Bihar Board 4th EVS Book 2026 PDF Download (पर्यावरण और हम)
Bihar Board Class 4 EVS Book 2026 PDF Download – इस पेज पर बिहार बोर्ड 6th के छात्रों के लिए “Environmental Studies (पर्यावरण और हम)” Book दिया गया है | जिसे आप अपने फ़ोन में Free Download कर सकते हैं |
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BSEB Class 4 Environmental Studies Textbook PDF Free Download
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❤️ पाठ 1: रंग बिरंगे खिलते फूल
यह पुस्तक का अंश ‘पर्यावरण और हम’ विषय के अंतर्गत ‘रंग-बिरंगे खिलते फूल’ नामक पाठ पर आधारित है। इसमें फूलों की विविधता, उनकी विशेषताओं और मानव जीवन में उनके महत्व का विस्तार से वर्णन किया गया है।
पाठ की शुरुआत एक कविता से होती है जो लाल, पीले और सतरंगी फूलों की सुंदरता और उनकी भीनी-भीनी खुशबू का गुणगान करती है। पुस्तक में छात्रों के लिए विभिन्न गतिविधियाँ दी गई हैं, जैसे दिन और रात में खिलने वाले फूलों की पहचान करना, मौसम के अनुसार फूलों का वर्गीकरण करना और फूलों के खिलने के स्थान (पेड़, झाड़ी या लता) के आधार पर उन्हें श्रेणीबद्ध करना।
इसके अलावा, यह कलियों से फूल बनने की प्रक्रिया और फूलों के व्यावसायिक उपयोग पर भी प्रकाश डालता है। पाठ यह समझने में मदद करता है कि फूल न केवल प्रकृति की सुंदरता बढ़ाते हैं, बल्कि शहद, इत्र और माला बनाने के काम भी आते हैं।
साथ ही, यह फूलों की खेती और बिक्री से जुड़े लोगों की आजीविका के बारे में भी जानकारी प्रदान करता है। छात्र इस पाठ के माध्यम से अपने आस-पास के पर्यावरण और वनस्पतियों के प्रति जागरूक हो सकते हैं।
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❤️ पाठ 2: कोई देता अंडे, कोई देता बच्चे
यह पाठ ‘कोई देता अंडे, कोई देता बच्चे’ मुख्य रूप से जीव-जंतुओं के प्रजनन और उनके बच्चों के जन्म की प्रक्रियाओं पर आधारित है। पाठ की शुरुआत नीतू और नीशू की कहानी से होती है, जो गौरैया के घोंसला बनाने और अंडे देने की प्रक्रिया को उत्सुकता से देखती हैं।
इसके माध्यम से बच्चों को यह समझाया गया है कि कुछ जीव अंडे देते हैं, जबकि कुछ सीधे बच्चों को जन्म देते हैं। पाठ में विभिन्न गतिविधियों और तालिकाओं के जरिए छात्रों को यह पहचानने के लिए प्रोत्साहित किया गया है कि कौन से जीव एक बार में एक अंडा या बच्चा देते हैं और कौन एक से अधिक।
इसमें गाय, कुत्ता, बकरी और व्हेल जैसे स्तनधारियों तथा मुर्गी, सांप, छिपकली और कछुए जैसे अंडा देने वाले जीवों का उदाहरण दिया गया है। अंत में एक कविता के माध्यम से इन अवधारणाओं को सरल बनाया गया है।
यह पाठ प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और जीवों की देखभाल करने की शिक्षा भी प्रदान करता है।
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❤️ पाठ 3: हड़बड़ मे गड़बड़
यह पाठ ‘हड़बड़ में गड़बड़’ पर्यावरण अध्ययन की पुस्तक ‘पर्यावरण और हम’ का एक रोचक अध्याय है। कहानी की शुरुआत जंगल में जानवरों की एक सभा से होती है, जहाँ जानवरों के बच्चे अपनी तस्वीर बनवाने की ज़िद करते हैं। राजा शेर गोलू खरगोश को चित्र बनाने का आदेश देता है।
हड़बड़ाहट और बच्चों के शोर के कारण गोलू खरगोश गलतियाँ कर बैठता है और एक जानवर के कान दूसरे के सिर पर बना देता है। इसके माध्यम से छात्रों को विभिन्न जानवरों के शारीरिक लक्षणों जैसे कान और खाल के बारे में सिखाया गया है। पाठ यह महत्वपूर्ण वैज्ञानिक तथ्य स्पष्ट करता है कि जिन जानवरों के कान बाहर दिखाई देते हैं और शरीर पर बाल होते हैं, वे बच्चे देते हैं।
इसके विपरीत, जिन जीवों के कान छिद्रों के रूप में होते हैं (दिखाई नहीं देते) और शरीर पर बाल नहीं होते, वे अंडे देते हैं। इसमें पक्षियों, छिपकली और मगरमच्छ जैसे जीवों के उदाहरण दिए गए हैं। यह पाठ बच्चों को अवलोकन कौशल विकसित करने और पालतू जानवरों की देखभाल के प्रति जागरूक करने के लिए गतिविधियों और तालिकाओं का उपयोग करता है।
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❤️ पाठ 4: त्योहार और भोजन
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❤️ पाठ 5: स्वाद अलग-अलग
यह पाठ ‘स्वाद अलग-अलग’ और ‘दाँत बत्तीसी’ विषयों पर केंद्रित है। इसमें विभिन्न खाद्य पदार्थों जैसे जलेबी, अचार और करेले के स्वादों की पहचान करने का अभ्यास दिया गया है।
पुस्तक यह समझाती है कि हमें जीभ की सहायता से स्वाद का पता चलता है। इसके अतिरिक्त, दाँतों की संरचना और उनके कार्यों का विस्तृत वर्णन है।
दाँतों को उनके कार्य के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा गया है: काटने वाले (कृन्तक), छीलने वाले (रदनक) और चबाने वाले (चवर्णक)। पाठ में बच्चों और वयस्कों के दाँतों की संख्या में अंतर और दूध के दाँतों के बारे में भी जानकारी दी गई है।
यह भी बताया गया है कि दाँतों की सफाई न रखने से बीमारियाँ हो सकती हैं। अंत में, जानवरों जैसे घोड़ा, शेर, साँप और मगरमच्छ के दाँतों के बारे में रोचक तथ्य साझा किए गए हैं, जो बताते हैं कि कुछ जानवर जीवन में कई बार अपने दाँत बदलते हैं।
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❤️ पाठ 6: हरियाली और हम
यह पाठ पर्यावरण और मानव जीवन के बीच के गहरे संबंध को दर्शाता है। इसमें माला के गाँव के माध्यम से प्रकृति की सुंदरता और पेड़-पौधों की महत्ता का वर्णन किया गया है।
पेड़ हमारे लिए अत्यंत उपयोगी हैं; वे हमें लकड़ी, फल, अनाज, औषधियाँ और छाया प्रदान करते हैं। पाठ में राजस्थान के खेजड़ली गाँव की अमृता देवी की सच्ची कहानी बताई गई है, जिन्होंने लगभग 300 साल पहले पेड़ों को बचाने के लिए अपना बलिदान दे दिया था।
जब राजा के सैनिक महल बनाने के लिए लकड़ी काटने आए, तो अमृता और गाँव वालों ने पेड़ों से लिपटकर उनका विरोध किया। इस बलिदान से प्रेरित होकर राजा ने उस क्षेत्र में पेड़ काटने और शिकार करने पर रोक लगा दी।
आज भी वह इलाका रेगिस्तान के बीच हरा-भरा है क्योंकि वहाँ के लोग प्रकृति की रक्षा करते हैं। यह पाठ हमें संदेश देता है कि पेड़-पौधों के बिना मानव जीवन संभव नहीं है और हमें अपनी हरियाली को बचाने के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए।
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❤️ पाठ 7: जड़ो की पकड़
यह पाठ ‘जड़ों की पकड़’ पौधों के जीवन में जड़ों की महत्वपूर्ण भूमिका को समझाता है। कहानी की शुरुआत सलिल, समीर और पिंकी से होती है जो एक सूखे (ठूंठ) पीपल के पेड़ को पुनर्जीवित करने का प्रयास करते हैं। रामू काका उन्हें बताते हैं कि मिट्टी के कटाव के कारण जड़ें बाहर आ गई थीं, जिससे पेड़ को पोषण नहीं मिल रहा था।
बच्चों द्वारा मिट्टी डालने और पानी देने से पेड़ फिर से हरा-भरा हो जाता है। पाठ में प्रयोगों के माध्यम से दिखाया गया है कि जड़ें न केवल पौधों को जमीन में मजबूती से थामे रखती हैं, बल्कि मिट्टी से पानी और पोषक तत्वों को अवशोषित कर तने और पत्तियों तक पहुँचाती हैं। इसमें मूँग, गेहूँ और घास जैसे पौधों की जड़ों के प्रकारों और उनकी पकड़ की तुलना की गई है।
इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया के ‘रेगिस्तानी ओक’ का उदाहरण दिया गया है जिसकी जड़ें पानी की तलाश में बहुत गहराई तक जाती हैं। अंत में, यह भी बताया गया है कि गाजर, मूली और शलजम जैसी कुछ जड़ें भोजन के रूप में खाई जाती हैं। यह अध्याय पर्यावरण संरक्षण और वनस्पतियों के आधार स्तम्भ, जड़ों के वैज्ञानिक और व्यावहारिक महत्व पर प्रकाश डालता है।
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❤️ पाठ 8: देख तमाशा
यह पुस्तक ‘पर्यावरण और हम’ प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों के लिए तैयार की गई है, जो उनके दैनिक जीवन के अनुभवों और सामाजिक परिवेश पर आधारित है। पुस्तक का मुख्य उद्देश्य बच्चों को उनके आस-पास के वातावरण, संस्कृति और सामाजिक रिश्तों की समझ विकसित करना है। प्रस्तुत अंश में ‘देख तमाशा’ और ‘जब मामाजी घर आए’ जैसे पाठों के माध्यम से मनोरंजन के साधनों और पारिवारिक बदलावों को दर्शाया गया है।
‘देख तमाशा’ पाठ में मेले के आनंद, विभिन्न प्रकार के पकवानों, झूलों और जोकर के करतबों का वर्णन है। साथ ही, बच्चों को फिल्म ‘तारे जमीं पर’ के माध्यम से सिनेमा और पतंगबाजी जैसे मनोरंजन के अन्य माध्यमों से भी परिचित कराया गया है। पुस्तक में मकर संक्रांति जैसे त्योहारों पर विभिन्न राज्यों में पतंग उड़ाने की परंपरा का भी उल्लेख है।
दूसरे भाग में, पारिवारिक संरचना में आने वाले बदलावों, जैसे विवाह के बाद रिश्तों में परिवर्तन और नौकरी या अन्य कारणों से परिवार के सदस्यों का एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना, विषयों पर चर्चा की गई है। प्रश्नों और तालिकाओं के माध्यम से छात्रों को अपने परिवार के इतिहास और सामाजिक संबंधों को समझने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। यह पुस्तक सरल हिंदी भाषा में रोचक गतिविधियों के साथ बच्चों के सर्वांगीण विकास पर केंद्रित है।
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❤️ पाठ 9: जब मामाजी घर आए
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❤️ पाठ 10: छठ पर्व और बच्चे
यह पुस्तक का अंश ‘पर्यावरण और हम’ श्रृंखला के दसवें पाठ ‘छठ पर्व और बच्चे’ से लिया गया है। यह मुख्य रूप से बच्चों के माध्यम से छठ पर्व के सामाजिक और पारिवारिक महत्व पर प्रकाश डालता है। कहानी में शिवांगी, रमेश, कार्तिक और विकास जैसे बच्चे आपस में बातचीत कर रहे हैं।
वे चर्चा करते हैं कि कैसे पर्वों के अवसर पर परिवार के सभी सदस्य, जो काम के सिलसिले में बाहर रहते हैं, एक साथ एकत्रित होते हैं। बच्चे पर्व की तैयारी में बड़ों की मदद करने जैसे ठेकुआ बनाना या बाजार से सामान लाना, के अपने अनुभव साझा करते हैं। पाठ में केवल उत्सव की ही बात नहीं है, बल्कि यह परिवार की आय, रोजगार के लिए पलायन और घरेलू निर्णय लेने की प्रक्रिया जैसे गंभीर विषयों को भी छूता है।
यह इस बात पर जोर देता है कि परिवार में सामूहिक निर्णय लेना क्यों महत्वपूर्ण है, जैसे शिवांगी की दीदी की उच्च शिक्षा के लिए भुवनेश्वर जाने का फैसला अंततः सबकी सहमति से लिया गया। इसके अतिरिक्त, पाठ बच्चों को अपने परिवार के सदस्यों से सीखने और विभिन्न कार्यों की सूची बनाने के लिए प्रेरित करता है। कुल मिलाकर, यह अध्याय बच्चों को समाज, परिवार और संस्कृति के साथ जोड़ने का एक शैक्षिक प्रयास है।
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❤️ पाठ 11: आओ बनाएँ नक्शा
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❤️ पाठ 12: अपना प्यारा घर
यह कहानी ‘अपना प्यारा घर’ एक नन्ही गौरैया के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अंडे देने के लिए एक सुरक्षित और आरामदायक घोंसला बनाना चाहती है। अपने आदर्श घर की तलाश में, वह विभिन्न पक्षियों से मिलती है और उनके घोंसलों का निरीक्षण करती है।
गुट्कू कबूतर उसे लापरवाही से केवल चार तिनके जमाकर काम चलाने की सलाह देता है, जबकि मिट्ठू तोता उसे पेड़ के कोटर में रहने को कहता है। बया का घोंसला सुंदर है लेकिन जटिल है, और दर्जिन चिड़िया का घोंसला उसकी विशिष्ट चोंच के बिना बनाना असंभव है।
नन्ही को कौए का घोंसला बहुत कठोर और कँटीला लगता है। अंत में, एक नीलकंठ की सलाह पर, वह किसी की नकल करने के बजाय अपनी जरूरत और तरीके के अनुसार अपना घोंसला खुद बनाती है।
जब वह उसमें अपने अंडे देती है, तो उसे एहसास होता है कि खुद की मेहनत से बनाया गया वह घर ही उसके लिए सबसे प्यारा और अनोखा है। यह पाठ हमें स्वावलंबन और अपनी विशिष्टता को पहचानने की सीख देता है।
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❤️ पाठ 13: खेत से घर तक
यह पाठ ‘खेत से घर तक’ कृषि प्रक्रिया और खाद्य आपूर्ति श्रृंखला का विस्तृत वर्णन करता है। बसंती नाम की एक लड़की के माध्यम से, यह पाठ खेती की विभिन्न अवस्थाओं जैसे जुताई, बुवाई, निराई-गुड़ाई, सिंचाई और कटाई की जानकारी देता है।
इसमें अनाज, दलहन, तिलहन और सब्जियों के उत्पादन के बारे में बताया गया है। पाठ में मौसमी फसलों (रबी और खरीफ) के बीच के अंतर को स्पष्ट किया गया है और बिचड़ों (नर्सरी) के माध्यम से उगाई जाने वाली फसलों जैसे धान, प्याज और मिर्च के बारे में चर्चा की गई है।
इसके अतिरिक्त, रामाधीन और करीम चाचा जैसे पात्रों के माध्यम से सब्जियों के खेत से बाजार तक पहुँचने के सफर को समझाया गया है। यह छात्रों को स्थानीय बाजारों, मसालों के उपयोग और उनके मूल उत्पादन क्षेत्रों के बारे में जागरूक करता है।
पाठ का मुख्य उद्देश्य बच्चों को भोजन की महत्ता और उसे उपजाने वाले किसानों की मेहनत से परिचित कराना है। इसमें विभिन्न तालिकाएँ और परियोजना कार्य भी शामिल हैं ताकि छात्र अपने आसपास की कृषि व्यवस्था को व्यावहारिक रूप से समझ सकें।
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❤️ पाठ 14: बालमेला और खेल
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❤️ पाठ 15: आस-पास की सफाई
यह पाठ ‘आस-पास की सफाई’ के महत्व पर केंद्रित है। इसमें एक कविता के माध्यम से यह समझाया गया है कि किस प्रकार लोग नाले में कूड़ा-कचरा, पॉलीथीन, रद्दी कपड़े और बासी खाना फेंककर उसे जाम कर देते हैं।
नाले के जाम होने से पानी सड़कों पर फैल जाता है और चारों ओर गंदगी फैल जाती है, जो बीमारियों का कारण बनती है। कविता हमें संदेश देती है कि कूड़ा यहाँ-वहाँ न फेंककर एक गड्ढे या कूड़ेदान में डालना चाहिए।
आस-पास की सफाई रखना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। पाठ के अंत में कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे गए हैं जो बच्चों को स्वच्छता के लाभ, गंदगी से होने वाले नुकसान और घर से निकलने वाले बेकार कचरे की पहचान करने के लिए प्रेरित करते हैं।
मुख्य रूप से यह अध्याय नागरिक चेतना और कूड़ेदान के सही उपयोग की समझ विकसित करने का प्रयास करता है। स्वच्छ परिवेश ही स्वस्थ जीवन का आधार है, इसलिए हमें पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाने के लिए कचरा प्रबंधन के प्रति जागरूक रहना चाहिए।
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❤️ पाठ 16: मीठा-मीठा शहद
‘मीठा-मीठा शहद’ अध्याय मधुमक्खियों के जीवन और शहद उत्पादन की प्रक्रिया पर केंद्रित है। कहानी की शुरुआत सोनी, मोनी, राजेश और नंदन द्वारा बगीचे में एक बड़ा मधुमक्खी का छत्ता देखने से होती है। वे मधुमक्खियों के बारे में जानने के लिए उमा दीदी के पास जाते हैं, जो मधुमक्खी पालन का कार्य करती हैं।
उमा दीदी उन्हें बताती हैं कि छत्ते में तीन प्रकार की मधुमक्खियाँ होती हैं: रानी मधुमक्खी (जो अंडे देती है), मादा श्रमिक मधुमक्खियाँ (जो रस इकट्ठा करती हैं, शहद और मोम बनाती हैं) और नर मधुमक्खी। बच्चे सीखते हैं कि श्रमिक मधुमक्खियाँ फूलों के रस का पता चलने पर नाचकर दूसरों को संकेत देती हैं। उमा दीदी लकड़ी के बक्से में मधुमक्खी पालन की आधुनिक विधि और शहद निकालने के यंत्र के बारे में भी समझाती हैं, जिससे छत्ते को नुकसान नहीं पहुँचता।
शहद के औषधीय गुणों और इसके आर्थिक महत्व पर भी चर्चा की गई है। अंत में, यह पाठ छात्रों को प्रकृति के इस मेहनती जीव के प्रति जागरूक करता है और मधुमक्खी पालन को एक व्यवसाय के रूप में समझने में मदद करता है। यह अध्याय सरल भाषा में जीव विज्ञान और पर्यावरण शिक्षा का समन्वय है।
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❤️ पाठ 17: तरह-तरह के पक्षी
यह पाठ पक्षियों की विविधता और उनकी शारीरिक विशेषताओं पर केंद्रित है। इसमें बताया गया है कि हमारे आसपास कई प्रकार के पक्षी पाए जाते हैं, जो आकार और रंग में एक-दूसरे से भिन्न होते हैं।
पाठ मुख्य रूप से पक्षियों की चोंच और पंजों की बनावट के माध्यम से उनकी जीवनशैली को समझाने का प्रयास करता है। पक्षियों की चोंच उनके भोजन की आदतों को दर्शाती है; उदाहरण के लिए, मांस खाने वाले पक्षियों की चोंच चीरने-फाड़ने के लिए, जबकि बीज खाने वालों की चोंच कड़े दानों को फोड़ने के लिए अनुकूल होती है।
इसी प्रकार, पंजों की बनावट उनके निवास स्थान और गतिविधियों, जैसे पेड़ की डाल पकड़ना, पानी में तैरना, शिकार करना या जमीन पर चलने को प्रभावित करती है। पाठ में पहेलियों और गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को पक्षियों के नाम, उनके रंग, भोजन और व्यवहार को बारीकी से देखने और समझने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।
यह शैक्षिक सामग्री पर्यावरण और जीवों के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने में सहायक है।
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❤️ पाठ 18: जंगल मे पिकनिक
यह पुस्तक ‘पर्यावरण और हम’ का एक अंश है, जिसमें ‘जंगल में पिकनिक’ नामक पाठ के माध्यम से बच्चों को जीव-जंतुओं के जीवन और व्यवहार से परिचित कराया गया है। कविता के रूप में वर्णित यह पाठ बताता है कि कैसे जंगल में विभिन्न जानवर जैसे बिल्ली, घोड़ा, चींटी, गाय, भालू, और बंदर मिलकर पिकनिक मनाते हैं और साथ में खीर पकाकर खाते हैं।
इसमें जानवरों के आपसी सहयोग और उनके खान-पान को दर्शाया गया है। पुस्तक में केवल मनोरंजन ही नहीं, बल्कि शैक्षिक गतिविधियाँ भी शामिल हैं, जैसे जंगली और पालतू जानवरों के बीच अंतर करना, सवारी और सामान ढोने वाले पशुओं की पहचान करना और पशुओं के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना।
लवली और बैलगाड़ी की कहानी के माध्यम से पशु क्रूरता पर चर्चा की गई है, जबकि मीकू बंदर की कहानी सामाजिक व्यवहार और समूह में रहने के महत्व को समझाती है। अंत में, विद्यार्थियों को समूह में रहने वाले जीवों के लाभों पर विचार करने और परियोजना कार्य के माध्यम से अपने ज्ञान को सुदृढ़ करने के लिए प्रेरित किया गया है।
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❤️ पाठ 19: ककोलत से कन्याकुमारी
यह पाठ ‘ककोलत से कन्याकुमारी’ बच्चों को जल संसाधनों के महत्व, उनकी विविधता और संरक्षण के बारे में शिक्षित करता है। कहानी की शुरुआत नन्ही, अंकुर, मान्या और स्वीटी की नवादा स्थित ककोलत झरने की यात्रा से होती है।
इसके माध्यम से बच्चों को ठंडे और गर्म जल के स्रोतों जैसे राजगीर के ब्रह्म कुण्ड के बारे में जानकारी मिलती है। पाठ में कन्याकुमारी और हिन्द महासागर का वर्णन कर विशाल जल भंडारों और समुद्री जीवन (शंख, सीप) का परिचय दिया गया है।
मुख्य रूप से यह अध्याय जल प्रदूषण की गंभीर समस्या पर प्रकाश डालता है; कैसे कूड़ा-कचरा और प्लास्टिक नदियों को गंदा करते हैं, जिससे हैजा और पीलिया जैसी बीमारियाँ फैलती हैं। लेखक ने जल के वैज्ञानिक गुणों जैसे वाष्पीकरण, बादल बनने की प्रक्रिया और जल की घुलनशीलता को भी सरल प्रयोगों द्वारा समझाया है।
अंत में, यह संदेश दिया गया है कि जल जीवन के लिए अनिवार्य है, इसलिए हमें इसकी बर्बादी रोकनी चाहिए और जल स्रोतों को प्रदूषित होने से बचाने के लिए सक्रिय कदम उठाने चाहिए।
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❤️ पाठ 20: हमारे मददगार-कामगार
यह पुस्तक का अंश ‘पर्यावरण और हम’ श्रृंखला के अंतर्गत पाठ 20 ‘हमारे मददगार – कामगार’ पर केंद्रित है। यह मुख्य रूप से समाज में विभिन्न प्रकार के कामगारों और उनकी भूमिकाओं के बारे में प्राथमिक स्तर के छात्रों को शिक्षित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
पाठ की शुरुआत पहेलियों के माध्यम से होती है, जिसमें दर्जी, सुनार, हलवाई और बढ़ई जैसे विभिन्न पेशों की पहचान की जाती है। यह सामग्री समाज के आर्थिक चक्र में इन कामगारों के महत्व पर जोर देती है, जैसे कि कुम्हार मिट्टी के बर्तन बनाता है, लोहार लोहे के औजार बनाता है, और मोची जूते ठीक करता है।
इसमें किसानों और अन्य कारीगरों के बीच की पारस्परिकता और परस्पर निर्भरता को भी स्पष्ट किया गया है, जहाँ किसान कच्चा माल प्रदान करते हैं और कामगार बदले में खेती के लिए आवश्यक औजार और उपकरण देते हैं। यह पाठ छात्रों को अपने परिवेश के कामगारों का अवलोकन करने, उनकी कार्यप्रणाली को समझने और उनके श्रम का सम्मान करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
अंत में, यह पशुपालन और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के बारे में भी जानकारी प्रदान करता है, जिससे छात्रों में सामाजिक और आर्थिक समझ विकसित होती है।
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❤️ पाठ 21: तरह-तरह के घर
यह पाठ ‘तरह-तरह के घर’ बच्चों को घरों की विविधता और उनके निर्माण की प्रक्रिया से परिचित कराता है। कहानी की शुरुआत पवन और सोनम के खेल से होती है, जहाँ वे छतरियों से एक अस्थायी घर बनाने की कोशिश करते हैं। उनके दादाजी उन्हें समझाते हैं कि घर विभिन्न प्रकार के होते हैं और उन्हें मज़बूत बनाना आवश्यक है।
पाठ में मिट्टी, पत्थर, ईंट, सीमेंट और घास-फूस से बने घरों के बीच अंतर बताया गया है। दादाजी पुराने समय के खपरैल के घरों और आधुनिक शहरों की बहुमंज़िला इमारतों (अपार्टमेंट) की तुलना करते हैं। इसमें भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर घरों के स्वरूप का भी वर्णन है, जैसे बर्फीले क्षेत्रों में बर्फ की सिल्लियों से बने ‘इग्लू’।
पाठ छात्रों को क्रियात्मक गतिविधियों के माध्यम से ईंट बनाना, दीवार खड़ी करना और अपना छोटा घरौंदा तैयार करना सिखाता है। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को वास्तुकला की बुनियादी समझ, निर्माण सामग्री की उपलब्धता और पर्यावरण के अनुसार घरों की ज़रूरत को समझाना है। यह अध्याय सामाजिक और पर्यावरणीय शिक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो बच्चों में अवलोकन और सृजनात्मक कौशल विकसित करता है।
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❤️ पाठ 22: अजय जब गाँव लौटे
यह पुस्तक ‘पर्यावरण और हम’ मुख्य रूप से सामाजिक और पर्यावरणीय विषयों पर आधारित है। इसमें अजय नामक व्यक्ति की कहानी के माध्यम से ग्रामीण जीवन में आए बदलावों को दर्शाया गया है।
अजय जब तीस वर्षों बाद अपने पैतृक गाँव लौटता है, तो वह कच्चे घरों और कच्ची गलियों की जगह पक्के मकानों, शौचालयों और पक्की सड़कों को देखकर चकित रह जाता है। पुस्तक में घर बनाने की सामग्री, राजमिस्त्री के औजारों और विभिन्न प्रकार के पुलों (जैसे बाँस का पुल, हावड़ा ब्रिज और महात्मा गाँधी सेतु) के बारे में विस्तार से चर्चा की गई है।
इसके अतिरिक्त, पुस्तक विभिन्न प्रकार की गंध, आवाजों और स्पर्श के अनुभवों के माध्यम से बच्चों को अपनी इंद्रियों के प्रति जागरूक बनाती है। इसमें पद्मश्री भरत मिश्र जैसे प्रेरक व्यक्तियों की कहानी भी शामिल है, जिन्होंने दृष्टिबाधित होने के बावजूद अपनी मेहनत से उच्च शिक्षा प्राप्त की और समाज में नाम कमाया।
पुस्तक सामाजिक सुरक्षा और संवेदनशीलता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी प्रकाश डालती है, जैसे कि बच्चों को ‘अच्छे स्पर्श’ और ‘बुरे स्पर्श’ के बीच के अंतर को समझना सिखाना। यह पुस्तक विद्यार्थियों को अपने आस-पास के वातावरण को समझने और सामाजिक चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रेरित करती है।
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❤️ पाठ 23: आस-पास की खोज खबर
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❤️ पाठ 24: चिड़ियाघर की सैर
यह पाठ मध्य विद्यालय नगदेवा के बच्चों की पटना चिड़ियाघर की एक शैक्षिक यात्रा का वर्णन करता है। यात्रा के दौरान, बच्चे विभिन्न पशु-पक्षियों जैसे मोर, बाघ और अन्य वन्यजीवों को देखते हैं।
शिक्षिका दीदी बच्चों को इन जानवरों के माध्यम से भारत के राष्ट्रीय प्रतीकों के बारे में विस्तार से जानकारी देती हैं। पाठ में मोर को राष्ट्रीय पक्षी, बाघ को राष्ट्रीय पशु और कमल को राष्ट्रीय फूल के रूप में पेश किया गया है।
इसके अतिरिक्त, बच्चे सारनाथ के अशोक स्तंभ से लिए गए राष्ट्रीय चिह्न के बारे में सीखते हैं और तिरंगे झंडे के रंगों—केसरिया, सफेद, और हरा—के महत्व को समझते हैं। वे ‘जन-गण-मन’ (राष्ट्रगान) और ‘वन्दे मातरम्’ (राष्ट्रगीत) के रचयिताओं और उनके सम्मान के नियमों के बारे में भी चर्चा करते हैं।
यह अध्याय मनोरंजक तरीके से बच्चों को देश की प्रकृति और देशभक्ति के प्रतीकों से परिचित कराता है, जिससे उनमें अपने देश के प्रति गौरव और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित होती है।
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❤️ पाठ 25: बंटी का सफर
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social science download karne me problem ho Rahi hai
hey @Afroz, डाउनलोड पेज पर फाइल्स के कई अल्टरनेटिव लिंक दिए गये हैं, आप उनमें से किसी से भी बुक को डाउनलोड सकर सकते हैं |
नीचे दिया गया स्क्रीनशॉट देखें –
Thanks!