Bihar Board Class 2 Urdu Book 2026 PDF Download
Bihar Board Class 2 Urdu Book 2026 PDF Download – इस पेज पर बिहार बोर्ड Class 2 के छात्रों के लिए “Urdu (اردو)” Textbook दिया गया है | जिसे आप अपने फ़ोन में Free Download कर सकते हैं |
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BSEB Class 2 Urdu (اردو) Textbook PDF Free Download
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❤️ پیش لفظ
यह किताब ‘गुलशन-ए-उर्दू’ दूसरी कक्षा के विद्यार्थियों के लिए बिहार राज्य पाठ्यपुस्तक निगम द्वारा तैयार की गई है। इसका मूल उद्देश्य बच्चों में उर्दू भाषा के प्रति रुचि पैदा करना और उनकी रचनात्मक क्षमताओं को विकसित करना है। किताब में आधुनिक शैक्षिक सिद्धांतों (NCF 2005 और BCF 2008) को ध्यान में रखा गया है ताकि सीखना आसान और रोचक हो। इसमें कविताएं, कहानियाँ और विभिन्न गतिविधि पत्रक शामिल हैं जो बच्चों को भाषा का सही उच्चारण, शब्दावली और वाक्य रचना सीखने में मदद करते हैं। किताब की शुरुआत में शिक्षकों के लिए विशेष दिशा-निर्देश दिए गए हैं ताकि वे शिक्षण को और प्रभावी बना सकें। इसके अलावा, किताब में सामाजिक मूल्यों, मेहनत की महिमा, और स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर आधारित सामग्री भी शामिल है, जैसे ‘मेहनत का फल’, ‘दाँतों की सफाई’, और ‘हमारे राष्ट्रीय नेता’। यह किताब न सिर्फ पढ़ने-लिखने का कौशल विकसित करती है बल्कि बच्चों के मानसिक विकास को भी जागृत करती है।
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❤️ سبق 1 : اعادہ
यह पीडीएफ दस्तावेज़ एक शैक्षिक कार्यपुस्तिका है जो दूसरी कक्षा के विद्यार्थियों के लिए उर्दू भाषा में तैयार की गई है। इस किताब का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों की उर्दू पढ़ने, लिखने और समझने की क्षमता को बेहतर बनाना है। किताब में विभिन्न विषय जैसे जानवर, उनके घर, खाने-पीने की चीज़ें, फूल, सब्ज़ियाँ और घर के सामान से संबंधित अभ्यास शामिल हैं। इसमें अक्षरों को जोड़ने, उन्हें पहचानने और सुंदर लिखावट सीखने की गतिविधियाँ दी गई हैं। इसके अलावा, एक भाग ‘मेले’ के बारे में है जहाँ बच्चों से उनके अनुभवों, पसंदीदा खिलौनों और मिठाइयों के बारे में प्रश्न पूछे गए हैं। शिक्षकों के लिए हर पृष्ठ पर शिक्षण दिशा-निर्देश दिए गए हैं ताकि वे बातचीत के माध्यम से बच्चों की समझ को स्पष्ट कर सकें। यह कार्यपुस्तिका चित्रों और व्यावहारिक अभ्यासों के माध्यम से बच्चों की भाषाई क्षमताओं को मज़बूत करने का एक उत्तम साधन है।
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❤️ سبق 2 : میں تو سو رہی تھی (تصویری کہانی)
यह पुस्तिका दूसरी कक्षा के उर्दू पाठ्यक्रम का हिस्सा है, जिसका केंद्रीय विषय एक सुंदर कहानी ‘मैं तो सो रही थी’ है। इस कहानी के माध्यम से बच्चों को विभिन्न जानवरों और पक्षियों की आवाज़ों और उनकी पहचान से परिचित कराया गया है। कहानी में एक बच्ची का ज़िक्र है जो सो रही होती है और बार-बार बिल्ली, चिड़िया, कुत्ता, मुर्गा और कोयल अपनी विशेष आवाज़ों में उसे जगाते हैं। आखिर में उसकी माँ ‘उठ बेटी उठ’ कहकर उसे जगाती है। इस पुस्तिका में सिर्फ कहानी ही शामिल नहीं है बल्कि बच्चों के मानसिक विकास के लिए विभिन्न गतिविधियाँ भी दी गई हैं। इनमें सुंदर लिखाई, शब्दों को जोड़ना, पुल्लिंग से स्त्रीलिंग बनाना, और चित्रों में रंग भरना शामिल है। इसके अलावा, बच्चों को अच्छी आदतों, जैसे समय पर उठना और माँ के महत्व के बारे में भी सिखाया गया है। शिक्षण दिशा-निर्देशों के माध्यम से शिक्षकों को प्रोत्साहित किया गया है कि वे बच्चों को लय और उत्साह के साथ पढ़ाएँ ताकि वे रुचि के साथ भाषा सीख सकें। यह सामग्री बुनियादी उर्दू शब्दावली, वाक्य रचना और जानवरों की बोलियों की पहचान के लिए बेहतरीन है।
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❤️ سبق 3 : پیڑ (تصویری کہانی)
यह पुस्तक मूल रूप से एक चित्र कहानी है जिसका शीर्षक ‘पेड़ हो सकता है?’ है। यह पुस्तक दूसरी कक्षा के बच्चों के लिए उर्दू भाषा में लिखी गई है और इसका उद्देश्य पेड़ों के महत्व और उनके विभिन्न लाभों से अवगत कराना है। कहानी में बताया गया है कि एक पेड़ पक्षियों के लिए घोंसला बनाने की जगह, बच्चों के लिए झूलने और खेलने की जगह, और जानवरों के लिए आराम करने की जगह हो सकता है। इसके अलावा, पेड़ हमें फल प्रदान करते हैं, बारिश और धूप से बचाते हैं, और ये ‘जीवन से भरी जगह’ हैं। पुस्तक में विभिन्न गतिविधियाँ भी शामिल हैं जैसे चित्रों को देखकर काम लिखना, अक्षरों को जोड़ना, समान और विपरीत अर्थ वाले शब्द लिखना, और वाक्य बनाना। यह बच्चों को न सिर्फ भाषा सीखने में मदद करती है बल्कि उन्हें पर्यावरण की सुरक्षा और पेड़ों की देखभाल के लिए भी प्रेरित करती है। इसमें शिक्षकों के लिए भी दिशा-निर्देश दिए गए हैं ताकि वे बच्चों को व्यावहारिक रूप से इन अवधारणाओं से परिचित करा सकें। कुल मिलाकर, यह पुस्तक बच्चों को प्रकृति से जोड़ने और उनकी रचनात्मक क्षमताओं को जगाने का एक बेहतरीन साधन है।
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❤️ سبق 4 : جاڑا (نظم)
यह पुस्तिका दूसरी कक्षा के विद्यार्थियों के लिए उर्दू भाषा में तैयार की गई है, जिसका केंद्रीय विषय ‘जाड़ा’ यानी सर्दी का मौसम है। इसमें एक सुंदर कविता के माध्यम से सर्दी के मौसम की विशेषताएँ बताई गई हैं, जैसे कि ठंडी हवाओं का चलना, लोगों का काँपना, और गर्म कपड़ों का उपयोग। कविता में बताया गया है कि जाड़े में सूरज जल्दी ढल जाता है और ऐसा लगता है जैसे सारे शरीर में बर्फ भर गई हो। पुस्तक में विभिन्न शैक्षिक गतिविधियाँ भी शामिल हैं, जिनमें प्रश्नोत्तरी, रिक्त स्थान भरना, और मौसम के अनुसार वस्त्र (जैसे मफलर, स्वेटर, ऊनी टोपी) की पहचान करना शामिल है। इसके अलावा, बच्चों को अक्षर जोड़कर शब्द बनाने, समान ध्वनि वाले शब्द सीखने, और विपरीत अर्थ वाले शब्द लिखने के अभ्यास दिए गए हैं। पुस्तक में विभिन्न मौसमों (जैसे गर्मी, बरसात, बसंत) की तुलना की गई है और जाड़े में मनाए जाने वाले त्योहारों जैसे दिवाली का ज़िक्र भी मिलता है। इसका उद्देश्य बच्चों को रोचक तरीके से मौसमों के बदलाव, उर्दू शब्दावली, और रोजमर्रा के जीवन पर मौसम के प्रभाव से परिचित कराना है। शिक्षकों के लिए भी निर्देश हैं कि वे बच्चों को लय के साथ कविता सुनाएँ और बातचीत के माध्यम से उनके मानसिक विकास को बढ़ावा दें।
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❤️ سبق 5 : محنت کا پھل (نثر)
यह कहानी एक बादशाह और एक बूढ़े किसान के आपसी संवाद पर आधारित है। एक बार एक बादशाह गाँव से गुज़र रहा था तो उसने देखा कि एक बूढ़ा व्यक्ति आम का पौधा लगा रहा है। बादशाह ने हैरानी से पूछा कि जब इस पौधे को फल लगने में बीस साल लगेंगे और शायद तब तक तुम जीवित भी नहीं रहोगे, तो इसे लगाने का क्या फायदा? बूढ़े ने बड़ी दूरदर्शिता से जवाब दिया कि जिस तरह मेरे बुजुर्गों के लगाए पेड़ों के फल में खा रहा हूँ, उसी तरह मेरे लगाए पौधों के फल आने वाली पीढ़ियाँ खाएँगी। बादशाह इस जवाब से बेहद प्रभावित हुआ और उसने बूढ़े को इनाम दिया। इनाम पाकर बूढ़ा मुस्कुराया और कहा कि मुझे अपनी मेहनत का फल आज ही मिल गया। इस कहानी का सबक यह है कि मेहनत कभी बेकार नहीं जाती और हमें भविष्य की पीढ़ियों की बेहतरी के लिए काम करना चाहिए। यह शिक्षाप्रद कहानी निस्वार्थ भावना, दूरदर्शिता और कड़ी मेहनत के महत्व को सिखाती है कि इंसान को सिर्फ अपने निजी फायदे के लिए नहीं बल्कि दूसरों की भलाई के लिए भी प्रयास करना चाहिए।
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❤️ سبق 6 : پیاری گاے (نظم)
कविता ‘प्यारी गाय’ अल्लाह की नेमतों का शुक्रिया अदा करने का पाठ देती है, जिसने गाय जैसे सुंदर और उपयोगी प्राणी पैदा किए। यह कविता गाय की विशेषताओं और उसके फायदों को बड़ी खूबसूरती से बयान करती है। गाय एक बहुत सहनशील जानवर है जो हरा चारा, भूसा और घास खुशी-खुशी खा लेती है। वह हमें दूध जैसी महान नेमत प्रदान करती है, जिससे दही, मक्खन और दूसरी चीज़ें बनती हैं। गाय के बछड़े बड़े होकर बैल बनते हैं जो खेती-बाड़ी और किसानों के काम आते हैं। कविता में चरवाहे और हरियाली का ज़िक्र भी शामिल है, जो देहाती जीवन का प्रतिबिंब दर्शाता है। इस पाठ का उद्देश्य बच्चों को जानवरों के महत्व, उनका चारा और उनसे मिलने वाले फायदों से अवगत कराना है। साथ ही यह कविता अल्लाह की प्रशंसा और उसकी दी हुई नेमतों की क़दर करने की प्रेरणा देती है। इसमें विभिन्न गतिविधियाँ भी शामिल हैं जिनसे बच्चों की शब्दावली और व्याकरण में वृद्धि होती है।
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❤️ سبق 7 : مرغا اور لومڑی (نثر)
यह कहानी एक चतुर मुर्गे और एक चालाक लोमड़ी के इर्द-गिर्द घूमती है। मुर्गा एक पेड़ की ऊँची डाल पर बैठकर बाँग दे रहा था कि एक लोमड़ी वहाँ से गुज़री। मुर्गे को देखकर लोमड़ी के मुँह में पानी आ गया और उसने मुर्गे को नीचे उतारने के लिए एक चाल चली। उसने झूठ बोला कि जंगल के सभी जानवरों ने अब मिल-जुलकर रहने का फैसला किया है, इसलिए अब किसी को किसी से डरने की ज़रूरत नहीं है। मुर्गा लोमड़ी की चालाकी समझ गया और उसने चतुराई से जवाब दिया कि यह तो बहुत अच्छी खबर है, और साथ ही दूर से आते शिकारी कुत्तों का ज़िक्र कर दिया। शिकारी कुत्तों का नाम सुनते ही लोमड़ी घबरा गई और वहाँ से भागने लगी। जब मुर्गे ने उसे रोकना चाहा तो लोमड़ी ने बहाना बनाया कि शायद उन कुत्तों ने अभी तक यह शांति की खबर नहीं सुनी होगी। इस तरह मुर्गे ने अपनी सूझ-बूझ और समझदारी से अपनी जान बचा ली। यह कहानी हमें सिखाती है कि दुश्मन की बातों में आकर अपनी सुरक्षा से लापरवाह नहीं होना चाहिए और मुश्किल वक्त में दिमाग़ का इस्तेमाल करना चाहिए।
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❤️ سبق 8 : سبزی والا (نظم)
यह पुस्तिका दूसरी कक्षा के विद्यार्थियों के लिए एक उर्दू कविता ‘सब्ज़ी वाला’ पर आधारित शैक्षिक सामग्री प्रस्तुत करती है। कविता में एक सब्ज़ी वाले का ज़िक्र है जो गलियों में आवाज़ लगाकर विभिन्न सब्ज़ियाँ जैसे आलू, गोभी, टमाटर, गाजर, मूली, धनिया, पालक और बैंगन बेचता है। कविता के माध्यम से बच्चों को सब्ज़ियों के नामों, उनके रंगों और स्वादों से परिचित कराया गया है। पुस्तिका में विभिन्न गतिविधियाँ शामिल हैं, जिनमें अक्षरों को पहचानना, चित्रों की मदद से रिक्त स्थान भरना, और सब्ज़ियों के नामों को उनके सही रंगों से मिलाना शामिल है। इसके अलावा, एकवचन से बहुवचन बनाने, कच्ची और पक्की जाने वाली सब्ज़ियों में अंतर करने, और कविता के अंश पूरे करने जैसी गतिविधियाँ भी दी गई हैं। यह सामग्री न सिर्फ बच्चों की उर्दू शब्दावली में इज़ाफा करती है बल्कि उन्हें रोज़मर्रा के जीवन में प्रयोग होने वाली चीज़ों और उनके खरीदने-बेचने के तरीके से भी रूबरू कराती है। शिक्षकों के लिए विशेष दिशा-निर्देश भी दर्ज हैं ताकि वे विद्यार्थियों को रुचिकर ढंग से पढ़ा सकें।
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❤️ سبق 9 : کملا چاچی (نثر)
यह कहानी दो दोस्तों, मदन और नदीम, और उनकी पड़ोसन कमला चाची के इर्द-गिर्द घूमती है। मदन और नदीम गहरे दोस्त हैं जो रोज़ाना शाम को खेल-कूद के बाद कमला चाची से मिलने जाते हैं। चाची एक बूढ़ी और मेहरबान महिला हैं जो बच्चों को गुड़ और सत्तू खिलाती हैं और उन्हें दिलचस्प कहानियाँ सुनाती हैं, जिसकी वजह से मोहल्ले के सारे बच्चे उनसे बहुत प्यार करते हैं। एक दिन जब मदन और नदीम चाची के घर पहुँचे तो उन्होंने देखा कि वह तेज़ बुखार से पीड़ित हैं। दोनों दोस्त फौरन अपने माता-पिता को बुला लाए। नदीम के पिता डॉक्टर को लेने गए जबकि मदन की माँ ने चाची के सिर पर ठंडे पानी की पट्टियाँ रखीं। नदीम की माँ ने उनके लिए जौ का दलिया (जौ का दलिया) तैयार किया। सबकी देखभाल और समय पर इलाज से चाची का बुखार उतर गया और वह अगले दिन पूरी तरह ठीक हो गईं। स्वस्थ होने के बाद उन्होंने बच्चों को फिर से गुड़-सत्तू खिलाया और ढेर सारी दुआएँ दीं। यह कहानी पड़ोसियों के अधिकारों, आपसी हमदर्दी और मुश्किल वक्त में एक-दूसरे की मदद करने के खूबसूरत जज़्बे को उजागर करती है।
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❤️ سبق 10 : دیوالی (نظم)
यह पुस्तिका उर्दू भाषा में दिवाली के त्योहार पर आधारित एक सुंदर कविता और उससे संबंधित विभिन्न शैक्षिक गतिविधियों पर समग्र रूप से केंद्रित है। कविता में दिवाली की खुशियों, दीपों, और मेल-मिलाप का ज़िक्र है, जिसमें बच्चे जैसे राजू, अकबर, ज़ीनत और राधा मिलकर दीप जलाते, मिठाइयाँ खाते और एक-दूसरे को गले लगाते हैं। कविता के माध्यम से बच्चों को आपसी भाईचारे और खुशियाँ मनाने का संदेश दिया गया है। पुस्तिका में कविता के अलावा कहानी के कुछ हिस्से भी शामिल हैं, जैसे कमला चाची की देखभाल का वाक़या, जो बच्चों में हमदर्दी और सेवा भावना पैदा करता है। साथ ही, पुस्तक में उर्दू भाषा की क्षमता को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न गतिविधियाँ दी गई हैं, जिनमें अक्षरों को पहचानना, रिक्त स्थान भरना, चित्रों की मदद से वाक्य बनाना, और विलोम शब्द लिखना शामिल है। यह सामग्री दूसरी कक्षा के विद्यार्थियों के लिए तैयार की गई है ताकि वे रुचिकर ढंग से उर्दू सीखने के साथ-साथ सांस्कृतिक त्योहारों के महत्व को भी समझ सकें। कुल मिलाकर, यह पुस्तिका बच्चों की भाषाई और नैतिक शिक्षा के लिए एक बेहतरीन साधन है।
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❤️ سبق 11 : چن من (تصویری کہانی)
यह कहानी एक छोटे और शरारती चूज़े ‘चन मन’ की है जो अपनी माँ (मुर्गी) के साथ रहता था। एक दिन चन मन ने अपनी माँ की नसीहत को नज़रअंदाज करते हुए मुर्गी के चलकर खाने के लिए दूर निकल गया। इसी दौरान मुर्गी का एक दाना उसके गले में फँस गया, जिसकी वजह से वह तकलीफ में रोने लगा। मुर्गी ने अपने बच्चे की मदद करने की कोशिश की लेकिन उसकी चोंच छोटी थी, इसलिए वह दाना नहीं निकाल सकी। मुर्गी मदद के लिए अपने दोस्त बगुले के पास गई, जिसने अपनी लंबी चोंच के ज़रिए चन मन के गले से दाना निकालकर उसकी जान बचाई। इस घटना के बाद चन मन को अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने वादा किया कि वह हमेशा अपनी माँ की बात मानेगा और कभी उससे बिना कहे कहीं नहीं जाएगा। यह कहानी बच्चों को माता-पिता की बात मानने और सावधानी बरतने का सबक देती है। यह पाठ उर्दू भाषा में दूसरी कक्षा के विद्यार्थियों के लिए तैयार किया गया है जिसमें कहानी के साथ-साथ शब्दावली निर्माण और प्रश्नोत्तर जैसी गतिविधियाँ भी शामिल हैं।
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❤️ سبق 12 : کہلآؤگے تم ہوشیار (نظم)
यह पुस्तिका दूसरी कक्षा के बच्चों के लिए उर्दू भाषा में सड़क पार करने के आदाब और यातायात नियमों के बारे में एक शैक्षिक सामग्री है। इसमें एक कविता के माध्यम से बच्चों को सिखाया गया है कि सड़क पार करते वक्त किन बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है। कविता में हिदायत दी गई है कि सड़क पार करने से पहले पहले अपने दाईं ओर देखें, फिर बाईं ओर देखें, और अगर हॉर्न या घंटी की आवाज़ सुनाई दे तो फौरन रुक जाएँ। जब सड़क बिल्कुल साफ़ हो जाए और कोई गाड़ी नज़र न आए, तभी संभलकर सड़क पार करनी चाहिए। जो बच्चा इन नियमों पर अमल करता है, उसे ‘होशियार’ कहा जाता है। पुस्तिका में विभिन्न गतिविधियाँ भी शामिल हैं, जैसे प्रश्नोत्तर, रिक्त स्थान भरना, अक्षरों को जोड़कर शब्द बनाना, और समानार्थी व विलोम शब्दों की पहचान। इसका उद्देश्य बच्चों की उर्दू भाषा की मेहारत को बेहतर बनाने के साथ-साथ उनमें सामाजिक चेतना और सुरक्षा के एहसास को जगाना है। इसमें सुंदर लिखावट और वर्तनी की शुद्धता पर भी विशेष ज़ोर दिया गया है ताकि बच्चे भाषा को सही तरीके से लिखना और पढ़ना सीख सकें।
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❤️ سبق 13 : شیر شاہ کا مقبرہ (نثر)
यह पाठ शेरशाह सूरी और उनके मकबरे के बारे में है, जो बिहार के शहर सासाराम में स्थित है। शेरशाह के बचपन का नाम फरीद खान था और एक शेर को मारने की वजह से वह शेर खान के नाम से मशहूर हुए। उन्होंने मुगल बादशाह हुमायूँ को हराकर दिल्ली की तख़्त पर क़ब्ज़ा किया और हिंदुस्तान के बादशाह बने। शेरशाह एक महान विद्वान और जनता के हितैषी शासक थे जिन्होंने अपने पाँच साल की संक्षिप्त सल्तनत में सड़कें, मुसाफ़िरखाने और कुँए बनवाए, और वजन-तौल का बेहतरीन तरीका कायम किया। उनका मकबरा लाल पत्थरों से बना एक खूबसूरत इमारत है जो एक विशाल तालाब के बीच में स्थित है। यह मकबरा उन्होंने अपनी ज़िंदगी में ही बनवाया था जहाँ एक हादसे में मौत के बाद उन्हें दफ़नाया गया। यह पाठ विद्यार्थियों को शेरशाह की शख्सियत, उनके जनहित के कामों और उनके ऐतिहासिक महत्व से रूबरू कराता है।
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❤️ سبق 14 : دانتوں کی صفائی (نظم)
यह पुस्तिका बच्चों के लिए लिखी गई एक सुधारात्मक और शैक्षिक कविता ‘दाँतों की सफाई’ पर आधारित है, जिसका उद्देश्य बच्चों को स्वास्थ्य और स्वच्छता के महत्व से परिचित कराना है। कविता के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि सुबह उठकर दाँत साफ करने से न सिर्फ दाँत चमकदार होते हैं बल्कि मुँह की बदबू भी दूर होती है। पुस्तक में दाँतों को मज़बूत बनाने के लिए सेहतमंद आहार जैसे दूध, दही, मूली, पालक, गाजर और हरी सब्ज़ियों के इस्तेमाल पर ज़ोर दिया गया है। इसमें बच्चों को सिखाया गया है कि हर खाने के बाद कुल्ला करना और दाँतों की हिफ़ाज़त करना क्यों ज़रूरी है ताकि कीड़ों से बचा जा सके। कविता के अलावा इसमें विभिन्न गतिविधियाँ भी शामिल हैं, जैसे सही शब्दों का चुनाव, चित्रों की मदद से वाक्य बनाना, और एकवचन-बहुवचन की पहचान। शिक्षकों के लिए दिशा-निर्देश भी दिए गए हैं कि वे बच्चों को लय और जोश के साथ कविता सुनाएँ ताकि वे दाँतों की सफाई और अच्छी सेहत के सिद्धांतों को रुचि के साथ सीख सकें। कुल मिलाकर यह एक बेहतरीन शैक्षिक सामग्री है जो बच्चों के शारीरिक विकास और व्यक्तिगत स्वच्छता की आदतों को बेहतर बनाने में मददगार साबित होती है।
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❤️ سبق 15 : ہمارے قومی رہنما (نثر)
यह पाठ हमारे देश के महान राष्ट्रीय नेता और आज़ाद हिंदुस्तान के पहले शिक्षा मंत्री, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की ज़िंदगी के एक रोचक पहलू पर आधारित है। बंगाल के एक सम्मानित परिवार में पले-बढ़े मौलाना के घर का माहौल धार्मिक था, जहाँ सिर्फ अरबी और फ़ारसी भाषाओं में शिक्षा की इजाज़त थी। उर्दू पढ़ना उनके घर में मना था, लेकिन मौलाना को उर्दू भाषा से दिलचस्पी थी। वे चोरी-चोरी, कभी रज़ाई में दुबककर तो कभी तेल के दीपक की रोशनी में उर्दू की किताबें पढ़ लेते थे। एक बार इस कोशिश में उनकी रज़ाई भी जल गई और उन्हें डाँट भी सुननी पड़ी। कम रोशनी में पढ़ने की वजह से उनकी आँखों पर भी असर पड़ा, लेकिन उनका शौक कम नहीं हुआ। मौलाना आज़ाद 11 नवंबर 1888 को मक्का में पैदा हुए और हिंदुस्तान की आज़ादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई। यह पाठ बच्चों को उनकी मेहनत, शौक और देश के प्रति उनकी सेवाओं से रूबरू कराता है। इसके अलावा, किताब के दूसरे हिस्सों में पठन अभ्यास, दिशाओं की पहचान और बुनियादी उर्दू व्याकरण की गतिविधियाँ भी शामिल हैं जो बच्चों के शैक्षिक विकास में मददगार हैं।
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