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	<title>Class 3rd Books Archives - Bihar Board Books</title>
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		<title>Bihar Board Class 3 EVS Book 2026 PDF Download</title>
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		<dc:creator><![CDATA[bseb]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 Jul 2022 09:01:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Class 3rd Books]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>Bihar Board Class 3 EVS Book 2026 PDF Download (पर्यावरण और हम) Bihar Board Class 3 EVS Book 2026 PDF Download &#8211; इस पेज पर बिहार बोर्ड 3rd के छात्रों के लिए &#8220;Environmental Studies (पर्यावरण और हम)&#8221; Book दिया गया है &#124; जिसे आप अपने फ़ोन में Free Download कर सकते हैं &#124; 🌐 सभी [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<h2 style="text-align: center;"><span style="text-decoration: underline; color: #ff0000;"><strong>Bihar Board Class 3 EVS Book 2026 PDF Download (पर्यावरण और हम)</strong></span></h2>
<p><img data-recalc-dims="1" decoding="async" class="aligncenter" src="https://i0.wp.com/biharboardbooks.com/wp-content/uploads/2022/07/bihar_board_books-min.png?ssl=1" /> <span style="text-decoration: underline;">Bihar Board Class 3 EVS Book 2026 PDF Download</span> &#8211; इस पेज पर बिहार बोर्ड 3rd के छात्रों के लिए &#8220;<span style="text-decoration: underline;"><strong>Environmental Studies (पर्यावरण और हम)</strong></span>&#8221; Book दिया गया है | जिसे आप अपने फ़ोन में Free Download कर सकते हैं |</p>
<blockquote><p>🌐 सभी विषयों की बुक्स डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें -&gt; <a href="https://biharboardbooks.com/"><strong>https://biharboardbooks.com/</strong></a></p>
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<h2 style="text-align: center;"><span style="text-decoration: underline; color: #3366ff;"><strong>BSEB Class 3 Environmental Studies Textbook PDF Free Download</strong></span></h2>
<p><span style="font-size: 18pt;"><strong>☞</strong></span> बुक्स डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए डाउनलोड लिंक पर क्लिक करें | <img decoding="async" class="aligncenter" src="https://i0.wp.com/biharboard-ac.in/wp-content/uploads/2022/07/kindpng_6137677-min.png?resize=601%2C111&amp;ssl=1" alt="line" /></p>
<h3>❤️ पाठ 1: चाचा की शादी</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1UMOkPRablB3Sdfqf1mRh10jNdd-ewRW-" /></p>
<p>यह पुस्तक &#8216;चाचा की शादी&#8217; कविता और कहानी के माध्यम से बच्चों को परिवार और विभिन्न सामाजिक रिश्तों की समझ प्रदान करती है। इसमें चाचा की शादी के अवसर पर घर में आने वाले विभिन्न रिश्तेदारों जैसे नाना-नानी, मामा-मामी, मौसा-मौसी और फूफा-फूफी का वर्णन है।</p>
<p>पुस्तक यह सिखाती है कि परिवार केवल माता-पिता और बच्चों का समूह नहीं है, बल्कि दादा-दादी, चाचा-चाची और अन्य सदस्यों का एक साथ रहना ही एक पूर्ण परिवार बनाता है। कहानी के पात्र आस्था और आकाश के माध्यम से शादी की तैयारियों, निमंत्रण पत्र बांटने और बारात के उत्साह को दिखाया गया है।</p>
<p>अंत में, दादीजी परिवार का महत्व समझाते हुए बताती हैं कि साथ रहने से सभी एक-दूसरे के सुख-दुःख में भागीदार बनते हैं। इसमें बच्चों के लिए रिश्तों को पहचानने, पहेलियाँ सुलझाने और अपने परिवार के बारे में लिखने हेतु अभ्यास कार्य भी दिए गए हैं, जो उनके भाषाई और सामाजिक कौशल को विकसित करते हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ पाठ 2: हमारा परिवार</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1-EIl2A2cVy9xjLFNEPv4qfE04NJsSc3c" /></p>
<p>यह पाठ सुनीता और दिलीप के परिवारों के माध्यम से परिवार की अवधारणा को समझाता है। सुनीता का परिवार छोटा है, जिसमें उसके माता-पिता और भाई राकेश हैं।</p>
<p>इसके विपरीत, दिलीप का परिवार एक बड़ा संयुक्त परिवार है, जिसमें दादा-दादी, माता-पिता, चाचा-चाची और उनके बच्चे एक साथ रहते हैं। पाठ में दिखाया गया है कि परिवार के सदस्य विभिन्न व्यवसायों जैसे खेती, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और व्यापार से जुड़े होते हैं।</p>
<p>इसमें घर के कार्यों के बँटवारे, निर्णय लेने की प्रक्रिया और एक साथ भोजन करने के महत्त्व पर ज़ोर दिया गया है। विद्यार्थियों को अपने परिवार के सदस्यों, उनके कार्यों और वंशावली के बारे में सोचने के लिए प्रेरित किया गया है।</p>
<p>साथ ही, यह पाठ परिवार के सदस्यों के बीच शारीरिक और व्यवहारिक समानताओं, जैसे आवाज़, आँखों का रंग या बालों की लंबाई, की पहचान करना सिखाता है। अंततः, यह दर्शाता है कि कैसे पीढ़ी-दर-पीढ़ी सदस्यों के जुड़ने से परिवार बढ़ता है और एक मज़बूत सामाजिक इकाई बनता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ पाठ 3: जीव-जन्तुओं की दुनिया</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1heT1IMbxqvAwLRzdCnAzrh7YcI7NlgI3" /></p>
<p>यह पुस्तक &#8216;जीव-जन्तुओं की दुनिया&#8217; शीर्षक के अंतर्गत बच्चों को उनके आस-पास के वातावरण में रहने वाले विभिन्न प्राणियों से परिचित कराती है। इसमें पहेलियों और रोचक गतिविधियों के माध्यम से गाय, सांप, तोता और मकड़ी जैसे जीवों की विशेषताओं को समझाया गया है।</p>
<p>पुस्तक में बच्चों को पशु-पक्षियों, कीड़े-मकोड़ों और जलचरों की सूची बनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। इसमें मकड़ी के जाले, तितलियों के रंग और जानवरों की शारीरिक बनावट जैसे पूँछ या पैरों की संख्या पर चर्चा की गई है।</p>
<p>मुख्य रूप से, यह जीवों के वर्गीकरण पर ध्यान केंद्रित करती है, जैसे कि उनके चलने के तरीके (उड़ना, तैरना, रेंगना) और उनके खान-पान की आदतें (शाकाहारी और मांसाहारी)। जुगाली करने वाले पशुओं और जीभ से भोजन पकड़ने वाले जीवों के बारे में भी जानकारी दी गई है।</p>
<p>अंत में, एक वर्ग पहेली और चित्रों के माध्यम से बच्चों के ज्ञान का परीक्षण किया गया है, जिससे वे खेल-खेल में प्रकृति और जीव-जगत की विविधता को समझ सकें। यह पाठ शिक्षकों के लिए भी निर्देश प्रदान करता है ताकि वे बच्चों को व्यावहारिक अनुभव दे सकें।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ पाठ 4: रंग-बिरंगे पंख</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1ijRTMLn8UHpk4RHinxS0eR3Qzjv4FfOz" /></p>
<p>यह पाठ &#8216;रंग-बिरंगे पंख&#8217; पक्षियों के प्रति बच्चों की जिज्ञासा और उनके व्यवहार पर आधारित है। कहानी की शुरुआत गौतम से होती है, जो अपने दोस्तों के साथ नदी के किनारे टहलते हुए एक नीलकंठ को देखता है।</p>
<p>वहाँ उसे और उसके साथियों को विभिन्न पक्षियों के पंख गिरे हुए मिलते हैं, जिन्हें वे अपनी कक्षा सजाने के लिए इकट्ठा कर लेते हैं। इस प्रक्रिया में श्याम के मन में पक्षियों के खान-पान और उनके आवास को लेकर कई सवाल उठते हैं।</p>
<p>पाठ में बच्चों के माध्यम से गौरैया, कबूतर और कोयल जैसे पक्षियों की गतिविधियों का वर्णन किया गया है। राकेश बताता है कि कैसे उसके घर में गौरैया ने घोंसला बनाया है, जबकि उषा अपने दादाजी द्वारा छत पर पक्षियों के लिए दाना-पानी रखने का अनुभव साझा करती है।</p>
<p>पाठ का उद्देश्य बच्चों को अपने आसपास के पक्षियों को पहचानने, उनकी बोलियों को समझने और उनके प्रति संवेदनशीलता विकसित करने के लिए प्रेरित करना है। इसमें विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से पक्षियों के घोंसले बनाने की सामग्री, उनकी चोंच की बनावट और विलुप्त होते पक्षियों के बारे में जानकारी एकत्र करने पर जोर दिया गया है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ पाठ 5: पेड़-पौधों से दोस्ती</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1v7waTIx5y7vofqLSNzS6kjJhjX0bfrD0" /></p>
<p>यह पाठ &#8216;पेड़-पौधों से दोस्ती&#8217; बच्चों को प्रकृति और पर्यावरण के महत्व से परिचित कराने के उद्देश्य से लिखा गया है। मुन्नी नामक एक छोटी लड़की की कहानी के माध्यम से, जो बरगद के पेड़ को अपना सबसे अच्छा दोस्त मानती है, यह अध्याय हमें बताता है कि पेड़ केवल ऑक्सीजन और फल देने वाले स्रोत नहीं हैं, बल्कि वे हमारे संवेदनशील साथी भी हो सकते हैं।</p>
<p>मुन्नी बरगद की ठंडी छाया में आराम करती है, उसकी डालियों पर झूला झूलती है और उससे बातें भी करती है। पाठ में विद्यार्थियों के लिए कई रोचक गतिविधियाँ दी गई हैं, जैसे विभिन्न प्रकार के पेड़ों की पहचान करना, उनके तने की मजबूती के आधार पर उन्हें वर्गीकृत करना और अपनी ऊँचाई से उनकी तुलना करना।</p>
<p>इसके अतिरिक्त, छात्रों को फल देने वाले और फल न देने वाले पौधों के बीच अंतर समझने और पेड़ों से मिलने वाले लाभों पर चर्चा करने के लिए प्रेरित किया गया है। अंत में, यह पाठ एक महत्वपूर्ण प्रश्न छोड़ता है कि यदि पृथ्वी पर पेड़ न हों तो क्या होगा, जो बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक बनाता है।</p>
<p>यह अध्याय प्रकृति के प्रति प्रेम, सहानुभूति और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का एक सराहनीय प्रयास है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ पाठ 6: पत्ता हूँ मैं हरा-हरा</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1kwPLKWJmDX_ltYUKgNN2L7sAYyXIbPQs" /></p>
<p>यह पाठ &#8216;पत्ता हूँ मैं हरा-हरा&#8217; शीर्षक वाली एक शिक्षाप्रद कविता है जो बच्चों को प्रकृति और विशेष रूप से विभिन्न प्रकार के पत्तों से परिचित कराती है। कविता के माध्यम से पत्तों के विविध रूपों जैसे गोल, लंबे, छोटे, चिकने और कटे-फटे होने का वर्णन किया गया है।</p>
<p>यह कविता पत्तों की उपयोगिता पर भी प्रकाश डालती है, जिसमें पीपल, आम, तुलसी और पुदीने जैसे विशिष्ट पौधों का उल्लेख है। तुलसी को घर का खास और पुदीने को प्यास बुझाने वाला बताया गया है।</p>
<p>पाठ में कई रचनात्मक गतिविधियाँ भी शामिल हैं, जो बच्चों को पत्तों को उनके आकार और किनारों के आधार पर पहचानने के लिए प्रोत्साहित करती हैं। इसमें पत्तों की छाप बनाने, उनकी नसों को समझने और विभिन्न पत्तों (जैसे गेंदा, नीम, केला और सहजन) के घरेलू व औषधीय उपयोगों को जानने पर बल दिया गया है।</p>
<p>अंत में, सूखी पत्तियों का उपयोग करके जानवरों की आकृतियाँ बनाने जैसी कलात्मक गतिविधि भी सुझाई गई है, जो बच्चों की कल्पनाशीलता और प्रकृति के प्रति उनके जुड़ाव को बढ़ाती है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ पाठ 7: तरह-तरह के भोजन</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1An7_jpZ01v1sl28B0lFAAwN7xcq_i_Nd" /></p>
<p>यह पाठ &#8216;तरह-तरह के भोजन&#8217; विभिन्न खाद्य पदार्थों और क्षेत्रीय खान-पान की विविधता पर केंद्रित है। कहानी मकर संक्रांति के उत्सव से शुरू होती है, जहाँ बच्चे दही-चूड़ा और तिलकुट का आनंद लेते हैं।</p>
<p>पाठ में विभिन्न त्योहारों जैसे ईद (सेवइयाँ) और क्रिसमस (केक) के विशेष व्यंजनों का उल्लेख है। इसमें यह भी बताया गया है कि भारत के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग भोजन प्रसिद्ध हैं, जैसे सिलाव का खाजा, बाढ़ की लाई, भोजपुर का लिट्टी-चोखा और मिथिला का दही-चूड़ा।</p>
<p>दक्षिण भारत में इडली-डोसा लोकप्रिय है। अध्याय हमें यह समझने में मदद करता है कि हमारा भोजन पेड़-पौधों (फल, फूल, जड़, तना, पत्तियाँ) और जीव-जन्तुओं (दूध, अंडा, मांस) से प्राप्त होता है।</p>
<p>इसके अलावा, पाठ में मुख्य अनाजों जैसे चावल, गेहूँ और मक्का के महत्व पर चर्चा की गई है और एक अनाज से बनने वाले विभिन्न व्यंजनों के बारे में बताया गया है। अंत में, शाहजहाँ की एक रोचक कहानी के माध्यम से बच्चों को सोचने के लिए प्रेरित किया गया है कि कौन सा अनाज सबसे बहुमुखी हो सकता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ पाठ 8: कुछ कच्चा कुछ पका हुआ</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1gsqhyV5O-QfdcGyqRdtSe0h5hR4I8Q_8" /></p>
<p>यह पाठ &#8216;कुछ कच्चा कुछ पका हुआ&#8217; बच्चों के बीच भोजन और खान-पान की आदतों पर आधारित एक संवादात्मक कहानी है। कहानी की शुरुआत इला द्वारा सुझाए गए एक खेल से होती है, जिसमें बच्चे खाने की चीजों के नाम पर प्रतिक्रिया देते हैं।</p>
<p>खेल के दौरान, वे चर्चा करते हैं कि विभिन्न आयु वर्ग के लोग, जैसे कि छोटे बच्चे, जवान और बुजुर्ग, क्या खाते हैं और क्या नहीं खा सकते। उदाहरण के लिए, छह महीने से छोटा बच्चा केवल दूध पीता है, जबकि बड़े लोग और जवान लगभग सब कुछ खा सकते हैं।</p>
<p>पाठ में इस बात पर भी प्रकाश डाला गया है कि कुछ चीजें कच्ची खाई जाती हैं, कुछ पकाकर और कुछ दोनों तरह से। इसके अलावा, पाठ भोजन बनाने की प्रक्रिया, उसमें लगने वाली मेहनत और परिवार के सदस्यों की भूमिकाओं पर सवाल उठाता है।</p>
<p>यह सामाजिक संदेश भी देता है कि खाना बनाने और घर के अन्य कामों में स्त्री और पुरुष, दोनों को मिलजुलकर हाथ बंटाना चाहिए। अंत में, छात्रों को अपनी पसंदीदा डिश बनाने की विधि लिखने और लैंगिक समानता पर चर्चा करने के लिए प्रेरित किया जाता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ पाठ 9: पकायेंगे-खायेंगे</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1hiIw0RbRWyOXZxvz2a0J2BFvrd15ksfJ" /></p>
<p>यह पाठ &#8216;पकायेंगे-खायेंगे&#8217; भोजन पकाने की विभिन्न विधियों और इसमें उपयोग होने वाले संसाधनों पर केंद्रित है। इसमें बताया गया है कि हम अपना भोजन अलग-अलग तरीकों से तैयार करते हैं, जैसे भूनकर, तलकर, उबालकर और सेककर।</p>
<p>पाठ में विद्यार्थियों से विभिन्न खाद्य पदार्थों को उनके पकाने के तरीकों के अनुसार वर्गीकृत करने के लिए कहा गया है। इसके अलावा, भोजन पकाने और खाने के लिए उपयोग किए जाने वाले विभिन्न बर्तनों, जैसे कड़ाही, झंझरा, और कलछी की पहचान करने पर जोर दिया गया है।</p>
<p>पाठ का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ईंधन (जलावन) के स्रोतों पर चर्चा करता है, जिसमें मिट्टी का तेल, कोयला, बिजली, गैस, धूप, लकड़ी और उपले शामिल हैं। यह सौर ऊर्जा के उपयोग की संभावनाओं को भी टटोलता है।</p>
<p>अंत में, यह पाठ ईंधन के संरक्षण का संदेश देता है, यह समझाते हुए कि दुनिया में ईंधन के स्रोत सीमित हैं और हमें इन्हें बर्बाद करने से बचना चाहिए। यह छात्रों को भविष्य में ईंधन खत्म होने की स्थिति और उसके परिणामों पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित करता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ पाठ 10: घर को जानें</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1EjHHITYQvRvqFNPhpuvdivuef9zDmWaP" /></p>
<p>यह पाठ &#8216;घर को जानें&#8217; विभिन्न प्रकार के घरों और उनके निर्माण में उपयोग होने वाली सामग्रियों के बारे में जानकारी प्रदान करता है। पाठ में बताया गया है कि गाँव और शहरों में छोटे, बड़े, कच्चे और पक्के घर पाए जाते हैं।</p>
<p>इन घरों के निर्माण में लकड़ी, भूसा, घास, मिट्टी, ईंट, सीमेंट और बालू जैसी विभिन्न सामग्रियों का उपयोग किया जाता है। पाठ के माध्यम से बच्चों को अपने घर की संरचना जैसे कि कमरे, दीवारें, छत और दरवाजों को समझने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।</p>
<p>इसमें घर बनाने वाली सामग्रियों की सूची बनाने, चित्रों में रंग भरने और वर्ग पहेली हल करने जैसी गतिविधियाँ शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, यह पाठ घरों के अनिवार्य अंगों जैसे खिड़की, दरवाजे और छत के महत्व पर प्रकाश डालता है और छात्रों को यह सोचने पर मजबूर करता है कि घर के बिना जीवन में क्या समस्याएँ आ सकती हैं।</p>
<p>अंत में, छात्रों को पुराने समय के घरों के बारे में जानने और माचिस की डिब्बियों एवं गत्ते का उपयोग करके घर का मॉडल बनाने के लिए प्रेरित किया गया है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ पाठ 11: दीपावली की तैयारी</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1xsO89v4NVh_wjmBmNxadnBrrt6wJ_lL1" /></p>
<p>यह अध्याय &#8216;दीपावली की तैयारी&#8217; सुखदा और संजय नामक दो बच्चों के माध्यम से दीपावली के त्योहार से पहले होने वाली गतिविधियों का वर्णन करता है। कहानी की शुरुआत घर की साफ-सफाई से होती है, जहाँ बच्चे अपनी पढ़ाई की मेज और किताबों की आलमारी व्यवस्थित करते हैं। परिवार के सभी सदस्य मिलकर पुराने सामानों को हटाते हैं, रसोई के डिब्बों और गर्म कपड़ों को धूप दिखाते हैं, और बगीचे की देखभाल करते हैं।</p>
<p>पाठ में कचरा प्रबंधन और स्वच्छता के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया है, जैसे कि सड़क किनारे कचरे के ढेर से होने वाली परेशानी। दीपावली के अवसर पर बाजार की रौनक, मिठाइयों की खरीदारी और करीम चाचा के रिक्शे की सवारी का जीवंत चित्रण किया गया है। घर लौटने पर बच्चे माँ के साथ रंगोली बनाने और दादी के साथ दीए की बाती तैयार करने में हाथ बँटाते हैं।</p>
<p>ग्रामीण परिवेश की झलक देते हुए गुल्लू के घर में गाय और बछड़े को सजाने का भी जिक्र है। अंत में, गोधूलि बेला में दीप जलाने, गणेश-लक्ष्मी की पूजा करने और बड़ों की देखरेख में पटाखे चलाने के साथ त्योहार के आनंद को दर्शाया गया है। यह पाठ बच्चों को सहयोग, स्वच्छता और पारंपरिक उल्लास का संदेश देता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ पाठ 12: किस और क्या</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1PmtQDUgDxhbam-eE9L-bvPbtz-KZeLHZ" /></p>
<p>यह पाठ प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों को दिशा-निर्देशों (आगे-पीछे, दाएँ-बाएँ) का ज्ञान कराने के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें विभिन्न क्रियाकलापों के माध्यम से बच्चों को अपने परिवेश को समझने के लिए प्रेरित किया गया है।</p>
<p>पाठ की शुरुआत स्कूल परिसर में खड़े होकर चारों ओर की वस्तुओं को पहचानने से होती है। इसके बाद &#8216;मंजू&#8217; नामक एक पात्र के उदाहरण द्वारा समझाया गया है कि शरीर की स्थिति बदलने पर वस्तुओं की सापेक्ष दिशाएँ (जैसे दाएँ या बाएँ) कैसे बदल जाती हैं।</p>
<p>पाठ में बसंती के स्कूल और उसके रास्ते का एक चित्र भी दिया गया है, जिसे देखकर बच्चों को वस्तुओं की स्थिति पहचानने का अभ्यास कराया जाता है। यह अध्याय व्यावहारिक उदाहरणों और चित्रों की सहायता से बच्चों में स्थानिक समझ विकसित करता है।</p>
<p>अंत में कुछ प्रश्न दिए गए हैं जो विद्यार्थियों को उनके घर और कक्षा के वातावरण के बारे में सोचने के लिए प्रेरित करते हैं ताकि वे दिशाओं की अवधारणा को अपने दैनिक जीवन से जोड़ सकें।</p>
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<h3>❤️ पाठ 13: स्कूल के आस-पास</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1rImJdRop3EF4bSU8M0TwWlHHt9KCmHun" /></p>
<p>यह पाठ &#8216;स्कूल के आस-पास&#8217; प्राथमिक कक्षा के विद्यार्थियों को मानचित्र अध्ययन और दिशाओं के ज्ञान से परिचित कराने के उद्देश्य से लिखा गया है। पाठ की शुरुआत सीमा नाम की एक बच्ची के घर से स्कूल तक के रास्ते के चित्र से होती है।</p>
<p>इस चित्र के माध्यम से बच्चों को रास्ते में आने वाले विभिन्न लैंडमार्क जैसे अस्पताल, बस स्टॉप, डाकघर, दुकान, कुआँ और पेड़ों की पहचान करना सिखाया गया है। अभ्यास प्रश्नों के जरिए विद्यार्थियों को दाईं और बाईं ओर की समझ विकसित करने के लिए प्रेरित किया गया है।</p>
<p>पाठ के दूसरे मुख्य भाग में &#8216;कौन दिशा किधर&#8217; नामक एक कविता दी गई है, जो बच्चों को चार मुख्य दिशाओं—पूरब, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण—को सूरज की स्थिति के आधार पर पहचानने में मदद करती है। कविता के अनुसार, उगते सूरज की ओर मुँह करके खड़े होने पर सामने पूरब, पीछे पश्चिम, बाएँ हाथ की ओर उत्तर और दाएँ हाथ की ओर दक्षिण दिशा होती है।</p>
<p>अंत में, विभिन्न गतिविधियों और टोली-आधारित खेलों के माध्यम से दिशाओं के व्यावहारिक ज्ञान को पुख्ता किया गया है और बच्चों को अपने स्वयं के स्कूल के आस-पास का मानचित्र बनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।</p>
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<h3>❤️ पाठ 14: पानी</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1hkZSMkwzo18ZNJVtz6dfbCODWKfqP6n_" /></p>
<p>यह पुस्तक का अंश जल के महत्व, इसके स्रोतों और संरक्षण पर आधारित है। पाठ की शुरुआत रोहिताश्व अस्थान द्वारा लिखित एक कविता &#8216;पानी&#8217; से होती है, जिसमें बारिश के दृश्य, जैसे मेढकों का टर्राना, मोरों का नाचना और बच्चों द्वारा कागज़ की नाव चलाने का सुंदर वर्णन है।</p>
<p>इसके बाद, अभ्यास के माध्यम से बच्चों को विभिन्न जल-स्रोतों जैसे झील, कुआँ, तालाब, नदी और चापाकल के बारे में सिखाया गया है। पुस्तक में जल के दैनिक उपयोगों, जैसे नहाने, पीने, कपड़े धोने और खेती, की सूची बनाने को कहा गया है।</p>
<p>इसमें जल के भंडारण और साफ-सफाई के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया है। एक विशेष खंड &#8216;जल संरक्षण&#8217; में ऋचा और राधा की कहानी के माध्यम से राजस्थान में वर्षा जल संचयन (टैंक निर्माण) की तकनीक को समझाया गया है।</p>
<p>अंत में, चित्रों के माध्यम से पानी के सदुपयोग और पुन: उपयोग के तरीकों पर चर्चा की गई है, ताकि बच्चों में जल बचाने की आदत विकसित हो सके। यह अध्याय मुख्य रूप से जल की उपयोगिता और उसकी बचत के प्रति जागरूकता पैदा करता है।</p>
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<h3>❤️ पाठ 15: दानापुर से गौरा तक</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1jrdiCJcIDGWCkYkDk9h2OqWpwLq-gk7l" /></p>
<p>यह पाठ &#8216;दानापुर से गौरा तक&#8217; यश और आयुष नामक दो बच्चों की कहानी के माध्यम से विभिन्न यातायात के साधनों और उनके महत्व का वर्णन करता है। गर्मी की छुट्टियों में, वे अपने माता-पिता के साथ दानापुर से लक्खीसराय जिले के अपने गाँव गौरा जाने की यात्रा करते हैं। इस यात्रा के दौरान, वे ऑटो-रिक्शा, रेलगाड़ी (तूफान एक्सप्रेस), बस और अंत में टमटम जैसे विभिन्न वाहनों का उपयोग करते हैं।</p>
<p>पाठ बच्चों को इन वाहनों के अनुभवों, उनकी आवाजों और यात्रा के आनंद से परिचित कराता है। गाँव पहुँचने पर, उनके दादाजी उन्हें यातायात के विकास और आधुनिक सुविधाओं के बारे में बताते हैं। पाठ में विभिन्न प्रकार के वाहनों का वर्गीकरण किया गया है—जमीन, पानी और हवा में चलने वाले वाहन।</p>
<p>साथ ही, यह भी समझाया गया है कि कुछ वाहन पशुओं की शक्ति से, कुछ मानवीय शक्ति से और कुछ डीजल या पेट्रोल जैसे ईंधन से चलते हैं। पहियों की बनावट, सामग्री (रबड़, लकड़ी, लोहा) और उनकी संख्या के आधार पर भी वाहनों में अंतर स्पष्ट किया गया है। अंत में, एक सरल प्रयोग के माध्यम से पहियों के घूमने के सिद्धांत को समझाया गया है।</p>
<p>यह अध्याय छात्रों को परिवहन के साधनों, उनके उपयोग और दैनिक जीवन में उनकी उपयोगिता के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करता है।</p>
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<h3>❤️ पाठ 16: चिट्ठी का सफर</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1hYaHYz9_EoWmHAfXM_LrWxMvdXRu8GTJ" /></p>
<p>यह पाठ &#8216;चिट्ठी का सफर&#8217; एक पत्र की यात्रा का वर्णन करता है जिसे शबनम ने अपनी सखी सपना को लिखा है। कहानी की शुरुआत एक कविता से होती है जो डाकिए के आगमन और खुशी के संदेश (जैसे शादी का निमंत्रण) लाने का वर्णन करती है।</p>
<p>मुख्य रूप से, यह पाठ विस्तार से समझाता है कि एक पत्र शबनम द्वारा पत्र-पेटी में डाले जाने से लेकर सपना के हाथों तक पहुँचने के लिए किन चरणों से गुजरता है। इसमें डाकघर, ठप्पा लगाने की प्रक्रिया (आरा से पटना तक), लाल डाक गाड़ी और रेलगाड़ी की भूमिका को दर्शाया गया है।</p>
<p>अंत में, डाकिया पते के अनुसार छँटाई के बाद पत्र को सपना के घर पहुँचा देता है। पाठ में बच्चों को स्वयं पत्र लिखने और कक्षा में अपनी पत्र-पेटी बनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।</p>
<p>इसके अलावा, यह विभिन्न प्रकार के डाक टिकटों, ठप्पों और आधुनिक संचार के साधनों जैसे मोबाइल, ई-मेल और फोन की भी चर्चा करता है, जो संदेशों को अधिक तेज़ी से पहुँचाते हैं। यह अध्याय संचार के पारंपरिक तरीकों के महत्व और उनकी कार्यप्रणाली को सरल भाषा में बच्चों को समझाता है।</p>
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<h3>❤️ पाठ 17: कपड़े तरह-तरह के</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1YnKhHfkTVzZZgNleHtCk5AgUuR2Yzzeq" /></p>
<p>यह पुस्तक का अंश &#8216;कपड़े तरह-तरह के&#8217; नामक अध्याय से है जो मुख्य रूप से बच्चों को विभिन्न प्रकार के वस्त्रों और उनके उपयोग के बारे में शिक्षित करता है। कहानी दानिश और सिया के दर्जी की दुकान पर जाने से शुरू होती है, जहाँ वे कुरता-पायजामा और सलवार-कमीज सिलवाने का ऑर्डर देते हैं।</p>
<p>इसके माध्यम से पाठकों को अलग-अलग मौसमों में पहने जाने वाले कपड़ों, जैसे गर्मियों में सूती और सर्दियों में ऊनी वस्त्रों के महत्व को समझाया गया है। पुस्तक में इस बात पर जोर दिया गया है कि कपड़े हमें गर्मी, सर्दी, बरसात और धूल-मिट्टी से बचाते हैं।</p>
<p>इसमें &#8216;कच्चे और पक्के रंग&#8217; की अवधारणा को भी एक सरल प्रयोग द्वारा स्पष्ट किया गया है, जहाँ नम्रता की माँ उसे बताती है कि धोने पर निकलने वाले रंग कच्चे होते हैं। पाठ में बच्चों के लिए कई रोचक गतिविधियाँ भी दी गई हैं, जैसे सिले और बिना सिले वस्त्रों की सूची बनाना, फूलों से प्राकृतिक रंग बनाना और भिंडी या आलू के ठप्पों से कपड़ों पर डिजाइन तैयार करना।</p>
<p>यह सामग्री प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक और संवादात्मक है।</p>
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<h3>❤️ पाठ 18: तेरी-मेरी उछलकूद</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1XOH70tUI_9gBlemXhj7NTSA1yPfCdPHN" /></p>
<p>यह पुस्तक का अंश &#8216;तेरी मेरी उछल-कूद&#8217; मुख्य रूप से बच्चों के खेलों, विशेषकर कबड्डी पर केंद्रित है। पाठ की शुरुआत कबड्डी के खेल के जीवंत वर्णन से होती है, जिसमें खेल के दौरान होने वाली गहमागहमी, शोर-शराबे और उत्साह को दर्शाया गया है। इसमें खिलाड़ियों द्वारा &#8216;कबड्डी-कबड्डी&#8217; बोलना, एक-दूसरे को छूने की कोशिश करना और आउट होने पर होने वाली प्रतिक्रियाओं का सुंदर चित्रण है।</p>
<p>लेखक ने खेल के आनंद को मिट्टी में घिसटने, साँस रोककर बोलने और टीम भावना के रूप में परिभाषित किया है। इसके साथ ही, यह पाठ छात्रों के लिए विभिन्न गतिविधियों और प्रश्नों को भी शामिल करता है। उदाहरण के लिए, बच्चों से पूछा गया है कि वे अपने दोस्तों के साथ कौन से खेल खेलते हैं और उन खेलों को घर के अंदर (Indoor) और घर के बाहर (Outdoor) की श्रेणियों में बाँटने के लिए कहा गया है।</p>
<p>पुस्तक में एक तालिका भी दी गई है जहाँ विभिन्न खेलों और उनमें आवश्यक खिलाड़ियों की संख्या तथा खेल सामग्री के बारे में जानकारी भरने का अभ्यास है। अंत में, यह बच्चों को अपने माता-पिता के बचपन के खेलों के बारे में जानने और अपने पसंदीदा खेल के नियम लिखने के लिए प्रोत्साहित करता है। कुल मिलाकर, यह पाठ बच्चों को शारीरिक गतिविधियों और पारंपरिक खेलों के प्रति जागरूक करता है।</p>
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<h3>❤️ पाठ 19: कोशिश करके देख लें</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=146IjAN9PWZLHt2719XVCj3LWbRZqqnhm" /></p>
<p>यह पाठ विशेष रूप से दिव्यांग व्यक्तियों के जीवन और उनकी क्षमताओं पर आधारित है। पाठ की शुरुआत &#8216;आँख मिचौली&#8217; के खेल से होती है, जिसके माध्यम से यह समझाने का प्रयास किया गया है कि बिना देखे कार्यों को करना कितना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।</p>
<p>इसमें बताया गया है कि जो लोग देख नहीं सकते, वे अपनी अन्य इंद्रियों जैसे स्पर्श, गंध और आवाज़ का उपयोग करके दुनिया को समझते हैं। उनके पढ़ने-लिखने के लिए &#8216;ब्रेल लिपि&#8217; के महत्व को रेखांकित किया गया है, जिसकी खोज लुई ब्रेल ने की थी।</p>
<p>पाठ में शैलेन्द्र नामक एक बच्चे की कहानी है जो पहियों वाली कुर्सी (व्हीलचेयर) का उपयोग करता है और खेल के माध्यम से अन्य बच्चों के साथ घुल-मिल जाता है। इसके अतिरिक्त, पाठ &#8216;संकेतों की भाषा&#8217; (साइन लैंग्वेज) के बारे में भी जानकारी देता है, जिसका उपयोग वे लोग करते हैं जो बोल या सुन नहीं सकते।</p>
<p>यह अध्याय हमें सिखाता है कि शारीरिक अक्षमताओं के बावजूद अभ्यास और सही उपकरणों की मदद से व्यक्ति आत्मनिर्भर बन सकता है और समाज की मुख्यधारा में शामिल हो सकता है। हमें ऐसे व्यक्तियों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए और उनकी क्षमताओं का सम्मान करना चाहिए।</p>
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<h3>❤️ पाठ 20: आओ खेलें मिट्टी से</h3>
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<p>यह पुस्तक का अंश &#8216;आओ खेलें मिट्टी से&#8217; नामक अध्याय पर केंद्रित है, जो बच्चों को पर्यावरण और पारंपरिक व्यवसायों से परिचित कराता है। कहानी की शुरुआत कमला और सलमा द्वारा मिट्टी से घरौंदा बनाने से होती है, जिसके माध्यम से बच्चों को मिट्टी की प्रकृति और उसके उपयोग के बारे में सिखाया जाता है।</p>
<p>पाठ में कुम्हार की भूमिका और मिट्टी के बर्तन बनाने की प्रक्रिया पर विशेष जोर दिया गया है, जिसमें मिट्टी खोदने से लेकर चाक पर बर्तन बनाने और उन्हें पकाने तक के चरण शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, छात्रों को विभिन्न पेशों जैसे किसान, डॉक्टर, शिक्षक और दर्जी के महत्व को समझने के लिए गतिविधियाँ दी गई हैं।</p>
<p>पुस्तक बच्चों को विभिन्न स्थानों जैसे खेत, बगीचे और नदी की मिट्टी के नमूनों का अवलोकन करने और उनके गुणों की पहचान करने के लिए प्रोत्साहित करती है। अंत में, यह हमारे पर्यावरण (मिट्टी, जल, जीव-जंतु) के महत्व को रेखांकित करती है और भारत के संविधान में वर्णित मूल कर्तव्यों का उल्लेख करती है, जिसमें प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सामाजिक समरसता बनाए रखने का संदेश दिया गया है।</p>
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		<title>Bihar Board 3rd Mathematics Book 2025 PDF Download</title>
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		<pubDate>Sun, 24 Jul 2022 08:52:13 +0000</pubDate>
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<h3>❤️ पाठ 1: ज्यामिति</h3>
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<h3>❤️ पाठ 2: संख्याएँ</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1_4BacDZqkgYLtmdebDRiJydFFUxJgTMq" /></p>
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<h3>❤️ पाठ 3: जोड़-घटाव</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1isoXemkgxNgUyXXBsh8ewZhWG9ki3kmf" /></p>
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<h3>❤️ पाठ 4: गुणा</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1hv2g5vLL6YqxzWkg3gew6zZ6XXfBdw9a" /></p>
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<h3>❤️ पाठ 5: भाग</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1VE3D-Kapp9GUsBKqydnIg3DpQ3gDzC9C" /></p>
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<h3>❤️ पाठ 6: भिन्न संख्याएँ</h3>
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<h3>❤️ पाठ 7: मुद्रा</h3>
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<h3>❤️ पाठ 8: लम्बाई</h3>
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<h3>❤️ पाठ 9: भार</h3>
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<h3>❤️ पाठ 10: धारिता</h3>
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<h3>❤️ पाठ 11: समय</h3>
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<h3>❤️ पाठ 12: पैटर्न</h3>
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<h3>❤️ पाठ 13: आँकडों का निरूपण</h3>
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		<title>Bihar Board Class 3 Hindi Book 2026 PDF Download</title>
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		<dc:creator><![CDATA[bseb]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 Jul 2022 08:51:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Class 3rd Books]]></category>
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<h3>❤️ पाठ 1: प्रार्थना (कविता)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1k8eZ6bwyC6B29BOGPiQIKVBgtpwWQPVa" /></p>
<p>यह पुस्तक प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों के लिए तैयार की गई एक उत्कृष्ट हिंदी पाठ्यपुस्तक है। पुस्तक का आरंभ रवींद्रनाथ ठाकुर द्वारा रचित एक अत्यंत प्रेरणादायक प्रार्थना &#8216;देश की माटी&#8217; से होता है।</p>
<p>इस कविता के माध्यम से कवि ईश्वर से देश की मिट्टी, जल, वायु, फल, घर, घाट और वनों को सरस, सरल और विमल बनाने की कामना करते हैं। कविता का मुख्य स्वर राष्ट्रीय एकता और प्रेम है, जहाँ सभी देशवासियों के तन, मन और भाषा को एक होने का आह्वान किया गया है।</p>
<p>पुस्तक में विद्यार्थियों के भाषाई कौशल को विकसित करने के लिए विविध अभ्यास प्रश्न दिए गए हैं, जिनमें शब्दार्थ, कविता की व्याख्या, और रचनात्मक लेखन शामिल हैं। यह पाठ्यपुस्तक न केवल बच्चों को हिंदी भाषा की बारीकियों से परिचित कराती है, बल्कि उनमें अपने देश के प्रति प्रेम, स्वच्छता और भाईचारे की भावना भी जागृत करती है।</p>
<p>सरल भाषा शैली और लयबद्ध कविताओं के माध्यम से यह छात्रों के मानसिक और चारित्रिक विकास में सहायक सिद्ध होती है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ पाठ 2: प्रतीक्षा (प्रेरक-प्रसंग)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1T6uagiMTVMF3dxUfuv41SKWbHWFD8l1b" /></p>
<p>यह कहानी भगवान बुद्ध और उनके शिष्य आनंद के जीवन की एक प्रेरक घटना पर आधारित है। एक बार बुद्ध राजगीर की यात्रा के दौरान प्यासे हुए और उन्होंने आनंद को पास के एक झरने से पानी लाने को कहा। आनंद ने देखा कि बैलगाड़ियों के गुजरने के कारण झरने का पानी बहुत गंदा हो गया है, इसलिए वे बिना पानी लिए लौट आए।</p>
<p>बुद्ध ने उन्हें बार-बार उसी झरने पर भेजा। अंततः चौथी बार जाने पर आनंद ने पाया कि धैर्य और प्रतीक्षा के कारण मिट्टी और पत्ते नीचे बैठ गए थे और पानी आईने की तरह स्वच्छ हो गया था। इस प्रसंग के माध्यम से बुद्ध ने एक महान जीवन दर्शन सिखाया कि जैसे झरने का पानी स्वतः साफ हो गया, वैसे ही हमारे मन में आने वाले बुरे विचारों और अशांति को भी धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा करके शांत किया जा सकता है।</p>
<p>यदि हम अपने मन की झील के शांत होने का इंतजार करें, तो सब कुछ फिर से स्पष्ट और स्वच्छ हो जाता है। यह पाठ हमें कठिन परिस्थितियों में जल्दबाजी न करने और संयम बनाए रखने की महत्ता समझाता है। कहानी में प्रयुक्त &#8216;प्रतीक्षा&#8217; शब्द केवल इंतजार को नहीं, बल्कि मानसिक स्पष्टता प्राप्त करने के लिए आवश्यक धैर्य को भी दर्शाता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ पाठ 3: मेरा गाँव (कविता)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=11x4eqZo8-ja-IywyRruvpAUd_BA6z0r3" /></p>
<p>यह कविता &#8216;मेरा गाँव&#8217; ग्रामीण जीवन की सुंदरता और सरलता का वर्णन करती है। कवि पाठकों को अपने गाँव आने का निमंत्रण देता है जो नदी के किनारे स्थित है जहाँ लोग नाव से पहुँच सकते हैं। यद्यपि अब गाँव में गाड़ी-मोटर भी तेज़ रफ़्तार से चलती हैं, फिर भी वहाँ की प्राकृतिक सुंदरता बरकरार है।</p>
<p>बच्चे आम के बगीचों (अमराई) की छाँव में खेलते हैं। गाँव की सबसे बड़ी विशेषता वहाँ के लोगों का आपसी प्रेम और मिलजुलकर रहना है; वहाँ किसी प्रकार का अलगाव नहीं है। यहाँ शहर की तरह सिनेमा हॉल या भीड़-भाड़ वाला शोर-शराबा नहीं है, बल्कि चारों ओर खेत और बागान हैं जहाँ घूमने पर पैरों में मिट्टी लगती है।</p>
<p>मेले के समय गाँव में बहुत उत्साह और धमाचौकड़ी होती है और सभी लोग पंचायत भवन के पास एकत्र होते हैं। यह कविता शांतिपूर्ण और खुशहाल ग्रामीण परिवेश का सजीव चित्रण करती है और पाठकों को उस शांति का अनुभव करने के लिए आमंत्रित करती है। इसके अतिरिक्त, पाठ में अभ्यास कार्य भी दिए गए हैं जो बच्चों को संज्ञा और ग्रामीण परिवेश की समझ विकसित करने में मदद करते हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ पाठ 4: बब्बन बंदर</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1tYx-2vn0u1Kg3WkH4Ly883WzQvhaPqOX" /></p>
<p>यह कहानी &#8216;बब्बन बंदर&#8217; के बारे में है, जिसे स्कूल जाना पसंद नहीं था। जंगल के राजा गब्बर शेर ने आदेश दिया था कि सभी बच्चे स्कूल जाएँ और नियमित आने वालों को इनाम मिलेगा। लल्ली लोमड़ी बच्चों को नाचते-गाते हुए बहुत अच्छे से पढ़ाती थी और सभी बच्चे खुश थे।</p>
<p>लेकिन बब्बन बंदर एक दिन चुपके से स्कूल से भागकर जंगल में घूमने लगा। वह एक बेल के पेड़ पर चढ़ गया, जहाँ शेर ने उसे देख लिया। बब्बन ने बहाना बनाया कि वह लोमड़ी के लिए बेल लेने आया है, पर शेर ने उसका झूठ पकड़ लिया।</p>
<p>शेर ने उसे समझाया कि पढ़ाई-लिखाई से ही वह समझदार बनेगा। शेर की बात मानकर बब्बन वापस स्कूल गया और मन लगाकर पढ़ने लगा। वह कक्षा में सबसे अच्छा छात्र बन गया।</p>
<p>उसकी मेहनत और नियमितता देख कर गब्बर शेर ने उसे एक डफली इनाम में दी। यह कहानी शिक्षा के महत्त्व और अनुशासन को दर्शाती है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ पाठ 5: खूब मजे हैं मौसम के (कविता)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1zgTw-X6xWL2bsIcuHXE4kBFIjaw6gVbA" /></p>
<p>यह पाठ &#8216;खूब मजे हैं मौसम के&#8217; विभिन्न ऋतुओं और उनकी विशेषताओं पर आधारित एक कविता है। कविता के माध्यम से बताया गया है कि मौसम अपनी मर्जी से कुछ भी कर सकता है।</p>
<p>वह सर्दी लाकर कुल्फी जमा सकता है, वसंत में फूल खिलाकर धरती को सजा सकता है, और पतझड़ के माध्यम से पेड़ों के पत्तों को झड़ाकर &#8216;खड़-खड़&#8217; का राग सुना सकता है। वर्षा ऋतु में मौसम फसलें उगाता है और चारों ओर हरियाली बिखेरता है, जबकि गर्मी के मौसम में बच्चों को लंबी छुट्टियाँ मनाने का अवसर मिलता है।</p>
<p>पाठ के अंत में अभ्यास कार्य दिए गए हैं, जिनमें विद्यार्थियों से मौसम के प्रभावों, उनकी पसंद-नापसंद और विभिन्न ऋतुओं में होने वाले बदलावों के बारे में प्रश्न पूछे गए हैं। इसमें शब्दार्थ और पर्यायवाची शब्दों (जैसे धरती-जमीन, फूल-पुष्प) का भी अभ्यास शामिल है।</p>
<p>यह पाठ बच्चों को प्रकृति के बदलते स्वरूप और प्रत्येक मौसम के आनंद से परिचित कराता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ पाठ 6: जंगल मे सभा (खुली कहानी)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1wVhpYeHWAqj2JYYUVMzLeTpBVL4TBWyi" /></p>
<p>यह पाठ &#8216;जंगल में सभा&#8217; स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर आधारित है। जंगल के सभी जानवर बरगद के पेड़ के नीचे एक सभा आयोजित करते हैं, जिसकी अध्यक्षता हाथी करता है।</p>
<p>सभा के दौरान, खरगोश अपनी पीड़ा व्यक्त करता है कि भालू कचरा उसके बिल के पास फेंकता है, बंदर केले के छिलके रास्ते में डालता है और तालाब का पानी दूषित हो रहा है। वह गंदगी से परेशान होकर जंगल छोड़ने की बात करता है।</p>
<p>हाथी स्वीकार करता है कि यह सबकी गलती है। कहानी के माध्यम से बच्चों को साफ-सफाई, कूड़ेदान का उपयोग और सामूहिक जिम्मेदारी की सीख दी गई है।</p>
<p>इसमें संज्ञा के प्रकार जैसे जातिवाचक और समूहवाचक संज्ञा का भी परिचय दिया गया है। अंत में, छात्रों को परिवेश को स्वच्छ रखने और बीमारियों से बचने के लिए प्रेरित किया गया है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ पाठ 7: फुलवारी (कविता)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1xuj4OJaKvdaFB3o-GwjR1fF1WTqkNYBy" /></p>
<p>&#8216;फुलवारी&#8217; एक अत्यंत सुंदर और शिक्षाप्रद कविता है जो फूलों के माध्यम से बच्चों को जीवन के महत्वपूर्ण गुण सिखाती है। इस कविता में बताया गया है कि फुलवारी रंग-बिरंगे फूलों से सजी हुई है और मंद हवा के झोंकों के साथ झूल रही है। यहाँ जूही, चंपा, बेला, सफेद गुलाब और लाल कमल जैसे फूल अपनी शोभा बिखेर रहे हैं।</p>
<p>तितलियाँ इन फूलों पर मंडराती हैं और मीठा रस पीती हैं, जबकि भँवरे गुनगुनाकर अपना मधुर गान सुनाते हैं। कविता की सबसे प्रमुख विशेषता यह है कि इतने आकर्षक रंग-रूप और खुशबू होने के बावजूद फूलों को अपनी सुंदरता पर तनिक भी अभिमान नहीं है। वे सभी के मन को प्रसन्न करने में ही अपना मान समझते हैं।</p>
<p>कविता के अंत में बच्चों को फूलों जैसा बनने की प्रेरणा दी गई है, ताकि वे भी फूलों की तरह सदा मुस्कुराएँ और अपनी अच्छाई की सुगंध से पूरे संसार को महकाएँ। यह रचना न केवल प्रकृति के सौंदर्य का वर्णन करती है, बल्कि बच्चों में विनम्रता, परोपकार और सद्भावना जैसे नैतिक मूल्यों का संचार भी करती है। पुस्तक में पाठ से संबंधित शब्दार्थ, प्रश्न-उत्तर और रचनात्मक गतिविधियाँ भी शामिल हैं जो बच्चों की समझ को गहरा करती हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ पाठ 8: रक्षाबंधन (कहानी)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1f6jIvsME_ObdJK40rZQ_Z02Btl3R-s4a" /></p>
<p>यह पाठ रक्षाबंधन के पावन त्योहार पर आधारित है, जो भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक है। कहानी में उषा नाम की एक लड़की है जो सावन की पूर्णिमा के अवसर पर अपने भाई प्रभात की प्रतीक्षा कर रही है। बाजार में चारों ओर रौनक है और सुंदर राखियां सजी हैं।</p>
<p>जब प्रभात घर आता है, तो उषा प्रसन्न होकर उसे तिलक लगाती है और कलाई पर राखी बांधती है। भाई उसे उपहार स्वरूप कुछ रुपये देता है और सदैव उसकी रक्षा करने का वचन देता है। यह अध्याय रक्षाबंधन के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर भी प्रकाश डालता है।</p>
<p>इसमें प्राचीन काल के सैनिकों और चित्तौड़ की महारानी कर्णावती द्वारा बादशाह हुमायूँ को राखी भेजने का प्रसंग भी दिया गया है, जो इस बंधन की गहराई को दर्शाता है। राखी का यह धागा मात्र एक रेशमी डोर नहीं, बल्कि एक सुरक्षा कवच माना जाता है। बहनें अपने भाई की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की मंगल कामना करती हैं, जबकि भाई अपनी बहनों को संकटों से बचाने का प्रण लेते हैं।</p>
<p>अंत में पाठ में कुछ अभ्यास और व्याकरण संबंधी गतिविधियाँ भी शामिल की गई हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ पाठ 9: तिरंगा (कविता)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1a8J5zo4sWBGal_mVJcS1IR1GmDqK0JjI" /></p>
<p>यह पुस्तक का अंश &#8216;तिरंगा&#8217; शीर्षक वाली एक देशभक्ति कविता है जो भारत के राष्ट्रीय ध्वज के महत्व और उसके तीन रंगों के प्रतीकवाद पर केंद्रित है। कविता बताती है कि केसरिया रंग वीरता और उत्साह का प्रतीक है, सफेद रंग शांति और सच्चाई का मार्ग दिखाता है, और हरा रंग देश की खुशहाली और मेहनत को दर्शाता है।</p>
<p>झंडे के बीच में स्थित चक्र निरंतर प्रगति और गति का संदेश देता है। यह पाठ प्राथमिक विद्यालय के छात्रों के लिए तैयार किया गया है, जिसमें कविता के माध्यम से राष्ट्रीय गौरव और स्वाभिमान की भावना जगाने का प्रयास किया गया है।</p>
<p>पुस्तक में शब्दार्थ और अभ्यास कार्य भी शामिल हैं, जो बच्चों को झंडे के रंगों, उसके इतिहास और महत्व को गहराई से समझने में मदद करते हैं। इसमें छात्रों को झंडा फहराने के नियमों, राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान और देश की आजादी के प्रति जागरूक करने पर बल दिया गया है।</p>
<p>अंत में, यह पाठ विशेषण जैसे व्याकरणिक तत्वों और देशभक्ति गीतों के माध्यम से भाषा और संस्कृति का ज्ञान भी प्रदान करता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<h3>❤️ पाठ 10: कौवा और साँप (कहानी)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1tv6EVKm47p1HLKCRZfQ-litGUdZ7MOow" /></p>
<p>यह कहानी विष्णु शर्मा द्वारा रचित &#8216;पंचतंत्र&#8217; से ली गई है। एक बरगद के पेड़ पर एक कौवा और कौवी अपने बच्चों के साथ रहते थे। उसी पेड़ के नीचे एक दुष्ट काला साँप भी रहता था, जो मौका पाकर कौवे के बच्चों को खा जाता था।</p>
<p>अपने बच्चों की मृत्यु से दुखी होकर कौवा और कौवी ने एक चतुर लोमड़ी से मदद माँगी। लोमड़ी ने उन्हें एक युक्ति सुझाई। योजना के अनुसार, जब राजकुमारियाँ नदी में स्नान करने आईं, तब कौवी ने उनका कीमती मोतियों का हार उठा लिया और उसे साँप के बिल में डाल दिया।</p>
<p>राजमहल के नौकर हार का पीछा करते हुए वहाँ पहुँचे और हार निकालने के प्रयास में उन्होंने बिल से निकले साँप को मार डाला। इस प्रकार कौवा और कौवी को अपने शत्रु से मुक्ति मिली और वे सुखपूर्वक रहने लगे। यह कहानी हमें सिखाती है कि बुद्धि और चतुरता से बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान किया जा सकता है।</p>
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<h3>❤️ पाठ 11: उल्टा-पुल्टा (कविता)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1qVhnczNe21-xMQ1KeE457eRW6i5Z9Ksv" /></p>
<p>&#8216;उल्टा-पुल्टा&#8217; भगवती प्रसाद द्विवेदी द्वारा रचित एक प्रेरणादायक कविता है। इस कविता में कवि ने विभिन्न जीव-जंतुओं जैसे छिपकली, तिलचट्टे, चींटे, बंदर, चींटी, मकड़े और गिरगिट के उदाहरणों के माध्यम से जीवन का एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। कवि बताते हैं कि जब ये जीव चलते-चलते अचानक गिर जाते हैं या पलट जाते हैं, तो वे हिम्मत नहीं हारते।</p>
<p>वे तुरंत खुद को सँभालते हैं और पुन: अपने मार्ग पर चल देते हैं। छिपकली छत से गिरकर तुरंत संभल जाती है, बंदर नीचे गिरने पर दूसरी डाली पकड़कर हँसने लगता है, और चींटियाँ व मकड़े गिरने के बाद साहस खोकर आँखें नहीं मलते बल्कि दोबारा उठ खड़े होते हैं। इस कविता का मुख्य उद्देश्य यह समझाना है कि मनुष्य को भी अपने जीवन में आने वाली विफलताओं या गिरने से घबराना नहीं चाहिए।</p>
<p>जो लोग गिरने के बाद साहस खो देते हैं, वे केवल पछताते रह जाते हैं। इसके विपरीत, जो लोग अपनी गलतियों या असफलताओं से सीख लेकर, धूल झाड़कर तुरंत संभल जाते हैं और निरंतर प्रयास करते रहते हैं, वही जीवन में सच्चा सुख और सफलता प्राप्त करते हैं। यह कविता दृढ़ता और सकारात्मकता की शक्ति पर बल देती है।</p>
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<h3>❤️ पाठ 12: गाँधीजी की कहानी-चित्रों की जुबानी (चित्र-श्र्ंखला)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src=" " /></p>
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<h3>❤️ पाठ 13: राजगीर (पत्र)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1Vpf9jbiwef7X7HZpAeZPv_0FTkzOg9sR" /></p>
<p>यह पाठ एक पत्र के रूप में है, जिसमें ज्योति अपनी सहेली शालिनी को बिहार के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल &#8216;राजगीर&#8217; की यात्रा का वर्णन करती है। राजगीर प्राचीन मगध साम्राज्य की राजधानी थी और पाँच पहाड़ियों से घिरा एक अत्यंत मनोरम स्थान है।</p>
<p>यहाँ महाराजा बिम्बिसार द्वारा निर्मित &#8216;शिलाघटित महाप्राकार&#8217; की दीवारें और उनका सुंदर बगीचा &#8216;वेणुवन&#8217; स्थित है। पाठ में &#8216;जरासंध का अखाड़ा&#8217; का उल्लेख है, जहाँ भीम और जरासंध के बीच प्रसिद्ध मल्लयुद्ध हुआ था।</p>
<p>पहाड़ी पर स्थित &#8216;विश्व शांति-स्तूप&#8217; और वहाँ तक जाने वाला रोमांचकारी &#8216;रज्जु मार्ग&#8217; यहाँ के मुख्य आकर्षण हैं। राजगीर अपने गर्म पानी के कुंडों जैसे ब्रह्म-कुंड और सप्तधारा के लिए भी प्रसिद्ध है, जिनमें स्नान करना स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है।</p>
<p>यहाँ गौतम बुद्ध की प्रिय &#8216;गिद्ध कूट गुफा&#8217; और जैन धर्म के पवित्र मंदिर तथा &#8216;वीरायतन&#8217; भी दर्शनीय हैं। अंत में, ज्योति मलमास मेले की चर्चा करते हुए शालिनी को राजगीर के चित्र भेजती है ताकि वह भी यहाँ की सुंदरता का आनंद ले सके।</p>
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<h3>❤️ पाठ 14: दीप जले (कविता)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1GsAcYF2E84A6VIUq5n-dhpPWRELnhoW-" /></p>
<p>यह पाठ &#8216;दीप जले&#8217; दीपावली के पावन पर्व पर आधारित एक सुंदर कविता है। कविता में बताया गया है कि दिवाली के अवसर पर गाँव-गाँव और द्वार-द्वार पर दीये जलाए जाते हैं, जिससे हर जगह रोशनी और खुशियाँ फैल जाती हैं।</p>
<p>इन नन्हे दीपकों को &#8216;नेह के उजारे&#8217; और &#8216;अमावस के चंदा&#8217; कहा गया है, जो रात के अंधकार में राह दिखाने वाले सहारे के समान हैं। यह त्योहार दानव पर मानव की जीत और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।</p>
<p>कविता के माध्यम से आपसी भेदभाव भुलाकर प्रेम और भाईचारे के साथ गले मिलने का संदेश दिया गया है। पाठ में शब्दार्थ के साथ-साथ अभ्यास प्रश्न भी दिए गए हैं, जिनमें दीपावली की पूजा, मिठाइयों, पटाखों और अन्य रीति-रिवाजों के बारे में चर्चा की गई है।</p>
<p>यह बच्चों को संज्ञा और विशेषण जैसे व्याकरणिक तत्वों को समझने में भी मदद करता है। अंत में, त्योहारों के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों और सांस्कृतिक गतिविधियों जैसे अल्पना बनाने पर भी जोर दिया गया है।</p>
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<h3>❤️ पाठ 15: साहसी इंदिरा (बाल्य जीवन-चित्र)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1ruR1ww3tQTCxE2l4f9N6siqj2B7gcZX8" /></p>
<p>यह पाठ इंदिरा गाँधी के बचपन की एक साहसी घटना पर आधारित है। जब देश में राष्ट्रीय आन्दोलन चल रहा था, तब स्वतंत्रता सेनानी गुप्त रूप से पं. नेहरू के घर &#8216;आनंद भवन&#8217; में बैठकें करते थे।</p>
<p>एक बार महत्वपूर्ण योजना तैयार की गई थी, तभी पुलिस ने घर को घेर लिया। इंदिरा ने सूझबूझ और साहस का परिचय देते हुए उन गोपनीय कागजों को अपने स्कूल बैग में छिपा लिया। जब पुलिस ने उनकी कार रोकी, तो उन्होंने बड़ी चतुराई से सिपाही को जवाब दिया कि कोई भी पिता अपनी नन्हीं बेटी को जोखिम में नहीं डालेगा।</p>
<p>सिपाही उनकी बातों में आ गया और उन्होंने सुरक्षित रूप से वे दस्तावेज बाहर पहुँचा दिए। इंदिरा ने बचपन में ही &#8216;वानर सेना&#8217; का गठन किया था, जो संदेश पहुँचाने और खबरें लाने का काम करती थी। यह कहानी उनके अटूट साहस, देशभक्ति और संकट के समय शांत रहकर निर्णय लेने की क्षमता को दर्शाती है।</p>
<p>उनके इन गुणों ने न केवल राष्ट्रीय नेताओं की सहायता की, बल्कि उनके भविष्य के नेतृत्व की नींव भी रखी।</p>
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<h3>❤️ पाठ 16: गंगा नदी (कविता)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1rfAovB56nMGutvQpqwQXQGC_6CSrXIuR" /></p>
<p>यह कविता &#8216;गंगा नदी&#8217; भारत की सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण नदी गंगा के उद्गम, महत्व और वर्तमान चुनौतियों का वर्णन करती है। कविता के अनुसार, गंगा हिमालय की उजली बर्फ के पिघलने से जल की धारा के रूप में निकलती है और दुर्गम रास्तों से होती हुई पूरे भारत में बहती है।</p>
<p>इसे देश का &#8216;हृदयहार&#8217; और &#8216;आधार&#8217; माना गया है। कवि विद्यापति के माध्यम से इसे &#8216;पतित-पावनी देवनदी&#8217; कहा गया है जो सभी के पापों को धोती है।</p>
<p>कविता में इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है कि मानवीय गतिविधियों और प्रदूषण के कारण गंगा मैया &#8216;क्रुद्ध&#8217; हो रही हैं और उनकी तीव्र धारा अवरुद्ध हो रही है। अंत में, यह पाठ पाठकों को संदेश देता है कि गंगा की निर्मलता बनाए रखना हमारा परम कर्तव्य है, ताकि इसकी &#8216;कंचन छवि&#8217; और श्रद्धा की पहचान सुरक्षित रहे।</p>
<p>अभ्यास खंड में छात्रों से नदी प्रदूषण को रोकने और जल संरक्षण के उपायों पर विचार करने के लिए प्रेरित किया गया है।</p>
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<h3>❤️ पाठ 17: बैलगाड़ी का दाम (कहानी)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1vEKXOR9sTmLUh-YsnCR-oH_BXaeTk9gn" /></p>
<p>यह कहानी &#8216;बैलगाड़ी का दाम&#8217; एक सरल हृदय किसान भोलाराम और एक चालाक व्यापारी धनीराम की है। भोलाराम सात रुपये में भूसा बेचने के लिए मंडी जा रहा था, लेकिन धनीराम ने उसकी बातों का गलत मतलब निकालकर न केवल भूसा बल्कि उसकी बैलगाड़ी और बैल भी धोखे से हड़प लिए। जब भोलाराम ने यह बात अपने बुद्धिमान बेटे चतुरसेन को बताई, तो उसने धनीराम को सबक सिखाने की योजना बनाई।</p>
<p>चतुरसेन पड़ोसी की गाड़ी में भूसा लेकर धनीराम के पास पहुँचा और सौदे के रूप में धनीराम के बच्चे की &#8216;मुट्ठी भर सिक्के&#8217; माँगे। जब सिक्के देने का समय आया, तो चतुरसेन ने बच्चे का हाथ पकड़ लिया और तर्क दिया कि सौदे के अनुसार अब बच्चे की मुट्ठी भी उसकी है। धनीराम समझ गया कि वह अपने ही जाल में फँस गया है।</p>
<p>घबराकर उसने चतुरसेन से माफी माँगी और एक हजार रुपये देकर अपने बेटे को छुड़ाया। इस प्रकार चतुरसेन ने अपनी चतुराई से न केवल अपने पिता के बैल और गाड़ी वापस पा ली, बल्कि व्यापारी को भी सुधार दिया। यह कहानी सिखाती है कि चालाकी का अंत बुरा होता है और सूझबूझ से किसी भी समस्या का समाधान निकाला जा सकता है।</p>
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<h3>❤️ पाठ 18: हम सब (कविता)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1nM4zv_Kkt6_K2628OCSJdleYuBIxZjYv" /></p>
<p>&#8216;हम सब&#8217; नामक यह कविता भारतीय एकता और अखंडता का एक सुंदर संदेश प्रस्तुत करती है। कवयित्री आशा दूबे ने इस कविता के माध्यम से समाज में व्याप्त भेदभाव को मिटाने का आह्वान किया है। कविता की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं: यह कविता हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई धर्मों के लोगों को एक साथ मिलकर रहने की प्रेरणा देती है।</p>
<p>इसमें कहा गया है कि हमें जात-पात और धार्मिक भेदभाव को छोड़कर &#8216;मानव दिवस&#8217; मनाना चाहिए, जो मानवता के प्रति सम्मान का प्रतीक है। भारत देश को एक माँ के रूप में दर्शाया गया है जिसके ये चारों धर्म उसके बेटों के समान हैं। भारत की धरती पर ही हम सब खेल-कूद कर बड़े हुए हैं और हम सबके बीच गहरा प्रेम है।</p>
<p>कविता में चेतावनी दी गई है कि जो लोग इस आपसी प्रेम और भाईचारे को तोड़ने की कोशिश करते हैं, उनकी हर चाल को हमें नाकाम करना होगा। हमें यह सदैव याद रखना चाहिए कि भारत के अस्तित्व से ही हमारा अस्तित्व जुड़ा है। अंत में, कविता देश के प्रति समर्पण का भाव जगाती है, जहाँ बच्चे देश की प्रगति के लिए मिलकर मेहनत करने और किसी भी चुनौती से न डरने का संकल्प लेते हैं।</p>
<p>यह रचना राष्ट्रीय एकता और सद्भावना का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।</p>
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<h3>❤️ पाठ 19: कुत्ते की कहानी (कहानी)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1xdpiIyHs1VYDSF2OwanNnU8FMbF8AFlQ" /></p>
<p>प्रेमचंद द्वारा लिखित यह कहानी एक कुत्ते के जीवन और उसकी स्वामिभक्ति का चित्रण करती है। कहानी का आरंभ कुत्ते के जन्म से होता है, जहाँ वह गरीबी और कठिनाइयों के बीच बड़ा होता है। उसे एक पंडितजी का लड़का अपने घर ले आता है, जहाँ वह सुरक्षा और स्नेह पाता है।</p>
<p>कहानी का मुख्य मोड़ तब आता है जब पंडितजी के घर में चोर घुस जाते हैं। कुत्ता अपनी सतर्कता से चोरों की आहट पहचान लेता है और पंडितजी को जगाने की कोशिश करता है। शुरुआत में पंडितजी उसे डांटते और मारते हैं, लेकिन वह हार नहीं मानता।</p>
<p>अंततः अपनी सूझबूझ और वफादारी से, वह न केवल पंडितजी को चोरी के बारे में सचेत करता है, बल्कि तालाब में कूदकर चोरी का सामान ढूंढ निकालने में भी मदद करता है। उसकी इस बहादुरी और वफादारी को देखकर पंडितजी और गाँव वाले अत्यधिक प्रभावित होते हैं। यह कहानी जानवरों की संवेदनाओं और उनकी निस्वार्थ वफादारी को खूबसूरती से दर्शाती है।</p>
<p>प्रेमचंद ने सरल भाषा में संदेश दिया है कि जानवर भी प्रेम और कर्तव्य की भाषा समझते हैं और अवसर आने पर मनुष्य से भी अधिक वफादार सिद्ध होते हैं।</p>
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<h3>❤️ पाठ 20: खेल-खेल में (वार्त्ता)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1GD3ThqWhzMPqt8AeurKLRwhPRTGiXSMN" /></p>
<p>&#8216;खेल-खेल में&#8217; पाठ बच्चों और उनके खेलों के इर्द-गिर्द घूमता है। कहानी की शुरुआत राधा और उसकी बहन रानी के &#8216;कित-कित&#8217; (स्टापू) खेलने से होती है। राधा रानी को खेल के नियम समझाती है, तभी उनकी चाची वहाँ आती हैं।</p>
<p>बच्चों को खेलते देख चाची को अपना बचपन याद आ जाता है और वे बताती हैं कि कैसे वे बचपन में कबड्डी, पिट्टू और छुपा-छुपी जैसे अनेक खेल खेलती थीं। वे बच्चों को बताती हैं कि आजकल के बच्चे टीवी और मोबाइल में व्यस्त रहने के कारण बाहर खेलने का समय नहीं निकाल पाते। तभी अचानक बारिश शुरू हो जाती है और सभी बच्चे चाची के घर के अंदर चले जाते हैं।</p>
<p>घर के भीतर वे देखते हैं कि चाचा और बुआ शतरंज खेल रहे हैं। चाची बच्चों के साथ मिलकर पुराने कपड़ों से गुड़िया बनाती हैं और बच्चे लूडो व कैरम जैसे खेलों का आनंद लेते हैं। यह पाठ हमें विभिन्न प्रकार के खेलों, उनके नियमों और सामाजिक जुड़ाव के महत्व के बारे में जानकारी देता है।</p>
<p>अंत में अभ्यास के माध्यम से बच्चों को खेलों के नाम, उनके खिलाड़ियों की संख्या और आवश्यक सामग्री के बारे में सोचने के लिए प्रेरित किया गया है।</p>
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		<pubDate>Sun, 24 Jul 2022 08:50:14 +0000</pubDate>
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<h3>❤️ 1. This is The Way</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1z1fw1DoNVap0wbz-_J7CcG74GLvmlZC7" /><br />
&#8216;ब्लॉसम पार्ट &#8211; III&#8217; नामक यह पुस्तक एक शैक्षिक संसाधन है, जो मुख्य रूप से अंग्रेजी में लिखी गई है और छोटे बच्चों को व्यक्तिगत स्वच्छता व स्वस्थ दैनिक आदतों के बारे में सिखाने के लिए बनाई गई है। यह &#8216;दिस इज द वे&#8217; नामक एक कविता से शुरू होती है, जो दोहराव और तालबद्ध पंक्तियों का इस्तेमाल करके सुबह के नियमित काम जैसे चेहरा धोना और दांत साफ करना दिखाती है। इसमें एक शब्दावली भी शामिल है जो मुख्य अंग्रेजी शब्दों जैसे &#8216;वे&#8217; (रास्ता), &#8216;फेस&#8217; (चेहरा) और &#8216;वॉश&#8217; (धोना) के हिंदी अर्थ देती है, ताकि द्विभाषी समझ आसान हो। &#8216;सोचो और बताओ&#8217; और &#8216;सोचो और लिखो&#8217; जैसे इंटरैक्टिव हिस्से छात्रों को सुबह की दिनचर्या पर सवालों के जवाब देने और &#8216;दातुन&#8217; या &#8216;टूथ-ब्रश&#8217; जैसी चीजों को पहचानने के जरिए पाठ से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। इसके अलावा, पुस्तक में मिलान वाले अभ्यास, रिक्त स्थान भरने की गतिविधियाँ और उच्चारण गाइड भी हैं जो छात्रों को उनके व्याकरण और शब्दावली का अभ्यास करने में मदद करते हैं। रचनात्मक कार्य बच्चों को बालों में कंघी करने या कपड़े पहनने जैसी अन्य गतिविधियों के लिए कविता के पैटर्न का पालन करते हुए अपनी खुद की पंक्तियाँ लिखने के लिए आमंत्रित करते हैं, जिससे भाषा कौशल और अच्छी आदतों के प्रति जागरूकता दोनों को बढ़ावा मिलता है।</p>
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<h3>❤️ 2. Murli&#8217;s Mango Tree</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1cd73ChooDesrT4n9DvdkPFelWcmebj0I" /><br />
यह पुस्तक एक प्राथमिक विद्यालय की अंग्रेजी की पाठ्यपुस्तक है, जिसका नाम &#8216;ब्लॉसम पार्ट &#8211; III&#8217; है। दूसरा अध्याय, &#8216;मुरली&#8217;ज़ मैंगो ट्री&#8217;, मुरली नाम के एक व्यक्ति की साधारण कहानी बताता है जो एक आम खाता है और उसका बीज अपने घर के पीछे फेंक देता है। समय के साथ, वह बीज एक छोटे पौधे में और फिर एक बड़े आम के पेड़ में बदल जाता है क्योंकि मुरली हर दिन उसे पानी देता है। हर गर्मी में पेड़ बहुत सारे आम देता है, जिनका मुरली और उसके दोस्त आनंद लेते हैं। जब मुरली बूढ़ा हो जाता है, तब भी पेड़ उसके बच्चों के खाने के लिए फल देता रहता है। पुस्तक में छात्रों को जोड़ने के लिए एक &#8216;वॉर्मर&#8217; सेक्शन, नए शब्दावली शब्दों जैसे &#8216;बीज&#8217;, &#8216;पीछे&#8217;, और &#8216;पौधा&#8217; के लिए शब्दकोश, और &#8216;सोचो और बताओ&#8217; व &#8216;सोचो और लिखो&#8217; जैसे विभिन्न अभ्यास शामिल हैं। इसमें फलों की तस्वीरों को उनके नामों से मिलाने और साधारण अंग्रेजी प्रश्नोत्तर का अभ्यास कराने वाली गतिविधियाँ भी हैं। यह सामग्री प्रकृति और फलों से जुड़ी कहानी कहने और इंटरैक्टिव कार्यों के माध्यम से बुनियादी अंग्रेजी सिखाने के लिए बनाई गई है।</p>
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<h3>❤️ 3. One Little Kitten</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1RtWXTWtLktFF9YAyNpnuR-B8Oomogy6Y" /><br />
&#8216;ब्लॉसम पार्ट &#8211; III&#8217; नामक यह पुस्तक &#8216;वन लिटिल किटन&#8217; नामक एक मनोरंजक कविता पेश करती है जो शुरुआती सीखने वालों के लिए बनाई गई है। यह बच्चों को एक से पंद्रह तक की संख्यात्मक अवधारणाओं और विभिन्न जानवरों से परिचित कराने के लिए एक शैक्षिक उपकरण के रूप में काम करती है। कविता में व्यवस्थित रूप से विभिन्न प्राणियों की सूची दी गई है, जैसे &#8216;एक छोटा बिल्ली का बच्चा&#8217;, &#8216;दो बड़ी बिल्लियाँ&#8217;, &#8216;तीन बच्चे तितलियाँ&#8217;, और आगे चलकर &#8216;पंद्रह चिंपैंजी&#8217; तक। प्रत्येक जानवर को &#8216;दुखी सील&#8217;, &#8216;मूर्ख मगरमच्छ&#8217;, &#8216;घबरायी हुई छिपकलियाँ&#8217;, और &#8216;बदबूदार हाथी&#8217; जैसे वर्णनात्मक विशेषणों के साथ जोड़ा गया है ताकि शब्दावली और भावनात्मक पहचान को बढ़ाया जा सके। कविता के अलावा, पुस्तक में समझ बढ़ाने के लिए हिंदी अनुवाद वाला एक शब्दकोश भी शामिल है, जैसे &#8216;मूर्ख&#8217; के लिए &#8216;बेवकूफ&#8217; और &#8216;घबराया हुआ&#8217; के लिए &#8216;घबराना&#8217;। इसमें इंटरैक्टिव अभ्यास भी दिए गए हैं जिनमें समझ से जुड़े प्रश्न, मिलान वाली गतिविधियाँ, वर्तनी सुधार, और &#8216;बिल्लियाँ/चमगादड़&#8217; और &#8216;बड़ा/सुअर&#8217; जैसे तुकांत शब्दों के साथ ध्वन्यात्मक अभ्यास शामिल हैं। ये गतिविधियाँ युवा छात्रों में पढ़ने, सोचने और भाषाई कौशल विकसित करने के लिए बनाई गई हैं, साथ ही उन्हें मजेदार जानवरों के तथ्यों और चित्रों के साथ जोड़े रखती हैं।</p>
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<h3>❤️ 4. Who&#8217;s Afraid Of The Cat?</h3>
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&#8216;ब्लॉसम पार्ट &#8211; III&#8217; से &#8216;हू&#8217;ज़ एफ्रेड ऑफ द कैट?&#8217; नामक यह पुस्तक अध्याय चूहों और बिल्ली के बीच की बातचीत पर केंद्रित एक मनोरंजक और शैक्षिक कहानी पेश करता है। यह एक &#8216;वॉर्मर&#8217; सेक्शन से शुरू होता है जो बच्चों को खतरनाक जानवरों से अपने डर और प्रतिक्रियाओं पर सोचने के लिए प्रोत्साहित करता है। कहानी चूहों के एक समूह का अनुसरण करती है जो शुरू में डर जाते हैं और जान बचाने के लिए भागते हैं जैसे ही एक बिल्ली पास आती है। एक चूहा बहादुरी दिखाने की कोशिश करता है और चूहों और बिल्ली के बीच शारीरिक समानताएं जैसे पूंछ और मूंछें बताता है, यह सवाल करते हुए कि उन्हें डर क्यों लगना चाहिए। हालांकि, यह दिखावा तुरंत गायब हो जाता है जब बिल्ली और करीब आती है और चूहों को एहसास होता है कि वे बिल्ली के तेज पंजों के बारे में भूल गए थे। यह हास्यपूर्ण मुठभेड़ जानवरों और शरीर रचना से संबंधित शब्दावली सिखाने के लिए एक उपकरण का काम करती है। पाठ में हिंदी अनुवाद वाला एक शब्दकोश, समझ से जुड़े प्रश्न, और शब्द खोज व व्याकरण अभ्यास जैसी विभिन्न गतिविधियाँ शामिल हैं जो &#8216;a&#8217; और &#8216;the&#8217; जैसे articles पर केंद्रित हैं। इसमें &#8216;चूहा बिल्ली&#8217; नामक एक पारंपरिक खेल खेलने के लिए एक गाइड भी दी गई है, जो छात्रों के बीच इंटरैक्टिव सीखने और समूह कार्य को बढ़ावा देती है और कहानी के विषय को मजबूत करती है।</p>
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<h3>❤️ 5. The Old Rabbit</h3>
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&#8216;द ओल्ड रैबिट&#8217; नामक यह पुस्तक युवा सीखने वालों के लिए बनाई गई एक कथा का अनुसरण करती है, जो मुख्य रूप से &#8216;ब्लॉसम पार्ट &#8211; III&#8217; श्रृंखला में पाई जाती है। यह जंगल में रहने वाले एक बूढ़े खरगोश की कहानी बताती है जो एक शिकारी लोमड़ी का सामना करता है। जब लोमड़ी उसे खाने की धमकी देती है, तो खरगोश घबराने के बजाय अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करता है। वह अपनी किस्मत स्वीकार करने का नाटक करता है लेकिन एक आखिरी इच्छा जताता है: घर जाकर अपनी पत्नी को अलविदा कहने की। लोमड़ी, इस अनुरोध पर विश्वास करते हुए, खरगोश के साथ उसके बिल तक चली जाती है। एक बार जब खरगोश अपने घर की सुरक्षा में प्रवेश कर जाता है, तो वह वापस नहीं आता, जिससे लोमड़ी बाहर व्यर्थ इंतजार करती रह जाती है। यह कहानी यह सिखाती है कि कैसे चतुराईपूर्ण सोच खतरनाक स्थितियों से निपटने में मदद कर सकती है। कहानी के अलावा, पाठ में शैक्षिक विशेषताएं जैसे हिंदी अनुवाद वाला शब्दकोश, मौखिक और लिखित समझ के प्रश्न, और व्याकरण अभ्यास शामिल हैं। ये गतिविधियाँ शब्दावली निर्माण, वाक्यों को फिर से लिखने, और सामाजिक कौशल जैसे माफी मांगना या जानकारी मांगना सीखने पर केंद्रित हैं, जिससे यह द्विभाषी संदर्भ में प्राथमिक अंग्रेजी भाषा सीखने के लिए एक व्यापक उपकरण बन जाती है।</p>
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<h3>❤️ 6. Upside Down</h3>
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&#8216;ब्लॉसम पार्ट &#8211; III&#8217; पुस्तक से &#8216;अपसाइड डाउन&#8217; नामक यह कविता छोटे जीवों जैसे भृंगों की उस आकर्षक क्षमता की खोज करती है कि वे आसानी से छतों पर चल सकते हैं और दीवारों पर चढ़ सकते हैं। वक्ता इस बात पर हैरानी जताता है कि ये जानवर उतनी ही आसानी से उल्टे चल सकते हैं जितनी आसानी से वे सीधे चलते हैं, और यह सब किसी अभ्यास या कठिनाई के बिना। इसके विपरीत, मानव वक्ता एक साल से भी अधिक समय तक अपने सिर के बल खड़े होने की कोशिश करने के बाद निराशा व्यक्त करता है। यह सरल लेकिन मनोरंजक कविता कीड़े-मकोड़ों की मनुष्यों की तुलना में प्राकृतिक शारीरिक बढ़त को उजागर करती है। पाठ में &#8216;भृंग&#8217;, &#8216;रेंगना&#8217;, और &#8216;छत&#8217; जैसे अंग्रेजी शब्दों के हिंदी अनुवाद वाला एक शब्दकोश शामिल है, साथ ही छात्रों को कविता के विषयों को समझने में मदद करने के लिए अभ्यास भी दिए गए हैं। इसमें &#8216;ing&#8217; प्रत्यय के उपयोग पर केंद्रित व्याकरण के पाठ और युवा सीखने वालों को जोड़ने के लिए इंटरैक्टिव पहेलियाँ भी हैं। कुल मिलाकर, यह अध्याय जानवरों की चाल-ढाल और बुनियादी अंग्रेजी भाषा कौशल सिखाने के लिए एक हल्के-फुल्के अंदाज का इस्तेमाल करता है।</p>
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<h3>❤️ 7. The Tiger and The Mosquito</h3>
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&#8216;ब्लॉसम पार्ट &#8211; III&#8217; पुस्तक से &#8216;द टाइगर एंड द मॉस्किटो&#8217; नामक यह कहानी यह दर्शाती है कि हर प्राणी का अपना एक विशेष महत्व होता है और घमंड का परिणाम अक्सर अपमानजनक होता है। कथा की शुरुआत एक बाघ से होती है जो एक पेड़ के नीचे ऊँघ रहा होता है जब एक भिनभिनाता हुआ मच्छर उसे परेशान करता है। मच्छर के वहां से जाने से इनकार करने पर गुस्साए बाघ ने उसे अपने पंजे से मारने की कोशिश की। हालांकि, हर बार जब वह प्रहार करता, तो फुर्तीला मच्छर उड़ जाता, जिससे बाघ अपने ही गाल पर वार करके खुद को चोट पहुंचा लेता। खुद को बार-बार चोट पहुँचाने के बाद जबकि मच्छर बिना किसी नुकसान के भिनभिनाता रहता है, आखिरकार बाघ हार मान लेता है और लाचारी की हालत में चुपचाप चला जाता है। जाते समय, मच्छर एक महत्वपूर्ण सबक देता है: &#8216;इतना घमंडी मत बनो, मेरे दोस्त। हर कोई अपने तरीके से महान होता है&#8217;। यह पाठ एक शैक्षिक उपकरण के रूप में काम करता है, जिसमें &#8216;ऊँघना&#8217;, &#8216;मच्छर&#8217;, और &#8216;घमंडी&#8217; जैसे शब्दों के लिए शब्दकोश, साथ ही समझ से जुड़े प्रश्न और जानवरों के परिवारों व एकवचन/बहुवचन संज्ञाओं से संबंधित व्याकरण अभ्यास शामिल हैं ताकि छात्र नैतिक शिक्षा और भाषा को समझ सकें।</p>
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<h3>❤️ 8. Kith- Kith</h3>
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यह पाठ &#8216;ब्लॉसम पार्ट &#8211; III&#8217; नामक एक पुस्तक का अंश है, जो विशेष रूप से &#8216;किथ-किथ&#8217; नामक एक अध्याय पर केंद्रित है। कहानी स्कूल के लंच आवर के दौरान की है जब कक्षा तीन की लड़कियां किथ-किथ नामक एक खेल खेलने का फैसला करती हैं। कथा में बताया गया है कि कैसे वे खेल के मैदान में एक छह-खानों वाला कोर्ट बनाकर खेल की तैयारी करती हैं। यह ज्योति और खुशबू जैसी छात्राओं के खेल का अनुसरण करती है, और कोर्स में कूदने और मार्कर वाले खाने को छोड़ने जैसे नियम समझाती है। एक शिक्षक, कुनाल सर, खेल के मैदान में आते हैं और समझाते हैं कि यह खेल दुनिया भर में लोकप्रिय है और &#8216;इस्टापू&#8217; या &#8216;हॉपस्कॉच&#8217; जैसे विभिन्न नामों से जाना जाता है। अध्याय लंच ब्रेक के अंत के साथ समाप्त होता है। इसके अतिरिक्त, पाठ में शैक्षिक घटक शामिल हैं जैसे &#8216;सहमत हुई&#8217;, &#8216;लोकप्रिय&#8217;, और &#8216;अचानक&#8217; जैसे शब्दों के लिए द्विभाषी (अंग्रेजी-हिंदी) शब्दकोश। इसमें समझ से जुड़े प्रश्न और व्याकरण अभ्यास भी दिए गए हैं, जैसे वाक्यों को प्रश्नों में बदलना और &#8216;There is&#8217; और &#8216;There are&#8217; का उपयोग करने का अभ्यास, जो प्राथमिक विद्यालय के छात्रों के अंग्रेजी भाषा कौशल को बढ़ाने के उद्देश्य से हैं।</p>
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<h3>❤️ 9. Cats</h3>
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ब्लॉसम पार्ट &#8211; III नामक यह पुस्तक एक शैक्षिक प्राथमिक पाठ्यपुस्तक है जिसमें पृष्ठ 48 पर &#8216;कैट्स&#8217; नामक कविता शामिल है। कविता बताती है कि बिल्लियाँ कहीं भी सो सकती हैं, चाहे वह मेज हो, कुर्सी हो, खुले दराज में हो, खाली जूते में हो, या यहाँ तक कि किसी की गोद में भी हो। वे कार्डबोर्ड के बॉक्स में या फ्रॉक वाली अलमारी में भी आराम से फिट हो जाती हैं, जो उनकी अनुकूलनीय प्रकृति को दर्शाता है। पाठ में अंग्रेजी शब्दों जैसे &#8216;दराज&#8217;, &#8216;खाली&#8217;, &#8216;गोद&#8217;, और &#8216;अलमारी&#8217; के हिंदी अनुवाद वाला एक शब्दकोश शामिल है। इसमें &#8216;सोचो और बताओ&#8217; जैसे प्रश्न, तुकांत शब्दों (सोना/छलांग, मेज/तार) के लिए ध्वन्यात्मक अभ्यास, और विलोम व पूर्वसर्ग से जुड़े व्याकरण कार्य जैसी समझ की गतिविधियाँ भी शामिल हैं। इसके अलावा, पुस्तक में युवा सीखने वालों को जोड़ने के लिए &#8216;पुसी कैट, पुसी कैट&#8217; जैसी क्लासिक नर्सरी राइम्स भी शामिल हैं। सामग्री घरेलू जानवरों और उनकी आदतों के बारे में सरल, सुगम्य विषयों के माध्यम से शब्दावली, पढ़ने की सहजता और स्थानिक संबंधों की बुनियादी समझ को बेहतर बनाने के लिए बनाई गई है।</p>
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<h3>❤️ 10. I Can Dance</h3>
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&#8216;आई कैन डांस&#8217; नामक पुस्तक अध्याय रानी की प्रेरक कहानी बताता है, जो अपने स्कूल के वार्षिक कार्यक्रम के लिए लोक नृत्य &#8216;जट-जटिन&#8217; सीखने के लिए संघर्ष कर रही एक युवा छात्रा है। निराश और रोते हुए, रानी लगभग हार मान लेती है जब तक कि उसकी शिक्षिका, नैना मैडम, सुधा चंद्रन की कहानी नहीं सुनातीं। सुधा एक प्रसिद्ध नृत्यांगना हैं जिन्होंने एक दुर्घटना में अपना दायाँ पैर खो दिया था, लेकिन एक कृत्रिम रबर के पैर का इस्तेमाल करके नृत्य सीखने का जबरदस्त साहस दिखाया। लगन और कड़ी मेहनत की इस कहानी ने रानी को प्रेरित किया, जिसने अपने आँसू पोंछे और अपनी क्षमताओं में नए विश्वास के साथ अपना अभ्यास फिर से शुरू किया। पाठ में शैक्षिक अभ्यास भी शामिल हैं जैसे &#8216;वार्षिक कार्यक्रम&#8217; और &#8216;कृत्रिम&#8217; जैसे शब्दों का शब्दकोश, सुधा चंद्रन की यात्रा के बारे में समझ के प्रश्न, और वाक्यों को प्रश्नों में बदलने जैसे व्याकरण कार्य। इसके अलावा, इसमें दोस्तों और बाल दिवस के बारे में रचनात्मक लेखन प्रोत्साहक, साथ ही हल्के-फुल्के भूमिका नाटक वाले चुटकुले शामिल हैं, जो सभी तीसरी कक्षा के छात्रों के लिए सीखने के अनुभव को बढ़ाने के लिए बनाए गए हैं।</p>
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<h3>❤️ 11. Unity Is Strength</h3>
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&#8216;एकता में बल है&#8217; नामक यह कहानी एक बूढ़े किसान और उसके चार बेटों के इर्द-गिर्द घूमती है जो लगातार आपस में झगड़ते रहते थे, जिससे किसान को बहुत दुख होता था। उनके बीच शांति लाने के कई प्रयासों के बावजूद, कुछ भी काम नहीं आया जब तक कि उसने एक व्यावहारिक योजना नहीं बनाई। उसने अपने बेटों से लकड़ियाँ लाने के लिए कहा और उन्हें उन लकड़ियों के एक बंडल को तोड़ने की चुनौती दी। हर बेटे ने अलग-अलग कोशिश की, लेकिन कोई भी बंडल नहीं तोड़ सका। फिर किसान ने बंडल खोल दिया और हर बेटे को एक अलग लकड़ी दी, जिसे उन्होंने आसानी से तोड़ दिया। इस साधारण प्रदर्शन के माध्यम से, किसान ने अपने बेटों को एक महत्वपूर्ण सबक सिखाया: जब तक वे लकड़ियों के बंडल की तरह एकजुट रहेंगे, कोई भी उन्ह नुकसान नहीं पहुंचा सकता, लेकिन अगर वे अलग-थलग और अकेले होंगे, तो वे आसानी से टूट जाएंगे। पाठ इस बात पर जोर देता है कि &#8216;एकता में बल है&#8217; और इसे &#8216;ब्लॉसम पार्ट &#8211; III&#8217; पुस्तक में एक पाठ के रूप में पेश किया गया है, जिसमें &#8216;झगड़ा&#8217;, &#8216;गठरी&#8217;, और &#8216;शांतिपूर्वक&#8217; जैसी शब्दावली के साथ-साथ समझ के अभ्यास भी शामिल हैं ताकि छात्रों को मिलकर काम करने के महत्व को समझने में मदद मिल सके। यह कहानी किसी परिवार या समूह के भीतर सहयोग और सद्भाव के महत्व पर एक सार्वकालिक नैतिक मार्गदर्शिका के रूप में काम करती है।</p>
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<h3>❤️ 12. A Picnic</h3>
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&#8216;ब्लॉसम पार्ट &#8211; III&#8217; नामक यह पुस्तक युवा सीखने वालों के लिए बनाई गई एक अंग्रेजी शैक्षिक पाठ्यपुस्तक है। यह विशेष खंड, &#8216;ए पिकनिक&#8217; शीर्षक वाला, सलमा नाम की एक छात्रा द्वारा अपने दोस्त अनवर को लिखे गए एक पत्र पर केंद्रित है। पत्र में, सलमा बिहार शरीफ के ककोलत झरने पर हाल ही में हुए स्कूल पिकनिक का वर्णन करती है। वह यात्रा के बारे में विवरण साझा करती है, जिसमें बस में गाने गाना, झरने में नहाना, और आसपास के जंगल व चट्टानों का पता लगाना शामिल है। सलमा मोर का पंख और चमकदार पत्थर जैसे खजाने मिलने पर प्रकाश डालती है, जिन्हें वह अनवर के आने पर दिखाने का वादा करती है। पाठ को विभिन्न अभ्यासों के माध्यम से अंग्रेजी प्रवीणता में सुधार करने के लिए संरचित किया गया है, जिसमें छात्रों को &#8216;आसपास का क्षेत्र&#8217;, &#8216;पंख&#8217;, और &#8216;चमकदार&#8217; जैसे शब्दों को समझने में मदद करने के लिए एक द्विभाषी शब्दकोश (अंग्रेजी से हिंदी) शामिल है। इसमें कहानी की समझ को परखने के लिए मौखिक और लिखित समझ के प्रश्न भी शामिल हैं। इसके अलावा, पुस्तक में भाषा अभ्यास शामिल हैं जो संयुक्त शब्दों (जैसे &#8216;वॉटरफॉल&#8217;, &#8216;नोटबुक&#8217;) पर ध्यान केंद्रित करते हैं, संकुचन के पूर्ण रूपों की पहचान करते हैं, और क्रिया काल व तुकांत शब्दों का अभ्यास कराते हैं।</p>
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<h3>❤️ 13. Mice</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1JtFDoRV4Uz95lkkIDM9YvVaNsla1G307" /><br />
&#8216;माइस&#8217; नामक यह पुस्तक &#8216;ब्लॉसम पार्ट &#8211; III&#8217; से बच्चों की एक शैक्षिक कविता और अभ्यास संग्रह है। मुख्य कविता एक अनोखा दृष्टिकोण व्यक्त करती है कि चूहे &#8216;बल्कि अच्छे होते हैं&#8217;, जो लोगों में उनके प्रति आम नापसंदगी के विपरीत है। यह चूहों की शारीरिक विशेषताओं का वर्णन करती है, जैसे उनकी लंबी पूंछ, छोटे चेहरे, ठुड्डी का अभाव, गुलाबी कान और सफेद दांत। कविता उनके व्यवहार का भी उल्लेख करती है, यह बताते हुए कि वे रात में घरों के आसपास दौड़ते हैं और उन चीजों को कुतरते हैं जिन्हें वे छूना नहीं चाहिए। इन आदतों के बावजूद, कवि इन प्राणियों के प्रति अपनी पसंद को दोहराता है। कविता के बाद, पाठ में अंग्रेजी शब्दों जैसे &#8216;ठुड्डियाँ&#8217;, &#8216;कुतरना&#8217;, &#8216;प्रतीत होता है&#8217;, &#8216;चूहे&#8217;, &#8216;अच्छा&#8217;, &#8216;पूंछ&#8217;, और &#8216;गुलाबी&#8217; के हिंदी अनुवाद वाला एक शब्दकोश शामिल है। यह आगे समझ के प्रश्न और गतिविधियाँ प्रदान करता है, जैसे &#8216;सोचो और बताओ&#8217; और &#8216;सोचो और लिखो&#8217;, जो छात्रों से रात में चूहों की गतिविधियों और कवि के रवैये के बारे में पूछते हैं। इसमें शब्दावली अभ्यास भी हैं जो विलोम (जैसे काला/सफेद, दिन/रात) और भैंस, हाथी और गाय जैसे जानवरों के लिए वर्णनात्मक विशेषणों पर केंद्रित हैं, जो युवा सीखने वालों के लिए भाषाई कौशल में सुधार करने के उद्देश्य से हैं।</p>
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<h3>❤️ 14 . Now The Road Will Be Fine</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1_nXjEuledHx44xuumsKnS-EOPbRkLtzH" /><br />
&#8216;ब्लॉसम पार्ट &#8211; III&#8217; नामक यह पुस्तक युवा सीखने वालों के लिए बनाई गई एक शैक्षिक अंग्रेजी पाठ्यपुस्तक है। एक प्रस्तुत अध्याय, &#8216;नाउ द रोड विल बी फाइन&#8217;, बित्तू नाम के एक लड़के की कहानी बताता है जो स्कूल जाते समय सड़क निर्माण की प्रक्रिया देखता है। कथा दृश्य के विभिन्न तत्वों का वर्णन करती है, जिसमें कर्मचारियों का झाड़ू लगाना, सीमेंट उतारना, और रेत और पत्थर के चिप्स को मिलाने के लिए मिक्सर का उपयोग करना शामिल है। बित्तु विशेष रूप से एक बड़े रोड रोलर से मोहित हो जाता है जो जमीन को चिकना और समतल बना रहा होता है, यहाँ तक कि उसे चलाने की इच्छा भी व्यक्त करता है। पाठ को हिंदी अर्थों वाले शब्दकोश, समझ के प्रश्नों और परिवहन व वर्तनी से संबंधित शब्दावली अभ्यास के माध्यम से सीखने की सुविधा प्रदान करने के लिए संरचित किया गया है। इसमें सड़क संकेतों और &#8216;in&#8217; और &#8216;on&#8217; जैसे पूर्वसर्गों की पहचान जैसी व्यावहारिक गतिविधियाँ भी शामिल हैं। इसके अलावा, पुस्तक में छात्रों को पाठ और क्रिया के माध्यम से जोड़ने के लिए एक बस के बारे में तालबद्ध कविता शामिल है। कुल मिलाकर, पुस्तक का उद्देश्य छात्रों को उनके आसपास के वातावरण और परिवहन की दुनिया के बारे में सिखाते हुए उनकी अंग्रेजी साक्षरता में सुधार करना है।</p>
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<h3>❤️ 15. The Phone Call</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1dVArJlX0t6ZtWgjuUrZaKMoeyEFOjvQi" /><br />
&#8216;ब्लॉसम पार्ट &#8211; III&#8217; नामक यह पुस्तक एक शैक्षिक पाठ्यपुस्तक है जो युवा सीखने वालों के लिए बनाई गई है, मुख्य रूप से सुगम्य परिदृश्यों के माध्यम से अंग्रेजी भाषा कौशल पर केंद्रित है। एक प्रस्तुत पाठ, &#8216;द फोन कॉल&#8217;, पिंकी नाम की एक छात्रा और उसके भाई के दोस्त पंकज के बीच एक सामान्य बातचीत को दर्शाता है। कहानी शुरू होती है जब पिंकी अपना होमवर्क कर रही होती है और उसे एक अज्ञात नंबर से कॉल आती है। पंकज सोनू से बात करना चाहता है, लेकिन पिंकी उसे बताती है कि सोनू बाजार गया हुआ है। पंकज फिर पिंकी से एक महत्वपूर्ण संदेश पहुंचाने का अनुरोध करता है: सोनू को अगले दिन स्कूल में मैच के लिए अपनी क्रिकेट बैट लानी है। पिंकी विनम्रतापूर्वक संदेश पहुंचाने के लिए सहमत हो जाती है। अध्याय में शब्दावली बनाने के लिए &#8216;होमवर्क&#8217;, &#8216;पहुंचाना&#8217;, और &#8216;संदेश&#8217; जैसे शब्दों का एक शब्दकोश शामिल है, साथ ही विभिन्न अभ्यास जैसे मौखिक प्रश्न, सही या गलत बयान, और संकुचित रूपों (जैसे &#8216;I am&#8217; से &#8216;I&#8217;m&#8217;) का अभ्यास शामिल है। यह स्थितिगत संवाद अभ्यास भी प्रदान करता है ताकि छात्रों को सीखने में मदद मिल सके कि अनुमति कैसे मांगी जाए या दूसरों का धन्यवाद कैसे किया जाए, जिससे यह अंग्रेजी में बुनियादी संचार कौशल विकसित करने के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका बन जाती है।</p>
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<h3>❤️ 16. Munia Goes To School</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1FNKQfKwI_qKrTPZ7RIIXxbCHRLLWBy3B" /><br />
&#8216;ब्लॉसम पार्ट &#8211; III&#8217; नामक यह पुस्तक &#8216;मुनिया गोज टू स्कूल&#8217; नामक एक अध्याय पेश करती है जो नौ साल की लड़की मुनिया की कहानी बताता है जो रामपुर के मिडिल स्कूल में प्रवेश लेने के लिए आवेदन करती है। अपने पिता, श्याम कुमार के साथ, मुनिया नामांकन प्रक्रिया पूरी करने के लिए हेडमास्टर के कार्यालय में जाती है। बातचीत के दौरान, हेडमास्टर मुनिया से कई व्यक्तिगत प्रश्न पूछते हैं, जिनमें उसका पूरा नाम, उसके माता-पिता के नाम और उसकी उम्र शामिल हैं। मुनिया बताती है कि वह पहले अपनी दादी के साथ रहते हुए बेलापुर के प्राथमिक विद्यालय में पढ़ती थी लेकिन अब वह अपने माता-पिता के साथ रहने के लिए रामपुर चली आई है। उसके पिता आवश्यक स्थानांतरण प्रमाण पत्र और प्रगति रिपोर्ट प्रदान करते हैं, जिससे वह कक्षा तीन में सफलतापूर्वक प्रवेश पा जाती है। पाठ में शैक्षिक अभ्यास भी शामिल हैं जैसे &#8216;खुश&#8217; और &#8216;प्रगति&#8217; जैसे शब्दों का हिंदी अनुवाद के साथ शब्दकोश, कहानी के बारे में समझ के प्रश्न, और छात्रों के लिए व्यक्तिगत विवरण प्रदान करने और अपना परिचय देने का अभ्यास कराने वाली गतिविधियाँ। मुख्य ध्यान बुनियादी अंग्रेजी संचार कौशल और छात्रों को स्कूल से संबंधित प्रक्रियाओं और शब्दावली से परिचित कराने पर है।</p>
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<h3>❤️ 17. Gonu And Bhonu</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1Ev_T3l8fqdKiX4JA-J8YXYBFj35Pd01s" /><br />
मैथिली लोक कथा पर आधारित &#8216;गोनू और भोनू&#8217; की कहानी उनकी संयुक्त संपत्ति, विशेष रूप से एक भैंस और एक कंबल के बंटवारे को लेकर दो भाइयों के बीच के विवाद को दर्शाती है। शुरुआत में, पंचायत तय करती है कि गोनू कंबल का इस्तेमाल दिन में करेगा और भोनू रात में। भैंस के लिए, गोनू को आगे का हिस्सा (मुंह वाला) और भोनू को पीछे का हिस्सा (पूंछ वाला) सौंपा जाता है। हालांकि, यह व्यवस्था अनुचित साबित होती है क्योंकि गोनू को भैंस को खिलाना पड़ता है जबकि भोनू को सारा दूध मिलता है, और गोनू दिन में कांपता रहता है जबकि भोनू रात में कंबल का इस्तेमाल करता है। एक ग्रामीण की चतुर सलाह के बाद, गोनू दिन में कंबल को गीला करना और भोनू के दूध निकालते समय भैंस के सिर पर प्रहार करना शुरू कर देता है, अपने &#8216;आधे&#8217; हिस्से पर अधिकार का दावा करते हुए। पहले फैसले की अव्यावहारिकता को पहचानते हुए, सरपंच ने फैसला बदल दिया: दोनों भाइयों को दूध और खिलाने की जिम्मेदारियाँ समान रूप से साझा करनी होंगी, और कंबल को दो अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया जाएगा। यह कहानी दर्शाती है कि कैसे अन्याय को संबोधित करने और पारिवारिक विवादों में अधिक न्यायसंगत समाधान लाने के लिए चतुराई का इस्तेमाल किया जा सकता है।</p>
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		<title>Bihar Board Class 3 Urdu Book 2026 PDF Download</title>
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		<dc:creator><![CDATA[bseb]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 Jul 2022 07:29:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Class 3rd Books]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>Bihar Board Class 3 Urdu Book 2026 PDF Download Bihar Board Class 3 Urdu Book 2026 PDF Download &#8211; इस पेज पर बिहार बोर्ड 3rd के छात्रों के लिए &#8220;Urdu (اردو)&#8221; Book दिया गया है &#124; जिसे आप अपने फ़ोन में Free Download कर सकते हैं &#124; 🌐 सभी विषयों की बुक्स डाउनलोड करने के [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<h2 style="text-align: center;"><span style="text-decoration: underline; color: #ff0000;"><strong>Bihar Board Class 3 Urdu Book 2026 PDF Download</strong></span></h2>
<p><img data-recalc-dims="1" decoding="async" class="aligncenter" src="https://i0.wp.com/biharboardbooks.com/wp-content/uploads/2022/07/bihar_board_books-min.png?ssl=1" /> <span style="text-decoration: underline;">Bihar Board Class 3 Urdu Book 2026 PDF Download</span> &#8211; इस पेज पर बिहार बोर्ड 3rd के छात्रों के लिए &#8220;<span style="text-decoration: underline;"><strong>Urdu (اردو)</strong></span>&#8221; Book दिया गया है | जिसे आप अपने फ़ोन में Free Download कर सकते हैं |</p>
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<p>सभी बुक्स का डाउनलोड लिंक नीचे पेज पर दिया गया है |</p>
<h2 style="text-align: center;"><span style="text-decoration: underline; color: #3366ff;"><strong>BSEB Class 3 Urdu (اردو) Textbook PDF Free Download</strong></span></h2>
<p><span style="font-size: 18pt;"><strong>☞</strong></span> बुक्स डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए डाउनलोड लिंक पर क्लिक करें | <img decoding="async" class="aligncenter" src="https://i0.wp.com/biharboard-ac.in/wp-content/uploads/2022/07/kindpng_6137677-min.png?resize=601%2C111&amp;ssl=1" alt="line" /></p>
<h3>❤️ اپنی بات</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1ViCViC_4ZKqAqxCuIeCYOBDQ_Ccx3I9O" /></p>
<p>यह किताब &#8216;गुलशन-ए-उर्दू&#8217; तीसरी कक्षा के विद्यार्थियों के लिए बिहार एजुकेशन प्रोजेक्ट काउंसिल द्वारा तैयार की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों में उर्दू भाषा के प्रति स्वाभाविक रुचि पैदा करना और उनका नैतिक एवं बौद्धिक विकास करना है। किताब में शामिल पाठ बच्चों की उम्र, मनोविज्ञान और रुचि को ध्यान में रखकर चुने गए हैं। पाठ्यक्रम में हम्द (स्तुति), नज़्में (कविताएँ), कहानियाँ और ज्ञानवर्धक लेख शामिल हैं, जैसे &#8216;ईद&#8217;, &#8216;मीठी सारंगी&#8217;, &#8216;जुगनू&#8217;, और &#8216;कंप्यूटर&#8217;। हर पाठ के अंत में अभ्यास के प्रश्न दिए गए हैं जो बच्चों की वर्तनी, उच्चारण और समझ को बेहतर बनाने में मददगार होते हैं। शिक्षकों को निर्देश दिया गया है कि वे ज़ोर से पढ़ने और कहानियों के नैतिक पहलुओं पर ध्यान दें। यह किताब &#8216;सबके लिए शिक्षा अभियान&#8217; के तहत मुफ्त बाँटने के लिए है और इसकी खरीद-फरोख्त कानूनी अपराध है। कुल मिलाकर यह एक ऐसी व्यापक पाठ्यपुस्तक है जो बच्चों को आसान और मनोरंजक तरीके से उर्दू भाषा के साथ-साथ सामाजिक व नैतिक मूल्यों से भी परिचित कराती है।</p>
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<h3>❤️ سبق 1 : حمد</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1YL5seQ6VK5yq8bTs3MRdMdFhFKBAPdUl" /></p>
<p>यह नज़्म (कविता) अल्लाह तआला की परिभाषा और उसकी महानता बताती है। शायर हफीज़ जालंधरी अल्लाह को दोनों जहानों का मालिक और सभी बगीचों का मालिक बताते हैं। दुनिया की हर चीज़ में अल्लाह की हिकमत (बुद्धिमत्ता) और ताकत ज़ाहिर है। फूलों का रंग हो या बादलों की गरज, ये सब अल्लाह की नेअमत (कृपा) का नतीजा है। शायर कहते हैं कि अल्लाह ने ही इंसान को पैदा किया और उसे सोचने-समझने की सलाहियत (क्षमता) अता की। ब्रह्मांड के कण-कण में अल्लाह के करम (उपकार) का साया नज़र आता है और हर जगह उसके निशान मौजूद हैं। वह सारी मखलूकात (सृष्टि) का खालिक (रचयिता) और मालिक है और सभी इंसान उसके ग़ुलाम हैं। इस नज़म का बुनियादी पैग़ाम यह है कि अल्लाह का नाम बहुत प्यारा है और वही इबादत (पूजा) के लायक़ है। अल्लाह तआला ने कायनात को खूबसूरत बनाया है और इंसानों पर बेशुमार एहसान किए हैं। हमें हमेशा उसकी हम्द (प्रशंसा) और सना (स्तुति) करनी चाहिए क्योंकि वही पूरी कायनात का असली रब और परवरदिगार (पालनहार) है। नज़्म के अशआर सादे मगर असरदार हैं जो अल्लाह की ताक़त की अक्स (छवि) दिखाते हैं।</p>
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<h3>❤️ سبق 2 : نیم (نثر)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1C_qoRlQ4FnNveXrQfRo_-xS--9UmmOEs" /></p>
<p>यह पाठ &#8216;नीम&#8217; के पेड़ के महत्व और उसके तिब्बी (औषधीय) फ़ायदों पर आधारित है। नीम का असली नाम &#8216;नीम्ब&#8217; है, जिसका मतलब होता है बीमारों को दूर करने वाला। यह पेड़ हर जगह आसानी से मिल जाता है और इसका हर हिस्सा इंसानियत के लिए फ़ायदेमंद है। नीम की घनी पत्तियाँ सिर्फ़ साया ही नहीं देतीं, बल्कि इन्हें सुखाकर कपड़ों और किताबों में रखने से कीड़े और दीमक नहीं लगते। इसकी पत्तियों का धुआँ मच्छरों को भगाने के लिए इस्तेमाल होता है, जबकि पत्तियों को पानी में उबालकर नहाने से त्वचा की बीमारियाँ ख़त्म होती हैं। नीम के फूल को &#8216;निबोली&#8217; कहते हैं, जो पेट की बीमारियों के लिए फ़ायदेमंद है और इसकी गुठली से हासिल कर्ड तेल साबुन बनाने और फोड़े-फुंसियों के इलाज में काम आता है। इसके अलावा, नीम की टहनी &#8216;मिसवाक&#8217; के तौर पर दाँतों की मज़बूती और सफ़ाई के लिए बेहतरीन है। पेड़ की छाल और जड़ भी बुखार और दूसरी तकलीफों के इलाज में दवा के तौर पर इस्तेमाल की जाती हैं। संक्षेप में कहें तो नीम एक कुदरती शफ़ाखाना (औषधालय) है जो माहौल को ख़ुशगवार बनाने के साथ-साथ सेहत के लिए भी निहायत ज़रूरी है।</p>
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<h3>❤️ سبق 3 : کویل (نظم)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1BHhkcF7HfyB7EG5clV2-8eCP7z_74S1D" /></p>
<p>यह पाठ एक नज़्म (कविता) है जिसका शीर्षक &#8216;कोयल&#8217; है और इसे हफ़ीज़ अलदीन शौक़ी ने लिखा है। नज़्म में कोयल की खूबसूरती और उसकी सुरीली आवाज़ का परिचय दिया गया है। शायर कहता है कि अगरचे कोयल का रंग काला है, लेकिन उसकी सूरत बहुत भोली-भाली है और वह एक डाली से दूसरी डाली पर उछलती-फाँदती है। कोयल की &#8216;कू कू&#8217; की आवाज़ बहुत निराली और दिलकश है, जो सुनने वालों को एक अजीब सा लुत्फ़ देती है। जब बाग़ का माली कोयल की कूक सुनता है तो वह बहुत ख़ुश होता है। नज़्म में बताया गया है कि कोयल को आमों से बहुत रग़बत (चाव) और आशिक़ी (प्रेम) है, इसलिए वह ज़्यादातर आम के बाग़ों में पाई जाती है। उसकी आवाज़ दिल को तड़पाने वाली और मसरूर (ख़ुश) करने वाली है। नज़्म के आख़िर में कुछ मश्क़ें (अभ्यास) दी गई हैं जिनमें मुश्किल अल्फ़ाज़ के मानी (जैसे रत, लुत्फ़, अजब, रग़बत, आशिक़ी) और सवाल शामिल हैं ताकि तालिबे इल्म (विद्यार्थी) नज़्म की मफ़हूम (अवधारणा) को बेहतर तरीक़े से समझ सकें। इसके अलावा, नज़्म में इस्तेमाल हुए हमआवाज़ अल्फ़ाज़ और कोयल की ख़ासियतों पर भी तवज्जोह (ध्यान) दिलाई गई है।</p>
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<h3>❤️ سبق 4 : عید (نثر)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1cMcHoBGsR5Ehl8VcOkPNdEbptjqydvqD" /></p>
<p>यह पाठ ईद-उल-फ़ित्र के पवित्र त्योहार के बारे में है जो रमज़ान के मुकद्दस महीने के ख़ात्मे पर मनाया जाता है। ईद की तैयारियाँ कई दिन पहले शुरू हो जाती हैं, जिनमें लोग नए कपड़े, जूते और मिठाइयाँ ख़रीदते हैं। ईद के दिन, सब लोग नहा-धोकर नए कपड़े पहनते हैं और इत्र लगाते हैं। मर्द हज़रात ईदगाह जाकर बाजमाअत (सामूहिक) नमाज़ अदा करते हैं और उसके बाद एक-दूसरे से गले मिलकर ईद मुबारकबाद देते हैं। बच्चे इस दिन बहुत ख़ुश होते हैं, ख़ास तौर पर ईदी और तोहफ़े मिलने पर। ईदगाह के बाहर मेला लगता है जहाँ से बच्चे खिलौने ख़रीदते हैं और झूलों का लुत्फ़ उठाते हैं। घरों में ख़ास तौर पर सिवैयाँ और मुख्तलिफ़ क़िस्म के पकवान तैयार किए जाते हैं। यह त्योहार सामाजी हमआہنگی (सद्भाव) की बेहतरीन मिसाल है जहाँ दोस्त-अहबाब, जैसे मोहन और वसीम, एक-दूसरे के घर जाकर ख़ुशियों में शरीक होते हैं। पाठ में ईद-उल-फ़ित्र को &#8216;मीठी ईद&#8217; के नाम से भी पुकारा गया है क्योंकि इस दिन मीठी सिवैयाँ शौक़ से खाई जाती हैं।</p>
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<h3>❤️ سبق 5 : میٹھی سا رنگی (نثر)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1aGLFvS2azpe96apqTS07a6K5-l8XLmYz" /></p>
<p>यह कहानी एक सारंगी वाले और गायों के एक बेवकूफ़ लड़के के इर्द-गिर्द घूमती है। जब सारंगी वाले ने गायों में आकर सारंगी बजाई, तो लोग उसकी मधुर और सुरीली आवाज़ सुनकर दंग रह गए और उसे &#8216;मीठी सारंगी&#8217; कहने लगे। आख़िर ने लफ़्ज़ &#8216;मीठी&#8217; का मतलब लफ़्ज़ी मानो (शाब्दिक अर्थ) में लिया और सोचा कि शायद सारंगी का ज़ाएक़ा (स्वाद) चीनी जैसा मीठा होगा। जब सब सो गए, तो उसने सारंगी चलाई, गायों को चाटा और उनके थनों को मुँह से लगाकर मीठास की तलाश की कोशिश की, मगर उसे कुछ हासिल नहीं हुआ। गुस्से में आकर उसने सारंगी को गायों से बाहर फेंक दिया और लोगों को झूठ समझाने लगा। सुबह जब लोगों ने सारंगी ग़ायब पाई, तो आख़िर ने ग़ुस्से में अपनी नादानी और बेवकूफ़ी का इज़हार किया कि सारंगी बिल्कुल मीठी नहीं थी क्योंकि उसने उसे चाटा था। आख़िर की यह बात सुनकर लोग उसकी नादानी और बेवकूफ़ी पर अपना सर पीटते रह गए। यह कहानी हमें सिखाती है कि फ़न (कला) की मिठास ज़ाएक़े (स्वाद) में नहीं बल्कि एहसास और सुनने में होती है।</p>
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<h3>❤️ سبق 6 : جگنو (نظم)</h3>
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<p>यह नज़्म &#8216;जुगनू&#8217; वफ़ा फ़रख़ आबादी की लिखी हुई है जिसमें उन्होंने एक नन्हे और प्यारे जुगनू की खूबसूरती और उसकी हरकत व सकुनात (गतिविधियाँ) का बहुत खूबसूरती से ज़िक्र किया है। शायर कहता है कि जुगनू रात के अँधेरे में किसी चमकते हुए तारे की मानिंद नज़र आता है जो कभी ऊँचा और कभी नीचा उड़ता हुआ हर तरफ़ अपनी रोशनी बिखेरता है। यह नन्हा सा जानदार कभी घर की छत पर जाता है, कभी सहन (आँगन) में चमकता है और कभी पेड़ पर पहुँचकर बाग़ को अपनी रोशनी से मनोरम कर देता है, जैसे उसने हर तरफ़ नूर की अफ़शाँ (छींटे) छिड़क दी हों। बच्चे उसकी चमक से मुतास्सिर (प्रभावित) होकर उसे ताली बजाकर अपनी तरफ़ मुतवज्जह (ध्यान) कराने की कोशिश करते हैं और उसे पकड़कर अपनी टोपी में छुपा लेते हैं जहाँ वह एक सितारे की तरह टिमटिमाता हुआ नज़र आता है। शायर ने इस नज़्म में जुगनू को कुदरत की एक अनोखी और निराली तख़लीक (रचना) क़रार दिया है जो अपनी छोटी सी जान के साथ रात की तारीकी (अँधेरी) में रोशनी का एक बेहतरीन ज़रिया बनता है। नज़्म के आख़िर में जुगनू की मुख्तलिफ़ हालतें और उसकी चमक को निहायत दिलचस्प अंदाज़ में बयान किया गया है।</p>
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<h3>❤️ سبق 6 (الف) : چھپا ہوا خزانہ (براے مطالعہ)</h3>
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<p>यह कहानी एक बूढ़े किसान और उसके चार आलसी बेटों के बारे में है जो मेहनत करने से जी चुराते थे। जब किसान बूढ़ा हुआ और फ़सल की आमदनी कम हो गई, तो उसने अपने बेटों को नसीहत करने का एक तरीक़ा सोचा। उसने बेटों से कहा कि खेत में एक ख़ज़ाना गड़ा हुआ है, लेकिन उसे हासिल करने की एक निशानी यह है कि पहले ज़मीन में हल चलाकर बीज बोने होंगे। ख़ज़ाने के लालच में चारों बेटों ने खेत में सख़्त मेहनत की और बीज बो दिए। कुछ अरसे बाद जब फ़सल तैयार हुई तो किसान ने उन्हें वह फ़सल काटकर बाज़ार में बेचने को कहा। फ़सल बेचने से जो रकम हासिल हुई, किसान ने बेटों को समझाया कि असल &#8216;ख़ज़ाना&#8217; यही है जो उनकी अपनी मेहनत का नतीजा है। बेटों को मेहनत की अज़मत (महत्ता) का एहसास हुआ और उन्होंने वादा किया कि अब हमेशा जी लगाकर काम करेंगे ताकि यह ख़ज़ाना हर साल हासिल होता रहे। यह पाठ आमोज कहानी हमें सिखाती है कि मेहनत में ही बरकत और असल कामयाबी पोशीदा (छिपी) है। किसान की दानिशमंदी (बुद्धिमत्ता) ने न सिर्फ़ बेटों को काम पर लगाया बल्कि उनकी ज़िंदगी बदल दी।</p>
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<h3>❤️ سبق 7 : تندرستی اور غذا (نثر)</h3>
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<p>यह पाठ तंदुरुस्ती और ग़िज़ा (भोजन) के अहमियत पर रोशनी डालता है। इंसान के लिए ग़िज़ा निहायत ज़रूरी है, जिसमें अनाज, सब्ज़ियाँ, फल, दूध और गोश्त शामिल हैं। ग़िज़ा के दो अहम ज़राए (स्रोत) जानवर और पेड़-पौधे हैं। अनाज से जिस्म और हड्डियों को ताक़त मिलती है, जबकि सब्ज़ियाँ बदन में हरारत (गर्मी) पैदा करती हैं जो हाज़मे (पाचन) में मददगार होती हैं। दूध को एक मुकम्मल और बेहतरीन ग़िज़ा क़रार दिया गया है जो हर उम्र के फ़र्द (व्यक्ति) के लिए मुफ़ीद है। हमारे जिस्म में ग़िज़ा हज़म होकर ख़ून बनती है, इसलिए हमें हमेशा ताज़ा और साफ़ ग़िज़ा का इस्तेमाल करना चाहिए। पाठ में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि ज़रूरत से ज़्यादा खाने से परहेज़ करना चाहिए क्योंकि इससे हाज़मा ख़राब और इंसान बीमार हो जाता है। पानी का ज़िक्र करते हुए बताया गया है कि यह हाज़मे के लिए नाग़ज़ीर (अत्यावश्यक) है, लेकिन हमेशा साफ़ पानी पीना चाहिए। आख़िर में अच्छी सेहत के लिए ख़ुराक के साथ-साथ मुनासिब आराम को भी ज़रूरी क़रार दिया गया है ताकि जिस्म तरो-ताज़ा रह सके।</p>
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<h3>❤️ سبق 8 : گننا (نثر)</h3>
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<p>यह पाठ &#8216;गन्ने&#8217; के बारे में है, जो शक्कर हासिल करने का सबसे बड़ा ज़रीआ (साधन) है। गन्ना कई अक़्साम (प्रकार) का होता है, जिनमें सफ़ेद गन्ना नरम और रसदार होता है जबकि सुर्ख़ और काला गन्ना सख़्त होता है। गन्ने की साख़्त बाँस की तरह होती है जिसमें पोरियाँ और गाँठें होती हैं, और इसके ऊपरी पत्तों को &#8216;अगौला&#8217; कहा जाता है जो जानवरों के चारे के काम आता है। इसकी काश्त के लिए गन्ने के छोटे टुकड़े ज़मीन में दबाए जाते हैं। गन्ने की खेती चैत और बैसाख के महीनों में शुरू होती है और बरसात के पानी से यह तेज़ी से बढ़ता है। फ़सल पकने पर इसे काटकर मिलों में भेजा जाता है जहाँ इसके रस से शक्कर बनाई जाती है। दीहातों (गाँवों) में रस को कड़ाहियों में पकाकर गुड़, राब और खाँड तैयार की जाती है। इसके अलावा गन्ने के रस से सिरका भी बनाया जाता है। पाठ के आख़िर में मश्क़ी सवालात और अल्फ़ाज़ के मानी भी दिए गए हैं।</p>
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<h3>❤️ سبق 9 : بچوں کا گیت (نظم)</h3>
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<p>यह पाठ एक नज़्म &#8216;बच्चों का गीत&#8217; पर मबनी (आधारित) है जिसमें बच्चों को भारत के राज-दुलारे और आँखों के तारे क़रार दिया गया है। शायर राम किशन मुअत्तर के मुताबिक़ बच्चे मुल्क की माया, दौलत और दिल की राहत हैं। नज़्म में बयान किया गया है कि बच्चों की मौजूदगी से ही मैले, डंगल और वीरान मक़ामात (जंगल में मंगल) में चहल-पहल और रौनक़ होती है। बच्चे मुल्क की हर चीज़ बशमूल (गिन) भरते हैं, खेतों और नज़ारों से मुहब्बत का इज़हार करते हैं और मुल्क की ज़िम्मेदारी (बोझ) उठाने और उसकी शान बढ़ाने का अज़्म रखते हैं। मश्क़ी हिस्से में बच्चों से सवाल पूछे गए हैं ताकि वे नज़्म की मफ़हूम को समझ सकें, जैसे शायर ने उन्हें राज-दुलारे क्यों कहा और वे मुल्क के लिए क्या करने को तैयार हैं। इसके अलावा ग्रामर की मश्क़ें जैसे जुमला साज़ी, हमआवाज़ अल्फ़ाज़ की तलाश और हरूफ़ से नए अल्फ़ाज़ बनाना भी शामिल हैं ताकि तालिबे इल्म की लिसानी महारतों में इज़ाफ़ा हो सके। यह पाठ बच्चों में हुब्बे-वतनी (देश-प्रेम) का जज़्बा और अपनी ज़िम्मेदारियों का एहसास पैदा करता है।</p>
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<h3>❤️ سبق 10 : ٹپ تپوا (نثر)</h3>
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<p>यह कहानी एक बूढ़ी और उसके पोते के इर्द-गिर्द घूमती है जो बरसात की रात दादी से कहानी सुनने की ज़िद करता है। दादी छत से टपकते पानी (टप टीवा) से परेशान होकर कहती है कि उसे शेर या शेरनी से ज़्यादा &#8216;टप टीवा&#8217; का डर है। इत्तिफ़ाक़ से एक शेर बरसात से बचने के लिए झोंपड़ी के पीछे छुपा हुआ था और यह सुनकर डर जाता है कि शायद &#8216;टप टीवा&#8217; कोई बहुत बड़ा बला या जानवर है। दूसरी तरफ़, गाँव का एक धोबी अपने गुमशुदा गधे को तलाश करते हुए अँधेरे में उसी शेर को अपना गधा समझ लेता है। वह आऊ देखा न ताऊ शेर को डंडों से पीटता है और उसे कान से पकड़कर अपने घर ले आता है और खूँटे से बाँध देता है। शेर भी &#8216;टप टीवा&#8217; के ख़ौफ़ से ख़ामोशी से धोबी के पीछे चला जाता है। सुबह जब गाँव वाले धोबी के घर के बाहर गधे की जगह शेर को बँधा हुआ देखते हैं तो उनकी आँखें खुली की खुली रह जाती हैं। यह कहानी ग़लतफ़हमी और डर के दिलचस्प पहलू को उजागर करती है।</p>
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<h3>❤️ سبق 11 : بھائی بھلکڑ (نظم)</h3>
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<p>यह पाठ एक नज़्म की सूरत में है जिसका उनवान (शीर्षक) &#8216;भाई भुलक्कड़&#8217; है और इसे शान-उल-हक़ हक़ी ने लिखा है। नज़्म में एक ऐसे शख़्स की तस्वीर कशी की गई है जो बहुत ज़्यादा भूलने वाला है, इसलिए उसे &#8216;भाई भुलक्कड़&#8217; कहा गया है। वह जहाँ भी जाता है, कुछ न कुछ भूल जाता है; अगर वह बस में सफ़र करता है तो अपना बिस्तर भूल जाता है, और अगर रेल में बैठता है तो अपने स्टेशन से चार स्टेशन आगे निकल जाता है। उसकी हालत यह है कि अगर टोपी पास होती है तो जूता ग़ायब होता है, और अगर जूता मिल जाए तो मोज़ा नहीं मिलता। वह प्याली में चमचा अलटा रखता है और कँगवी भी अलटी ही फेंकता है। यहाँ तक कि वह अपना पाजामा भी अलटा पहन लेता है। सोदा (सामान) ख़रीदते वक्त या तो वह पैसे देना भूल जाता है या फिर पैसे देकर चीज़ लेना भूल जाता है। नज़्म के आख़िर में मश्क़ें दी गई हैं जिनमें अल्फ़ाज़ के मानी, सवाल-जवाब और ख़ाली जगहें भरने की सरगर्मियाँ शामिल हैं। इसके साथ ही एक कहानी &#8216;किस दिन आएँ?&#8217; भी दी गई है, जिसमें एक समझदार रंगरेज़ अदनान एक हासिद सीठ को अपनी ज़हानत (बुद्धि) से सबक सिखाता है जब वह उसे रंगाई के लिए नामुमकिन शर्त देता है।</p>
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<h3>❤️ سبق 12 : بری صحبت (نظم)</h3>
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<p>यह कहानी फ़रहान नामी एक होनहार और ज़हीन लड़के के बारे में है जो अपने वालिदीन का फ़रमानबरदार था और बाक़ायदगी से स्कूल जाता था। ताहिम, एज़हर नामी एक लड़के की बुरी सोहबत (संगत) की वजह से उसके रवैये में तब्दीली आ गई और वह पढ़ाई में लापरवाह हो गया। उसके मास्टर साहिब ने इस तब्दीली को महसूस किया और उसके वालिद को मुत्तलिअ (सूचित) किया। फ़रहान की इस्लाह के लिए मास्टर साहिब ने एक अमली मिसाल का सहारा लिया। उन्होंने फ़रहान से कहा कि वह कुछ अच्छे आमों के साथ एक सड़ा हुआ आम अलमारी में रख दे। अगले दिन जब फ़रहान ने देखा तो सड़े हुए आम की वजह से दूसरे अच्छे आम भी ख़राब होना शुरू हो गए थे। इस मिसाल से मास्टर साहिब ने फ़रहान को समझाया कि जिस तरह एक ख़राब आम दूसरों को ख़राब कर देता है, उसी तरह बुरे लोगों की सोहबत इंसान को बगाड़ देती है। फ़रहान को अपनी ग़लती का एहसास हुआ और उसने बुरी सोहबत छोड़कर दोबारा एक अच्छा बच्चा बनने का वादा किया।</p>
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<h3>❤️ سبق 13 : ابّو جان جب بچے تھے (نثر)</h3>
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<h3>❤️ سبق 14 : گاجر کی شادی (نظم)</h3>
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<p>यह नज़्म &#8216;गाजर की शादी&#8217; के बारे में है जिसमें मुख़्तलिफ़ सब्ज़ियों को इंसानी रिश्तों और करदारों (किरदारों) के तौर पर पेश किया गया है। नज़्म में बताया गया है कि छोटी सी गाजर सुर्ख़ रंग के खूबसूरत कपड़े पहनकर अपने ससुराल जा रही है। इस शादी में आलू को भाई का साला, मूली को ख़ाला (मौसी), टमाटर को भाई, और भिंडी को मामानी (मौसी) के तौर पर दिखाया गया है। शलजम और टीठी कमर वाली लोकी नानी का करदार अदा कर रही हैं और सब गाजर की रुख़सती (विदाई) पर ग़मज़दा हैं। दूसरी तरफ़, काला कलौटा बैंगन दुल्हा बना हुआ है जिसके गले में फूलों का गजरा है। करेला ख़ुशी से नहीं समा रहा है और सबको शादी की मुबारकबाद दे रहा है। कद्दू मियाँ इनठे (फूले) हुए हैं और गोभी के सर पर बर्फ़ी का थाल है, जो शादी की ख़ुशियों को दोबाला कर रहा है। यह नज़्म बच्चों के लिए सब्ज़ियों के नाम और रिश्तों की पहचान का एक दिलचस्प ज़रिया है। नज़्म के आख़िर में मश्क़ी सवाल भी दिए गए हैं ताकि बच्चों की समझ-बूझ का अंदाज़ा लगाया जा सके।</p>
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<h3>❤️ سبق 15 : مولانا مظہرالحق (نثر)</h3>
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<p>यह पाठ मौलाना मज़हर-उल-हक़ की ज़िंदगी और उनकी क़ौमी ख़िदमात पर मबनी है। उनकी पैदाइश 22 दिसंबर 1866 को बिहार के जिला पटना के गाँव बहपुरा में हुई। उन्होंने बैरिस्टरी की तालीम लंदन से हासिल की और वहीं &#8216;अंजुमन इस्लामिया&#8217; की बुनियाद डालने वाले थे। वतन वापसी पर उन्होंने मुल्क की आज़ादी की तहरीक में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया और गांधी जी के साथ मिलकर काम किया। मौलाना मज़हर-उल-हक़ हिंदू-मुस्लिम इत्तेहाद के अलमबरदार थे और उन्होंने सीवान में अपना घर &#8216;आशियाना&#8217; तमीर कराया, जो गांधी जी और पंडित नेहरू जैसे बड़े रहनुमाओं का मर्कज़ रहा। उन्होंने पटना में &#8216;सदाकत आश्रम&#8217; की बुनियाद डालने वाले और &#8216;दि मदरलैंड&#8217; नामी अख़बार निकाला। उन्होंने बिहार नेशनल कॉलेज और बिहार विद्यापीठ के क़ियाम में अहम करदार अदा किया। उनकी ज़िंदगी सादगी, सदाक़त और ईसार (त्याग) का नमूना थी। 2 जनवरी 1930 को उनका इंतक़ाल हुआ, जो मुल्क के लिए एक बड़ा नुक़सान था। मौलाना मज़हर-उल-हक़ का नाम हिंदुस्तान की आज़ादी के सफ़-ए-अव्वल के मुजाहिदीन में हमेशा याद रखा जाएगा।</p>
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<h3>❤️ سبق 16 : چوہے کی مزدوری (نثر)</h3>
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<p>यह कहानी एक ऐसे वक़्त की है जब ज़मीन पर धान आम नहीं था। एक शख़्स ने तालाब के दरमियान धान का पौधा देखा, लेकिन गहरे पानी की वजह से वहाँ तक पहुँचना नामुमकिन था। उसने एक चूहे से मदद माँगी और उससे धान की बालियाँ लाने के बदले मज़दूरी देने का वादा किया। चूहा तैरकर गया और सारी बालियाँ किनारे पर ले आया। जब आदमी ने उसे मज़दूरी लेने को कहा, तो चूहे ने अपनी छोटी जिस्मत और छोटे सर का हवाला देते हुए कहा कि वह यह बोझ उठाकर नहीं ले जा सकता। उसने मशविरा दिया कि आदमी सारा धान अपने घर ले जाए और चूहा वहीं आकर अपने हिस्से का धान खा लिया करेगा। तभी से चूहा इंसानों के घरों में रहकर अपना हिस्सा खाता आ रहा है। यह पाठ मेहनत और बाहमी तआवुन (सहयोग) की एक दिलचस्प लोक कहानी है जो बच्चों को आसान ज़बान में समझाई गई है।</p>
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<h3>❤️ سبق 17 : کمپیوٹر (نثر)</h3>
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<p>इस पाठ में कंप्यूटर की अहमियत और उसके बुनियादी हिस्सों के बारे में बताया गया है। कहानी का आगाज़ स्कूल के प्रिंसिपल साहिब की एक ख़ुशख़बरी से होता है, जिन्होंने बच्चों को स्कूल में तैयार किए गए नए कंप्यूटर रूम के बारे में बताया। बच्चे अपनी टीचर के साथ कंप्यूटर लैब गए, जहाँ उन्हें मालूम हुआ कि कंप्यूटर के चार अहम हिस्से होते हैं: मॉनिटर, सी॰पी॰यू॰, की-बोर्ड और माउस। टीचर ने वज़ाहत (स्पष्टता) की कि सी॰पी॰यू॰ (C.P.U.) कंप्यूटर का दिमाग़ कहलाता है। यह भी बताया गया कि कंप्यूटर ख़ुद कुछ नहीं कर सकता जब तक कि उसमें मालूमात (जानकारी) दाख़िल न की जाएँ। कंप्यूटर के ज़रीए उर्दू, हिंदी, अंग्रेज़ी, हिसाब और साइंस जैसे मज़ामीन (विषय) आसानी से पढ़े जा सकते हैं। इसके अलावा बच्चे इस पर मुख़्तलिफ़ खेल भी खेल सकते हैं और दुनिया भर की मालूमात हासिल कर सकते हैं। कंप्यूटर लैब का दौरा करने और इस नई तकनीक के बारे में जानकर तालिबे इल्म बहुत ख़ुश और पुरसुकून नज़र आए। यह पाठ बच्चों को जदीद तालीमी वसाइल (शिक्षा साधन) से मुत्ताअरिफ़ कराने की एक बेहतरीन कोशिश है।</p>
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<h3>❤️ سبق 18 : اٹھ باندھ کمر کیوں ڈرتا ہے (نثر)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1pTJCjRBRQ4KouCopdePmTDNm1RC8yZoB" /></p>
<p>यह किताब उर्दू ज़बान की दरसी किताब &#8216;गुलशन-ए-उर्दू&#8217; का हिस्सा मालूम होती है जिसका आगाज़ नज़्म &#8216;उठ बाँध कमर क्यों डरता है?&#8217; से होता है। इस नज़्म के शायर मुहम्मद फ़ारूक़ दीवाना हैं जिन्होंने इसके ज़रीए बच्चों को हिम्मत, मेहनत और वक़्त की क़द्र करने का दर्स दिया है। शायर का कहना है कि जो शख़्स वक़्त ज़ाए करता है वह आख़िरकार पछताता है, जबकि कोशिश करने वाले ही कामयाबी हासिल करते हैं। नज़्म में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि इंसान को ग़फ़लत (लापरवाही) की नींद से बेदार होकर अपने मक़ासिद (लक्ष्य) के लिए कमर बाँध लेना चाहिए क्योंकि हिम्मत और अज़्मे-सँगीन (दृढ़ संकल्प) से मुश्किल तरीन काम (पत्थर को पानी करना) भी आसान हो जाता है। किताब में मुज़ीद मश्क़ें दी गई हैं जिनमें अल्फ़ाज़ के मानी और सवाल व जवाब शामिल हैं ताकि तालिबे इल्म नज़्म के पैग़ाम को बेहतर तरीक़े से समझ सकें। इसके अलावा इस हिस्से में अलामा इक़बाल का मशहूर &#8216;तराना-ए-हिंदी&#8217; (सारे जहाँ से अच्छा), &#8216;वंदे मातरम&#8217; और भारत का &#8216;क़ौमी तराना&#8217; भी शामिल है जो बच्चों में हुब्बे-वतनी और क़ौमी यकजहती का जज़्बा पैदा करने के लिए मुन्तख़ब किए गए हैं। यह मवाद (सामग्री) तीसरी जमाअत (कक्षा) के तालिबे इल्म के लिए तालीमी और अख़लाक़ी लिहाज़ से निहायत मौज़ूँ (उपयुक्त) हैं।</p>
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		<title>Bihar Board Class 2 Urdu Book 2026 PDF Download</title>
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		<dc:creator><![CDATA[bseb]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 Jul 2022 07:29:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Class 3rd Books]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>Bihar Board Class 2 Urdu Book 2026 PDF Download Bihar Board Class 2 Urdu Book 2026 PDF Download &#8211; इस पेज पर बिहार बोर्ड Class 2 के छात्रों के लिए &#8220;Urdu (اردو)&#8221; Textbook दिया गया है &#124; जिसे आप अपने फ़ोन में Free Download कर सकते हैं &#124; 🌐 सभी विषयों की बुक्स डाउनलोड करने [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<h2 style="text-align: center;"><span style="text-decoration: underline; color: #ff0000;"><strong>Bihar Board Class 2 Urdu Book 2026 PDF Download</strong></span></h2>
<p><img data-recalc-dims="1" decoding="async" class="aligncenter" src="https://i0.wp.com/biharboardbooks.com/wp-content/uploads/2022/07/bihar_board_books-min.png?ssl=1" /> <span style="text-decoration: underline;">Bihar Board Class 2 Urdu Book 2026 PDF Download</span> &#8211; इस पेज पर बिहार बोर्ड Class 2 के छात्रों के लिए &#8220;<span style="text-decoration: underline;"><strong>Urdu (اردو)</strong></span>&#8221; Textbook दिया गया है | जिसे आप अपने फ़ोन में Free Download कर सकते हैं |</p>
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<h2 style="text-align: center;"><span style="text-decoration: underline; color: #3366ff;"><strong>BSEB Class 2 Urdu (اردو) Textbook PDF Free Download</strong></span></h2>
<p><span style="font-size: 18pt;"><strong>☞</strong></span> बुक्स डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए डाउनलोड लिंक पर क्लिक करें | <img decoding="async" class="aligncenter" src="https://i0.wp.com/biharboard-ac.in/wp-content/uploads/2022/07/kindpng_6137677-min.png?resize=601%2C111&amp;ssl=1" alt="line" /></p>
<h3>❤️ پیش لفظ</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1dnVm3yM34MYtI2aMnmZxi1irdziNHboQ" /><br />
यह किताब &#8216;गुलशन-ए-उर्दू&#8217; दूसरी कक्षा के विद्यार्थियों के लिए बिहार राज्य पाठ्यपुस्तक निगम द्वारा तैयार की गई है। इसका मूल उद्देश्य बच्चों में उर्दू भाषा के प्रति रुचि पैदा करना और उनकी रचनात्मक क्षमताओं को विकसित करना है। किताब में आधुनिक शैक्षिक सिद्धांतों (NCF 2005 और BCF 2008) को ध्यान में रखा गया है ताकि सीखना आसान और रोचक हो। इसमें कविताएं, कहानियाँ और विभिन्न गतिविधि पत्रक शामिल हैं जो बच्चों को भाषा का सही उच्चारण, शब्दावली और वाक्य रचना सीखने में मदद करते हैं। किताब की शुरुआत में शिक्षकों के लिए विशेष दिशा-निर्देश दिए गए हैं ताकि वे शिक्षण को और प्रभावी बना सकें। इसके अलावा, किताब में सामाजिक मूल्यों, मेहनत की महिमा, और स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर आधारित सामग्री भी शामिल है, जैसे &#8216;मेहनत का फल&#8217;, &#8216;दाँतों की सफाई&#8217;, और &#8216;हमारे राष्ट्रीय नेता&#8217;। यह किताब न सिर्फ पढ़ने-लिखने का कौशल विकसित करती है बल्कि बच्चों के मानसिक विकास को भी जागृत करती है।</p>
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<h3>❤️ سبق 1 : اعادہ</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1odLqoy5ib0y8-5ovw_o-2QCjkIrjuGJi" /><br />
यह पीडीएफ दस्तावेज़ एक शैक्षिक कार्यपुस्तिका है जो दूसरी कक्षा के विद्यार्थियों के लिए उर्दू भाषा में तैयार की गई है। इस किताब का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों की उर्दू पढ़ने, लिखने और समझने की क्षमता को बेहतर बनाना है। किताब में विभिन्न विषय जैसे जानवर, उनके घर, खाने-पीने की चीज़ें, फूल, सब्ज़ियाँ और घर के सामान से संबंधित अभ्यास शामिल हैं। इसमें अक्षरों को जोड़ने, उन्हें पहचानने और सुंदर लिखावट सीखने की गतिविधियाँ दी गई हैं। इसके अलावा, एक भाग &#8216;मेले&#8217; के बारे में है जहाँ बच्चों से उनके अनुभवों, पसंदीदा खिलौनों और मिठाइयों के बारे में प्रश्न पूछे गए हैं। शिक्षकों के लिए हर पृष्ठ पर शिक्षण दिशा-निर्देश दिए गए हैं ताकि वे बातचीत के माध्यम से बच्चों की समझ को स्पष्ट कर सकें। यह कार्यपुस्तिका चित्रों और व्यावहारिक अभ्यासों के माध्यम से बच्चों की भाषाई क्षमताओं को मज़बूत करने का एक उत्तम साधन है।</p>
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<h3>❤️ سبق 2 : میں تو سو رہی تھی (تصویری کہانی)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1vsWjo3IXgOctsMMlLNI0zH5evvNbpx4C" /><br />
यह पुस्तिका दूसरी कक्षा के उर्दू पाठ्यक्रम का हिस्सा है, जिसका केंद्रीय विषय एक सुंदर कहानी &#8216;मैं तो सो रही थी&#8217; है। इस कहानी के माध्यम से बच्चों को विभिन्न जानवरों और पक्षियों की आवाज़ों और उनकी पहचान से परिचित कराया गया है। कहानी में एक बच्ची का ज़िक्र है जो सो रही होती है और बार-बार बिल्ली, चिड़िया, कुत्ता, मुर्गा और कोयल अपनी विशेष आवाज़ों में उसे जगाते हैं। आखिर में उसकी माँ &#8216;उठ बेटी उठ&#8217; कहकर उसे जगाती है। इस पुस्तिका में सिर्फ कहानी ही शामिल नहीं है बल्कि बच्चों के मानसिक विकास के लिए विभिन्न गतिविधियाँ भी दी गई हैं। इनमें सुंदर लिखाई, शब्दों को जोड़ना, पुल्लिंग से स्त्रीलिंग बनाना, और चित्रों में रंग भरना शामिल है। इसके अलावा, बच्चों को अच्छी आदतों, जैसे समय पर उठना और माँ के महत्व के बारे में भी सिखाया गया है। शिक्षण दिशा-निर्देशों के माध्यम से शिक्षकों को प्रोत्साहित किया गया है कि वे बच्चों को लय और उत्साह के साथ पढ़ाएँ ताकि वे रुचि के साथ भाषा सीख सकें। यह सामग्री बुनियादी उर्दू शब्दावली, वाक्य रचना और जानवरों की बोलियों की पहचान के लिए बेहतरीन है।</p>
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<h3>❤️ سبق 3 : پیڑ (تصویری کہانی)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1Yi9regQEGpz1yHpQwcnIIbSKC1RrEdd6" /><br />
यह पुस्तक मूल रूप से एक चित्र कहानी है जिसका शीर्षक &#8216;पेड़ हो सकता है?&#8217; है। यह पुस्तक दूसरी कक्षा के बच्चों के लिए उर्दू भाषा में लिखी गई है और इसका उद्देश्य पेड़ों के महत्व और उनके विभिन्न लाभों से अवगत कराना है। कहानी में बताया गया है कि एक पेड़ पक्षियों के लिए घोंसला बनाने की जगह, बच्चों के लिए झूलने और खेलने की जगह, और जानवरों के लिए आराम करने की जगह हो सकता है। इसके अलावा, पेड़ हमें फल प्रदान करते हैं, बारिश और धूप से बचाते हैं, और ये &#8216;जीवन से भरी जगह&#8217; हैं। पुस्तक में विभिन्न गतिविधियाँ भी शामिल हैं जैसे चित्रों को देखकर काम लिखना, अक्षरों को जोड़ना, समान और विपरीत अर्थ वाले शब्द लिखना, और वाक्य बनाना। यह बच्चों को न सिर्फ भाषा सीखने में मदद करती है बल्कि उन्हें पर्यावरण की सुरक्षा और पेड़ों की देखभाल के लिए भी प्रेरित करती है। इसमें शिक्षकों के लिए भी दिशा-निर्देश दिए गए हैं ताकि वे बच्चों को व्यावहारिक रूप से इन अवधारणाओं से परिचित करा सकें। कुल मिलाकर, यह पुस्तक बच्चों को प्रकृति से जोड़ने और उनकी रचनात्मक क्षमताओं को जगाने का एक बेहतरीन साधन है।</p>
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<h3>❤️ سبق 4 : جاڑا (نظم)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=12M3UE7Bxewdv3H8EgZuNphOiEYfeTh1h" /><br />
यह पुस्तिका दूसरी कक्षा के विद्यार्थियों के लिए उर्दू भाषा में तैयार की गई है, जिसका केंद्रीय विषय &#8216;जाड़ा&#8217; यानी सर्दी का मौसम है। इसमें एक सुंदर कविता के माध्यम से सर्दी के मौसम की विशेषताएँ बताई गई हैं, जैसे कि ठंडी हवाओं का चलना, लोगों का काँपना, और गर्म कपड़ों का उपयोग। कविता में बताया गया है कि जाड़े में सूरज जल्दी ढल जाता है और ऐसा लगता है जैसे सारे शरीर में बर्फ भर गई हो। पुस्तक में विभिन्न शैक्षिक गतिविधियाँ भी शामिल हैं, जिनमें प्रश्नोत्तरी, रिक्त स्थान भरना, और मौसम के अनुसार वस्त्र (जैसे मफलर, स्वेटर, ऊनी टोपी) की पहचान करना शामिल है। इसके अलावा, बच्चों को अक्षर जोड़कर शब्द बनाने, समान ध्वनि वाले शब्द सीखने, और विपरीत अर्थ वाले शब्द लिखने के अभ्यास दिए गए हैं। पुस्तक में विभिन्न मौसमों (जैसे गर्मी, बरसात, बसंत) की तुलना की गई है और जाड़े में मनाए जाने वाले त्योहारों जैसे दिवाली का ज़िक्र भी मिलता है। इसका उद्देश्य बच्चों को रोचक तरीके से मौसमों के बदलाव, उर्दू शब्दावली, और रोजमर्रा के जीवन पर मौसम के प्रभाव से परिचित कराना है। शिक्षकों के लिए भी निर्देश हैं कि वे बच्चों को लय के साथ कविता सुनाएँ और बातचीत के माध्यम से उनके मानसिक विकास को बढ़ावा दें।</p>
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<h3>❤️ سبق 5 : محنت کا پھل (نثر)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1hB2I_1Wglbg7NR1VEqeZ5JLvBBEk3kme" /><br />
यह कहानी एक बादशाह और एक बूढ़े किसान के आपसी संवाद पर आधारित है। एक बार एक बादशाह गाँव से गुज़र रहा था तो उसने देखा कि एक बूढ़ा व्यक्ति आम का पौधा लगा रहा है। बादशाह ने हैरानी से पूछा कि जब इस पौधे को फल लगने में बीस साल लगेंगे और शायद तब तक तुम जीवित भी नहीं रहोगे, तो इसे लगाने का क्या फायदा? बूढ़े ने बड़ी दूरदर्शिता से जवाब दिया कि जिस तरह मेरे बुजुर्गों के लगाए पेड़ों के फल में खा रहा हूँ, उसी तरह मेरे लगाए पौधों के फल आने वाली पीढ़ियाँ खाएँगी। बादशाह इस जवाब से बेहद प्रभावित हुआ और उसने बूढ़े को इनाम दिया। इनाम पाकर बूढ़ा मुस्कुराया और कहा कि मुझे अपनी मेहनत का फल आज ही मिल गया। इस कहानी का सबक यह है कि मेहनत कभी बेकार नहीं जाती और हमें भविष्य की पीढ़ियों की बेहतरी के लिए काम करना चाहिए। यह शिक्षाप्रद कहानी निस्वार्थ भावना, दूरदर्शिता और कड़ी मेहनत के महत्व को सिखाती है कि इंसान को सिर्फ अपने निजी फायदे के लिए नहीं बल्कि दूसरों की भलाई के लिए भी प्रयास करना चाहिए।</p>
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<h3>❤️ سبق 6 : پیاری گاے (نظم)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1kwldcBISSegotK3RbvwmrvMs9HHZzgIv" /><br />
कविता &#8216;प्यारी गाय&#8217; अल्लाह की नेमतों का शुक्रिया अदा करने का पाठ देती है, जिसने गाय जैसे सुंदर और उपयोगी प्राणी पैदा किए। यह कविता गाय की विशेषताओं और उसके फायदों को बड़ी खूबसूरती से बयान करती है। गाय एक बहुत सहनशील जानवर है जो हरा चारा, भूसा और घास खुशी-खुशी खा लेती है। वह हमें दूध जैसी महान नेमत प्रदान करती है, जिससे दही, मक्खन और दूसरी चीज़ें बनती हैं। गाय के बछड़े बड़े होकर बैल बनते हैं जो खेती-बाड़ी और किसानों के काम आते हैं। कविता में चरवाहे और हरियाली का ज़िक्र भी शामिल है, जो देहाती जीवन का प्रतिबिंब दर्शाता है। इस पाठ का उद्देश्य बच्चों को जानवरों के महत्व, उनका चारा और उनसे मिलने वाले फायदों से अवगत कराना है। साथ ही यह कविता अल्लाह की प्रशंसा और उसकी दी हुई नेमतों की क़दर करने की प्रेरणा देती है। इसमें विभिन्न गतिविधियाँ भी शामिल हैं जिनसे बच्चों की शब्दावली और व्याकरण में वृद्धि होती है।</p>
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<h3>❤️ سبق 7 : مرغا اور لومڑی (نثر)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=10nGcGAdfCSefd2RxiNwJXxYjPj8AjTOz" /><br />
यह कहानी एक चतुर मुर्गे और एक चालाक लोमड़ी के इर्द-गिर्द घूमती है। मुर्गा एक पेड़ की ऊँची डाल पर बैठकर बाँग दे रहा था कि एक लोमड़ी वहाँ से गुज़री। मुर्गे को देखकर लोमड़ी के मुँह में पानी आ गया और उसने मुर्गे को नीचे उतारने के लिए एक चाल चली। उसने झूठ बोला कि जंगल के सभी जानवरों ने अब मिल-जुलकर रहने का फैसला किया है, इसलिए अब किसी को किसी से डरने की ज़रूरत नहीं है। मुर्गा लोमड़ी की चालाकी समझ गया और उसने चतुराई से जवाब दिया कि यह तो बहुत अच्छी खबर है, और साथ ही दूर से आते शिकारी कुत्तों का ज़िक्र कर दिया। शिकारी कुत्तों का नाम सुनते ही लोमड़ी घबरा गई और वहाँ से भागने लगी। जब मुर्गे ने उसे रोकना चाहा तो लोमड़ी ने बहाना बनाया कि शायद उन कुत्तों ने अभी तक यह शांति की खबर नहीं सुनी होगी। इस तरह मुर्गे ने अपनी सूझ-बूझ और समझदारी से अपनी जान बचा ली। यह कहानी हमें सिखाती है कि दुश्मन की बातों में आकर अपनी सुरक्षा से लापरवाह नहीं होना चाहिए और मुश्किल वक्त में दिमाग़ का इस्तेमाल करना चाहिए।</p>
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<h3>❤️ سبق 8 : سبزی والا (نظم)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1FYHO6V_tT-L6miukSvDxxm77a5m3G5nC" /><br />
यह पुस्तिका दूसरी कक्षा के विद्यार्थियों के लिए एक उर्दू कविता &#8216;सब्ज़ी वाला&#8217; पर आधारित शैक्षिक सामग्री प्रस्तुत करती है। कविता में एक सब्ज़ी वाले का ज़िक्र है जो गलियों में आवाज़ लगाकर विभिन्न सब्ज़ियाँ जैसे आलू, गोभी, टमाटर, गाजर, मूली, धनिया, पालक और बैंगन बेचता है। कविता के माध्यम से बच्चों को सब्ज़ियों के नामों, उनके रंगों और स्वादों से परिचित कराया गया है। पुस्तिका में विभिन्न गतिविधियाँ शामिल हैं, जिनमें अक्षरों को पहचानना, चित्रों की मदद से रिक्त स्थान भरना, और सब्ज़ियों के नामों को उनके सही रंगों से मिलाना शामिल है। इसके अलावा, एकवचन से बहुवचन बनाने, कच्ची और पक्की जाने वाली सब्ज़ियों में अंतर करने, और कविता के अंश पूरे करने जैसी गतिविधियाँ भी दी गई हैं। यह सामग्री न सिर्फ बच्चों की उर्दू शब्दावली में इज़ाफा करती है बल्कि उन्हें रोज़मर्रा के जीवन में प्रयोग होने वाली चीज़ों और उनके खरीदने-बेचने के तरीके से भी रूबरू कराती है। शिक्षकों के लिए विशेष दिशा-निर्देश भी दर्ज हैं ताकि वे विद्यार्थियों को रुचिकर ढंग से पढ़ा सकें।</p>
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<h3>❤️ سبق 9 : کملا چاچی (نثر)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=1I2Uz45AQSTYFxId9tw9Ae-V6opZRwYGh" /><br />
यह कहानी दो दोस्तों, मदन और नदीम, और उनकी पड़ोसन कमला चाची के इर्द-गिर्द घूमती है। मदन और नदीम गहरे दोस्त हैं जो रोज़ाना शाम को खेल-कूद के बाद कमला चाची से मिलने जाते हैं। चाची एक बूढ़ी और मेहरबान महिला हैं जो बच्चों को गुड़ और सत्तू खिलाती हैं और उन्हें दिलचस्प कहानियाँ सुनाती हैं, जिसकी वजह से मोहल्ले के सारे बच्चे उनसे बहुत प्यार करते हैं। एक दिन जब मदन और नदीम चाची के घर पहुँचे तो उन्होंने देखा कि वह तेज़ बुखार से पीड़ित हैं। दोनों दोस्त फौरन अपने माता-पिता को बुला लाए। नदीम के पिता डॉक्टर को लेने गए जबकि मदन की माँ ने चाची के सिर पर ठंडे पानी की पट्टियाँ रखीं। नदीम की माँ ने उनके लिए जौ का दलिया (जौ का दलिया) तैयार किया। सबकी देखभाल और समय पर इलाज से चाची का बुखार उतर गया और वह अगले दिन पूरी तरह ठीक हो गईं। स्वस्थ होने के बाद उन्होंने बच्चों को फिर से गुड़-सत्तू खिलाया और ढेर सारी दुआएँ दीं। यह कहानी पड़ोसियों के अधिकारों, आपसी हमदर्दी और मुश्किल वक्त में एक-दूसरे की मदद करने के खूबसूरत जज़्बे को उजागर करती है।</p>
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<h3>❤️ سبق 10 : دیوالی (نظم)</h3>
<p><img decoding="async" class="yg_img" src="https://drive.google.com/thumbnail?sz=w720&amp;id=123IYCZrcZdMPITCkHoUF3Jx6NPtc2REO" /><br />
यह पुस्तिका उर्दू भाषा में दिवाली के त्योहार पर आधारित एक सुंदर कविता और उससे संबंधित विभिन्न शैक्षिक गतिविधियों पर समग्र रूप से केंद्रित है। कविता में दिवाली की खुशियों, दीपों, और मेल-मिलाप का ज़िक्र है, जिसमें बच्चे जैसे राजू, अकबर, ज़ीनत और राधा मिलकर दीप जलाते, मिठाइयाँ खाते और एक-दूसरे को गले लगाते हैं। कविता के माध्यम से बच्चों को आपसी भाईचारे और खुशियाँ मनाने का संदेश दिया गया है। पुस्तिका में कविता के अलावा कहानी के कुछ हिस्से भी शामिल हैं, जैसे कमला चाची की देखभाल का वाक़या, जो बच्चों में हमदर्दी और सेवा भावना पैदा करता है। साथ ही, पुस्तक में उर्दू भाषा की क्षमता को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न गतिविधियाँ दी गई हैं, जिनमें अक्षरों को पहचानना, रिक्त स्थान भरना, चित्रों की मदद से वाक्य बनाना, और विलोम शब्द लिखना शामिल है। यह सामग्री दूसरी कक्षा के विद्यार्थियों के लिए तैयार की गई है ताकि वे रुचिकर ढंग से उर्दू सीखने के साथ-साथ सांस्कृतिक त्योहारों के महत्व को भी समझ सकें। कुल मिलाकर, यह पुस्तिका बच्चों की भाषाई और नैतिक शिक्षा के लिए एक बेहतरीन साधन है।</p>
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<h3>❤️ سبق 11 : چن من (تصویری کہانی)</h3>
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यह कहानी एक छोटे और शरारती चूज़े &#8216;चन मन&#8217; की है जो अपनी माँ (मुर्गी) के साथ रहता था। एक दिन चन मन ने अपनी माँ की नसीहत को नज़रअंदाज करते हुए मुर्गी के चलकर खाने के लिए दूर निकल गया। इसी दौरान मुर्गी का एक दाना उसके गले में फँस गया, जिसकी वजह से वह तकलीफ में रोने लगा। मुर्गी ने अपने बच्चे की मदद करने की कोशिश की लेकिन उसकी चोंच छोटी थी, इसलिए वह दाना नहीं निकाल सकी। मुर्गी मदद के लिए अपने दोस्त बगुले के पास गई, जिसने अपनी लंबी चोंच के ज़रिए चन मन के गले से दाना निकालकर उसकी जान बचाई। इस घटना के बाद चन मन को अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने वादा किया कि वह हमेशा अपनी माँ की बात मानेगा और कभी उससे बिना कहे कहीं नहीं जाएगा। यह कहानी बच्चों को माता-पिता की बात मानने और सावधानी बरतने का सबक देती है। यह पाठ उर्दू भाषा में दूसरी कक्षा के विद्यार्थियों के लिए तैयार किया गया है जिसमें कहानी के साथ-साथ शब्दावली निर्माण और प्रश्नोत्तर जैसी गतिविधियाँ भी शामिल हैं।</p>
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<h3>❤️ سبق 12 : کہلآؤگے تم ہوشیار (نظم)</h3>
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यह पुस्तिका दूसरी कक्षा के बच्चों के लिए उर्दू भाषा में सड़क पार करने के आदाब और यातायात नियमों के बारे में एक शैक्षिक सामग्री है। इसमें एक कविता के माध्यम से बच्चों को सिखाया गया है कि सड़क पार करते वक्त किन बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है। कविता में हिदायत दी गई है कि सड़क पार करने से पहले पहले अपने दाईं ओर देखें, फिर बाईं ओर देखें, और अगर हॉर्न या घंटी की आवाज़ सुनाई दे तो फौरन रुक जाएँ। जब सड़क बिल्कुल साफ़ हो जाए और कोई गाड़ी नज़र न आए, तभी संभलकर सड़क पार करनी चाहिए। जो बच्चा इन नियमों पर अमल करता है, उसे &#8216;होशियार&#8217; कहा जाता है। पुस्तिका में विभिन्न गतिविधियाँ भी शामिल हैं, जैसे प्रश्नोत्तर, रिक्त स्थान भरना, अक्षरों को जोड़कर शब्द बनाना, और समानार्थी व विलोम शब्दों की पहचान। इसका उद्देश्य बच्चों की उर्दू भाषा की मेहारत को बेहतर बनाने के साथ-साथ उनमें सामाजिक चेतना और सुरक्षा के एहसास को जगाना है। इसमें सुंदर लिखावट और वर्तनी की शुद्धता पर भी विशेष ज़ोर दिया गया है ताकि बच्चे भाषा को सही तरीके से लिखना और पढ़ना सीख सकें।</p>
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<h3>❤️ سبق 13 : شیر شاہ کا مقبرہ (نثر)</h3>
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यह पाठ शेरशाह सूरी और उनके मकबरे के बारे में है, जो बिहार के शहर सासाराम में स्थित है। शेरशाह के बचपन का नाम फरीद खान था और एक शेर को मारने की वजह से वह शेर खान के नाम से मशहूर हुए। उन्होंने मुगल बादशाह हुमायूँ को हराकर दिल्ली की तख़्त पर क़ब्ज़ा किया और हिंदुस्तान के बादशाह बने। शेरशाह एक महान विद्वान और जनता के हितैषी शासक थे जिन्होंने अपने पाँच साल की संक्षिप्त सल्तनत में सड़कें, मुसाफ़िरखाने और कुँए बनवाए, और वजन-तौल का बेहतरीन तरीका कायम किया। उनका मकबरा लाल पत्थरों से बना एक खूबसूरत इमारत है जो एक विशाल तालाब के बीच में स्थित है। यह मकबरा उन्होंने अपनी ज़िंदगी में ही बनवाया था जहाँ एक हादसे में मौत के बाद उन्हें दफ़नाया गया। यह पाठ विद्यार्थियों को शेरशाह की शख्सियत, उनके जनहित के कामों और उनके ऐतिहासिक महत्व से रूबरू कराता है।</p>
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<h3>❤️ سبق 14 : دانتوں کی صفائی (نظم)</h3>
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यह पुस्तिका बच्चों के लिए लिखी गई एक सुधारात्मक और शैक्षिक कविता &#8216;दाँतों की सफाई&#8217; पर आधारित है, जिसका उद्देश्य बच्चों को स्वास्थ्य और स्वच्छता के महत्व से परिचित कराना है। कविता के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि सुबह उठकर दाँत साफ करने से न सिर्फ दाँत चमकदार होते हैं बल्कि मुँह की बदबू भी दूर होती है। पुस्तक में दाँतों को मज़बूत बनाने के लिए सेहतमंद आहार जैसे दूध, दही, मूली, पालक, गाजर और हरी सब्ज़ियों के इस्तेमाल पर ज़ोर दिया गया है। इसमें बच्चों को सिखाया गया है कि हर खाने के बाद कुल्ला करना और दाँतों की हिफ़ाज़त करना क्यों ज़रूरी है ताकि कीड़ों से बचा जा सके। कविता के अलावा इसमें विभिन्न गतिविधियाँ भी शामिल हैं, जैसे सही शब्दों का चुनाव, चित्रों की मदद से वाक्य बनाना, और एकवचन-बहुवचन की पहचान। शिक्षकों के लिए दिशा-निर्देश भी दिए गए हैं कि वे बच्चों को लय और जोश के साथ कविता सुनाएँ ताकि वे दाँतों की सफाई और अच्छी सेहत के सिद्धांतों को रुचि के साथ सीख सकें। कुल मिलाकर यह एक बेहतरीन शैक्षिक सामग्री है जो बच्चों के शारीरिक विकास और व्यक्तिगत स्वच्छता की आदतों को बेहतर बनाने में मददगार साबित होती है।</p>
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<h3>❤️ سبق 15 : ہمارے قومی رہنما (نثر)</h3>
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यह पाठ हमारे देश के महान राष्ट्रीय नेता और आज़ाद हिंदुस्तान के पहले शिक्षा मंत्री, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की ज़िंदगी के एक रोचक पहलू पर आधारित है। बंगाल के एक सम्मानित परिवार में पले-बढ़े मौलाना के घर का माहौल धार्मिक था, जहाँ सिर्फ अरबी और फ़ारसी भाषाओं में शिक्षा की इजाज़त थी। उर्दू पढ़ना उनके घर में मना था, लेकिन मौलाना को उर्दू भाषा से दिलचस्पी थी। वे चोरी-चोरी, कभी रज़ाई में दुबककर तो कभी तेल के दीपक की रोशनी में उर्दू की किताबें पढ़ लेते थे। एक बार इस कोशिश में उनकी रज़ाई भी जल गई और उन्हें डाँट भी सुननी पड़ी। कम रोशनी में पढ़ने की वजह से उनकी आँखों पर भी असर पड़ा, लेकिन उनका शौक कम नहीं हुआ। मौलाना आज़ाद 11 नवंबर 1888 को मक्का में पैदा हुए और हिंदुस्तान की आज़ादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई। यह पाठ बच्चों को उनकी मेहनत, शौक और देश के प्रति उनकी सेवाओं से रूबरू कराता है। इसके अलावा, किताब के दूसरे हिस्सों में पठन अभ्यास, दिशाओं की पहचान और बुनियादी उर्दू व्याकरण की गतिविधियाँ भी शामिल हैं जो बच्चों के शैक्षिक विकास में मददगार हैं।</p>
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