</h3>
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यह कहानी फरहान नाम के एक बहादुर लड़के के इर्द-गिर्द घूमती है, जो दूसरे बच्चों की तरह बहुत फुर्तीला और ज़हीन था। ताहम, दो साल पहले पतंग उड़ाने के दौरान छत से गिरने के एक अलमना हादसे ने उसे व्हीलचेयर का मुहताज बना दिया। इस मजबूरी ने फरहान को ज़हनी तौर पर बहुत मुतासिर किया, वह ज़्यादातर अदास रहता और उसकी पढ़ाई से जी ऊब गया था। एक बार तो उसने स्कूल छोड़ने का भी सोचा, लेकिन उसके माता-पिता ने उसे तालीम की अहमियत समझाकर रोका। कहानी में एक अहम मोड़ तब आता है जब फरहान अपनी सालगिरह पर स्कूल में रंग-बिरंगे गुब्बारे लेकर आता है। एक हमजमात अमजद, जो ज़्यादातर उस पर तंग करता था, उसके गुब्बारों की वायरिंग काट देता है, लेकिन फरहान की फराखदिली उसे शर्मिंदा कर देती है। स्कूल की प्रिंसिपल मुहतरमा अज़मत बच्चों की हौसला अफजाई के लिए गुब्बारों का एक मुकाबला करवाती हैं जिसमें गुब्बारों के साथ बच्चों के नाम वाले पोस्टकार्ड बंधे होते हैं। अगरचे फरहान शुरू में एहसास-ए-कमतरी का शिकार होकर हिस्सा नहीं लेना चाहता था, लेकिन प्रिंसिपल साहिबा के इसरार पर वह अपना गुब्बारा फ़िज़ा में छोड़ देता है। कुछ दिनों बाद जब नतीजे आते हैं, तो सब यह देखकर हैरान रह जाते हैं कि फरहान का गुब्बारा सबसे दूर गया था। इस कामयाबी ने फरहान का खोया हुआ एतमाद बहाल कर दिया और उसने अज़म किया कि वह अब हर मैदान में आगे रहेगा। यह पाठ हमें सिखाता है कि मजबूरी कामयाबी की राह में रुकावट नहीं बन सकती बल्कि हौसले और हिम्मत से इंसान कुछ भी हासिल कर सकता है।</p>
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<h3>❤️ سبق 16 (الف) : موت کا سچ (براے مطالعہ)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1nbWHClSAbiM3PPAuK2AHN3hGxM8Zjezu" /><br />
यह कहानी फरहान नाम के एक बच्चे के इर्द-गिर्द घूमती है जो एक हादसे की वजह से मजबूर हो गया था और व्हीलचेयर पर चलता था। वह पहले एक ज़हीन बच्चा था, लेकिन मजबूरी के बाद वह अदास रहने लगा और अपनी पढ़ाई में पीछे हट गया। उसके स्कूल का एक लड़का, अमजद, उस पर ज़्यादा चिढ़ता और उसका मज़ाक उड़ाता था। एक दिन फरहान अपनी सालगिरह पर स्कूल में रंग-बिरंगे गुब्बारे लाया ताकि दोस्तों में बाँट सके, लेकिन अमजद ने शरारत में उनकी वायरिंग काट दीं और गुब्बारे हवा में उड़ गए। इस मौके पर स्कूल की प्रिंसिपल मुहतरमा अज़मत ने हालात को संभाला और एक गुब्बारा मुकाबला करवाया। इस मुकाबले में हर बच्चे ने अपने गुब्बारे के साथ एक पोस्टकार्ड बाँधा जिस पर उसका पता लिखा था। सब यह देखना चाहते थे कि किसका गुब्बारा हवा में दोष पर सबसे ज़्यादा दूर जाएगा। कुछ दिनों बाद जब नतीजे आए, तो पता चला कि फरहान का गुब्बारा सबसे ज़्यादा दूरी तय करके फतेहमंद ठहरा। इस अचानक कामयाबी ने फरहान के दिल में दोबारा ज़िंदगी की उम्मीद भर दी और उसका खोया हुआ एतमाद बहाल कर दिया, जिसके बाद उसने दोबारा मेहनत से पढ़ने का अज़म किया। यह पाठ हमें सिखाता है कि हिम्मत और हौसला अफजाई किसी भी मजबूरी को शिकस्त दे सकती है।</p>
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<h3>❤️ سبق 17(الف) : شری نواس راما نوجم (نثر)</h3>
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यह पाठ बचपन के एक महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजम की जीवनी और उनकी बेमिसाल वैज्ञानिक जद्दोजहद पर रोशनी डालता है। रामानुजम का जन्म 22 दिसंबर 1887 को तमिलनाडु के कुम्भकोणम में एक गरीब परिवार में हुआ। वह बचपन से ही नहायत संजीदा और खामोश स्वभाव के थे, और उनकी पूरी तवज्जो सिर्फ इल्म-उल-हिसाब (गणित) पर मर्कूज़ रहती थी। स्कूल के दौरान वह दूसरे मज़मून के मुकाबले में गणित के मुश्किल सवालों को पलक झपकते ही हल कर लेते थे, जिससे उस्ताद भी हैरान रह जाते थे। मआशी तंगी की वजह से वह अपनी बाकायदा तालीम मुकम्मल न कर सके और मद्रास बंदरगाह में क्लर्की इख्तियार की, मगर वहाँ उनके एक हमदर्द अफसर ने उनकी छुपी हुई सलाहियतों को भाँप लिया और उन्हें घर बैठे तहकीक़ करने का मौका फराहम किया। उनका काम मद्रास यूनिवर्सिटी और फिर लंदन की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर हार्डी तक पहुँचा, जिन्होंने उन्हें इंग्लैंड बुलाया। लंदन में रामानुजम की गैर-मामूली ज़हानत और उनके मकालात ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धूम मचा दी और उन्हें &#8216;हिसाब का जादूगर&#8217; माना गया। उनके सेमिनार देखने के लिए लोग टिकट खरीदकर आते थे। बदकिस्मती से वह तपेदिक जैसे मामूली मर्ज में मुब्तला हो गए और 26 अप्रैल 1920 को इस फानी दुनिया से कोच हो गए। अपनी वफात से पहले उन्होंने अपनी सारी दौलत मद्रास यूनिवर्सिटी को एताअ कर दी, जो उनकी इल्मपरवरी का बयान है। उनकी ज़िंदगी यह पैगाम देती है कि सच्ची लगन और मेहनत से इंसान किसी भी रुकावट को पार कर सकता है।</p>
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<h3>❤️ سبق 18 : غبّارے (نثر)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1f8X6kKHK731qhXYF120CfDGcb6Fgy32n" /><br />
यह कहानी एक लड़के फरहान के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक हादसे की वजह से मजबूर हो गया था और व्हीलचेयर पर चलने पर मजबूर था। इस वजह से वह ज़्यादातर अदास रहता और उसकी खुद-एतमादी कमज़ोर पड़ गई थी। स्कूल में अमजद नाम का एक लड़का उस पर ज़्यादा तंग करता था। ताहम, उसके माता-पिता ने उसे तालीम की अहमियत समझाई और हिम्मत न हारने की तालकीन की। एक दिन फरहान की सालगिरह थी और वह अपने दोस्तों के लिए गुब्बारे लाया। अमजद ने शरारत में उनकी वायरिंग काट दीं, लेकिन फरहान ने बदले में अमजद को भी एक गुब्बारा दिया, जिस पर अमजद शर्मिंदा हुआ। स्कूल की प्रिंसिपल, मुहतरमा अज़मत, ने बच्चों के लिए गुब्बारों का एक मुकाबला करवाया। इसमें हर बच्चे ने अपने गुब्बारे के साथ अपना नाम लिखा हुआ पोस्टकार्ड बाँधकर उसे हवा में छोड़ा। फरहान का गुब्बारा सबसे दूर गया और उसने यह मुकाबला जीत लिया। इस कामयाबी ने फरहान के अंदर नया जोश और खुद-एतमादी पैदा कर दी। उसे महसूस हुआ कि वह भी ज़िंदगी की दौड़ में दूसरों से पीछे नहीं है। उसने अज़म किया कि वह अब अपनी पढ़ाई पर भरपूर तवज्जो देगा और कामयाब इंसान बनेगा। यह कहानी सिखाती है कि मजबूरी कामयाबी की राह में रुकावट नहीं बन सकती अगर इंसान बहादुर हो।</p>
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<h3>❤️ سبق 19 : گنگا (نظم)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1lbdnv7IhhZ9rABrZNERaRfZLI4wyggRG" /><br />
यह तहरीर उर्दू अदब में तर्जुमा निगारी की रिवायत और &#8216;मग़रिबी इंशाइए&#8217; के फन पर माहौल है। आगाज़ में तर्जुमा निगारी के फन पर बहस की गई है कि उर्दू अफसाने, वरक़े और नज़्म के इरतिका में तराजिम ने किस तरह बुनियाद फराहम की। फोर्ट विलियम कॉलेज से शुरू होने वाला यह सफर बीसवीं सदी तक वसीअ हुआ जिसमें अंग्रेज़ी और रूसी ज़बानों के शिह उर्दू में मुन्क़ल किए गए। तहरीर का बुनियादी महवर &#8216;मग़रिबी इंशाइए&#8217; है, जिसकी तारीख सोलहवीं सदी के फ्रांसीसी अदीब माइकल डी मोंटेन से शुरू होती है। इंशाइए का लफ्ज़ी मतलब &#8216;कोशिश&#8217; है और यह एक ऐसी सन्फ है जिसमें अदीब अपने शख्सी तास्सुरात, जज़्बात और फलसफियाना ख्यालात को बे-तकल्लुफ अंदाज़ में पेश करता है। अंग्रेज़ी अदब में फ्रांसिस बेकन ने अपने शाहकार इंशाइयों के ज़रिए इस सन्फ को बुलंदियों तक पहुँचाया। बेकन के इलावा स्टील, एडिसन, ऑलिवर गोल्डस्मिथ और सैमुअल जॉनसन की खिदमात का भी ज़िक्र किया गया है। चार्ल्स लैम्ब को उनकी लताफ़त-ए-बयान की वजह से &#8216;इंग्लिश इंशाइयों का शहज़ादा&#8217; कहा गया है। जदीद दौर में टी एस एलियट ने इंशाइए निगारी को तन्कीदी शुऊर से हमकिनार किया। यह पूरा मज़मून अंदरजीत लाल की तन्कीदी बसीरत का अक्स है जिसे सलीम आगा क़ज़लबाश ने उर्दू क़ालिब में ढालकर उर्दू अदब के सरमाए में इज़ाफ़ा किया है।</p>
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<h3>❤️ سبق 20 : ملا نصیرالدین (نثر)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1QTf0X3u7AAlDmpRcLx4u99sw8azHrUcQ" /><br />
यह मज़मून उर्दू अदब में तर्जुमा निगारी की अहमियत और &#8216;मग़रिबी इंशाइए&#8217; के इरतिका का इहाता करता है। इब्तिदा में उर्दू अदब की तरक्की में तराजिम के तारीखी करदार, फोर्ट विलियम कॉलेज की खिदमात और बीसवीं सदी में मुख्तलिफ आलमी ज़बानों से उर्दू में होने वाले तराजिम का ज़िक्र किया गया है। मज़मून के मर्कज़ी हिस्से में इंशाइए की सन्फ का जायज़ा लिया गया है, जो फ्रांसीसी लफ़्ज़ &#8216;एसाई&#8217; से माखूज़ है, जिसके मानी &#8216;कोशिश&#8217; के हैं। इस सन्फ की बुनियाद सोलहवीं सदी में फ्रांसीसी अदीब माइकल डी मोंटेन ने रखी थी। बाद में, अंग्रेज़ी अदब में फ्रांसिस बेकन ने इसे नई जहत बख्शी और अपने मुख्तसर इंशाइयों से मकबूल बनाया। तहरीर में रिचर्ड स्टील, एडिसन, ऑलिवर गोल्डस्मिथ और चार्ल्स लैम्ब जैसे नामवर मग़रिबी इंशाइए निगारों के अंदाज़ और खिदमात का तज़करा शामिल है। चार्ल्स लैम्ब को &#8216;इंग्लिश इंशाइयों का शहज़ादा&#8217; कहा जाता है। बीसवीं और बीसवीं सदी में जॉन रस्किन और टी एस एलियट ने इस सन्फ को मुज़ीद वसअत दी और इसे जदीद तन्कीदी व फलसफियाना रंग अता किया। मजमूई तौर पर यह मज़मून इंशाइए की सन्फ के तारीखी सफर और उसके फन्नी महासिन को वाजेह करता है, जिससे उर्दू में इस सन्फ की तफहीम आसान हो जाती है।</p>
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<h3>❤️ سبق 20 (الف) : نوشیرواں اور نعرہ</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1qHlHQe12p76Iy7n2LhIqaeHTNUtlCcAy" /><br />
यह बाब &#8216;मग़रिबी इंशाइए&#8217; के उनवान से उर्दू अदब में तर्जुमा निगारी और इंशाइए की सन्फ की अहमियत पर रोशनी डालता है। मतन का आगाज़ तर्जुमा निगारी के फन से होता है, जहाँ यह बताया गया है कि उर्दू अदब के मजमूई इरतिका में तराजिम का कलीदी करदार रहा है। फोर्ट विलियम कॉलेज से शुरू होने वाली यह रिवायत बीसवीं सदी तक मुज़ीद मुस्तहकम हुई, जिससे उर्दू अफसाने और दूसरी असनाफ को नई वसअत मिली। इसके बाद इंशाइए की सन्फ का तफ्सीली तारीखी जायज़ा लिया गया है। इंशाइए का लफ्ज़ फ्रांसीसी लफ्ज़ &#8216;एसाई&#8217; (Essai) से निकला है जिसके मानी &#8216;कोशिश&#8217; के हैं। इस सन्फ की बुनियाद सोलहवीं सदी में मअरूफ फ्रांसीसी अदीब माइकल डी मोंटेन ने रखी थी। बाद अज़ाँ, अंग्रेज़ी अदब में फ्रांसिस बेकन ने इसे नई जहत बख्शी और अपने मुख्तसर इंशाइयों से मकबूल बनाया। बेकन के इंशाइए अपने इख्तिसार और हकीमाना अंदाज़ के लिए मशहूर हैं, जबकि चार्ल्स लैम्ब को उनकी लताफ़त-ए-बयान की वजह से &#8216;इंग्लिश इंशाइयों का शहज़ादा&#8217; कहा जाता है। मज़मून के आखिर में यह वाजेह किया गया है कि एक कामयाब इंशाइया महज सरसरी तहरीर नहीं बल्कि संजीदा फिक्र और गहरी सोच का मुतकाज़ी फन है। अंदरजीत लाल के इस मज़मून के ज़रिए मग़रिबी इंशाइयों के उर्दू तराजिम की अहमियत को उजागर किया गया है ताकि तालिब-ए-इल्म इस सन्फ के मुख्तलिफ पहलुओं और असालिब से वाकिफ हो सकें।</p>
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