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Bihar Board Books

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Bihar Board Class 5 Urdu Book 2026 PDF Download

Last Updated on January 26, 2026 by bseb 2 Comments

Bihar Board 5th Urdu Book 2026 PDF Download (اردو)

Bihar Board Class 5 Urdu Book 2026 PDF Download – इस पेज पर बिहार बोर्ड 5th के छात्रों के लिए “Urdu (اردو)” Book दिया गया है | जिसे आप अपने फ़ोन में Free Download कर सकते हैं |

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BSEB Class 5 Urdu (اردو) Textbook PDF Free Download

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❤️ اپنی بات


यह पुस्तक ‘गुलशन-ए-उर्दू’ कक्षा पाँचवीं के लिए बिहार राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), पटना द्वारा तैयार की गई है। इस पुस्तक का मूल उद्देश्य राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2005 और राज्य पाठ्यचर्या रूपरेखा 2008 की सिफारिशों के अनुरूप बच्चों में उर्दू भाषा की समझ और रचनात्मक क्षमताओं को विकसित करना है। पुस्तक में शामिल पाठ बच्चों को रटने की आदत से दूर रखने और उन्हें व्यावहारिक जीवन से जोड़ने के लिए तैयार किए गए हैं। विषयसूची के अनुसार इसमें नात, नज़्में (जैसे ‘हिंद के बाग़बानो उठो’ और ‘चाँद पे जा पहुँचा इंसान’), और विभिन्न गद्य पाठ जैसे ‘किफायतशारी’, ‘बीबी फातिमा’, ‘नालंदा की सैर’, और ‘गुरु गोबिंद सिंह’ शामिल हैं। इसमें वैज्ञानिक विषय जैसे ‘हमें प्यास क्यों लगती है’ और ऐतिहासिक व प्रसिद्ध व्यक्तित्व जैसे ‘कल्पना चावला’ और ‘रामानुजम’ पर भी प्रकाश डाला गया है। यह पुस्तक भाषा की बुनियादी कौशल के साथ-साथ बच्चों के मानसिक स्तर और स्वाभाविक रुचि को ध्यान में रखकर तैयार की गई है ताकि उनमें पढ़ने का शौक पैदा हो सके।

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❤️ سبق 1 : حمد (نظم)


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❤️ سبق 1 (الف) : نعت (براے مطالعہ)


यह पाठ एक सुंदर नात (प्रशस्ति) पर आधारित है, जिसमें पैगंबर मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के प्रति श्रद्धा और प्रेम व्यक्त किया गया है। नात के शब्दों में आपको ‘अहमद मुस्तफा’, ‘हबीबे खुदा’, और ‘सरवरे अंबिया’ जैसे पवित्र उपाधियों से संबोधित किया गया है। कवि आपको अपना मार्गदर्शक और समस्या-समाधानकर्ता मानते हुए सिफारिश की गुहार लगाता है। इसमें आपके विभिन्न गुणों का वर्णन किया गया है, जैसे कि आप ‘शहरे इल्म ओ अदब’, ‘शहंशाहे अरब’, और ‘खातिमुल मुरसलीन’ हैं। नात में हज़रत फातिमा के पिता होने का भी उल्लेख है और आपको ‘रहमतुल्लिल आलमीन’ कहकर पुकारा गया है। यह प्रार्थना की गई है कि आपकी सिफारिश क़ुबूल हो और आपके जीवन की रोशनी से लोगों का जीवन रोशन हो। यह कविता बच्चों के लिए खास तौर पर तैयार की गई है, ताकि वे पैगंबर के प्रति प्रेम को महसूस कर सकें, जिसमें हर पंक्ति के बाद ‘अस्सलाम ऐ नबी’ का दोहराव दिल को छू जाता है। कुल मिलाकर यह नात पैगंबर करीम की पवित्रता से जुड़ाव और उनकी शिक्षाओं व दया से प्रभावित होने का एक अनूठा प्रयास है।

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❤️ سبق 2 : سچ کی تاثیر


यह पाठ हज़रत शेख अब्दुल क़ादिर जीलानी रहमतुल्लाह अलैहि के बचपन का एक ईमान बढ़ाने वाला वाकया है, जिसमें सच्चाई की ताकत और प्रभाव को बताया गया है। जब आप पढ़ने के लिए बगदाद के काफिले के साथ चले तो आपके माता-पिता ने आपको चालीस दीनार दिए और सलाह दी कि हमेशा सच बोलना। रास्ते में डाकुओं ने काफिले पर हमला कर दिया और सबको लूटना शुरू किया। एक डाकू ने जब आपसे पूछा कि तुम्हारे पास क्या है, तो आपने बिना डरे अपने माता-पिता की सलाह पर अमल करते हुए सच बता दिया कि आपके पास चालीस दीनार हैं जो कमीज़ में सिले हुए हैं। डाकुओं के सरदार को जब यह पता चला कि इस लड़के ने अपने माल की रक्षा के लिए भी सच्चाई का पालन नहीं छोड़ा, तो उसका दिल पसीज गया। उसने सोचा कि एक बच्चा अपनी माँ की बात का इतना पाबंद है और वह खुद अल्लाह के हुक्मों की नाफरमानी कर रहा है। इस सच्चाई के प्रभाव से प्रभावित होकर सरदार और उसके सभी साथियों ने तोबा की, लूटा हुआ माल वापस किया और नेकी का रास्ता अपनाया। यह वाकया सिखाता है कि सच्चाई इंसान को बड़ी आज़माइशों से बचाती है और दूसरों की ज़िंदगी बदलने का ज़रिया बनती है।

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❤️ سبق 3 : کفایت شعاری (نثر)


यह पाठ एक कविता के रूप में है जिसका शीर्षक ‘हम हरगिज़ झूठ नहीं बोलेंगे’ है। इस कविता में सच्चाई के महत्व और झूठ की बुराइयों पर रोशनी डाली गई है। कवि संकल्प करता है कि वह कभी झूठ नहीं बोलेगा क्योंकि झूठ बोलने से अल्लाह तआला, माता-पिता और गुरुजन नाराज़ हो जाते हैं। झूठ बोलने वाले व्यक्ति पर कोई यकीन नहीं करता और समाज में उसे अपमान और शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है। कविता में बताया गया है कि सच्चाई में ताकत है और ‘साँच को आँच नहीं’ के मुहावरे के मुताबिक सच्चा इंसान हमेशा सिर ऊँचा रखता है। इसके अलावा, इस पाठ में छात्रों की नैतिक शिक्षा के लिए कविता, प्रश्न-उत्तर और विलोम शब्द भी शामिल किए गए हैं ताकि वे भाषा के साथ-साथ नैतिक मूल्य भी सीख सकें। कविता का अंत इस दुआ पर होता है कि हे रब, हमें झूठ से दूर रख और हमेशा सच बोलने की तौफीक अता फरमा। यह पाठ बच्चों को ईमानदारी और सच्चाई का रास्ता अपनाने की प्रेरणा देता है।

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❤️ سبق 4 : ہم ہرگز جھوٹ نہ بولینگے


यह किताब ‘हम हरगिज़ झूठ नहीं बोलेंगे’ के शीर्षक से एक पाठ-अध्ययन कविता पर आधारित है जो बच्चों को सच्चाई का महत्व सिखाती है। कविता के जरिए यह संदेश दिया गया है कि सच्चाई अल्लाह की खुशनूदी और लोगों की नज़र में इज्जत का कारण बनती है, जबकि झूठ से अल्लाह, माता-पिता और गुरुजन नाराज़ होते हैं। कवि कहता है कि हमें कुछ भी बोलने से पहले अपने शब्दों को तौलना चाहिए ताकि हम हमेशा सच्चे रास्ते पर रहें। झूठ बोलने वाला व्यक्ति समाज में अपनी कदर खो देता है और अपमान का सामना करता है, जबकि सच्चे इंसान पर अल्लाह की रहमत बरसती है। किताब के दूसरे हिस्सों में छात्रों की समझ के लिए कविता, शब्दों के अर्थ, प्रश्न-उत्तर, खाली जगहें भरना और विलोम शब्द शामिल हैं। इसके अलावा ‘साँच को आँच नहीं’ जैसे मुहावरे की व्याख्या और भाषाई खेलों के जरिए भाषा दक्षता को बेहतर बनाने की कोशिश की गई है। कुल मिलाकर यह सामग्री बच्चों की नैतिक शिक्षा और उर्दू भाषा की पढ़ाई के लिए एक बेहतरीन नमूना है, जो उन्हें झूठ की बुराई से बचाती है और सच्चाई को अपनाने की तरफ प्रेरित करती है।

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❤️ سبق 5 : بی بی فاطمه (نثر)


यह पाठ हज़रत बीबी फातिमा की सीरत और उनके उच्च नैतिक गुणों पर प्रकाश डालता है। हज़रत बीबी फातिमा, इस्लाम के पैगंबर हज़रत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बेटी और मुसलमानों के चौथे खलीफा हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हु की पत्नी थीं। आपकी ज़िंदगी मेहनत, सादगी और किफायतशारी का एक जीवंत नमूना थी। एक वाकये के जरिए बताया गया है कि कैसे आप घर के कामकाज, जैसे चक्की पीसना, अपनी बेटी फिज़ा के साथ बारी-बारी से करती थीं और उनके साथ नौकरों जैसा नहीं बल्कि बहन जैसा व्यवहार करती थीं। आप अपनी दयालुता और मेहरबानी की वजह से अरब में मशहूर थीं और औरतों को जीने और अल्लाह के शुक्र की नसीहत करती थीं। सख्त गरीबी और कमी के बावजूद आप माँगने वाले को खाली हाथ नहीं लौटाती थीं और अपना खाना दूसरों को दे देती थीं। आपके दोनों बेटे, इमाम हसन और इमाम हुसैन, आपकी बेहतरीन परवरिश का नतीजा थे जो मुसलमानों के इमाम कहलाए। आपका व्यक्तित्व रिसालत, खिलाफत और इमामत के रिश्तों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी है।

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❤️ سبق 6 : ہمیں پیاس کیوں لگتی ہے (نثر)


यह अध्याय मानव शरीर में पानी के महत्व और प्यास लगने के कारणों पर रोशनी डालता है। लेखक बताते हैं कि प्राचीन काल में बक़रात ने गले की सूखन को प्यास का लक्षण माना था, लेकिन नए शोध के अनुसार मस्तिष्क में मौजूद ‘थायी पॉल्स’ नामक ग्रंथि प्यास का असली कारण है। यह ग्रंथि शरीर में पानी के संतुलन को बनाए रखने के लिए विशेष हार्मोन जारी करती है। मानव शरीर का लगभग 66 प्रतिशत हिस्सा पानी से बना है, जो पाचन और शारीरिक तापमान को स्थिर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हम रोज़ाना पसीना, पेशाब और सांस के जरिए पानी खर्च करते हैं, जिसकी कमी को पूरा करना जीवन के लिए ज़रूरी है क्योंकि इंसान पानी के बिना सात दिन से ज़्यादा नहीं रह सकता। एक स्वस्थ व्यक्ति को रोज़ाना पाँच से छह लीटर पानी की ज़रूरत होती है, और यह ज़रूरत गर्मी या ज़्यादा शारीरिक मेहनत की स्थिति में बढ़ जाती है। लेख में इस बात पर भी ज़ोर दिया गया है कि धरती पर उपलब्ध पानी का सिर्फ दो प्रतिशत हिस्सा पीने लायक है, इसलिए हमें पानी की बचत करनी चाहिए और प्रदूषण से बचने के लिए हमेशा साफ पानी पीना चाहिए।

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❤️ سبق 6 (الف) : بندر کی شرارت (نظم)


यह पाठ ‘बतख मियां’ नाम के एक गुमनाम आज़ादी के सेनानी की बहादुरी और वफादारी की दास्तान है। बतख मियां का ताल्लुक बिहार के ज़िला मोतिहारी से था और वे अंग्रेजों की नील की कोठी में खानसामा थे। 1917 में जब महात्मा गांधी चंपारण के दौरे पर आए, तो अंग्रेज मैनेजर मिस्टर अरविन ने गांधी जी को खत्म करने के लिए बतख मियां को उनके दूध में जहर मिलाने का हुक्म दिया। अंग्रेजों ने उन्हें दौलत का लालच दिया और न मानने पर सख्त नतीजों की धमकी भी दी, लेकिन बतख मियां ने अपनी अंतरात्मा और वतनपरस्ती का सौदा नहीं किया। उन्होंने जहरीला दूध पेश करने की बजाय गिलास गिरा दिया और गांधी जी की जान बचा ली। इस पाबंदी में अंग्रेजों ने उन पर बेपनाह मुकदमे चलाए, उन्हें नौकरी से निकाल दिया और उनकी जायदाद जब्त कर ली। बरसों तक यह वाकया दबा रहा यहाँ तक कि 1950 में भारत के पहले सदर वाक़िल राजेंद्र प्रसाद ने एक जनसभा में उनकी कुर्बानी का खुलासा किया। बतख मियां की यह कहानी हमें सिखाती है कि वतनपरस्ती और इंसानियत किसी भी लालच या डर से बढ़कर होनी चाहिए। अगर उस वक्त वह यह जुर्रत न दिखाते तो शायद हिंदुस्तान की तारीख कुछ और होती।

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❤️ سبق 7 : لوری


यह पाठ एक सुंदर और भावनात्मक कविता ‘लोरी’ पर आधारित है, जिसमें एक माँ अपने बच्चे को प्यार से सुला रही है। माँ अपनी बच्ची को विभिन्न सुंदर उपमाओं से नवाज़ती है, जैसे उसे ‘सीप का मोती’, ‘राज दुलारी’, और ‘नरमल चाँदी व सोना’ कहकर पुकारती है। वह अपनी बिटिया के उज्ज्वल भविष्य की कामना करती है कि वह बड़ी होकर देश का नाम रोशन करे, ईमानदारी और पाकीज़गी की मिसाल बने और भारत की मलिका कहलाए। कविता में रात की शांति और प्राकृतिक दृश्यों की भी झलक मिलती है, जहाँ चाँद की रोशनी फैली हुई है, आसमान पर तारे टिमटिमा रहे हैं और पंछी व जीव सो चुके हैं। माँ अपनी रोती हुई बच्ची को चुप कराने के लिए उसे अच्छे रिश्तों और खुशियों के सपने दिखाती है। यह कविता सिर्फ माँ की ममता और प्यार का इज़हार नहीं है बल्कि इसमें बिटिया की परवरिश और उसके लिए अच्छी आकांक्षाओं का संदेश भी छुपा हुआ है। अंत में समझ बढ़ाने के लिए सवाल-जवाब और भाषाई गतिविधियाँ दी गई हैं ताकि छात्र कविता के मूल भाव को बेहतर समझ सकें और उर्दू भाषा की बारीकियों से वाकिफ हो सकें।

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❤️ سبق 8 : بطخ میں (نثر)


यह पाठ एक गुमनाम आज़ादी के सेनानी ‘बतख मियां अंसारी’ की बहादुरी और वतनपरस्ती की कहानी बयान करता है, जिन्होंने 1917 में चंपारण के दौरान महात्मा गांधी की जान बचाई थी। अंग्रेज मैनेजर मिस्टर अरविन ने बतख मियां को, जो वहाँ खानसामा के तौर पर काम करते थे, गांधी जी के दूध में जहर मिलाने का हुक्म दिया और मना करने पर सख्त नतीजों की धमकी दी। लेकिन बतख मियां ने अपनी अंतरात्मा और देश के प्रति वफादारी निभाते हुए अपनी नौकरी और जायदाद की कुर्बानी दे दी लेकिन गांधी जी को नुकसान नहीं पहुँचने दिया। उन्होंने जहरीला दूध गिराकर एक बड़ी त्रासदी को टाल दिया। इस बड़ी कुर्बानी के बावजूद वह बरसों गुमनामी में रहे, यहाँ तक कि 1950 में भारत के पहले सदर वाक़िल राजेंद्र प्रसाद ने एक जनसभा में उनका परिचय कराया और उनके कारनामे को दुनिया के सामने लाए। वाक़िल राजेंद्र प्रसाद इस वाकये के चश्मदीद गवाह थे। यह कहानी हमें सिखाती है कि वतनपरस्ती और इंसानियत किसी भी लालच या खौफ से ऊपर होती है। अगर बतख मियां यह बहादुरी न दिखाते तो हिंदुस्तान की तारीख शायद कुछ और होती।

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❤️ سبق 9 : خط (نالندہ کی سیر)


यह कविता ‘हिंद के बाग़बानो उठो’ अली सरदार जाफरी की एक जोशीली अंग्रेज़ी रचना है जो हिंदुस्तानी आम लोगों खासकर नौजवानों, किसानों और मज़दूरों को जगाने के लिए लिखी गई है। कवि वतन के रखवालों को ‘बाग़बान’ कहकर पुकारता है और उन्हें इंकलाब की दावत देता है। कविता में हिंदुस्तान के विभिन्न भौगोलिक हिस्सों जैसे कश्मीर, बंगाल, सिंध, पंजाब, महाराष्ट्र और गुजरात का ज़िक्र किया गया है, जिसका मकसद पूरे मुल्क में एकता और जागरूकता की लहर पैदा करना है। कवि चाहता है कि लोग गुलामी की ज़ंजीरें तोड़कर एक नई ज़िंदगी की शुरुआत करें। वह नौजवानों को अंधेरी की फौज और दरिया की लहरों की तरह उठने की तरगीब देता है ताकि वे वक्त की मुसीबतों का बहादुरी से मुकाबला कर सकें। यह कविता वतनपरस्ती, हिम्मत और सामाजिक बदलाव का एक ताकतवर संदेश देती है, जिसमें हर तबके के व्यक्ति को मुल्क की तामीर व तरक्की और आज़ादी की हिफाज़त के लिए मिलकर खड़े होने पर ज़ोर दिया गया है।

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❤️ سبق 10 : ہند کے باغبانو اٹھو (نظم)


यह पाठ मशहूर शायर अली सरदार जाफरी की नज़्म ‘हिंद के बाग़बानो उठो’ पर आधारित है। इस नज़्म में शायर ने हिंदुस्तान के नौजवानों, किसानों और मज़दूरों को जगाने और मुल्क की तामीर व तरक्की में हिस्सा लेने की पुकार लगाई है। शायर मुल्क के विभिन्न हिस्सों जैसे कश्मीर, बंगाल, सिंध, पंजाब, महाराष्ट्र और गुजरात के लोगों को संबोधित करते हुए उन्हें एकजुट होकर इंकलाब लाने पर ज़ोर देता है। नज़्म का बुनियादी मकसद गुलामी की ज़ंजीरों को तोड़ना और वक्त के धारे को बदलना है ताकि मुल्क एक नई ज़िंदगी की तरफ क़दम बढ़ा सके। शायर नौजवानों को अंधेरी की फौज और दरिया की लहरों की तरह उठने की तरगीब देता है ताकि वे हर किस्म की मुसीबत का बहादुरी से सामना कर सकें। यह नज़्म वतनपरस्ती के जज़्बे से भरपूर है और समाज के हर तबके को एक रोशन मुस्तकबिल के लिए जद्दोजहद करने का संदेश देती है। पाठ के अंत में छात्रों की समझ के लिए शब्दों के अर्थ, सवाल-जवाब और व्याकरण की कविताएँ भी दी गई हैं जो नज़्म के संदेश को समझने में मददगार साबित होती हैं।

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❤️ سبق 11 : زراف (نثر)


यह पाठ एक खरगोश और एक जिराफ के बीच दिलचस्प बातचीत पर आधारित है, जिसमें जिराफ की खासियतों को इंटरव्यू के अंदाज़ में बताया गया है। जिराफ तंज़ानिया का राष्ट्रीय जानवर है और दुनिया का सबसे ऊँचा चौपाया है, जिसकी औसत लंबाई आम तौर पर अठारह फुट होती है, जबकि कुछ अफ्रीकी नस्लें बाईस फुट तक पहुँचती हैं। जिराफ झुंड बनाकर रहते हैं और शाकाहारी होते हैं, लेकिन अपने बचाव में शेर जैसे शिकारी को भी अपनी ताकतवर लातों से दबोच सकते हैं। उनकी अगली टाँगें घूमने में इतनी लंबी होती हैं कि जमीन पर मौजूद घास खाने में उन्हें मुश्किल होती है, इसलिए वे पेड़ों की पत्तियाँ खाते हैं। जिराफ ऊँट की तरह बिना पानी पिए कई दिन रह सकते हैं लेकिन पेट में पानी जमा नहीं कर सकते। उनका दिल सभी चौपायों में सबसे बड़ा और ताकतवर होता है ताकि खून इतनी ऊँचाई तक पहुँच सके। वे भारी जिस्म की वजह से लेटने की बजाय खड़े-खड़े ही सोते हैं। एक दिलचस्प हकीकत यह भी है कि सफेद धारियों वाले जिराफ बहुत कम बोलते हैं, जिसकी वजह से ज़्यादातर लोग उन्हें गूँगा समझते हैं, हालाँकि वे सिर्फ चुप रहना पसंद करते हैं।

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❤️ سبق 12 : چوہے ہی چوہے (نثر)


यह पाठ जिराफ की खासियतों और आदतों पर आधारित एक दिलचस्प बातचीत है जो एक खरगोश और जिराफ के बीच होती है। जिराफ तंज़ानिया का राष्ट्रीय जानवर है और उसे दुनिया का सबसे ऊँचा चौपाया माना जाता है, जिसकी ऊँचाई आम तौर पर 18 फुट और कुछ की 29 फुट तक होती है। जिराफ अपनी लंबी टाँगों और गर्दन के लिए मशहूर हैं, जिसकी वजह से वे ऊँचे पेड़ों की पत्तियाँ आसानी से खा लेते हैं, लेकिन जमीन पर मौजूद घास खाने के लिए उन्हें अपनी अगली टाँगें फैलानी पड़ती हैं। जिराफ एक अमनपसंद जानवर है जो झुंड में रहना पसंद करता है। इसका वजन लगभग दो टन होता है जो गैंडे के बराबर है। यहाँ तक कि शेर भी इसकी लंबी टाँगों की जोरदार लात (दुलती) से डरकर रहता है। जिराफ की नज़र बहुत तेज होती है और वह ऊँट की तरह कई दिन बिना पानी पिए रह सकता है, लेकिन पेट में पानी जमा नहीं कर सकता। एक हैरतअंगेज बात यह भी है कि जिराफ का दिल बहुत बड़ा और ताकतवर होता है ताकि खून बारह फुट ऊँची गर्दन तक पहुँचा सके। यह जानवर खड़े-खड़े ही सोता है क्योंकि भारी जिस्म की वजह से उसका उठना मुश्किल होता है।

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❤️ سبق 12 (الف) : محنت (براے مطالعہ)


यह कविता ‘मेहनत’ के शीर्षक से है, जिसमें शायर ने मेहनत के महत्व और उसके फायदों पर रोशनी डाली है। शायर कहता है कि अगर इंसान मेहनत करेगा तो दुनिया में उसका नाम रोशन होगा और उसका कोई भी काम अधूरा नहीं रहेगा। वह कौमें तरक्की के मंज़िलें तय करती हैं और उनके खज़ाने दौलत से भर जाते हैं जिनके बच्चे मेहनत से गाफिल नहीं होते। जो लोग मेहनत को अपना शिआर बनाते हैं, वह हमेशा आगे बढ़ते हैं और दुनिया में एक ऊँचा मुकाम हासिल करते हैं। इसके उलट, सुस्त और आलसी लोग अपनी ज़िंदगी से बेज़ार और लाचार होकर रह जाते हैं। शायर नसीहत करता है कि यह दौर बहुत तेज है, इसमें सुस्ती की कोई गुंजाइश नहीं है। सिर्फ वही मुसाफिर अपने मंज़िल पा सकता है जो तेज क़दम हो और लगातार जद्दोजहद करे। अगर तुम भी हौसले के साथ मेहनत करोगे और सुस्ती को छोड़ दोगे, तो तुम्हें राहत, दौलत और इज्जत नसीब होगी। मेहनत ही वह एकमात्र रास्ता है जो इंसान को कामयाबी और सम्मान की बुलंदियों तक ले जाता है।

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❤️ سبق 13 : پہیلی (نظم)


यह कहानी फरहान नाम के एक बहादुर लड़के के इर्द-गिर्द घूमती है जो एक हादसे में अपने पैरों से महरूम हो गया था और अब व्हीलचेयर पर चलता है। इस मजबूरी ने उसे अकेला और तनहा कर दिया था, यहाँ तक कि उसने स्कूल छोड़ने का भी सोच लिया था, लेकिन अपने माता-पिता की नसीहत पर उसने पढ़ाई जारी रखी। एक दिन फरहान अपनी सालगिरह पर स्कूल में रंग-बिरंगी गुब्बारे लाया ताकि दोस्तों में बाँट सके, लेकिन एक शरारती लड़के अमजद ने शरारत में उन्हें उड़ा दिया। फरहान ने गुस्सा करने की बजाय अमजद को भी एक गुब्बारा दिया जिस पर वह बहुत शर्मिंदा हुआ। इस वाकये के बाद प्रिंसिपल मुहतरमा अज़मत ने गुब्बारों का एक अनोखा मुकाबला करवाया जिसमें फरहान का गुब्बारा सबसे दूर तक गया और वह फतेहमंद ठहरा। इस छोटी सी कामयाबी ने फरहान का खोया हुआ एतमाद बहाल कर दिया और उसे एहसास दिलाया कि वह ज़िंदगी की दौड़ में किसी से पीछे नहीं है। इसने उसने अज़म किया कि वह अब पढ़ाई और खेलकूद में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेगा। यह पाठ हमें यह संदेश देता है कि शारीरिक मजबूरी इंसान की हिम्मत और सलाहियतों की राह में रुकावट नहीं बन सकती अगर इंसान के अंदर सच्चा जज़्बा और खुद-एतमादी मौजूद हो।

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❤️ سبق 14 : کلپنا چاولہ (نثر)


यह पाठ एक बहादुर लड़के फरहान की कहानी है जो एक हादसे के नतीजे में मजबूर हो गया था। फरहान पहले एक बहुत ज़हीन बच्चा था, लेकिन दो साल पहले छत से गिरने की वजह से उसे व्हीलचेयर का सहारा लेना पड़ा, जिससे उसकी ज़िंदगी बदल गई और वह एहसास-ए-कमतरी का शिकार होकर पढ़ाई में पीछे रहने लगा। उसने स्कूल छोड़ने का भी सोच लिया था, लेकिन उसके माता-पिता ने उसे समझाया कि तालीम ही उसे एक कामयाब इंसान बना सकती है। स्कूल में अमजद नाम का एक लड़का उस पर ज़्यादा तंग करता था। एक दिन फरहान अपनी सालगिरह पर दोस्तों के लिए रंग-बिरंगे गुब्बारे लाया। अमजद ने शरारत में उनकी वायरिंग काट दीं, लेकिन फरहान ने बदले में उसे भी एक गुब्बारा दिया जिस पर अमजद शर्मिंदा हुआ। स्कूल की मेहरबान प्रिंसिपल मुहतरमा अज़मत ने हौसला अफजाई के लिए गुब्बारों का एक मुकाबला करवाया जिसमें हर गुब्बारे के साथ बच्चे का नाम और पता दर्ज था। फरहान ने प्रिंसिपल साहिबा के इसरार पर इसमें हिस्सा लिया। जब नतीजे आए तो हैरानी की बात यह थी कि फरहान का गुब्बारा सबसे दूर गया और वही फतेहमंद ठहरा। इस शानदार कामयाबी ने फरहान के अंदर एक नई रूह फूँक दी और उसका खोया हुआ एतमाद बहाल कर दिया। उसे एहसास हुआ कि मजबूरी कामयाबी की राह में रुकावट नहीं बन सकती। इस वाकये के बाद उसने और मेहनत करने का अज़म किया।

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❤️ سبق 15 : گرو گوبند سنگھ (نثر)


फरहान एक नहायत ज़हीन, हसास और बहादुर लड़का है जो बदकिस्मती से दो साल पहले पतंग उड़ाने के दौरान एक हादसे का शिकार हुआ था और अब उसे चलने के लिए व्हीलचेयर का सहारा लेना पड़ता है। इस हादसे ने फरहान के जीवन पर गहरे असर डाले, वह अपनी खुद-एतमादी खो बैठा था और स्कूल में ज़्यादातर अदास, खामोश और खोया-खोया नज़र आता था। अमजद नाम का एक शरारती लड़का उस पर ज़्यादा तंग करता और उसकी मजबूरी का मज़ाक उड़ाता था, जिससे फरहान और दिलबर्दाश्त हो जाता। एक रोज़ स्कूल की मेहरबान प्रिंसिपल, मुहतरमा अज़मत, ने बच्चों की हौसला अफजाई के लिए गुब्बारों का एक दिलचस्प मुकाबला करवाया। इसमें हर बच्चे के गुब्बारे के साथ एक पोस्टकार्ड बंधा हुआ था जिस पर बच्चे का नाम और पता था। सब यह देखना चाहते थे कि किसका गुब्बारा हवा में दोष पर सबसे ज़्यादा दूर जाएगा। फरहान ने भी इसमें हिस्सा लिया और हैरतअंगेज तरीके से उसका गुब्बारा सबसे दूर दराज़ मुकाम तक पहुँचा। इस शानदार कामयाबी ने फरहान के अंदर एक नई रूह फूँक दी और उसका खोया हुआ एतमाद बहाल कर दिया। उसे यह अहम सबक मिला कि शारीरिक मजबूरी कामयाबी की राह में रुकावट नहीं बन सकती अगर इंसान के इरादे बुलंद हों। इस वाकये के बाद फरहान ने दोबारा अपनी तालीम पर तवज्जो मर्कूज़ की और एक कामयाब ज़िंदगी गुज़ारने का अज़म किया। यह कहानी हमें हिम्मत, हौसले और सबत-क़दमी का दर्श देती है।

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❤️ سبق 16 : چند پہ جا پہنچا انسان (نظم)


यह कहानी फरहान नाम के एक बहादुर लड़के के इर्द-गिर्द घूमती है, जो दूसरे बच्चों की तरह बहुत फुर्तीला और ज़हीन था। ताहम, दो साल पहले पतंग उड़ाने के दौरान छत से गिरने के एक अलमना हादसे ने उसे व्हीलचेयर का मुहताज बना दिया। इस मजबूरी ने फरहान को ज़हनी तौर पर बहुत मुतासिर किया, वह ज़्यादातर अदास रहता और उसकी पढ़ाई से जी ऊब गया था। एक बार तो उसने स्कूल छोड़ने का भी सोचा, लेकिन उसके माता-पिता ने उसे तालीम की अहमियत समझाकर रोका। कहानी में एक अहम मोड़ तब आता है जब फरहान अपनी सालगिरह पर स्कूल में रंग-बिरंगे गुब्बारे लेकर आता है। एक हमजमात अमजद, जो ज़्यादातर उस पर तंग करता था, उसके गुब्बारों की वायरिंग काट देता है, लेकिन फरहान की फराखदिली उसे शर्मिंदा कर देती है। स्कूल की प्रिंसिपल मुहतरमा अज़मत बच्चों की हौसला अफजाई के लिए गुब्बारों का एक मुकाबला करवाती हैं जिसमें गुब्बारों के साथ बच्चों के नाम वाले पोस्टकार्ड बंधे होते हैं। अगरचे फरहान शुरू में एहसास-ए-कमतरी का शिकार होकर हिस्सा नहीं लेना चाहता था, लेकिन प्रिंसिपल साहिबा के इसरार पर वह अपना गुब्बारा फ़िज़ा में छोड़ देता है। कुछ दिनों बाद जब नतीजे आते हैं, तो सब यह देखकर हैरान रह जाते हैं कि फरहान का गुब्बारा सबसे दूर गया था। इस कामयाबी ने फरहान का खोया हुआ एतमाद बहाल कर दिया और उसने अज़म किया कि वह अब हर मैदान में आगे रहेगा। यह पाठ हमें सिखाता है कि मजबूरी कामयाबी की राह में रुकावट नहीं बन सकती बल्कि हौसले और हिम्मत से इंसान कुछ भी हासिल कर सकता है।

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❤️ سبق 16 (الف) : موت کا سچ (براے مطالعہ)


यह कहानी फरहान नाम के एक बच्चे के इर्द-गिर्द घूमती है जो एक हादसे की वजह से मजबूर हो गया था और व्हीलचेयर पर चलता था। वह पहले एक ज़हीन बच्चा था, लेकिन मजबूरी के बाद वह अदास रहने लगा और अपनी पढ़ाई में पीछे हट गया। उसके स्कूल का एक लड़का, अमजद, उस पर ज़्यादा चिढ़ता और उसका मज़ाक उड़ाता था। एक दिन फरहान अपनी सालगिरह पर स्कूल में रंग-बिरंगे गुब्बारे लाया ताकि दोस्तों में बाँट सके, लेकिन अमजद ने शरारत में उनकी वायरिंग काट दीं और गुब्बारे हवा में उड़ गए। इस मौके पर स्कूल की प्रिंसिपल मुहतरमा अज़मत ने हालात को संभाला और एक गुब्बारा मुकाबला करवाया। इस मुकाबले में हर बच्चे ने अपने गुब्बारे के साथ एक पोस्टकार्ड बाँधा जिस पर उसका पता लिखा था। सब यह देखना चाहते थे कि किसका गुब्बारा हवा में दोष पर सबसे ज़्यादा दूर जाएगा। कुछ दिनों बाद जब नतीजे आए, तो पता चला कि फरहान का गुब्बारा सबसे ज़्यादा दूरी तय करके फतेहमंद ठहरा। इस अचानक कामयाबी ने फरहान के दिल में दोबारा ज़िंदगी की उम्मीद भर दी और उसका खोया हुआ एतमाद बहाल कर दिया, जिसके बाद उसने दोबारा मेहनत से पढ़ने का अज़म किया। यह पाठ हमें सिखाता है कि हिम्मत और हौसला अफजाई किसी भी मजबूरी को शिकस्त दे सकती है।

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❤️ سبق 17(الف) : شری نواس راما نوجم (نثر)


यह पाठ बचपन के एक महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजम की जीवनी और उनकी बेमिसाल वैज्ञानिक जद्दोजहद पर रोशनी डालता है। रामानुजम का जन्म 22 दिसंबर 1887 को तमिलनाडु के कुम्भकोणम में एक गरीब परिवार में हुआ। वह बचपन से ही नहायत संजीदा और खामोश स्वभाव के थे, और उनकी पूरी तवज्जो सिर्फ इल्म-उल-हिसाब (गणित) पर मर्कूज़ रहती थी। स्कूल के दौरान वह दूसरे मज़मून के मुकाबले में गणित के मुश्किल सवालों को पलक झपकते ही हल कर लेते थे, जिससे उस्ताद भी हैरान रह जाते थे। मआशी तंगी की वजह से वह अपनी बाकायदा तालीम मुकम्मल न कर सके और मद्रास बंदरगाह में क्लर्की इख्तियार की, मगर वहाँ उनके एक हमदर्द अफसर ने उनकी छुपी हुई सलाहियतों को भाँप लिया और उन्हें घर बैठे तहकीक़ करने का मौका फराहम किया। उनका काम मद्रास यूनिवर्सिटी और फिर लंदन की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर हार्डी तक पहुँचा, जिन्होंने उन्हें इंग्लैंड बुलाया। लंदन में रामानुजम की गैर-मामूली ज़हानत और उनके मकालात ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धूम मचा दी और उन्हें ‘हिसाब का जादूगर’ माना गया। उनके सेमिनार देखने के लिए लोग टिकट खरीदकर आते थे। बदकिस्मती से वह तपेदिक जैसे मामूली मर्ज में मुब्तला हो गए और 26 अप्रैल 1920 को इस फानी दुनिया से कोच हो गए। अपनी वफात से पहले उन्होंने अपनी सारी दौलत मद्रास यूनिवर्सिटी को एताअ कर दी, जो उनकी इल्मपरवरी का बयान है। उनकी ज़िंदगी यह पैगाम देती है कि सच्ची लगन और मेहनत से इंसान किसी भी रुकावट को पार कर सकता है।

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❤️ سبق 18 : غبّارے (نثر)


यह कहानी एक लड़के फरहान के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक हादसे की वजह से मजबूर हो गया था और व्हीलचेयर पर चलने पर मजबूर था। इस वजह से वह ज़्यादातर अदास रहता और उसकी खुद-एतमादी कमज़ोर पड़ गई थी। स्कूल में अमजद नाम का एक लड़का उस पर ज़्यादा तंग करता था। ताहम, उसके माता-पिता ने उसे तालीम की अहमियत समझाई और हिम्मत न हारने की तालकीन की। एक दिन फरहान की सालगिरह थी और वह अपने दोस्तों के लिए गुब्बारे लाया। अमजद ने शरारत में उनकी वायरिंग काट दीं, लेकिन फरहान ने बदले में अमजद को भी एक गुब्बारा दिया, जिस पर अमजद शर्मिंदा हुआ। स्कूल की प्रिंसिपल, मुहतरमा अज़मत, ने बच्चों के लिए गुब्बारों का एक मुकाबला करवाया। इसमें हर बच्चे ने अपने गुब्बारे के साथ अपना नाम लिखा हुआ पोस्टकार्ड बाँधकर उसे हवा में छोड़ा। फरहान का गुब्बारा सबसे दूर गया और उसने यह मुकाबला जीत लिया। इस कामयाबी ने फरहान के अंदर नया जोश और खुद-एतमादी पैदा कर दी। उसे महसूस हुआ कि वह भी ज़िंदगी की दौड़ में दूसरों से पीछे नहीं है। उसने अज़म किया कि वह अब अपनी पढ़ाई पर भरपूर तवज्जो देगा और कामयाब इंसान बनेगा। यह कहानी सिखाती है कि मजबूरी कामयाबी की राह में रुकावट नहीं बन सकती अगर इंसान बहादुर हो।

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❤️ سبق 19 : گنگا (نظم)


यह तहरीर उर्दू अदब में तर्जुमा निगारी की रिवायत और ‘मग़रिबी इंशाइए’ के फन पर माहौल है। आगाज़ में तर्जुमा निगारी के फन पर बहस की गई है कि उर्दू अफसाने, वरक़े और नज़्म के इरतिका में तराजिम ने किस तरह बुनियाद फराहम की। फोर्ट विलियम कॉलेज से शुरू होने वाला यह सफर बीसवीं सदी तक वसीअ हुआ जिसमें अंग्रेज़ी और रूसी ज़बानों के शिह उर्दू में मुन्क़ल किए गए। तहरीर का बुनियादी महवर ‘मग़रिबी इंशाइए’ है, जिसकी तारीख सोलहवीं सदी के फ्रांसीसी अदीब माइकल डी मोंटेन से शुरू होती है। इंशाइए का लफ्ज़ी मतलब ‘कोशिश’ है और यह एक ऐसी सन्फ है जिसमें अदीब अपने शख्सी तास्सुरात, जज़्बात और फलसफियाना ख्यालात को बे-तकल्लुफ अंदाज़ में पेश करता है। अंग्रेज़ी अदब में फ्रांसिस बेकन ने अपने शाहकार इंशाइयों के ज़रिए इस सन्फ को बुलंदियों तक पहुँचाया। बेकन के इलावा स्टील, एडिसन, ऑलिवर गोल्डस्मिथ और सैमुअल जॉनसन की खिदमात का भी ज़िक्र किया गया है। चार्ल्स लैम्ब को उनकी लताफ़त-ए-बयान की वजह से ‘इंग्लिश इंशाइयों का शहज़ादा’ कहा गया है। जदीद दौर में टी एस एलियट ने इंशाइए निगारी को तन्कीदी शुऊर से हमकिनार किया। यह पूरा मज़मून अंदरजीत लाल की तन्कीदी बसीरत का अक्स है जिसे सलीम आगा क़ज़लबाश ने उर्दू क़ालिब में ढालकर उर्दू अदब के सरमाए में इज़ाफ़ा किया है।

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❤️ سبق 20 : ملا نصیرالدین (نثر)


यह मज़मून उर्दू अदब में तर्जुमा निगारी की अहमियत और ‘मग़रिबी इंशाइए’ के इरतिका का इहाता करता है। इब्तिदा में उर्दू अदब की तरक्की में तराजिम के तारीखी करदार, फोर्ट विलियम कॉलेज की खिदमात और बीसवीं सदी में मुख्तलिफ आलमी ज़बानों से उर्दू में होने वाले तराजिम का ज़िक्र किया गया है। मज़मून के मर्कज़ी हिस्से में इंशाइए की सन्फ का जायज़ा लिया गया है, जो फ्रांसीसी लफ़्ज़ ‘एसाई’ से माखूज़ है, जिसके मानी ‘कोशिश’ के हैं। इस सन्फ की बुनियाद सोलहवीं सदी में फ्रांसीसी अदीब माइकल डी मोंटेन ने रखी थी। बाद में, अंग्रेज़ी अदब में फ्रांसिस बेकन ने इसे नई जहत बख्शी और अपने मुख्तसर इंशाइयों से मकबूल बनाया। तहरीर में रिचर्ड स्टील, एडिसन, ऑलिवर गोल्डस्मिथ और चार्ल्स लैम्ब जैसे नामवर मग़रिबी इंशाइए निगारों के अंदाज़ और खिदमात का तज़करा शामिल है। चार्ल्स लैम्ब को ‘इंग्लिश इंशाइयों का शहज़ादा’ कहा जाता है। बीसवीं और बीसवीं सदी में जॉन रस्किन और टी एस एलियट ने इस सन्फ को मुज़ीद वसअत दी और इसे जदीद तन्कीदी व फलसफियाना रंग अता किया। मजमूई तौर पर यह मज़मून इंशाइए की सन्फ के तारीखी सफर और उसके फन्नी महासिन को वाजेह करता है, जिससे उर्दू में इस सन्फ की तफहीम आसान हो जाती है।

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❤️ سبق 20 (الف) : نوشیرواں اور نعرہ


यह बाब ‘मग़रिबी इंशाइए’ के उनवान से उर्दू अदब में तर्जुमा निगारी और इंशाइए की सन्फ की अहमियत पर रोशनी डालता है। मतन का आगाज़ तर्जुमा निगारी के फन से होता है, जहाँ यह बताया गया है कि उर्दू अदब के मजमूई इरतिका में तराजिम का कलीदी करदार रहा है। फोर्ट विलियम कॉलेज से शुरू होने वाली यह रिवायत बीसवीं सदी तक मुज़ीद मुस्तहकम हुई, जिससे उर्दू अफसाने और दूसरी असनाफ को नई वसअत मिली। इसके बाद इंशाइए की सन्फ का तफ्सीली तारीखी जायज़ा लिया गया है। इंशाइए का लफ्ज़ फ्रांसीसी लफ्ज़ ‘एसाई’ (Essai) से निकला है जिसके मानी ‘कोशिश’ के हैं। इस सन्फ की बुनियाद सोलहवीं सदी में मअरूफ फ्रांसीसी अदीब माइकल डी मोंटेन ने रखी थी। बाद अज़ाँ, अंग्रेज़ी अदब में फ्रांसिस बेकन ने इसे नई जहत बख्शी और अपने मुख्तसर इंशाइयों से मकबूल बनाया। बेकन के इंशाइए अपने इख्तिसार और हकीमाना अंदाज़ के लिए मशहूर हैं, जबकि चार्ल्स लैम्ब को उनकी लताफ़त-ए-बयान की वजह से ‘इंग्लिश इंशाइयों का शहज़ादा’ कहा जाता है। मज़मून के आखिर में यह वाजेह किया गया है कि एक कामयाब इंशाइया महज सरसरी तहरीर नहीं बल्कि संजीदा फिक्र और गहरी सोच का मुतकाज़ी फन है। अंदरजीत लाल के इस मज़मून के ज़रिए मग़रिबी इंशाइयों के उर्दू तराजिम की अहमियत को उजागर किया गया है ताकि तालिब-ए-इल्म इस सन्फ के मुख्तलिफ पहलुओं और असालिब से वाकिफ हो सकें।

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Comments

  1. Setauddin says

    June 12, 2023 at 9:31 am

    Pdf

    Reply
    • bseb says

      September 10, 2023 at 10:07 am

      hey @Setauddin, how can I help you?

      Reply

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