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Bihar Board Class 6th Geography Book 2026 PDF Download

Last Updated on February 16, 2026 by bseb Leave a Comment

Bihar Board 6th Geography Book 2026 Geography PDF Download (हमारी दुनिया)

Bihar Board Class 6th Geography Book 2026 Geography PDF Download – इस पेज पर बिहार बोर्ड 6th के छात्रों के लिए “Geography (हमारी दुनिया)” Book दिया गया है | जिसे आप अपने फ़ोन में Free Download कर सकते हैं |

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BSEB Class 6 Geography Book PDF Free Download

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❤️ 1. हमारा सौरमंडल

यह पुस्तक सौरमंडल की संरचना और उसके विभिन्न घटकों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करती है। इसमें सूर्य को सौर परिवार का मुखिया बताया गया है, जो आकार में पृथ्वी से बहुत बड़ा है और सौर परिवार के सभी सदस्य इसके प्रकाश से प्रकाशित होते हैं। पुस्तक में आठ मुख्य ग्रहों—बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण और वरुण—का परिचय दिया गया है।

पृथ्वी को एक अनूठा ग्रह बताया गया है जहाँ जल और जीवन मौजूद है, और अधिक जल की उपस्थिति के कारण इसे ‘नीला ग्रह’ भी कहा जाता है। चंद्रमा को पृथ्वी का एकमात्र उपग्रह बताया गया है। इसके अतिरिक्त, पुस्तक में उपग्रहों, क्षुद्रग्रहों, उल्कापिंडों, आकाशगंगा और नक्षत्रों के बारे में भी महत्वपूर्ण वैज्ञानिक जानकारी दी गई है।

ग्रहों की गति, उनके घूमने की दिशा और उपग्रहों की संख्या जैसे तथ्यों को तालिकाओं के माध्यम से समझाया गया है। अंत में, यह संदेश दिया गया है कि खगोलीय घटनाओं को अंधविश्वास के बजाय वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझना चाहिए। यह पुस्तक विद्यार्थियों के लिए खगोल विज्ञान की बुनियादी समझ विकसित करने हेतु एक सरल और प्रभावी माध्यम है।

 

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❤️ 2. पृथ्वी एवं उसकी गतियाँ

यह अध्याय पृथ्वी की विभिन्न गतियों और उनके प्रभावों का विस्तृत वर्णन करता है। पृथ्वी दो प्रकार की गतियाँ करती है: घूर्णन (दैनिक गति) और परिभ्रमण (वार्षिक गति)।

पृथ्वी अपने काल्पनिक अक्ष पर 23½° झुकी हुई है और पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है। घूर्णन गति के कारण दिन और रात होते हैं, जबकि सूर्य के चारों ओर परिभ्रमण करने और अक्षीय झुकाव के कारण ऋतुओं में परिवर्तन होता है।

अध्याय में महत्वपूर्ण तिथियों जैसे 21 जून (सबसे बड़ा दिन), 22 दिसंबर, 21 मार्च और 23 सितंबर (समदिवारात्रि) की व्याख्या की गई है। पृथ्वी की गोलाकार सतह और सूर्य की किरणों के झुकाव के आधार पर इसे तीन प्रमुख ताप कटिबंधों में विभाजित किया गया है: उष्ण कटिबंध (जहाँ सीधी किरणें पड़ती हैं और अत्यधिक गर्मी होती है), शीतोष्ण कटिबंध (जहाँ मध्यम तापमान रहता है), और शीत कटिबंध (ध्रुवीय क्षेत्र जहाँ अत्यधिक तिरछी किरणों के कारण वर्षभर बर्फ जमी रहती है)।

ध्रुवों पर छह महीने का दिन और छह महीने की रात होने का वैज्ञानिक कारण भी स्पष्ट किया गया है। यह पाठ ग्लोब और चित्रों के माध्यम से भौगोलिक अवधारणाओं को सरल तरीके से समझाता है।

 

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❤️ 3. पृथ्वी के परिमंडल

यह पुस्तक का अंश ‘पृथ्वी के परिमंडल’ विषय पर केंद्रित है, जो पृथ्वी को जीवन के लिए एकमात्र ज्ञात और अद्वितीय ग्रह के रूप में प्रस्तुत करता है। इसमें पृथ्वी के तीन मुख्य मंडलों—जलमंडल, स्थलमंडल और वायुमंडल—का विस्तृत वर्णन किया गया है।

जलमंडल पृथ्वी के लगभग 71 प्रतिशत भाग को कवर करता है, जिसमें महासागर, नदियाँ और झीलें शामिल हैं; अंतरिक्ष से इसके नीले दिखाई देने के कारण पृथ्वी को ‘नीला ग्रह’ भी कहा जाता है। स्थलमंडल पृथ्वी की वह ऊपरी ठोस परत है जहाँ मिट्टी, पहाड़ और मैदान पाए जाते हैं और जहाँ मनुष्य निवास व कृषि करता है।

वायुमंडल पृथ्वी के चारों ओर हवा का घेरा है, जिसमें ऑक्सीजन और नाइट्रोजन जैसी महत्वपूर्ण गैसें और विभिन्न परतें जैसे क्षोभमंडल और समतापमंडल शामिल हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जहाँ ये तीनों मंडल आपस में मिलते हैं, उसे ‘जैवमंडल’ कहा जाता है, जो जीवन के पनपने के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ प्रदान करता है।

पाठ में जल संधि और स्थल संधि जैसे भौगोलिक शब्दों को भी समझाया गया है और यह निष्कर्ष निकाला गया है कि जीवन के लिए हवा, पानी और भोजन की उपलब्धता अनिवार्य है।

 

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❤️ 4. पृथ्वी के प्रमुख स्थल रूप

यह पुस्तक अध्याय ‘पृथ्वी के प्रमुख स्थल रूप’ में विभिन्न भौगोलिक संरचनाओं जैसे पर्वत, पठार और मैदान का विस्तार से वर्णन करती है। कहानी की शुरुआत बच्चों की एक रेल यात्रा से होती है, जहाँ वे बिहार के मैदानी इलाकों से होकर गुजरते हैं और अपने-अपने क्षेत्रों की भौगोलिक विविधताओं पर चर्चा करते हैं।

पुस्तक मैदानों को कृषि के लिए आदर्श और घनी आबादी वाला क्षेत्र बताती है, जहाँ धान और गेहूं जैसी फसलें उगाई जाती हैं। पठारों को ऊँची और सपाट भूमि के रूप में परिभाषित किया गया है, जो खनिजों के भंडार होते हैं, जैसे छोटा नागपुर का पठार।

पर्वतों के खंड में हिमालय और अरावली जैसे उदाहरणों के साथ वलित, भ्रंशोत्थ और ज्वालामुखी पर्वतों के प्रकार समझाए गए हैं। अंत में, लेखिका बढ़ती जनसंख्या और औद्योगिकीकरण के कारण इन प्राकृतिक स्थलों पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों, जैसे वनों की कटाई, प्रदूषण और गिरते भूजल स्तर पर चिंता व्यक्त करती हैं।

यह अध्याय विद्यार्थियों को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और पर्यावरण के प्रति सचेत रहने का संदेश देता है।

 

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❤️ 5. दिशाएँ

यह पुस्तक का अंश ‘दिशाएँ’ नामक अध्याय से संबंधित है, जो बच्चों को भौगोलिक दिशाओं का ज्ञान सरल और रोचक तरीके से कराता है। कहानी की शुरुआत रोहित के पिता द्वारा अपने मित्र को घर का रास्ता समझाने से होती है, जिसमें वे उत्तर, दक्षिण, पूरब और पश्चिम जैसे शब्दों का उपयोग करते हैं।

रोहित की जिज्ञासा को शांत करने के लिए उसके पिता एक रेखाचित्र बनाते हैं। अगले दिन, शिक्षक विद्यालय में प्रायोगिक गतिविधि के माध्यम से बच्चों को सूर्य की स्थिति और अपने शरीर के अंगों (दायां-बायां हाथ) के सापेक्ष दिशाओं को पहचानना सिखाते हैं।

पाठ में मुख्य चार दिशाओं के साथ-साथ चार उप-दिशाओं (जैसे उत्तर-पूर्व, दक्षिण-पश्चिम आदि) और आकाश-पाताल सहित कुल दस दिशाओं का वर्णन है। अंत में, मानचित्र के ऊपरी हिस्से को उत्तर और निचले हिस्से को दक्षिण मानने की विधि समझाई गई है।

इसमें भारत की भौगोलिक स्थिति—उत्तर में हिमालय और दक्षिण में हिन्द महासागर—का भी उल्लेख है। यह अध्याय व्यावहारिक गतिविधियों और अभ्यासों के माध्यम से विद्यार्थियों में स्थानिक समझ विकसित करने पर केंद्रित है।

 

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❤️ 6. पृथ्वी और ग्लोब

यह पुस्तक का अंश ‘पृथ्वी और ग्लोब’ विषय पर आधारित है, जो पृथ्वी की संरचना, मानचित्र और समय निर्धारण की प्रणालियों को सरल भाषा में समझाता है। इसमें बताया गया है कि पृथ्वी गोल है और क्षितिज वह स्थान है जहाँ धरती और आकाश मिलते हुए प्रतीत होते हैं।

ग्लोब को पृथ्वी के एक छोटे मानव-निर्मित मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो इसके विशाल आकार को समझने में मदद करता है। पाठ में विश्व के सात महाद्वीपों और चार महासागरों का परिचय दिया गया है।

मुख्य रूप से, यह अक्षांश और देशांतर रेखाओं के महत्व को रेखांकित करता है। अक्षांश रेखाएँ तापमान और कटिबंधों (उष्ण, समशीतोष्ण और शीत) को निर्धारित करती हैं, जबकि देशांतर रेखाएँ समय और तिथि निर्धारण में सहायक होती हैं।

सूर्य को एक देशांतर से दूसरे तक पहुँचने में 4 मिनट का समय लगता है, जिससे स्थानीय समय में अंतर आता है। इसके अतिरिक्त, पाठ में कर्क रेखा, मकर रेखा, विषुवत रेखा और अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा जैसी महत्वपूर्ण काल्पनिक रेखाओं की व्याख्या की गई है, जो भौगोलिक स्थिति और वैश्विक समय प्रणाली को समझने के लिए अनिवार्य हैं।

 

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❤️ 7. मानचित्र अध्ययन

यह अध्याय मानचित्र और चित्र के बीच के अंतर को स्पष्ट करता है। इसमें बताया गया है कि चित्र किसी स्थान का वैसा दृश्य है जैसा वह किनारे से दिखता है, जबकि मानचित्र उसे ऊपर से देखने जैसा होता है जिसमें मापक (स्केल) का उपयोग किया जाता है।

मानचित्र निर्माण के लिए तीन महत्वपूर्ण तत्व हैं: संकेतों का उपयोग, मापक का उपयोग और दिशाओं का निर्धारण। मापक के माध्यम से जमीन की वास्तविक दूरी को कागज पर अनुपात में छोटा करके दिखाया जाता है।

दिशाओं के लिए उत्तर दिशा हमेशा ऊपर की ओर होती है। मानचित्र के मुख्य रूप से तीन प्रकार बताए गए हैं: भौतिक (पर्वत, मैदान), राजनीतिक (सीमाएं, शहर) और थिमैटिक (जलवायु, जनसंख्या)।

इसके अतिरिक्त, मानचित्र में विभिन्न रंगों और रूढ़ चिह्नों का उपयोग किया जाता है, जैसे जलाशयों के लिए नीला, पर्वतों के लिए भूरा और मैदानों के लिए हरा रंग। अध्याय छात्रों को स्कूल या गाँव का नजरी नक्शा बनाने के लिए प्रोत्साहित करता है और मापक के महत्व को विस्तार से समझाता है ताकि बड़े भौगोलिक क्षेत्रों को कागज पर दर्शाया जा सके।

 

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❤️ 8. हमारा राज्य बिहार

यह पाठ बिहार राज्य की भौगोलिक, प्रशासनिक और सांस्कृतिक विशेषताओं का विस्तृत वर्णन करता है। बिहार भारत के पूर्वी भाग में स्थित एक महत्वपूर्ण राज्य है, जिसकी सीमाएँ नेपाल, पश्चिम बंगाल, झारखंड और उत्तर प्रदेश से मिलती हैं। प्रशासनिक सुविधा के लिए इसे 9 प्रमंडलों और 38 जिलों में विभाजित किया गया है।

यहाँ की जलवायु मानसूनी है, जिसमें ग्रीष्म, वर्षा और शीत ऋतुएँ मुख्य हैं। बिहार की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है, जहाँ धान प्रमुख खाद्यान्न फसल है। उत्तर बिहार में बाढ़ एक गंभीर समस्या है, विशेषकर कोसी और गंडक जैसी नदियों के कारण, जिससे लोगों को ‘दोहरी जिंदगी’ जीनी पड़ती है।

इसके विपरीत, दक्षिण बिहार का टाल क्षेत्र रबी फसलों, जैसे दलहन और गेहूँ के लिए प्रसिद्ध है। पाठ में वैशाली और समस्तीपुर के ‘सरैसा क्षेत्र’ में तंबाकू उत्पादन तथा गोपालगंज और चंपारण में गन्ना खेती व चीनी मिलों के महत्व को भी रेखांकित किया गया है। यहाँ वाल्मीकिनगर और भीम बाँध जैसे प्रसिद्ध वन्यजीव अभ्यारण्य हैं।

2011 की जनगणना के अनुसार, बिहार की जनसंख्या 10 करोड़ से अधिक है, जिसके कारण वनों की कटाई और मिट्टी की उर्वरता में कमी जैसी चुनौतियाँ उत्पन्न हो रही हैं।

 

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❤️ 9. बिहार दर्शन – 1

यह अध्याय कक्षा 6 के छात्रों की एक शैक्षिक यात्रा का वर्णन करता है, जिसमें वे बिहार के प्रमुख ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों का भ्रमण करते हैं। यात्रा की शुरुआत बोधगया से होती है, जहाँ छात्र विश्व धरोहर महाबोधि मंदिर और उस बोधिवृक्ष को देखते हैं जिसके नीचे गौतम बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था। इसके बाद, वे गया के विष्णुपद मंदिर जाते हैं, जिसे रानी अहिल्याबाई ने बनवाया था और जो पितृपक्ष मेले के लिए प्रसिद्ध है।

यात्रा का अगला पड़ाव राजगीर है, जो पहाड़ियों से घिरा है और अपने गर्म जलकुंडों, मनियारमठ और शांति स्तूप के लिए जाना जाता है। यहाँ छात्र रज्जू मार्ग का आनंद लेते हैं। तत्पश्चात, वे नालंदा विश्वविद्यालय के खंडहरों को देखते हैं, जो प्राचीन काल में ज्ञान-विज्ञान का एक अंतरराष्ट्रीय केंद्र था।

अंत में, छात्र पावापुरी स्थित जलमंदिर पहुँचते हैं, जहाँ भगवान महावीर ने निर्वाण प्राप्त किया था। यह अध्याय छात्रों को बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, स्थापत्य कला और गौरवशाली इतिहास से परिचित कराता है। समय की कमी के कारण वे नवादा के प्रसिद्ध ककोलत जलप्रपात नहीं जा पाते, परंतु पूरी यात्रा ज्ञानवर्धक और उत्साहपूर्ण रहती है।

 

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❤️ 10. बिहार दर्शन 2

यह अध्याय कक्षा 6 के विद्यार्थियों के लिए बिहार के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और दर्शनीय स्थलों की एक शैक्षिक यात्रा का विवरण प्रस्तुत करता है। कहानी की शुरुआत शिक्षक द्वारा छात्रों को अगले रविवार सासाराम और पटना के भ्रमण पर ले जाने की घोषणा से होती है। यात्रा का पहला पड़ाव सासाराम है, जहाँ बच्चे अफगान शासक शेरशाह सूरी का मकबरा देखते हैं।

यह अष्टकोणीय मकबरा लाल पत्थरों से बना है और एक विशाल तालाब के बीचों-बीच स्थित है। इसके बाद छात्र पटना पहुँचते हैं और प्रसिद्ध ‘गोलघर’ का भ्रमण करते हैं। इसका निर्माण 1786 में अनाज भंडारण के लिए कैप्टन जान गॉलस्टीन द्वारा कराया गया था।

समूह पटना संग्रहालय भी जाता है, जहाँ वे 5000 वर्ष पुराने पत्थरनुमा वृक्ष के जीवाश्म, मौर्यकालीन यक्षिणी की मूर्ति और राजेंद्र कक्ष देखते हैं। यात्रा का अंतिम पड़ाव पटना सिटी स्थित ‘तख्त श्री हरमंदिर साहिब’ है, जो सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह जी का भव्य जन्मस्थान है। यहाँ बच्चे लंगर और गुरुवाणी का अनुभव करते हैं।

यह पाठ न केवल बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचय कराता है, बल्कि विद्यार्थियों में इतिहास और पुरातत्व के प्रति रुचि भी जागृत करता है।

 

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