Bihar Board 9th Geography Book 2026 PDF Download (भारत : भूमि एवं लोग)
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BSEB Class 9 Geography Book PDF Free Download (भारत : भूमि एवं लोग)
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❤️ अध्याय 1: स्थिति एवं विस्तार
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❤️ अध्याय 2: भौतिक स्वरूप : संरचना एवं उच्चावच
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❤️ अध्याय 3: अपवाह स्वरूप
प्रस्तुत पाठ ‘भारत : भूमि एवं लोग’ पुस्तक का एक अध्याय है, जिसका शीर्षक ‘अपवाह-स्वरूप’ है। इस अध्याय में भारत की नदी प्रणालियों (अपवाह तंत्र) का विस्तृत वर्णन किया गया है।
भारत की नदियों को दो प्रमुख वर्गों में विभाजित किया गया है: हिमालय की नदियाँ और प्रायद्वीपीय नदियाँ। हिमालय की नदियाँ, जैसे सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र, बारहमासी हैं और गहरे गॉर्ज तथा विशाल डेल्टा का निर्माण करती हैं।
इसके विपरीत, प्रायद्वीपीय नदियाँ, जैसे गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, नर्मदा और तापी, मौसमी हैं और वर्षा पर निर्भर करती हैं। पाठ में भारत की प्रमुख झीलों (जैसे वूलर, डल, सांभर, चिल्का) और उनके निर्माण की प्रक्रियाओं (जैसे गोखुर झील, लैगून) पर भी चर्चा की गई है।
नदियों को मानव सभ्यता की जीवन-रेखा बताया गया है, लेकिन बढ़ते प्रदूषण और औद्योगीकरण के कारण इनकी गुणवत्ता में गिरावट पर चिंता व्यक्त की गई है। जल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ‘राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना’ जैसे उपायों और नदी जल के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
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❤️ अध्याय 4: जलवायु
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❤️ अध्याय 5: प्राकृतिक वनस्पति एवं वन्य प्राणी
यह अध्याय ‘प्राकृतिक वनस्पति एवं वन्य प्राणी’, जो ‘भारत : भूमि एवं लोग’ पुस्तक का हिस्सा है, भारत की विशाल जैव विविधता और पारिस्थितिक तंत्र का विश्लेषण करता है। भारत में जलवायु, मिट्टी और धरातल की विविधता के कारण लगभग 47,000 पौधों और 89,000 जीवों की प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
पाठ में वनस्पतियों को पाँच मुख्य प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है: उष्ण कटिबंधीय सदाबहार वन, पर्णपाती वन, कँटीले वन, पर्वतीय वन और मैंग्रोव वन। वनों के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया गया है कि ये न केवल पर्यावरण को संतुलित रखते हैं, बल्कि औषधीय पौधे और लकड़ी जैसे संसाधन भी प्रदान करते हैं।
मानवीय गतिविधियों, शहरीकरण और शिकार के कारण पारिस्थितिक तंत्र में आए असंतुलन और लुप्तप्राय प्रजातियों पर चिंता व्यक्त की गई है। संरक्षण हेतु भारत सरकार द्वारा उठाए गए कदमों, जैसे 14 जीवमंडल निचय (Biosphere Reserves), नेशनल पार्क, और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 का उल्लेख किया गया है।
साथ ही, सुंदरवन के बाघों और असम के गैंडों जैसे विशिष्ट वन्यजीवों के आवासों की जानकारी भी दी गई है।
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❤️ अध्याय 6: जनसंख्या
प्रस्तुत पाठ ‘जनसंख्या’, पुस्तक ‘भारत : भूमि एवं लोग’ का छठा अध्याय है, जो भारत के मानवीय संसाधनों और जनसांख्यिकीय विशेषताओं का विश्लेषण करता है। लेखक के अनुसार, जनसंख्या आर्थिक विकास का प्रमुख आधार है।
2001 की जनगणना के अनुसार, भारत की जनसंख्या 102.8 करोड़ थी, जो विश्व की कुल आबादी का 16.7% है, जबकि भारत के पास विश्व का केवल 2.4% भू-भाग है। अध्याय में जनसंख्या के असमान वितरण, घनत्व (325 व्यक्ति प्रति वर्ग कि.मी.), और वृद्धि दर (1.93% वार्षिक) पर विस्तार से चर्चा की गई है।
इसमें आयु संरचना, लिंग अनुपात (933/1000), और साक्षरता दर (64.84%) जैसे सूचकों का भी अध्ययन किया गया है। जनसंख्या विस्फोट के नकारात्मक प्रभावों, जैसे—संसाधनों की कमी, बेरोजगारी, गरीबी और पर्यावरणीय असंतुलन को रेखांकित किया गया है।
अंत में, राष्ट्रीय जनसंख्या नीति और परिवार कल्याण कार्यक्रमों के महत्त्व को समझाया गया है। पाठ का निष्कर्ष है कि शिक्षा, स्वास्थ्य और उचित प्रबंधन के माध्यम से ही इस विशाल जनसंख्या को बोझ के बजाय एक मूल्यवान राष्ट्रीय संपदा में परिवर्तित किया जा सकता है।
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❤️ अध्याय 7: भारत के पड़ोसी देश
प्रस्तुत पाठ ‘भारत : भूमि एवं लोग’ (अध्याय 7) में भारत के प्रमुख पड़ोसी देशों—नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, श्रीलंका और पाकिस्तान—का विस्तृत भौगोलिक अध्ययन किया गया है। नेपाल, जो हिमालय की गोद में बसा है, अपनी प्राकृतिक सुंदरता और माउंट एवरेस्ट जैसी चोटियों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ पर्यटन और जलविद्युत की अपार संभावनाएँ हैं।
भूटान एक छोटा पर्वतीय देश है जहाँ वन संपदा प्रचुर मात्रा में है और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष जोर दिया जाता है। बांग्लादेश, नदियों का देश है जो विश्व के सबसे बड़े डेल्टा पर स्थित है। यहाँ की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि, विशेषकर चावल और जूट उत्पादन पर निर्भर है, हालाँकि बाढ़ यहाँ की एक प्रमुख समस्या है।
श्रीलंका, जिसे ‘पूर्व का मोती’ कहा जाता है, अपनी उष्णकटिबंधीय जलवायु और व्यावसायिक फसलों जैसे चाय, रबर और मसालों के लिए जाना जाता है। पाकिस्तान, भारत का एक महत्वपूर्ण पश्चिमी पड़ोसी है। सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियाँ इस शुष्क क्षेत्र की जीवनरेखा हैं, जिन पर यहाँ की कृषि आधारित है।
पाठ में इन सभी देशों की भौतिक संरचना, जलवायु, प्राकृतिक संसाधनों और आर्थिक गतिविधियों का वर्णन करते हुए, भारत के साथ उनके घनिष्ठ संबंधों को रेखांकित किया गया है।
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❤️ अध्याय 8: मानचित्र अध्ययन
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❤️ अध्याय 9: क्षेत्रीय अध्ययन
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❤️ अध्याय 10: आपदा प्रबंधन : एक परिचय
प्रस्तुत अध्याय ‘आपदा प्रबंधन : एक परिचय’, जो ‘भारत : भूमि एवं लोग’ पुस्तक का हिस्सा है, आपदाओं और उनके प्रबंधन पर विस्तृत जानकारी प्रदान करता है। आपदाएँ, चाहे वे प्राकृतिक हों (जैसे भूकंप, सुनामी) या मानवजनित (जैसे रासायनिक दुर्घटनाएं, दंगे), मानव जीवन और संसाधनों के लिए विनाशकारी सिद्ध होती हैं। पाठ में इस बात पर जोर दिया गया है कि यद्यपि आपदाओं को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, परंतु उचित प्रबंधन से उनके दुष्प्रभावों को कम किया जा सकता है।
आपदा प्रबंधन के चार मुख्य घटक बताए गए हैं: पूर्व तैयारी, जवाबी कार्रवाई, पुनर्वास और रोकथाम। आपदा पूर्व तैयारी में सामुदायिक जागरूकता, मॉक ड्रिल और चेतावनी प्रणालियों का ज्ञान शामिल है। आपदा के दौरान राहत कार्य, जैसे भोजन, चिकित्सा और बचाव दल की तैनाती महत्वपूर्ण होती है।
इसके पश्चात, सामान्य जीवन की बहाली और नवनिर्माण का कार्य आता है। पाठ में बच्चों और सामान्य नागरिकों की भूमिका को भी रेखांकित किया गया है, जैसे गुड्डू द्वारा डूबते बच्चे को बचाने का उदाहरण। राष्ट्रीय स्तर पर सरकार द्वारा आकस्मिक निधि, उपग्रह सूचना प्रणाली और प्रशिक्षण केंद्रों जैसे अनेक उपाय किए जा रहे हैं।
अंततः, आपदा प्रबंधन की सफलता के लिए ग्राम सभा और सामुदायिक भागीदारी को अनिवार्य बताया गया है।
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❤️ अध्याय 11: मानवी गलतियों के कारण घटित आपदाएं : नाभिकीय , जैविक और रासायनिक
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❤️ अध्याय 13: समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन
यह पाठ ‘भारत : भूमि एवं लोग’ पुस्तक के ‘समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन’ अध्याय का सारांश है। इसमें आपदाओं के प्रभाव को कम करने में स्थानीय समुदाय की केंद्रीय भूमिका पर प्रकाश डाला गया है। भारत की प्राचीन सामुदायिक संस्कृति और आपसी सहयोग की भावना को आपदा प्रबंधन का आधार बताया गया है।
आपदा प्रबंधन के तीन प्रमुख अंग बताए गए हैं: पूर्वानुमान व चेतावनी, आपदा के समय बचाव कार्य, और आपदा के बाद राहत व पुनर्वास। चूंकि आपदा का पहला झटका समुदाय को लगता है, इसलिए प्रथम प्रतिक्रिया भी समुदाय की ओर से ही आती है। उदाहरण के लिए, आगजनी जैसी घटनाओं में अग्निशमन दल के पहुँचने से पूर्व ग्रामीणों द्वारा किया गया प्राथमिक उपचार और बचाव कार्य जान-माल की हानि को कम कर सकता है।
पाठ में ग्रामीण स्तर पर एक ‘आपदा प्रबंधन समिति’ के गठन का प्रस्ताव है, जिसमें मुखिया, सरपंच, डॉक्टर और अन्य सदस्य शामिल होते हैं। यह समिति चेतावनी फैलाने, राहत शिविरों की व्यवस्था करने और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए उत्तरदायी है। निष्कर्षतः, आपदाओं से निपटने के लिए तकनीकी तैयारी के साथ-साथ सामुदायिक एकता, जागरूकता और ‘अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता’ जैसे सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
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Nice 👍
thanks @Vivek